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  • जनता के द्वार पहुंच समस्याओं का समाधान कर रही सरकार: सीएम

    जनता के द्वार पहुंच समस्याओं का समाधान कर रही सरकार: सीएम

    ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान से शासन और जनता के बीच बढ़ा विश्वास : मुख्यमंत्री

    एक हजार से अधिक लोगों ने कराया पंजीकरण

    विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला

    सहसपुर में सेवा, सुशासन एवं समर्पण कार्यक्रम के तहत आयोजित हुआ जनसेवा शिविर

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को श्री गुरु रामराय पब्लिक स्कूल, सहसपुर में ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जनसेवा शिविर में प्रतिभाग करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शासन-प्रशासन को जनता के और अधिक निकट लाना है। सरकार की प्राथमिकता है कि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुंचकर सेवाएं उपलब्ध कराए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और सुशासन का वास्तविक अर्थ संवेदनशील, जवाबदेह एवं जनकेंद्रित प्रशासन है। उन्होंने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान ने शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत किया है तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के प्रथम चरण में प्रदेशभर में 65 दिनों के दौरान लगभग 700 जनसेवा शिविर आयोजित किए गए, जिनमें पांच लाख से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। देहरादून जनपद में आयोजित 46 शिविरों में 60 हजार से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की तथा लगभग 39 हजार लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया गया।

    उन्होंने कहा कि ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सेवा पखवाड़े के तहत प्रदेशभर में जनसेवा शिविर लगाए जा रहे हैं। 4 जुलाई से प्रारंभ हुए सेवा पखवाड़े में अब तक 64 हजार से अधिक नागरिकों ने प्रतिभाग किया है। इस दौरान प्राप्त 5,567 जनसमस्याओं में से 4,951 का समाधान सुनिश्चित किया गया है तथा 2,522 नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं सेवाओं से लाभान्वित किए जाने की प्रक्रिया संचालित की गई है।

    मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आयोजित शिविर में 01 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस अवसर पर पात्र लाभार्थियों को विभिन्न विभागों की योजनाओं के अंतर्गत प्रमाण-पत्र एवं अन्य सहायता वितरित की गई। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से आमजन को योजनाओं की जानकारी देने के साथ मौके पर ही आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा” का विजन आज तेजी से साकार हो रहा है। राज्य में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन, उद्योग, निवेश एवं हवाई संपर्क सहित प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहली बार जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों, शीतकालीन यात्रा तथा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे ऐतिहासिक आयोजनों का सफल आयोजन हुआ। राज्य की अर्थव्यवस्था निरंतर सुदृढ़ हो रही है तथा निवेश, उद्योग, स्टार्टअप और पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड नई पहचान बना रहा है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। युवाओं के हितों की रक्षा के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां मिली हैं। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा, सड़क, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा तथा कृषि के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखण्ड’ के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा प्रत्येक नागरिक तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौके पर ही दिए जन समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

    सहसपुर में आयोजित सेवा, सुशासन, सम्पर्ण ‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ बहुउद्देशीय शिविर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ना सिर्फ जन समस्याओं को सुना बल्कि मौके पर ही अधिकारियों को जन समस्याओं का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए।
    कारबारी ग्रांट निवासी सुमन बासकंडी ने मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में साईलोक कारबारी ग्रांट में 30 सोलर लाइट लगाने की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री ने एमडीडीए को 2 माह के भीतर सोलर लाइट लगाने के लिए निर्देशित किया। इसी तरह स्थानीय निवासी बबली गुप्ता ने मुख्यमंत्री को जूट बैग बनाने के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के लिए मांगपत्र सौंपा, जिस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें आज ही सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। इसी तरह सेलाकुईं नगर पंचायत के सभासद अनिल नौटियाल ने आंतरिक मार्ग, नालियां, जल निकासी व्यवस्था, इंटरलॉकिंग सीसी मार्ग सहित अन्य विकास कार्यों की मांग की थी, जिस पर मुख्यमंत्री ने शहरी विकास निदेशालय को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। गोकुल फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट की मांग पर मुख्यमंत्री ने ट्रस्ट की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसी तरह नंदन संह कंडारी ने भाऊवाला पुल किनारे श्मशान घाट निर्माण की मांग उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने एमडीएम को दो माह में श्मशान निर्माण के निर्देश दिए। यशपाल सिंह नेगी ने अटकफार्म और सेंट्रल होपटाउन में बंदोबस्त कार्य पूरा न होने के कारण, पेश आ रही दिक्कतों को दूर करने की मांग की, मुख्यमंत्री ने सचिव राजस्व को इस समस्या का 15 दिन में समाधान करने के निर्देश दिए। शिविर में शांति विहार सुधार एवं विकास समिति ने भगवानपुर बहुगुणा मार्ग में डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी के नाम पर पार्क और ओपन जिम निर्माण की मांग की, मुख्यमंत्री ने एमडीडीए को कार्रवाई को कहा है। इसी तरह उन्होंने ग्राम बडोवाला में डिस्पेंसरी और एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग पर भी स्वास्थ्य विभाग को एक माह में जरूरी कार्रवाई के लिए कहा।

    इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सहसपुर सहदेव सिंह पुण्डीर, दायित्वधारी विनय रोहिला, पुनीत मित्तल, ओमवीर सिंह, भुवन विक्रम डबराल, भाजपा के जिलाध्यक्ष मीता सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष नीरू देवी, अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोभाल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह एवं जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • SIR द्वितीय चरण: ERO-AERO के विशेष सुनवाई कैंप शुरू होंगे

    SIR द्वितीय चरण: ERO-AERO के विशेष सुनवाई कैंप शुरू होंगे

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर SIR पर की समीक्षा

    दावे-आपत्तियों के निस्तारण में मानसून के चलते मतदाता को न हो परेशानी- सीईओ

    देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम ने शुक्रवार को कुमांऊ गढ़वाल के मंडल आयुक्तों सहित सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांन्फ्रेंस कर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) की समीक्षा की। बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि SIR के अगले चरण ड्राफ्ट पब्लिकेशन, नोटिस फेज और दावे आपत्तियों के निस्तारण के समय मतदाताओं को किसी प्रकार अनावश्यक परेशानी ना हो। उन्होंने निर्देश दिए कि पहाड़ी जनपदों में मानसून के दौरान सड़क अवरुद्ध या आवाजाही प्रभावित होने के दृष्टिगत पहले से ही नोटिस के जवाव और दावे आपत्तियों की सुनवाई के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। जिन स्थानों पर ईआरओ/एईआरओ मतदाताओं के नोटिस पर सुनावाई करेंगे उन स्थानों पर बिजली, पानी, इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्केनर और फोटो कॉपी मशीन का उचित प्रबंध किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पहाड़ी क्षेत्रों में दावे आपत्तियों के निस्तारण के लिए न्याय पंचायत स्तर पर कल्सटर में कैम्प लगाने हेतु रोस्टर तैयार किया जाए। मैदानी क्षेत्र के मतदाताओं की सुविधा के लिए तहसील के अतरिक्त नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड लेवल पर कैंप का रोस्टर तैयार किया जाए।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि ईआरओ और एईआरओ की सहायता हेतु डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के लिए शिक्षा, राजस्व, तहसील सहित सम्बंधित विभागों से नोडल अधिकारी नामित किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 70 ईआरओ के साथ ही 800 एईआरओ की भी तैनाती की गई है, उन्होंने जनपदों को निर्देश दिए कि जहां एईआरओ की सख्या और बढ़ाई जानी है उसके प्रस्ताव शनिवार तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध करा दिए जाएं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दोनों मंडल में मंडलायुक्त 14 जुलाई से जनपदों की फील्ड विजिट कर स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी डीईओ / ईआरओ को निर्देश दिए कि ड्राफ्ट पब्लिकेशन के दृष्टिगत समय पर जनपद एवं विधानसभा स्तर पर राजनैतिक दलों के साथ बैठक कर राजनैतिक दलों को ड्राफ्ट मतदाता सूची सौंपी जाए।

    बैठक में कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरुप, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चन्द्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित सभी जनपदों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

  • उद्योग समूहों के सहयोग से गति पकड़ेगी उत्तराखंड की विकास यात्रा : मुख्यमंत्री

    उद्योग समूहों के सहयोग से गति पकड़ेगी उत्तराखंड की विकास यात्रा : मुख्यमंत्री

    बड़े औद्योगिक घरानों के साथ हुआ MOU

    ‘उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग’ कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ किया संवाद

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने ‘उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग’ कार्यक्रम में  उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से प्रदेश की विकास यात्रा में सहयोग करने की अपील की है।
    मुख्यमंत्री ने कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों, विभिन्न केंद्रीय उपक्रमों के अधिकारियों, सीएसआर पार्टनर्स, उद्योग एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि हमारे धर्म ग्रंथों में भी लिखा गया है कि तीर्थ स्थलों पर किए गए दान पुण्य का विशेष महत्व है।

