देहरादून। राजपुर थाना पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी भू-माफिया एवं कुख्यात गैंगस्टर विशाल कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक वृद्ध एनआरआई महिला की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराने तथा राजपुर रोड स्थित एक बड़ी भूमि का सौदा कराने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप है।
गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से एक अवैध 32 बोर पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, लक्ष्मण चौक निवासी कमल जिंदल ने थाना राजपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि विशाल कुमार ने अपने साथियों के साथ मिलकर राजपुर रोड पर स्थित एक संपत्ति को बेचने का झांसा देकर उनसे विभिन्न माध्यमों से 6 करोड़ 75 लाख रुपये ले लिए।
इसके बाद न तो संपत्ति की रजिस्ट्री कराई गई और न ही धनराशि वापस की गई। शिकायत के आधार पर थाना राजपुर में धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि विशाल कुमार के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर, धोखाधड़ी, जालसाजी, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में लगभग दो दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। वह कई मामलों में वांछित चल रहा था और लगातार फरार रहने के कारण उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था।
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने के साथ इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का सहारा लिया। लगातार निगरानी और दबिश के बाद पुलिस ने 22 जून को आईटी पार्क चौक के निकट तपोवन रोड से उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी द्वारा इस्तेमाल की जा रही क्रेटा कार (यूके-07 एचबी-1133) को भी सीज कर दिया गया है।
तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से एक अवैध 32 बोर पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए, जिसके आधार पर उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक और मुकदमा दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी विशाल कुमार (46 वर्ष) शांति नगर, भोपा रोड, कूकड़ा, थाना नई मंडी, जनपद मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) का निवासी है। पुलिस के अनुसार वह पूर्व में भी कई बार जेल जा चुका है। उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या दो दर्जन से अधिक है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
ऋषिकेश। थाना मुनि की रेती क्षेत्र की शिवपुरी चौकी के प्रभारी उपनिरीक्षक विनोद कुमार शर्मा का ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर सड़क दुर्घटना में दुखद निधन हो गया।
मिली जानकारी के मुताबिक ड्यूटी के बाद 22/23 जून की देर रात वह अपनी स्कॉर्पियो से चौकी की ओर जा रहे थे, तभी वाहन गहरी खाई में गिर गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए एम्स भेजा।
मंगलवार की दोपहर त्रिवेणी घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उपनिरीक्षक विनोद शर्मा का अंतिम संस्कार किया गया।
रानीपोखरी निवासी विनोद शर्मा पूर्व सैनिक भी रहे थे तथा ढालवाला और कैलाश गेट चौकी प्रभारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यवहार और कर्मठ कार्यशैली के कारण वह पुलिस विभाग और आम जनता में बेहद लोकप्रिय थे।
मंगलवार को ड्यूटी के दौरान हुए आकस्मिक निधन से उत्तराखंड पुलिसमें शोक की लहर है।
2 अगस्त 1978 को जन्मे विनोद कुमार शर्मा ने भारतीय सेना में गौरवपूर्ण सेवाएं देने के बाद वर्ष 2016 में उत्तराखंड पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। सेना और पुलिस दोनों सेवाओं में उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन तथा ईमानदारी से अलग पहचान बनाई। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2023 में सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह से सम्मानित किया गया था।
वर्ष 2017 से लगातार टिहरी गढ़वाल में तैनात रहे विनोद कुमार शर्मा ने जनसेवा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा पुलिस दायित्वों के निर्वहन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सरल स्वभाव, सहयोगी व्यवहार और कार्य के प्रति समर्पण के कारण वे सहकर्मियों और आम नागरिकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी गढ़वाल श्वेता चौबे सहित समस्त पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दिवंगत उपनिरीक्षक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। पुलिस परिवार ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
कर्णप्रयाग प्रकरण में निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस मुख्यालय के अहम फैसले
देहरादून। कर्णप्रयाग में 16 जून को सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद तथा मारपीट के मामले में पुलिस मुख्यालय ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
