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  • जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर बौद्ध मंत्र लिखे जाने पर शंकराचार्य ने जताई नाराजगी

    जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर बौद्ध मंत्र लिखे जाने पर शंकराचार्य ने जताई नाराजगी

    शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि धर्म विशेष के विरोध में नहीं .उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख हो

    शंकराचार्य ने एयरपोर्ट के अधिकारियों को निर्देशित किया

    चारधाम में अधिक तीर्थयात्री आये, उन्हें ज्यादा सुविधाएं दी जाय

     

    देहरादून। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर बौद्ध मंत्र लिखे जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहां कि वे किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं है। लेकिन उत्तराखंड देवभूमि है। इसलिए उचित होगा कि यहां की सांस्कृतिक विरासत से जुडे साहित्य तथा वेदों का भी उल्लेख यहां होना चाहिए । उन्होंने एयरपोर्ट अधिकारियों को इस बारे में निर्देशित भी किया।

    देहरादून एयरपोर्ट पर प्रेस से अनौपचारिक वार्ता में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर के कपाट आगामी 18 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो रहे हैं । वे दूसरी बार बतौर शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर उपस्थित रहेंगे ।

    उन्होंने कहा शीतकालीन यात्रा पर भी ध्यान केंद्रित किए जाने की आवश्यकता है। इसकी शुरुआत ज्योर्तिमठ की ओर से विगत वर्ष से प्रारंभ हो गई है। कहा वे स्वय जल्दी ही शीतकालीन पूजा स्थलों की यात्रा करेंगे।

    ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज चार दिवसीय उत्तराखंड प्रवास पर बुधवार को देहरादून पहुंचने पर उनका स्वागत एवम अभिनंदन किया गया। 18 तारीख को मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर ज्योतिष पीठ की शंकराचार्य मौजूद रहेंगे।

    शंकराचार्य ने कहा कि इस वर्ष बड़ी संख्या में उत्तराखंड स्थित चार धामों गंगोत्री, यमुनोत्री , बदरी नाथ और केदारनाथ धाम में श्रद्धालु आए। लेकिन यात्रियों का लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

    इस अवसर पर ज्योतिर्मठ प्रभारी ब्रहमचारी मुकुदानंद, ब्रहमचारी श्रवानंद , ज्योतिर्मठ के मीडिया प्रभारी डॉ बृजेश सती, चारधाम तीर्थ पुरोहित महा पंचायत के उपाध्यक्ष उमेश सती, डिमरी केन्द्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, सरस्वती विहार विकास समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट, सचिव गजेंद्र भंडारी, अनूप फर्त्याल, द्मंदिर संयोजक मूर्त

  • केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद

    केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद

    शीतकालीन पूजा स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में होगी

    भारतीय सेना के बैंड के भक्तिमय स्वर लहरियों के बीच

    सैकड़ों तीर्थयात्री कपाट बंद होने के साक्षी बने

    उन्नीस लाख सत्तावन हजार आठ सौ पचास ने बाबा केदार के दर्शन किये

     

    केदारनाथ धाम। बाबा की जयजयकार के बीच श्री केदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज बुधवार को सुबह साढ़े आठ बजे विधि- विधान से बंद हो गये। शीतकालीन पूजा स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में होगी। 18 नवंबर को बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे।  कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से फूलों से सजाया गया था और ढाई हजार से अधिक तीर्थयात्री कपाट बंद होने के गवाह बने इस दौरान सेना के भक्तिमय धुनों के साथ जय श्री केदार तथा ऊं नम् शिवाय के उदघोष से केदारनाथ गूंज उठा।
    कपाट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली हजारों तीर्थयात्रियों के साथ सेना के बैंड बाजों के साथ पैदल प्रथम पड़ाव रामपुर के लिए प्रस्थान हुई।

    श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंद्र अजय मंगलवार को कपाट बंद की तैयारियों हेतु श्री केदारनाथ पहुंच गये थे आज इस अवसर पर उनके साथ असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व शर्मा की धर्मपत्नी व परिजन भी कपाट बंद होने के अवसर पर मौजूद रहे।‌

    कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में श्री केदारनाथ यात्रा का सफलतापूर्वक समापन हो रहा है। इस यात्रावर्ष साढ़े उन्नीस लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने भगवान केदारनाथ के दर्शन किये। उन्होंने यात्रा से जुड़े सभी संस्थानों को भी बधाई दी।
    बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी योगेन्द्र सिंह ने बताया कि केदारनाथ धाम में कपाट खुलने की तिथि से मंगलवार 14 नवंबर रात्रि तक 1957850(उन्नीस लाख सत्तावन हजार आठ सौ पचास ) तीर्थयात्रियों ने दर्शन किये।

    आज ब्रह्ममुहुर्त में श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले। मंदिर में नित्य नियम पूजा- अर्चना तथा दर्शन हुए तत्पश्चात कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत स्वयंभू शिवलिंग से श्रृंगार अलग कर केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग की उपस्थिति में पुजारी शिवलिंग ने स्थानीय शुष्क पुष्पों, ब्रह्म कमल, कुमजा,राख से समाधि रूप दिया गया। इस दौरान श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय पूरे समय मौजूद रहे।

    साथ ही जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के अधिकारीगण, मुख्य कार्याधिकारी योगेन्द्र सिंह, तीर्थपुरोहित समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे। ठीक साढ़े छ: बजे मंदिर गर्भ गृह में समाधि पूजा समापन की गयी तत्पश्चात मंदिर के अंदर सभामंडप में स्थित छोटे मंदिरों को भी बंद किया गया इसके बाद ठीक साढ़े आठ बजे केदारनाथ मंदिर के दक्षिण द्वार को बंद कर दिया गया तथा उसके तुरंत बाद पूरब द्वार को भी बंद किया गया।

    आजकल श्री केदारनाथ क्षेत्र बर्फ की चादर ओढ़े है । आधा फीट तक बर्फ मौजूद है आज कपाट बंद के के समय मौसम साफ रहा।

    इस अवसर पर भारतीय सेना, आईटीबीपी तथा दानीदाताओं ने तीर्थयात्रियों के लिए भंडारे आयोजित किये थे।
    बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट बंद होने के बाद आज श्री केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली पहले पड़ाव रामपुर पहुंचेगी। 16 नवंबर को पंचमुखी डोली गुप्तकाशी पहुंचेगी।

    17 नवंबर शुक्रवार को भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी मूर्ति शीतकालीन पूजा स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी।इसके पश्चात शीतकालीन पूजास्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में श्री केदारनाथ भगवान की शीतकालीन पूजा शुरू हो जायेगी।

    इस अवसर पर मंदिर समिति सदस्य श्रीनिवास पोस्ती,बीकेटीसी मुख्यकार्याधिकारी योगेन्द्र सिंह, तहसीलदार दीवान सिंह राणा कार्याधिकारी आरसी तिवारी, केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, थाना प्रभारी मंजुल रावत प्रदीप सेमवाल, अरविंद शुक्ला, देवानंद गैरोला उम्मेद नेगी, कुलदीप धर्म्वाण, ललित त्रिवेदी सहित जनप्रतिनिधि तीर्थपुरोहित एवं हज़ारों तीर्थयात्री मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 18 नवंबर को बंद हो रहे है।