    इसलिए कॉरपोरेट समूहों द्वारा देवभूमि उत्तराखंड में, सीएसआर के तौर पर दिए गए योगदान का महत्व भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि देवभूमि में जन्म लेना का अवसर तो ईश्वर देता है, लेकिन हर कोई देवभूमि में कर्म कर अपना योगदान दे सकता है। इसलिए सभी लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत से समूह सीएसआर के तहत शानदार काम कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड में स्थापित अन्य समूहों से भी अपना सीएसआर उत्तराखंड में ही खर्च करने की अपील की।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ये कार्यक्रम कोई औपचारिक बैठक नहीं बल्कि देवभूमि उत्तराखंड के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक साझा संकल्प है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में कौशल विकास, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम विकास तथा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए किए गए हैं। साथ ही देश के प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट समूहों ने उत्तराखंड के लिए कई नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा भी की है।

    उत्तराखंड की विकास संबंधित चुनौतियां भिन्न

    इस मौके मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट परिस्थितियाँ हैं, उत्तराखंड एक पर्वतीय और सीमांत प्रदेश है। यहां की पारिस्थितिकी अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए इस राज्य की विकास संबंधी चुनौतियाँ भी अन्य राज्यों से भिन्न हैं। यहां ज्यादा संसाधन और मेहनत खर्च करनी पड़ती है। इसलिए हमारे लिए “समग्र विकास” का अर्थ केवल सड़कें, भवन और आधारभूत संरचनाएँ खड़ी करना ही नहीं है बल्कि रोजगार सृजन, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच समन्वय स्थापित करना है। इसलिए राज्य को ऐसा विकास चाहिए जो पहाड़ों की संवेदनशीलता का सम्मान करे, साथ ही जंगलों और नदियों को भी सुरक्षित रखने के साथ ही युवाओं को राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उद्देश्य की प्राप्ति में कॉरपोरेट जगत का अनुभव, संस्थागत क्षमता, आधुनिक प्रबंधन शैली और सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    औद्योगिक विकास को समर्पित सरकार

    मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्रदेश सरकार उत्तराखंड को औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में वर्ष 2023 में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ का आयोजन किया, जिसमें राज्य को 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे।

    इसमें से अब तक 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में सफलता मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने व्यापार को सुगम बनाने के लिए लाइसेंसिंग प्रोसेस को आसान करते हुए जहां एक ओर सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था लागू की है। वहीं औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक नीति, स्टार्टअप नीति और MSME नीति सहित 30 से अधिक नीतियां लाकर उद्योगों को एक बेहतरीन और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने का काम किया है।

    इसके साथ ही राज्य में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर्स की स्थापना और 200 करोड़ रुपए के वेंचर फंड की व्यवस्था भी की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इन्हीं प्रयासों से नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसके साथ-साथ, उत्तराखंड को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में ‘एचीवर्स’ तथा स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ की श्रेणी प्राप्त हुई है।

    पारदर्शी नीतियों का लाभ मिला उद्योगों को

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किसी भी राज्य में अच्छा औद्योगिक माहौल तब तक नहीं बन सकता जब तक कि शासन में पारदर्शिता न हो। इसीलिए, प्रदेश सरकार ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए बीते वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की है।

    राज्य सरकार की पारदर्शिता का सीधा लाभ उद्यमियों को मिल रहा है। उन्हें अब योजनाओं की स्वीकृति, जमीन आवंटन, औद्योगिक लाइसेंस या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किसी भी अनावश्यक बाधा या भ्रष्टाचार का सामना नहीं करना पड़ता है।

    मुख्यमंत्री ने उद्यमी को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश के अग्रणी “इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट” के रूप में स्थापित करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि कॉर्पोरेट कुशलता और प्रदेश सरकार की पारदर्शी नीतियां मिलकर एक ऐसी ‘सस्टेनेबल इकोनॉमी’ का निर्माण करेंगी, जो पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगी।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव  आर.के सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय, एमडी सिडकुल डॉ. सौरभ गहरवार, अपर सचिव  मनमोहन मैनाली शामिल हुए।

    इनके साथ हुआ एमओयू

    किया, हुंडई, लर्नेंट – इंफोशिस फाउंडेशन, ओएनजीसी, आईटीसी, महेंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड, आदित्य बिरला कैपिटल, फिनोलेक्स, पैनोसोनिक।