घटना से जुड़े दोनों मुकदमों की विवेचना अब हरिद्वार पुलिस करेगी, जबकि स्थानीय पुलिस के कथित व्यवहार और आचरण संबंधी शिकायतों की जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, घटना के बाद सिख श्रद्धालुओं के खिलाफ थाना कर्णप्रयाग में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस बीच घायल सिख श्रद्धालु के पिता की शिकायत पर उनके साथ कथित मारपीट करने वाले अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ 20 जून को थाना कर्णप्रयाग में एक अन्य एफआईआर भी दर्ज की गई है।
दोनों मामलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विवेचना चमोली जनपद से हरिद्वार जनपद स्थानांतरित कर दी गई है। मामलों की जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर की निगरानी में की जाएगी।
उधर, विभिन्न सिख संगठनों ने सिख श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय पुलिस के कथित व्यवहार और आचरण पर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह को सौंपी गई है। उन्हें दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करती है और प्रत्येक मामले में कानून के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी तथा न्यायसंगत कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हेमकुंड साहिब यात्रा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण यात्रा है, जिसे पुलिस और प्रशासन के समन्वित प्रयासों से सुरक्षित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा रहा है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कहा, जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों की मांगों का होगा शीघ्र निस्तारण
देहरादून । प्रदेशभर के जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों को शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित त्रिस्तरीय ढांचे में शामिल किया जायेगा, इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना से वंचित शिक्षकों को लाभ देने, अशासकीय विद्यालयों में पीटीए शिक्षकों की मांग का प्रस्ताव शीघ्र प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जायेगा।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज विधानसभा स्थित सभाकक्ष में विद्यालयी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों की 13 सूत्रीय मांगों पर विस्तृत चर्चा करते हुये प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। शिक्षकों की मांग है कि प्रस्तावित त्रिस्तरीय ढांचे में उनको भी शामिल किया जाय, जिन जनपदों में चुनाव आचार संहिता के चलते शिक्षक योगदान नहीं दे पाये थे उनको भी अन्य की भांति पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाय, सम्पूर्ण सेवाकाल में तीन पदोन्नति देने तथा सेवारत शिक्षकों को टीईटी में छूट देने की मांग प्रमुख है। बैठक में डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षा मित्रों को अन्य की भांति समान कार्य के लिये समान वेतनमान दिये जाने, अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत मानदेय प्राप्त शिक्षकों को तदर्थ नियुक्ति देने, तदर्थ शिक्षकों को नियमित करने तथा बिना मानदेय के कार्य कर रहे पीटीए शिक्षकों को मानदेय दिये जाने पर विचार विमर्श किया गया। उक्त प्रकरणों के निस्तारण हेतु महानिदेशालय स्तर पर एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया, जिसमें औपबंधिक शिक्षकों के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। डाॅ. रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि समिति दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को सौंपेगी जिसके आधार पर विभाग प्रस्ताव तैयार कर शासन को उपलब्ध करायेगा।
बैठक में शिक्षकों की पदोन्नति व स्थानांतरण को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई। जिसमें निर्णय लिया गया कि विभागीय अधिकारी आंतरिक बैठक कर न्यायालय में विचाराधाीन प्रकरण से इतर बीच का रास्ता निकाले हुये शिक्षकों के हित में प्रस्ताव शासन को प्रस्तुत करेंगे, जिसके उपरांत शासन कोई ठोस निर्णय लेगा।
बैठक में प्रमुख सचिव विधायी अमित कुमार, सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षाा आकांक्षा कोण्डे, अपर सचिव वित्त गंगा प्रसाद, अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत, अपर निदेशक विद्यालयी शिक्षा के.एस. रावत, उप निदेशक जे.पी. काला सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद के विरोध की गूंज
विहिप भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षकम- धामी
उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है सरकार : सीएम धामी
हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भूपतवाला में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व हिन्दू परिषद पिछले छह दशकों से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय चेतना के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि परिषद केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का एक सशक्त माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देश और विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में समाज को जागरूक, संगठित एवं अपनी सांस्कृतिक जड़ों एवं मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सामाजिक एकता, समरसता एवं राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए सभी वर्गों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक जैसे कार्यों ने देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
केदारखण्ड एवं मानसखण्ड क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास एवं सौन्दर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार तथा हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर एवं गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विरासत एवं मूल स्वरूप के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है।
समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार एवं समान कानून सुनिश्चित किए गए हैं। सख्त भू-कानून लागू कर प्रदेश की भूमि, संस्कृति एवं जनहितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है तथा कानून व्यवस्था एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है, जहां भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं सभ्यता से संबंधित विषयों पर अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है।
मुख्यमंत्री के संबोधन से पूर्व विश्व हिन्दू परिषद के मार्गदर्शक मंडल से जुड़े संत-महात्माओं ने उन्हें धर्मरक्षक, सनातन सेवा के लिए समर्पित तथा देवभूमि के देवालयों का सेवक बताते हुए पूरे संत समाज की ओर से आशीर्वाद प्रदान किया।
महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि ने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वभर में सनातन संस्कृति की पताका फहरा रही है, उसी प्रकार उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सनातन मूल्यों की रक्षा एवं संरक्षण के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद जैसी प्रवृत्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई, धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता तथा मदरसा बोर्ड को समाप्त करने जैसे निर्णयों ने उत्तराखण्ड को सनातन संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बनाया है।
महामंडलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज ने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य एवं दिव्य मंदिर का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हुआ।
उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नकारते थे, वे आज भी राम मंदिर एवं उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को विवादित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व सनातन परंपरा के विरोधी हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में तेजी से बदल रही जनसांख्यिकी को लेकर धामी सरकार की गंभीरता तथा देवभूमि के पौराणिक स्वरूप एवं सांस्कृतिक मानबिंदुओं के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।
बैठक की अध्यक्षता अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वात्मानन्द महाराज ने की। महाराष्ट्र से स्वामी जितेन्द्रनाथ महाराज, साध्वी पूर्णप्रज्ञा जी, गुजरात कर्णावती के देवलाचार्य-अविचलाचार्य महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती महाराज, मुम्बई से डॉ. भदन्त राहुल बोधि, गोवा के पद्मनाभ पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मेशानन्द महाराज, सहित अनेक प्रतिष्ठित संत-महात्माओं एवं धर्माचार्यों ने सहभागिता की।
विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं केन्द्रीय प्रबन्ध समिति के वरिष्ठ सदस्य दिनेश , अंतरराष्ट्रीय महामंत्री संगठन मिलिंद परांडे, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग बागड़ा, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी, क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश विनायक, प्रांत संगठन मंत्री अजय कुमार, क्षेत्र संयोजक बजरंग दल अनुज वालिया, बलराम कपूर, सौरभ चौहान सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में ऋषिकेश क्षेत्र की प्रमुख विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक सम्पन्न
