व्यवस्थाधिकारी से सहायक निदेशक पद पर प्रमोशन, दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रहेगी नियुक्ति
देहरादून। उत्तराखंड शासन ने सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में कार्यरत व्यवस्थाधिकारी रामपाल सिंह रावत को पदोन्नत कर सहायक निदेशक नियुक्त किया है।
इस संबंध में मंगलवार को शासन की ओर से प्रोन्नति आदेश जारी कर दिया गया।
जारी आदेश के अनुसार, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में वेतन लेवल-7 (₹44,900–1,42,400) पर कार्यरत रामपाल सिंह रावत को नियमित चयनोपरांत कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सहायक निदेशक के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई है। उन्हें वेतन लेवल-10 (₹56,100–1,77,500) का लाभ मिलेगा।
शासन ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति के साथ उन्हें दो वर्ष की निर्धारित परिवीक्षा अवधि पर रखा जाएगा। इस संबंध में राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद आदेश जारी किया गया है।
शासन के सचिव शैलेश बगौली की ओर से जारी आदेश की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
राज्य के सड़क विकास से सीमांत क्षेत्रों और पर्यटन को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री व केन्द्रीय मंत्री गड़करी ने किया मंथन
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में उत्तराखण्ड राज्य से संबंधित सड़क एवं अवसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक एवं रणनीतिक महत्ता, तीर्थाटन, पर्यटन तथा आपदा प्रबंधन की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में सुदृढ़ एवं आधुनिक सड़क नेटवर्क के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य के लंबित प्रस्तावों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय का अनुरोध किया।
केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) के अंतर्गत वर्ष 2026-27 हेतु राज्य सरकार को लगभग रूपये 750 करोड़ लागत की परियोजनाओं की स्वीकृति पर सहमति प्रदान की गई। इसके साथ ही NHO के अंतर्गत 05 प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग रूपये 2966 करोड़ है।
इनमें श्रीनगर बाईपास का PMC, पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग की चार-लेनिंग, लोहाघाट एवं पिथौरागढ़ बाईपास की alignment , मझोला से खटीमा के आबादी भाग में चार-लेन विस्तार तथा रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग का सुदृढ़ीकरण प्रमुख रूप से शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025-26 तक की रूपये 530.11 करोड़ की लंबित प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र अवमुक्त किए जाने तथा का भी अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने आगामी अर्द्धकुंभ मेला 2027 के दृष्टिगत हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे यातायात दबाव में कमी आएगी तथा श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने कोटद्वार बाईपास परियोजना के कार्यों में भी तेजी लाने का अनुरोध किया, जिससे क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था सुगम हो सके तथा स्थानीय जनता को जाम की समस्या से राहत मिले।दोनों ही प्रस्तावों को सहमति प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने नेशनल हाईवे पर Spur के माध्यम से अन्य मार्गों के संयोजन हेतु कुछ परियोजनाओं के लिए लगभग रूपये 3000 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री द्वारा सकारात्मक सहमति व्यक्त की गई। इसके अतिरिक्त अल्मोड़ा सिकुड़ा बैंड से एनएच-309 तक टनल सहित मोटर मार्ग निर्माण हेतु लगभग रूपये 300 करोड़ की परियोजना पर चर्चा और सैद्धान्तिक सहमति की गई।
राज्य में आपदा प्रबन्धन में सफल और कुशल कार्यों के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) के माध्यम से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में उपचारात्मक कार्यों हेतु डीपीआर तैयार किए जाने हेतु MoU करने का अनुरोध किया जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय द्वारा इसे स्वीकृत किया गया है ।
