Category: रोजगार

  • राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को मिली तैनाती

    राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को मिली तैनाती

    विभागीय मंत्री डा. धन सिंह रावत ने तैनाती प्रस्ताव को दी मंजूरी

    कहा, फैकल्टी की कमी होगी दूर, शिक्षण व प्रशिक्षण कार्यों में होगी गुणात्मक वृद्धि

    देहरादून। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अब फैकल्टी की कमी आड़े नहीं आयेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तैनाती दे दी गई है। सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों से मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ होगा तथा शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोधात्मक कार्यों को नई गति मिलेगी।

    राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित करने में निरंतर प्रयासरत है। सरकार मेडिकल कॉलेजों में जहां आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करा रही है वहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी बड़े स्तर पर तैनाती कर रही है। इसी क्रम में सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही इन चयनित संकाय सदस्यों को प्रदेश के विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिसमें राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में विभिन्न संकायों में 41 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती दी गई है। इसी प्रकार राजकीय मेडिकल हरिद्वार में 12, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में 33, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में 24, राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर में 02 तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में 28 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रथम तैनाती दी गई है। मेडिकल कॉलेजों में दो दर्जन से अधिक संकायों में संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई है। जिसमें विशेष तौर पर एनेस्थीसिया संकाय में 15 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। इसी प्रकार एनाटॉमी व पीडियाट्रिक्स में 7-7, ब्लड बैंक, रेडियोथेरेपी व डर्मेटोलॉजी में 3-3, कम्युनिटी मेडिसिन व पैथोलॉजी 12-12, डेंटिस्ट्री 2, इमरजेंसी व फॉरेन्सिक मेडिसिन 1-1, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, रेस्पीरेट्री मेडिसिन व फार्माकोलॉजी 5-5, माइक्रोबॉयोलॉजी व आर्थोपीडिक्स 9-9, ऑब्स्टेट्रीक एंड गायनी 8, ऑप्थैल्मोलॉजी 4 तथा ओटो-राइनो-लेरिंगोलॉजी, बॉयोकैमेस्ट्री, साईकाइट्री व फिजियोलॉजी संकाय में 6-6 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। मेडिकल कॉलेजों में मानकों के अनुरूप प्रत्येक संकाय में फैकल्टी की तैनाती से न केवल मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी बल्कि प्रशिक्षण व शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होगी जिससे वहां आने वाले रोगियों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    बयान–
    प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के साथ ही अनुभवी व प्रशिक्षित फैकल्टी की भी तैनाती की जा रही है। इसी कड़ी में चयन बोर्ड से चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। असिस्टेंट प्रोफसरों की नई नियुक्ति से कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर होगी जिससे शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोध कार्यों में गुणात्मक सुधार होगी ही साथ ही सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी और मजबूत होगी।– डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

  • सूबे में प्राथमिक शिक्षक भर्ती को 61861 आवेदन प्राप्त

    सूबे में प्राथमिक शिक्षक भर्ती को 61861 आवेदन प्राप्त

    बेसिक शिक्षकों के 1670 रिक्त पदों पर होनी है भर्ती

    शिक्षा मंत्री डा. रावत के निर्देश, भर्ती प्रक्रिया में लायें तेजी

    देहरादून । प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत बेसिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जायेगा। जनपदवार आयोजित भर्ती प्रक्रिया के तहत 1670 रिक्त पदों के सापेक्ष विभाग को 61861 आवेदन प्राप्त हुये हैं। विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये हैं।

    विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न जनपदों में बेसिक शिक्षकों के 1670 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। जिसके सापेक्ष अब तक विभाग को 61861 आवेदन प्राप्त हुये हैं। जिसमें पौड़ी जनपद में 230 रिक्त पदों के सापेक्ष 6600 आवेदन जनपद स्तर पर प्राप्त हुये हैं। इसी प्रकार चमोली में 162 के सापेक्ष 6040, रूद्रप्रयाग में 155 के सापेक्ष 5667, टिहरी में 216 के सापेक्ष 6100, उत्तरकाशी में 134 के सोपक्ष 5259, देहरादून में 97 के सापेक्ष 2813, नैनीताल में 129 के सापेक्ष 6255, अल्मोड़ा में 241 के सापेक्ष 6634, बागेश्वर में 118 के सापेक्ष 5780, चम्पावत में 85 के सापेक्ष 5190 तथा पिथौरागढ़ में 103 रिक्त पदो ंके सापेक्ष 5523 आवेदन प्राप्त हुये हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि सभी जनपदों में अभ्यर्थियों द्वारा आवेदित आवेदनों की स्क्रूटनी की जा रही है, इसके उपरांत अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट तैयार कर उसे विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किया जायेगा। भर्ती प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ तय समय सीमा के भीतर सम्पन्न करने को विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी 11 जनपदों के जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) को ठोस निर्देश दिये हैं। विभागीय अधिकिरयों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आवेदित अभ्यर्थियों के शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर उनके शैक्षिक गुणांक तय किये जा रहे हैं और उसके आधार पर मेरिट सूची तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही आवेदित अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी की जायेगी, तदोपरांत जनपद स्तर पर रिक्त पदों के सापेक्ष अभ्यर्थियों का अंतिम चयन परिणाम घोषित किया जायेगा।

