Category: राजनीति

  • 22 मार्च से कांग्रेस का ‘मेरा वोट, मेरा अधिकार’ अभियान शुरू

    22 मार्च से कांग्रेस का ‘मेरा वोट, मेरा अधिकार’ अभियान शुरू

    22 मार्च से ‘मेरा वोट, मेरा अधिकार’ अभियान शुरू, रणनीति तैयार

    देहरादून: मताधिकार की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए 22 मार्च से ‘मेरा वोट, मेरा अधिकार’ अभियान शुरू किया जाएगा। युवा नेताओं की बैठक में इस अभियान की रणनीति तय की गई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और मतदाता सूची में गड़बड़ियों की जानकारी जुटाई जाएगी।

    मताधिकार की रक्षा के लिए बड़ा कदम

    प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने बताया कि यह अभियान तीन महीने तक चलेगा और इसमें सभी फ्रंटल संगठन सक्रिय रूप से भाग लेंगे। हाल ही में हुए निकाय चुनावों और केदारनाथ उपचुनाव में हजारों मतदाताओं के नाम काटे जाने की शिकायतें मिली थीं। यह अभियान मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए काम करेगा।

    युवा नेताओं की अहम भूमिका

    बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल, युवा कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने मार्गदर्शन दिया। सप्पल ने कहा कि राज्य के 100 नगर निकायों में यह अभियान बड़े स्तर पर चलाया जाएगा।

    युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इस पर जवाबदेही तय करनी होगी।

    बैठक में शामिल प्रमुख नेता

    इस बैठक में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव इशिता, प्रदेश युवा अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर, एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष विकास नेगी, युवा उपाध्यक्ष विनीत प्रसाद भट्ट, प्रदेश महामंत्री नवीन जोशी, महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी, सोशल मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय किशोर, मोहित उनियाल आदि मौजूद रहे।

    अभियान के मुख्य उद्देश्य
    • मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना
    • मतदाता सूची में अनियमितताओं की जानकारी जुटाना
    • फर्जी नाम जोड़ने और असली नाम हटाने के मामलों पर कार्रवाई की मांग करना
    • जनता को अपने मताधिकार की रक्षा के लिए प्रेरित करना

    इस अभियान के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

  • उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज, नए चेहरे आ सकते हैं नजर

    उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज, नए चेहरे आ सकते हैं नजर

    उत्तराखंड में जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार, नए चेहरों की एंट्री और बड़े बदलाव संभव

    उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट में लंबे समय से चार पद खाली पड़े हैं, जिन्हें जल्द भरा जा सकता है। इसके साथ ही, मंत्रियों के विभागों में व्यापक फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में नए और ऊर्जावान चेहरों को जगह मिलने की संभावना है, वहीं कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन के आधार पर बदलाव भी किया जा सकता है।

    चार रिक्त पद और दो मंत्रियों के बदलने की अटकलें


    पूर्व कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद सरकार में खाली पदों की संख्या चार हो गई है। वहीं, दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने या उनके विभाग बदलने की चर्चाएं सत्ता के गलियारों में जोरों पर हैं। माना जा रहा है कि सरकार न केवल मंत्रिमंडल को मजबूत करने की तैयारी में है, बल्कि विभागों के पुनर्गठन पर भी विचार कर रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में और अधिक गति लाई जा सके।

     

    प्रदेश नेतृत्व से हरी झंडी का इंतजार

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस संबंध में संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल विस्तार का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा। उनके अनुसार, “किसे रखना है और किसे हटाना है, यह पूरी तरह से केंद्र का विषय है। निश्चित रूप से मंत्रिमंडल विस्तार कभी भी संभव हो सकता है।”

    प्रदेश में लंबे समय से कैबिनेट विस्तार की मांग उठती रही है। हर बार इसके कयास लगाए जाते हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की स्वीकृति न मिलने के कारण प्रक्रिया लंबित रह जाती है। अब केंद्र को प्रदेश की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी दे दी गई है, और जल्द ही फैसले की उम्मीद की जा रही है।