मुख्यमंत्री ने सीमा सड़क संगठन (BRO) से संबंधित लंबित मामलों, विशेषकर ऋषिकेश–गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के हिना–तेखला–नेताला–गरमपानी खंड की डीपीआर तथा जोशीमठ बाईपास मार्ग के संशोधित प्रस्तावों ( COS) को शीघ्र स्वीकृति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यंत कम दरों पर प्राप्त निविदाओं के मामलों में अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की वर्तमान व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किया जाए, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण एवं स्लोप ट्रीटमेंट कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से इन सभी परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से उत्तराखण्ड में सड़क संपर्क एवं आधारभूत संरचना को नई मजबूती मिलेगी। इससे सीमांत क्षेत्रों का विकास, पर्यटन को बढ़ावा, आपदा प्रबंधन क्षमता में वृद्धि तथा राज्य की आर्थिक प्रगति को गति प्राप्त होगी।
बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, सचिव लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सचिव सड़क परिवहन बृजेश कुमार संत, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बागेश्वर, चम्पावत व पिथौरागढ़ परिसर को मिला स्थाई शैक्षणिक व प्रशासनिक ढांचा
छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा निर्णय
देहरादून।सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के नव सृजित तीनों कैम्पस के लिये शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर संवर्ग में 244 नये पद सृजित कर दिये गये हैं। जिसका शासन स्तर से शासनादेश जारी कर दिया गया है। इन पदों के सृजन से तीनों परिसरों को पहली बार अपना स्थायी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक ढांचा मिल गया है। जिससे शिक्षण, शोध एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को नई गति मिलेगी और छात्र-छात्राओं को सीधे तौर पर इसका लाभ प्राप्त होगा।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के नव सृजित तीन कैम्पस बागेश्वर, चम्पावत तथा पिथौरागढ़ में शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर संवर्ग के तहत 244 नये पद सृजित कर दिये हैं। जिसमें शैक्षणिक संवर्ग के तहत बागेश्वर परिसर में यूजीसी मानकों के तहत विभिन्न विषयों में 38 पद सृजित किये गये हैं। जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर के 29, एसोसिएट प्रोफेसर 8 तथा प्रोफेसर का 01 पद शामिल है। इसी प्रकार चम्पावत परिसर के लिये 31 पद सृजित किये गये हैं। जिसमें 30 पद असिस्टेंट प्रोफसर व एक पद एसोसिएट प्रोफेसर का है। जबकि पिथौरागढ़ परिसर में 95 पद सृजित किये गये हैं। जिसमें अस्टिेंट प्रोफेसर 59, एसोसिएट प्रोफेसर 20 तथा प्रोफेसर के 16 पद शामिल है। इसके अतिरिक्त तीनों कैम्पस के लिये शिक्षणेत्तर पदों का भी सृजन किया गया। प्रथम चरण में बागेश्वर परिसर में 22, चम्पावत 17 तथा पिथौरागढ़ परिसर के लिये 41 पद सृजित किये गये। जिनमें पुस्तकालयाध्यक्ष, सहायक पुस्तकालयध्यक्ष, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सहायक लेखाकार, प्रधान सहायक, वैयक्तिक सहायक, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक, प्रयोगशाला सहायक, पर्यावरण मित्र, माली परिचर व अनुसेवक आदि के पद शामिल हैं। शासन स्तर से इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। जिसके तहत पूर्व में तीनों महाविद्यालयों के लिये सृजित शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर संवर्ग के कुल 329 पदों को उच्च शिक्षा विभाग को समर्पित कर दिये गये हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिन पदों पर आउटसोर्स व्यवस्था लागू होगी, उन पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप अधिकृत एजेंसी के माध्यम से शीघ्र कार्मिकों की तैनाती की जाएगी। स्थायी पदों के सृजन से तीनों परिसरों में शिक्षण कार्य, शोध गतिविधियों एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा।
बयान- सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के तीनों कैम्पस बागेश्वर, चम्पावत व पिथौरागढ़ के लिये शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर संवर्ग में 244 पदों का सृजन कर दिया गया है। इन पदो ंके सापेक्ष तीनों परिसरों में शिक्षकों व कार्मिकों का समायोजन किया जायेगा, जबकि आउटसोर्स के पदों को भी आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से शीघ्र भरा जायेगा। नये पदों के सृजन से विश्वविद्यालय के तीनों परिसरों में शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियां अधिक प्रभावी, व्यवस्थित एवं सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी। – डाॅ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।
