राहुल का ‘पीए’ बनकर ठग ने उत्तराखंड में किया बड़ा खेल

खेला- कांग्रेस में उलट पुलट व टिकट दिलाने के नाम पर बनाया मूरख

गिरफ्तार ठग अन्य राज्यों के नेताओं को भी ‘लपेट’ चुका है

देहरादून। असली खेला तो उत्तराखण्ड में हुआ। फर्जी आया और चूना लगाया। अब सलाखों के पीछे है। खुद को राहुल गांधी का पीए कनिष्क बताया और सोशल मीडिया में अति सक्रिय महिला नेत्री से लाखों लूट लिए। यही नहीं, कुछ अन्य नेत्रियों को भी झांसे में लेकर टिकट दिलवाने का भरोसा दिया।

दून पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद पता चलेगा कि किस किस से फर्जी गैंग ने माल लूटा।
अभी तक की जांच में सामने आया है कि इस फर्जी ने महिला नेत्री भावना पांडे और कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद के सम्पर्क में था।

भावना ने बताया कि ठग ने उन्हें गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटवाने और प्रीतम या यशपाल को अध्यक्ष बनाने की बात भी बताई थी।

खुद को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का करीबी और निजी सचिव बताने वाले आरोपी ने न सिर्फ पार्टी में पद और टिकट दिलाने का भरोसा दिया, बल्कि फोन पर कथित तौर पर वरिष्ठ नेताओं की आवाज सुनाकर पीड़ित का विश्वास भी जीत लिया। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
मामले के अनुसार, आरोपी ने देहरादून की एक महिला नेता भावना पांडे को निशाना बनाते हुए विधानसभा चुनाव और संगठन में महत्वपूर्ण पद दिलाने का लालच दिया।
इस पूरे खेल को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपी ने फोन कॉल के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं की आवाज सुनाई, जिससे पीड़िता भावना पांडे को यकीन हो गया कि वह सीधे शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी हुई है।
पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने पहले बातचीत का दायरा बढ़ाया और फिर पार्टी कार्यक्रमों, सर्वे और संगठनात्मक खर्च के नाम पर बड़ी रकम की मांग शुरू कर दी।

बताया गया कि आरोपी ने करीब 25 लाख रुपये ठग लिए। इतना ही नहीं, उसने होटल बुकिंग, नेताओं की मीटिंग और चुनावी तैयारी के नाम पर अतिरिक्त खर्च की बात भी कही, जिससे रकम और बढ़ती चली गई।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कई राज्यों में इसी तरह का नेटवर्क बना रखा था। वह अलग-अलग नामों और पहचान का इस्तेमाल कर नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को फंसाता था। पुलिस को शक है कि इस गिरोह ने करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है।
दिलचस्प पहलू यह है कि आरोपी ने पीड़िता को भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर कई बड़े नेताओं के नाम पर कॉल कराए। पीड़िता भावना पांडे ने कहा कि फोन पर सुनी गई आवाजें इतनी विश्वसनीय थीं कि उसे जरा भी संदेह नहीं हुआ। इसी भरोसे में आकर उसने बड़ी रकम दे दी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी को ट्रैक किया गया और गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में कई अहम खुलासे होने की संभावना है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और किन-किन राज्यों में इसने वारदात को अंजाम दिया।

पीड़िता भावना पांडे

ठग ने हरक,प्रीतम, यशपाल आर्य,हरदा समेत कई अन्य नेताओं से भी बात करने की कोशिश की।

पुलिस ने किया गिरफ्तार

मामले की शुरुआत 3 मई को हुई, जब वादिनी भावना पांडे ने थाना राजपुर में लिखित तहरीर दी। उन्होंने बताया कि कनिष्क सिंह नामक व्यक्ति ने खुद को एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी का निजी सचिव बताते हुए उनसे संपर्क किया। आरोपी ने उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिलाने और उत्तराखंड में सर्वे कराने का झांसा दिया तथा इसके एवज में 25 लाख रुपये की मांग की।