देहरादून। त्रिवेणी घाट पुनर्विकास, चंद्रभागा पैदल पुल, आस्था पथ सौंदर्यीकरण एवं केएफडब्ल्यू वित्तपोषित परियोजनाओं की प्रगति पर हुई विस्तृत चर्चा देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति की मासिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी अर्द्धकुंभ मेला-2027 की तैयारियों के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित स्थायी एवं अस्थायी निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में उत्तराखंड जल संस्थान, सिंचाई विभाग, नगर निगम ऋषिकेश, उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास अभिकरण (यूयूएसडीए) सहित विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं द्वारा प्रस्तावित एवं प्रगति पर चल रही परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई।
नगर निगम ऋषिकेश द्वारा अर्द्धकुंभ मेला-2027 के लिए लगभग ₹156 करोड़ लागत के प्रस्तावित कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया गया, जबकि उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा पेयजल एवं संबंधित अवसंरचना विकास से जुड़े कार्यों की प्रगति से अवगत कराया गया।
बैठक के दौरान त्रिवेणी घाट पुनर्विकास, चंद्रभागा पैदल पुल तथा आस्था पथ के सौंदर्यीकरण संबंधी प्रस्तावों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण में त्रिवेणी घाट को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गतिविधियों के अनुरूप विकसित करने की योजना पर चर्चा की गई। इसके अंतर्गत अनुष्ठान एवं सांस्कृतिक प्रदर्शन क्षेत्र (Ritual Performance Zone) विकसित करने, बाढ़ स्तर को ध्यान में रखते हुए संरचनात्मक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा त्रिवेणी घाट से मां सरस्वती मंदिर तक के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण एवं पुनर्विकास के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रस्तावित कार्यों में चरणबद्ध बैठक व्यवस्था, गतिविधि क्षेत्र तथा अतिरिक्त जनसुविधाओं के विकास को भी शामिल किया गया है।
बैठक में चंद्रभागा पैदल पुल परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए इसे अधिक सुरक्षित, आकर्षक एवं जनोपयोगी स्वरूप प्रदान करने के संबंध में आवश्यक सुझावों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त विभिन्न घाटों के पुनर्विकास, नदी तट संरक्षण एवं पर्यटन अवसंरचना सुदृढ़ीकरण से संबंधित परियोजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों को स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा अनुमोदन एवं निविदा प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में केएफडब्ल्यू (KfW) वित्तपोषित एकीकृत शहरी अवसंरचना विकास परियोजना की भी समीक्षा की गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत ऋषिकेश, मुनिकीरेती, तपोवन एवं स्वर्गाश्रम क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्ट्रीट लाइटिंग, विद्युत बस अवसंरचना, जल निकासी व्यवस्था तथा अन्य शहरी सुविधाओं से संबंधित परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई।
अधिकारियों ने अवगत कराया कि कई परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है तथा विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन एवं निविदा प्रक्रियाएं प्रचलित हैं।
बैठक में लोक निर्माण विभाग द्वारा अर्द्धकुंभ मेला-2027 के दृष्टिगत ऋषिकेश क्षेत्र की प्रमुख सड़कों के सुदृढ़ीकरण एवं सुधार कार्यों की प्रगति भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जनसुविधा से जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि अर्द्धकुंभ मेला-2027 से संबंधित सभी विकास परियोजनाएं श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऋषिकेश की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन पहचान को और सुदृढ़ करेंगी। उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण कार्यों में उच्च गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही त्रिवेणी घाट स्थित गंगा संग्रहालय के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में नगर आयुक्त विजयनाथ शुक्ला, सहायक नगर आयुक्त ऋषिकेश दीक्षांत गुप्ता, परियोजना प्रबंधक (पीआईयू) सिंचाई विभाग एस.के. सिंह, परियोजना प्रबंधक पेयजल निगम गंगा ऋषिकेश संजीव वर्मा, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग भृगु द्विवेदी, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि, जिला पंचायत, वन विभाग, पर्यटन विभाग, परिवहन विभाग, यूरेडा, स्वास्थ्य विभाग, यूयूएसडीए, तथा जिला गंगा समिति के अधिकारी उपस्थित रहे।
दाखिल-खारिज दर्ज कराने के एवज में 4,500 रुपये की मांग
टोल फ्री 1064 की शिकायत पर कार्रवाई
रुड़की। शिकायतकर्ता द्वारा टोल फ्री नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज कराई गई कि तहसीलदार कार्यालय रुड़की में पेशकार का कार्य देख रहा पीआरडी कर्मी संदीप उसकी बहन की भूमि के दाखिल-खारिज को रजिस्टर में दर्ज कराने के एवज में 4,500 रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है।
शिकायत की जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर थाना सतर्कता सेक्टर देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, सतर्कता सेक्टर देहरादून के निर्देशन में ट्रैप टीम का गठन किया गया।
