Category: टेक्नोलॉजी

  • अब भूकंप से सुरक्षा आपके फोन में

    अब भूकंप से सुरक्षा आपके फोन में

    भूकंप से सुरक्षा : यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की ने विकसित किया है भू-देव एप

    देखें, मुख्यमंत्री ने जारी किया वीडियो संदेश

    प्रदेशवासियों से की डाउनलोड करने की अपील

     

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों से उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा आईआईटी रुड़की द्वारा विकसित किए गए भूदेव ऐप को डाउनलोड करने की अपील की है। शुक्रवार को जारी अपने संदेश में माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। उत्तराखंड राज्य जोन 4 और जोन 5 के अंतर्गत आता है, इसलिए प्रदेश के सभी नागरिकों को जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने मोबाइल फोन में भू देव ऐप डाउनलोड करने अपने परिजनों और परिचितों के मोबाइल फोन में भी इस ऐप को डाउनलोड करवाने की अपील की है।

    गौरतलब है कि आईआईटी रुड़की के सहयोग से उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भूकंप का अलर्ट प्रदान करने के लिए इस ऐप को विकसित किया है। पांच से अधिक तीव्रता का भूकंप आने पर यह एप मोबाइल फोन में अलर्ट भेज देगा। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में अलग-अलग स्थानों में 169 सेंसर तथा 112 सायरन लगाए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि जब भूकंप आता है तो दो तरह की तरंगें निकलती हैं, जिन्हें हम प्राइमरी और सेकेंडरी तरंग कहते हैं। प्राइमरी तरंगें पहले निकलती हैं। जब भूकंप आएगा तो अलग-अलग स्थान पर लगे सेंसर प्राइमरी तरंगों को डिटेक्ट कर लेंगे। यदि 5 से अधिक तीव्रता का भूकंप आएगा तो इन सेंसरों के माध्यम से सीधे भूदेव ऐप के जरिए मोबाइल फोन में सायरन बज उठेगा। सेकेंडरी तरंगों के आने से 15 से 30 सेकेंड पहले यह चेतावनी मिल जाएगी और लोग सावधानी बरतते हुए अपनी तथा अपने परिजनों की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकेंगे।

    शुक्रवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के संदेश के साथ ऐप को डाउनलोड करने संबंधी वीडियो जारी की गई है। भूदेव ऐप को प्ले स्टोर तथा एप स्टोर के माध्यम से डाउनलोड कर अपने फोन में इंस्टॉल करें।

    सेंसर और सायरनों की संख्या बढ़ाई जाएगी

    सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में अलग-अलग स्थानों में 169 सेंसर तथा 112 सायरन लगाए गए हैं। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण आईआईटी रुड़की के सहयोग से इनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत है ताकि व्यापक स्तर पर पूरे प्रदेश में एलर्ट मिल सकें। इसके तहत 500 अतिरिक्त सेंसर तथा 1000 नए सायरन लगाए जाने की योजना है।

    इस तरह किया जा सकता है एप को डाउनलोड

     यह एप एंड्रायड और आईओएस, दोनों पर उपलब्ध है।
     प्ले स्टोर और एप स्टोर में भूदेव सर्च कर अपने फोन में इंस्टॉल करें।
     वेलकम स्क्रीन में गेट ैजंतजमक का दबाएं।
     लोकेशन की अनुमति दें।
     अपना फोन नंबर एंटर करें।
     नियम और शर्तों से सहमत पर क्लिक करें।
     ओटीपी एंटर करें।
     अपने परिवार के सदस्य या परिचित का नंबर इमरजेंसी कांटेक्ट के तौर पर दर्ज करें।
     अब भूकंप से सुरक्षा का कवच आपके फोन में है।

  • चकराता में पहली बार भूस्खलन अर्ली वार्निंग सिस्टम

    चकराता में पहली बार भूस्खलन अर्ली वार्निंग सिस्टम

    चकराता में पहली बार लगेगा भूस्खलन अर्ली वार्निंग सिस्टम, भूगर्भीय हलचलों पर रहेगी पैनी नजर

    राज्य में पहली बार चकराता में लगेगा भूस्खलन अर्ली वार्निंग सिस्टम, भूगर्भीय गतिविधियों पर रहेगी नजर

    वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान भूस्खलन की आशंका को भांपने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करेगा।