    सूबे में प्राथमिक शिक्षक भर्ती के तहत 1670 रिक्त पदों के सापेक्ष विभिन्न जनपदों में कुल 61861 आवेदन प्राप्त हुये हैं। शीघ्र ही उक्त पदों पर अभ्यर्थियों का चयन परिणाम जारी किया जायेगा। इसके लिये सभी जनपदों के जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) को भर्ती प्रक्रिया नियत समयसीमा में पूर्ण कर चयनित अभ्यर्थियों की शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित करने निर्देश दिये हैं।– डॉ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

     

  • 26 हज़ार युवाओं को मिली नौकरी, चार साल में भर्ती प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार

    26 हज़ार युवाओं को मिली नौकरी, चार साल में भर्ती प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार

    देखें, किस सीएम के समय कितनी सरकारी नौकरी मिली

    सरकारी नौकरी के लिहाज से धामी कार्यकाल पूर्ववर्ती सीएम से बेहतर आंका गया

    बीते 20 साल में सिर्फ 11 हजार नौकरियां मिली

     

    देहरादून। महज़ चार साल के कार्यकाल में धामी सरकार ने 26,025 युवाओं को सरकारी नौकरी दी। जबकि राज्य गठन के बाद पिछले 20 वर्षों में 9 मुख्यमंत्रियों की सरकारें मिलकर भी कुल 11,528 नौकरियां ही दे पाईं।

    उत्तराखंड की 25 साल की यात्रा में सरकारी नौकरियों के लिहाज़ से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कार्यकाल बेहतर माना जा रहा है। नकल कानून लागू कर युवाओं के लिए यह दौर सिर्फ अवसरों का नहीं, बल्कि पारदर्शिता और भरोसे का भी है।
    धामी सरकार ने सरकारी नौकरी देने वाले तीन आयोगों के मार्फत पिछली 9 मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की तुलना में तीन गुनी नौकरी दी है, जो अपने आप में बड़ा रिकॉर्ड है।

    भाजपा सरकार ने समूह ग में 16 हज़ार युवाओं को नौकरी दी। वहीं, अधिकारियों के 10 हज़ार पदों पर भी योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई। पारदर्शिता का आलम यह रहा कि कई अभ्यर्थियों ने एक नहीं बल्कि तीन से चार परीक्षाएं पास कर सफलता पाई।

    मुख्य प्रवक्ता सुरेश जोशी का कहना है कि
    धामी सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए एडवांस जॉब कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें 10 हज़ार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया का अधियाचन पूरा हो चुका है और विज्ञप्तियां जारी होना बाकी हैं। यह परीक्षाएं भी इसी साल तक कराने का लक्ष्य रखा गया है।

    20 साल बनाम 4 साल रोजगार का साफ़ अंतर

    पिछली सरकारों के लंबे कार्यकाल के मुकाबले धामी सरकार का प्रदर्शन रोजगार के क्षेत्र में कहीं आगे निकल गया है।

    20 साल (9 मुख्यमंत्री) – 11,528 नौकरियां

    4 साल (धामी सरकार) – 26,025 नौकरियां

    आयोगवार भर्ती – धामी सरकार का रिकॉर्ड*

    UKSSSC – 11,041 नियुक्तियां

    UKPSC – 8,359 नियुक्तियां

    UMSSSB – 5,926 नियुक्तियां

    अन्य सरकारें (20 साल)

    UKSSSC – 4,193

    UKPSC – 6,128

    UMSSSB – 1,207

    अब तक मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में मिली नौकरियां ….

    एन.डी. तिवारी – 1,571

    बी.सी. खंडूरी – 123

    रमेश पोखरियाल निशंक – 236

    विजय बहुगुणा – 812

    हरीश रावत – 2,496

    त्रिवेंद्र सिंह रावत – 5,083

    पुष्कर सिंह धामी – 26,025

  • उत्तराखंड: समूह-ग वर्दीधारी पदों पर पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण

    उत्तराखंड: समूह-ग वर्दीधारी पदों पर पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण

    उत्तराखंड: समूह-ग वर्दीधारी पदों पर पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण

    क्षैतिज आरक्षण नियमावली – 2025 के जरिए अब सेवामुक्त हुए अग्निवीरों को विभिन्न विभागों के वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाएगा।

    उत्तराखंड के मूल और स्थायी निवासी पूर्व अग्निवीरों को अब राज्य सरकार की ओर से एक बड़ा लाभ मिलने जा रहा है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी की गई नई नियमावली के अनुसार समूह-ग के वर्दीधारी पदों पर भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिलेगा। यह आरक्षण पांच प्रमुख विभागों – गृह विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग, परिवहन विभाग और सचिवालय प्रशासन विभाग – में होने वाली विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और सीधी भर्तियों में लागू होगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले वर्ष यह घोषणा की थी कि भारतीय सेना से सेवामुक्त हुए अग्निवीरों को उत्तराखंड राज्य की विभिन्न सेवाओं में आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। अब उनकी यह घोषणा धरातल पर उतर चुकी है और नियमावली भी जारी कर दी गई है। इससे पूर्व अग्निवीरों को न केवल रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि उन्हें राज्य की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

