Category: राजनीति

  • ‘एक देश, एक चुनाव’ से और सशक्त होगा लोकतंत्र: सीएम धामी

    ‘एक देश, एक चुनाव’ से और सशक्त होगा लोकतंत्र: सीएम धामी

    संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में सीएम धामी ने किया प्रतिभाग

    देहरादून।  सीएम धामी ने मसूरी रोड स्थित एक होटल में “एक देश, एक चुनाव” विषय पर संयुक्त संसदीय समिति के साथ संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी एवं समिति के सभी सदस्यगणों का स्वागत और अभिनंदन किया।

    सीएम ने कहा कि ‘एक देश एक चुनाव’ हमारे लोकतंत्र को और अधिक सशक्त, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि हमारी चुनाव प्रणाली विविधताओं के बावजूद प्रभावी और मजबूत रही है, लेकिन अलग-अलग समय में चुनाव होने से बार-बार आचार संहिता लगती है, इसके चलते राज्यो के सारे काम ठप पड़ जाते हैं। जब भी चुनाव आता है, तो बड़ी संख्या में कार्मिकों को मूल कार्य से हटाकर चुनाव ड्यूटी में लगाना पड़ता है।

    सीएम ने कहा कि पिछले तीन सालों में राज्य में विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों की आचार संहिता के कारण 175 दिन तक राज्य की प्रशासनिक मशीनरी नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया से वंचित रही। छोटे और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए ये 175 दिन शासन व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा निर्वाचन का पूर्ण व्यय भार राज्य सरकार वहन करती है और लोकसभा निर्वाचन का व्यय भार केंद्र सरकार द्वारा उठाया जाता है। दोनों चुनाव एक साथ कराए जाएं तो राज्य और केंद्र सरकार पर व्यय भार समान रूप से आधा-आधा हो जाएगा। दोनों चुनाव एक साथ कराने से कुल व्यय में लगभग 30 से 35 प्रतिशत तक की बचत होगी। इसका उपयोग राज्य के स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, जल, कृषि एवं महिला सशक्तिकरण जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा सकता है।

    सीएम ने कहा कि उत्तराखण्ड में जून से सितंबर का समय चारधाम यात्रा के साथ- साथ, बारिश का भी होता है, ऐसे में चुनावी कार्यक्रम होने से बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जनवरी से मार्च तक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही के समय भी चुनावी प्रक्रिया निर्धारित नहीं की जानी चाहिए। फरवरी-मार्च के माह में हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं होने से प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों में “एक देश एक चुनाव” महत्वपूर्ण है।

    सीएम ने कहा कि उत्तराखण्ड के दुर्गम क्षेत्रों में मतदान केंद्रों तक पहुंचना कठिन होता है, जिसके कारण चुनाव की प्रक्रिया में अधिक समय और संसाधन लगते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में मतदाताओं के लिए चुनाव में भाग लेना भी चुनौतीपूर्ण होता है, बार -बार चुनाव होने से लोगों में मतदान के प्रति रुझान कम होता है और मतदान प्रतिशत भी घटता है।

  • उत्तराखंड में दरगाह गिराने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मांगा सरकार से जवाब

    उत्तराखंड में दरगाह गिराने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मांगा सरकार से जवाब

    दरगाह ध्वस्तीकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी — अवमानना याचिका में उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली: उत्तराखंड के देहरादून में स्थित एक ऐतिहासिक दरगाह को कथित तौर पर अवैध रूप से ध्वस्त किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के अधिकारियों से जवाब मांगा है। इस मामले में दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस याचिका को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका के साथ जोड़कर देखेगी।

    दरअसल, देहरादून में स्थित दरगाह हज़रत कमाल शाह, जो कि वर्ष 1982 से उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ के साथ पंजीकृत वक्फ संपत्ति है, को 25-26 अप्रैल की मध्यरात्रि में प्रशासन द्वारा गिरा दिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही वक्फ अधिनियम से जुड़ी एक याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया गया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को एक आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि अगली सुनवाई तक देशभर में किसी भी वक्फ संपत्ति की न तो स्थिति में कोई बदलाव किया जाएगा और न ही कोई नई अधिसूचना जारी की जाएगी। यह निर्देश विशेष रूप से केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा अदालत को दिए गए आश्वासन के आधार पर दिया गया था।

    याचिकाकर्ता की दलीलें

    इस आदेश के बावजूद दरगाह को गिराए जाने पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उत्तराखंड सरकार ने न केवल अदालत के आदेश की अवहेलना की, बल्कि केंद्र के आश्वासन की भी अनदेखी की।

    अधिवक्ता सिब्बल ने तर्क दिया कि यह स्थल 150 वर्षों से अधिक पुराना है और समुदाय के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दरगाह को बिना किसी पूर्व नोटिस के अचानक ध्वस्त कर दिया गया, जो कि कानून और न्याय की मूल भावना के विरुद्ध है।