  • यमुनोत्री धाम के कपाट भैयादूज के पावन पर्व पर  हुए बंद

    यमुनोत्री धाम के कपाट भैयादूज के पावन पर्व पर हुए बंद

    उत्तरकाशी ।  भैयादूज के पावन पर्व पर आज बुधवार को सुबह 11बजकर 57 मिनट पर विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। जिसके बाद शीतकाल में छह माह तक मां यमुना के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास खुशीमठ (खरसाली) में होंगे। श्री पांच पंडा समिति यमुनोत्री धाम के अध्यक्ष पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया है कि भैया दूज के पावन पर्व पर बुधवार सुबह मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खरसाली से शनिदेव की यमुनोत्री धाम पहुंची। जहां विधिवत पूजा अर्चना एवं हवन यज्ञ क्रिया के बाद 11 बजकर 57 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शीतकाल के लिए यमुनोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए गये। इस दौरान धाम में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। कपाट बंद करने के बाद मां यमुना की डोली यमुनोत्री धाम से शनि देव की डोली की अगुवाई में अपने शीतकालीन प्रवास खुशीमठ के लिए रवाना हुई ।  यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में छह माह तक मां यमुना की पूजा अर्चना उनके शीतकालीन प्रवास खुशीमठ में होगी तथा यहीं पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु शीतकाल में छह माह तक मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे। जिसके बाद अगले साल पुनः अक्षय तृतीया के पर्व पर ग्रीष्म काल के लिए यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इस यात्रा वर्ष में यमुनोत्री धाम में दर्शनों के लिए साढ़े सात लाख श्रद्धालु पहुंचे।

  • ‘‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’’ को राज्यपाल ने किया रवाना

    ‘‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’’ को राज्यपाल ने किया रवाना

    प्रदेश के 4 विकासखण्डों के 18 जनजातीय बाहुल्य ग्राम पंचायतों को कवर करेगी यात्रा

     

    देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर झारखंड से ‘‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’’ का शुभारंभ किया। सरकार की प्रमुख योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने व उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस यात्रा के माध्यम से पहले जनजातीय व वंचित समुदायों और उसके बाद प्रत्येक व्यक्ति तक योजनाओं की संतृप्ति का लक्ष्य रखा गया है। इस संकल्प यात्रा का उद्देश्य सर्वप्रथम उन वंचित लोगों के लिए है जो किसी योजना का लाभ लेने से वंचित रहे हैं।

    यह यात्रा लोगों के पास जाने, जागरूकता पैदा करने और स्वच्छता सुविधाओं, आवश्यक वित्तीय सेवाओं, बिजली कनेक्शन, एलपीजी सिलेंडर तक पहुँच, गरीबों के लिए आवास, खाद्य सुरक्षा, उचित पोषण, विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छ पेयजल जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने पर केंद्रित है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पीएम जनमन अभियान का भी शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने ‘‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रूपये की 15वीं किस्त ऑनलाइन माध्यम से पात्र किसानों को ट्रांसफर की।

    राजभवन देहरादून से इस कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) सहित कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, श्रीमती रेखा आर्या सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के पश्चात राज्यपाल ने देहरादून जनपद हेतु ‘‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह संकल्प यात्रा जनपद के 4 विकासखण्डों के 18 जनजातीय बाहुल्य ग्राम पंचायतों को आच्छादित करेगी। इस यात्रा में जनसाधारण को लाभ पहुँचाने वाली शहरी क्षेत्र के लिए कुल 17 योजनाओं के संबंध में प्रचार-प्रसार किया जायेगा।

    साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 22 विभागों के माध्यम से संचालित की जाने वाली लाभार्थीपरक योजनाओं की जानकारी जनसाधारण को दी जायेगी। इस अवसर पर पीएम किसान सम्मान निधि की द्वितीय त्रैमास के लिए 15वीं किस्त प्रदेश के 6.80 लाख किसानों को ट्रांसफर की गई।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत संकल्प यात्रा अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ और उन्हें योजनाओं के संबंध में जागरूक करेगी। उन्होंने कहा कि इस जागरूकता वैन के माध्यम से अनुसूचित जाति बाहुल्य पंचायतों के लोग लाभान्वित होंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि इस संकल्प यात्रा के माध्यम से योजनाओं का शतप्रतिशत लाभ लोगों तक पहुंचे।