    राज्य में पहली बार चकराता क्षेत्र में भूस्खलन को लेकर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान इस सिस्टम को स्थापित करेगा, जो संबंधित इलाके में होने वाली भूगर्भीय हलचलों पर लगातार नजर रखेगा। चकराता में इस तकनीक के परीक्षण और अनुभव के आधार पर भविष्य में अन्य स्थानों पर भी इसे लागू करने की योजना बनाई जाएगी।

    उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है, खासकर मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं काफी आम हैं। लंबे समय से भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व सूचना देने के लिए एक प्रभावी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस दिशा में वाडिया संस्थान ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चकराता में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की पहल की है। इस परियोजना को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) का सहयोग प्राप्त हो रहा है।

    कैसे काम करेगा यह सिस्टम

    वाडिया संस्थान की वैज्ञानिक स्वप्नमिता चौधरी के अनुसार, इस सिस्टम के तहत बारिश के डेटा, सतही जल प्रवाह के दबाव और पहाड़ों में दरारों पर निगरानी रखने के लिए विशेष उपकरण लगाए जाएंगे। इसके अलावा, ढलानों की स्थिरता और भूगर्भीय हलचलों को मापने के लिए भी उन्नत सेंसर लगाए जाएंगे। एक स्मार्ट कैमरा भी स्थापित किया जाएगा, जो लगातार क्षेत्र की तस्वीरें भेजकर वहां हो रहे परिवर्तनों पर नजर रखेगा। संस्थान इस सिस्टम के जरिए विभिन्न मौसमों, विशेष रूप से बरसात के दौरान होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करेगा। लगभग दो वर्षों के शोध और विश्लेषण के बाद, यह प्रणाली भूस्खलन की सटीक पूर्व चेतावनी देने में सक्षम होगी। चकराता में सफल परीक्षण के बाद, अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी इस तकनीक को अपनाने की योजना है।

    भूस्खलन और आपदाओं का असर

    पिछले वर्ष उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई जानमाल की हानि हुई। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 15 जून से अब तक आपदा के चलते 90 लोगों की मौत हुई, जबकि 87 लोग घायल हुए थे। इसके अलावा, 28 लोग लापता हुए थे।

    राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 62 बड़े भूस्खलन दर्ज किए गए। इनमें सबसे अधिक घटनाएं जुलाई के महीने में सामने आईं, जब कुल 24 भूस्खलन हुए। मई में एक, जून में दो, अगस्त में 12, सितंबर में 14, और अक्तूबर व नवंबर में एक-एक भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं।

    चकराता में जल्द होगा सिस्टम स्थापित

    चकराता में भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। साइट चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कुछ उपकरण भी पहुंच चुके हैं। अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं प्रगति पर हैं।

  • राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में छात्र-छात्राओं को बताया कि कैसे बचें डिजिटल धोखाधड़ी से

    राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में छात्र-छात्राओं को बताया कि कैसे बचें डिजिटल धोखाधड़ी से

    नई टिहरी। राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में भारतीय रिजर्व बैंक, देहरादून के वित्तीय साक्षरता कैम्प के बैनर तले कैरियर काउंसलिंग प्रकोष्ठ द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। आशुतोष सिंह जिला समन्वयक कृषिल फाउंडेशन ने पी0पी0टी0 प्रजन्टेसन के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि आज डिजिटल युग है जिसमे आज हम वित्तीय लेनदेन अपने मोबाइल से कर रहे जिससे डिजिटल धोखाधडी के मामले बढ़ रहे जिससे हमको बचना होगा तथा हमें एनिक्रिप्टेड वेबसाईट का उपयोग करते हुए https अवश्य देखना चाहिए। मुख्य अतिथि दिग्गविजय सिंह सजवान ने छात्र-छात्राओं को बताया कि कैयूआर कोड पैसा देने के लिए होता है न कि लेने के लिए।

    महाविद्यालय के प्राचार्य ने मुख्य अतिथि को स्मृति-चिन्ह भेंट करते हुए आभार व्यक्त किया। कैरियर कॉउंसलिंग आयोजन के मुख्य अतिथि दिग्विजय सिँह सजवान, सहायक प्रबंधक आरबीआई, देहरादून रहे। मंच का संचालन कैरियर काउंसलिंग के संयोजक डाoशनव्वर एवं डॉ संगीता बिजलवान द्वारा किया गया।

