Category: स्वास्थ्य

  • चौबीस घण्टे मिलेंगी जनता को स्वास्थ्य सेवाएं

    चौबीस घण्टे मिलेंगी जनता को स्वास्थ्य सेवाएं

    उत्तराखण्ड में 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन सेवा फिर हुई सक्रिय

    आवश्यक विद्युत एवं तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण

    देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखण्ड के अंतर्गत संचालित 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सेवाएं आवश्यक तकनीकी एवं विद्युत संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद आज से पुनः शुरू हो गई ।
    हेल्पलाइन पूर्व की भांति 24 घंटे और सातों दिन संचालित रहेगी। इसके माध्यम से प्रदेश के नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, आवश्यक जानकारी, शिकायत एवं अन्य निर्धारित सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

    डॉ. अरीता सक्सेना (नोडल अधिकारी, 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन में मुख्य विद्युत आपूर्ति से संबंधित आर्मर्ड केबल के प्रतिस्थापन के साथ आवश्यक तकनीकी उन्नयन का कार्य किया गया है।
    तकनीकी कार्यों के चलते हेल्पलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुई थीं। अब सभी आवश्यक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं और हेल्पलाइन को नियमित संचालन के लिए तैयार कर लिया गया है।

    तकनीकी उन्नयन और विद्युत संबंधी कार्य हुए पूरे

    डॉ. अरीता सक्सेना, नोडल अधिकारी, 104 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड के अनुसार 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन के निर्बाध एवं सुचारू संचालन के लिए मुख्य विद्युत आपूर्ति से संबंधित आर्मर्ड केबल को बदला जाना आवश्यक था।
    इसके साथ ही हेल्पलाइन की तकनीकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से आवश्यक तकनीकी उन्नयन का कार्य भी किया गया। इन कार्यों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए हेल्पलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित रहीं। तकनीकी टीमों द्वारा सभी आवश्यक विद्युत एवं तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। आवश्यक परीक्षण एवं तकनीकी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के बाद अब 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन सोमवार से पूर्ववत नियमित रूप से संचालित होगी।

    24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध रहेगी हेल्पलाइन

    डॉ. अरीता सक्सेना ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हेल्पलाइन के माध्यम से नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं जानकारी प्राप्त करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित अपनी शिकायतें और सुझाव भी दर्ज करा सकते हैं। हेल्पलाइन की सेवाएं पुनः शुरू होने के बाद प्रदेश के नागरिक 104 नंबर पर संपर्क कर निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, परामर्श, शिकायत अथवा हेल्पलाइन से संबंधित अन्य सेवाओं के लिए सोमवार से 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन का निर्बाध रूप से उपयोग किया जा सकता है।

    स्वास्थ्य सेवाओं तक नागरिकों की पहुंच को आसान बनाती है 104 हेल्पलाइन

    डॉ. अरीता सक्सेना ने बताया कि 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद एवं सहायता के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में कार्य करती है। दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक भी हेल्पलाइन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने में भी हेल्पलाइन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों और समस्याओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों एवं विभागों तक पहुंचाया जाता है, जिससे उनका नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

    तकनीकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना निर्बाध सेवाओं के लिए आवश्यक

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुचारू और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की विद्युत एवं तकनीकी व्यवस्थाओं का आवश्यक उन्नयन किया गया है। तकनीकी व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण से हेल्पलाइन के संचालन को सुचारू बनाए रखने और नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

    असुविधा के लिए खेद, सहयोग के लिए प्रदेशवासियों का आभार

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड ने तकनीकी एवं विद्युत संबंधी आवश्यक कार्यों के दौरान 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन की सेवाएं प्रभावित होने से प्रदेशवासियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। एनएचएम ने इस अवधि में प्रदेशवासियों द्वारा दिए गए सहयोग एवं धैर्य के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि सभी आवश्यक कार्य पूर्ण होने के बाद सोमवार से हेल्पलाइन सेवाएं पूर्ववत 24×7 उपलब्ध रहेंगी। प्रदेश के नागरिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, आवश्यक जानकारी, शिकायत एवं अन्य निर्धारित हेल्पलाइन सेवाओं के लिए 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन का उपयोग कर सकते हैं।

  • पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर पर होगा व्यापक शोध

    पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर पर होगा व्यापक शोध

    तैयार होगी शोध-आधारित रणनीति

    देहरादून। उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों से भोजन नली अर्थात् इसोफेगस के कैंसर से पीड़ित मरीज उपचार के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग में पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में दिखाई दे रहे रुझानों को वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग ने इस विषय पर व्यापक शोध शुरू करने का निर्णय लिया है।

    इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह जानना होगा कि पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों में भोजन नली के कैंसर के पीछे तम्बाकू, धूम्रपान, शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म चाय, भोजन या अन्य पेय पदार्थों का नियमित सेवन, फल एवं सब्जियों की कमी, पोषण संबंधी असंतुलन, मोटापा, एसिड रिफ्लक्स, घरों के भीतर धुएं का संपर्क, पेयजल की गुणवत्ता, पर्यावरणीय परिस्थितियां तथा अन्य स्थानीय कारणों की क्या भूमिका है। किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने के बजाय सभी संभावित जोखिम कारकों का व्यवस्थित एवं प्रमाण-आधारित अध्ययन किया जाएगा।
    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने बताया कि अस्पताल में उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी जिलों से भोजन नली के कैंसर के अनेक मरीज उपचार के लिए आते हैं। अब तक कई मरीजों का सर्जरी, कीमोथेरेपी तथा अन्य आधुनिक उपचार विधियों से सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है। अस्पताल में उपचार प्राप्त कर चुके कई मरीज पांच वर्ष से अधिक समय से जीवित हैं और सामान्य एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भोजन नली के कैंसर की जांच और उपचार के लिए अपर जीआई एंडोस्कोपी, बायोप्सी, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन तथा अन्य आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन जांचों के आधार पर बीमारी की अवस्था, मरीज के सामान्य स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति का आकलन कर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांचों अथवा उपचार के लिए संबंधित विशेषज्ञ केन्द्रों के साथ समन्वय भी किया जाता है।

    अस्पताल में कीमोथेरेपी, ओपन एवं दूरबीन विधि से कैंसर सर्जरी, ऑपरेशन के बाद गहन चिकित्सा, दर्द नियंत्रण, पोषण सहायता, फिजियोथेरेपी तथा नियमित फॉलो-अप की सुविधाएं उपलब्ध हैं। जटिल मामलों में कैंसर विशेषज्ञ, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तथा पोषण विशेषज्ञ मिलकर मरीज की उपचार योजना तैयार करते हैं।

    डॉ. गर्ग ने बताया कि चयनित मरीजों में भोजन नली के कैंसर का ऑपरेशन दूरबीन विधि, अर्थात् मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी, से भी किया जाता है। इसमें छाती और पेट पर बड़े चीरे लगाने के बजाय छोटे छेदों के माध्यम से सर्जरी की जाती है। उचित मरीज के चयन और अनुभवी सर्जिकल टीम द्वारा किए जाने पर इस तकनीक से ऑपरेशन के बाद दर्द, फेफड़ों से संबंधित जटिलताओं और अस्पताल में रहने की अवधि को कम करने तथा मरीज को शीघ्र सामान्य गतिविधियों में लौटने में सहायता मिल सकती है।
    भोजन नली का कैंसर मुख्यतः दो प्रकार का होता है। स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का संबंध तम्बाकू, धूम्रपान, शराब, अत्यधिक गर्म भोजन या पेय पदार्थ तथा पोषण की कमी से हो सकता है। दूसरे प्रकार, एडेनोकार्सिनोमा, का संबंध लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स, बैरेट इसोफेगस और मोटापे से हो सकता है। कई मरीजों में एक से अधिक जोखिम कारक एक साथ मौजूद रहते हैं।

    डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने कहा कि भोजन नली का कैंसर प्रारम्भिक अवस्था में प्रायः कोई स्पष्ट लक्षण उत्पन्न नहीं करता। इसलिए निगलने में लगातार कठिनाई, ठोस भोजन का अटकना, बार-बार भोजन वापस आना, बिना कारण वजन कम होना, छाती में दर्द या जलन, लगातार खांसी अथवा आवाज में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से निगलने में बढ़ती कठिनाई होने पर मरीज को शीघ्र विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यकता होने पर अपर जीआई एंडोस्कोपी करानी चाहिए।

    कैंसर की शीघ्र पहचान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रारम्भिक अवस्था में बीमारी का पता चलने पर पूर्ण उपचार और लंबे समय तक स्वस्थ रहने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे मरीजों को एंडोस्कोपिक उपचार, सर्जरी अथवा संयुक्त उपचार से दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। बीमारी के शरीर के अन्य अंगों तक फैल जाने के बाद उपचार अधिक जटिल हो जाता है और परिणाम अपेक्षाकृत कम अनुकूल होते हैं।
    शोध के दौरान मरीजों की आयु, निवास स्थान, खान-पान, तम्बाकू एवं शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म खाद्य या पेय पदार्थों की आदत, पोषण की स्थिति, पेशा, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियां, पर्यावरणीय संपर्क, बीमारी की अवस्था, उपचार और दीर्घकालिक परिणामों का अध्ययन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य चिकित्सा एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ भी सहयोग स्थापित किया जाएगा।