    राज्यपाल ने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह योजना पात्र व्यक्ति तक अवश्य पहुंचे और इससे वह लाभान्वित हों। उन्होंने कहा कि आज माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा पीएम जनमन अभियान का भी शुभारंभ किया गया है जो जनजातीय समुदाय के लिए सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने अमृत काल में जिन चार स्तंभों-नारी शक्ति, युवा शक्ति, किसान और मध्यम वर्ग का जिक्र किया गया वह विकसित भारत, विश्व गुरु भारत और आत्मनिर्भर भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित योजनाओं से लाभान्वित होने वाले किसानों से भी संवाद कर योजनाओं का फीडबैक दिया। इस कार्यक्रम में सांसद नरेश बंसल, मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक खजान दास, सचिव श्रीमती राधिका झा, अपर सचिव श्रीमती स्वाति एस भदौरिया, रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी देहरादून श्रीमती सोनिका, मुख्य विकास अधिकारी झरना कमठान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

  • सीएम धामी ने  सात दिवसीय गौचर मेले  का किया उद्घाटन

    सीएम धामी ने सात दिवसीय गौचर मेले का किया उद्घाटन

    पारम्परिक पहाड़ी संस्कृति से सजा पांडाल बना आकर्षण का केन्द्र

    गौचर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत करने की घोषणा

    गौचर मेले के पहले दिन ईष्ट रावल देवता की पूजा के साथ स्कूली बच्चों ने निकाली प्रभात फेरी

    देहरादून। गौचर में 71वॉं राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का शानदार आगाज हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गौचर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। मेले के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री के पहुंचने पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों एवं फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गौचर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उच्चीकरण करने की घोषणा भी की।

    गौचर मेले में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले हमारे जीवन में इंद्रधनुषी रंगों की तरह हैं और जीवन में ताजगी और उत्साह भर देते हैं। प्राचीन समय में, जब संचार और परिवहन की कोई ऐसी सुविधाएं नहीं थीं, तो इन मेलों ने सामाजिक ताने- बाने को बुनने में बहुत मदद की और लोगों का सामाजिक और व्यावहारिक दायरा बढ़ाया। गौचर मेला संस्कृति, बाजार तथा उद्योग तीनों के समन्वय के कारण हमारे राज्य का एक प्रसिद्ध राजकीय मेला है। उन्होंने मेले को भव्य एवं आकर्षक स्वरूप देने के लिए जिला प्रशासन की सराहना भी की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए रोड कनेक्टिविटी, रेल कनेक्टिविटी, रोपवे कनेक्टिविटी, हवाई कनेक्टिविटी सहित ऊर्जा एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में विशेष कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में चारधाम सड़क परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाईन का निर्माण तथा निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाएं इस बात का उदाहरण हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के विकास के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने का ‘‘विकल्प रहित संकल्प‘‘ के साथ कार्य किये जा रहे हैं। इस संकल्प के कुछ पड़ाव हमने पार कर लिए हैं पर अभी बहुत काम करना बाकी हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अंत्योदय परिवारों को तीन गैस सिलेंडर देने, प्रदेश की महिलाओं के लिये 30 प्रतिशत के क्षैतिज आरक्षण, समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण पर रोक के लिये कानून और सख्त नकल विरोधी कानून लागू करने का काम किया है। राज्य आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था भी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए प्रदेश और प्रदेश का हित सर्वोपरि हैं। प्रदेश में किसी भी वर्ग का अहित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड को देश का एक ‘श्रेष्ठ राज्य‘ बनाने के लिए सभी के सहयोग और मार्गदर्शन करते रहने की बात कही।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राजपाल सिंह बिष्ट को गोविन्द प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान और “विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान, उत्तराखण्ड“ को पंडित महेशानन्द नौटियाल शिक्षा और साहित्य प्रसार सम्मान से सम्मानित भी किया। क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल एवं मेला उपाध्यक्ष  अंजू बिष्ट ने गौचर मेले का शुभारंभ करने पर मुख्यमंत्री का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया और मुख्यमंत्री को क्षेत्र की समस्या से अवगत कराते हुए समस्याओं के निदान के लिए मांग पत्र भी दिया।