    न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले को मुख्य याचिका के साथ जोड़ा जाएगा, जिसमें वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

    कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को इस अवमानना याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 15 मई को तय की है।

    वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन कर केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों से संबंधित प्रावधानों में कुछ बड़े बदलाव प्रस्तावित किए हैं। इसके खिलाफ कई मुस्लिम संगठनों और धार्मिक न्यासों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर रखी हैं। उनका कहना है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को कमजोर करता है और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

    अब शीर्ष अदालत यह जांचेगी कि क्या उत्तराखंड प्रशासन की कार्रवाई वास्तव में कोर्ट के आदेश की अवमानना है और यदि हां, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। यह मामला न केवल धार्मिक स्थल के विध्वंस का है, बल्कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना से जुड़ा एक संवेदनशील संवैधानिक प्रश्न भी बन गया है।

  • वन नेशन वन इलेक्शन पर बने समिति को सीएम धामी ने बताया दूरदर्शी पहल

    वन नेशन वन इलेक्शन पर बने समिति को सीएम धामी ने बताया दूरदर्शी पहल

    सीएम धामी ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन के लिए सभी को दिखानी होगी एकजुटता

    देहरादून। वन नेशन वन इलेक्शन पर सीएम धामी ने कहा कि *एक राष्ट्र-एक चुनाव केवल प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र को और अधिक सशक्त, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह देशहित में क्रान्तिकारी कदम है | भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव लोकतंत्र का पर्व होते हैं, लेकिन जब प्रत्येक वर्ष, कभी इस राज्य में, कभी उस राज्य में, बार-बार चुनाव होते हैं, तो यह प्रक्रिया बोझ बन जाती है। उन्होंने कहा कि बार-बार आचार संहिता लगने से विकास कार्य ठप पड़ जाते हैं और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    सीएम धामी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक स्तर पर बार-बार संसाधनों का अपव्यय होता है व सरकारी ख़ज़ाने पर नकारात्मक असर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चुनावो के दौरान बड़ी संख्या में राज्य के शिक्षकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, पुलिस बल और केंद्रीय बल के जवानों को उनके मूल कार्य से हटाकर चुनाव ड्यूटी में लगाना पड़ता है, जिससे उनके मूल कार्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर सबको एकजुटता दिखानी होगी।

    सीएम

    सीएम धामी स्वर्णिम देवभूमि फ़ाउंडेशन द्वारा एक राष्ट्र-एक चुनाव विषय पर आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे |

    इस अवसर पर उत्तराखंड आए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व एक राष्ट्र एक चुनाव के राष्ट्रीय प्रभारी सुनील बंसल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगभग 11 वर्षों का कार्यकाल ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व में पिछले एक दशक में जहां एक ओर देश में विकास और आर्थिक प्रगति के नए प्रतिमान स्थापित हुए, वहीं अनेकों ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से भारत के लोकतंत्र को और भी अधिक मज़बूती मिली। चाहे जीएसटी लागू करना हो, तीन तलाक़ की समाप्ति हो,कश्मीर से धारा 370 खत्म करना हो, सीएए-एनआरसी का क़ानून बनाना हो, नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित करना हो या फिर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लागू करना हो। इन सभी ऐतिहासिक निर्णयों ने भारत को एक नई दिशा दी है।

    सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक राष्ट्र–एक चुनाव के रूप में ऐतिहासिक क़ानून बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार यदि एक बार में चुनाव हों तो 12 हजार करोड़ रूपए तक की बचत होगी। हज़ारों करोड़ों की इस धन राशि को देश में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को मज़बूत करने में लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय रहेगा तो सभी कार्य निश्चित समय पर पूरे होंगे।

    सीएम ने कहा कि एक बार में चुनाव होने से वोटिंग टर्नआउट में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी, क्योंकि बहुत सारे लोग जो दूसरे राज्यों में रहते हैं वो बार-बार वोट देने के लिए अपने गृह राज्य में जाने से कतराते हैं लेकिन जब तीनों स्तर के चुनाव एक साथ होंगे तो वो वोट देने अवश्य जाएँगे। अब समय आ गया है कि हम आधुनिक तकनीक, चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जनता के सहयोग से इस संतुलन को पुनः स्थापित करें ।

    सीएम ने कहा कि जब अमेरिका, जापान, ब्राज़ील और स्वीडन जैसे देशों में एक साथ चुनाव की व्यवस्था हो सकती है तो क्या भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में ये व्यवस्था नहीं हो सकती? प्रधानमंत्री मोदी जैसे दृढ़ और संकल्पित प्रधान सेवक हमारे पास हैं तो देश हित का कोई काम रुक जाए, ऐसा हो नहीं सकता| प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में तैयार किया गया जो ड्राफ़्ट लोक सभा में पेश किया गया, वो बहुत ही गहन शोध और विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है।