    बदलाव की ओर बढ़ रही धामी सरकार

    अगर यह विस्तार जल्द होता है, तो उत्तराखंड की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। भाजपा इस फैसले को आगामी 2024 लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ले सकती है, जिससे संगठन और सरकार के बीच संतुलन स्थापित हो सके। अब सबकी निगाहें केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं, जो जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लगा सकता है। देखना यह होगा कि क्या इस बार धामी सरकार में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे या फिर चर्चाएं एक बार फिर ठंडे बस्ते में चली जाएंगी।

  • पंचायत चुनाव के दावेदार बैकफुट पर, प्रेम के विवादित बयान के बाद उपजा संकट

    पंचायत चुनाव के दावेदार बैकफुट पर, प्रेम के विवादित बयान के बाद उपजा संकट

    सीएम धामी की नई टीम पर मंथन जारी, दावेदार अलर्ट मोड में

    पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे भाजपा दावेदार असमंजस में
    पूर्व सैनिक, महिलाएं और युवाओं की हुंकार से बदला माहौल
    दिल्ली से पहाड़ तक विरोध की लपटें

    देहरादून। उत्तराखंड में राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। दिल्ली से लेकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी दल, पूर्व सैनिक, सामाजिक संगठन और आम जनता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। जहां यह विरोध पहले शहरों तक सीमित था, वहीं अब इसकी लपटें गांवों तक पहुंच चुकी हैं।

    सीएम धामी की सरकार के मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के विवादित बयान और उसके बाद कुछ भाजपा नेताओं के भड़काऊ बयानों ने जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया है। इससे पहले भी सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर जनता में असंतोष देखने को मिला था, लेकिन अब हालात पूरी तरह से भाजपा सरकार के नियंत्रण से बाहर जाते दिख रहे हैं।

    महिलाएं, युवा और पूर्व सैनिक—जो कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन की रीढ़ माने जाते हैं—अब एकजुट होकर भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। जनता का यह गुस्सा भाजपा नेतृत्व को बैकफुट पर लाने के लिए काफी है, जिसके चलते पार्टी के भीतर नई रणनीति पर मंथन तेज हो गया है।

    सीएम धामी का कड़ा रुख

    अब तक संयमित बयानबाजी कर संतुलन बनाए रखने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने पार्टी नेताओं और अन्य जनप्रतिनिधियों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह के भेदभाव फैलाने वाले बयान या विवादित टिप्पणी से बचा जाए। साथ ही, उन्होंने इस तरह के बयानों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

    बहरहाल, प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा सदन में दिए गए बयान के बाद मामला और बिगड़ गया जब विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला को ‘नसीहत’ दी। इससे विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का एक और मौका मिल गया, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।

    उत्तराखंडी प्रवासियों में भी आक्रोश

    इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी भाजपा सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध दर्ज किया जा रहा है। खासकर उत्तराखंडियों पर की गई अभद्र टिप्पणी ने पूर्व सैनिकों को भी आक्रोशित कर दिया है। वे लामबंद होकर भाजपा नेताओं के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

    देखें, सीएम धामी का रुख
    पंचायत चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ीं

    प्रस्तावित पंचायत चुनाव में उपजा आक्रोश भाजपा के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। भाजपा उम्मीदवारों को अपने नेताओं के विवादित बयानों का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

    मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात ने पहाड़ी जनता को एकजुट कर दिया है, जिससे भाजपा के संभावित पंचायत चुनाव प्रत्याशियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी नेताओं के खिलाफ असंतोष गहराता जा रहा है, जिससे भाजपा को अपनी चुनावी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों की चुनौती

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटे संभावित भाजपा प्रत्याशियों को अब स्थानीय स्तर पर विपक्ष और विभिन्न संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह भाजपा नेताओं के खिलाफ नारेबाजी हो रही है, जबकि कई स्थानों पर उनके पुतले भी जलाए जा चुके हैं। इससे भाजपा के रणनीतिकारों की परेशानी बढ़ गई है।

    इस विरोध का असर इतना व्यापक हो चुका है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को नए सिरे से रणनीति बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। भाजपा के कई उम्मीदवारों को गांव-गांव जाकर जनता से संवाद स्थापित करना पड़ रहा है, ताकि माहौल को थोड़ा शांत किया जा सके।

    मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की बर्खास्तगी की मांग तेज

    इस पूरे विवाद के केंद्र में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल हैं। जनता उनकी मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी की मांग कर रही है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर उनके खिलाफ नारेबाजी हुई, जिससे भाजपा के लिए स्थिति और भी जटिल हो गई है।

    अब सवाल यह है कि भाजपा इस संकट से कैसे निपटेगी? जनता के गुस्से को शांत करने के लिए पार्टी को जल्द ही ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा इसका असर आगामी पंचायत चुनावों में भाजपा की संभावनाओं पर पड़ सकता है।

    धामी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल संभव

    सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व इस संकट से उबरने के लिए मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल पर विचार कर रहा है। नए मंत्रियों के नामों की तलाश जारी है, और जल्द ही कैबिनेट पुनर्गठन किया जा सकता है।

    कुछ विधायक इस राजनीतिक संकट को अपने लिए अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। पार्टी के भीतर नई टीम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    पंचायत
    क्या भाजपा इस संकट से उबर पाएगी?

    सीएम धामी के सख्त रुख और संभावित कैबिनेट बदलाव से यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा जनाक्रोश को कैसे शांत करती है। पंचायत चुनाव से पहले पार्टी को जिस तरह के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उससे उबरने के लिए भाजपा को ठोस रणनीति बनानी होगी।

    नई टीम के गठन के बाद भाजपा को उम्मीद है कि पंचायत चुनाव से पहले पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी और जनता का विश्वास फिर से जीतने का मौका मिलेगा। लेकिन जनता का गुस्सा जिस स्तर पर पहुंच चुका है, उसे देखते हुए भाजपा के लिए राह आसान नहीं होगी।

  • धामी कैबिनेट की आज बैठक, आबकारी नीति समेत कई प्रस्तावों पर हो सकता है फैसला

    धामी कैबिनेट की आज बैठक, आबकारी नीति समेत कई प्रस्तावों पर हो सकता है फैसला

    उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक: आबकारी नीति 2025-26 पर टिकी निगाहें

    बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे

    उत्तराखंड सरकार की आज होने वाली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा की जाएगी, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान प्रस्तावित आबकारी नीति 2025-26 पर केंद्रित है। इस नीति को लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं, और सरकार के फैसले का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। खासकर प्रदेशभर में सरकारी नीति के तहत संचालित शराब ठेकों के संचालन को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    इस वर्ष शराब ठेकों के संचालन को लेकर मुख्य सवाल यह है कि क्या इन्हें लॉटरी सिस्टम के माध्यम से आवंटित किया जाएगा या फिर बीते वर्ष की तरह ही नवीनीकरण (रिन्युवल) की प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। जानकारों का मानना है कि सरकार ठेकों के रिन्युवल का ही निर्णय ले सकती है, क्योंकि लॉटरी प्रक्रिया अपनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है। लॉटरी के माध्यम से ठेका आवंटन करने में समय और प्रक्रियात्मक बाधाएं हो सकती हैं, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस बार भी पुरानी व्यवस्था को जारी रखेगी।

    आबकारी नीति को लेकर गोपनीयता बरकरार

    इस बार आबकारी नीति को लेकर जबरदस्त गोपनीयता बरती जा रही है। चर्चा है कि सिर्फ दो लोगों—एक सरकारी और एक निजी व्यक्ति—को ही इस नीति की पूरी जानकारी है, जबकि अन्य किसी को इसकी विस्तृत जानकारी तक नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और अवकाश के दिन एक खास इलाके में स्थित एक शानदार कोठी में इसे अंतिम स्वरूप दिया गया। इसके बावजूद, अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा का सभी को इंतजार है।

    इस बार आबकारी नीति में कुछ बदलाव होने की भी संभावना जताई जा रही है। FL-2 की वर्तमान व्यवस्था को जारी रखने की चर्चा तेज है। FL-2 लाइसेंस होटल, रेस्तरां और क्लबों में शराब परोसने की अनुमति देता है, और इसे पहले की तरह बनाए रखने की संभावना जताई जा रही है। इसके अतिरिक्त, एक नई अवधारणा ‘सुपर FL-2’ को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन इसको लेकर अलग-अलग स्तरों पर मंथन किया जा रहा है। यदि ‘सुपर FL-2’ को लागू किया जाता है, तो इससे शराब के व्यापार और वितरण में कुछ नए प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।