    गौचर मेले में पहले दिन रावल देवता की पूजा के बाद प्रातः स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। मेलाध्यक्ष/जिलाधिकारी हिमांशु खुराना द्वारा झंडारोहण कर मार्चपास की सलामी ली गई। गौचर मेला मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक एवं वापसी उसी रूट से होते हुए मुख्य मेला द्वार तक क्रास कण्ट्री दौड़ का आयोजन किया गया। खेल मैदान में बालक एवं बालिकाओं की दौड़, नेहरू चित्रकला प्रतियोगिता, शिशु प्रदर्शनी और शिक्षण संस्थाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या पर रात्रि को प्रसिद्ध जागर गायिका श्रीमती बसंती बिष्ट द्वारा लोकगीत, नृत्य और जागर के साथ ही गायक जितेंद्र तुमक्याल और श्वेता मेहरा द्वारा कुमांऊनी नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी। गौचर मेले में पारम्परिक पहाडी संस्कृति से सजा पांडाल मेलार्थियों के बीच खासे आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

    मेले के उद्घाटन के अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, सांसद अजय टम्टा, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी, राज्य मंत्री रमेश गडिया, पूर्व विधायक  मुन्नी देवी शाह, कर्णप्रयाग ब्लाक प्रमुख/मेला उपाध्यक्ष  चन्द्रेश्वरी देवी, गौचर नगर पालिका अध्यक्ष/मेला उपाध्यक्ष  अंजू बिष्ट, कर्णप्रयाग नगर पालिका अध्यक्ष  दमयंती रतूड़ी, जिलाधिकारी/मेलाध्यक्ष हिमांशु खुराना, पुलिस अधीक्षक सुश्री रेखा यादव, मुख्य विकास अधिकारी डा.ललित नारायण मिश्र, एडीएम डा.अभिषेक त्रिपाठी, मेलाधिकारी संतोष कुमार पांडेय, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह देव आदि सहित बडी संख्या में मेलार्थी मौजूद थे।

  • राज्यपाल  ने हिम ज्योति स्कूल की बच्चियों के साथ मनाया बाल दिवस

    राज्यपाल ने हिम ज्योति स्कूल की बच्चियों के साथ मनाया बाल दिवस

    देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने हिम ज्योति स्कूल की बच्चियों के साथ बाल दिवस मनाया। मंगलवार को राजभवन में आईं हिम ज्योति स्कूल की बच्चियों से मुलाकात कर राज्यपाल ने उन्हें बाल दिवस की शुभकामनाएँ दीं। राज्यपाल ने बच्चियों से संवाद करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना आशीर्वाद दिया। बच्चियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जीवन में हमेशा बड़ा लक्ष्य रखें और उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करें। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, आत्मानुशासन किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई विशिष्ट प्रतिभा छुपी होती है स्वंय को पहचानकर उसी क्षेत्र में आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने बच्चों से सुबह हमेशा जल्दी उठने की आदत और खुश रहने को कहा।

    राज्यपाल ने कहा कि बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, देश के बेहतर भविष्य के लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य दिया जाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत में बच्चे और युवा सर्वाधिक हैं इस दृष्टि से यह जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनको आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि भविष्य का भारत हमारे बच्चों और युवाओं के नेतृत्व में नई ऊँचाइयों को छुएगा। इस अवसर पर राज्यपाल की धर्मपत्नी श्रीमती गुरमीत कौर, स्कूल के ट्रस्टी हेमंत के अरोड़ा, प्रधानाध्यापिका रूमा मल्होत्रा मौजूद रहीं।