    इस नियमावली के तहत सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में अग्निवीर के रूप में सेवाएं दे चुके पूर्व सैनिकों को सीधी भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Efficiency Test) से छूट प्रदान की जाएगी। साथ ही, उन्हें भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में की गई कुल सेवा अवधि के बराबर अधिकतम आयु सीमा में भी छूट मिलेगी। यानी यदि किसी अग्निवीर ने चार वर्ष की सेवा की है तो उसे चार वर्ष की अतिरिक्त आयु छूट का लाभ प्राप्त होगा। यह प्रावधान उन युवाओं के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगा जिन्होंने देश की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ की है।

    इन पदों पर मिलेगा आरक्षण का लाभ
    नियमावली के अनुसार अग्निवीरों को गृह विभाग में पुलिस आरक्षी (नागरिक पुलिस/पीएसी), उप निरीक्षक नागरिक पुलिस, प्लाटून कमांडर पीएसी, अग्निशामक, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बंदी रक्षक, उप कारापाल जैसे पदों पर आरक्षण मिलेगा। वन विभाग में वन आरक्षी और वन दरोगा की भर्ती में यह प्रावधान लागू होगा। इसी प्रकार आबकारी विभाग में आबकारी सिपाही, परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय प्रशासन विभाग में सचिवालय रक्षक के पद भी इस आरक्षण के दायरे में शामिल किए गए हैं।

    इस फैसले के माध्यम से सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की सेवा कर लौटे हुए अग्निवीर समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें और उन्हें भविष्य की चिंता न करनी पड़े। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि पूर्व अग्निवीर प्रदेश का गौरव हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा की है, इसलिए उन्हें सम्मान और रोजगार का अवसर देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल सेवामुक्त हुए अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम है, बल्कि यह उन्हें समाज में एक नई पहचान और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करेगा।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को हर संभव सहायता और सेवायोजन का प्रयास कर रही है। इस आरक्षण से हजारों युवाओं को लाभ मिलेगा और वे अपने अनुभव, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ राज्य की विभिन्न सेवाओं में योगदान दे सकेंगे। यह निर्णय निश्चित ही उत्तराखंड में रोजगार सृजन और पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

  • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना: आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू

    मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना: आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू

    मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, इस साल 10 हजार रोजगार देने का लक्ष्य

    देहरादून। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के तहत युवाओं और बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार के अवसर और अधिक सुलभ करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ी पहल की है। उद्योग विभाग ने इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के माध्यम से 10 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।

    योजना में बड़ा बदलाव: दो योजनाओं का हुआ विलय

    पिछले माह प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार अति सूक्ष्म योजना को मिलाकर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 लागू की है। यह नई योजना वर्ष 2030 तक प्रभावी रहेगी। इसका उद्देश्य स्वरोजगार के अवसरों को व्यापक बनाना और अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

    योजना में अब विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग परियोजना लागत निर्धारित की गई है:

    • विनिर्माण क्षेत्र: अधिकतम ₹25 लाख तक की परियोजना लागत

    • सेवा क्षेत्र: अधिकतम ₹10 लाख तक की परियोजना लागत

    • अन्य सूक्ष्म व्यवसाय: अधिकतम ₹2 लाख तक की परियोजना लागत

    सब्सिडी की दरें

    राज्य सरकार ने स्वरोजगार योजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी का भी प्रावधान रखा है। इसके तहत:

    • सूक्ष्म व्यवसाय के लिए ₹2 लाख तक के ऋण पर 25% से 30% तक सब्सिडी दी जाएगी।

    • ₹2 लाख से ₹10 लाख तक के ऋण पर 20% से 25% तक सब्सिडी मिलेगी।

    • ₹10 लाख से ₹25 लाख तक के ऋण पर 15% से 20% तक की सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

    आवेदन प्रक्रिया

    योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक आवेदकों को ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य होगा। उद्योग विभाग इन आवेदनों की जांच (स्क्रूटनी) करेगा और पात्र आवेदनों को ऋण स्वीकृति के लिए बैंकों को प्रेषित किया जाएगा।

    प्रदेश सरकार ने बैंकों को ऋण वितरण के लिए समय सीमा तय की है:

    • ₹5 लाख तक के ऋण आवेदन दो सप्ताह में निपटाए जाएंगे।

    • ₹5 लाख से ₹25 लाख तक के आवेदन तीन सप्ताह के भीतर स्वीकृत किए जाने हैं।

    रोजगार सृजन को बढ़ावा

    राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना के तहत स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बेरोजगारी दर में कमी आएगी। उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है ताकि आवेदकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    योजना में महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना भी व्यक्त की गई है, ताकि सामाजिक और आर्थिक समावेशन सुनिश्चित किया जा सके।

    उद्योग विभाग ने सभी पात्र व्यक्तियों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