लोकभाषा और संस्कृति संरक्षण में योगदान को मिली पहचान
देहरादून। उत्तराखंड फिल्म टेलीविजन एवं रेडियो एसोसिएशन (उफतारा) की ओर से संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय उफतारा सम्मान एवं फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन उत्तराखंड की फिल्म, लोक संस्कृति, साहित्य, पत्रकारिता और कला जगत की 100 विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथि कला संस्कृति परिषद के उपाध्यक्ष मधु भट्ट तथा उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर विभूतियों को सम्मानित किया।
सम्मानित होने वालों में युवा कवि, पत्रकार, लोकभाषा प्रहरी एवं मंच संचालक दीपक कैंतुरा को कला एवं संस्कृति संरक्षण में पत्रकारिता योगदान के लिए सम्मानित किया गया। दीपक कैंतुरा वर्तमान में नेटवर्क 10 न्यूज़, उत्तराखंड में सह संपादक के रूप में कार्यरत हैं और लंबे समय से उत्तराखंड की बोली, भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वर्ष 2015 में उन्होंने नेटवर्क 10 न्यूज़ पर गढ़वाली भाषा का विशेष कार्यक्रम शुरू किया, जिसके माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति, इतिहास और लोक परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचाया। इस श्रृंखला के 83 एपिसोड में उन्होंने गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी, पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल, लोक गायिकाओं रेशमा शाह और हेमा नेगी करासी सहित अनेक प्रमुख हस्तियों के साक्षात्कार और उत्तराखंड की विरासत से जुड़े विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया।
पत्रकारिता के साथ-साथ दीपक कैंतुरा “रैबार पहाड़” के माध्यम से भी उत्तराखंड की लोकभाषा और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल मंच पर नई पहचान दिला रहे हैं। वे पिछले लगभग 10 वर्षों से आकाशवाणी, दूरदर्शन और विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर काव्य पाठ करते आ रहे हैं। उनका काव्य संग्रह “उत्तराखंड के आंसू” प्रकाशित हो चुका है, जबकि उनकी गढ़वाली कविता “मोबाइल/टच वालू फोन” सोशल मीडिया पर 10 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच चुकी है।
दीपक कैंतुरा अपनी प्रभावशाली मंच संचालन शैली के लिए भी जाने जाते हैं और अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों का सफल संचालन कर चुके हैं। उनकी लेखनी, पत्रकारिता और सांस्कृतिक योगदान के लिए उन्हें समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जाता रहा है।
उफतारा सम्मान समारोह में प्रदेश के फिल्म निर्माता, कलाकार, लोकगायक, साहित्यकार, पत्रकार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित लोगों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उफतारा के अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने प्रदेश में फिल्म उद्योग को और अधिक मजबूत बनाने तथा फिल्मकारों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
उफतारा सम्मान 2026 में सम्मानित प्रमुख विभूतियों की सूची
पाराशर गौड़
उर्मि नेगी
बलराज नेगी
लोक गायिका पूनम सती
सुनील बडोनी
मंजू बहुगुणा
रमेश रावत
सुरेश सनेही
संदीप रावत
अनिल बिष्ट
मिनी उनियाल
मुकेश खुशहाल
रजनी कुकरेती
राजेश मालगुड़ी
त्रिलोक चौहान
गोपाल थपलियाल
नरेंद्र टोलिया
राजेश जोशी
सुमन गौड़
कुसुम नेगी
संतोष खेतवाल
रणजीत सिंह
अंकिता परिहार
अमित वी कपूर
एनपी ममगाईं
दिनेश बौड़ाई
विपिन सेमवाल
रवि ममगाईं
विक्रम नेगी
ललित मोहन जोशी
दीपक पुलस
मनु वंदना
डॉ. केपी जोशी
अशोक चौहान
अजय सोलंकी
देव रावत
अविनाश
सौरभ मैठाणी
बृजमोहन वेदवाल
प्रेम पंचोली
देहरादून। पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल मदन मोहन लखेड़ा का 89 वर्ष की उम्र में देहरादून में निधन हो गया। मंगलवार को हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया जाएगा। जनरल लखेड़ा ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल जैसे उच्च पद पर सेवाएं देने के साथ ही उत्तरी सेना कमांड के भी चीफ रहे। इसके अलावा वह पांडिचेरी और अंडमान निकोबार द्वीप केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल व मिजोरम के राज्यपाल भी रहे।
