Category: उत्तराखंड

  • सहकारिता को नई मजबूती देने में निभाएं अहम भूमिका : सीएम

    सहकारिता को नई मजबूती देने में निभाएं अहम भूमिका : सीएम

    जिला सहकारी बैंक के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से की शिष्टाचार भेंट

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में जिला सहकारी बैंक के चुनाव में विजयी हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अपनी जीत से अवगत कराया और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने जिला सहकारी बैंक के चुनाव में विजय प्राप्त करने वाले सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि चुनाव में मिली जीत जनता एवं प्रतिनिधियों के विश्वास का प्रतीक है और इसके साथ नई जिम्मेदारी भी जुड़ी है। उन्होंने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए सहकारिता क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    धामी ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास और आर्थिक अवसरों का लाभ पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से अपने अनुभव एवं ऊर्जा का उपयोग करते हुए बैंक की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आमजन के हित में कार्य करने का आह्वान किया।

    नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री  धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे उन्हें मिली जिम्मेदारी का पूरी प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करेंगे और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सक्रियता से कार्य करेंगे।

    इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक, उत्तरकाशी की नवनिर्वाचित अध्यक्ष  शारदा राणा,  उपाध्यक्ष हरिमोहन सिंह चंद, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य  सतेंद्र राणा, नवनिर्वाचित निदेशक  जगमोहन राणा तथा भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी  मनवीर सिंह चौहान उपस्थित रहे।

  • मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगा भारत दर्शन का अवसर

    मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगा भारत दर्शन का अवसर

    भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण से विद्यार्थियों को देश की विविधता और विकास को करीब से समझने का अवसर : मुख्यमंत्री

    देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के 68 मेधावी विद्यार्थियों का दल 16 सितंबर को भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण पर होगा रवाना

    देवप्रयाग। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कीर्तिनगर विकासखंड अंतर्गत स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण के 10वें संस्करण के तहत भ्रमण पर जाने वाले 68 मेधावी विद्यार्थियों के दल से भेंट की।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी यात्रा एवं तैयारियों की जानकारी ली तथा उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों को देश की विविधता, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, तकनीक और विकास को करीब से समझने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे अनुभव विद्यार्थियों के ज्ञान को कक्षा की सीमाओं से बाहर ले जाकर उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में सहायक होते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थी भ्रमण के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं को समझें, वहां की उपलब्धियों से सीखें और अपने अनुभवों को अपने साथियों के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को देश के बड़े एवं प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिलना उनके भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में उद्देश्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने तथा गुरुजनों और माता-पिता के प्रति श्रद्धाभाव बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इतिहास बनाया है, उन्होंने सामान्य से असामान्य बनने के लिए निरंतर प्रयास किया है। यदि संकल्प दृढ़ हो और प्रयास सच्चे मन से किया जाए तो कोई भी ताकत सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

    मुख्यमंत्री ने भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण की पहल के लिए विधायक श्री विनोद कंडारी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगातार 10 वर्षों तक इस प्रकार के कार्यक्रम को संचालित करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

    विधायक  विनोद कंडारी ने कहा कि आज का दिन उनके लिए गर्व और ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि दूर-दराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों का सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विकास में मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी का हमेशा सहयोग रहा है और क्षेत्र से जुड़ी आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण की शुरुआत में अनेक कठिनाइयां आईं, लेकिन आज इसके सकारात्मक परिणाम सामने हैं।

    इस पहल से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हुई है और बच्चे बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी अब 96 प्रतिशत तक अंक प्राप्त कर रहे हैं।

    इस अवसर पर जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह, ब्लॉक प्रमुख कीर्तिनगर अंचला खण्डेलवाल, प्रमुख देवप्रयाग विनोद बिष्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष कीर्तिनगर राकेश मोहन मैठाणी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

  • छात्रों के सपनों में गूंजा विकसित उत्तराखंड का संकल्प

    छात्रों के सपनों में गूंजा विकसित उत्तराखंड का संकल्प

    2.67 लाख विद्यार्थियों ने भेजे निबंध और विचार, मुख्यमंत्री धामी ने किया सीधा संवाद

    नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा : धामी

    ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान में पलायन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन पर आए सुझाव

    चौरास/ श्रीनगर/ देवप्रयाग।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल विवि के चौरास परिसर स्थित प्रेक्षागृह में ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ विषय पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया। विकसित उत्तराखंड को लेकर उनके विचारों, सुझावों, सपनों तथा भविष्य की परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन भी किया।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों की ऊर्जा, उनकी सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है। प्रदेश की भावी पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
    उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज के विद्यार्थी ही कल के उत्तराखंड और भारत का नेतृत्व करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर से 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच, संवेदनशीलता और संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए निबंधों की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने इतनी अच्छी तरह अपने विचार व्यक्त किए हैं कि यह निर्णय करना कठिन है कि किसने अच्छा लिखा और किसने बहुत अच्छा लिखा।

    संवाद के दौरान रुद्रप्रयाग की कक्षा 11 की छात्रा सीमा सेमवाल ने पलायन विषय पर लिखे अपने निबंध के बारे में मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने इसे दो-तीन दिनों में लिखा है और पलायन को विषय इसलिए चुना, क्योंकि उन्होंने इसे स्वयं महसूस किया है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्य रूप से दो प्रकार का पलायन देखा जाता है—स्थायी और अस्थायी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के लिए घर से बाहर जाना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। बाहर जाकर पढ़ने, सीखने और अनुभव प्राप्त करने से युवाओं को बेहतर एक्सपोजर मिलता है।

