Category: स्वास्थ्य

  • नियमों के उल्लंघन पर प्रज्ञा अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन सील

    नियमों के उल्लंघन पर प्रज्ञा अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन सील

    झबरेड़ा में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत कार्रवाई

    निरीक्षण में मिलीं गंभीर अनियमितताएं

    शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त छापेमारी

    हरिद्वार। गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (पीसीपीएनडीटी) के तहत स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए झबरेड़ा स्थित प्रज्ञा अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर दी।
    निरीक्षण के दौरान अस्पताल में अधिनियम के गंभीर उल्लंघन पाए गए।

    राज्य एवं जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन दल ने संयुक्त रूप से दो केंद्रों का निरीक्षण किया। झबरेड़ा स्थित प्रज्ञा अस्पताल में अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया का संचालन कर रहे चिकित्सक की कार्यप्रणाली में गंभीर कमियां पाई गईं।

    इसके अलावा फार्म-एफ के अभिलेखों में भी अनियमितताएं सामने आईं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए निरीक्षण दल ने अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
    विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई पिछले कई दिनों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई। वहीं, मंगलौर स्थित संतोष अल्ट्रासाउंड सेंटर का भी निरीक्षण किया गया, जहां सभी अभिलेख एवं दस्तावेज नियमानुसार पाए गए। इसलिए केंद्र के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई।

    संयुक्त निरीक्षण दल में संयुक्त निदेशक एवं राज्य नोडल अधिकारी (पीसीपीएनडीटी) डॉ. जे.एस. बिष्ट, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, अपर शोध अधिकारी राकेश बहुगुणा, विधि सलाहकार अवधेश कुडियाल, अधिशासी सहायक दीपक पवार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार डॉ. अनिल वर्मा तथा जिला समन्वयक रवि संदल सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।

  • सात जिलों को मिले नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी

    सात जिलों को मिले नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी

    स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने जारी किए आदेश

    भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखण्ड का कार्यालय हर्रावाला स्थानांतरित

    देहरादून। राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य सचिव श्री विनय शंकर पांडेय द्वारा जनहित में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) की तैनाती की गई है।

    प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तथा आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ये नियुक्तियां की गई हैं।

    अल्मोड़ा में डॉ. योगेश पुरोहित, नैनीताल में डॉ. रशिम पंत, पिथौरागढ़ में डॉ. हरीश चन्द्र पंत, पौड़ी में डॉ. मेघना असवाल, रुद्रप्रयाग में डॉ. अमित कुमार शुक्ला, टिहरी में डॉ. राम प्रकाश और उत्तरकाशी में डॉ. श्याम विजय की तैनाती की गई है।

    सचिव स्वास्थ्य ने विश्वास व्यक्त किया है कि संबंधित जनपदों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा।

    भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखण्ड का कार्यालय हर्रावाला स्थानांतरित

    1 जून से नए पते पर होंगे सभी कार्य व पत्राचार

    देहरादून। भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखण्ड का कार्यालय मोथरोवाला रोड, अजबपुरकलां स्थित वर्तमान पते से स्थानांतरित होकर उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर, रेलवे रोड, हर्रावाला, देहरादून में संचालित किया जाएगा।
    रजिस्ट्रार नर्वदा गुसांई द्वारा जारी सूचना के अनुसार, 1 जून 2026 से परिषद के कार्यालय से संबंधित समस्त प्रशासनिक कार्य, अभिलेखीय कार्य तथा पत्राचार नए कार्यालय पते से ही संपादित किए जाएंगे।
    परिषद ने सभी संबंधित चिकित्सकों, संस्थानों एवं आमजन से अनुरोध किया है कि 1 जून 2026 के बाद कार्यालय संबंधी सभी पत्राचार एवं कार्यवाही के लिए उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर, रेलवे रोड, हर्रावाला, देहरादून स्थित नए कार्यालय पते का ही उपयोग करें।