    इस ड्राफ्ट में एक-एक परिस्थिति का ध्यान रखा गया है कि कैसे सभी राज्यों में ये व्यवस्था लागू करनी है और लागू करने के बाद यदि किसी राज्य की सरकार बीच में भंग हो गई तो उस स्थिति में कैसे चुनाव होंगे। फ़िलहाल इस क़ानून को व्यापक विचार विमर्श हेतु संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है, मुख्यमंत्री ने कहा कि उनको पूर्ण विश्वास है कि एक दिन ये एक राष्ट्र-एक चुनाव की व्यवस्था भारत में अवश्य लागू होगी और यह कानून भारत में लोकतंत्र को और अधिक मज़बूत करने में सहायक सिद्ध होगा।

    इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तथा एक राष्ट्र एक चुनाव के राष्ट्रीय प्रभारी सुनील बंसल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड में यूसीसी सबसे पहले लागू करने के लिए बधाई दी | उन्होंने ने कहा कि उत्तराखंड ने यूसीसी लागू कर देश के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत किया है| अन्य राज्य भी इसका अनुपालन करने लिए उत्सुक दिख रहे हैं | उन्होंने कहा की एक राष्ट्र एक चुनाव हर तरह से देश हित में है | इसके सम्बन्ध में व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता है |

    कार्यक्रम में राजयसभा सांसद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार, पर्यावरणविद पद्म अनिल जोशी, जागर गायिका पद्म श्रीमती बसंती बिष्ट, पद्म श्री कन्हेया लाल पोखरियाल सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, साधु संत विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजन मौजूद रहे |

  • धामी सरकार में ‘कांग्रेसी गोत्र’ का जलवा, भाजपा गोत्र अल्पमत में

    धामी सरकार में ‘कांग्रेसी गोत्र’ का जलवा, भाजपा गोत्र अल्पमत में

    धामी कैबिनेट– कांग्रेस के 4 और भाजपा के 2… बहुत नाइंसाफी है
    पावर गेम- कैबिनेट के संतुलित विस्तार के इंतजार की हुई इंतहा

    देहरादून। भारी बहुमत की भाजपा सरकार और कैबिनेट में कांग्रेसी गोत्र का जलवा जलाल। भाजपा गोत्र अल्पमत में।  यह उत्तराखंड की भाजपा सरकार के ताजातरीन सूरतेहाल हैं। मंत्रियों के पांच पद खाली हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने नवरात्र में कैबिनेट विस्तार की बात जोर शोर से कही थी। लेकिन पार्टी नेतृत्व की चुप्पी ने भाजपा नेताओं के ही कैबिनेट विस्तार के कयासों पर पानी फेर दिया।

    जब मार्च 2022 को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपनी कैबिनेट का गठन किया था। उस समय मंत्रियों की संख्या आठ रखी गयी थी। तय रणनीति के तहत कैबिनेट की तीन सीट खाली छोड़ी गईं।

    धामी कैबिनेट में सतपाल महाराज, प्रेम चंद अग्रवाल,गणेश जोशी, धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य, चंदन रामदास और सौरभ बहुगुणा को जगह मिली थी। कांग्रेसी गोत्र के दबाव ने कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं को किनारे पर लगा दिया था।

    2016 की बगावत व उससे पहले कांग्रेस से टूटकर भाजपा में आये महाराज, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य मंत्री बनीं। यूं तो सौरभ बहुगुणा 2017 व 2022 में भाजपा के टिकट पर ही चुनाव लड़े थे। लेकिन पिता व पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की कांग्रेस पृष्ठभूमि की वजह से सौरभ बहुगुणा को भी कांग्रेसी गोत्र में ही शुमार किया जाता रहा है।

    धामी

    इससे पूर्व, 2017 की त्रिवेंद्र सरकार में कांग्रेसी गोत्र के बड़े नाम यशपाल आर्य व हरक सिंह रावत भी भाजपा कैबिनेट की शोभा बढ़ाते रहे। इन्हें 2016 में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार गिराने का भारी इनाम मिला था। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व आर्य व हरक ने कांग्रेस में वापसी की।
    ये अलग बात है कि कई कांग्रेसियों के मंत्री बनने से भाजपा कैम्प में हमेशा नाराजगी का माहौल बना रहा। दोनों गोत्र के नेताओं के बीच एक विभाजक रेखा भी आज भी बदस्तूर दिखती रहती है।

