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  • विश्व बाघ दिवस के अवसर पर पोस्टकार्ड का विमोचन

    विश्व बाघ दिवस के अवसर पर पोस्टकार्ड का विमोचन

    सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध जनभागीदारी जरूरी-सीएम

    वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को किया सम्मानित

    इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से ही साकार होगा सतत विकास का लक्ष्य

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है।

    इसके लिए जनभागीदारी, जन-जागरूकता तथा प्रत्येक नागरिक के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर उत्तराखंड को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाने के संकल्प को साकार करना होगा।

    मुख्यमंत्री ने बुधवार को विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जाखन स्थित एक होटल में आयोजित “एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तन” विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने बाघ संरक्षण पर आधारित चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया।मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक कदम उठाने तथा वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बाघ दिवस के अवसर पर इस विषय पर आयोजित कार्यशाला अत्यंत सार्थक है। यह आयोजन केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक है। यदि हमारे जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो बाघ सुरक्षित रहेंगे और प्रकृति का संतुलन भी सुरक्षित रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता का स्वरूप माना गया है। देवभूमि उत्तराखंड अपनी समृद्ध जैव विविधता, वन संपदा और वन्यजीव संरक्षण के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के वन क्षेत्र इस विरासत के सशक्त प्रतीक हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर्यावरण, नदियों, मिट्टी, जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। वन क्षेत्रों में छोड़ा गया प्लास्टिक अनेक बार वन्यजीवों के भोजन में मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जंगलों, नदियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध प्रभावी और निर्णायक अभियान चलाना समय की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ माँ के नाम, नमामि गंगे तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी पहलों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया है। राज्य सरकार भी पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान, निरीक्षण एवं प्रवर्तन की कार्रवाई कर रही है। चारधाम यात्रा मार्गों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने लोगों से कपड़े के थैले, जूट तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भी प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक अथवा अन्य प्रकार का कचरा न छोड़ने की अपील की। उद्योग जगत से इको-फ्रेंडली पैकेजिंग और आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाने तथा युवाओं से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम सभाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा राज्य को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    इस अवसर पर मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी इशिता सजवाण, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव नीना ग्रेवाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं विषय विशेषज्ञ मौजूद थे।

  • सहकारिता के क्षेत्र में उत्तराखंड सबसे आगे: त्रिवेन्द्र

    सहकारिता के क्षेत्र में उत्तराखंड सबसे आगे: त्रिवेन्द्र

    देहरादून/नई दिल्ली। हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सहकारी समितियों, बागवानी एवं संबद्ध उत्पादों के विपणन को लेकर पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड सहित पर्वतीय राज्यों के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी।

    अमित शाह ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (NCDC) के माध्यम से पर्वतीय राज्यों में कृषि, बागवानी एवं संबद्ध उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले पाँच वर्षों में इन राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा तकनीकी सहयोग और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न पर्वतीय राज्यों में एनसीडीसी के नए कार्यालय भी स्थापित किए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) तथा जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) का गठन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से पर्वतीय राज्यों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने की दिशा में प्रभावी कार्य हो रहा है।

    शाह ने बताया कि उत्तराखंड के किसानों को अब तक 2,488 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं NCOL द्वारा राज्य के किसानों से 417 मीट्रिक टन जैविक गेहूँ, 40 मीट्रिक टन जैविक बासमती तथा 30 मीट्रिक टन जैविक स्वीटनर्स का प्रापण किया गया है।

    इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता आज किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का मजबूत माध्यम बन रही है।

    उन्होंने कहा कि संसद में प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड सहकारिता के क्षेत्र में देश के सभी पर्वतीय राज्यों का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान पर्वतीय राज्यों को एनसीडीसी द्वारा दी गई ₹422.95 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता में से ₹287.95 करोड़ (लगभग 68%) अकेले उत्तराखंड को प्राप्त हुए, जो सभी पर्वतीय राज्यों में सर्वाधिक हैं।