    हालांकि, पहाड़ों में माताओं-बहनों को अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार और समाज को संभालते हुए स्वयं कार्य कर रही हैं तथा दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं।

    देवप्रयाग की छात्रा श्रेया सेमवाल ने ‘पहाड़ रहें, अपने रहें, मेरे सपने रहें’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने पहाड़ों में रोजगार और अवसरों के विस्तार के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर विचार रखे। वहीं जीईसी पौड़ी की छात्रा प्रिया ने विकसित उत्तराखंड को लेकर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब देश का प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिला और प्रत्येक राज्य विकास की मुख्यधारा से जुड़े और विकसित हो।

    छात्रा तमन्ना ने पलायन और खेती से होने वाली कम आय की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा—‘मेरा पहाड़, मेरा रोजगार, पत्थर की छाती पर बनेगा रोजगार।’ मुख्यमंत्री ने उनके विचार की सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक सोच का परिचायक है। परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन हमारा संकल्प मजबूत होना चाहिए कि जीवन में हमें कुछ बेहतर करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को अपनी परिस्थितियों को अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

    छात्रा सृष्टि ने सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के प्रति लोगों के भरोसे से जुड़े सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज की पीढ़ी अच्छे और बेहतर की समझ रखती है। युवाओं को अपने जनपद और प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों तथा विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी रखनी चाहिए और सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

    रुद्रप्रयाग की छात्रा अनुष्का ने पलायन रोकने से जुड़े अपने विचार साझा किए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, इसके बावजूद सरकार द्वारा गांव-गांव तक बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और सरकार निरंतर इस दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 500 से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित किए जा रहे हैं तथा रिवर्स माइग्रेशन भी हो रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का लक्ष्य रखें।

    इशिका नेगी और गौरव बिष्ट ने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा चारधाम यात्रा से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। विद्यार्थियों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी अपने विचार रखे।

    छात्र मुकेश कुशवाहा ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-छोटे गांवों तक हेलीकॉप्टर एंबुलेंस जैसी सुविधा पहुंचाने तथा विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की ट्रेनिंग उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इसे महत्वपूर्ण सुझाव बताते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा रखे गए सभी विचारों और सुझावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके लिए विशेष है, क्योंकि उन्हें विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों के विचारों से उनकी परिकल्पना, ज्ञान, संवेदनशीलता और भविष्य को लेकर उनकी सोच का पता चलता है। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों के भीतर आगे बढ़ने और कुछ बेहतर करने की तीव्र इच्छा दिखाई देती है। यही ऊर्जा विकसित उत्तराखंड के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवा हैं और भविष्य का उत्तराखंड एवं भारत युवाओं के सपनों, संकल्प और मेहनत से बनेगा। वर्ष 2047 में भारत कैसा हो, उसमें युवाओं का क्या योगदान हो, उनकी क्या भूमिका हो और व्यवस्थाएं कैसी होनी चाहिए—इन सभी विषयों पर युवाओं की सोच और सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में प्रत्येक युवा की भूमिका अहम है और युवाओं को अपने सपनों को लक्ष्य में बदलकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवा विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री युवा योजना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं के विरुद्ध भी राज्य सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं, ताकि योग्य युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष अवसर मिल सकें।

    कार्यक्रम के दौरान छात्रा अदिति गौतम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनके द्वारा बनाई गई एक चित्रकृति भेंट की। बेहतर सहभागिता के लिए नोडल अधिकारी शिक्षक अंकुश को सम्मानित किया गया। वहीं रुद्रप्रयाग जनपद से निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग श्री विशाल मिश्रा को भी सम्मानित किया गया।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने सपनों को अपना लक्ष्य बनाएं, निरंतर मेहनत करें और अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा का उपयोग प्रदेश तथा देश के निर्माण में करें। उन्होंने कहा कि आने वाला उत्तराखंड युवाओं के सपनों का उत्तराखंड होगा और इसके निर्माण में प्रदेश के प्रत्येक युवा की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

    कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर भाजपा विधायक विनोद कंडारी, जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

  • 17 सितम्बर से प्रदेश में चलेगा सेवा संकल्प अभियान – सीएम

    17 सितम्बर से प्रदेश में चलेगा सेवा संकल्प अभियान – सीएम

    अभियान के तहत नागरिकों को ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा

    विकसित भारत के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में प्रत्येक देशवासी की महत्वपूर्ण भूमिका