  • सीएम ने अत्याधुनिक एम्बुलेंस सेवाओं का किया शुभारंभ

    सीएम ने अत्याधुनिक एम्बुलेंस सेवाओं का किया शुभारंभ

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को एचडीएफसी बैंक की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के अंतर्गत जनहित के लिए प्रदान की गई 4 अत्याधुनिक एम्बुलेंस का फ्लैग ऑफ किया।
    यह पहल राज्य के दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। निजी संस्थाओं द्वारा जनहित में किया जा रहा सहयोग सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। एचडीएफसी बैंक द्वारा CSR के माध्यम से उपलब्ध कराई गईं ये एम्बुलेंस जरूरतमंद लोगों तक त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। राज्य सरकार जनभागीदारी एवं संस्थागत सहयोग के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने एचडीएफसी बैंक की इस जनकल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों, आपदा की स्थितियों तथा दूरस्थ क्षेत्रों में ऐसी सेवाएं अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्य पर्वतीय जनपदों और आगामी हरिद्वार कुंभ के लिए भी एचडीएफसी बैंक से CSR के माध्यम से और एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है।

    बैंक अधिकारियों ने अवगत कराया कि इन एम्बुलेंस में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं एवं आवश्यक आपातकालीन उपकरण उपलब्ध हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही आगामी तीन वर्षों तक प्रत्येक एम्बुलेंस में चिकित्सक, नर्स, अटेंडेंट एवं चालक की व्यवस्था भी बैंक द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
    प्रारंभिक चरण में ये एम्बुलेंस चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़ एवं रुद्रप्रयाग जनपदों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगी तथा भविष्य में राज्य के प्रमुख धार्मिक आयोजनों एवं आपदा प्रबंधन कार्यों में भी इनका उपयोग किया जाएगा।

    इस अवसर पर विधायक राजकुमार पोरी, विनोद कंडारी,अपर सचिव मनमोहन मैनाली, एचडीएफसी बैंक के से मुस्कान सिंह (ब्रांच बैंकिंग हेड- नॉर्थ 3), संजीव कौशिक (रीजनल हेड- नॉर्थ 3), जोनल हेड उत्तराखंड बकुल सिक्का, स्टेट हेड उत्तराखंड गौरव जैन एवं आयुष सिंघल मौजूद थे।

  • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में बनेगा आधुनिक रेन बसेरा

    श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में बनेगा आधुनिक रेन बसेरा

    जीएनटीआई मैदान का होगा कायाकल्प

    केन्द्रीय रेल मंत्री से मिले डाॅ. धन सिंह व बलूनी

    दिल्ली/देहरादून। कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत व सांसद अनिल बलूनी ने बुधवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से शिष्टचार मुलाकात की।

    मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने केन्द्रीय रेल मंत्री के साथ ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने श्रीनगर में ऐतिहासिक जीएनटीआई मैदान के पुनर्निर्माण, श्रीनगर मेडिकल काॅलेज में रेन बसेरा बनाने तथा रेल परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्या को रखा। साथ ही डाॅ. रावत ने केन्द्रीय मंत्री को चार धाम यात्रा पर आने का आमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।

    कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण कार्यों एवं परियोजना का काम शीघ्र पूरा करने को लेकर विस्तृत चर्चा की।

    मुलाकात के दौरान डाॅ. रावत ने केन्द्रीय रेल मंत्री के समक्ष कई अहम मुद्दों को रखा। डाॅ. रावत ने बताया कि रेल परियोजना की निर्माणाधीन टनल से श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग के ऊपर की ओर स्थित टीचर्स काॅलोनी में कई लोगों के निजी व व्यावसायिक भवन क्षतिग्रस्त हुई है, जिससे प्रभावित परिवार बेघर हो गये हैं साथ ही आर्थिक कठिनाईयों से भी जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिलाधिकारी पौड़ी के स्तर पर गठित समिति की सर्वे व मूल्यांकन रिपोर्ट के तहत प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के लिये समय-समय पर रेल विकास निगम को कहा गया लेकिन अभी तक उन्हें मुआवजा की राशि नहीं दी गई।