    रावत ने बताया कि उत्तराखंड BBSSL, NCEL और NCOL तीनों राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में सदस्यता के मामले में भी पहले स्थान पर है। राज्य की 551 सहकारी समितियाँ BBSSL, 487 समितियाँ NCEL तथा 387 समितियाँ NCOL की सदस्य हैं, जो पर्वतीय राज्यों में सर्वाधिक हैं। इतना ही नहीं, NCEL की कुल सदस्य समितियों में लगभग 56 प्रतिशत तथा NCOL की लगभग 54 प्रतिशत सदस्य समितियाँ अकेले उत्तराखंड की हैं।

    त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड के कृषि, बागवानी एवं जैविक उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर मूल्य, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “सहकारिता से समृद्धि” का संकल्प उत्तराखंड में तेजी से साकार हो रहा है और आने वाले समय में राज्य देश के लिए सहकारिता का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।

  • टोंस नदी पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त: सरकार ने दिखाई सख्ती, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

    टोंस नदी पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त: सरकार ने दिखाई सख्ती, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

    लापरवाही बर्दाश्त नहीं -सीएम

    तीन दिन में जांच रिपोर्ट तलब, जिम्मेदारी भी होगी तय

    देहरादून। देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टोंस नदी पर नव-निर्मित पुल के एप्रोच रोड का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के मामले में सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।

    सीएम धामी ने कहा है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं कि जाएगी। उन्होंने कहा कि मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
    इधऱ, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को मामले की प्राथमिक जांच कर तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    शासन को विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों से मिली जानकारी के आधार पर जारी पत्र में कहा गया है कि नव-निर्मित पुल के एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने का मामला प्रथम दृष्टया अत्यंत गंभीर है और सीधे तौर पर जनहित तथा लोक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में मामले की तत्काल जांच कर दोष और जिम्मेदारी तय किया जाना आवश्यक है।

    सचिव ने मुख्य अभियंता को निर्देशित किया है कि प्राथमिक जांच के दौरान एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के कारणों का पता लगाया जाए तथा इसके लिए उत्तरदायी अधिकारियों अथवा संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। जांच आख्या तथ्यों और अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ हर हाल में तीन दिनों के भीतर शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    शासन ने स्पष्ट किया है कि यह मामला संवेदनशील होने के साथ-साथ लोक सुरक्षा से संबंधित है, इसलिए जांच में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

    प्रेषक,

    डॉ० पंकज कुमार पाण्डेय

    सचिव,

    उत्तराखण्ड शासन।

  • अक्टूबर में एक बार फिर शुरू होगी आदि कैलाश परिक्रमा

    अक्टूबर में एक बार फिर शुरू होगी आदि कैलाश परिक्रमा

    70 किलोमीटर अल्ट्रा रन से
    स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

    देहरादून। बीते साल से धामी सरकार आदि कैलाश परिक्रमा रन और नीति अल्ट्रा एक्सट्रीम रन को वार्षिक आयोजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आदि कैलाश परिक्रमा रन के दूसरे संस्करण की तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

    पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि सीएम के विशेष निर्देश पर आदि कैलाश परिक्रमा रन का दूसरा संस्करण 24 और 25 अक्टूबर, 2026 को नई ऊर्जा और व्यापक जनसहभागिता के साथ आयोजित किया जाएगा।