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जायेगा।

    उन्होंने कहा सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार को केंद्र में रखते हुए नागरिकों को ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अभियान के अंतर्गत 11 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, लाभार्थियों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को भी जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से नागरिकों के जीवन में आए वास्तविक बदलाव और लाभार्थियों की कहानियों को भी प्रमुखता से सामने लाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत सरकारी योजनाओं के केन्द्र, गैस वितरण केंद्रों, राशन दुकानों, प्रमुख धार्मिक स्थलों, गंगा तट, आदि पर दीप प्रज्वलन एवं सामूहिक कार्यक्रम किए जाएंगे। नए मेडिकल कॉलेज, बांध/पुल, अमृत सरोवर, जन औषधि केंद्र जैसे स्थलों पर भी सामूहिक कार्यक्रम किए जाएंगे। इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों की सहभागिता भी रहेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का भारत–चित्र सेवा’ के अंतर्गत प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में ‘विकसित भारत’ के संकल्प तथा 25 वर्षों के कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित चित्रकला, निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। चयनित चित्र विद्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे तथा अभिभावकों और नागरिकों को भी इन प्रदर्शनियों से जोड़ा जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नमो सेवा–अनकही कहानियां के माध्यम से देश की उपलब्धियों पर आधारित नाटकों का विद्यालयों में मंचन किया जाएगा। साथ ही आंगन मिलन सेवा के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों, अभिभावकों, आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं की सहभागिता से गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मातृ-बाल स्वास्थ्य, पोषण तथा मातृ-शिशु कल्याण से संबंधित जानकारी पर विशेष जोर रहेगा। अभिभावकों को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करने की व्यवस्था भी की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा की कहानियों के माध्यम से राष्ट्रीय एवं राज्य की योजनाओं से नागरिकों के जीवन में आए वास्तविक बदलाव को सामने लाया जाएगा। भाषण, चित्रकला और कहानियों के माध्यम से इन बदलावों को जनता तक पहुंचाने का काम किया जाएगा। एवं ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ के तहत किसी प्रमुख चौराहे पर ‘विकसित भारत 2047’ से संबंधित कलश की स्थापना प्रस्तावित है। कलश यात्रा के साथ साइकिल एवं बाइक यात्रा का आयोजन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा : मेरा योगदान कार्यक्रम के माध्यम से नागरिकों को वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, शिक्षण कार्य तथा अन्य समाजोपयोगी सेवा गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य नागरिकों को अभियान में सक्रिय भागीदार बनाना है। एवं सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ राज्य सरकार की योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य शिविर एवं बहुउद्देशीय शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा के रंग, राष्ट्र के संग कार्यक्रम में रंगोली के माध्यम से विकसित भारत 2047 की दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया जाएगा। एवं सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार के विभागों को जोड़कर उनसे वास्तविक जीवन से जुड़ी समस्या-विवरणियां प्राप्त की जाएंगी। IITs, IIMs एवं विशेषज्ञों को ज्यूरी/मेंटर के रूप में जोड़ने तथा चयनित नवाचारों को संरक्षण, मार्गदर्शन एवं परीक्षण की सुविधा देने की परिकल्पना है। अनुमोदन, परीक्षण एवं नियामकीय सहयोग के लिए आवश्यक सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन सेवा संवाद के तहत सेवा और सुशासन के विषय पर जनप्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद किया जाएगा। अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों से संबंधित फोटो, वीडियो, लाभार्थियों के अनुभव तथा सकारात्मक बदलाव की कहानियों को मीडिया के माध्यम से भी व्यापक रूप से प्रसारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का मूल भाव सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को केवल प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि नागरिकों को सेवा, संवाद, नवाचार और जनभागीदारी के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प का सक्रिय सहभागी बनाना है|

    मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड राज्य से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री की मन भूमि – देवभूमि उत्तराखंड है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पूरे देश ने विकसित भारत का संकल्प लिया है। इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में प्रत्येक देशवासी की महत्वपूर्ण भूमिका है। विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। उन्होंने कहा सेवा संकल्प अभियान को हर जिले में विस्तृत रूप से मनाए जाएंगे, जिसमें हर जिले के प्रभारी मंत्री भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था, जिसे जन समर्थन से आगे बढ़ाया जायेगा।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, राम सिंह कैड़ा एवं महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी मौजूद रहे।

  • कैबिनेट के फैसलों से इंटर्न, खिलाड़ी समेत कई वर्गों को राहत

    कैबिनेट के फैसलों से इंटर्न, खिलाड़ी समेत कई वर्गों को राहत

    देखें, कैबिनेट में कई प्रस्तावों पर लगी मुहर

    सरकारी अधिवक्ताओं की फीस बढ़ाने को मंजूरी

    मेडिकल इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ा, पदक विजेताओं की नियुक्ति पर मुहर

    ईएसआई अस्पताल के लिए 15 एकड़ भूमि, रोप-वे परियोजना से जुड़े भूमि प्रस्ताव को भी मंजूरी

    देहरादून। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ऊर्जा, कारागार, विधि, विधिक माप विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, खेल, पर्यटन और श्रम विभाग से जुड़े 10 प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड ₹17 हजार से बढ़ाकर न्यूनतम ₹25 हजार करने को मंजूरी दी। वहीं खेल नीति के तहत पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नियुक्ति देने के लिए विभिन्न विभागों में 243 पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ किया गया।

    मेडिकल इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ा: राज्य के पांच राजकीय मेडिकल कॉलेजों श्रीनगर, हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार और अल्मोड़ा में एमबीबीएस इंटर्न को अब न्यूनतम ₹25 हजार मासिक स्टाइपेंड दिया जाएगा। वर्तमान में यह राशि ₹17 हजार है।

    खिलाड़ियों के लिए 33 नए पद: अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नियुक्ति देने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक व्यायाम के लेवल-7 के 1898 सृजित पदों में से 33 पद समर्पित करते हुए अपर सहायक अध्यापक व्यायाम लेवल-6 के 33 पद सृजित किए जाएंगे। इसके अलावा खेल नीति-2021 के तहत विभिन्न विभागों में कुल 243 पदों पर पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नियुक्ति देने को मंजूरी दी गई।

    सरकारी अधिवक्ताओं की फीस बढ़ेगी: सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट नैनीताल और अधीनस्थ न्यायालयों में आबद्ध शासकीय अधिवक्ताओं को दिए जाने वाले शुल्क की दरों के पुनर्निर्धारण को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इस संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति की संस्तुतियों के आधार पर फीस बढ़ाई जाएगी।