  • 76 फॉरेस्ट दरोगाओं को मिला प्रमोशन, बने ACF – शासन ने जारी किए आदेश

    76 फॉरेस्ट दरोगाओं को मिला प्रमोशन, बने ACF – शासन ने जारी किए आदेश

    उत्तराखंड: 76 वन दरोगाओं पदोन्नत होकर बने उप वन क्षेत्राधिकारी, अपर प्रमुख वन संरक्षक ने जारी किए आदेश

    देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में लंबे समय से प्रतीक्षित पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। विभाग में कार्यरत 76 वन दरोगाओं को पदोन्नति देकर उप वन क्षेत्राधिकारी (एसीएफ रैंक) बनाया गया है। इस संबंध में आदेश अपर प्रमुख वन संरक्षक मीनाक्षी जोशी द्वारा जारी किए गए हैं।

    वन विभाग की पदोन्नति समिति की सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। प्रमोशन प्राप्त सभी कार्मिकों को फिलहाल उनके वर्तमान तैनाती वाले कार्यालय में ही उप वन क्षेत्राधिकारी के पद पर योगदान देना होगा। तैनाती से संबंधित आदेश विभाग की ओर से अलग से जारी किए जाएंगे।

    सेवा पुस्तिका में दर्ज होगी पदोन्नति की जानकारी

    जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सभी पदोन्नत कार्मिकों की पदोन्नति की जानकारी उनके व्यक्तिगत सेवा अभिलेखों (सर्विस बुक) में विधिवत रूप से दर्ज की जाएगी। यह प्रविष्टि न केवल भविष्य में सेवा संबंधी किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि यह उनके करियर रिकॉर्ड में एक स्थायी उपलब्धि के रूप में संकलित की जाएगी।

    वन विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि पदोन्नति प्राप्त कार्मिकों को अपने वर्तमान तैनाती स्थल पर ही उप वन क्षेत्राधिकारी के रूप में योगदान देना होगा। उनकी नई तैनाती को लेकर पृथक आदेश भविष्य में विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे। यदि कोई कार्मिक पदोन्नति को अस्वीकार करता है, योगदान नहीं देता या जानबूझकर पदभार ग्रहण करने से इंकार करता है, तो उसके विरुद्ध “उत्तराखंड राज्याधीन सेवाओं में पदोन्नति का परित्याग नियमावली 2024” के तहत कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस नियमावली के अंतर्गत, ऐसे कार्मिकों की पदोन्नति को निरस्त कर उनकी वरिष्ठता और भविष्य की पदोन्नति पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    दरोगाओं को छूट नीति के तहत मिली पदोन्नति

    वन विभाग द्वारा इस बार की पदोन्नति प्रक्रिया में ‘छूट नीति’ (Relaxation Policy) को भी लागू किया गया, जो उन कार्मिकों के लिए विशेष रूप से प्रभावी रही, जो किन्हीं कारणवश सामान्य मानकों को नहीं पूर्ण कर पा रहे थे, लेकिन सेवा में उनकी निरंतरता, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और विभागीय योगदान को देखते हुए उन्हें पदोन्नति का पात्र माना गया।

    इस नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभाग के ऐसे समर्पित कर्मियों को उचित अवसर मिले, जिनकी प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से पदोन्नति लंबित रह गई थी। छूट के आधार पर की गई पदोन्नति विभाग की मानव संसाधन नीतियों को अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक बनाती है, जिससे कर्मचारियों में विश्वास और उत्साह का संचार होता है।

    इसके अतिरिक्त, यह छूट सेवा अनुभव, विभागीय परीक्षा, आचरण और वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्टों जैसे अन्य मापदंडों के समुचित विश्लेषण के पश्चात दी गई है, जिससे चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायसंगत बनी रहे। विभाग का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि सेवा की गुणवत्ता और ईमानदार योगदान को वरीयता दी जा रही है, जिससे संपूर्ण संगठनात्मक ढांचा अधिक सक्षम और उत्तरदायी बन सके।

    इन दरोगाओं को मिली पदोन्नति

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन वन दरोगाओं को उप वन क्षेत्राधिकारी के रूप में पदोन्नत किया गया है, उनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:

    प्रवीण सिंह, शिव प्रसाद भट्ट, भजन सिंह रावत, दयालाल, जगत सिंह, दीप चंद्र पांडे, राधिका जोशी, किशन चंद्र भगत, चंदन राम, चंद्रशेखर उप्रेती, भगवती उपाध्याय, लीला मठपाल, तारा दत्त सेमवाल, गणेश दत्त सती, सोबन राम, कमल किशोर, मंजू बहुगुणा, होरी लाल, देवकी नंदन आदि।

    इन सभी अधिकारियों की पदोन्नति से विभाग में न केवल कार्यप्रणाली को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भी गति आएगी। वन विभाग में यह पदोन्नति प्रक्रिया काफी समय से लंबित थी, जिसे अब सिरे चढ़ाया गया है।

    प्रशासनिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम

    वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की पदोन्नतियां कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाती हैं और उन्हें और अधिक उत्साह से अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही विभाग की प्रशासनिक दक्षता भी इससे सुदृढ़ होती है।