    बहरहाल,2022 में भी भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश के अपने गोत्र के नेताओं की नापसन्द के बाद भी कांग्रेसी परम्परा के झंडाबरदार रहे सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल,रेखा आर्य के साथ पूर्व कांग्रेसी सीएम विजय बहुगुणा के सुपुत्र सौरभ बहुगुणा को भी कैबिनेट में जगह दी। कुल आठ मंत्रियों में चार कांग्रेसी गोत्र के और चार प्रेमचन्द अग्रवाल, गणेश जोशी, धन सिंह रावत व चंदन रामदास भाजपा गोत्र के बने। मुकाबला बराबर का था।

    इसके बाद राजनीति का पहिया घूमा। 26 अप्रैल 2023 को मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद कैबिनेट में भाजपा का पलड़ा हल्का हुआ। और 16 मार्च 2025 को बिगड़े बोल की वजह से भाजपा गोत्र के कैबिनेट मंत्री को असामान्य परिस्थिति में धामी कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा।

    धामी

    बीते दो साल में भाजपा खेमे के दो मंत्री कम हो गए। रह गए सिर्फ गणेश जोशी और धन सिंह रावत। अब कांग्रेस के चार और भाजपा के रह गए सिर्फ दो मंत्री। अब कांग्रेसी गोत्र का पलड़ा भारी।

    प्रेम चंद के इस्तीफे के बाद प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जल्द ही कैबिनेट विस्तार की बात कही थी। लेकिन वह भी नहीं हुआ।

    गौरतलब है कि 2017 व 2022 में कांग्रेसी गोत्र के नेताओं के अंदरूनी दबाव के चलते भाजपा के कई अनुभवी व युवा विधायक कैबिनेट का हिस्सा नहीं बन पाए थे। जबकि 2022 में भाजपा ने 47 सीट जीती थी। लेकिन कांग्रेसी गोत्र को तवज्जो देना भाजपा हाईकमान की लगातार मजबूरी बनी हुई है। यही राजनीतिक मजबूरी अंदरूनी नाराजगी की मुख्य वजह भी बनती दिखाई दे रही है।

    अब चूंकि, कैबिनेट की 5 सीट भरी जानी है। ऐसे में भाजपा गोत्र के नेताओं के इंतजार की भी इंतहा होती जा रही है। राजनीतिक हलकों में सम्पूर्ण कैबिनेट पुनर्गठन की चर्चा भी सुनी जा रही है।

    मौजूदा समय में धामी कैबिनेट भारी असंतुलन के झूले में झूल रही है। क्षेत्रीय,जातिगत व दलीय गोत्र असंतुलन से कई दावेदारों के साथ नाइंसाफी की चर्चा भी सरगर्म है। इंसाफ कब मिलेगा, यह अभी तय नहीं है लेकिन उस शुभ घड़ी का सभी को इंतजार है..

    मार्च 2022-धामी कैबिनेट

    धामी
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  • गंगा सम्मान यात्रा: हरीश रावत ने भाजपा पर लगाया आरोप

    गंगा सम्मान यात्रा: हरीश रावत ने भाजपा पर लगाया आरोप

    भाजपा में इतनी हिम्मत नहीं कि मुझ पर मुकदमा कर सके: हरीश रावत ने हाथ में पकड़ा काला पेपर, बोले- ‘2017 और 2022 में भाजपा ने झूठ बोलकर बनाई सरकार’

    पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को उत्तराखंड के मुखवा से अपनी ‘गंगा सम्मान यात्रा’ का आगाज किया। इस मौके पर उन्होंने राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार और उसके नेताओं पर जमकर हमला बोला। रावत ने कहा कि भाजपा ने वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जनता को झूठ बोलकर बेवकूफ बनाया और इसके परिणामस्वरूप राज्य की राजनीति झूठ के आधार पर चल रही है। इसके साथ ही रावत ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के विनाश को लेकर भी चिंता व्यक्त की और इसके संरक्षण के लिए अपनी यात्रा की शुरुआत की।

    गंगा सम्मान यात्रा का शुभारंभ

    पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गंगा के शीतकालीन गद्दी स्थल, मुखवा से अपनी यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की राजनीति में गंगा जैसी शुद्ध और सच्ची विचारधारा की जगह अब झूठ बोलने और गुमराह करने की राजनीति हो रही है। रावत ने कहा, “भाजपा ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में झूठ बोला और सत्ता हासिल की। भाजपा में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह मुझ पर झूठे आरोपों के मामले में मुकदमा कर सके।” हरीश रावत ने कहा कि भाजपा के नेता केवल आरोप लगाते हैं, लेकिन जब वक्त आता है तो वे खुद अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकते।

    हरीश रावत ने आगे कहा कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के घाटी क्षेत्र में अंधाधुंध कटान और निर्माण कार्यों से पर्यावरणीय संकट बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि नदी के दोनों किनारों पर लूट मचाई जा रही है और जलवायु परिवर्तन और नदियों के क्षरण से जुड़ी समस्याओं पर भाजपा सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। रावत ने यह भी कहा कि उन्होंने गंगा और उसकी सहायक नदियों की सुरक्षा के लिए इस यात्रा की शुरुआत की है, ताकि जन जागरूकता बढ़े और इन नदियों की रक्षा की जा सके।