    विद्युत नियामक आयोग की रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी: उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट और वार्षिक लेखा विवरण को आगामी विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    कारागार सेवा नियमावली में संशोधन: सुधारात्मक विंग के लिए अपर महानिरीक्षक कारागार के एक नवसृजित पद को संवर्गीय ढांचे में शामिल करने के लिए उत्तराखंड कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग समूह ‘क’ एवं ‘ख’ सेवा नियमावली, 2026 में संशोधन को मंजूरी दी गई।
    विधिक माप विज्ञान नियमों में बदलाव: केंद्र के Ease of Doing Business और नियामकीय सुधार कार्यक्रम के तहत लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए उत्तराखंड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली, 2012 में संशोधन करते हुए 2026 की संशोधन नियमावली को मंजूरी दी गई।
    मसूरी में गढ़वाल सभा को भूमि: पुरूकुल गांव से मसूरी लाइब्रेरी चौक तक प्रस्तावित रोप-वे परियोजना के अपर टर्मिनल और पार्किंग निर्माण के लिए पर्यटन विभाग को प्राप्त भूमि के बदले मसूरी स्थित जीएमवीएन की पार्किंग के लिए खरीदी गई भूमि में से 972 वर्ग मीटर भूमि गढ़वाल सभा मसूरी को लीज पर देने की अनुमति दी गई।

    हरिद्वार में ईएसआई अस्पताल के लिए 15 एकड़ भूमि: कर्मचारी राज्य बीमा निगम के हरिद्वार स्थित चिकित्सालय के समीप चिन्हित 15 एकड़ भूमि ईएसआई के निर्माण के लिए आवंटित करने का निर्णय लिया गया।

    कैबिनेट के निर्णय

    1. ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग के विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 105 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड विद्युत निमायक आयोग की वार्षिक रिपोर्ट को राज्य विवरण को विधान मण्डल पटल पर रखे जाने का प्राविधान है, जिसके अनुपालन में आयोग के वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा पटल पर रखे जाने सम्बन्धी प्रस्ताव पर मा. मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।
    2. ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग के अन्तर्गत विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 104(4) के अन्तर्गत उत्तराखण्ड विद्युत निमायक आयोग के वार्षिक लेखा विवरण को विधान मण्डल के पटल पर रखे जाने का प्राविधान है, जिसके अनुपालन में आयोग के वर्ष 2024-25 के वार्षिक लेखा विवरण को आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा पटल पर रखे जाने सम्बन्धी प्रस्ताव पर मा. मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।
    3. उत्तराखण्ड कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग समूह ‘क‘ एवं ‘ख‘ सेवा नियमावली, 2026 संषोधन प्रस्ताव को कैबिनेट की सहमति

    कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में गृह विभाग के कारागार विभागान्तर्गत सुधारात्मक विंग हेतु अपर महानिरीक्षक कारागार के 01 नवसृजित पद को संवर्गीय ढांचे में समाहित किये जाने के उद्देश्य से वर्तमान में प्रचलित सेवा नियमावली में संशोधन हेतु प्रस्तावित किया गया। विभागीय एवं कर्मचारी हित में उत्तराखण्ड कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग समूह ‘क‘ एवं ‘ख‘ सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन प्रस्ताव पर मा. मंत्रीमण्डल द्वारा सहमति दी गई।

    1. मा. उच्वतम न्यायालय, मा. उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों में आबद्ध शासकीय अधिवक्ताओं को भुगतान किये जाने वाले शुल्क की दरों के पुनर्निधारण पर कैबिनेट का अनुमोदन

    मा० उच्च न्यायालय, नैनीताल, मा० उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली एवं उत्तराखण्ड राज्य के अधीनस्थ कार्यालयों में आबद्ध शासकीय अधिवक्ताओं को भुगतान किये जाने वाले शुल्क की दरों का पुनर्निधारण किये जाने के संबंध में मुख्य सचिव महोदय की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समीक्षा समिति की बैठक में लिये गये निर्णयानुसार शासकीय अधिवक्ताओं की फीस वृद्धि किये जाने के प्रस्ताव पर मा. मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

    1. विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 53 की उपधारा (1) के प्राविधानुसार उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली, 2012 में सशोधन करते हुए उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) (संशोधन) नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी

    भारत सरकार द्वाराEase of Doing Business Compliance Reduction, Trust Based Regulatory Framework के अंतर्गत Deregulation Phase-11 सुधार कार्यक्रम किये जा रहे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा प्रख्यापित (उपबन्धों का संशोधन) को 01 मई, 2026 से सम्पूर्ण भारत में लागू कर दिया गया है. जिसमें विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा-23 में संशोधन करते हुए Deregulation Priority Area (PA-8) Ease Licensing for Weights & Measures under Legal Metrology Act, 2009 के अंतर्गत लाइसेंसिंग प्रक्रिया के सरलीकरण हेतु उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली 2012 में उक्तानुसार संशोधन हेतु उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) (संशोधन) नियमावली 2026 के प्रख्यापन को मा. मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

    1. उत्तराखण्ड राज्य में वर्तमान में 05 राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर, हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार, अल्मोड़ा संचालित है, जिनमें एम.बी.बी.एस. तथा पी.जी. पाठ्क्रमों का संचालन किया जाता है। राज्य के दुर्गम दूरस्थ क्षेत्रों में जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराये जाने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। वर्तमान में एम.बी.बी.एस. इन्टर्नस् को रू. 17000/-प्रतिमाह Stipend दिया जा रहा है, जिसे 17000 से न्यूनतम रू. 25000 किये जाने पर मा. मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।
    2. माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अपर सहायक अध्यापक व्यायाम (ग्रेड वेतन-4200) के 33 पद सृजित किए जाने पर कैबिनेट की लगी मुहर