    बैठक में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भट्टगाई, कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विनीत तोमर, जिला पर्यटन विकास अधिकारी पिथौरागढ़, जिला पर्यटन विकास अधिकारी नैनीताल तथा उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के उप निदेशक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
    बैठक में पर्यटन सचिव ने जिला प्रशासन द्वारा की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए प्रस्तावित उच्च हिमालयी अल्ट्रा मैराथन के आयोजन, मार्ग निर्धारण, विभिन्न श्रेणियों और आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष प्रतियोगिता में 70 किलोमीटर अल्ट्रा रन श्रेणी को भी शामिल किया जाएगा, जिससे यह आयोजन देश के प्रमुख अल्ट्रा मैराथन आयोजनों में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा।
    उन्होंने निर्देश दिए कि खिलाड़ियों के सत्यापन और प्रतियोगिता के मानकों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी तथा भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के मानकों के अनुरूप आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाए।
    पर्यटन सचिव ने जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सकों, चिकित्सा सहायकों और पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता, सुरक्षा प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था तथा पूरे मार्ग पर आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इस पर जिलाधिकारी ने बताया कि जिला स्तर पर भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय बैठक 27 जुलाई को प्रस्तावित है।
    जिलाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि आयोजन क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 1,400 बिस्तरों की आवासीय क्षमता उपलब्ध है। इस पर पर्यटन सचिव ने वर्तमान और संभावित आवासीय क्षमता का आकलन करने के लिए पुनः वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) का अध्ययन कराने के निर्देश दिए।
    उन्होंने जिला पर्यटन विकास अधिकारी, पिथौरागढ़ को प्रस्तावित मार्ग का शीघ्र निरीक्षण कर विभिन्न श्रेणियों के मार्गों का अंतिम निर्धारण करने के निर्देश दिए। साथ ही जलपान केंद्र, चिकित्सा सहायता केंद्र, शौचालय, विश्राम स्थल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का चिन्हांकन समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने को कहा।
    बैठक में पूरे मार्ग पर इंटरनेट संपर्क व्यवस्था का व्यापक परीक्षण कराने तथा जहां आवश्यकता हो वहां दूरसंचार एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर नेटवर्क व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि प्रतिभागियों, आयोजन टीम और सुरक्षा एजेंसियों को निर्बाध संचार सुविधा उपलब्ध हो सके।

    उन्होंने कहा कि इस वर्ष आयोजन का विशेष फोकस वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी, ग्राम प्रतिनिधियों की सहभागिता, सामुदायिक भोज, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय परंपराओं के माध्यम से क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना होगा।
    उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता वाली तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • उत्तराखण्ड बनेगा अनुसंधान, नवाचार एवं आधुनिक तकनीकी विकास का वैश्विक केंद्र

    उत्तराखण्ड बनेगा अनुसंधान, नवाचार एवं आधुनिक तकनीकी विकास का वैश्विक केंद्र

    देहरादून में बन रही देश की पांचवीं साइंस सिटी देखेंगे स्कूली बच्चे

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विकसित उत्तराखंड की आधारशिला हैं।
    राज्य सरकार उत्तराखंड को अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीकी विकास का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को प्रयोगशालाओं और पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय आमजन के जीवन से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने सोमवार को पायनियर समाचार पत्र समूह एवं उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में आई.आर.डी.टी. सभागार में आयोजित “Mainstreaming Science, Technology and Innovation for a Prosperous Uttarakhand” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व की प्रगति प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की क्षमता से निर्धारित हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीकें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही हैं। इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा प्रतिभा, नवाचार और परिश्रम में किसी से कम नहीं है।आवश्यकता उन्हें आधुनिक संसाधन, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और उपयुक्त अवसर उपलब्ध कराने की है। सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत एवं वैज्ञानिक संस्थानों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में नवाचार आधारित विकास को नई गति दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प की आधारशिला विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे अभियान भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बनाना है। उन्होंने कहा कि देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है, जो उत्तराखंड को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के स्कूली विद्यार्थियों का नियमित रूप से साइंस सिटी भ्रमण कराया जाए, ताकि उनमें विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जोड़ना भविष्य के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीआईएस आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर तथा स्टेम लैब्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, प्री-इन्क्यूबेशन लैब्स तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में वैश्विक स्तर के अवसर उपलब्ध हो सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि देवभूमि उत्तराखंड को वीरभूमि और खेलभूमि के साथ-साथ विज्ञान और नवाचार की भूमि के रूप में भी वैश्विक पहचान मिले। उन्होंने सभी वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत एवं नीति-निर्माताओं का आह्वान किया कि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उत्तराखंड को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

    इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पद्मश्री डॉ.बी.के. संजय, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, पंतनगर यूनिवर्सिटी से प्रो. जे. पी. जयसवाल, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी. पी उनियाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