एसएसपी डोभाल ने बताया कि 13 अप्रैल 2026 को आरोपी ने अपने एक सहयोगी को जाखन स्थित पीनाकिल रेजिडेंसी में उनके आवास पर भेजा, जहां से 25 लाख रुपये नकद ले लिए गए। रकम लेने के बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया और संपर्क से बाहर हो गया। बाद में जानकारी करने पर पता चला कि वह पहले भी कई राज्यों में इस तरह की ठगी कर चुका है।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की पहचान और लोकेशन ट्रेस की।
जांच के दौरान सूचना मिली कि आरोपी जाखन क्षेत्र में एक अन्य व्यक्ति से पैसे लेने आने वाला है। इस पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना असली नाम गौरव कुमार (उम्र 42 वर्ष) निवासी अमृतसर, पंजाब बताया। उसने खुलासा किया कि वह इंटरनेट और गूगल के माध्यम से राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं और उनके सहयोगियों की जानकारी जुटाता था।
इसके बाद वह कनिष्क सिंह के नाम से ट्रूकॉलर पर फर्जी पहचान बनाकर लोगों को विश्वास में लेता था।
आरोपी ने अपने तीन साथियों—छज्जू, रजत मदान और मनिंदर सिंह कालू—के साथ मिलकर कई राज्यों में ठगी की वारदातों को अंजाम दिया।
वर्ष 2017 में जयपुर (राजस्थान) में दो नेताओं से विधायक का टिकट दिलाने के नाम पर 1 करोड़ 90 लाख और 12 लाख रुपये ठगे गए। वहीं, वर्ष 2025 में पटना (बिहार) में एक नेता से 3 लाख रुपये लिए गए।
पुलिस के अनुसार आरोपी के उत्तराखंड में भी कई वरिष्ठ नेताओं से संपर्क होने की जानकारी मिली है। अन्य राज्यों में हुई ठगी की घटनाओं के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और एक डोंगल बरामद किया गया है।

ठगी के जाल में बड़े नामों का इस्तेमाल: भरोसा जीतने के लिए नेताओं की ‘आवाज’ बनी

“गणेश गोदियाल से लेकर प्रीतम सिंह तक के नाम लिए, फोन कॉल ने पीड़िता का भरोसा पुख्ता किया

हाई-प्रोफाइल ठगी के इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी ने पीड़िता का भरोसा जीतने के लिए प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं के नाम और कथित आवाज का सहारा लिया। यही वजह रही कि पूरा मामला लंबे समय तक संदेह से परे रहा और पीड़िता ठगी के जाल में फंसती चली गई।
आरोपी ने बातचीत के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के नाम लेकर अपनी पहुंच का दावा किया। पीड़िता भावना पांडे को विश्वास दिलाने के लिए जिन नेताओं का जिक्र किया गया, उनमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और नेता प्रदीप टम्टा जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने फोन कॉल के दौरान इन नेताओं की आवाज सुनवाई, जिससे उसे लगा कि वह वास्तव में शीर्ष नेतृत्व से सीधे जुड़ी बातचीत कर रही है। यही वह बिंदु था, जहां से उसका भरोसा पूरी तरह मजबूत हो गया।

पीड़िता भावना पांडे ने बताया कि आरोपी कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद के संपर्क में था और दोनों की लंबी बातचीत होती रही है।
भावना से भी ठग ने कई बड़े-बड़े दावे किए। भावना ने बताया कि ठग से उनकी गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटवाने और प्रीतम या यशपाल को अध्यक्ष बनाने की बात बताई थी।

खबर में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने केवल नाम लेने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उसने इन नेताओं से बातचीत कराने का आभास पैदा किया। कुछ मामलों में स्क्रीनशॉट भेजे गए, जिनमें नेताओं के नाम से कथित मैसेज दिखाए गए। हालांकि, बाद में जांच में यह सब फर्जी साबित हुआ।

इतना ही नहीं, आरोपी ने संगठनात्मक गतिविधियों और टिकट वितरण के नाम पर यह भी कहा कि “ऊपर तक बात हो चुकी है” और “नेताओं की सहमति मिल चुकी है।” इस तरह के दावों ने पीड़िता को पूरी तरह आश्वस्त कर दिया कि मामला असली है और उसे जल्द ही पार्टी में बड़ा पद मिल सकता है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई अन्य लोगों को भी इसी तरह नेताओं के नाम और प्रभाव का डर या लालच दिखाकर ठगा। वह अलग-अलग राज्यों में अलग पहचान बनाकर काम करता था और हर जगह स्थानीय व राष्ट्रीय नेताओं के नामों का इस्तेमाल करता था।

फिलहाल,पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस गिरोह ने और भी नेताओं के नाम का दुरुपयोग तो नहीं किया। साथ ही, जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनकी ओर से भी इस मामले में स्पष्टीकरण आने की संभावना है।

इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। यह मामला न सिर्फ ठगी का है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह फर्जी पहचान और तकनीक का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों और खासतौर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी है कि किसी भी प्रकार के पद, टिकट या सिफारिश के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।

पुलिस टीम:
उपनिरीक्षक सूरज कंडारी (चौकी प्रभारी जाखन), कांस्टेबल मुकेश, कांस्टेबल ललित
एसओजी टीम:
उपनिरीक्षक संदीप कुमार, कांस्टेबल ललित, कांस्टेबल देवेंद्र

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