    खेलकूद विभाग के निर्धारित शासनादेश में वर्णित प्राविधानों के अन्तर्गत अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को उत्तराखण्ड में राजपत्रित/अराजपत्रित पदों पर आऊट ऑफ टर्न सेवायोजन प्रदान किये जाने हेतु माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत सहायक अध्यापक व्यायाम के लेवल-7 के कुल सृजित 1898 पदों में से 33 पदों को समर्पित करते हुए अपर सहायक अध्यापक व्यायाम लेवल-6 के 33 पद सृजित किए जाने पर मा. मंत्रीमणडल ने अनुमोदन दिया गया।

    1. खेल नीति, 2021 के अन्तर्गत अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय खेलों में पदक विजेता खिलाड़ियों को उत्तराखण्ड में राजपत्रित/अराजपत्रित पदों पर आउट ऑफ टर्न सेवायोजन प्रदान किये जाने का प्रावधान है। आउट ऑफ टर्न सेवायोजन हेतु वर्तमान में खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, गृह विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग एवं वन विभाग के अन्तर्गत कुल 243 पदों पर नियुक्ति प्रदान किये जाने पर मा. मत्रिण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।
    2. मा. मंत्रिमण्डल द्वारा देहरादून (पुरूकुल गांव) से मसूरी (लाईब्रेरी चौक) तक रोप-वे परियोजना के अपर टर्मिनल प्वांइट एवं पार्किंग निर्माण हेतु पर्यटन विभाग को प्राप्त भूमि पर स्थित, गढ़वाल सभा मसूरी को पूर्व में लीज पर दी गयी भूमि, के बराबर ही भूमि (972 वर्ग मी.) मसूरी स्थित गढ़वाल मण्डल विकास निगम की पार्किंग हेतु क्रय की गयी भूमि में से लीज पर दिये जाने की अनुमति प्रदान की गई।
    3. मा. मंत्रीमण्डल द्वारा कर्मचारी राज्य बीमा निगम, चिकित्सालय हरिद्वार के समीप चिन्ह्ति 15 एकड़ भूमि ई.एस.आई. के निर्माण हेतु आंवटित किये जाने का लिया गया।
  • आयुर्वेद-योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा ऋषिकुल: सीएम

    आयुर्वेद-योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा ऋषिकुल: सीएम

    आयुर्वेद, मेडिकल टूरिज्म, योग, ज्योतिष और वैदिक गणित को मिले विशेष प्रमुखता

    प्राच्य एवं पारंपरिक स्थापत्य स्वरूप के साथ आधुनिकतम व्यवस्थाओं का हो समन्वय

    सभी कार्य चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से दो वर्ष में किए जाएं पूर्ण

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में हरिद्वार स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल के समग्र विकास से संबंधित प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष संस्थान के प्रस्तावित स्वरूप एवं विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके समग्र विकास में आयुर्वेद, मेडिकल टूरिज्म, योग, ज्योतिष और वैदिक गणित को विशेष प्रमुखता दी जाए। इन क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शैक्षणिक, शोध एवं अध्ययन की व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, जिससे यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच प्रभावी सेतु बन सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष, योग और संस्कृत देवभूमि उत्तराखण्ड की प्रमुख पहचान हैं। राज्य की इस विशिष्ट पहचान को ऋषिकुल के विकास में प्रमुखता से प्रतिबिंबित किया जाए। संस्थान में विकसित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियां उच्च स्तरीय हों तथा यहां भारतीय ज्ञान, प्राच्य विद्याओं, आयुर्वेद और योग से संबंधित अध्ययन एवं शोध के लिए उत्कृष्ट वातावरण तैयार किया जाए।
    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परिसर का वास्तुशिल्प प्राच्य एवं पारंपरिक स्थापत्य शैली के अनुरूप हो। भवनों के बाह्य स्वरूप और फसाड में प्राचीन स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाई दे, जबकि परिसर में उपलब्ध कराई जाने वाली व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं आधुनिकतम हों। उन्होंने कहा कि प्राचीनता और आधुनिकता के संतुलित समन्वय से परिसर की विशिष्ट पहचान विकसित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के प्रत्येक पहलू में इसकी मूल अवधारणा स्पष्ट रूप से दिखाई दे। संपूर्ण परिसर को इस प्रकार विकसित किया जाए कि यहां आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और अध्यात्म की अनुभूति हो तथा यह उन्हें आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक रूप से आकर्षित करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा के कारण हरिद्वार का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक हरिद्वार आते हैं। इसलिए ऋषिकुल के विकास की अवधारणा में हरिद्वार की इस विशिष्टता को केंद्र में रखा जाए। यहां आने वाले लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म की समृद्ध विरासत को जानने और अनुभव करने का अवसर मिले।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना से संबंधित सभी कार्यों को समयबद्ध किया जाए। विभिन्न कार्यों के लिए स्पष्ट चरण और समय-सीमा निर्धारित करते हुए इन्हें चरणबद्ध तरीके से दो वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाए। उन्होंने कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। प्रस्तुतीकरण में ऋषिकुल को योग एवं ध्यान, उच्च स्तरीय शैक्षणिक गतिविधियों, आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य, भारतीय दर्शन, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, कला-संस्कृति तथा शोध गतिविधियों के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। प्रस्तावित मास्टर प्लान में अकादमिक, योग एवं ध्यान, आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं वेलनेस सहित विभिन्न क्षेत्रों के समग्र विकास की अवधारणा रखी गई है।

    बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन,प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार, युगल किशोर पंत, रंजना राजगुरू, सोनिका उपाध्यक्ष हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण, अपर सचिव अभिषेक रुहेला एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार श्री मयूर दीक्षित उपस्थित थे।

  • India’s berry aisle is getting a home-grown makeover

    India’s berry aisle is getting a home-grown makeover

     

    Article courtesy:  Freshplaza

    Blueberries are harvested from December to July. Raspberries available through the year. Indian-grown berries arriving on retail shelves under their own consumer brand.