  • सहकारी बैंकों में शीघ्र होगी बंपर भर्ती, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के मौके

    सहकारी बैंकों में शीघ्र होगी बंपर भर्ती, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के मौके

    सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दी भर्ती प्रस्ताव को मंजूरी

    आईबीपीएस के माध्यम से 177 पदों पर आयोजित की जायेगी परीक्षा

    देहरादून। सूबे के बेरोजगार युवाओं के लिये खुशखबरी है। प्रदेश के सहकारी बैंकों में शीघ्र ही भारत सरकार के उपक्रम आईबीपीएस के माध्यम से 177 पदों पर भर्ती होने जा रही है। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस भर्ती प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और शीघ्र ही भर्ती विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिये।

    भर्ती

    सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि सहकारिता विभाग के अंतर्गत जिला सहकारी बैंकों एवं राज्य सहकारी बैंकों के वर्ग-1, 2 एवं 3 के कुल रिक्त 177 पदों पर शीघ्र भर्ती की जायेगी। जिसमें वर्ग-1 के अंतर्गत वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के 8 पद, वर्ग-2 में कनिष्ठ शाखा प्रबंधक के 65 पद और वर्ग-3 के तहत लिपिक/कैशियर के 104 पद शामिल हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने इस भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिये इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन (आईबीपीएस) को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय उपक्रम आईबीपीएस के माध्यम से पारदर्शिता तरीके से सहकारिता विभाग में दो बार भर्ती हो चुकी है। आईबीपीएस भारत सरकार का एकमात्र संस्था है जो राष्ट्रीयकृत बैंकों के कार्मिकों की भर्ती करती है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जो सहकारी बैंक के कार्मिकों की भर्ती के लिये इसी संस्था को चुना है ताकि पारदर्शिता तारीके से भर्ती की जा सके और योग्य युवाओं को मौका मिल सके। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और शीघ्र ही आईबीपीएस के माध्यम से इसका भर्ती विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इस भर्ती का उद्देश्य सहकारी बैकों में रिक्त पदों को भरकर उनकी कार्यक्षमता को और बढ़ाना है।

    डॉ. रावत ने बताया कि प्रदेश में सहकारी बैंकों का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है, अधिकतर सहकारी बैंक लाभ की स्थिति में है और बैंकों का एनपीए भी काफी कम हुआ है। उन्होंने बताया कि जिला सहकारी एवं राज्य सरकारी बैंकों में वित्तीय लेन-देन पहले की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, निजी व राष्ट्रीयकृत बैंकों की भांति सहकारी बैंकों में भी बैंकिंग सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, जगह-जगह नये एटीएम खोले गये हैं, चारधाम यात्रा मार्ग, पर्यटक स्थलों व दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल एटीएम वैन के माध्यम से सेवाएं दी जा रही है। इसके अलावा बैंकों द्वारा उपभोक्ताओं को नेट बैंकिंग की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही अन्य बैंकिंग सुविधाओं पर भी बैंक फोकस कर रहे हैं। जिससे सहकारी बैंकों पर उपभोक्ता का भरोसा बढ़ रहा है। सहकारी बैंकों में उपभोक्ताओं को आसान दरों पर ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, इसके अलावा विभिन्न सहकारी योजनाओं का लाभ भी आम लोगों को बैंकों के माध्यम से दिया जा रहा है।

     

  • स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है  एक्स-रे तकनीशिय : डॉ. धन सिंह रावत

    स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है एक्स-रे तकनीशिय : डॉ. धन सिंह रावत

    नियुक्ति पत्र मिलते ही खिल उठे चयनित तकनीशियनों के चेहरे
    तकनीकी संवर्ग के विभिन्न रिक्त पदों पर होगी भर्ती

    देहरादून। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 34 एक्स-रे तकनीशियनों को प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नियुक्ति पत्र वितरित किये। नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि एक्स-रे तकनीशियन स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है। इनकी नियुक्ति से चिकित्सा इकाईयों में मरीजों की बीमारी से सम्बंधित एक्स-रे आसानी से होंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में डॉक्टरों को भी सहायता मिल सकेगी।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सभागार में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज 34 एक्स-रे टेक्नीशियनों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुलभ करने के प्रति प्रतिबद्ध है। इसके लिये सरकार द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक आधुनिक तकनीक युक्त चिकित्सा उपकरणों सहित प्रशिक्षित कार्मिकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टॉफ की निरंतर नियुक्ति की जा रही है। इसी कड़ी में उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 34 एक्स-रे तकनीशियनों को नियुक्ति की गई हैं।

