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Tuesday, February 10, 2026
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उत्तराखंड में आयुष्मान का लाभ यूपी के मरीजों को अब केवल इस कार्ड के साथ मिलेगा

उत्तराखंड में यूपी के मरीजों के लिए आयुष्मान योजना का लाभ अब श्रमिक कार्ड पर निर्भर, फर्जीवाड़े पर लगी लगाम

देहरादून। उत्तराखंड के अस्पतालों में अब उत्तर प्रदेश से आने वाले मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज तभी मिलेगा, जब उनके पास श्रमिक कार्ड होगा। यह नई व्यवस्था प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई है। बिना श्रमिक कार्ड के मरीजों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज की सुविधा नहीं दी जाएगी और उन्हें निजी खर्च पर उपचार कराना होगा।

फर्जी कार्डों से अस्पतालों को हुआ नुकसान

यह निर्णय पिछले कुछ वर्षों में सामने आए आयुष्मान योजना से जुड़ी गड़बड़ियों और फर्जीवाड़ों के चलते लिया गया है। उत्तराखंड के कई अस्पतालों में यह पाया गया कि उत्तर प्रदेश से आने वाले कई मरीजों ने फर्जी आयुष्मान कार्ड का उपयोग कर योजना का अनुचित लाभ उठाया। इससे अस्पतालों को निर्धारित भुगतान नहीं मिल पाया और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

इस स्थिति के चलते कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों ने यूपी के मरीजों के लिए आयुष्मान योजना के तहत इलाज देना बंद कर दिया था। केवल आपातकालीन मामलों में ही छूट दी जाती रही। अब इन समस्याओं के समाधान और योजनागत पारदर्शिता के लिए श्रमिक कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है

दून अस्पताल में हर दिन आते हैं यूपी से मरीज

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.एस. बिष्ट ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 65 से 70 मरीज आयुष्मान योजना के तहत भर्ती होते हैं, जिनमें करीब 10 मरीज उत्तर प्रदेश से आते हैं। अब इन मरीजों को पहले से यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास वैध श्रमिक कार्ड हो, क्योंकि सॉफ़्टवेयर में योजना की मंज़ूरी तभी मिलती है जब कार्ड की जानकारी पोर्टल पर अपडेट हो।

डॉ. बिष्ट ने कहा कि यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर तय की गई है और अब मरीजों का डाटा तभी स्वीकृत होता है जब वह सत्यापित और पंजीकृत हो। इससे फर्जी कार्डों के प्रयोग की गुंजाइश नहीं रहेगी।

देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर पर सबसे अधिक प्रभाव

उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और पौड़ी जैसे ज़िले यूपी से सटे हैं, जहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। पहले इन्हें आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज में कोई अड़चन नहीं होती थी, लेकिन अब श्रमिक कार्ड की अनिवार्यता के कारण उन्हें अपनी पात्रता प्रमाणित करनी होगी।

सुव्यवस्था और पारदर्शिता की दिशा में कदम

नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य न केवल योजना के दुरुपयोग को रोकना है, बल्कि वास्तव में पात्र और ज़रूरतमंद श्रमिकों को इस सुविधा का लाभ देना है। आयुष्मान योजना गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा कवच है, जिसे पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करना आवश्यक है

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