    That is a sharp change from 2021, when Konnect Agro entered a market still dominated by imported blueberries, seasonal strawberries and almost no domestically available raspberries.

    Four years on, the category is beginning to look less like a luxury import shelf and more like a developing Indian food segment. Premium supermarkets and quick-commerce platforms have made berries easier to find, while urban shoppers are increasingly buying them for breakfast bowls, snacking and their health appeal.

    Saurabh Vinayak of Konnect Agro Pvt. Ltd. says blueberries were considered a niche product when the company entered the market. Since then, demand has risen alongside middle-class consumption, growing health awareness and the spread of premium retail and instant-delivery services.

    Konnect Agro grows blueberries, raspberries and strawberries under the CIROLA brand. Blueberries form the largest part of its portfolio.

    The company uses Sekoya Pop from Fall Creek, along with the Demba and Dana varieties from Fruit Vision. The combination allows it to begin harvesting earlier and continue supplying fruit over a longer period.

    “Sekoya Pop offers us a market-leading variety known for its high quality and yield while Fruit Vision offers early, high-yielding genetics, which gives us an extended harvest window,” says Saurabh Vinayak.

    The harvest calendar is one of the company’s main advantages. Blueberries are produced from December to July, while raspberries and strawberries are harvested year-round. This gives CIROLA a more regular presence in stores and reduces some of the seasonality traditionally associated with berries in India.

    Local production also shortens the distance between the farm and the shopper.

    Imported berries travel through a longer supply chain, which can affect freshness and increase handling costs. Indian-grown fruit can reach the market faster, although domestic production is still at an early stage.

    The bigger challenge is finding the right place and the right plant.

    India’s climate varies widely, and berry varieties do not perform uniformly across regions. Growers are still conducting trials to identify suitable genetics and locations. Some mid- and high-chill varieties can be cultivated in open fields at higher altitudes, but commercial low-chill berries are largely grown inside polyhouses, tunnels and net houses.

    That protection is necessary because berries respond quickly to changes in heat, humidity and rainfall. It also makes the business expensive.

    Protected structures, substrate farming and specialised cultivation systems require substantial investment. Proprietary genetics are not always easy to access, and there is a shortage of workers trained in advanced berry cultivation.

    Land adds another difficulty. Some regions suitable for berry production have limited availability of large, consolidated plots, making expansion slower and harder.

    The risks continue after harvest.

    Berries are fragile and highly perishable. India’s refrigerated road transport has improved, but last-mile movement still needs attention. Poor handling near the end of the supply chain can damage fruit quality before it reaches consumers. This is why branding is beginning to matter as much as cultivation.

    CIROLA is being positioned around freshness, consistency and uniform quality. The idea is to make berries feel dependable rather than occasional, and premium without appearing inaccessible.

    That shift may gather pace as more growers enter the category. Greater domestic output could gradually lower prices and make berries available to a wider group of consumers.

    Saurabh expects quick commerce and modern retail to push demand beyond India’s largest cities. Continued growth will depend on stronger breeder partnerships, specialised nurseries, local research, trained farm workers and better cold-chain systems.

    The future of India’s berry market will rest on whether growers can solve those production gaps while building trust in locally grown fruit. For now, the category is moving steadily from imported novelty to a more familiar place on the Indian shelf.

  • भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर नमन

    भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर नमन

    प्रतिभाओं को मिला ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान

    पंत की दूरदृष्टि और संघर्षों से आज की पीढ़ी ले प्रेरणा : ऋतु खंडूड़ी

    देहरादून। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कुशल राजनेता और भारत के पूर्व गृह मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती देहरादून के आईआरडीटी सभागार में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह समिति एवं हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में पंत के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान से सम्मानित किया गया।

    मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने पंडित पंत को कुशल राजनेता, अधिवक्ता और दूरदृष्टा बताते हुए कहा कि वे भारतीय राजनीति में मानदंड स्थापित करने वाले युगपुरुष थे। उन्होंने कहा कि पंत ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष किया और सफलता हासिल की। कुली बेगार प्रथा के खिलाफ उनके आंदोलन ने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी और इस कुप्रथा के अंत का मार्ग प्रशस्त किया। खंडूड़ी ने कहा कि तराई-भाबर के विकास को लेकर भी पंत की दूरदृष्टि स्पष्ट थी और आज क्षेत्र का विकास उनकी सोच का परिणाम दिखाई देता है।

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नीरज पांडे ने पंडित पंत की जीवन यात्रा और उनके संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा के खूंट गांव से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक की उनकी यात्रा और फिर उत्तराखंड की सेवा के लिए काशीपुर लौटना उनके जीवन के उद्देश्य को दर्शाता है। काशीपुर में प्रेम सभा के गठन के माध्यम से उन्होंने शोषित, वंचित और पीड़ित लोगों की समस्याओं को उठाया। संयुक्त प्रांत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्य ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।

    देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत को आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि पंत राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रबल समर्थक थे और देश के प्रशासनिक पुनर्गठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पहाड़ के प्रति उनके विशेष लगाव के कारण उन्हें ‘हिमालय पुत्र’ कहा जाता है। उन्होंने युवाओं से पंडित पंत के जीवन और विचारों का अध्ययन कर उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