    तकनीशिय

    डॉ. रावत ने कहा कि सभी चयनित एक्स-रे टेक्नीशियनों को प्रथम तैनाती पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों की चिकित्सा इकाईयों की जायेगी, जिससे चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आम जनमानस को समुचित चिकित्सा सुविधा मिलेगी। विभागीय मंत्री ने कहा कि एक्स-रे तकनीशियन स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ है, इनकी नियुक्ति से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की चिकित्सा इकाईयों में आम जनमानस को एक्स-रे संबंधी दिक्कतों से नहीं जूझना पड़ेगा, साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में डॉक्टरों को भी सहायता मिल सकेगी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर लोगों को हड़्डी फ्रैक्चर, संक्रमण, गठिया जैसी समस्याओं का पता लागने के साथ ही चोटों के उपचार, सर्जरी में एक्स-रे तकनीशियनों की मदद मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत तकनीकी संवर्ग के विभिन्न रिक्त पदों को आईपीएचएस मानकों के अनुरूप भरने का निर्णय लिया है। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के निर्देश दे दिये गये हैं ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप जिला चिकित्सालयों व जिला चिकित्सालयों में तकनीशियनों की कमी को दूर किया जा सके।

    इस अवसर पर डॉ. रावत ने सभी चयनित एक्स-रे तकनीशियनों को बधाई दी साथ ही उम्मीद जताई कि सभी एक्स-रे तकनीशियन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों और कर्तव्यों का पालन कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में सरकार का सहयोग करेंगे। वहीं नियुक्ति पत्र मिलने पर एक्स-रे तकनीशियनों के चेहरे खिल उठे। नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी एक्स-रे तकनीशियनों ने विभागीय मंत्री डॉ. रावत के प्रति आभार प्रकट किया।

    नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा, निदेशक डॉ. मनोज उप्रेती, निदेशक एनएचएम डॉ. मनू जैन, प्रभारी निदेशक डॉ. एच.सी.एस. मार्तोलिया सहित अन्य विभागीय अधिकारी व नव नियुक्त एक्स-रे तकनीशियन उपस्थित रहे।

  • उत्तराखंड में अब आउटसोर्स व संविदा पर नहीं होंगी भर्तियां, देखें आदेश

    उत्तराखंड में अब आउटसोर्स व संविदा पर नहीं होंगी भर्तियां, देखें आदेश

     

    नया आदेश– अब स्वीकृत विभागीय पदों पर नियमित नियुक्ति होंगी
    देखें, विस्तृत आदेश- कानूनी दांवपेंच व अन्य दिक्कतों का दिया हवाला

     

    देहरादून। प्रदेश शासन ने कई अड़चनों का हवाला देते हुए नियमित पदों के सापेक्ष किसी भी प्रकार की दैनिक वेतन/संविदा/कार्यप्रभारित / नियत वेतन/अंशकालिक / तदर्थ एवं आउटसोर्स माध्यम से नियुक्तियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया है।

    इस सम्बंध में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की ओर से नियमों व दिक्कतों को सामने रखते हुए आदेश जारी कर दिए गए हैं।

    जारी आदेश में कहा गया है कि अब विभागीय पदीय संरचना में स्वीकृत नियमित पदों पर केवल नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से ही कार्मिकों की नियुक्तियाँ की जाएं।

    सम्बंधित अधिकारियों को भेजे पत्र में मुख्य सचिव ने कहा है कि चयन आयोगों के नियमित चयन परिणाम के फलस्वरूप चयनित अभ्यर्थियों को जिन पदों पर तैनात किया जाना है, उन पदों पर पूर्व से आउटसोर्स / संविदा आदि पर कार्मिक तैनात होने और इन कर्मियों के पक्ष में सक्षम न्यायालयों द्वारा स्थगन आदेश, कार्यों में हस्तक्षेप से निषेध जैसे विविध आदेश पारित किये गये हैं।

    इन परिस्थितियों में जहाँ एक ओर नियमित रूप से चयनित अभ्यर्थियों की पदस्थापना की बाध्यता है, किन्तु मा० न्यायालय के आदेशों के क्रम में उन्हें कार्यभार ग्रहण कराने में कठिनाई आ रही है, वहीं दूसरी ओर मा० न्यायालयों के आदेशों का अनुपालन न होने पर अवमानना की स्थितियों उत्पन्न हो रही हैं। ऐसी विधिक अड़चनों में नियुक्ति अधिकारियों के समक्ष निरन्तर असंमजस की स्थिति बनी हुई है।

    मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में आउटसोर्स/ संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग को भी बड़ी दिक्कत बताया गया है।

    आदेश में कहा गया है कि,बनियमित पदों के सापेक्ष कामचलाऊ व्यवस्था के तहत नियोजित आउटसोर्स कार्मिकों द्वारा इन पदों के सापेक्ष नियमितीकरण की मांग की जा रही है और न्यायालयों में इस आशय के वाद भी दायर किये गये हैं। इससे एक ओर नियमित चयन प्रक्रिया बाधित हो रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों को विधिक प्रक्रियाओं/अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

    देखें आदेश

    कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2

    देहरादूनः

    दिनांक 25 अप्रैल, 2025

    विषयः विभागीय पदीय संरचना में स्वीकृत नियमित पदों पर नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से ही कार्मिकों का नियोजन किये जाने के संबंध में।