    भाजपा पर कटाक्ष और झूठे आरोपों की ओर इशारा

    हरीश रावत ने भाजपा के खिलाफ जोरदार बयान देते हुए कहा कि भाजपा ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में लोगों के बीच झूठ फैला कर अपना आधार मजबूत किया। उन्होंने खासतौर पर 2017 और 2022 के चुनावों में उठाए गए मुद्दों को लेकर भाजपा की आलोचना की। रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान यह झूठ फैलाया कि यदि उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार आई तो यहां मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोली जाएगी और शुक्रवार के दिन छुट्टी घोषित की जाएगी। रावत ने कहा, “यह सभी आरोप झूठे थे और भाजपा को इसे साबित करने का साहस नहीं है, क्योंकि अगर वह अदालत जाती है तो उनका झूठ सामने आ जाएगा और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।”

    धामी सरकार पर हमले

    हरीश रावत ने त्रिवेंद्र सिंह रावत और पुष्कर सिंह धामी की सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दोनों सरकारें झूठ के आधार पर बनी थीं और उन्होंने जनता से झूठ बोला। उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र और धामी सरकारें महा झूठ के गर्भ से निकली थीं और इस कारण राज्य की राजनीति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। रावत ने यह भी कहा कि भाजपा ने धर्म और समुदायों के नाम पर जनता को गुमराह किया और अपने राजनीतिक फायदे के लिए जनता के बीच दरारें पैदा करने का काम किया।

    हरीश रावत के साथ इस यात्रा में प्रतापनगर के विधायक विक्रम सिंह नेगी, शांति ठाकुर, दर्शन लाल, आनंद रावत, घनानंद नौटियाल, विजेंद्र नौटियाल, और प्रदीप सुमन रावत समेत कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। गंगा सम्मान यात्रा में लगभग 40 से 45 कार्यकर्ता भी रावत के साथ यात्रा में शामिल हुए हैं। यात्रा का उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता फैलाना और उनकी हालत सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को उजागर करना है।

    पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह राज्यभर में अपनी यात्रा जारी रखेंगे और गंगा के संरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ जन जागरूकता बढ़ाने का कार्य करेंगे। उनका कहना था कि गंगा का संरक्षण केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का भी सवाल है, जिसे बचाने के लिए हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

    रावत ने अंत में यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन नदियों का लाभ उठा सकें।

  • सीएम धामी के नेतृत्व में तेजी से हो रहा राज्य का विकास: बिरला

    सीएम धामी के नेतृत्व में तेजी से हो रहा राज्य का विकास: बिरला

    सीएम ने कुंभ 2027 के भव्य आयोजन लिए सभी साधु संतों का आह्वान किया

    हरिद्वार। सीएम धामी ने कहा कि सरकार देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने हेतु भी संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसके लिए प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा विरोधी कानून सख़्ती से लागू किये गए हैं । उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी लागू कर सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का ऐतिहासिक दायित्व निभाया है। उत्तराखण्ड में कुंभ 2027 के भव्य एवं सफल आयोजन के लिए समस्त साधु संतों का सहयोग हेतु आह्वान करते हुए करते हुए सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार पर कुंभ 2027 के भव्य एवं दिव्य आयोजन की बड़ी जिम्मेदारी है । इसमें सभी साधु संतों का सहयोग की अपेक्षा की जाती है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति में हरिद्वार में सर्वानंद घाट में आयोजित गंगा पूजन में प्रतिभाग किया। सर्वानंद घाट से माता कृष्णा उद्यान तक शोभायात्रा में सम्मिलित हुए। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में नवनिर्मित माता कृष्णा उद्यान के शुभारम्भ समारोह में प्रतिभाग किया।

    सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आचार्य सदगुरू स्वामी टेऊँराम महाराज को सनातन संत परंपरा का महान संत बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन पर्यंत समाज को परमार्थ और सेवा की शिक्षा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होनें लोगों को जात-पात, ऊँच-नीच और दिखावे से ऊपर उठकर प्रेम और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