    अस्पताल का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना नहीं है, बल्कि शोध के आधार पर भोजन नली के कैंसर की रोकथाम, उच्च जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान, जन-जागरूकता, उपयुक्त जांच और बचाव संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करना भी है। यह शोध उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में कैंसर के वास्तविक कारणों और बदलते स्वरूप को समझने तथा भविष्य की कैंसर नियंत्रण नीति और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • चंपावत में अत्याधुनिक एमआरआई मशीन का लोकार्पण, मरीजों को मिलेगा बेहतर उपचार

    चंपावत में अत्याधुनिक एमआरआई मशीन का लोकार्पण, मरीजों को मिलेगा बेहतर उपचार

    कोरोनेशन अस्पताल को भी है MRI मशीन का इंतजार

    सीमांत क्षेत्र के लिए करीब ₹40 करोड़ से अधिक की स्वास्थ्य योजनाओं की दी सौगात

    स्वस्थ उत्तराखंड से ही बनेगा समर्थ और विकसित उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

    चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को चंपावत में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सौगात दी।

    मुख्यमंत्री ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के अंतर्गत आई.सी.आई.सी.आई फाउंडेशन फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ के सहयोग से लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक एम.आर.आई मशीन का लोकार्पण किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ उत्तराखंड ही समर्थ, आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड का मुख्य आधार है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य में अस्पतालों के निर्माण के साथ उन्हें आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, गुणवत्तापूर्ण सेवाओं और प्रशिक्षित मानव संसाधन से सशक्त बनाना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा एम.आर.आई मशीन के उद्घाटन से सीमांत क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, समय पर सटीक जांच और उच्च स्तरीय उपचार की सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अनुपम सुविधा का लाभ न केवल चंपावत, बल्कि पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल तथा इसके आसपास के सभी सीमांत क्षेत्रों के नागरिकों को प्राप्त होगा।

    मुख्यमंत्री ने पुरानी कठिनाइयों को याद करते हुए कहा कि अब तक चंपावत सहित आसपास के क्षेत्रों के गंभीर मरीजों को एमआरआई जैसी जटिल जांचों के लिए हल्द्वानी अथवा अन्य बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता था, जो गंभीर रोगियों और उनके परिजनों के लिए भारी समय, धन और मानसिक कष्ट का कारण बनता था। अब मस्तिष्क, रीढ़, नसों, जोड़ों, कैंसर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की उच्च स्तरीय जांच स्थानीय स्तर पर ही सुलभ होगी, जिससे समय पर जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित होने के साथ-साथ अनेक बहुमूल्य जीवनों को बचाया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा हमारी सोच केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हम भविष्य की उभरती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक अत्यंत सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा चंपावत विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य अवसंरचना को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। जिला चिकित्सालय चंपावत में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड वाले आधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला चिकित्सालय में ही लगभग 11.71 करोड़ रुपये की लागत से लोअर ग्राउंड फ्लोर में पार्किंग, प्रथम एवं द्वितीय तल पर अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक विंग तथा आधुनिक ऑपरेशन थिएटर का निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है, जिसके पूर्ण होने के बाद जनपद की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक मजबूत व आधुनिक बनेंगी।अमोड़ी में 2.18 करोड़ रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के निर्माण कार्य से स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्राप्त हो रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इंटीग्रेटेड नर्सिंग संस्थान में 470.05 लाख रुपये की लागत से 129 बेड वाले विशाल व आधुनिक छात्रावास का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, जो प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को एक नई मजबूती प्रदान करेगा। जनपद चंपावत में एक नए पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना की आवश्यक कार्यवाही भी तेजी से बढ़ाई जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे और राज्य को दक्ष पैरामेडिकल मानव संसाधन प्राप्त होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव, कभी भी किसी भी परिवार के उपचार में बाधा नहीं बनेगी। आज आयुष्मान भारत योजना और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के माध्यम से प्रदेश के लाखों परिवारों को पूरी तरह से निःशुल्क और कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। चंपावत में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में दिख रहा यह युगांतकारी परिवर्तन हमारी उस अंत्योदय सोच का परिणाम है जिसके केंद्र में आम नागरिक का जीवन, उसका स्वास्थ्य और हमारी सरकार पर उसका अटूट विश्वास है।

    मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर एक ऐसे सशक्त उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लें, जहां हर नागरिक को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वस्थ जीवन का अधिकार सहजता से उपलब्ध हो, क्योंकि जब हमारा नागरिक स्वस्थ होगा, तभी हमारा प्रदेश समृद्ध होगा और विकसित उत्तराखंड का हमारा साझा संकल्प साकार होगा।