ट्रैप टीम ने 19 जून 2026 को कार्रवाई करते हुए संदीप कुमार पुत्र बीरबल, निवासी थिथोला, थाना मंगलौर, जनपद हरिद्वार, वर्तमान में तहसीलदार कार्यालय रुड़की में तैनात पीआरडी कर्मी, को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उसने रिश्वत की मांग की तथा रिश्वत की राशि प्राप्त करने के बाद उसे एक अज्ञात व्यक्ति को देकर साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया।
विजिलेंस ने आरोपी को तहसीलदार कार्यालय रुड़की से गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग, टनकपुर-बागेश्वर और किच्छा-खटीमा रेल लाइनों पर फोकस, स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी चर्चा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। इस दौरान राज्य में रेलवे अवसंरचना के विस्तार, विभिन्न रेल परियोजनाओं की प्रगति तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में रेलवे कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण राज्य के समग्र विकास, पर्यटन, तीर्थाटन, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को राज्य की महत्वाकांक्षी और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए इसके कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना चारधाम यात्रा, विशेषकर बदरीनाथ और केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवागमन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाएगी।
बैठक में टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने बताया कि परियोजना का सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नवंबर 2026 तक इस परियोजना पर ठोस प्रगति दिखाई देगी। उन्होंने कर्णप्रयाग-बागेश्वर तथा किच्छा-खटीमा रेल लाइन परियोजनाओं को भी क्षेत्रीय संतुलित विकास और भविष्य की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताते हुए इन पर आगे कार्रवाई करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तीर्थाटन और पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना आवश्यक है। उन्होंने गढ़वाल मंडल के देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की तथा कुमाऊँ मंडल के हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर और टनकपुर रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने आगामी कुंभ और कांवड़ मेले के मद्देनजर हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से श्रद्धालुओं और यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव उपलब्ध कराया जा सकता है।
बैठक में हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण (डबल लाइन) की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण से राज्य में निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने कहा कि बैठक में जिन बिंदुओं पर चर्चा हुई है, उन पर पूरी गंभीरता के साथ कार्य किया जाएगा।
बैठक में सचिव बृजेश कुमार संत और अपर सचिव रीना जोशी भी मौजूद रहे।
देहरादून। कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय द्वारा 29 जून को एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। रोजगार मेला प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियां प्रतिभाग कर योग्य अभ्यर्थियों का चयन करेंगी।
क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी, ममता चौहान नेगी ने बताया कि रोजगार मेले में 6 निजी क्षेत्र की कंपनियां भाग लेंगी तथा कुल 85 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रोजगार मेलों का नियमित आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रोजगार मेले में देहरादून सहित अन्य जनपदों के बेरोजगार युवा भी प्रतिभाग कर सकते हैं। इच्छुक अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय परिसर में पूर्व पंजीकरण (प्री-रजिस्ट्रेशन) की व्यवस्था की गई है। अभ्यर्थियों से समय रहते पंजीकरण कराने की अपील की गई है। साथ ही, रोजगार मेले के दिन भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी ममता नेगी चौहान
रोजगार मेले में प्रतिभाग करने वाले अभ्यर्थियों को अपना बायोडाटा, मूल शैक्षणिक एवं अन्य प्रमाण-पत्र, उनकी छायाप्रतियां, सेवायोजन कार्यालय का पंजीयन कार्ड तथा वैध पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा।
सेवायोजन विभाग ने अधिक से अधिक युवाओं से रोजगार मेले का लाभ उठाने तथा निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होने की अपील की है।
रोजगार मेले में शामिल होने वाली कंपनियां
29 जून को आयोजित रोजगार मेले में थेटा फार्मा, विंडलास बायो मेडिसिन, आईपीसीए लेबराट्रीज, अम्भर, मेंटोरे वॉटर एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड, लाइटेनियम टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां शामिल रहेंगी।
एक दूसरे के कच्चे चिठ्ठे खोल रहे उर्मिला-आरती व ध्यानी