  • शुभ मुहूर्त में बंद हुए गंगोत्री धाम के कपाट

    शुभ मुहूर्त में बंद हुए गंगोत्री धाम के कपाट

    विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट के पर्व पर मंगलवार दोपहर 11.45 बजे पर शीतकाल के लिए विधिविधान से बंद किए गए जिसके बाद मां गंगा की डोली जयकारों के साथ मुखवा के लिए रवाना हुई। केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 15 नवंबर को भैयादूज पर बंद होंगे। वहीं शीतकाल के लिए भगवान बदरीनाथ के कपाट 18 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इस बार उत्तराखंड में चारधाम तीर्थयात्रा ने अपना रिकार्ड बनाया है। 13 नवंबर तक चारों धामों में 55.89 लाख तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं। गंगोत्री धाम में भी इस बार तीर्थयात्रियों का सैलाब उमड़ा और नया रिकार्ड बना है। वर्ष 2022 में गंगोत्री धाम में 624451 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए थे। मंगलवार को गंगोत्री धाम के कपाट बंद किए जाने के अवसर सुबह 10 बजे मां गंगा के मुकुट को उतारा गया जिसके बाद श्रद्धालुओं ने निर्वाण के दर्शन किए। वेद मंत्रों के साथ मां गंगा की मूर्ति का महाभिषेक किया गया।

    सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन कर लगाए जयकारे
    इस अवसर पर तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन किए तथा गंगा तट पर पूजा अर्चना की। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन कर जयकारे लगाए।

    स्थानीय ग्रामीणों ने रांसो तांदी नृत्य किया, जिसके बाद विधिवत हवन पूजा-अर्चना के साथ दोपहर 11.45 बजे अभिजीत मुहूर्त की शुभ बेला पर कपाट बंद किए गए। जिसके बाद गंगा की डोली लेकर तीर्थ पुरोहित मुखवा के लिए प्रस्थान हुए। डोली रात्रि निवास चंडी देवी मंदिर में निवास करेगी। 15 नवंबर को गंगा की डोली मुखवा स्थित गंगा मंदिर में पहुंचेगी।

    कपाट खोले और बंद होने पर शामिल होती हैं भारतीय सेना
    गंगोत्री धाम के निकट भारत चीन सीमा स्थित है। सीमा पर भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के साथ भारतीय सेना भी तैनात रहती है। यहां सेना का सेक्टर हर्षिल में स्थापित है। हर तीन वर्ष में सेना की रेजिमेंट भी बदलती रहती हैं। यहां सेना की मां गंगा के प्रति गहरी आस्था है। 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद यहां सेना की तैनाती की गई। जिसके बाद से निरंतर हर्षिल में तैनात रहने वाली भारतीय सेना के जवान व अधिकारी गंगोत्री धाम के कपाट खोलने और बंद होने के अवसर पर शामिल होते हैं।

    साथ ही इस अवसर पर तीर्थ यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए मुखवा और गंगोत्री धाम में भंडारे का भी आयोजन करते आ रहे हैं। पिछले एक वर्ष से हर्षिल सेक्टर में जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फेंट्री के जवान तैनात हैं। मंगलवार को गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के अवसर ये जवान सेना के बैंड के साथ शामिल हुए और गंगा डोली के साथ मुखवा आए।

    तीर्थयात्रियों का आंकड़ा (13 नवंबर तक का)

    यमुनोत्री – 735040

    गंगोत्री – 904869

    केदारनाथ – 1955413

    बदरीनाथ – 1793955

  • उत्तरकाशी सुरंग हादसा : ‘ट्रंच लैस’ तकनीक  के माध्यम से बचाई जाएगी मजदूरों की जान