    सीएम

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ओम बिरला के लोकसभा अध्यक्ष रहते हुए भारतीय संसद द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति, तीन तलाक विरोधी कानून, नागरिकता संशोधन अधिनियम और वक्फ संशोधन अधिनियम जैसे कई ऐतिहासिक और युगांतकारी कानून पारित किए गए, जो आज देश को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास के साथ- साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी हो रहा है। चाहे वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरीडोर का निर्माण हो, उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण हो, अयोध्या में भगवान श्रीराम के दिव्य एवं भव्य मंदिर का निर्माण हो या फिर हाल ही में प्रयागराज में संपन्न हुए भव्य महाकुंभ का विश्वस्तरीय आयोजन हो। ये मोदी के प्रय़ासों का परिणाम है कि आज भारत विश्व के एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पुनः स्थापित हो रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश में विकास कार्यों के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित रखने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। आज एक ओर जहां, केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम में वृहद स्तर पर पुनर्निमार्ण के कार्य किए जा हैं वहीं, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरीडोर के निर्माण की दिशा में भी कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही, बाबा केदारनाथ धाम एवं हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। आप लोगों को ये जानकर प्रसन्नता होगी कि हमारी सरकार ने दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की पढ़ाई प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में विकास की गंगा बहाने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य निरंतर करती रहेगी। हमें पूर्ण विश्वास है कि प्रदेश की जनता के आशीर्वाद और सहयोग से हम अपने विकल्प रहित संकल्प के साथ उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने में अवश्य सफल होंगे।

    इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रेम प्रकाश मंडल देशभर में विभिन्न स्थानों पर मानव सेवा का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। प्रेम प्रकाश मंडल द्वारा निर्धन परिवारों कल्याण एवं विभिन्न जनहित के कार्यों के माध्यम से मानवता की सेवा की जा रही है। स्वामी भगत जी महाराज तथा प्रेम प्रकाश मंडल द्वारा अध्यात्म एवं देव परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है ।

    धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत धर्मनगरी हरिद्वार में प्रेम प्रकाश मंडल द्वारा नवनिर्मित यह माता कृष्णा उद्यान भी मानव सेवा का एक सुंदर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में विभिन्न विकास कार्यों के साथ ही चारधाम यात्रा को सुगम एवं सुविधापूर्ण बनाने, गंगा की स्वच्छता तथा कुंभ 2027 के भव्य एवं सफल आयोजन हेतु सराहनीय कार्य किया जा रहा है |

    कार्यक्रम में प्रेम प्रकाश आश्रम मण्डलाध्यक्ष स्वामी भगत प्रकाश महाराज, स्वामी मनोहर लाल, स्वामी ब्राह्ममानंद, स्वामी मोनू राम, सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक मदन कौशिक, आदेश चौहान, दर्जा राज्यमंत्री विनय रुहेला, देशराज कर्णवाल, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, ओम प्रकाश जमदगनी,पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द, मेयर किरन जेसल, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, कुँवर प्रणव सिंह चैंपियन, बीजेपी जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल आदि मौजूद रहे |

  • पंचायत चुनाव में तकनीकी क्रांति: पहली बार मतदाता सूची होगी वेबसाइट पर उपलब्ध

    पंचायत चुनाव में तकनीकी क्रांति: पहली बार मतदाता सूची होगी वेबसाइट पर उपलब्ध

    पंचायत चुनाव: इस सप्ताह ऑनलाइन होगी मतदाता सूची जारी, नौ जिलों में भेजे गए बैलेट पेपर – पारदर्शिता और जागरूकता की दिशा में बड़ा कदम

    उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है। राज्य निर्वाचन आयोग इस सप्ताह के भीतर पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची को पहली बार ऑनलाइन जारी करने जा रहा है। यह पहल न केवल पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।

    एनआईसी और आयोग के बीच अहम बैठक

    मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयोग और एनआईसी (नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर) के अधिकारियों के बीच इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें मतदाता सूची को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लगी। आयोग के सचिव राहुल गोयल ने जानकारी दी कि आगामी दो से तीन दिनों में आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर मतदाता सूची अपलोड कर दी जाएगी।

    हर पंचायत तक पहुंची मतदाता सूची, लोगों को दी गई जानकारी

    इस बार आयोग ने चुनाव से पहले मतदाताओं को जागरूक करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। पहली बार प्रदेश की हर पंचायत में मतदाता सूची भिजवाकर ग्रामीणों को अपने नाम जांचने का अवसर दिया गया। इसके साथ ही एक विशेष अभियान के तहत सूची में आवश्यक संशोधन भी किए गए। अब जब यह सूची ऑनलाइन उपलब्ध होगी, तो ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ही अपने नाम की पुष्टि कर सकेंगे।

    बैलेट पेपर की छपाई पूरी, नौ जिलों में भेजे गए

    राज्य निर्वाचन आयोग ने नौ जिलों के लिए बैलेट पेपर छपवाकर संबंधित जिलों को भेज दिए हैं। हालांकि हरिद्वार जिले में इस बार चुनाव नहीं होंगे। शेष तीन जिलों के लिए भी चुनावी तैयारियां तेज़ी से जारी हैं और जल्द ही वहां भी आवश्यक सामग्री भेजी जाएगी।