    महोदय,

    किसी शासकीय विभाग की कार्य आवश्यकता व कार्य प्रकृति के आधार पर विभाग के सुसंचालन हेतु पदीय संरचना तैयार करते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा यथा प्रक्रिया सृजित पदों की सेवा नियमावली के अनुरूप सृजित किये गये पदों पर नियमित नियुक्ति हेतु सम्बन्धित चयन आयोगों के माध्यम से चयन की कार्रवाई की जाती है।

    1. छठवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के फलस्वरूप विभागीय पदीय संरचना में चतुर्थ श्रेणी के पदों को समाप्त कर दिये जाने के उपरान्त यथा आवश्यकता चतुर्थ श्रेणी के पदों को आउटसोर्स के आधार पर सृजित करते हुए इन पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से कार्मिकों की अस्थायी तैनाती की जाती रही है। इसके अतिरिक्त विभागों द्वारा पदीय ढाँचे में रिक्त पदों का अधियाचन सम्बन्धित चयन संस्था को प्रेषित किये जाने के उपरान्त नियमित चयन प्रक्रिया आदि में सम्भावित विलम्ब के दृष्टिगत शासकीय कार्यहित में सीधी भर्ती के स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियमित नियुक्ति होने तक आउटसोर्स संस्था के माध्यम से पदों को भरे जाने हेतु कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के शासनादेश संख्या-111 दिनांक 27.04.2018 व शासनादेश संख्या-379 दिनांक 29.10.2021 द्वारा सम्बन्धित पदों पर आउटसोर्स एवं अन्य माध्यम से कार्मिकों के नियोजन किये जाने की व्यवस्था निर्धारित की गई है।
    2. यह व्यवस्था शासकीय कार्य की अपरिहार्यता, सरलीकरण और मितव्ययता के दृष्टिगत सुलभकी गई थी; किन्तु वर्तमान में इसके कई प्रतिकूल प्रभाव सामने आ रहे हैं। कतिपय विभागों में यह प्रकाश में आया है कि सम्बन्धित चयन आयोगों के नियमित चयन परिणाम के फलस्वरूप चयनित अभ्यर्थियों को जिन पदों पर तैनात किया जाना है, उन पदों पर पूर्व से आउटसोर्स / संविदा आदि पर कार्मिक तैनात होने और इन कर्मियों के पक्ष में सक्षम न्यायालयों द्वारा स्थगन आदेश, कार्यों में हस्तक्षेप से निषेध जैसे विविध आदेश पारित किये गये हैं। इन परिस्थितियों में जहाँ एक ओर नियमित रूप से चयनित अभ्यर्थियों की पदस्थापना की बाध्यता है, किन्तु मा० न्यायालय के आदेशों के क्रम में उन्हें कार्यभार ग्रहण कराने में कठिनाईयां आ रही है, वहीं दूसरी ओर मा० न्यायालयों के आदेशों का अनुपालन न होने पर अवमानना की स्थितियों उत्पन्न हो रही हैं। ऐसी विधिक अड़चनों

    में नियुक्ति अधिकारियों के समक्ष निरन्तर असंमजस की स्थिति बनी हुई है।

    1. इसके अतिरिक्त नियमित पदों के सापेक्ष कामचलाऊ व्यवस्था के तहत नियोजित आउटसोर्स
      कार्मिकों द्वारा इन पदों के सापेक्ष नियमितीकरण की मांग की जा रही है और न्यायालयों में इस आशय के वाद भी दायर किये गये हैं। इससे एक ओर नियमित चयन प्रक्रिया बाधित हो रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों को विधिक प्रक्रियाओं/अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
    2. अतः इस सम्बन्ध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि स्वस्थ शासकीय कार्य प्रणाली एवं सुशासन के दृष्टिकोण से विभागीय सुसंगत सेवा नियमावली में निहित प्रावधानों के अनुसार विभागीय पदीय संरचना में स्वीकृत नियमित पदों पर केवल नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से ही कार्मिकों की नियुक्तियाँ की जाएं। नियमित पदों के सापेक्ष किसी भी प्रकार की दैनिक वेतन/संविदा/कार्यप्रभारित / नियत वेतन/अंशकालिक / तदर्थ एवं आउटसोर्स माध्यम से नियुक्तियाँ पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेंगी। उपरोक्त का अनुपालन न किये जाने की दशा में सम्बन्धित नियुक्ति प्राधिकारी / अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए उनके विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही की जायेगी। इस क्रम में शासनादेश संख्या-111 दिनांक 27.04.2018 व शासनादेश संख्या-379 दिनांक 29.10.2021 इस सीमा तक संशोधित समझे जायेंगे।
    3. सभी विभागाध्यक्षों की यह जिम्मेदारी है कि वे विभागान्तर्गत नियमित पदों की सभी रिक्तियों का सम्यक आकलन करते हुए इन पदों पर नियमित भर्ती किये जाने के उद्देश्य से अधियाचन तैयार कर यथा प्रक्रिया सम्बन्धित चयन संस्थाओं को समय से प्रेषित करेंगे और नियमित चयन की प्रक्रिया पूर्ण किये जाने हेतु चयन संस्थाओं से समन्वय भी स्थापित करेंगे। इस सम्बन्ध में विभागीय स्तर पर समय-समय पर समीक्षा किया जाना भी अपेक्षित है।