    डाo निरंजना शर्मा , डाo ईरा सिंह, डाo मीनाक्षी , डॉ मीना, डॉ संगीता बिजलवान,कार्यालय अधीक्षक आरo एसoबिष्ट , दीपक, पंकज, आशीष, कुo मनीषा एवं कुo मानसि , कुo साक्षी, कुo प्रीति कुo रितिका, कुo राखी, क्रीश,अमन भंडारी, कुo संजना, कुo निकिता, कुo इशिका, कुo अंशिका, कल्पना, स्वेता, अंकिता, सिमरन कोठियाल, कुo ख़ुशी, कुo सुमन एवं राजकीय इंटर कॉलेज जाजल के छात्र-छात्राएं उपस्थित रही ।

  • AIIMS Rishikesh: पहली बार हुई रोबोटिक विधि से वजन घटाने की सर्जरी

    AIIMS Rishikesh: पहली बार हुई रोबोटिक विधि से वजन घटाने की सर्जरी

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रोबोटिक विधि से पहली वजन घटाने की सर्जरी (बैरिएट्रिक सर्जरी) की गई। यह सर्जरी संस्थान के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की ओर से की गई है।

    गैस्ट्रोएंट्रोलाॅजी विभाग के सर्जन डॉ. लोकेश अरोड़ा ने बताया, 51 वर्षीय एक महिला मोटापे से संबंधित बीमारी के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द और थायराइड की समस्या से जूझ रही थी। महिला का वजन 110 किग्रा था। महिला पहले जनरल मेडिसिन की ओपीडी में आई थी। जहां से विभिन्न जांचों के आधार पर बीमारी का पता लगा।

    इसके बाद सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलाॅजी विभाग की ओर से रोगी का गैस्ट्रिक बाईपास या रॉक्स-एन-वाई (रोबोटिक बैरिएट्रिक) ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। बताया, यह जटिल सर्जरी लगभग पांच घंटे तक चली। इस सर्जरी के बाद रोगी का वजन अब 10 किलो कम हो गया। रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।बताया, बैरिएट्रिक ऑपरेशन शरीर का वजन कम करने के लिए किया जाने वाला एक जटिल ऑपरेशन है। जिसमें रिकवरी तेजी से होती है और शरीर में निशान भी नजर नहीं आते हैं।

    सर्जरी की यह प्रक्रिया उन व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो अपने शरीर का वजन कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय करते हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाती है। मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित गुप्ता ने मोटापे की वजह से लीवर खराब होने की शिकायत में बैरिएट्रिक सर्जरी को कारगर बताया।

    ऑपरेशन करने वाली टीम में डाॅ. लोकेश अरोड़ा के साथ डॉ. नीरज यादव, डॉ. अजहरुद्दीन, डॉ. मृदुल धर, डॉ. उन्नीकृष्णन, डॉ. दीपक, मोहित, सुरेश, दीप, रितेश, योगेश, आकाश शामिल रहे। एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सत्या श्री ने ऑपरेशन को रोबोटिक विधि से सफलतापूर्वक संपन्न करने पर सर्जिकल टीम को बधाई दी।

    इस दिन लगती है ओपीडी
    एम्स में ओबेसिटी एवं मेटाबोलिक हेल्थ की ओपीडी प्रत्येक शनिवार को सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक चलती है। इस ओपीडी में सभी विभाग के डॉक्टर्स उपलब्ध रहते हैं।

  • उत्तराखंड: साइबर हमले के बाद व्यवस्था बेपटरी, सरकारी कंप्यूटरों पर इंटरनेट मीडिया पर रोक

    उत्तराखंड: साइबर हमले के बाद व्यवस्था बेपटरी, सरकारी कंप्यूटरों पर इंटरनेट मीडिया पर रोक

    उत्तराखंड में साइबर हमले के बाद व्यवस्था बेपटरी, सरकारी कंप्यूटरों पर इंटरनेट मीडिया के इस्तेमाल पर लगेगी रोक
    उत्तराखंड में हुए साइबर हमले के बाद राज्य सरकार ने सभी सरकारी कंप्यूटरों पर इंटरनेट मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इस हमले में राज्य की 192 में से 58 वेबसाइट और मोबाइल एप प्रभावित हुए थे। विशेषज्ञ एजेंसियां डाटा सेंटर में आई समस्याओं को दूर करने में जुटी हुई हैं। साइबर सुरक्षा से बचने के लिए गाइडलाइन तैयार की जा रही हैं

    प्रदेश के स्टेट डाटा सेंटर में हुए साइबर हमले के बाद व्यवस्था पटरी पर आने लगी है। अभी तक प्रदेश की कुल 192 वेबसाइट व मोबाइल एप में से महत्वपूर्ण 58 वेबसाइट व मोबाइल एप को सक्रिय कर दिया गया है। शेष को सक्रिय करने का कार्य गतिमान है।