    इसके अतिरिक्त काण्डई गांव के 9 परिवारों के पूर्णतः क्षतिग्रस्त भवनों का विषय भी केन्द्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखा गया। डाॅ. रावत ने सभी प्रभावित परिवारों को शीघ्र उचित मुआवजा राशि देने का अग्रह केन्द्रीय मंत्री से किया। जिस पर केन्द्रीय मंत्री ने शीघ्र प्रभावितों को मुआवजा देने की बात कही।

    मुलाकात के दौरान डाॅ. रावत ने रेलवे परियोजना से क्षतिग्रस्त जी.एन.टी.आई मैदान के सौन्दर्यीकरण एवं राजकीय मेडिकल काॅलेज श्रीनगर में तिमारदारों की सुविधा हेतु रेन बसेरा के निर्माण रेल विकास निगम की ओर से कराने का प्रस्ताव केन्द्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखा। जिस पर केन्द्रीय मंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया।

  • अति-दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाएं सुरक्षित मातृत्व को नई गति

    अति-दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाएं सुरक्षित मातृत्व को नई गति

    हर गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी- कुर्वे

    होम डिलीवरी पर पूर्ण रोक के निर्देश

    देहरादून। राज्य में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को और सख्त करते हुए गुरुवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देहरादून और चम्पावत जनपदों की स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक की विशेषता यह रही कि फील्ड स्तर की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए दोनों जनपदों की एएनएम ने सीधे जुड़कर जमीनी चुनौतियों और प्रगति से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक के दौरान सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि अब स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल प्रक्रिया नहीं बल्कि ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि अप्रैल माह से राज्य में किसी भी स्तर पर होम डिलीवरी स्वीकार्य नहीं होगी और प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सभी स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है।

    EDD आधारित माइक्रो ट्रैकिंग पर जोर

    समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की अपेक्षित प्रसव तिथि (EDD) के आधार पर माइक्रो ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के बीच दैनिक समन्वय के माध्यम से अंतिम मील तक फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी गर्भवती महिला की देखभाल में कोई कमी न रह जाए।

    इसके साथ ही चिन्हित होम डिलीवरी पॉकेट्स में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयं फील्ड विजिट कर समाधान आधारित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

    अतिदुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग

    बैठक में पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित परिवहन की चुनौती पर विशेष चर्चा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि दुर्गम क्षेत्रों में समय से पूर्व योजना बनाकर गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जाए।
    उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सड़क संपर्क या समय पर परिवहन संभव नहीं है, वहां हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में गर्भवती महिला को तत्काल स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाया जा सके।

    ANC जांच और हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान पर फोकस

    बैठक के दौरान गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच (ANC) को मातृ मृत्यु दर में कमी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का प्रथम तिमाही में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और न्यूनतम चार ANC जांच अनिवार्य रूप से कराई जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक लैब परीक्षण समय पर किए जाएं और उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) की समय पर पहचान की जाए। कई क्षेत्रों में HRP की कम पहचान पर चिंता व्यक्त करते हुए सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने इसमें तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

    एनीमिया नियंत्रण और सामुदायिक जागरूकता

    बैठक में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित ट्रैकिंग और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से गंभीर एनीमिया के मामलों में समयबद्ध उपचार और चिकित्सकीय हस्तक्षेप को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के लिए आशा और एएनएम को “संवाद से समाधान” की रणनीति अपनाने के लिए कहा गया, ताकि परिवारों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा सके।

    टीबी उन्मूलन अभियान को भी गति

    बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि 100-दिवसीय टीबी अभियान के अंतर्गत हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता के साथ कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य स्वास्थ्य शिविरों में अधिकतम टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सभी चिकित्सालयों की कुल ओपीडी का न्यूनतम 10 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग के लिए रेफर करने के निर्देश भी दिए गए।

    PCPNDT अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई

    बैठक में PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद में नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और सरकारी तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों का समयबद्ध निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई करते हुए डिकॉय ऑपरेशन और जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।

    सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- सचिन कुर्वे

    सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। विशेष रूप से दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं, समयबद्ध परिवहन और मजबूत फील्ड मॉनिटरिंग के माध्यम से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिए कि परिणाम आधारित कार्ययोजना बनाकर उसे तत्काल प्रभाव से लागू करें और किसी भी स्तर पर लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    बैठक में निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सहायक निदेशक डॉ. अमलेश, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, सहायक निदेशक डॉ. अजय नागरकर, संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिवेश चौहान एवं डॉ. मनोज शर्मा तथा वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. नितिन अरोड़ा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

  • डॉ. महेश कुड़ियाल आईएमए के निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित

    डॉ. महेश कुड़ियाल आईएमए के निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित

    देहरादून। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA)
    के सोमवार को हुए चुनाव में वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ महेश कुड़ियाल को सर्वसम्मति से निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। वहीं अन्य पदों पर मतदान के माध्यम से चयन किया गया, जिनमें प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ प्रवीन जिंदल, वाइस प्रेसिडेंट डॉ राजीव दीक्षित, मानद सचिव  डॉ अंकित पाराशर,कोषाध्यक्ष डॉ राहुल अवस्थी, संयुक्त सचिव डॉ सिद्धांत खन्ना आदि शामिल हैं।

    इस चुनाव में संस्था की वर्किंग कमेटी के पदाधिकारियों का चयन किया गया, साथ ही 28 सामान्य सदस्यों का भी चुनाव संपन्न हुआ।
    प्रतिष्ठित संस्था IMA के इस चुनाव को चुनाव अधिकारी डॉ. किरण कुमार कालरा की निगरानी में शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से सम्पन्न कराया गया। देहरादून IMA में लगभग 600 सदस्य पंजीकृत हैं, जिनकी सक्रिय भागीदारी इस चुनाव में देखने को मिली।
    नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ महेश कुड़ियाल ने अपने निर्विरोध चयन पर IMA के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए गर्व के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती भी है, और वे पूरी निष्ठा से सभी सदस्यों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

    IMA देशभर के चिकित्सकों का एक प्रमुख संगठन है, जो डॉक्टरों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सरकार का सहयोग करता है।
    यह संस्था स्वास्थ्य नीतियों पर सुझाव देती है, जन-जागरूकता अभियान चलाती है। गरीब व जरूरतमंद मरीजों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित करती है और आपदा या महामारी के समय सरकार के साथ मिलकर अहम भूमिका निभाती है।

  • दून अस्पताल में पीजी सीटों को मंजूरी, स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार

    दून अस्पताल में पीजी सीटों को मंजूरी, स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार

    मिली फायर एनओसी

    देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय को फायर एनओसी प्राप्त हो गई है, जिससे अब पीजी एवं सुपर स्पेशियलिटी सीटों के लिए आवेदन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह उपलब्धि संस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि वर्तमान में मेडिकल कॉलेजों के लिए पीजी सीटों हेतु आवेदन करते समय फायर एनओसी अनिवार्य कर दी गई है। 31 मार्च को आवेदन की अंतिम तिथि है, और 28 मार्च को एनओसी प्राप्त होना संस्थान के लिए एक निर्णायक चरण साबित हुआ है।

    उत्तराखंड में पीजी सीटों की वास्तविक आवश्यकता

    उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी एक गंभीर चुनौती रही है।
    • अधिकांश मरीजों को दिल्ली, चंडीगढ़ या अन्य बड़े शहरों की ओर रेफर करना पड़ता है
    • इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि critical cases में समय की भी हानि होती है

    ऐसे में स्थानीय स्तर पर पीजी और सुपर स्पेशियलिटी सीटों का बढ़ना सीधे तौर पर
     specialist availability
     patient survival outcomes
     regional healthcare equity
    को मजबूत करेगा।

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    कार्डियोलॉजी विभाग: संभावित “benchmark center”

    कार्डियोलॉजी में DM कोर्स शुरू होने के साथ, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज का कार्डियोलॉजी विभाग राज्य में एक मानक (benchmark) केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