    क्या होंगे संभावित फैसले

    इस बैठक में सरकार अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार करेगी, लेकिन आबकारी नीति को लेकर सबसे अधिक उत्सुकता बनी हुई है। यदि ठेका आवंटन के लिए लॉटरी प्रक्रिया को अपनाया जाता है, तो यह पूरी व्यवस्था को बदल सकता है और नए ठेकेदारों को मौका मिल सकता है। वहीं, यदि पुरानी व्यवस्था को जारी रखा जाता है, तो मौजूदा ठेकेदारों को राहत मिलेगी।

    इसके अलावा, शराब की बिक्री और वितरण को लेकर भी कुछ नए नियम लागू किए जा सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार शराब नीति में कुछ ऐसे बदलाव कर सकती है जिससे राजस्व में बढ़ोतरी हो। हालांकि, अंतिम निर्णय क्या होगा, यह तो बैठक के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, नीति को पूरी तरह से अंतिम रूप दिया जा चुका है। अब सिर्फ कैबिनेट की मुहर लगना बाकी है, जिसके बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा। जब तक आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं होती, तब तक इन सभी चर्चाओं को सिर्फ संभावनाओं के रूप में ही देखा जा सकता है।

  • प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा देने की चेतावनी दी

    प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा देने की चेतावनी दी

    भाजपा मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के विवादित बयान पर सियासत गरम, प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफे की चेतावनी दी

    भाजपा के लिए बढ़ी मुश्किलें, सोशल मीडिया पर भी विरोध जारी

    देहरादून। भाजपा मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा उत्तराखंडियों को लेकर सदन में दिए गए अभद्र बयान के बाद प्रदेश में सियासी माहौल गरमा गया है। इस बयान के खिलाफ विरोध की लहर तेज हो गई है, जबकि मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल इस बीच इलाहाबाद महाकुंभ की त्रिवेणी में डुबकी लगा रहे हैं। उधर, प्रदेशभर में उनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन जारी हैं, और सोशल मीडिया पर भी उनकी आलोचना हो रही है।

    इसी बीच, उत्तराखंड आंदोलन के अग्रणी नेता और उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के दिवंगत विधायक विपिन त्रिपाठी का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह अपने जुझारू तेवरों के साथ राज्य आंदोलन और सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि यह राज्य किसी दल विशेष की कृपा से नहीं, बल्कि बलिदानों के बदले हासिल हुआ है। मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से इस वीडियो को जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे लोगों की भावनाएं और भड़क रही हैं।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी हुए आक्रामक

    मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के विवादास्पद और अपमानजनक बयान के बाद कांग्रेस नेता भी आक्रामक हो गए हैं। सदन में जमकर विरोध करने वाले कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला के बहिर्गमन पर चुप रहने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब खुलकर भाजपा पर निशाना साध रहे हैं।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने भी भाजपा को कठघरे में खड़ा करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा देने की चेतावनी दी है।

    प्रीतम सिंह का भाजपा पर हमला

    पूर्व मंत्री, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने कहा, “जब तक प्रेमचंद अग्रवाल संसदीय कार्यमंत्री पद पर रहेंगे, मैं कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में शामिल नहीं होऊंगा और समिति के सदस्य पद से भी इस्तीफा दूंगा।”

    प्रीतम सिंह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रेमचंद अग्रवाल संसदीय कार्यमंत्री के पद के योग्य नहीं हैं। विधानसभा सत्र के दौरान उनके आचरण ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार कर दिया। सदन में चर्चा के दौरान वे बार-बार संयम खो देते हैं, जो उनके पद के अनुरूप नहीं है।

    उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “गंगा किनारे पूजा-अर्चना करने से पाप नहीं धुलते। प्रेमचंद अग्रवाल को गंगा मैया से सद्बुद्धि की कामना करनी चाहिए।”

