Category: ताजा खबर

  • भागवत कथा: धर्म, भक्ति और पर्यटन विकास की नई बयार

    भागवत कथा: धर्म, भक्ति और पर्यटन विकास की नई बयार

    चारधाम यात्रा से कॉरिडोर परियोजनाओं तक, सरकार ने गिनाए बड़े कदम

    ऋषिकेश। यमकेश्वर स्थित वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान कृष्ण का सजीव स्वरूप है, जो मानव को धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करते हुए जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चारधाम यात्रा मार्गों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से यात्रा अब पहले की तुलना में अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक हो गई है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं संचालित कर रही है। कालसी-हरीपुर क्षेत्र में यमुना नदी के तट पर घाट निर्माण, शारदा कॉरिडोर, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर तथा दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना जैसे कार्य प्रदेश की आर्थिकी और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

    स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों और प्रभावी कार्यशैली के चलते यमकेश्वर क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिली है, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है।
    इस अवसर पर व्यास पीठ से कथा वाचन कर रहे गोविन्द देव गिरी महाराज ने श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और सत्कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

    परमार्थ आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों, सेवा भाव और मानवता के उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करने का सशक्त माध्यम है।

  • युवा सपनों को पंख लगायेगी मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना

    युवा सपनों को पंख लगायेगी मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना

    11 हजार छात्रों को मिलेगी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग

    योजना के तहत छात्रों के चयन को आयोजित होगी स्क्रीनिंग परीक्षा

    देहरादून । राज्य सरकार मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के माध्यम से युवा सपनों को पंख लगाने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत इस योजना के तहत प्रत्येक वर्ष 11 हजार छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये निःशुल्क आॅन लाइन कोचिंग दी जायेगी। योजना के तहत जनपदवार युवाओं का चयन खुली स्क्रीनिंग परीक्षा के माध्यम से किया जायेगा। योजना पर राज्य सरकार प्रतिवर्ष लगभग 11 करोड़ की धनराशि खर्च करेगी। जिसका शासन स्तर से शासनादेश जारी कर दिया गया है।

    राज्य सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये दृढ़ संकल्पित है। यही वजह है कि सरकार मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के माध्यम से युवा सपनों को साकार कर रही है। जिसके तहत राज्य विश्वविद्यालयांे, शासकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों में अध्ययनरत 11 हजार छात्रों को प्रत्येक वर्ष विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी को निःशुल्क आॅन लाइन कोचिंग दी जायेगी। इसके लिये छात्रों का वर्गवार लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें सिविल सर्विसेज हेतु 2000 छात्र, एसएससी, रेलवे सर्विसेज एवं समकक्ष परीक्षाओं के लिये 5000 छात्र, बैंकिंग सर्विसेज के लिये 2000 तथा कैट, मैट, गेट, नेट, सीएसआईआर जैसी योग्यता परीक्षाओं एवं प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण की प्रवेश परीक्षाओं के लिये 2000 छात्रों को शामिल गया है। इन छात्रों की आॅनलाइन कोचिंग पर प्रतिवर्ष लगभग 11 करोड़ का व्यय किया जायेगा।

    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि छात्रों का चयन जनपदवार खुली स्क्रीनिंग परीक्षा के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किया जायेगा। योजना का लाभ विभिन्न पाठ्यक्रमों में अंतिम वर्ष में अध्ययनरत छात्रों के साथ-साथ उन अभ्यर्थियों को भी मिलेगा, जिन्होंने एक वर्ष पूर्व स्नातक या स्नातकोत्तर उत्तीर्ण किया है। चयनित अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक छात्र को यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। कोचिंग प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, वीडियो लेक्चर, प्रैक्टिस सेट तथा साप्ताहिक मॉक टेस्ट की व्यवस्था की गई है। साथ ही, कमजोर छात्रों के लिए विशेष सुधारात्मक कक्षाएं संचालित की जाएंगी, जिससे उनकी तैयारी को और सुदृढ़ किया जा सके।

    योजना के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए सचिव, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया है। इसके अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय राज्य स्तरीय स्टेयरिंग समिति भी गठित की गई है, जो प्रतिवर्ष योजना की समीक्षा और मूल्यांकन करेगी।