    ओबीसी आरक्षण के लिए सरकार लाएगी अध्यादेश

    पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने के लिए सरकार एक्ट में संशोधन की तैयारी कर रही है। इसके लिए पंचायती राज विभाग जल्द ही एक अध्यादेश लेकर आएगा। प्रस्ताव शासन स्तर पर तैयार हो रहा है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद अध्यादेश जारी किया जाएगा। इस अध्यादेश के माध्यम से पंचायतों में एकल सदस्यीय समर्पित आयोग की रिपोर्ट के अनुसार OBC आरक्षण लागू किया जाएगा।

    उत्तराखंड में पंचायत चुनाव की दिशा में यह पारदर्शिता, तकनीकी प्रगति और सामाजिक समावेशन की ओर एक सराहनीय कदम है। मतदाता सूची का ऑनलाइन प्रकाशन न केवल डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण मतदाताओं की चुनावी भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा।

  • पंचायत परिषद में महेंद्र नागर की धमाकेदार एंट्री, बने राष्ट्रीय महामंत्री

    पंचायत परिषद में महेंद्र नागर की धमाकेदार एंट्री, बने राष्ट्रीय महामंत्री

    अखिल भारतीय पंचायत परिषद की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन 

    पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने सौंपी नई ज़िम्मेदारियां

    देहरादून। अखिल भारतीय पंचायत परिषद की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया है। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने उत्तराखंड के महेंद्र नागर को एक बार फिर राष्ट्रीय महामंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। नागर की नियुक्ति को संगठन में उनके लंबे अनुभव और सक्रिय भूमिका का सम्मान माना जा रहा है।

    महेंद्र नागर के अलावा परिषद में कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी महत्वपूर्ण पद सौंपे गए हैं। असम के पूर्व सांसद विष्णु प्रसाद, बंगाल के पूर्व सांसद डी.पी. रॉय, उत्तर प्रदेश के डॉ. अशोक चौहान, गुजरात के परेश कुमार देसाई, तमिलनाडु के के.ए. मनोहरण और रांची की सुंदरी तिर्की को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया है।

    इसके साथ ही राष्ट्रीय सचिव के रूप में बी.एस. सुब्रमण्यम (कर्नाटक), वीरेंद्र चौधरी (दिल्ली), राजवीर सिंह राठी (दिल्ली), हेमंत सिंह चौधरी (उत्तर प्रदेश), दिनेश भाई भीखाभाई (गुजरात), जगपाल कसाना (दिल्ली), बहादुर सिंह तोमर (मध्य प्रदेश), नायनानंद कुमार पाटिल (महाराष्ट्र) और शुभम कश्यप (झारखंड) को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    महेंद्र नागर इससे पूर्व भी पंचायत परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तराखंड, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और राष्ट्रीय महामंत्री पदों पर कार्य कर चुके हैं। वे पूर्व पार्षद, पूर्व जिला योजना समिति सदस्य (नैनीताल), और हिंदू वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव भी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे हिमालय परिवार, व्यापार मंडल और कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

    महेंद्र नागर के राष्ट्रीय महामंत्री बनने पर अनेक नेताओं, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने खुशी व्यक्त की है। उन्हें बधाई देने वालों में पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद अजय भट्ट, हल्द्वानी नगर निगम के मेयर गजराज सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, अखिल भारतीय पंचायत परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अशोक चौहान, महामंत्री अनिल शर्मा, पंचायत संदेश के प्रधान संपादक बद्रीनाथ, राज्यमंत्री रेनू अधिकारी, दिनेश आर्य, हेमंत द्रिवेदी, अजय राजोर, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट, शिवसेना प्रदेश अध्यक्ष गौरव कुमार, शिवसेना नेता रूपेन्द्र नागर, पूर्व पार्षद हरिमोहन अरोरा और मनोज गुप्ता, छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष संदीप कुकसाल और सचिव योगेंद्र बिष्ट, व्यापारी नेता हर्षवर्धन पांडे, तथा देव तिवाड़ी, संजय राजोर, सक्षम सक्सेना, ऋषभ तिवाड़ी, अमित सक्सेना सहित अन्य लोग शामिल हैं।

  • सीएम धामी ने 18 भाजपा नेताओं को सौंपे दायित्व

    सीएम धामी ने 18 भाजपा नेताओं को सौंपे दायित्व

    देखें, दायित्व की सूची

    देहरादून। सीएम सिंह धामी ने प्रदेश में विभिन्न विभागीय दायित्वों का पुनर्वितरण करते हुए कई महानुभावों को महत्वपूर्ण पद सौंपे हैं। इससे राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है और उनके प्रभावी अनुश्रवण में भी सहायता मिलेगी।

    इस संबंध में जानकारी देते हुए सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि सीएम द्वारा निम्नलिखित व्यक्तियों को विभागीय जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।