  • प्रतिभा सम्मान समारोह: मेधावी विद्यार्थियों का गौरवपूर्ण सम्मान

    प्रतिभा सम्मान समारोह: मेधावी विद्यार्थियों का गौरवपूर्ण सम्मान

    विद्या भारती के संस्कार और शिक्षा मॉडल की मुख्यमंत्री ने की सराहना

    मुख्यमंत्री ने किया आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर शिशु वाटिका का लोकार्पण

    हरिद्वार। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान, उत्तराखंड द्वारा रुड़की में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की उत्कृष्ट सफलता यह सिद्ध करती है कि परिश्रम, अनुशासन और संस्कार के बल पर हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा देगा और भविष्य की सभी परीक्षाओं एवं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि विद्या भारती ने सनातन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा देकर देशभर में शिक्षा और संस्कार की मजबूत नींव रखी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1952 में गोरखपुर से प्रारंभ हुआ सरस्वती शिशु मंदिर आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। वर्तमान में विद्या भारती देशभर में करीब 45 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा एवं संस्कार प्रदान कर रही है। विद्या भारती के उत्तराखंड में 562 विद्यालयों में लगभग सवा लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने संगठन के सभी आचार्यों, स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू कर शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाया है। सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, जूते-बैग वितरण, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना, भारत भ्रमण कार्यक्रम, मॉडल कॉलेजों की स्थापना, आईटी लैब एवं छात्रावास निर्माण जैसे अनेक कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही कौशल विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘कौशलम्’ कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। इसके अलावा यूपीएससी, एनडीए और सीडीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे की तैयारी के लिए 50 हजार की वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि वे भारत के वर्तमान और भविष्य हैं। उनके ज्ञान, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व क्षमता के बल पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकेगा और भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित होगा।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर शिशु वाटिका का लोकार्पण भी किया।

    कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर,रुड़की श्रीमती कौशल्या देवी आर्या,केंद्रीय संगठन मंत्री विद्या भारती डोमेशवर साहू, मंत्री भारतीय शिक्षा समिति डॉ रजनीकांत शुक्ला, निर्देशक आई आई टी रुड़की कमल किशोर पंत,जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल,जिलाध्यक्ष भाजपा रुड़की डॉ मधु सिंह, राज्यमंत्री श्यामवीर सिंह सैनी,दिनेश कौशिक, अजीत चौधरी,आदेश सैनी,जिलाधिकारी मयूर दीक्षित,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ,उप जिलाधिकारी भगवानपुर भगवानपुर देवेंद्र नेगी सहित विभिन्न जिलों से आये अभिभावक छात्र छात्राएं मौजूद रहे।

  • उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजे सिंह का निधन

    उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजे सिंह का निधन

    उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष के निधन पर जताया शोक

    देहरादून। उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजे सिंह नेगी के निधन पर संगठन व अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने शोक व्यक्त किया है। उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र मिश्रा व प्रदेश महामंत्री डॉ महावीर सिंह बिष्ट ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राजे सिंह नेगी माध्यमिक शिक्षक संघ के भीष्म पितामह व अशासकीय विद्यालय विनियम एक्ट की चलती -फिरती किताब थे।

    उन्होंने उत्तरप्रदेश राज्य के समय से ही संग़ठन को मजबूती देने का कार्य किया है, उनका निधन माध्यमिक शिक्षक संघ के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है, संग़ठन भविष्य में उनके आदर्शो व मूल्यों पर चलता रहेगा, शोक व्यक्त करने में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र मिश्रा, प्रांतीय महामंत्री डॉ महावीर सिंह बिष्ट, प्रांतीय उपाध्यक्ष अजय बिष्ट, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष संजय रावत, प्रांतीय प्रवक्ता कैलाश थपलियाल ज़िला अध्यक्ष पौड़ी भारत बिष्ट ज़िला मंत्री संदीप रावत , कुलदीप थपलियाल, विजय नौडियाल, संदीप मैंदोला आदि शामिल थे।