1937 में टिहरी गढ़वाल जिले के कीर्ति नगर विकास खंड के जखण्ड़ गांव में जयानन्द लखेड़ा के पुत्र के रूप में जन्मे लखेड़ा ने 1958 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया। उन्हें शानदार सेवाओं के लिए विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल भी प्राप्त हुए। 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान उन्होंने विभिन्न मोर्चों पर सेना का नेतृत्व किया।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें भारत सरकार ने महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे। पहले पांडिचेरी के और अंडमान द्वीप समूह के उपराज्यपाल रहे और फिर वर्ष 2006 से 11 के बीच मिजोरम के राज्यपाल भी।
टिहरी गढ़वाल के लोग उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी टिहरी के जिला पंचायत अध्यक्ष व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे भूदेव लखेड़ा के छोटे भाई के रूप में जानते हैं। 1990 के दशक में उन्हें पर्वतीय क्षेत्र में सेना की रुटीन भर्ती के अलावा विशेष सेना भर्ती रेलिया के आयोजन के लिए भी याद किया जाता है।
सेना में ऑफिसर हों या बाद के वर्षों में सेवानिवृत्ति के बाद राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण दायित्व के दौरान वे बहुत लो प्रोफाइल बन रहे। बहुत चर्चाओं में रहना उन्हें पसंद नहीं रहा और चुपचाप अपना काम करते रहे। (वरिष्ठ पत्रकार महिपाल नेगी)
सीमांत क्षेत्र के लिए करीब ₹40 करोड़ से अधिक की स्वास्थ्य योजनाओं की दी सौगात
स्वस्थ उत्तराखंड से ही बनेगा समर्थ और विकसित उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को चंपावत में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सौगात दी।
मुख्यमंत्री ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के अंतर्गत आई.सी.आई.सी.आई फाउंडेशन फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ के सहयोग से लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक एम.आर.आई मशीन का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ उत्तराखंड ही समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड का मुख्य आधार है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य में अस्पतालों के निर्माण के साथ उन्हें आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, गुणवत्तापूर्ण सेवाओं और प्रशिक्षित मानव संसाधन से सशक्त बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा एम.आर.आई मशीन के उद्घाटन से सीमांत क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, समय पर सटीक जांच और उच्च स्तरीय उपचार की सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अनुपम सुविधा का लाभ न केवल चंपावत, बल्कि पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल तथा इसके आसपास के सभी सीमांत क्षेत्रों के नागरिकों को प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने पुरानी कठिनाइयों को याद करते हुए कहा कि अब तक चंपावत सहित आसपास के क्षेत्रों के गंभीर मरीजों को एमआरआई जैसी जटिल जांचों के लिए हल्द्वानी अथवा अन्य बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता था, जो गंभीर रोगियों और उनके परिजनों के लिए भारी समय, धन और मानसिक कष्ट का कारण बनता था। अब मस्तिष्क, रीढ़, नसों, जोड़ों, कैंसर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की उच्च स्तरीय जांच स्थानीय स्तर पर ही सुलभ होगी, जिससे समय पर जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित होने के साथ-साथ अनेक बहुमूल्य जीवनों को बचाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा हमारी सोच केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हम भविष्य की उभरती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक अत्यंत सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा चंपावत विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य अवसंरचना को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। जिला चिकित्सालय चंपावत में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड वाले आधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला चिकित्सालय में ही लगभग 11.71 करोड़ रुपये की लागत से लोअर ग्राउंड फ्लोर में पार्किंग, प्रथम एवं द्वितीय तल पर अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक विंग तथा आधुनिक ऑपरेशन थिएटर का निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है, जिसके पूर्ण होने के बाद जनपद की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक मजबूत व आधुनिक बनेंगी।