    सात प्रतिभाओं को मिला ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ सम्मान

    समारोह में सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रतिभाओं को ‘उत्तराखंड के स्तम्भ’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता के क्षेत्र में शशि बहुगुणा रतूड़ी, साहित्य लेखन में शीशपाल गुंसाई, शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. ममता सिंह, पत्रकारिता एवं जनसरोकारों के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश नौटियाल, पर्यावरण संरक्षण के लिए दरपान सिंह बोरा, स्वरोजगार के क्षेत्र में गोपाल भट्ट और लोकगायन के लिए विवेक नौटियाल को सम्मानित किया गया।

    इस अवसर पर डॉ. नवीन पंत की आने वाली पुस्तक ‘युवा उत्तराखंड : शिक्षा, कौशल एवं आत्मनिर्भरता’ के कवर पृष्ठ का भी लोकार्पण किया गया। समारोह में सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, महिला आईटीआई, उत्तरांचल विश्वविद्यालय और तुलाज विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने योग, लोकनृत्य, लोकगायन और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। अतिथियों ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

    कार्यक्रम संयोजक राकेश डोभाल ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह समिति और हिमालयन अभ्युदय सामाजिक संस्थान हर वर्ष पंत की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित कर युवा पीढ़ी को उनके जीवन, संघर्ष और विचारों से परिचित कराने का प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन पंत ने किया, जबकि सह-संयोजक प्रदीप कुमार ने अतिथियों का आभार जताया।

    समारोह में 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री ज्योति प्रसाद गैरोला, डॉ. भावना डोभाल, जीएमवीएन के निदेशक विशाल गुप्ता, साक्षी शंकर, सुधाकर भट्ट, नीतू कुमारी, प्रभात कुमार, अवधेश तिवारी, बृजपाल सिंह, शमशेर सिंह, दीपा धामी, अनिल रस्तोगी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

  • देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में- सीएम

    देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में- सीएम

    हल्द्वानी में गौरव सेनानी मिलन एवं पूर्व सैनिक सम्मान समारोह आयोजित

    सैनिक कभी पूर्व नहीं होता, वह जीवनभर सैनिक रहता है- मुख्यमंत्री

    सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध- मुख्यमंत्री

    हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हल्द्वानी में आयोजित ‘गौरव सेनानी मिलन एवं पूर्व सैनिक सम्मान समारोह’ में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में कुमाऊं मंडल के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं एवं सैनिक परिवारों ने प्रतिभाग किया।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं को नमन करते हुए कहा कि हमारे सैनिकों ने अपने जीवन का स्वर्णिम समय राष्ट्र की रक्षा और सेवा के लिए समर्पित किया है। उन्होंने अपने आज की चिंता किए बिना देश के सुरक्षित भविष्य के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। सैनिक कभी पूर्व या भूतपूर्व नहीं होता, वह जीवनभर सैनिक रहता है। हमारे पूर्व सैनिक ‘भूतपूर्व’ नहीं बल्कि ‘अभूतपूर्व’ हैं। वे अपने अनुशासन, समर्पण, राष्ट्रभक्ति और अनुभव से समाज एवं राष्ट्र को निरंतर नई दिशा देने का कार्य करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं एक सैनिक के पुत्र हैं, इसलिए सैनिक और उसके परिवार के त्याग, अनुशासन तथा संघर्ष को भली-भांति समझते हैं। उत्तराखण्ड देवभूमि के साथ वीरभूमि भी है। विक्टोरिया क्रॉस विजेता दरबान सिंह नेगी और गबर सिंह नेगी से लेकर जनरल बी.सी. जोशी और जनरल बिपिन रावत तक उत्तराखण्ड की इस पावन भूमि ने देश को अनेक वीर सपूत दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की रक्षा व्यवस्था और सैन्य सामर्थ्य में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। देश में स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ने के साथ ही भारत आज रक्षा उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि नया भारत अपनी सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता और सामर्थ्य के साथ निर्णय लेने में सक्षम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दशकों से लंबित ‘वन रैंक-वन पेंशन’ की मांग को पूरा कर पूर्व सैनिकों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया। केंद्र और राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं तथा उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। देहरादून के गुनियाल गांव में भव्य सैन्य धाम का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है। यह सैन्य धाम उत्तराखण्ड के वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान का प्रतीक बनने के साथ ही भावी पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। परमवीर चक्र विजेताओं को दी जाने वाली एकमुश्त अनुदान राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। बलिदानी सैनिक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में सेवायोजित करने की व्यवस्था के तहत आवेदन की समय-सीमा को दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। राज्य के सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों के हितों से जुड़े विषयों के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

    भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि उत्तराखण्ड की धरती वीरों की भूमि है और यहां के सैनिकों ने देश की रक्षा में अतुलनीय योगदान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिक और सशक्त हुई है तथा भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। आज भारत रक्षा उपकरणों का निर्यात करने वाले देशों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव सैनिकों के बीच जाकर उनका मनोबल बढ़ाने का कार्य किया है। सीमावर्ती गांवों को देश का अंतिम गांव मानने की सोच को बदलकर उन्हें देश का प्रथम गांव मानते हुए उनके विकास को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

    नितिन नवीन ने कहा कि देहरादून में बन रहा सैन्य धाम उत्तराखण्ड के वीर सैनिकों और शहीदों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक बनेगा। उन्होंने सैनिक कल्याण की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिए गए निर्णयों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों से भावी पीढ़ियों को भी देश के वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान से प्रेरणा मिलेगी।

    सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं एवं सैनिक परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सैनिकों एवं उनके आश्रितों के कल्याण, शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। सैनिक कल्याण से जुड़े प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

    इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, कार्यक्रम संयोजक एवं दायित्वधारी सुरेश भट्ट, ध्रुव रौतेला, पूर्व मेयर जोगेंद्र रौतेला सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, सैनिक परिवार, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य उपस्थित थे।

  • कृषि सिंचाई योजना में गड़बड़ी की होगी मजिस्ट्रेटी जांच

    कृषि सिंचाई योजना में गड़बड़ी की होगी मजिस्ट्रेटी जांच

    देहरादून। भारत सरकार द्वारा प्रत्येक खेत तक सिंचाई की सुविधा पहुँचाने के उद्देश्य से प्रारम्भ की गई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक अनियमितताओं का मामला सामने आया है।

    शिकायत के अनुसार, योजना के “पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC)” घटक के अंतर्गत उत्तराखण्ड के कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा अब तक लगभग ₹400 करोड़ से अधिक की धनराशि व्यय की जा चुकी है।

    यह केन्द्रपोषित योजना 90 प्रतिशत केन्द्रांश तथा 10 प्रतिशत राज्यांश के वित्तीय अनुपात पर संचालित की जा रही है। आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन के दौरान शासनादेशों एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों का समुचित अनुपालन नहीं किया गया। तृतीय पक्ष मूल्यांकन, चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट, कैग ऑडिट तथा विभागीय आंतरिक ऑडिट में लाभार्थी सत्यापन, सामग्री की आपूर्ति, उपकरणों की स्थापना, प्रशिक्षण, निरीक्षण, अभिलेखों के रख-रखाव और वित्तीय नियंत्रण से संबंधित अनेक कमियाँ सामने आई हैं।

    पौड़ी गढ़वाल में अनुपयोगी मिले ड्रिप सिस्टम
    जनपद पौड़ी गढ़वाल में वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 के दौरान स्थापित ड्रिप सिंचाई प्रणालियों के तृतीय पक्ष मूल्यांकन में पाया गया कि अनेक किसानों ने प्रारम्भ में योजना का लाभ प्राप्त किया, लेकिन रखरखाव एवं तकनीकी सहायता के अभाव में अधिकांश ड्रिप सिस्टम बाद में अनुपयोगी हो गए।

    मूल्यांकन के दौरान कई खेतों में केवल ड्रिप पाइपों के अवशेष पाए गए। कुछ प्रकरणों में सामग्री तो उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन ड्रिप सिंचाई प्रणाली की विधिवत स्थापना ही नहीं की गई।

    रुद्रप्रयाग में स्थापना और प्रशिक्षण का अभाव
    जनपद रुद्रप्रयाग में किसानों ने मूल्यांकन दल को बताया कि आपूर्तिकर्ताओं द्वारा केवल सामग्री उपलब्ध कराई गई। ड्रिप प्रणाली की विधिवत स्थापना, परीक्षण और संचालन संबंधी प्रशिक्षण नहीं दिया गया। इसके परिणामस्वरूप अनेक किसान उपकरणों का समुचित उपयोग एवं रखरखाव नहीं कर सके और योजना का अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं हुआ।

    पिथौरागढ़ में भी सामने आईं कमियाँ
    जनपद पिथौरागढ़ में भी किसानों को पाइप, फिल्टर और ड्रिपर उपलब्ध कराए जाने के बावजूद प्रणाली की स्थापना एवं तकनीकी प्रशिक्षण में गंभीर कमियाँ पाई गईं। आरोप है कि इन कमियों के कारण बड़ी संख्या में किसान योजना के वास्तविक एवं दीर्घकालिक लाभ से वंचित रह गए।

    लेखा एवं अभिलेखों के रख-रखाव पर सवाल
    चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा योजना के लेखों के परीक्षण के दौरान लाभार्थियों के सत्यापन, आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता, निरीक्षण प्रक्रिया तथा वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेखों के रख-रखाव में व्यापक कमियाँ दर्ज की गईं।

    इसके अतिरिक्त, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि—
    शासनादेशों एवं निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया;
    योजना की नियमित निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं की गई;
    मूल्यांकन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं कराया गया;
    उपकरणों की स्थापना और उपयोगिता सुनिश्चित नहीं की गई;
    किसानों को पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण एवं बिक्री-पश्चात सहायता नहीं दी गई;
    ऑडिट आपत्तियों पर अपेक्षित सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

    जिलों में जाँच प्रारम्भ, देहरादून में मजिस्ट्रेटी जाँच
    पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच कराने के लिए राज्य के सभी जिलाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजे गए हैं। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने संबंधित मुख्य विकास अधिकारियों को जाँच अधिकारी नियुक्त किया है।
    वहीं, जिलाधिकारी देहरादून ने प्रकरण में मजिस्ट्रेटी जाँच के आदेश दिए हैं। जाँच में योजना के अंतर्गत व्यय की गई धनराशि, लाभार्थियों का सत्यापन, सामग्री की गुणवत्ता एवं वास्तविक स्थापना, आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका, भुगतान प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही की जाँच किए जाने की अपेक्षा है।

    शिकायतकर्ता ने माँग की है कि योजना के वर्षवार एवं जनपदवार व्यय, लाभार्थियों तथा आपूर्तिकर्ताओं का भौतिक सत्यापन कराया जाए। जिन प्रकरणों में सरकारी धन का दुरुपयोग, फर्जी लाभार्थी, अपूर्ण स्थापना, बिना सत्यापन भुगतान अथवा अन्य वित्तीय अनियमितता पाई जाए, उनमें दोषी अधिकारियों एवं आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करते हुए सरकारी धन की वसूली की जाए।