    बयान–
    किसी भी प्रतिभाशाली युवा की प्रगति में आर्थिक या संसाधनों की कमी बाधा न बने। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ के तहत प्रत्येक वर्ष 11 हजार युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की ठानी है। यह योजना न केवल युवाओं को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता दिलाने में सहायक होगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। – डाॅ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

  • स्वामी परमानन्द गिरि महाराज संन्यास जयंती संत समागम

    स्वामी परमानन्द गिरि महाराज संन्यास जयंती संत समागम

    अक्षय तृतीया पर हरिद्वार में भव्य आयोजन, मुख्यमंत्री ने किया गंगा घाट का लोकार्पण

    चारधाम यात्रा शुरू, सरकार ने सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा का दिया भरोसा

    हरिद्वार। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की 71वीं संन्यास जयंती के उपलक्ष्य में दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर नमामि गंगे योजना के तहत निर्मित अखंड परमधाम गंगा घाट का लोकार्पण भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक घाट के लोकार्पण का अवसर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना के प्रवाह का प्रतीक है। उन्होंने स्वामी परमानन्द गिरि के जीवन को तप, त्याग और साधना का उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके विचार समाज को सेवा और मानव कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।

    साध्वी ऋतंभरा के योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। संतों का सानिध्य समाज को दिशा देने और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सनातन सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में केदारखंड और मानसखंड मंदिर क्षेत्रों का विकास, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार जैसे कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना की गई है।

    मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता लागू करने, धर्मांतरण विरोधी कानून और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए संकल्पबद्ध है।
    उन्होंने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए आध्यात्मिक मूल्यों का सुदृढ़ होना आवश्यक है और सभी से संतों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा के शुभारंभ की जानकारी देते हुए कहा कि मां गंगा और मां यमुना के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करना है, जिसके लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    इस अवसर पर पूज्य स्वामी बालकानंद जी महाराज, पूज्य  बीकानेर स्वामी विशोकानन्द भारती जी महाराज, योग ऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज,साध्वी ऋतंभरा (दीदी मां), पूज्य स्वामी महाराज अविचल दास जी, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पूरी महाराज,निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज, आचार्य स्वामी ज्योतिर्यानंद गिरी महाराज,पूज्य स्वामी मुनि जी महाराज, महंत ज्ञानदेव सिंह जी महाराज ,चिदानंद मुनि जी महाराज, पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज, स्वामी अनंत देव जी महाराज, पूज्य बाबा निर्मल दास जी महाराज,  जितेंद्रानंद सरस्वती महाराज, अध्यक्ष राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग पूज्य साध्वी निरंजन ज्योति जी, महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर पूज्य आत्मानंद मुनि जी महाराज, महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयानंद जी महाराज,राष्ट्रीय मंत्री हिंदू परिषद अशोक तिवारी, पंचायतीराज एवं आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक , परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर,मुख्य नगर आयुक्त नंदन कुमार,एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह सहित देशभर से आए संत महात्मा एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण: मुख्यमंत्री

    नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण: मुख्यमंत्री

    “महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने वालों को मातृशक्ति देगी करारा जवाब”

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाबत कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णय-निर्माण में समान भागीदारी देने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता था।

    पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम से संबंधित विषय पर विपक्ष के महिला विरोधी रवैये की आलोचना की।
    उन्होंने इस विषय को केवल एक विधायी पहल नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों, सम्मान और सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ ऐतिहासिक अवसर बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि   यह अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल थी, जिससे लोकतंत्र और अधिक समावेशी और संतुलित बनता। लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) जैसे विपक्षी दलों ने एक बार फिर राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसे सफल नहीं होने दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों और उनकी आकांक्षाओं के प्रति उनकी वास्तविक सोच को भी उजागर करता है।
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी देश में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाया जाता है, तब-तब विपक्षी दलों द्वारा किसी न किसी बहाने से उसे रोकने या कमजोर करने का प्रयास किया जाता है।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के अधिकारों को टालने और दबाने का रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब महिलाओं को शीघ्र 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने की दिशा में ठोस पहल की गई, तब विपक्ष ने बहानों, भ्रामक तर्कों और राजनीतिक गणित के जरिए इस प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि यह महिलाओं की प्रगति को रोकने का प्रयास था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा लगातार यह भ्रम फैलाया गया कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण कुछ राज्यों या क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि यह पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन है।
    इस विषय पर  केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने भी संसद में स्पष्ट किया था कि परिसीमन की इस प्रक्रिया से देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र के प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसके बावजूद विपक्ष ने जनता को गुमराह करने का कार्य किया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज देश की मातृशक्ति जागरूक है, सक्षम है और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवा रही है—चाहे वह राजनीति हो, प्रशासन हो, शिक्षा, विज्ञान, खेल या उद्यमिता का क्षेत्र। ऐसे में महिलाओं को निर्णय-निर्माण की मुख्यधारा से दूर रखना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में देश की मातृशक्ति उन दलों को करारा जवाब देगी, जो उनके अधिकारों में बाधा बन रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल दर्शक नहीं हैं, बल्कि वे देश की नीति और दिशा तय करने में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र और राज्य सरकारें महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू कर रही हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं और भविष्य में भी ऐसे सभी प्रयास किए जाते रहेंगे, जो देश की मातृशक्ति को सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानित बनाने में सहायक सिद्ध हों।
    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे प्रयासों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा महिलाओं को उनका उचित स्थान और सम्मान अवश्य प्राप्त होगा।

    प्रेस कांफ्रेंस के दौरान  विधायक सविता कपूर, पार्टी की वरिष्ठ महिला पदाधिकारीगण, विभिन्न प्रकोष्ठों एवं मोर्चों की प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता, युवा कार्यकर्ता, तथा पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।

  • गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले, चारधाम यात्रा की हुई शुरुआत

    गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले, चारधाम यात्रा की हुई शुरुआत

    उत्तराखण्ड के चारधाम की यात्रा शुरू

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से दोनों धामों में की गई पहली पूजा

    गंगोत्री धाम में कपाटोद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने की विशेष पूजा-अर्चना

    सुरक्षित और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए राज्य में किये गये हैं व्यापक प्रबंध- मुख्यमंत्री

    उत्तरकाशी। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट रविवार को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसके साथ ही उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा 2026 का भी शुभारंभ हो गया है।

    दोनों धामों में प्रधानमंत्री के नाम से पहली पूजा की गई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में कपाटोद्घाटन समारोह में संकल्प लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नाम से पहली पूजा की और चारधाम यात्रा के सफल आयोजन तथा देश-प्रदेश की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना की है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार रविवार को मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी स्थित भैरव मंदिर से चलकर गंगोत्री धाम पहुंची। गंगोत्री धाम में विशेष पूजा-अभिषेक के साथ 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गये। मां यमुना की डोली शनिदेव महाराज की अगुवाई में शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली से चलकर यमुनोत्री धाम पहुंची। धार्मिक विधि- विधान के साथ 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनात्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए।

    गंगोत्री धाम के कपाटोद्घाटन समारोह में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मॉं गंगा के मंदिर में शीश नवाया और विशेष पूजा-अर्चना की और देव डोली से आशीष भी प्राप्त किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पावन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। उत्तराखण्ड के चारधाम देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं, और इन दिव्य धामों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करने की इच्छा हर श्रद्धालु के हृदय में रहती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम चारधाम यात्रा के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक और सुदृढ़ व्यवस्थाएँ की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं। साथ ही, यात्रा मार्गों पर सुचारु यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि देवभूमि उत्तराखण्ड में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को दिव्य धामों का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ-साथ यात्रा का एक सुखद, सुरक्षित और अविस्मरणीय अनुभव मिले। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से ग्रीन और क्लीन चारधाम यात्रा के सफल आयोजन हेतु सहयोग की अपील करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का आग्रह भी किया।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, विधायक  सुरेश चौहान,पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण,
    दायित्वधारी  प्रताप पंवार, जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य,एसपी कमलेश उपाध्याय, एडीएम मुक्ता मिश्रा,मुख्यमंत्री के गढ़वाल कोर्डिनेटर किशोर भट्ट,मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मांनंद सेमवाल,सचिव सुरेश सेमवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि,अधिकारी एवं मंदिर समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

