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Tuesday, April 14, 2026
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‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ ही भारत की असली पहचान : सीएम धामी

हरिद्वार में सद्भावना सम्मेलन

समान नागरिक संहिता और धार्मिक कॉरिडोर विकास को बताया सरकार की प्राथमिकता

देहरादून/हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित ऋषिकुल मैदान में आयोजित “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” के सद्भावना सम्मेलन एवं बैसाखी महोत्सव 2026 में प्रतिभाग करते हुए सामाजिक एकता, समरसता और मानवता का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सम्मेलन में देशभर से आए संतों, अतिथियों, माताओं, बहनों, युवाओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आपसी सद्भाव को मजबूत बनाते हैं। सतपाल महाराज के मार्गदर्शन में “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” द्वारा समाज में समरसता, सेवा और नैतिक जागरण के लिए किए जा रहे कार्यों को उन्होंने प्रेरणादायी बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व विभिन्न संघर्षों और तनावों से गुजर रहा है, ऐसे में प्रेम, सद्भाव और मानवता का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने सदैव वैश्विक स्तर पर मानवता को प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य’ की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है। कोरोना काल में वैक्सीन सहायता, योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाना तथा आपदाओं के समय सहयोग देना भारत की मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द किसी भी राष्ट्र की प्रगति के मूल आधार हैं और इसी दिशा में केंद्र व राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही हैं। प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करना सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर के विकास कार्य प्राथमिकता में हैं। साथ ही दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सद्भावना सम्मेलन समाज में एकता, सद्भाव और सेवा की भावना को और मजबूत करेगा तथा इसके सकारात्मक परिणाम दूरगामी होंगे। उन्होंने आयोजन के लिए “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” को शुभकामनाएं दीं।

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