    इसका प्रभाव:
    • उन्नत हृदय उपचार (advanced cardiac care) की उपलब्धता
    • स्थानीय स्तर पर angioplasty, complex cardiac procedures का विस्तार
    • रेफरल निर्भरता में कमी

    यह कदम उत्तराखंड में non-communicable diseases, विशेषकर हृदय रोगों से निपटने की क्षमता को मजबूत करेगा।

    किडनी ट्रांसप्लांट की दिशा में बड़ा कदम

    यूरोलॉजी में MCh कोर्स शुरू होने के साथ, संस्थान में
    किडनी ट्रांसप्लांट सेवाओं की शुरुआत का रास्ता साफ हो सकता है

    यह उत्तराखंड के लिए game-changer साबित हो सकता है क्योंकि:
    • वर्तमान में अधिकांश मरीजों को राज्य से बाहर जाना पड़ता है
    • ट्रांसप्लांट की लागत और लॉजिस्टिक जटिलताएँ बहुत अधिक होती हैं

    स्थानीय स्तर पर यह सुविधा विकसित होने से:
    ✔ मरीजों की पहुंच बढ़ेगी
    ✔ प्रतीक्षा समय कम होगा
    ✔ सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास बढ़ेगा

    सुपर स्पेशियलिटी विस्तार: एक systemic shift

    प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि उनके नेतृत्व में:
    • कार्डियोलॉजी में DM
    • प्लास्टिक सर्जरी एवं यूरोलॉजी में MCh
    जैसे सुपर स्पेशियलिटी कोर्स पहली बार उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शुरू किए गए हैं।

    साथ ही, डर्मेटोलॉजी (स्किन) में पीजी कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया भी जारी है।

    अगला लक्ष्य: इमरजेंसी मेडिसिन

    प्राचार्य ने बताया कि अगला लक्ष्य इमरजेंसी मेडिसिन में पीजी कोर्स शुरू करना है।
    पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ:
    • सड़क दुर्घटनाएँ
    • आपदा स्थितियाँ
    • दूरस्थ क्षेत्रों में delayed access

    आम चुनौतियाँ हैं।

    इमरजेंसी मेडिसिन में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता से
    golden hour management trauma response system
    disaster preparedness
    को नई मजबूती मिलेगी।

    फायर एनओसी प्राप्त होना केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि
    उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण
    और विशेषज्ञ चिकित्सा की स्थानीय उपलब्धता
    की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    यदि इन पहलों को निरंतरता और संसाधनों का समर्थन मिलता है, तो राजकीय दून मेडिकल कॉलेज आने वाले वर्षों में राज्य का एक प्रमुख tertiary care and training hub बन सकता है।

  • फूड प्वाइजनिंग का मामला: कुट्टू के आटे से 11 बीमार, 6 की हालत नाजुक

    फूड प्वाइजनिंग का मामला: कुट्टू के आटे से 11 बीमार, 6 की हालत नाजुक

    रुद्रपुर। रुद्रपुर में कुट्टू के आटे से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने के बाद 11 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से छह लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। घटना के बाद स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, सभी प्रभावित लोगों ने कुट्टू के आटे से बने पकवान खाए थे, जिसके कुछ ही समय बाद उन्हें उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी शिकायतें होने लगीं। स्थिति बिगडऩे पर सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि छह मरीजों का इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार प्रारंभिक जांच में फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई गई है। वहीं, मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    घटना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित क्षेत्रों में छापेमारी अभियान शुरू कर दिया है। सुभाष कॉलोनी, मुख्य बाजार और रम्पुरा क्षेत्र की कई दुकानों से कुट्टू के आटे और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। कुछ दुकानों को बंद भी कराया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि खुले में कुट्टू का आटा बेचने पर पहले से प्रतिबंध है, इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

  • स्वास्थ्य विभाग को मिले 30 और विशेषज्ञ चिकित्सक

    स्वास्थ्य विभाग को मिले 30 और विशेषज्ञ चिकित्सक

    विभागीय मंत्री डाॅ. रावत ने दी तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी

    कहा, विशेषज्ञों के आने से पर्वतीय क्षेत्रों में सुदृढ़ होंगी स्वास्थ्य सेवाएं

    देहरादून। सूबे के स्वास्थ्य विभाग को 30 और विशेषज्ञ चिकित्सक मिल गये हैं। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नवीन तैनाती को स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने अनुमोदन दे दिया है। इसके साथ ही विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या में और इजाफा हुआ है। पीजी कोर्स पूर्ण करने उपरांत विभाग में सेवाएं देने से आम लोगों को इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की विशेषज्ञता को लाभ मिलेगा साथ ही दूरस्थ व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होंगी।

    प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार की मंशा प्रत्येक चिकित्सा इकाईयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती कर आम लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करना है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग को 30 और नये विशेषज्ञ चिकित्सक मिल गये हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद राज्य सेवा में लौटे इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नवीन तैनाती को सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मंजूरी दे दी है। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनके विशेषज्ञता के अनुरूप विभिन्न जनपदों में एक यूनिट के रूप में तैनाती दी गई है ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों का आपसी समन्वय बना रहे और मरीजों को आसानी से उपचार मिल सके। जिसमें बागेश्वर जनपद में एक-एक ईएनटी, आॅब्स एंड गायनी तथा एनेस्थीसियोलाॅजी की तैनाती की गई है। इसी प्रकार पौड़ी जनपद में जनरल सर्जरी, रेस्पेरेट्री मेडिसिन, एनेस्थीसियोलाॅजी, आॅर्थोपेडिक्स के एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक जबकि जनरल मेडिसिन व आॅब्स एंड गायनी के 2-2 विशेषज्ञ चिकित्सकों को तैनाती दी गई है। पिथौरागढ़ में आॅब्स एंड गायनी, पैथोलाॅजी, फाॅरेंसिक मेडिसिन, एमडी माइक्रोबायोलाॅजी के एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक भेजे गये हैं। रूद्रप्रयाग में पीडियाट्रिक्स, जनरल मेडिसिन तथा एमडी एनेस्थीसियोलाॅजी, हरिद्वार में कम्युनिटी मेडिसिन, एनेस्थीसियोलाॅजी तथा एमएस जनरल सर्जरी, उत्तरकाशी में जनरल सर्जरी, ईएनटी, एमडी एनेस्थीसियोलाॅजी, आॅप्थलमोलाॅजी, चमोली में जनरल मेडिसिन, एमएस ईएनटी तथा देहरादून जनपद में एमडी पैथोलाॅजी, एनेस्थीसियोलाॅजी व एमडी फाॅरेंसिक मेडिसिन की तैनाती की गई है। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती से न सिर्फ प्रदेश का स्वास्थ्य तंत्र सुदृढ़ होगा बल्कि आम लोगों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से उचित उपचार मिलेगा। साथ ही चार धाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं सुलभ होंगी।

    बयान
    सूबे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निरंतर तैनाती की जा रही है। 30 और नये विशेषज्ञ चिकित्सक आने से प्रदेश की चिकित्सा सेवाओं को और अधिक मजबूती मिलेगी, जिसका लाभ सीधे तौर पर आम लोगों को मिलेगा। – डाॅ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड।