अमोड़ी में 2.18 करोड़ रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के निर्माण कार्य से स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्राप्त हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इंटीग्रेटेड नर्सिंग संस्थान में 470.05 लाख रुपये की लागत से 129 बेड वाले विशाल व आधुनिक छात्रावास का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, जो प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को एक नई मजबूती प्रदान करेगा। जनपद चंपावत में एक नए पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना की आवश्यक कार्यवाही भी तेजी से बढ़ाई जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे और राज्य को दक्ष पैरामेडिकल मानव संसाधन प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव, कभी भी किसी भी परिवार के उपचार में बाधा नहीं बनेगी। आज आयुष्मान भारत योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के माध्यम से प्रदेश के लाखों परिवारों को पूरी तरह से निःशुल्क और कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। चंपावत में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में दिख रहा यह युगांतकारी परिवर्तन हमारी उस अंत्योदय सोच का परिणाम है जिसके केंद्र में आम नागरिक का जीवन, उसका स्वास्थ्य और हमारी सरकार पर उसका अटूट विश्वास है।
मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर एक ऐसे सशक्त उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लें, जहां हर नागरिक को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वस्थ जीवन का अधिकार सहजता से उपलब्ध हो, क्योंकि जब हमारा नागरिक स्वस्थ होगा, तभी हमारा प्रदेश समृद्ध होगा और विकसित उत्तराखंड का हमारा साझा संकल्प साकार होगा।
इस अवसर पर अध्यक्ष जिला पंचायत आनंद सिंह अधिकारी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रेमा पांडे, ब्लॉक प्रमुख चंपावत श्रीमती अंचला बोहरा, भाजपा जिला अध्यक्ष गोविंद सिंह सामंत, विधायक प्रतिनिधि चंपावत प्रकाश तिवारी, टनकपुर दीपक रजवार, प्रदेश मंत्री भाजपा अध्यक्ष निर्मल महारा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
कोरोनेशन अस्पताल की भी है मांग
दून के कोरोनेशन अस्पताल में भी लंबे समय से एमआरआई मशीन की मांग की जा रही है। अकेले दून अस्पताल ही मरीजों का भार उठा रहा है। और मरीजों को एमआरआई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
कोरोनेशन अस्पताल में एमआरआई मशीन के लिए पर्याप्त जगह भी निर्मित है। ऐसे में अगर इस अस्पताल में भी एमआरआई मशीन लग जाय तो दून अस्पताल पर पड़ रहे मरीजों के भारी भरकम बोझ से निजात भी मिलेगी।
टिकट नहीं मिला तो भाजपा नेत्री निर्दलीय लड़ेंगी चुनाव
यमकेश्वर। लंबी खामोशी के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री विजया बड़थ्वाल ने यमकेश्वर विधानसभा से चुनावी अखाड़े में उतरने का ऐलान कर दिया दिया है।
पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष , पूर्व अध्यक्ष, उत्तराखंड महिला आयोग तथा यमकेश्वर से तीन बार विधायक रह चुकीं विजया बड़थ्वाल ने हाल ही में दिल्ली,लखनऊ व देहरादून में पार्टी नेताओं से मिलकर अपना दावा ठोक दिया।
हाल ही में उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लगातार मुलाकातें की हैं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष, गढ़वाल सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी, तथा लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल से हुई मुलाकातें विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात
2002,2007 व 2012 में यमकेश्वर विधानसभा से चुनाव जीत चुकी विजया बड़थ्वाल की सक्रियता व दावे से भाजपा के अंदर हलचल मची हुई है।
गौरतलब है कि 2017 में भाजपा ने विजया बड़थ्वाल का टिकट काटकर पूर्व सीएम जनरल खंडूड़ी की बेटी ऋतु खंडूड़ी को यमकेश्वर से टिकट देकर विजया बड़थ्वाल समर्थकों को करारा झटका दिया था।
बाद में भरपाई के लिए विजया बड़थ्वाल को 2018 में महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। 2021 में आयोग का कार्यकाल खत्म होने के बाद कुसुम कंडवाल को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। विजया बड़थ्वाल का कार्यकाल रिपीट नहीं किया गया। और न ही 2022 का विधानसभा चुनाव का ही टिकट दिया गया।