    उत्तरकाशी सुरंग हादसा : ‘ट्रंच लैस’ तकनीक के माध्यम से बचाई जाएगी मजदूरों की जान

    उत्तरकाशी सुरंग हादसे में फंसे श्रमिकों को बचाने को जल निगम की ‘ट्रंच लैस’ तकनीक का इस्तेमाल होगा। दून से जल निगम की ट्रंच लैस ओगर ड्रिलिंग मशीन को उत्तरकाशी भेजा है। साथ ही 800 एमएम के ह्यूम पाइप भी भेजे गए हैं।
    उत्तरकाशी में सुरंग के भीतर लगातार मलबा गिर रहा है। ऐसे में श्रमिकों को किस तरह सुरक्षित बाहर निकाला जाए, इसकी योजना बनाने के लिए आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा, सीवर लाइन एक्सपर्ट और जल निगम के सुरेश चंद्र पंत के साथ मौके पर पहुंचे। जल निगम के एमडी ने मौका मुआयना के बाद बताया कि टनल में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए ट्रंच लैस ओगर ड्रिलिंग मशीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
    ट्रंच लैस सीवर तकनीक में सड़कों के नीचे बिना सड़क को खोदे ही सीवर लाइन बिछा दी जाती है। इसी तकनीक से यहां भी 800 एमएम के बड़े सीवर लाइन के पाइप डाले जाएंगे। ये पाइप देहरादून और गाजियाबाद से उत्तरकाशी में घटनास्थल पर पहुंचाए जा रहे हैं।
    इन्हीं पाइपों के जरिए श्रमिकों को बाहर निकाला जाएगा। ड्रिलिंग मशीन सोमवार रात तक मौके पर पहुंच गई हैं । उसके बाद फौरन ही काम शुरू कर दिया गया हैं । इसकी निगरानी के लिए सीवर लाइन एक्सपर्ट को भी मौके पर तैनात किया गया है। एसई दीपक मलिक भी पूरे समय मौके पर रहेंगे

  • शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रियाएं शुरू

    शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रियाएं शुरू

    आज 14 नवंबर से बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रियाएं शुरू हो जाएंगी। मंगलवार को धार्मिक परंपरा के अनुसार, पूजा-अर्चना और भोग लगने के बाद धाम परिसर में स्थित भगवान गणेश मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 18 नवंबर को अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर बंंद किए जाएंगे।
    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि गणेश मंदिर बंद होने के बाद 15 नवंबर को आदिकेदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद होंगे। इससे पूर्व आदिकेदारेश्वर भगवान को पके चावलों का भोग लगाया जाएगा। 16 को खड़क पुस्तकों को गर्भगृह में रखा जाएगा और इसी के साथ बदरीनाथ धाम में वेद ऋचाओं का वाचन छह माह के लिए बंद हो जाएगा।
    17 को धाम परिसर में स्थित लक्ष्मी मंदिर में कढ़ाई भोग का आयोजन होगा और 18 नवंबर को मां लक्ष्मी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में विराजमान कर गर्भगृह से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को बाहर लाकर उत्सव डोली में रखा जाएगा। इसके बाद अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाएंंगे।

  • दीवाली पर सीएम धामी  कुम्हारों से मिले,  खरीदे मिट्टी के दीये

    दीवाली पर सीएम धामी कुम्हारों से मिले, खरीदे मिट्टी के दीये

    सीएम ने कहा, वोकल फॉर लोकल’ के तहत स्थानीय उत्पाद खरीदें

    मुख्यमंत्री ने कुम्हार मंडी का किया भ्रमण, डिजिटल माध्यम से किया भुगतान

    दीपावली का पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक: मुख्यमंत्री

     देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुम्हार मंडी से मिट्टी के दीये खरीदे। डिजिटल भुगतान किया और कुम्हारों को दीपावली की शुभकामनाएं दी।

    मुख्यमंत्री ने  दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीये दीपावली के पर्व को पावनता प्रदान करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के घरों में दीपावली पर जलने वाले दीये कुम्हारों की खुशहाली तथा आर्थिक समृद्धि का भी माध्यम बनते हैं।

    मुख्यमंत्री ने क्रय किये गये दीयों का डिजिटल माध्यम से भुगतान करते हुए, उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रांजेक्शन देश में तेजी से बढ़ा है। भारत दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन करने वाला देश है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में लोग यदि स्थानीय उत्पादों के क्रय पर ध्यान दे तो हमारा देश भी आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा तथा स्थानीय उत्पादकों का बनोबल भी बढ़ेगा।

    मुख्यमंत्री ने सुख, समृद्धि और संपन्नता के प्रतीक दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुये कहा कि माँ लक्ष्मी और भगवान  गणेश जी के आशीर्वाद से सभी के जीवन में सुख समृद्धि, शांति एवं आरोग्य का संचार हो।