    सदन में कांग्रेस विधायकों पर आरोपों से भड़का विवाद

    राज्यपाल अभिभाषण के दौरान विपक्षी विधायक सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे थे, तभी संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने सदन से बाहर जाकर कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट पर सदन में शराब पीकर आने का आरोप लगा दिया। इस आरोप के बाद मामला और गरम हो गया, जिससे कांग्रेस ने कड़ा एतराज जताया।

    इस पूरे घटनाक्रम से विधानसभा में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा बचाव की मुद्रा में दिख रही है।

    भाजपा के लिए बढ़ी मुश्किलें

    बजट सत्र में दिए गए मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के बयान के बाद उपजे विवाद की आग अभी ठंडी होती नहीं दिख रही है। प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, और सोशल मीडिया पर लोग खुलकर सरकार की आलोचना कर रहे हैं। भाजपा के रणनीतिकारों के लिए यह बयान नई मुसीबत बन गया है, क्योंकि पार्टी अब तक इस विवाद का कोई समाधान नहीं निकाल पाई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है, जिससे भाजपा की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं।

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विपक्ष पर करारा प्रहार

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विपक्ष पर करारा प्रहार

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विपक्ष पर करारा प्रहार – भ्रष्टाचार पर साधा निशाना!

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि खनन पट्टों की बंदरबांट और सरकारी पदों की खरीद-फरोख्त करने वाले लोग आज जनता को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं।

    सीएम धामी ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा, “हमें ज्ञान देने वाले लोग जब सत्ता में थे, तब खुद शराब के ठेके बांटते थे।”

  • स्मार्ट मीटर विवाद: सीएम धामी का विपक्ष पर पलटवार

    स्मार्ट मीटर विवाद: सीएम धामी का विपक्ष पर पलटवार

    सीएम धामी का विपक्ष पर पलटवार, स्मार्ट मीटर को लेकर दिया कड़ा बयान

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्मार्ट मीटर को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि यह एक केंद्रीय योजना है, जिसे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

    सीएम धामी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अवैध रूप से बिजली चोरी करने वालों और अवैध कटिया डालने वालों का समर्थन कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं की भी पैरवी कर रहा है।

    उन्होंने तर्क दिया कि जब आज हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन हो सकता है, तो फिर स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध क्यों किया जा रहा है? मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार की मंशा पारदर्शिता लाने और बिजली की बर्बादी रोकने की है, जिसे विपक्ष बेवजह मुद्दा बना रहा है।

    सरकार की इस योजना पर विवाद गहराता जा रहा है, और देखना होगा कि विपक्ष इसके जवाब में क्या रणनीति अपनाता है।

  • उत्तराखंड कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने पर घमासान

    उत्तराखंड कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने पर घमासान

    उत्तराखंड कांग्रेस मे प्रदेश अध्यक्ष बदलने क़ो लेकर बड़ा हल्ला मच रहा हैं कांग्रेस के नेता खुलेआम कह रहें हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष करन महारा क़ो बदलना चाहिए वही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन महारा का भी बयान सामने आया हैं

    जहाँ उन्होंने कहा कि कांग्रेस मे प्रदेश अध्यक्ष क़ो लेकर जों भी सवाल खडे हो रहें हैं उनका शीघ्र ही उत्तर मिलना चहिए प्रीतम सिंह के अनुसार अगर कांग्रेस अध्यक्ष क़ो बदला जाना हैं तो भी अभी और जल्द फैसला होना चाहिए और अगर नहीं बदला जाना हैं इन्हें ही यथावत रखा जाना हैं इसका फैसला भी जल्द हो जाना चाहिए ऐसा नहीं की ऐन चुनाव से पहले नेतृत्व परिवर्तन किया जाए जिसके परिणाम भी नहीं आ सके