2022 में भाजपा ने एक बार फिर विजया को दरकिनार करते हुए कांग्रेस से पार्टी में शामिल हुई रेणु बिष्ट को यमकेश्वर से चुनाव लड़वा दिया। और ऋतु खण्डूड़ी को शिफ्ट कर कोटद्वार से चुनाव लड़ाया गया। विजया बड़थ्वाल के समर्थक एक बार फिर मन मसोस कर रह गए।
हालिया, इन उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में उनकी बढ़ी हुई जनसंपर्क गतिविधियाँ, क्षेत्रीय दौरे और जनता के बीच लगातार सक्रिय उपस्थिति ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
बीएल संतोष से भेंट
खण्डूड़ी व निशंक सरकार में मंत्री रहीं विजया बड़थ्वाल ने पार्टी महासचिव बीएल संतोष व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से दिल्ली में मुलाकात कर चुनावी दावा पेश किया है। साथ ही अन्य नेताओं से मिलकर उनका समर्थन भी जुटाया है।
इधऱ, यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद भाजपा विधायक रेणु बिष्ट के खिलाफ माहौल देखा जा रहा है। वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय विधायक रेणु बिष्ट लगातार विपक्ष के निशाने पर है। सीबीआई जांच की घोषणा के बाद अंकिता भंडारी मर्डर अभी भी चर्चा के केंद्र में है। सूत्रों के मुताबिक जारी पार्टी सर्वे के परिणाम को देखते हुए भाजपा नेतृत्व यमकेश्वर में एक बार फिर टिकट बदलने के मूड में है।
क्षेत्र की ताजा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कोटद्वार नगर निगम के मेयर व पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत,पूर्व ब्लाक प्रमुख महेंद्र सिंह राणा व बीकेटीसी के चर्चित अध्यक्ष हेमंत द्वेदी का नाम भी दावेदारों में शुमार है।
लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल
इधऱ, पूर्व कैबिनेट मंत्री विजया बड़थ्वाल की जारी भागदौड़ ने अन्य दावेदारों की सांसें फुला दी है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अगर भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो विजया बड़थ्वाल निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी। उनकी इस मंशा को भांपते हुए कांग्रेस व उक्रांद भी विजया बड़थ्वाल का मन टटोल रही है…
अंतिम चरण में पहुंचीं एनएचएआई की दो प्रमुख परियोजनाएं
स्पर टू हरिद्वार और हरिद्वार बाईपास परियोजनाएं अंतिम चरण में, श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए तेज़ी से चल रहा निर्माण कार्य
एनएचएआई द्वारा विकसित की जा रही 51 किलोमीटर लंबी छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड स्पर टू हरिद्वार परियोजना का लगभग 92 प्रतिशत कार्य पूर्ण हुआ
यह कॉरिडोर दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे को हरिद्वार से जोड़ते हुए हलगोया मुस्तकम से प्रारंभ होकर भड़ेड़ी राजपूताना स्थित मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-58 तक पहुंचेगा
देहरादून। आगामी अर्धकुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) हरिद्वार में सड़क अवसंरचना को मजबूत करने के लिए तेजी से कार्य कर रहा है। हरिद्वार में निर्माणाधीन स्पर टू हरिद्वार और हरिद्वार बाईपास (पैकेज-1) परियोजनाएं पूर्ण होने के बाद न केवल शहर के भीतर यातायात का दबाव कम करेंगी, बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को भी सुगम एवं निर्बाध यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी।
एनएचएआई द्वारा विकसित की जा रही 51 किलोमीटर लंबी छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड स्पर टू हरिद्वार परियोजना का लगभग 92 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 46 किलोमीटर छह-लेन मार्ग का निर्माण पूरा किया जा चुका है। यह कॉरिडोर दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे को हरिद्वार से जोड़ते हुए हलगोया मुस्तकम से प्रारंभ होकर भड़ेड़ी राजपूताना स्थित मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-58 तक पहुंचेगा। परियोजना के पूर्ण होने से दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश से पहले ही एक वैकल्पिक, तेज और निर्बाध मार्ग उपलब्ध होगा।