    वहीं उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नेगी के निधन पर अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने शोक व्यक्त किया है।
    जिलामंत्री मंगल भूषण सारंग ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र का एक चिराग बुझने से शिक्षको मे शोक की लहर है अपने सम्पूर्ण जीवन काल में उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक शिक्षक के हितो के लिए लडते रहे, न केवल शिक्षाजगत बल्कि सामाजिक क्षेत्र के लिए भी संघर्ष करते थे।
    उनके निधन से समाज के विभिन्न संगठनों से दुख प्रकट किया। जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार ने कहा कि राजे सिंह नेगी को शिक्षको के हमेशा मार्गदर्शक रहे, और हमेशा शिक्षक हितों को सर्वोपरि मानते थे। उनके द्वारा सडक से सदन तक हमेशा शिक्षकों की बात की गई।

  • बड़ी सफलता: सेलाकुई से 15 लाख रुपये की कैटामाइन बरामद

    बड़ी सफलता: सेलाकुई से 15 लाख रुपये की कैटामाइन बरामद

    स्कूटी से सप्लाई करने जा रहे थे नशा तस्कर, दो आरोपी गिरफ्तार

    देहरादून। एसटीएफ की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और सेलाकुई पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1.521 किलोग्राम कैटामाइन बरामद कर दो नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है।
    मादक पदार्थ की कीमत 15 लाख बताई जा रही है।

    दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना सेलाकुई में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22(सी)/29/60 के तहत मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

    एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि एएनटीएफ को मिले इनपुट के आधार पर संयुक्त टीम ने सेलाकुई क्षेत्र में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी स्कूटी की डिक्की में कैटामाइन छिपाकर ले जा रहे थे। मौके पर मौजूद औषधि निरीक्षक ने बरामद मादक पदार्थ की पहचान कैटामाइन के रूप में की।

    प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे खैरी गांव स्थित बर्थवाल के आम के बगीचे के पास एक अज्ञात व्यक्ति को इसकी आपूर्ति करने जा रहे थे। पुलिस अब मादक पदार्थ के स्रोत, इसकी आपूर्ति श्रृंखला और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम कुमार निवासी जमनपुर, सेलाकुई तथा अंकित तिवारी निवासी हरदोई (उत्तर प्रदेश), हाल निवासी सेलाकुई के रूप में हुई है।

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.521 किलोग्राम कैटामाइन, एक जूपिटर स्कूटी और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
    एसएसपी अजय सिंह ने आमजन से नशा तस्करी की सूचना तत्काल पुलिस अथवा एसटीएफ-एएनटीएफ को देने की अपील करते हुए कहा कि “ड्रग्स फ्री देवभूमि” अभियान के तहत नशा तस्करों और संगठित ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

  • परमवीर चक्र वीरों की अनुग्रह राशि बढ़ाकर ₹2 करोड़ करेंगे: सीएम

    परमवीर चक्र वीरों की अनुग्रह राशि बढ़ाकर ₹2 करोड़ करेंगे: सीएम

    अभी तक 28 शहीदों आश्रितों को मिली सरकारी नौकरी

    शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को याद किया

    कारगिल विजय दिवस

    कारगिल के अमर शहीदों का त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे : मुख्यमंत्री