    कृपया शासन द्वारा लिये गये उपरोक्त निर्णय का कड़ाई से अनुपालन कराना सुनिश्चित करें।

    Digitally signed by Anand Bardhan Date: 25-04-2025 (ओतरेदैः पर्धिन) मुख्य सचिव ।

    आदेश
    आदेश

     

  • मृतक आश्रितों को नौकरी देगा परिवहन निगम, शासनादेश जारी

    मृतक आश्रितों को नौकरी देगा परिवहन निगम, शासनादेश जारी

    मृतक आश्रितों की नियुक्ति पर रोडवेज परिषद ने जताया आभार

    43 आश्रितों को परिवहन निगम में मिलेगी नौकरी

    देहरादून। राज्य सरकार ने परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को नियुक्ति देने का निर्णय लेते हुए शासनादेश जारी किया है।

    अपर सचिव रीना जोशी की ओर से यह आदेश प्रबन्ध निदेशक को भेजा है।

    उत्तराखंड परिवहन निगम में कार्यरत दिवंगत कर्मचारियों के 43 मृतक आश्रितों को नियुक्ति प्रदान किए जाने के शासनादेश पर रोडवेज परिषद ने राज्य सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
    यह निर्णय निगम कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए राहतकारी और मानवता से परिपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    शासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 68 मामलों में से 56 मृतक आश्रितों ने नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। इनमें से 43 पात्र आवेदकों को नियुक्ति प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है।

    इस संबंध में रोडवेज परिषद लंबे समय से सक्रिय थी। परिषद द्वारा शासन स्तर पर निरंतर संवाद, पत्राचार एवं हस्तक्षेप किया गया। साथ ही मृतक आश्रितों द्वारा भी अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन और दावे किए गए, जिनका यह सकारात्मक परिणाम है।

    परिषद ने उम्मीद जताई है कि शेष पात्र मृतक आश्रितों को भी जल्द नियुक्ति दी जाएगी, जिससे सभी प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।

    उत्तराखंड रोडवेज परिषद के प्रदेश उपमहामंत्री विपिन बिजलवान व प्रदेश संयोजक दिनेश गुसाईं ने इस निर्णय में अहम भूमिका निभाने के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक श्रीमती रीना जोशी का विशेष आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि श्रीमती जोशी के सहयोग और संवेदनशील दृष्टिकोण के बिना यह निर्णय संभव नहीं हो पाता।

    परिषद ने नियुक्ति प्राप्त करने वाले सभी आश्रितों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की है कि वे निगम की सेवा में निष्ठा और समर्पण से कार्य करेंगे।

    प्रेषक,

    रीना जोशी,

    अपर सचिव, उत्तराखण्ड शासन।

    सेवा में,

    प्रबन्ध निदेशक,

    उत्तराखण्ड परिवहन निगम

    देहरादून।

    परिवहन अनुभाग-2

    अप्रैल

    देहरादूनः दिनांक ०१ मार्च, 2025

    विषय-उत्तराखण्ड परिवहन निगम में मृतक आश्रितों के अन्तर्गत परिचालक एवं चालक के पदों पर नियुक्ति प्रदान किये जाने विषयक।

    महोदय,

    उपर्युक्त विषयक अपने कार्यालय के पत्र संख्या-94/111 (1) -नियुक्ति-मृतक आश्रित-2024, दिनांकः 12.06.2024, पत्रांकः 14/11(1)- नियुक्ति-मृतक आश्रित-2024-25, दिनांक:-27.01.2025 एवं पत्रांक 40/2025, दिनांक:-24.03.2025 का कृपया संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके माध्यम से शासन से प्राप्त 195 मृतक आश्रितों की नियमित नियुक्ति की स्वीकृति के सापेक्ष 152 मृतक आश्रितों को नियमित नियुक्ति दिये जाने के उपरान्त माह-अप्रैल-2022 से माह-जनवरी, 2025 की अवधि तक मृतक आश्रितों की कुल संख्या 68 में से 56 मृतक आश्रितों द्वारा किये गये आवेदन के सापेक्ष 43 मृतक आश्रितों को नियमित नियुक्ति प्रदान किये जाने के संबंध में मार्ग दर्शन प्रदान किये जाने का प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराया गया है।

    1. अतः इस सम्बन्ध में शासन द्वारा सम्यक विचारोंपरान्त् मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि निगम के कार्यहित एवं शासकीय हितों को दृष्टिगत रखते हुए उत्तराखण्ड परिवहन निगम में 195 मृतक आश्रितों की नियमित नियुक्ति की स्वीकृति के सापेक्ष 152 मृतक आश्रितों को नियमित नियुक्ति दिये जाने के उपरान्त् मृतक आश्रितों हेतु 43 पद रिक्त रहने की स्थिति में माह अप्रैल, 2022 से माह जनवरी, 2025 की अवधि तक मृतक आश्रितों की कुल संख्या 68 में से 56 मृतक आश्रितों द्वारा किये गये आवेदन के सापेक्ष 43 मृतक नियमानुसार अग्रेत्तर कार्यवाही करने का कष्ट करें
    नौकरी