रिहाई के बाद राठौर पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट की सख्ती और दून अदालत की राहत: उत्तराखंड के दो चर्चित मामलों में बड़े घटनाक्रम
सत्ता, सिस्टम और अदालत: ऊर्जा निगम जांच पर हाईकोर्ट सक्रिय, राठौर मामले में राहत
नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और एक बड़े विभाग से जुड़े दो चर्चित मामलों में गुरुवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। एक ओर नैनीताल हाईकोर्ट ने ऊर्जा निगमों में कथित भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
वहीं अंकिता भंडारी के कथित ‘वीआईपी’ के ‘खुलासे’ के बाद प्रभारी दुष्यंत गौतम की ओर से दर्ज कराए गई पुलिस रिपोर्ट के बाद गिरफ्तार पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को गिरफ्तारी के चार दिन बाद अदालत से जमानत मिल गई।
दोनों मामलों ने प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को फिर तेज कर दिया है।
मिली राहत, रिहाई के आदेश
देहरादून। अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े वायरल ऑडियो मामले में गिरफ्तार पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अदालत से जमानत मिल गई है। 14 जून को गिरफ्तार किए गए राठौर को गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि प्रकाश की अदालत ने राहत देते हुए जमानत मंजूर कर दी।
अदालत ने माना कि उनके खिलाफ लगाई गई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(6) (जबरन वसूली) जमानती प्रकृति की है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जा सकता है।
राठौर की ओर से अधिवक्ता अभिलाष शर्मा ने पक्ष रखा, जबकि अभियोजन पक्ष ने गिरफ्तारी को उचित ठहराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपित पर लगाई गई धारा जमानती श्रेणी में आती है। इसके आधार पर अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही धनराशि की जमानत पर रिहाई के आदेश दिए।
अब क्या ‘खुलासा’ करेंगे पूर्व विधायक
गौरतलब है कि वायरल ऑडियो प्रकरण और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों को लेकर सुरेश राठौर पिछले कई महीनों से विवादों में रहे हैं। इसी मामले में उनके खिलाफ विभिन्न थानो में मुकदमे दर्ज किए गए थे और हाल ही में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक कथित वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद चर्चा में आया था।
इस मामले में उनके खिलाफ कई शिकायतें और मुकदमे दर्ज हुए। भाजपा ने भी उन्हें अनुशासनहीनता और विवादों के चलते छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
दूसरी ओर, अभिनेत्री उर्मिला सनावर ,आरती गौड़ और उक्रांद नेता राकेश ध्यानी के बीच सोशल मीडिया में जबरदस्त वाकयुद्ध चल रहा है। उर्मिला ने ध्यानी पर गम्भीर प्रकृति के आरोप लगाए हैं। जबकि आरती गौड़ ने उर्मिला की गिरफ्तारी की मांग की है। ये सभी एक दूसरे के पुराने कच्चे चिठ्ठे खोल रहे हैं।
कुछ महीने पूर्व उर्मिला और राकेश ध्यानी के एक ही कार में सफर करते हुए औए हंसी ठिठोली का वीडियो भी वॉयरल हो रहा है। और अब तीनों एक दूसरे के चरित्र हनन को खूब उछाल रहे हैं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड की जारी सीबीआई जॉच के बीच राठौर की गिरफ्तारी और मामले से जुड़े उर्मिला, आरती, राकेश ध्यानी की सोशल मीडिया में जारी जंग ने राजनीति को फिर गर्मा कर दिया है।
सीबीआई जांच के परिणाम का इंतजार
अब जमानत मिलने के बाद पूर्व विधायक राठौर क्या कहते हैं,किस को निशाने पर लेते हैं। इस पर भी निगाहें टिकी हुई हैं। गौरतलब है कि गिरफ्तारी से पूर्व राठौर ने मीडिया को कहा था कि उनके खिलाफ साजिश हो रही है।
ऊर्जा निगमों में कथित भ्रष्टाचार मामला -हाईकोर्ट सख्त
ऊर्जा निगमों में कथित अनियमितताओं का मामला पिछले कई महीनों से चर्चा में है। शिकायतकर्ता आशीष सैनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड (पिटकुल), उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन (यूपीसीएल) समेत विभिन्न ऊर्जा उपक्रमों में नियमों के विपरीत नियुक्तियां की गईं। इसके अलावा निविदा प्रक्रियाओं में अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ियां और प्रशासनिक स्तर पर पक्षपात के आरोप भी लगाए गए।
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस संबंध में ऊर्जा विभाग को विस्तृत शिकायत भेजे जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से जवाब तलब किया और अब शिकायत पर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता को भी एक हफ्ते के अंदर आरोपों के संदर्भ में शपथ पत्र पेश करने को कहा है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य के ऊर्जा निगम लंबे समय से भर्ती, खरीद और ठेकों को लेकर विवादों में रहे हैं। ऊर्जा प्रदेश के सपने को साकार करने में असफल रहे ऊर्जा निगमों की कार्यप्रणाली राज्य गठन के समय से ही चर्चा में रही है।