  • रानीबाग-भीमताल रोप-वे को जल्द मिले रफ्तार

    रानीबाग-भीमताल रोप-वे को जल्द मिले रफ्तार

    देहरादून।  सीएम धामी से गुरूवार को आवास सलाहकार परिषद की उपाध्यक्ष भावना मेहरा ने मुलाकात की।
    उन्होंने रानीबाग-भीमताल रोप-वे परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन से संबंधित पत्र सौंपा।
    उन्होंने कहा कि रानीबाग-भीमताल रोप-वे परियोजना क्षेत्र के पर्यटन और आधारभूत विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    सीएम धामी ने कहा कि कुमायूं क्षेत्र के इन प्रमुख पर्यटन स्थलों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए रोप-वे परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रानीपुर, भीमताल, नैनीताल व कैंचीधाम के लिए रोप-वे परियोजनाये इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने में मददगार होंगे। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही का भी आश्वासन दिया है।

  • रेल कनेक्टिविटी विस्तार पर सीएम ने की चर्चा

    रेल कनेक्टिविटी विस्तार पर सीएम ने की चर्चा

    केन्द्रीय रेल मंत्री ने दिया प्रस्तावों पर आवश्यक कार्यवाही किये जाने का आश्वासन

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर राज्य में रेल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, रेल संपर्क के विस्तार तथा राज्य की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर चर्चा की।
    मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, धार्मिक एवं पर्यटन महत्व तथा जनहित की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रस्ताव केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में से एक है। चारधाम यात्रा, हरिद्वार एवं ऋषिकेश के धार्मिक स्थलों, योग एवं आध्यात्मिक पर्यटन तथा आगामी कुम्भ-2027 के आयोजन के दृष्टिगत प्रतिवर्ष देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु एवं पर्यटक राज्य में पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती यात्री संख्या एवं पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए राज्य में आधुनिक, सुदृढ़ एवं सुविधाजनक रेल नेटवर्क का विस्तार समय की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री को अवगत कराया कि महाराष्ट्र, विशेषकर मुम्बई में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड मूल के नागरिक निवास करते हैं, जिनका अपने गृह राज्य से निरंतर आवागमन बना रहता है। इसके साथ ही चारधाम, बाबा नीम करौली धाम (श्री कैंची धाम), जागेश्वर धाम सहित राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। वर्तमान में मुम्बई से हरिद्वार एवं रामनगर के लिए संचालित रेल सेवाओं की संख्या एवं आवृत्ति यात्रियों की आवश्यकता के अनुरूप नहीं है, जिससे यात्रा सीजन, चारधाम यात्रा, अवकाश एवं त्योहारों के दौरान यात्रियों को आरक्षण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मुम्बई-देहरादून के मध्य वन्दे भारत अथवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा प्रारम्भ करने तथा मुम्बई-हरिद्वार एवं मुम्बई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे यात्रियों, प्रवासी उत्तराखण्डवासियों एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी तथा राज्य में पर्यटन, व्यापार एवं निवेश को नई गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने मुम्बई-देहरादून के मध्य वन्दे भारत अथवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा प्रारम्भ करने तथा मुम्बई-हरिद्वार एवं मुम्बई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन रेल सेवाओं के विस्तार से यात्रियों, प्रवासी उत्तराखण्डवासियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधा प्राप्त होगी तथा राज्य में पर्यटन, व्यापार एवं निवेश को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने देहरादून-कोटा रेल सेवा को सूरत-वड़ोदरा-मुम्बई तक विस्तारित करने तथा रामनगर-मुम्बई एवं हरिद्वार-मुम्बई रेल सेवाओं को नियमित अथवा सप्ताह में कम से कम तीन दिन संचालित किए जाने का भी अनुरोध किया।

    मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन को बंद कर उसकी भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB), उत्तराखण्ड सरकार एवं रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA), रेल मंत्रालय के मध्य एसेट मॉनेटाइजेशन एवं ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की समग्र मास्टर प्लानिंग के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इस संबंध में RLDA को आवश्यक औपचारिक निर्देश प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया।