    इस अवसर पर अध्यक्ष जिला पंचायत आनंद सिंह अधिकारी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रेमा पांडे, ब्लॉक प्रमुख चंपावत श्रीमती अंचला बोहरा, भाजपा जिला अध्यक्ष गोविंद सिंह सामंत, विधायक प्रतिनिधि चंपावत प्रकाश तिवारी, टनकपुर दीपक रजवार, प्रदेश मंत्री भाजपा अध्यक्ष निर्मल महारा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

    कोरोनेशन अस्पताल की भी है मांग

    दून के कोरोनेशन अस्पताल में भी लंबे समय से एमआरआई मशीन की मांग की जा रही है। अकेले दून अस्पताल ही मरीजों का भार उठा रहा है। और मरीजों को एमआरआई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
    कोरोनेशन अस्पताल में एमआरआई मशीन के लिए पर्याप्त जगह भी निर्मित है। ऐसे में अगर इस अस्पताल में भी एमआरआई मशीन लग जाय तो दून अस्पताल पर पड़ रहे मरीजों के भारी भरकम बोझ से निजात भी मिलेगी।

  • उत्तराखण्ड में पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, बच्चों को पिलाई गई जीवनरक्षक पोलियो की खुराक

    उत्तराखण्ड में पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, बच्चों को पिलाई गई जीवनरक्षक पोलियो की खुराक

    दो बूंद जिंदगी की- हर बच्चे की सुरक्षा का संकल्प

    गांधी शताब्दी चिकित्सालय, देहरादून से राष्ट्रीय प्रतिरक्षण दिवस (एनआईडी)-2026 का राज्य स्तरीय शुभारम्भ

    मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड डॉ. संदीप तिवारी (आईएएस) ने किया राज्यव्यापी पल्स पोलियो अभियान का शुभारम्भ

    देहरादून। गांधी शताब्दी चिकित्सालय में ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) की खुराक पिलाई गयी।
    इस अभियान का शुभारम्भ मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड डॉ. संदीप तिवारी (आईएएस) ने पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) की खुराक पिलाकर किया।

    इस अवसर पर मिशन निदेशक ने कहा कि भारत पिछले 14 वर्षों से अधिक समय से पोलियो-मुक्त है, लेकिन पोलियो वायरस के आयात की आशंका को देखते हुए निरंतर सतर्कता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने पाँच वर्ष से कम आयु के प्रत्येक बच्चे को, पूर्व में पोलियो की कितनी भी खुराक मिली हो, जीवनरक्षक दो बूंद अवश्य पिलाएँ।

    निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड डॉ. शिखा जंगपांगी ने अभियान की सफलता के लिए जनसहभागिता, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी निगरानी पर बल दिया। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों तथा विकास सहयोगी संस्थाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही प्रत्येक पात्र बच्चे तक टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    राज्यव्यापी अभियान उत्तराखण्ड के सभी 13 जनपदों में संचालित किया जा रहा है। बूथ गतिविधियों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएँगी। अभियान के दौरान उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, प्रवासी आबादी, शहरी मलिन बस्तियों, निर्माण स्थलों, सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों तथा घुमंतू समुदायों पर विशेष फोकस रहेगा, ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।

    स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, समुदाय के प्रतिनिधियों एवं आमजन से अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है, ताकि उत्तराखण्ड की पोलियो-मुक्त पहचान को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
    कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देहरादून डॉ. मनोज शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, कोरोनेशन चिकित्सालय डॉ. मनु जैन, राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी (SEPIO) डॉ. कुलदीप सिंह मार्तोलिया सहित स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, विकास सहयोगी संस्थाओं एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों को रखना होगा डिजिटल रिकॉर्ड

    आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों को रखना होगा डिजिटल रिकॉर्ड

    31 अगस्त तक एबीडीएम आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू करनी होगी

    आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड की स्टेट मिशन डायरेक्टर रीना जोशी ने जारी किए आदेश

    एक सितंबर से केवल नियमों का पालन करने वाले अस्पतालों को ही मिलेगा आयुष्मान योजना का प्रोत्साहन

    देहरादून। उत्तराखंड में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि 31 अगस्त 2026 तक सूचीबद्ध अस्पतालों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) आधारित हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) लागू कराया जाए और मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए।

    आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड की स्टेट मिशन डायरेक्टर रीना जोशी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि एक सितंबर 2026 से केवल उन्हीं अनुबंधित अस्पतालों को पीएम-जेएवाई और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा, जिन्होंने निर्धारित समय सीमा तक सभी आवश्यक मानकों का पालन कर लिया होगा। समय सीमा के भीतर अनुपालन नहीं करने वाले अस्पताल प्रोत्साहन राशि के पात्र नहीं होंगे। निर्देशों के अनुसार, सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से एबीडीएम-सक्षम एचएमआईएस और ‘स्कैन एंड शेयर’ सुविधा लागू करनी होगी। इसके साथ ही अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों और फार्मासिस्टों का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) आईडी तथा सभी चिकित्सा संस्थानों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) आईडी पंजीकरण भी सुनिश्चित करना होगा। मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को एबीडीएम इकोसिस्टम से जोड़ने की प्रक्रिया भी 31 अगस्त तक शुरू करनी होगी।सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। इससे विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित डिजिटल माध्यम से उपलब्ध रहेंगे। जरूरत पड़ने पर किसी भी अधिकृत स्वास्थ्य संस्थान में मरीज की उपचार संबंधी जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकेगी, जिससे इलाज की निरंतरता भी बनी रहेगी।सभी जिलों को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी सहायता और समन्वय के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड कार्यालय से संपर्क करने को भी कहा है।

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जनसमूह संग सीएम ने किया योगाभ्यास

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जनसमूह संग सीएम ने किया योगाभ्यास

    मुख्यमंत्री ने बनबसा में किया सामूहिक योगाभ्यास, योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का किया आह्वान

    उत्तराखंड को योग एवं वेलनेस की वैश्विक राजधानी बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

    युवाओं से नशामुक्त, अनुशासित एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान

    देहरादून। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बनबसा में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित योग साधकों, सशस्त्र सीमा बल के जवानों, छात्र-छात्राओं, युवाओं, मातृशक्ति एवं वरिष्ठ नागरिकों के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ शारदा की पावन भूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों के साथ योगाभ्यास करने का अवसर प्राप्त होना उनके लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उन्होंने योग दिवस के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी योग प्रशिक्षकों, साधकों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि योग मन को स्थिरता प्रदान करता है तथा व्यक्ति को सकारात्मक, संतुलित एवं सफल जीवन की ओर अग्रसर करता है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनाव, अवसाद और अस्वस्थ जीवनशैली से उत्पन्न चुनौतियों के बीच योग एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार प्रणाली के रूप में कार्य कर रहा है। योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मानसिक एकाग्रता मजबूत होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योग ने विश्वभर में मानवता को जोड़ने का कार्य किया है तथा भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” के संदेश को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक पहचान मिली और आज विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग से जुड़ चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड योग, अध्यात्म और साधना की प्राचीन परंपराओं की भूमि है। राज्य सरकार उत्तराखंड को योग एवं वेलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा देश की पहली योग नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत योग एवं ध्यान केंद्रों की स्थापना के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी तथा योग, ध्यान एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध एवं अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए 10 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश में पांच नए योग हब विकसित किए जा रहे हैं तथा सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों में योग सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बनबसा में राज्य स्तरीय योग दिवस कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य शारदा नदी तट पर भी योग एवं आध्यात्मिक साधना को व्यापक रूप से बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शारदा कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से क्षेत्र को आध्यात्मिक एवं पर्यटन विकास की नई पहचान देने के लिए कार्य कर रही है। लगभग 3300 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही इस परियोजना के अंतर्गत टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट सहित विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। प्रथम चरण में 179 करोड़ रुपये की लागत से शारदा घाट के पुनर्विकास कार्यों का शुभारंभ किया जा चुका है।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं तथा नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी उत्तराखंड को योग का वैश्विक केंद्र बनाने के संकल्प को साकार करने में सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे।

    योग दिवस कार्यक्रम के अवसर पर कैबिनेट मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री  भरत चौधरी, अध्यक्ष जिला पंचायत  आनंद सिंह अधिकारी, सचिव मुख्यमंत्री एवं आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत,सचिव आयुष रंजना राजगुरु,आईजी कुमाऊं  निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी चम्पावत  मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, जिलाधिकारी उधमसिंह नगर  नितिन सिंह भदौरिया, पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर  अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी मौजूद थे।

  • बिना जरूरत ICU में भर्ती, अवैध वसूली का खेल; कहीं डॉक्टर गायब

    बिना जरूरत ICU में भर्ती, अवैध वसूली का खेल; कहीं डॉक्टर गायब

    आयुष्मान योजना

    एसएचए की छापेमारी में योजना में संबद्ध अस्परतालों की बदहाल व्यवस्थाएं उजागर

    एक डायलिसिस यूनिट समेत तीन अस्पतालों के निलंबन और दो अस्पतालों पर अर्थदंड की संस्तुति

    देहरादून।  आयुष्मान योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) की छापेमारी में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

    राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी के निर्देश पर निदेशक क्लेम डा. सरोज नैथानी के नेतृत्व में टीम ने पावरलाइफ, प्रेमसुख, प्रकाशदीप, वेलमेड और सुनंदा मेडिकल सेंटर का औचक निरीक्षण किया। मरीजों से अवैध वसूली, बिना आवश्यकता आइसीयू में भर्ती, डाक्टरों की गैरमौजूदगी, खराब डायलिसिस सेवाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी खामियां मिलने पर प्राधिकरण ने प्रकाशदीप व पावरलाइफ अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट की संबद्धता निलंबित करने की संस्तुति की है। साथ ही प्रेमसुख व सुनंदाा अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाने की भी संस्तुति की है। सभी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

    पावरलाइफ अस्पताल में मरीज अनावश्यक आइसीयू में भर्ती

    पावरलाइफ अस्पताल में टीम को सामान्य वार्ड नहीं मिला। यहां छह बेड का एचडीयू और आठ बेड का आइसीयू संचालित होता मिला। टीम ने पाया कि घबराहट और उल्टी की शिकायत वाले एक मरीज को अनावश्यक रूप से आइसीयू में भर्ती रखा गया था। अस्पताल में टोल फ्री नंबर और सूचना-शिक्षा एवं संचार (आइईसी) सामग्री भी प्रदर्शित नहीं थी। आइसीयू की चार्टिंग अपडेट नहीं की गई थी, जबकि बायोमेडिकल वेस्ट की लाग बुक पिछले तीन माह से नहीं भरी गई थी।

    प्रेमसुख अस्पताल में मिलीं कई खामियां

    प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान के लाभार्थी से 48 हजार रुपये और अन्य मदों में छह हजार रुपये लेने की शिकायत मिली। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्री-आथराइजेशन में देरी, रैंप का अभाव और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पाई गई। अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना से संबंधित सूचना बोर्ड, टोल फ्री नंबर और जनजागरूकता सामग्री भी नहीं लगी थी। आपरेशन थिएटर की प्रभारी नर्स की जिम्मेदारी एक ओटी तकनीशियन निभाता मिला। इसके अलावा स्टाफ को मरीजों की भर्ती प्रक्रिया की भी पर्याप्त जानकारी नहीं थी।

    प्रकाशदीप अस्पताल में डाक्टर ही गायब

    प्रकाशदीप अस्पताल की स्थिति सबसे चिंताजनक पाई गई। यहां मरीजों से 85 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायत मिली। अस्पताल का आइसीयू बेहद खराब स्थिति में मिला। दो गंभीर मरीजों को तत्काल इंदिरेश अस्पताल रेफर किया गया। निरीक्षण के दौरान एक भी उपचाररत चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। मरीजों ने बताया कि पिछले 10 दिनों से नियमित रूप से डाक्टर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और उपचार केवल नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में केवल एक एंबुलेंस उपलब्ध थी।

    सुनंदा मेडिकल सेंटर में डायलिसिस यूनिट में मिली गंभीर खामियां

    सुनंदा मेडिकल सेंटर में डायलिसिस यूनिट की स्थिति बेहद खराब मिली। अस्पताल में वेंटिलेशन, रैंप और अग्नि निकास मार्ग नहीं मिला। डायलिसिस करा रहे मरीजों के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं थे। टोल फ्री नंबर और जनजागरूकता सामग्री का अभाव था। डायलिसिस के लिए उपयोग होने वाला आरओ सिस्टम भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। तीमारदारों के लिए बैठने और विश्राम की व्यवस्था भी नहीं थी।

    वेलमेड अस्पताल में भी कमियां मिलीं

    वेलमेड अस्पताल में रैंप और जनजागरूकता सामग्री नहीं मिली। 140 बेड वाले अस्पताल में 100 मरीज भर्ती होने के बावजूद केवल छह आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और सात राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के मरीज मिले। जांच के दौरान अस्पताल में सिर्फ एक आरओ प्लांट संचालित मिला। बायोमेडिकल वेस्ट की लाग बुक का रखरखाव भी संतोषजनक नहीं पाया गया। आपरेशन थिएटर के कल्चर परीक्षण की इन-हाउस रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।

  • आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, तीन अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

    आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, तीन अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

    एक पर 86 हजार का जुर्माना

    कैशलेस इलाज से इनकार

    अवैध वसूली और गुणवत्ता मानकों में खामियां मिलने पर एसएचए की सख्त कार्रवाई

    एसआरएमएस, ओजस्वी और अरिहंत अस्पतालों पर गिरी गाज

    बलूनी अस्पताल को 15 दिन में कमियां दूर करने का अल्टीमेटम

    देहरादून। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई), अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना (एएयूवाई) और राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लाभार्थियों को कैशलेस इलाज से वंचित करने, अवैध वसूली, संक्रमण नियंत्रण और गुणवत्ता मानकों में गंभीर खामियां पाए जाने पर बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज तथा देहरादून के ओजस्वी और अरिहंत अस्पताल की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। वहीं, बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना लगाते हुए 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