    वहीं, साइबर व वायरस हमलों को रोकने के लिए सभी सरकारी कंप्यूटरों पर इंटरनेट मीडिया साइट के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाएगी। इन साइट के जरिये कंप्यूटर में वायरस आने की आशंका सबसे अधिक रहती है। इसके लिए सभी विभागों को पत्र भेजे जा रहे हैं।

    प्रदेश में दो अक्टूबर को हुए साइबर हमले के बाद सरकारी कार्यालयों से जुड़ी सारी ऑनलाइन व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। इस व्यवस्था को पटरी पर लाने में खासा समय लग रहा है। यद्यपि अभी तक 58 प्रमुख वेबसाइट व मोबाइल एप सुचारू कर दिए गए हैं, लेकिन कई विभागों की वेबसाइट प्रभावित हैं, जिन पर लगातार कार्य किया जा रहा है।

    डाटा सेंटर में सुरक्षित रखा गया डाटा भी लगभग रिकवर किया जा चुका है। अभी केवल सीसीटीएनएस का कार्य शेष है। इस हमले के बाद जो सर्वर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, उन्हें क्रियाशील तो कर दिया गया है लेकिन अभी उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है। यानी इन पर अभी डाटा अपलोड नहीं किया जा रहा है।

    स्टेट डाटा सेंटर की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए आइटीडीए के साथ ही एनआइएस, आइफोरसी, सर्ट, एसटीएम व कई विशेषज्ञ एजेंसियां जुटी हुई हैं।

    सचिव सूचना प्रौद्योगिकी नितेश झा का कहना है कि अब साइबर सुरक्षा से बचने के लिए गाइडलाइन तैयार की जा रही हैं। डाटा सेंटर में पुराने कंप्यूटरों को बदला जाएगा। साथ ही सभी सरकारी वेबसाइट व मोबाइल एप का सोशल ऑडिट भी किया जाएगा

    प्रदेश में साइबर हमला कर स्टेट डाटा सेंटर को नुकसान पहुंचाने वाले वायरस की पहचान हो गई है। इस वायरस का नाम माकोप (एमएकेओपी) बताया गया है। उत्तराखंड में पहली बार इस वायरस से हमला किया गया है। यद्यपि यह वायरस पहले भी माइक्रोसाफ्ट, एम्स दिल्ली की वेबसाइट समेत अन्य कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की वेबसाइट पर हमला बोल चुका है।

    यह वायरस क्राइम एंड कंट्रोल ट्रेकिंग नेटवर्क सिस्टम (सिस्टम) के जरिये डाटा सेंटर तक पहुंचा था। यानी इसका सबसे पहला हमला सीसीटीएनएस पर हुआ था। इस समय एसटीएफ व एनआइसी की टीमें वायरस भेजने वाले हैकरों की जांच में जुटी हुई हैं।

    प्रदेश में साइबर हमले से होने वाले डैमेज कंट्रोल की फिलहाल कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। इसे देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग सचिवालय में भी वैकल्पिक डाटा सेंटर तैयार कर रहा है, जहां सारे डाटा का बैकअप रखा जाएगा। इसके लिए स्थान चिह्नित कर लिया गया है। जल्द ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

  • सीएम धामी  ने केंद्र से फोर जी के टावर लगाने का किया अनुरोध

    सीएम धामी ने केंद्र से फोर जी के टावर लगाने का किया अनुरोध

    प्रदेश में 481 टावरों की स्थापना के लिये भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण

     

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया से भेंट कर उन्हें संचार मंत्रालय का दायित्व मिलने पर शुभकामनाएं दी तथा राज्य में संचार सेवाओं के विस्तार से संबंधित विभिन्न विषयों पर उनसे चर्चा की।