    मुख्यमंत्री ने राज्य की प्रमुख रेल परियोजनाओं के संबंध में किच्छा-सितारगंज-खटीमा नई रेल लाइन परियोजना की सम्पूर्ण लागत भारत सरकार द्वारा वहन किए जाने, सर्वेक्षण कार्य से संबंधित स्थानीय किसानों की चिंताओं का समाधान किए जाने तथा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अंतर्गत शीघ्र रेल संचालन प्रारम्भ करने का अनुरोध किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आजीविका एवं अन्य कारणों से मुम्बई सहित देश के विभिन्न स्थानों में निवास करते हैं। वहीं चारधाम, बाबा नीम करौली धाम (श्री कैंची धाम), जागेश्वर धाम सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। राज्य के कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशन रामनगर, देहरादून एवं हरिद्वार हैं, जहां से पर्वतीय क्षेत्रों के यात्रियों को रेल सुविधा उपलब्ध होती है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेल सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता पर मुख्यमंत्री ने विशेष बल दिया।

    मुख्यमंत्री ने टनकपुर से संचालित त्रिवेणी एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस एवं दौराई एक्सप्रेस के यात्रा मार्ग में पड़ने वाले बनबसा रेलवे स्टेशन पर अल्प समय के ठहराव की व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि बनबसा भारत-नेपाल सीमा से लगा हुआ व्यापारिक एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है तथा यहां भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट की यूनिट भी स्थापित है। बनबसा स्टेशन पर ठहराव से स्थानीय नागरिकों, यात्रियों एवं सेना को बेहतर परिवहन सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने बनबसा स्टेशन पर उक्त रेल सेवाओं के अल्प ठहराव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की।

    मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण के अंतर्गत रायवाला से देहरादून तक लंबित कार्य को शीघ्र पूर्ण करने तथा हरिद्वार, हर्रावाला, देहरादून, खटीमा, लक्सर, रुड़की, टनकपुर एवं बनबसा रेलवे स्टेशनों के सौन्दर्यीकरण एवं विस्तारीकरण का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने उक्त प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की।

    मुख्यमंत्री ने खटीमा-मझोला पीलीभीत के मध्य रेलवे फाटक संख्या-18C को जनहित में पुनः खोले जाने का अनुरोध भी केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि रेलवे फाटक बंद होने से स्थानीय ग्रामीणों, कृषकों एवं पर्यटकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित कोकोडायल पार्क में आने वाले पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए रेलवे फाटक का संचालन पुनः प्रारम्भ किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति प्रदान कर दी है।

    केंद्रीय रेल मंत्रीअश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत विभिन्न प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

  • उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य

    उत्तराखंड बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य

    यह उपलब्धि राज्य के लिए मील का पत्थर – सीएम धामी

    नई शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास’ अभियान की सफलता

    शिक्षा के क्षेत्र में रचा नया इतिहास

    देहरादून। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। नई शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास (Understanding of Lifelong Learning for All in Society)’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत राज्य ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित साक्षरता के सभी मानकों को पूरा कर लिया है। इसके बाद 8 जुलाई 2026 को राज्यपाल की सहमति से उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित कर दिया गया।

    उत्तराखंड से पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल कर चुके हैं। अब उत्तराखंड भी इस गौरवशाली सूची में शामिल हो गया है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि सरकार के सतत प्रयासों और प्रदेशवासियों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, सतत शिक्षा और जीवनोपयोगी कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी तथा राज्य सरकार इन्हें प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
    विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य घोषित होना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ‘उल्लास’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। उनके अनुसार साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, आत्मनिर्भरता और समग्र विकास का आधार है। यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड के लिए एक नया कीर्तिमान है।

    शिक्षा मंत्री ने इस सफलता का श्रेय शिक्षकों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, स्वयंसेवकों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों को देते हुए सभी को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव रवीनाथ रमन ने कहा कि पूर्ण साक्षरता सामाजिक और आर्थिक विकास की आधारशिला है तथा ‘उल्लास’ कार्यक्रम के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वहीं महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोंडे ने कहा कि राज्य के सभी जनपदों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और समुदाय के साझा प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हो सकी है। आगे भी शिक्षा की गुणवत्ता और आजीवन सीखने के अवसरों को और मजबूत बनाया जाएगा।

  • पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर पर होगा व्यापक शोध

    पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर पर होगा व्यापक शोध

    तैयार होगी शोध-आधारित रणनीति

    देहरादून। उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों से भोजन नली अर्थात् इसोफेगस के कैंसर से पीड़ित मरीज उपचार के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग में पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में दिखाई दे रहे रुझानों को वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग ने इस विषय पर व्यापक शोध शुरू करने का निर्णय लिया है।

    इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह जानना होगा कि पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों में भोजन नली के कैंसर के पीछे तम्बाकू, धूम्रपान, शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म चाय, भोजन या अन्य पेय पदार्थों का नियमित सेवन, फल एवं सब्जियों की कमी, पोषण संबंधी असंतुलन, मोटापा, एसिड रिफ्लक्स, घरों के भीतर धुएं का संपर्क, पेयजल की गुणवत्ता, पर्यावरणीय परिस्थितियां तथा अन्य स्थानीय कारणों की क्या भूमिका है। किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने के बजाय सभी संभावित जोखिम कारकों का व्यवस्थित एवं प्रमाण-आधारित अध्ययन किया जाएगा।
    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने बताया कि अस्पताल में उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी जिलों से भोजन नली के कैंसर के अनेक मरीज उपचार के लिए आते हैं। अब तक कई मरीजों का सर्जरी, कीमोथेरेपी तथा अन्य आधुनिक उपचार विधियों से सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है। अस्पताल में उपचार प्राप्त कर चुके कई मरीज पांच वर्ष से अधिक समय से जीवित हैं और सामान्य एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भोजन नली के कैंसर की जांच और उपचार के लिए अपर जीआई एंडोस्कोपी, बायोप्सी, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन तथा अन्य आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन जांचों के आधार पर बीमारी की अवस्था, मरीज के सामान्य स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति का आकलन कर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांचों अथवा उपचार के लिए संबंधित विशेषज्ञ केन्द्रों के साथ समन्वय भी किया जाता है।

    अस्पताल में कीमोथेरेपी, ओपन एवं दूरबीन विधि से कैंसर सर्जरी, ऑपरेशन के बाद गहन चिकित्सा, दर्द नियंत्रण, पोषण सहायता, फिजियोथेरेपी तथा नियमित फॉलो-अप की सुविधाएं उपलब्ध हैं। जटिल मामलों में कैंसर विशेषज्ञ, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तथा पोषण विशेषज्ञ मिलकर मरीज की उपचार योजना तैयार करते हैं।

    डॉ. गर्ग ने बताया कि चयनित मरीजों में भोजन नली के कैंसर का ऑपरेशन दूरबीन विधि, अर्थात् मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी, से भी किया जाता है। इसमें छाती और पेट पर बड़े चीरे लगाने के बजाय छोटे छेदों के माध्यम से सर्जरी की जाती है। उचित मरीज के चयन और अनुभवी सर्जिकल टीम द्वारा किए जाने पर इस तकनीक से ऑपरेशन के बाद दर्द, फेफड़ों से संबंधित जटिलताओं और अस्पताल में रहने की अवधि को कम करने तथा मरीज को शीघ्र सामान्य गतिविधियों में लौटने में सहायता मिल सकती है।
    भोजन नली का कैंसर मुख्यतः दो प्रकार का होता है। स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का संबंध तम्बाकू, धूम्रपान, शराब, अत्यधिक गर्म भोजन या पेय पदार्थ तथा पोषण की कमी से हो सकता है। दूसरे प्रकार, एडेनोकार्सिनोमा, का संबंध लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स, बैरेट इसोफेगस और मोटापे से हो सकता है। कई मरीजों में एक से अधिक जोखिम कारक एक साथ मौजूद रहते हैं।

    डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने कहा कि भोजन नली का कैंसर प्रारम्भिक अवस्था में प्रायः कोई स्पष्ट लक्षण उत्पन्न नहीं करता। इसलिए निगलने में लगातार कठिनाई, ठोस भोजन का अटकना, बार-बार भोजन वापस आना, बिना कारण वजन कम होना, छाती में दर्द या जलन, लगातार खांसी अथवा आवाज में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से निगलने में बढ़ती कठिनाई होने पर मरीज को शीघ्र विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यकता होने पर अपर जीआई एंडोस्कोपी करानी चाहिए।

    कैंसर की शीघ्र पहचान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रारम्भिक अवस्था में बीमारी का पता चलने पर पूर्ण उपचार और लंबे समय तक स्वस्थ रहने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे मरीजों को एंडोस्कोपिक उपचार, सर्जरी अथवा संयुक्त उपचार से दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। बीमारी के शरीर के अन्य अंगों तक फैल जाने के बाद उपचार अधिक जटिल हो जाता है और परिणाम अपेक्षाकृत कम अनुकूल होते हैं।
    शोध के दौरान मरीजों की आयु, निवास स्थान, खान-पान, तम्बाकू एवं शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म खाद्य या पेय पदार्थों की आदत, पोषण की स्थिति, पेशा, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियां, पर्यावरणीय संपर्क, बीमारी की अवस्था, उपचार और दीर्घकालिक परिणामों का अध्ययन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य चिकित्सा एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ भी सहयोग स्थापित किया जाएगा।