    एसआरएमएस ने रेफरल मरीजों को लौटाया, कैशलेस इलाज से भी किया इनकार

    राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ जिलों से सरकारी अस्पतालों के रेफरल लेकर पहुंचे मरीजों को भर्ती करने और कैशलेस इलाज देने से इनकार किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में पाया गया कि कई मामलों में वैध रेफरल पत्रों को स्वीकार नहीं किया गया और मरीजों को अन्य केंद्रों से नया रेफरल लाने के लिए कहा गया।

    चंपावत जिले के एक मरीज को उप जिला चिकित्सालय टनकपुर से रेफर किए जाने के बावजूद भर्ती नहीं किया गया। नोटिस में मोरपाल कश्यप, लक्ष्मी देवी, सुरेश राम और सूरज गुप्ता सहित कई लाभार्थियों के मामलों का उल्लेख किया गया है। नैनीताल निवासी महेंद्र सिंह ने शिकायत की है कि उनके पिता से पीएम-जेएवाई के तहत भर्ती होने के बावजूद इलाज के लिए करीब 1.44 लाख रुपये वसूले गए, जो अब तक वापस नहीं किए गए हैं। अस्पताल को सात दिनों के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में अस्पताल नए लाभार्थियों को भर्ती नहीं कर सकेगा, हालांकि पहले से भर्ती मरीजों का उपचार जारी रहेगा।

    ओजस्वी अस्पताल ने लाभार्थी से लिए 12 हजार रुपये, 60 हजार का जुर्माना

    देहरादून स्थित ओजस्वी अस्पताल की पीएम-जेएवाई, एएयूवाई और एसजीएचएस के तहत संबद्धता भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल ने एक लाभार्थी से 12 हजार रुपये वसूले थे, जो कैशलेस उपचार के नियमों का उल्लंघन है। हालांकि बाद में यह राशि वापस कर दी गई, लेकिन यह कार्रवाई राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की आपत्ति के बाद की गई।

    निरीक्षण के दौरान रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) की उपलब्धता भी अपर्याप्त पाई गई। एचईएम पोर्टल पर दर्ज चिकित्सक का संपर्क नंबर सक्रिय नहीं मिला और निरीक्षण के समय संबंधित चिकित्सक मौजूद नहीं थे। अस्पताल पर वसूली गई राशि का पांच गुना यानी 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर डी-एम्पैनलमेंट सहित अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।

    डायलिसिस और संक्रमण नियंत्रण में खामियां, अरिहंत अस्पताल निलंबित

    देहरादून स्थित अरिहंत अस्पताल की संबद्धता डायलिसिस यूनिट, संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियों के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। निरीक्षण के दौरान डायलिसिस बेड के बीच पर्याप्त दूरी नहीं पाई गई। डायलिसिस प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए कोई नामित मेडिकल ऑफिसर मौजूद नहीं था और रिकॉर्ड पर चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के हस्ताक्षर भी नहीं मिले।
    इसके अलावा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की उपलब्धता और उपयोग भी संतोषजनक नहीं पाया गया। डायलिसिस मशीनों के संक्रमणमुक्त करने की प्रक्रिया, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से अनिवार्य सत्यापन में भी कमियां मिलीं। लाभार्थी सहायता केंद्र और सूचना प्रदर्शन व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं थी। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सुधारात्मक रिपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण रिकॉर्ड और अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में नए लाभार्थियों की भर्ती नहीं की जा सकेगी, जबकि पहले से भर्ती मरीजों का उपचार जारी रहेगा।

    बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना

    बलूनी अस्पताल पर एक आयुष्मान लाभार्थी से अवैध रूप से धनराशि वसूलने के मामले में 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में पाया गया कि एक पीएम-जेएवाई लाभार्थी से दवाइयों और डायग्नोस्टिक जांच के नाम पर 17,250 रुपये लिए गए। अस्पताल ने राशि लौटाने का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में लाभार्थी की रसीद, बैंक लेनदेन या भुगतान वापसी से जुड़े कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
    निरीक्षण के दौरान अस्पताल में रैंप, आईसीयू की साफ-सफाई, हाउसकीपिंग व्यवस्था और तीमारदारों के लिए पर्याप्त सुविधाओं में भी कमियां पाई गईं। इसके अलावा आईसीयू में ऑक्सीजन, एयर और सक्शन की अनिवार्य पाइपलाइन व्यवस्था को भी मानकों के अनुरूप दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का अल्टीमेटम दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उसकी संबद्धता भी निलंबित की जा सकती है।