  • उत्तराखण्ड चारधाम यात्रा: बस सेवा का विधिवत शुभारंभ

    उत्तराखण्ड चारधाम यात्रा: बस सेवा का विधिवत शुभारंभ

    निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी किया स्थलीय निरीक्षण

    सुगम, सुरक्षित, सुव्यवस्थित यात्रा सरकार का संकल्प- मुख्यमंत्री

    धार्मिक स्थलों एवं यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने का मुख्यमंत्री ने किया आग्रह

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को ऋषिकेश में चार धाम जाने वाली बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए स्थापित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी निरीक्षण किया।

    मुख्यमंत्री ने देश भर से आए श्रद्धालुओं का उत्तराखंड में स्वागत करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा – आस्था, साधना और आत्मा को जोड़ने का मार्ग है। यह यात्रा हर कठिनाई को पार करने की शक्ति देती है। उन्होंने कहा सरकार का संकल्प है कि यात्रा सुगम, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और दिव्य हो। चारधाम यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा माँ गंगा के आशीर्वाद से यात्रा हर साल नया कीर्तिमान रच रही है। उन्होंने कहा राज्य सरकार सुरक्षित चारधाम यात्रा के लिए दृढ़ संकल्पित है, वे स्वयं लगातार यात्रा की तैयारियों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य, हर श्रद्धालु को सुरक्षा, सम्मान और दिव्य अनुभव प्रदान कराना है। हर श्रद्धालु देवभूमि में बिताए गए पलों की स्वर्णिम स्मृतियाँ अपने साथ लेकर जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं से धार्मिक स्थलों एवं यात्रा मार्ग में विशेष स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा उत्तराखंड के कण-कण में भगवान का वास है, इस पवित्रता को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने इस वर्ष ग्रीन चारधाम यात्रा और प्लास्टिक मुक्त केदारनाथ धाम का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार द्वारा यात्रा मार्गों पर नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सभी वाहनों में डस्टबिन रखना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा जैसे हम अपने घर के मंदिर को साफ और पवित्र रखते हैं, वैसे ही देवभूमि को भी स्वच्छ और पवित्र बनाए रखना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यात्रा को और अधिक सुगम बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में ₹ 12 हजार करोड़ की लागत से बने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण हुआ है, जिससे यात्रा सुगम और तेज हो गई है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य गतिमान हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में भी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा ऑल वेदर रोड परियोजना के अंतर्गत यात्रा मार्गों को सुगम बनाया गया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में गौरीकुंड से केदारनाथ धाम और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक के लिए रोपवे परियोजनाओं का कार्य भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा चारधाम यात्रा लाखों लोगों की आजीविका का आधार है। इसलिए यात्रा के दौरान स्थानीय उत्पादों, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने यात्रियों से अधिक से अधिक स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करने का भी आवाहन किया।

    कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार, यात्रियों की सुविधा, सुगमता और स्वास्थ्य को लेकर पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। उन्होंने यात्रियों से निवेदन करते हुए कहा कि सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी का अवलोकन अवश्य करें। आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य जांच करने के बाद ही यात्रा में आए। उन्होंने बताया केदारनाथ में मेडिकल अस्पताल तैयार हो गया है। बद्रीनाथ में 50 बेड का अस्पताल जून तक तैयार हो जाएगा। यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है।

    कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि परिवहन विभाग लगातार आगामी यात्रा की तैयारी कर रहा है। हमारा कर्तव्य है कि प्रदेश में आने वाले हर श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम और सुरक्षित हो। उन्होंने बताया इस वर्ष यात्रा मार्ग में सिंगल लेन सड़कों, लैंडस्लाइड जोन, जैसे स्थानों पर शटल सर्विस की शुरुवात की गई है। इसके साथ मूवेबल शटल सर्विस के लिए हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध करवाया जाएगा। विभिन्न स्थानों पर एल.ई.डी लगाकर लोगों को जानकारियां दी जाएंगी।

    इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल, मेयर शंभू पासवान, अध्यक्ष हेमकुंड गुरुद्वारा ट्रस्ट नरेंद्रजीत बिंद्रा, भास्करानंद भारद्वाज, जितेंद्र नेगी, अजय सिंह, मनोज ध्यानी, संजय शास्त्री, भोपाल सिंह नेगी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • सीएम हेल्पलाइन: लंबित शिकायतों पर कार्रवाई

    सीएम हेल्पलाइन: लंबित शिकायतों पर कार्रवाई

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि सीएम हेल्पलाइन-1905 पर 30 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

    उन्होंने कहा कि शिकायतों को फोर्स क्लोज करने के मामलों में जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के बिना किसी भी स्तर पर फोर्स क्लोज की कार्रवाई न की जाए। शुक्रवार को सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देश अधिकारियों को दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना पर्याप्त कार्यवाही किए यदि कोई अधिकारी शिकायत को फोर्स क्लोज करता है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन-1905 केवल एक दूरभाष संख्या नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं और विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हेल्पलाइन पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता की पूर्ण संतुष्टि सुनिश्चित होने तक किया जाए।

    उन्होंने शासन के अधिकारियों, विभागाध्यक्षों तथा सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा बैठक आयोजित कर उनके शीघ्र समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्राप्त प्रत्यक्ष शिकायत की तरह गंभीरता से लिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी स्तर पर प्रत्येक सप्ताह तथा विभागीय सचिव स्तर पर प्रत्येक माह में कम से कम दो बार शिकायतों की समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन की सफलता का वास्तविक आकलन तभी संभव है, जब शिकायतकर्ता यह अनुभव करें कि सरकार ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध और प्रभावी समाधान प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित कर उनका फीडबैक प्राप्त किया जाए तथा उच्च स्तर पर शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

    बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री (सीएम) हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये ए.आई. डेटा संचालन एवं शिकायत प्रबन्धन पर ध्यान दिया जा रहा है। इसमें शिकायतों का पूर्वानुमान एवं हाॅट स्पाॅट की पहचान कर प्राथमिकता के साथ मजबूत समाधान एवं निगरानी प्रणाली को विकसित करने में मदद मिली है। ए.आई. आधारित प्रक्रिया से विभिन्न मौसमों के अनुरूप प्राप्त होने वाली शिकायतों के त्वरित समाधान में मदद मिल रही है। ग्रीष्म कालीन शिकायतांे में प्रमुख रूप से पेयजल, ऊर्जा, शहरी विकास एवं गृह विभाग से शिकायतें शामिल रही हैं, जिनका निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया गया है। सी.एम. हेल्प लाइन के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ने के साथ काॅल वाॅल्यूम में वृद्धि के साथ समाधान की राह भी प्रशस्त हुई है। सी.एम. हेल्प लाइन में जनपद वार जन शिकायतों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि उत्तरकाशी और चम्पावत बेहत्तर प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकतम जन शिकायतों का निस्तारण करने वाले अधिकारियों से की वार्ता

    मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अधिकतम शिकायतों का निस्तारण करने वाले अधिकारियों से वार्ता कर ऐसे अधिकारियों की सराहना करते हुए उन्हें सभी के लिए प्रेरणाश्रोत बताया। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग, उत्तरकाशी में कार्यरत अधिशासी अभियंता मनोज गुसाई और ऊर्जा विभाग, पौड़ी में कार्यरत अधिशासी अभियंता अभिनव रावत से वार्ता की तथा उनके प्रयासों की सराहना की।

    मनोज गुसाई ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उनके द्वारा नियमित रूप से 1905 में आई शिकायत की मॉनिटरिंग की जाती है। साथ ही विभाग के अंतर्गत एक स्पेशल सेल बनाई गई है जो लोगों से बात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती है। अभिनय रावत ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके द्वारा विभाग के अंतर्गत कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाई गई है एवं 1905 मोबाइल ऐप के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग की जाती है।