इसी प्रकार 15 किलोमीटर लंबे हरिद्वार बाईपास (पैकेज-1) का लगभग 77 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा अब तक 9 किलोमीटर फोर-लेन सड़क का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। यह बाईपास बहादराबाद से प्रारंभ होकर एनएच-34 पर चंडी देवी मंदिर के निकट समाप्त होगा। इसके संचालन में आने के बाद हर की पैड़ी, चंडी चौक, शंकराचार्य चौक सहित शहर के भीतरी हिस्सों में यातायात का दबाव उल्लेखनीय रूप से कम होने की उम्मीद है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों दोनों को जाम से राहत मिलेगी।
इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद हरिद्वार की यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में हरिद्वार आने वाले अधिकांश वाहन शहर के भीतर से होकर गुजरते हैं, जिससे सप्ताहांत, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग जाता है। हरिद्वार में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई सड़क अवसंरचना को चरणबद्ध तरीके से सुदृढ़ कर रहा है। स्पर टू हरिद्वार परियोजना बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश से पहले ही वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगी, जबकि हरिद्वार बाईपास शहर के भीतर अनावश्यक यातायात दबाव को कम करेगा। इससे स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं सभी को कम समय में सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, हरिद्वार–मुजफ्फरनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुरकाजी, फलौदा, मंगलौर, बहादराबाद और ज्वालापुर जैसे भीड़भाड़ वाले जंक्शनों पर फ्लाईओवर, व्हीक्युलर अंडरपास (वीयूपी) तथा सर्विस रोड का निर्माण भी किया जा रहा है। इन कार्यों के पूरा होने से दुर्घटना संभावित स्थलों पर सुरक्षा बढ़ेगी, चौराहों पर यातायात का दबाव कम होगा और आगामी अर्धकुंभ के दौरान वाहनों का संचालन अधिक व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा।
एनएचएआई द्वारा पूर्व में विकसित मुजफ्फरनगर–नेपाली फार्म चार-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग पहले से ही संचालन में है, जो हरिद्वार, ऋषिकेश और चारधाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं एवं यात्रियों को बेहतर और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है। आगामी अर्धकुंभ के दौरान भी यह मार्ग यातायात के दबाव को कम करने और वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यातायात को और अधिक सुरक्षित एवं स्मार्ट बनाने के लिए एनएचएआई
हरिद्वार–मुजफ्फरनगर, स्पर टू हरिद्वार तथा हरिद्वार बाईपास मार्गों पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) भी लागू कर रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से यातायात की रियल-टाइम निगरानी, सड़क उपयोगकर्ताओं को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने, यातायात नियमों के अनुपालन पर नजर रखने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
एनएचएआई का लक्ष्य है कि अर्धकुंभ-2027 से पहले इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूर्ण कर हरिद्वार में आधुनिक, सुरक्षित और सुगम सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराया जाए। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल श्रद्धालुओं को जाम से राहत मिलेगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलेगी।
राज्य बनने के बाद पहली बार पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली का निर्यात
पिथौरागढ़ की तीन सहकारी समितियों ने किया था प्रोडक्शन
आने वाले दिनों में 30 टन मछली सप्लाई करने की तैयारी
देहरादून। राज्य निर्माण के बाद पहली बार उत्तराखंड की मछली इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची हैं। पिथौरागढ़ जिले की तीन सहकारी समितियों ने राज्य सरकार के सहयोग से नेपाल को पांच मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं। अच्छी खबर ये भी है कि उत्तराखंड आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछलियों के निर्यात की तैयारी कर रहा है।
राज्य सचिवालय के मीडिया सेंटर में शुक्रवार को मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने प्रेस काॅफ्रेंस में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ के धारचूला एवं मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्य जीवी सहकारी समितियों ने ये मछलियां तैयार की थीं। कोल्ड-चेन बनाए रखते हुए मछली को गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहां प्रसंस्करण के बाद 23 जून 2026 को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका सफलतापूर्वक निर्यात किया गया। इससे 33 मत्स्य पालकों को लगभग ₹23.50 लाख की आय प्राप्त हुई है।