    वही ठीक निकाय चुनाव के रिजल्ट के बाद कांग्रेस के नेताओं द्वारा प्रदेश अध्यक्ष करन महारा क़ो हटाए जाने की बातें सामने आने लगी हैं वही इन सवालों से करन महारा क़ो भी दो चार होना पड रहा हैं और वो इससे असहज भी हो रहें हैं करन महारा के अनुसार मैंने अपनी तरफ से पार्टी क़ो मजबूती देने का पूरा काम किया मेरे नेतृत्व मे दो उप चुनाव जीते तो पार्टी ने निकाय चुनाव मे भी अच्छा काम किया उनके अनुसार पार्टी जों फैसला करेगी हम उसे स्वीकार करेंगे वही प्रीतम सिंह के बयान क़ो भी उन्होंने जायज बताया

  • दिल्ली में सियासी पिच पर छाए मुख्यमंत्री धामी

    दिल्ली में सियासी पिच पर छाए मुख्यमंत्री धामी

    अपने सियासी बयानों से विपक्षियों को खूब धोया

    सीएम धामी ने किए 32 से अधिक चुनावी सभाएं की

     नई दिल्ली। दिल्ली में विधानसभा के चुनाव प्रचार का शोर पूरी तरह से थम चुका है लेकिन इस चुनाव प्रचार की गूंज अभी भी दिल्ली की गलियों में बाकी है। और इसी गूंज में एक नाम सबके सामने है पुष्कर सिंह धामी।

    मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड निकाय चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत का रंग चढ़ा ही था कि पुष्कर सिंह धामी दूसरी जिम्मेदारी को निभाने के लिए दिल्ली की तरफ रवाना हो गए। दिल्ली के विधानसभा चुनाव में पुष्कर सिंह धामी को यूं ही स्टार प्रचारक नहीं चुना गया बल्कि उनके युवा नेतृत्व और राज्य में उनके द्वारा लिए गए निर्णय देश की जनता पर दीवानगी बनकर छाए हैं।

    शुरुआत में सरल-सहज छवि के लिए जाने वाले धामी ने जब उत्तराखंड में थूक जिहाद, लैंड जिहाद, लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण पर कठोर कदम उठाए तो सब ने उनका दूसरा रूप भी देखा।
    इतना ही नहीं, चुनाव के समय समान नागरिक संहिता का वादा कर उसे आज धामी सरकार ने लागू कर उत्तराखंड की राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। महज कुछ ही दिनों में उन्होंने विभिन्न विधानसभाओं में 32 चुनावी कार्यक्रम कर डाले। मुख्यमंत्री धामी के चुनावी कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ से उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री धामी ने दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में भाजपा के लिए समर्थन जुटाया, पार्टी की नीतियों और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को जनता के सामने भी रखा। इतना ही नहीं पुष्कर सिंह धामी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को भी आड़े हाथों लेने से नहीं चूके, पुष्कर धामी ने अरविंद केजरीवाल एवं कंपनी के खिलाफ ऐसे सवाल दागे कि आम आदमी पार्टी पूरी तरह पस्त दिखी।

    धाकड़ धामी ने अरविंद केजरीवाल पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें उनके वादों और कार्यों को लेकर भी जमकर धोया। अन्ना आंदोलन के दौरान केजरीवाल का झूठ , दिल्ली का शीशमहल, यमुना नदी में गंदगी और सेना को अपमानित करने जैसे मुद्दों को पुष्कर सिंह धामी बखूबी जनता के बीच ले गए।

    मुख्यमंत्री धामी की चुनावी रणनीति ने दिल्ली की जनता के दिल में भाजपा के प्रति विश्वास को और मजबूती से पक्का किया। धामी की बातों में वह धार थी जो विपक्षी दलों के झूठ और वादों की पोल को खोल रही थी।

    दिल्ली में धामी का भाजपा के पक्ष में प्रचार आक्रामक और मुखर रहा और मुख्यमंत्री धामी ने इसे एक नई दिशा दी है। उनके भाषणों से जहां भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है, वहीं दिल्ली की जनता ने भी इस चुनावी जंग को गंभीरता से देखा है। यह देखना अब दिलचस्प होगा कि इस आक्रामक प्रचार के साथ भाजपा दिल्ली में किस प्रकार अपनी राजनीतिक बढ़त बना पाती है।