    मुख्यमंत्री ने शिकायतकर्ताओं से फोन पर की बात

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिकायतकर्ताओं से भी वार्ता की। इसी क्रम में उन्होंने देहरादून की विना ढींगरा की समस्या सुनी। विना ढींगरा ने बताया कि वो मार्च 2023 में सहायक अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुई थी। जिसके बाद से उन्हें एनपीएस पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को 2 दिन के भीतर उनकी समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए। श्रीमती बीना ढींगरा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

    हरिद्वार के तरुण सिंह ने पानी निकासी की समस्या से मुख्यमंत्री को अवगत कराया, जिस पर मुख्यमंत्री ने वीसी के माध्यम से जुड़े हरिद्वार के जिला अधिकारी को तुरंत समस्या के समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने देहरादून जिले के श्री सुरेंद्र कुमार नागपाल से भी वार्ता की।

    सुरेंद्र कुमार नागपाल ने बताया कि सहस्त्रधारा रोड स्थित उनके आवास में स्ट्रीट लाइट विगत दिनों से खराब थी, जिस पर उन्होंने 1905 पर शिकायत की। सुरेंद्र कुमार नागपाल ने बताया कि अगले ही दिन उनकी समस्या का समाधान हो गया, इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

    बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद् विश्वास डाबर, उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन विनय रुहेला, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव एल. फैनई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिवशैलेश बगौली, नितेश झा, दिलीप जावलकर, बृजेश कुमार संत, डाॅ. पंकज कुमार पांडे, चंद्रेश यादव, एस एन पाण्डेय, रंजीत सिन्हा, विनोद कुमार सुमन, सी. रविशंकर, श्रीमती रंजना राजगुरू, विशेष सचिव डाॅ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव आलोक पांडे, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, अपर सचिव मनमोहन मैनाली एवं अन्य अधिकारी तथा समस्त जनपदों से जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

  • उत्तराखंड में आईएएस-पीसीएस अधिकारियों का बड़ा फेरबदल

    उत्तराखंड में आईएएस-पीसीएस अधिकारियों का बड़ा फेरबदल

    जिलों से सचिवालय तक बदलाव, कई अहम पदों पर नई तैनाती

    डुंगरियाल को सचिव-अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का जिम्मा

    देहरादून। उत्तराखंड शासन ने शुक्रवार को बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए आईएएस व  प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के 26 अधिकारियों के तबादले कर दिए। कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-01 द्वारा जारी आदेश के तहत कई जिलों, निदेशालयों और सचिवालय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस बदलाव में जिला प्रशासन से लेकर आयोगों और निदेशालयों तक व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।

    उत्तराखंड शासन ने प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल करते हुए कई आईएएस अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया है। कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-01 द्वारा जारी आदेश के अनुसार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान पदों से कार्यमुक्त कर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
    जारी सूची के मुताबिक सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले तथा यू-प्रिपेयर परियोजना से जुड़े दायित्वों में बदलाव किया गया है। वहीं अपर सचिव स्तर के अधिकारियों के विभागों में भी आंशिक फेरबदल किया गया है। कुछ अधिकारियों से अतिरिक्त प्रभार हटाए गए हैं, जबकि कुछ को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
    इस फेरबदल में आईएएस अधिकारी आनंद स्वरूप, रुचि मोहन रयाल, प्रकाश चन्द्र, बंशी लाल राणा सहित अन्य अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया गया है। वहीं संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर पर भी बदलाव करते हुए गिरीश प्रसाद और दीक्षा जोशी के तैनाती स्थलों की अदला-बदली की गई है।
    शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित अधिकारी तत्काल अपने नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर इसकी सूचना शासन को उपलब्ध कराएं।

    जारी सूची के अनुसार, नरेंद्र सिंह को उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद से हटाया गया है, जबकि शिवकुमार बंसल को उसी पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं प्रकाश चंद्र दुम्का को संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है। नंदन सिंह डुंगरियाल को सचिव-अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, देहरादून में नई तैनाती दी गई है।
    जिला स्तर पर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अवधेश कुमार सिंह को टिहरी गढ़वाल से हटाकर शहरी विकास निदेशालय में संयुक्त निदेशक बनाया गया है, जबकि शैलेन्द्र सिंह को टिहरी गढ़वाल का अपर जिलाधिकारी बनाया गया है।

