28 जनवरी से दौड़ेगी रफ्तार: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की एलिवेटेड रोड तैयार

28 जनवरी से एलिवेटेड रोड पर वाहन भर सकेंगे फर्राटा, 800 नाॅन स्कैटरिंग लाइटें लगेंगी

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की एलिवेटेड रोड पर 28 जनवरी से वाहन फर्राटा भर सकते हैं।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की एलिवेटेड रोड पर 28 जनवरी से वाहन फर्राटा भर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी दिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में राष्ट्रीय खेलों का शुभारंभ करेंगे।
माना जा रहा है कि तभी इस परियोजना को भी जनता को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही 12 किमी लंबे इस मार्ग पर रोमांच का सफर शुरू हो जाएगा। यह सफर इसलिए खास होगा क्योंकि यह एलिवेटेड रोड शिवालिक वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से होकर गुजर रहा है।

दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून को जोड़ने वाले इस गलियारे का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण फेस सहारनपुर के गणेशपुर से देहरादून के आशारोडी तक 12 किमी लंबा 575 पिलरों पर बना एलिवेटेड रोड है। यह एशिया का सबसे लंबा वन्य जीव गलियारा भी है।

इसकी विशेषता है यह है कि इसमें ऊपर सड़क पर 100 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन फर्राटा भरेंगे, जबकि नीचे वन्य जीवन आसानी से विचरण कर सकेंगे। यह एलिवेटेड रोड बन कर तैयार हो चुका है। इस पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के अंतर्गत कैमरे तथा इंसीडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगाने का काम अंतिम चरण में है।

पेंटिंग संबंधी कार्य भी पूरा किया जा चुका है। अक्तूबर के आखिरी में इस पर एक सप्ताह तक सभी प्रकार के वाहनों को दौड़ा कर सफल ट्रायल भी पूरा कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि 28 जनवरी को इसका उद्घाटन हो सकता है। हालांकि अधिकारिक तौर पर अभी कोई पत्र नहीं आया है।

इस एलिवेटेड रोड के खुलने के बाद देहरादून जाने वाले यात्रियों को जहां जाम से निजात मिलेगी, वहीं गणेशपुर से आशारोडी तक के जिस सफर में एक घंटा लगता है उसे केवल 15 मिनट में ही पूरा किया जा सकेगा।

800 नाॅन स्कैटरिंग लाइटें लगेंगी
वाहन चालकों की सुविधा के लिए एलिवेटेड रोड पर 800 नान स्कैटरिंग लाइटें लगेंगी। इन लाइटों को लगाने से पहले एनएचएआई द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान से मदद मांगी गई थी। तीन महीने तक संस्थान के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग लाइट लगाकर इनके प्रभाव का अध्ययन किया।

इसके लिए खासतौर पर लाइटों को तैयार किया गया। इन लाइटों की रोशनी केवल फ्लाईओवर पर रहेगी और उसका फैलाव नीचे जंगल के अंदर नहीं होगा। इससे रात्रिचर समेत अन्य वन्यजीव आसानी से विचरण कर सकेंगे। वाहनों के शोर से वन्यजीवों को बचाने के लिए एलिवेटेड रोड पर साउंड बैरियर पहले ही लगाए जा चुके हैं।

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