कैबिनेेट मंत्री के अनुसार-उत्तराखंड के इस पहले निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग एवं परिवहन के लिए ₹5.40 लाख की गैप फंडिंग सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं हितधारकों से स्थापित संपर्को का यह सकारात्मक परिणाम है। विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य बाजारों में भी निर्यात की संभावनाओं पर कार्य कर रहा है। इस क्रम में आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछली का निर्यात विदेशों में किए जाने की तैयारी की जा रही है।
धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खोलने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
इस संबंध में धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के अनुसार-मत्स्य पालकों को विपणन सहायता उपलब्ध कराने हेतु वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ एमओयू किया गया, जिसके अंतर्गत अब तक ₹2.10 करोड़ मूल्य की 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।
मत्स्य क्षेत्र का दायरा बढ़ा, निरंतर हो रही प्रगति
राज्य में मत्स्य क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहा है। विभागीय मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि वर्ष 2022 तक जहां राज्य में मात्र 10,011 मत्स्य पालक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक शामिल हैं। मत्स्य उत्पादन वृद्धि दर वर्ष 2012-17 में जहां मात्र दो प्रतिशत थी, वह बढ़कर वर्ष 2022-26 में 11 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2026-27 में राज्य अंतर्गत 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य लगभग ₹165 करोड़ है।
विभाग का बजट भी बढ़ा, नौकरी के अवसर भी
बहुगुणा के अनुसार, मत्स्य विभाग का वार्षिक बजट वर्ष 2021-22 में ₹55.76 करोड़ से बढ़ कर वर्ष 2026-27 में ₹261.41 करोड़ हो गया है। पिछले चार वर्षों में मत्स्य पालन क्षेत्र में 5,646 मत्स्य पालकों हेतु स्वरोजगार के अवसर सृजित किए गए। विभाग में 33 नियमित नियुक्तियां की गई हैं।
सरकार की योजनाएं हो रहीं गेम चेंजर साबित
मत्स्य पालन मंत्री ने कहा कि सरकार के स्तर पर शुरू की गईं नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे है। मत्स्य क्षेत्र वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था के तीव्र गति से विकसित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में से एक बन चुका है। साथ ही, ग्रामीण आजीविका, रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रेस काॅफ्रेंस में निदेशक मत्स्य चंद्र सिंह धर्मशक्तू भी उपस्थित रहे।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बुधवार को सपना राणा ने मुलाकात की। राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त करने और भाषा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सपना राणा का चयन जर्मनी के हैमबर्ग स्थित शॉन क्लीनिक अस्पताल में नर्स के पद पर हुआ है। उन्हें 3060 यूरो (करीब 3.30 लाख रुपये) प्रतिमाह वेतन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत गठित विदेश रोजगार प्रकोष्ठ राज्य के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
वर्तमान में प्रकोष्ठ द्वारा युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार के लिए भाषा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक लगभग 65 युवाओं को जापान में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।
कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि जर्मनी में नर्सिंग क्षेत्र में रोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा जर्मन भाषा का प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। इसी प्रशिक्षण के बाद टिहरी गढ़वाल की नर्सिंग प्रशिक्षित युवती सपना राणा का जर्मनी में नर्स के रूप में चयन हुआ है।
सपना राणा ने अपनी स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, पोखाल (टिहरी गढ़वाल) से तथा नर्सिंग की पढ़ाई स्टेट नर्सिंग कॉलेज, देहरादून से पूरी की है। राज्य सरकार की योजना के तहत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें हैमबर्ग स्थित शॉन क्लीनिक अस्पताल में नियुक्ति मिली है।
इस अवसर पर सचिव सी. रविशंकर भी मौजूद रहे।