    देहरादून। प्रदेश की भाजपा सरकार परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों की अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ करेगी। राज्य सरकार अभी तक 28 शहीदों आश्रितों को सरकारी नौकरी दे चुकी है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को शहीद स्मारक पर कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए यह घोषणा की।
    इस अवसर पर उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए उनके अद्वितीय त्याग, शौर्य और राष्ट्रसेवा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगी ।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है।
    उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक  ऊंचाई पर अत्यंत विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता, अटूट मनोबल और सर्वोच्च बलिदान का परिचय देते हुए दुश्मन को परास्त किया तथा विश्व के समक्ष भारत की सैन्य शक्ति और दृढ़ संकल्प का परिचय कराया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। प्रदेश की गौरवशाली सैन्य परंपरा, वीरता पदक विजेताओं की समृद्ध विरासत तथा यहां के युवाओं का राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की सुरक्षा नीति अधिक सशक्त, निर्णायक और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हुई है।
    उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आधारभूत संरचना का तीव्र विकास तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए गए प्रयास नए भारत की शक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तथा सैनिक कल्याण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णयों से देश के सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों का सम्मान बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा शहीद परिवारों के कल्याण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। इसके साथ ही सभी वीरता पुरस्कार विजेताओं को दी जाने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करना, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु सहायता,   वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा तथा सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को संपत्ति क्रय पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी अनेक जनकल्याणकारी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के जिला अदालतों में भूमि धोखाधड़ी के जो मामले पेंडिंग हैं, उनके शीघ्र निस्तारण के प्रयास किये जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के ‘पांचवें धाम’ के रूप में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से निर्मित यह सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान का प्रेरणा-स्थल बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी ठोस कदम उठा रही है। सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ गठित किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग तथा अन्य राज्य सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता देने, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि कारगिल के अमर शहीदों के त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर विकसित भारत तथा विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

    सैनिक कल्याण मंत्री  गणेश जोशी ने कहा कि  राज्य सरकार ने वीरता पुरस्कार विजेताओं की सम्मान राशि में वृद्धि की है ।  अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।

    इस अवसर पर  राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक  मुन्ना सिंह चौहान,  दायित्वधारी  सुभाष बड़थ्वाल, सचिव  सैनिक कल्याण युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (से.नि), जिलाधिकारी डॉ .आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल, पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं शहीदों के परिजन उपस्थित थे।

  • सांस्कृतिक व सामाजिक संरक्षण में लेखकों की भूमिका अहम: सीएम

    सांस्कृतिक व सामाजिक संरक्षण में लेखकों की भूमिका अहम: सीएम

    मुख्यमंत्री ने लेखकों एवं साहित्यकारों से किया संवाद

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को  वरिष्ठ लेखकों एवं साहित्यकारों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी स्वरचित पुस्तकें भेंट कीं।

    मुख्यमंत्री ने प्रत्येक लेखक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनके साहित्यिक योगदान और वर्तमान लेखन पर विस्तार से चर्चा की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक चेतना के संवर्धन में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सशक्त साहित्यिक वातावरण तैयार करने तथा साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास सहित अनेक ऋषि-मुनियों की तपोभूमि एवं कर्मभूमि रही है। इस पावन भूमि ने ऐसे साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने भारतीय साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में अध्ययन और लेखन की संस्कृति विकसित करने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से प्रदेश के पुराने, बिखरे एवं अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से दो साहित्य ग्राम स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। साहित्यकारों के सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए वर्ष 2022 में ‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ तथा वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ प्रारम्भ किए गए हैं।

    रुद्रप्रयाग के ‘1000 पुस्तक दान अभियान’ को मुख्यमंत्री का सहयोग

    हरेला पर्व के अवसर पर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘1000 पुस्तक दान अभियान’ को मुख्यमंत्री ने अपना सहयोग प्रदान किया। उन्होंने ‘लेखकों से संवाद’ कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने की घोषणा की।

    गौरतलब है कि रुद्रप्रयाग में “एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्य” थीम पर सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए पुस्तक संग्रह अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकें समाज में ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच का आधार होती हैं। उनका यह योगदान पुस्तक दान की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं में अध्ययन की आदत को भी प्रोत्साहित करेगा।

    इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह,पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल  ललित मोहन रयाल, साहित्यकार प्रो .सुधा रानी पांडे, आलोक लाल, बुद्धिनाथ मिश्रा, प्रेम कुमार साहिल, शिव मोहन सिंह,  राम मोहन सिंह, सुश्री नेहा नेगी,  कुलभूषण केन,  अनमोल जैन,  रूपा सोनी,  अमर खरबंदा,  शीशपाल गुसाईं, रमाकांत, दिवेश जोशी,  प्रभा पंत,  रूबी गुप्ता,  रणधीर कुमार अरोड़ा सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य उपस्थित रहे।