ऐतिहासिक फैसला, कल से बंद होंगी चमोली, रूद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जनपदों में शराब की बिक्री !

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sanjay chuhaan
संजय चौहान

दिसम्बर 2016 में उच्च न्यायालय ने एक याचिकाकर्ता की सुनवाई करते हुये ऐतिहासिक निर्णय दिया था जिसमें चमोली, रूद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जनपद में अप्रैल 2017 में शराब पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने का निर्णय दिया था। अब उत्तराखंड में कल से तीन जनपदों में शराब की बिक्री नहीं होगी। जो कि स्वागतयोग्य कदम है।

गौरतलब है कि आज शराब ने पहाड़ की नीव हिला कर रख दी है। पहाड़ के घर गांवो में शराब ने इस कदर अपने पैर पसार लिए है की यहाँ की भावी पीढ़ी अपने उद्देश्य से भटक सी गई है । जिसने यहाँ के समाज का ताना बुना तबाह करके रख दिया है । फलत शराब के सेवन करने से लोगो की मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है । असमय ही लोगो के माथे का सिंदूर मिट जा रहा है। घरो के चिराग बुझ जा रहे है बच्चे अनाथ हो रहे है । जिस कारण से पहाड़ वास्तव में खोखला होता जा रहा है । शराब रूपी दानव ने पहाड़ को तबाह करके रख दिया है । इसी शराब की वजह से जिस दर्द को सास उम्रभर सालती रही उसी दर्द से बहु आज भी कराह रही है आखिर कब मुक्ति मिल पायेगी पहाड़ को शराब से –! अब तीन जनपदों में शराब बंदी से जरूर राहत मिली है।
2012 से पहले चमोली जनपद के बंड पट्टी के तमाम गांवों में जब ऐसा ही नजर आने लगा तो महिलाओं ने इस बुराई को मात देने को चुना गांधीवादी तरीका। महिलाओं की पंचायत बैठी और तय हुआ कि जो भी व्यक्ति शराब का सेवन करेगा या करवाएगा तो उसे कंडाली लगाकर दंडित करने के साथ ही 500 से लेकर 5000 रुपये तक जुर्माना भी वसूला जाएगा। यहीं से कंडाली आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसकी सूत्रधार बनी शिवा देवी। यह शिवा की पहल पर चले आंदोलन की जागरूकता का ही परिणाम है कि चमोली जिले के 100 से अधिक गांवों में लोगों ने शराब से तौबा कर ली। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे जिले से लेकर राज्य में फैलता गया। एक बार फिर कंडाली आंदोलन की यादें ताजा कर दी है।
सरकार का ये फैसला वास्तव मे स्वागतयोग्य है।

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