    मुख्यमंत्री ने राज्य में संचार व्यवस्था से वंचित क्षेत्रों में भी टावर लगाकर संचार व्यवस्था से आच्छादित किए जाने तथा पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र के गांवों में संचार सुविधाओं के विस्तार तथा रिलाइन्स जिओ द्वारा गुुंजी में लगाये गये टावर को संचालित कराये जाने का भी अनुरोध किया।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संचार मंत्री को अवगत कराया कि नैनीताल के तल्लीताल स्थित डाकघर को नैनीताल की यातायात समस्या के समाधान हेतु अन्यत्र शिफ्ट किया जाना जनहित में आवश्यक हो गया है। जनपद नैनीताल में प्रतिदिन श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढती संख्या तथा विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करौली महाराज का आश्रम ‘श्री कैंची धाम’ की प्रसिद्धि में दिन-प्रतिदिन वृद्धि होने के कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ नैनीताल में पर्यटकों की संख्या में अत्यधिक बढोत्तरी हो रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल को यातायात समस्या के निवारण हेतु पूर्व में आईआईटी, दिल्ली द्वारा नैनीताल की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए किये गये विस्तृत अध्ययन एवम् सुझावों के आधार पर तकनीकी टीम तथा सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नैनीताल के मुख्य चौराहे पर स्थित पोस्ट ऑफिस को जाम की समस्या का प्रमुख कारण माना है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संचार मंत्री से नैनीताल शहर में जाम से मुक्ति तथा यातायात व्यवस्था को सुदृढ करने के लिये नैनीताल नगर के मुख्य चौराहे पर स्थित डाकघर को अन्यत्र शिफ्ट किये जाने की अपेक्षा की।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संचार मंत्री को यह भी अवगत कराया कि 4G सैचुरेशन स्कीम के अन्तर्गत भारत संचार निगम (बी.एस.एन.एल.) द्वारा उत्तराखण्ड में 638 टावर स्थापित किये जाने थे, जिसमें से 481 टावर के लिये भूमि अधिग्रहण की जरूरत थी।

    उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण कर ली गयी है, परन्तु बी.एस.एन.एल. द्वारा अभी 224 टावर ही लगाये गये है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय संचार मंत्री से बी.एस.एन.एल. को त्वरित कार्यवाही हेतु निर्देशित करने का आग्रह किया।

    केंद्रीय संचार मंत्री द्वारा वर्णित विषयों पर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन मुख्यमंत्री को दिया गया है।

  • Apple Smart Ring: स्मार्ट रिंग पर काम कर रहा एपल, दायर किया पेटेंट; एक टच से कंट्रोल कर सकेंगे कई डिवाइस

    Apple Smart Ring: स्मार्ट रिंग पर काम कर रहा एपल, दायर किया पेटेंट; एक टच से कंट्रोल कर सकेंगे कई डिवाइस

    Apple Smart Ring एपल स्मार्ट रिंग को क्यूपर्टिनो कंपनी डेवलप कर रही है। एपल रिंग टच और प्रेसर सेंसिटिव कंट्रोल के के साथ आएगी। नए पेटेंट के मुताबिक स्मार्ट रिंग फीडबैक नोटिफिकेशन जैसी चीजों को एपल रिंग से कंट्रोल किया जा सकेगा। स्मार्ट रिंग्स आमतौर पर ऑउरा जैसे स्लीप ट्रैकर्स की तरह होते हैं। ऑउरा रिंग 4 कॉन्टैक्ट-लेस पेमेंट को सपोर्ट करेगा।

    नई दिल्ली, टेक डेस्क। नॉइज़ और बोट की स्मार्टवॉच लॉन्च के बाद अब एपल Smart Ring पर काम कर रहा है। हाल ही में दिए गए पेटेंट के डिटेल के अनुसार, एपल स्मार्ट रिंग को क्यूपर्टिनो कंपनी डेवलप कर रही है। एपल रिंग टच और प्रेसर सेंसिटिव कंट्रोल के के साथ आएगी। नए पेटेंट के मुताबिक स्मार्ट रिंग फीडबैक नोटिफिकेशन जैसी चीजों को एपल रिंग से कंट्रोल किया जा सकेगा।

    एपल स्मार्ट रिंग जल्द हो सकता है पेश

    संयुक्त राज्य अमेरिका पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय की वेबसाइट पर पाए गए एक दस्तावेज़ के अनुसार, इसके स्थान पर, एपल रिंग वायरलेस कंट्रोल बाहरी बैंड का इस्तेमाल करेगा। उदाहरण के लिए, बैंड को हिलाने से लोग iPhone पर वेबपेज को स्क्रॉल कर सकेंगे। स्मार्ट रिंग्स आमतौर पर ऑउरा जैसे स्लीप ट्रैकर्स की तरह होते हैं।

    हालांकि इस बात के सबूत हैं कि ऑउरा रिंग 4 कॉन्टैक्ट-लेस पेमेंट को सपोर्ट करेगा। एपल ने एक रिंग जैसा दिखने वाले स्मार्ट डिवाइस पर काम करते हुए कई साल बिताए हैं। इसने वीआर डिवाइस के लिए रिंग के आकार के कंट्रोल के लिए वर्षों पहले एक पेटेंट आवेदन दायर किया था।