    अस्पताल का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना नहीं है, बल्कि शोध के आधार पर भोजन नली के कैंसर की रोकथाम, उच्च जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान, जन-जागरूकता, उपयुक्त जांच और बचाव संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करना भी है। यह शोध उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में कैंसर के वास्तविक कारणों और बदलते स्वरूप को समझने तथा भविष्य की कैंसर नियंत्रण नीति और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामले में बीकेटीसी कर्मी निलंबित

    बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामले में बीकेटीसी कर्मी निलंबित

    विपक्ष का भारी विरोध, बीकेटीसी ने उठाया कदम

    व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल तत्काल प्रभाव से निलंबित

    निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित

    जोशीमठ। बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी की घटना को लेकर गठित जांच समिति ने बीकेटीसी कर्मी को निलंबित कर दिया है।

    श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

    समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर 03 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।

    प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जांच समिति की प्रारंभिक आख्या का परीक्षण करने पर आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। समिति ने यह भी माना कि कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें बीकेटीसी कार्यालय, जोशीमठ (जनपद चमोली) से संबद्ध किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी तथा उन्हें जांच एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपेक्षित सहयोग देना अनिवार्य होगा।

    बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि समिति प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्वेदी पर हमला बोला हुआ है।

  • दिवंगत पत्रकार खुशहाल गिरि गोस्वामी को श्रद्धांजलि, नम आँखों से किया स्मरण

    दिवंगत पत्रकार खुशहाल गिरि गोस्वामी को श्रद्धांजलि, नम आँखों से किया स्मरण

    देहरादून। उत्तरांचल प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य खुशहाल गिरि गोस्वामी के आकस्मिक निधन पर क्लब में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। पत्रकारिता जगत के अनेक वरिष्ठ जनों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    गोस्वामी का 4 जुलाई (शनिवार) को गंभीर बीमारी के चलते जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया था। उनके निधन से उत्तरांचल प्रेस क्लब एवं पत्रकारिता जगत में गहरा शोक व्याप्त है।

    इस अवसर पर प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय सिंह राणा ने कहा कि खुशहाल गिरि गोस्वामी का सरल स्वभाव और पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सभी के लिए प्रेरणास्रोत थी।
    उन्होंने बताया कि गोस्वामी मूल रूप से चौखुटिया, अल्मोड़ा से है और वे अपने पीछे कैंसर पीड़ित पत्नी व दो पुत्रों को छोड़ गए।

    महामंत्री योगेश सेमवाल ने दिवंगत खुशहाल गिरि गोस्वामी की पत्रकारिता और उनके सरल व्यवहार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तरांचल प्रेस क्लब स्व. खुशहाल गिरि गोस्वामी के परिवार के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

    इस अवसर पर प्रेस क्लब वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह नेगी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सोबन सिंह गुसाईं, कोषाध्यक्ष मनीष डंगवाल, कार्यकारिणी सदस्य रश्मि खत्री, मनबर सिंह रावत, वरिष्ठ सदस्य लक्ष्मी प्रसाद बड़ोनी, राजेश बड़थ्वाल, महेश पाण्डेय, राजकिशोर तिवारी, वीरेन्द्र सिंह नेगी, राजकुमार धीमान, राजेश बहुगुणा, शहजाद अली, बिजेन्द्र सिंह राणा, किशोर रावत, योगेश शैली समेत कई सदस्य मौजूद रहे।

  • डीएम का बड़ा फैसला: डेयरी प्रबंधक का वेतन रोका

    डीएम का बड़ा फैसला: डेयरी प्रबंधक का वेतन रोका

    जालसाज व धोखेबाजों पर कठोर कार्रवाई की तैयारी

    ‘समाधान दिवस’ – 169 शिकायतें, कई का मौके पर समाधान

    अवैध प्लाटिंग और कब्जों पर प्रशासन सख्त

    देहरादून । डीएम ने कलेक्ट्रेट परिसर में आहूत ‘समाधान दिवस’ में दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (आंचल डेयरी), रायपुर रोड के प्रबंधक के वेतन आहरण पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए।