  • सीएमओ नियुक्ति पर नाराजगी के बाद बदलने पड़े आदेश

    सीएमओ नियुक्ति पर नाराजगी के बाद बदलने पड़े आदेश

    रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में नई तैनाती

    वरिष्ठता विवाद के बाद स्वास्थ्य विभाग ने किया फेरबदल

    देहरादून। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) की नियुक्तियों को लेकर उठे विवाद के बाद विभाग को महज 72 घंटे के भीतर अपने फैसले में संशोधन करना पड़ा।
    रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा समेत सात जिलों में हाल ही में की गई सीएमओ तैनातियों में बदलाव कर नए आदेश जारी किए गए हैं।
    स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी प्रारंभिक आदेशों के बाद वरिष्ठता की अनदेखी किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे थे।
    विभाग के भीतर और चिकित्सक वर्ग में बढ़ती नाराजगी के बीच शासन ने तैनाती आदेशों की समीक्षा की और संशोधित आदेश जारी कर दिए।
    रुद्रप्रयाग में सीएमओ पद पर की गई नियुक्ति को बदलते हुए अब डॉ. राजीव पाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले डॉ. अमित शुक्ला के नाम पर सहमति बनी थी, लेकिन वरिष्ठता को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं।
    वहीं, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में भी अधिकारियों की तैनाती अदल-बदल कर दी गई है।
    नए आदेशों के अनुसार डॉ. योगेंद्र पुरोहित पिथौरागढ़ और डॉ. हरीश पाल अल्मोड़ा के सीएमओ होंगे। पहले जारी आदेश में दोनों अधिकारियों की तैनाती इसके उलट की गई थी। पिथौरागढ़ की सीएमओ द्रौपदी गर्ब्याल होंगी।
    लगातार बदलते आदेशों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि यदि नियुक्तियों से पहले वरिष्ठता और प्रशासनिक जरूरतों का समुचित परीक्षण किया जाता तो इतनी जल्द संशोधन की नौबत नहीं आती। इस मुद्दे पर नए स्वास्थ्य यंत्री सुबोध उनियाल ने सख्त रुख अपनाया।

  • स्वास्थ्य विभाग के सभी अटैचमेंट आदेश निरस्त, सम्बद्धीकरण व्यवस्था खत्म

    स्वास्थ्य विभाग के सभी अटैचमेंट आदेश निरस्त, सम्बद्धीकरण व्यवस्था खत्म

    देखें आदेश, मूल तैनाती स्थल पर लौटेंगे

    अधिकारी-कर्मचारी, वहीं से मिलेगा वेतन

    देहरादून। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के सम्बद्धीकरण (अटैचमेंट) को समाप्त करते हुए 31 मार्च 2026 तक जारी सभी सम्बद्धीकरण आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निर्देशों के अनुपालन में जारी आदेश के अनुसार विभाग के अंतर्गत विभिन्न मंडलों और जिलों में सम्बद्ध अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल तैनाती स्थल के लिए कार्यमुक्त किया जाएगा। इस संबंध में सभी मंडल एवं जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    आदेश में कहा गया है कि सभी सक्षम प्राधिकारी एवं आहरण-वितरण अधिकारी निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें। सम्बद्ध किए गए कार्मिकों का जून 2026 तथा आगामी महीनों का वेतन उनके मूल तैनाती स्थल पर पुनः योगदान देने के बाद ही आहरित किया जाएगा।
    स्वास्थ्य विभाग की सचिव सुनीता टम्टा द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इससे विभाग में लंबे समय से विभिन्न कार्यालयों और संस्थानों में सम्बद्ध चल रहे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापन स्थल पर लौटना होगा।

    :: कार्यालय आदेश :-

    मा० मंत्री जी, चिकित्सा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुपालन में 31 मार्च, 2026 तक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत तैनात अधिकारियों / कर्मचारियों के किये गये समस्त सम्बद्धीकरण आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किये जाते हैं। समस्त मण्डल/जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वह उक्तानुसार अपने मण्डल / जिले में सम्बद्ध अधिकारियों / कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल तैनाती स्थान हेतु कार्यमुक्त करना सुनिश्चित करें।

    समस्त सक्षम प्राधिकारी / आहरण वितरण अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि उक्त आदेशों का अक्षररशः कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करते हुये सम्बद्ध किये गये कार्मिकों का माह जून, 2026 तथा उसके आगामी माहों का वेतन उनके मूल तैनाती स्थान पर वापस योगदान करने के उपरान्त ही आहरित किया जायेगा।

    उक्त आदेश तत्काल प्रभावी होगा।