    वैभव गुप्ता को हरिद्वार में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) की जिम्मेदारी दी गई है।
    हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल समेत कई जिलों में डिप्टी कलेक्टर स्तर पर भी फेरबदल हुआ है। रोहित अवस्थी को नैनीताल, हरि गिरि को हरिद्वार, अनुराग आर्य को नैनीताल, रविंद्र जुगलान को देहरादून तथा हिमांशु कफलटिया को उधमसिंह नगर में डिप्टी कलेक्टर के रूप में तैनात किया गया है।
    इसके अलावा प्रेमलाल को उत्तरकाशी, यशवीर सिंह को चमोली, मुकेश चंद्र रमोला को देहरादून, विपिन चंद्र पंत को चंपावत तथा सुनील कुमार को भी चंपावत भेजा गया है। पंकज भट्ट को टिहरी गढ़वाल में नई जिम्मेदारी दी गई है।
    शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित अधिकारी तत्काल प्रभाव से अपने वर्तमान पदों का कार्यभार छोड़कर नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करेंगे और इसकी सूचना शासन को उपलब्ध कराएंगे।
    इस व्यापक तबादला सूची को प्रशासनिक कसावट और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    देखें सूची

  • उत्तराखंड न्यायपालिका में बड़े स्तर पर फेरबदल

    उत्तराखंड न्यायपालिका में बड़े स्तर पर फेरबदल

    नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य की न्यायिक सेवा में बड़े स्तर पर तबादले और नई तैनातियों के आदेश जारी किए हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग), सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट समेत कई न्यायिक अधिकारियों को विभिन्न जनपदों में स्थानांतरित किया गया है। ये सभी आदेश 20 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

    अधिसूचना के अनुसार लक्षसर की न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रेश्वरी सिंह को सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) नैनीताल, द्वाराहाट के सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) राजेंद्र कुमार को न्यायिक मजिस्ट्रेट काशीपुर और देहरादून की सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) कल्पना को न्यायिक मजिस्ट्रेट पिथौरागढ़ नियुक्त किया गया है। बागेश्वर के सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) पुनीत कुमार को टिहरी गढ़वाल और ऊधम सिंह नगर के सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) रिजवान अंसारी को पौड़ी गढ़वाल भेजा गया है।

    रुड़की की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम शिवानी नाहर को सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) बागेश्वर, चमोली के सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) लावल कुमार वर्मा को न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्षसर और टिहरी गढ़वाल के सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) कुलदीप नारायण को सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) हरिद्वार तैनात किया गया है। इसके अलावा कई न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त सिविल जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट के पदों पर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।

    एक अन्य अधिसूचना में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं। देहरादून की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रिंकी साहनी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट टिहरी गढ़वाल, नैनीताल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि प्रकाश को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून और टिहरी गढ़वाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद याकूब को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा नियुक्त किया गया है।

    इसके अतिरिक्त विकासनगर के सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) रवि शंकर मिश्रा को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल, रुड़की की सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) रितिका सेमवाल को विशेष न्यायालय रुद्रपुर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा देहरादून के अतिरिक्त सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) अमित कुमार को सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) रुद्रप्रयाग तैनात किया गया है।

    उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी स्थानांतरण और तैनाती आदेश 20 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

  • “भारत रत्न डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प: धामी”

    “भारत रत्न डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प: धामी”

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय संविधान के निर्माता एवं ‘भारत रत्न’ बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर मुख्यमंत्री आवास में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया ।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब का सम्पूर्ण जीवन सामाजिक समरसता, समानता एवं न्याय के आदर्शों की स्थापना के लिए समर्पित रहा। उन्होंने समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जो कार्य किए, वे आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब के विचार एक सशक्त, समावेशी एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण हेतु मार्गदर्शक हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज में समरसता एवं समानता को बढ़ावा देने में अपना योगदान दें।