    अधोईवाला निवासी नितिन कुमार ने शिकायत की कि दुग्ध संघ में कार्यरत उनकी माता को बार-बार चक्कर काटने के बाद भी एसीपी का भुगतान नहीं किया गया है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डीएम ने दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (आंचल डेयरी), रायपुर रोड के प्रबंधक के वेतन आहरण पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए और पीड़ित को तुरंत भुगतान सुनिश्चित करने को कहा।

    समाधान दिवस में भूमि विवाद, अवैध कब्जे, अतिक्रमण, आपदा क्षतिपूर्ति और पारिवारिक प्रताड़ना से जुड़े मामले प्रमुखता से छाए रहे। मामलों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया।

    भू-माफियाओं और अवैध कब्जों पर सख्त एक्शन

    मेहूँवाला में सरकारी नहर पर दीवार बनाकर किए गए अवैध कब्जे की शिकायत पर एसडीएम को तत्काल मौके पर जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    छिद्दरवाला व कृसाली में जनजाति की भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा जबरन कब्जा कर प्लाटिंग करने और एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की खरीदी हुई जमीन की बाउंड्रीवॉल तोड़कर कब्जा करने के मामलों में एसडीएम ऋषिकेश और तहसीलदार को तुरंत कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।

    ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट स्थित ऐतिहासिक खुर्जा वाली धर्मशाला की भूमि पर एमडीडीए व प्रशासन के आदेशों की अवहेलना कर किए जा रहे अवैध निर्माण पर एसडीएम को तुरंत कड़ा एक्शन लेने के निर्देश दिए।

    बुजुर्गों और महिलाओं की पीड़ा पर दिखाई संवेदनशीलता

    बंजारावाला की 61 वर्षीय बुजुर्ग शकुंतला द्वारा बहू-बेटों की प्रताड़ना की शिकायत पर एसडीएम सदर को ‘भरण-पोषण अधिनियम’ के तहत दर्ज वाद पर तत्काल सुनवाई कर राहत देने के निर्देश दिए गए। वहीं, चुक्खूवाला के एक अन्य बुजुर्ग दंपत्ति को सुरक्षा दिलाने के लिए सीओ पुलिस और तहसीलदार को जिम्मेदारी सौंपी गई।
    बच्चों के पालन-पोषण के लिए शराब की लत से ग्रसित पति की संपत्ति अपने नाम कराने की मांग लेकर आई महिला की मदद के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी को पूरे परिवार की काउंसलिंग करने के निर्देश दिए गए। दहेज के कथित झूठे मुकदमे और 40 लाख रुपये की डिमांड से परेशान अम्बीवाला निवासी तारा वती के मामले को महिला प्रकोष्ठ को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए।

    शिक्षा और दिव्यांगों को आर्थिक मदद

    जनता दरबार में उत्तराखंड प्राविधिक विश्वविद्यालय (सुद्धोवाला) में बीटेक कर रही एक छात्र की फीस के लिए आर्थिक सहायता, एक दिव्यांग महिला द्वारा गुजारे के लिए मदद और कुडियाल निवासी महिला द्वारा अपनी बेटी की तृतीय सेमेस्टर की पढ़ाई जारी रखने के लिए ‘नंदा सुनंदा’ से दोबारा आर्थिक सहायता की गुहार लगाई गई, जिस पर प्रशासनिक स्तर पर त्वरित विचार करने का आश्वासन दिया गया।

    इसके अतिरिक्त, देवपुरम में सड़क निर्माण न होने से आवागमन की असुविधा पर नगर आयुक्त और बंजारावाला में अव्यवस्थित हॉट बाजार को हटाने व रेहड़ी-फड़ वालों के सत्यापन के लिए सीओ पुलिस को निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने समाधान दिवस पर प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज जन शिकायतों का भी प्राथमिकता पर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    समाधान दिवस में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे 169 फरियादियों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी गंभीर समस्याएं रखीं। डीएम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिकतर शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया, जबकि शेष मामलों में संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए।

    जनता दरबार में अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशा) स्मृता परमार, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश तिवारी, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम रविन्द्र ज्वांठा, एसडीएम विनोद कुमार, एसडीएम अपर्णा ढ़ौडियाल, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, तहसीलदार सुरेन्द्र देव, तहसीलदार विवेक राजौरी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी व वर्चुअल माध्यम से एसडीएम व अन्य अधिकारी मौजूद थे।