    कुछ दिन पूर्व 20 नेताओं को दायित्व सौंपे गए थे।

    नियुक्त पदाधिकारी एवं उनके दायित्व

    1. बलवीर घुनियाल – उपाध्यक्ष, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति
    2. सुरेन्द्र मोघा – उपाध्यक्ष, उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड
    3. भुवन विक्रम डबराल – उपाध्यक्ष, जड़ी-बूटी सलाहकार समिति
    4. सुभाष बर्थवाल – उपाध्यक्ष, राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद
    5. पुनीत मित्तल – उपाध्यक्ष, नगरीय पर्यावरण संरक्षण परिषद
    6. गिरीश डोभाल – उपाध्यक्ष, प्रदेशीय मौन परिषद
    7. गीताराम गौड – उपाध्यक्ष, उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद
    8. डा. जयपाल – उपाध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन समिति
    9. देशराज कर्णवाल – उपाध्यक्ष, समाज कल्याण योजनाएं एवं अनुश्रवण समिति
    10. अजीत चौधरी – उपाध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य किसान आयोग
    11. प्रताप सिंह पंवार – उपाध्यक्ष, राज्य औषधीय पादप बोर्ड
    12. जगत सिंह चौहान – उपाध्यक्ष, राज्य स्तरीय लघु सिंचाई सलाहकार समिति
    13. गीता रावत – अध्यक्ष, राज्य स्तरीय सतर्कता समिति
    14. शंकर कोरंगा – उपाध्यक्ष, राज्य स्तरीय जलागम परिषद
    15. महेश्वर सिंह महरा – उपाध्यक्ष, चाय विकास सलाहकार परिषद
    16. सरदार मनजीत सिंह – सह अध्यक्ष, प्रदेश स्तरीय गन्ना विकास सलाहकार समिति
    17. नवीन वर्मा – उपाध्यक्ष, वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद
    18. अशोक नबियाल – उपाध्यक्ष, उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद

    राज्य सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति को बल मिलेगा और सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

  • भाजपा सरकार के तीन साल , पीएम मोदी ने धामी सरकार की तारीफ की

    भाजपा सरकार के तीन साल , पीएम मोदी ने धामी सरकार की तारीफ की

    ये तीन वर्ष उत्तराखंड के उत्थान में एक बड़ी उपलब्धि -पीएम मोदी

    सीएम धामी ने कहा, धन्यवाद प्रधानमंत्री जी.!

    देहरादून। बीते 23 मार्च को भाजपा की धामी सरकार ने तीन साल पूरे किए। इस मौके पर प्रधानमन्त्री मोदी ने पत्र लिखकर प्रदेश सरकार को बधाई देते हुए सीएम धामी के कार्यों की सराहना की। 29 मार्च के लिखित बधाई संदेश में धामी सरकार के बुनियादी कार्यों को गिनाते हुए कहा कि यह दशक उत्तराखंड का होगा।

    बधाई संदेश के बाद सीएम धामी नव पीएम मोदी का आभार जताया।

    पढ़ें, पीएम मोदी का बधाई सन्देश

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के सफलतापूर्वक तीन वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने राज्य सरकार की ‘सेवा, सुशासन और विकास’ की यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि ये तीन वर्ष उत्तराखंड के उत्थान में एक बड़ी उपलब्धि साबित हुए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उत्तराखंड अपनी समृद्ध विरासत और परिश्रमी जनता के प्रयासों से विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि जिस उद्देश्य से 25 वर्ष पूर्व उत्तराखंड का गठन किया गया था, राज्य अब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, परिवहन और पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड असीम संभावनाओं से भरा हुआ है और यहां की जनता में यह सामर्थ्य है कि वे अपने प्रयासों से राज्य को नई ऊंचाइयों तक लेकर जाएं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि जनशक्ति के बल पर यह दशक उत्तराखंड का होगा और प्रदेश विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आजादी के अमृत काल में विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।

    प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार को राज्य में उपलब्धियों भरे तीन वर्ष पूरे करने के लिए शुभकामनाएं दीं और प्रदेशवासियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    मोदी
    सीएम धामी ने आभार जताया

    पीएम की बधाई व मार्गदर्शन का सीएम धामी ने आभार जताते हुए कहा कि सेवा, सुशासन एवं विकास को समर्पित हमारी सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रधानमंत्री @narendramodi द्वारा दी गई शुभकामनाओं हेतु समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार !

    सीएम धामी ने कहा कि आपके कुशल नेतृत्व, मार्गदर्शन और उत्तराखण्ड के प्रति विशेष लगाव के फलस्वरूप हमारा प्रदेश विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। सशक्त व समृद्ध उत्तराखण्ड की परिकल्पना को साकार करते हुए हमने शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, परिवहन एवं पर्यटन सहित सभी क्षेत्रों में राज्य को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

    हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। आपके उत्साहवर्धक शब्द हमें जनसेवा हेतु अहर्निश समर्पण भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।