  • धामी के नेतृत्व में एक और बड़ी सफलता

    धामी के नेतृत्व में एक और बड़ी सफलता

    दून मेयर सौरभ ने सीएम धामी के विकास आधारित चुनावी एजेंडे को जीत का आधार बताया

    देहरादून। निकाय चुनाव की शुरुआत में 11 नगर निगम की मेयर सीट पर भाजपा व कांग्रेस के बीच कड़े मुकाबले की उम्मीद लग रही थी। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सत्ता विरोधी रुझान को कैश कर भारी उलटफेर करने की रणनीति पर काम भी कर रहे थे।

    दून, ऋषिकेश,हल्द्वानी ,श्रीनगर, कोटद्वार व पिथौरागढ़ समेत अन्य निगमों में कांग्रेस ने आक्रामक प्रचार कर कुछ सीटों की उम्मीद भी जगा कर रखी। कांग्रेस ने नगर निकाय के ज्वलन्त मुद्दे भी उठाए।

    कई निकायों से जुड़े भाजपा के चर्चित मंत्री व विधायकों के खिलाफ कांग्रेस ने जोरदार हमला बोल कर चुनावी माहौल गरमाया।

    लेकिन जैसे जैसे मतदान की तारीख करीब आयी ,भाजपा अपनी रणनीति को बखूबी अमलीजामा पहनाती दिखी।

    सीएम धामी के 13 जिलों में ताबड़तोड़ जनसभाएं व रोड शो में मतदाता से विकास के वादे के साथ ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने की बात कही।
    सीएम धामी ने साफ तौर पर केंद्र, राज्य के साथ अब निकाय में जीत की अपील की। कहा कि, उम्मीदवार को जिताने की बारी आपकी और फिर विकास की गारंटी मेरी।

    चुनाव से कुछ दिन पूर्व कुमाऊं के उत्तरायणी मेले में रोटी पर थूक लगाने का वीडियो वायरल होते ही धामी सरकार तुरन्त एक्शन में आ गयी। और दोषियों को गिरफ्तार करते ही सीएम धामी ने थूक जिहाद के खिलाफ जमकर बोला।

    किसी मेले में रोटी पर थूक लगाने की घटना ने चुनाव के मुद्दों में प्रमुख जगह बनाई। इसी दौरान सीएम धामी ने कैबिनेट से यूसीसी को पास करवा अपनी उपलब्धि को नये सिरे से मतदाताओं के सामने रखा।

    सीएम धामी ने अपने चुनाव प्रचार में यह भी कहा कि प्रदेश में फतवे की राजनीति करने वालों को जनता नकारेगी।

    बीच चुनाव प्रचार के दौरान धामी सरकार ने काशीपुर में अतिक्रमण किये हुए दो अवैध धार्मिक स्थल तुड़वा दिए।

    हाथ से निकल चुकी ऋषिकेश नगर निगम सीट पर सीएम धामी के आखिरी क्षण में कई गयी जनसभा का असर चुनावी नतीजों में झलका।
    पहाड़ी बनाम बाहरी के चुनाव में सीएम धामी ने क्षेत्रवाद व जातिवाद से ऊपर उठकर मतदान की अपील की। यहां भाजपा के शम्भू पासवान जीत गए।

    रुड़की नगर निगम की सीट पर भी मुकाबला कड़ा हो गया था। चुनाव प्रचार के दौरान इमरान मसूद की ‘बयानबाजी’ को भाजपा ने लपका। और यहां हिन्दू मतों के ध्रुवीकरण का असर भी देखने को मिला।

    इस निकाय चुनाव में भाजपा के कई मंत्री व विधायकों के खिलाफ मतदाता नाराज दिखा। कई निकाय में कांग्रेस व निर्दलीय बाजी मार गए। इन सीटों के परिणाम पर कांग्रेस सन्तोष जता सकती है।

    लेकिन निगम की मेयर सीट पर भाजपा का कब्जा कांग्रेस की चुनावी रणनीति को फेल कर गया। देहरादून मेयर के कांटे के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सौरभ थपलियाल एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत गए। सौरभ ने जीत का श्रेय मतदाताओं व सीएम धामी के विकास आधारित चुनावी प्रचार को दिया।

    श्रीनगर नगर निगम सीट को छोड़कर शेष 10 सीटों पर भाजपा का कब्जा सीएम धामी को प्रदेश की राजनीति में एक नया तमगा भी दे गया।