    बाॅक्स-

    विशेषज्ञ चिकित्सकों को इन जनपदों में मिली नवीन तैनाती

    पीजी कोर्स के उपरांत विभाग में लौटे विशेषज्ञ चिकित्सकों को एक यूनिट के रूप में विभिन्न जनपदों में नवीन तैनाती दी गई। जिसमें डाॅ. मुकेश वर्मा को जिला चिकित्सालय बागेश्वर, डाॅ. सोनम सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गरूड़ तथा डाॅ. शिप्रा चन्द्रा को मुख्य चिकित्साधिकारी बागेश्वर के अधीन तैनाती दी गई है। इसी प्रकार डाॅ. दीपिका, डाॅ. आशीष सांगवान व डाॅ. मोनिका नौटियाल को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बीरोंखाल पौड़ी, डाॅ. दीक्षा बिष्ट व डाॅ. गरिमा उप जिला चिकित्सालय थलीसैण, डाॅ. शिल्पी व डा. प्रीति गौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पाबौं, डाॅ. संजय डालाकोटी को उप जिला चिकित्सालय कोटद्वार में तैनाती दी गई है। डाॅ. रूचिका कविदयाल, डाॅ. कमल किशोर, डाॅ. निवेदिता सजवाण व डाॅ. मणि भूषण पंत को जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़, डाॅ. हेमा असवाल, डाॅ. गिरीश सिंह रावत व डाॅ. किरण रावत को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अगस्तमुनि, डा. भारती बलूनी को जिला चिकित्सालय हरिद्वार, डाॅ. पल्लवी वर्मा व डाॅ. गार्गी त्यागी को उप जिला चिकित्सालय रूड़की, डा. सीमा शर्मा को जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी, डाॅ. आजम अकील को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बड़कोट, डाॅ. गौरव कुमार को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चिन्यालीसौड़ तथा डाॅ. लोकेश कुमार को मुख्य चिकित्साधिकारी उत्तरकाशी के अधीन नवीन तैनाती मिली है। इसी प्रकार डाॅ. श्रेय कुमार को जिला चिकित्सालय चमोली, डाॅ. अमन सैफी को उप जिला चिकित्सालय गैरसैंण, डाॅ. शैफाली देउपा को उप जिला चिकित्सालय ऋषिकेश, डाॅ. अंजली पंवार को उप जिला चिकित्सालय विकासनगर तथा डाॅ. नितिन मलिक को जिला चिकित्सालय कोरोनेशन देहरादून में तैनाती दी गई है।

  • सड़क हादसों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर मिलेगा कैशलेस इलाज: गडकरी

    सड़क हादसों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर मिलेगा कैशलेस इलाज: गडकरी

    पूर्व सीएम त्रिवेंद्र व सांसद अजय भट्ट मिले राजनाथ सिंह से

    सांसद त्रिवेन्द्र ने संसद में उठाया सड़क दुर्घटना पीड़ितों का मसला

    देहरादून / नई दिल्ली। हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल सुविधा एवं सुनिश्चित उपचार (पीएम-राहत) योजना” को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया।

    इस पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि यह योजना देशभर में 13 फरवरी 2026 से लागू कर दी गई है, जिससे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ‘गोल्डन ऑवर’ में त्वरित और कैशलेस उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1200 से अधिक एम्बुलेंस और बड़ी संख्या में ट्रॉमा सेंटर की उपलब्धता से आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र और अधिक सशक्त हुआ है। साथ ही अस्पतालों को भुगतान के लिए 10 दिन की समयसीमा तय किए जाने से व्यवस्था में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

    नितिन गडकरी ने यह भी बताया कि यह योजना सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अनावश्यक मृत्यु को रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना के बाद 7 दिनों तक अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

    नितिन गडकरी ने बताया कि योजना के तहत गंभीर स्थिति में 48 घंटे तक और सामान्य स्थिति में 24 घंटे तक तत्काल स्थिरीकरण उपचार सुनिश्चित किया गया है। यह सुविधा देशभर के चिन्हित अस्पतालों में उपलब्ध होगी, जिससे समय पर इलाज संभव हो सकेगा।

    सांसद रावत ने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि योजना को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ईडीएआर (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट), टीएमएस 2.0 और 112 आपातकालीन हेल्पलाइन से जोड़ा गया है, जिससे दुर्घटना की सूचना से लेकर उपचार और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित होगी।

    सांसद रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा आमजन के जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना देश के प्रत्येक नागरिक के लिए जीवनरक्षक साबित होगी।
    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आएगी और पीड़ितों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।

    पूर्व सैनिकों का सम्मान और उनकी सुविधा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

    सांसद त्रिवेन्द्र व अजय भट्ट की रक्षामंत्री से मुलाकात

    सांसद हरिद्वार एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व अजय भट्ट ने मंगलवार को केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट कर उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

    इस दौरान सांसद रावत ने देहरादून के क्लेमनटाउन एवं आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निवासरत पूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों की चिकित्सा सुविधा के विषय को प्रमुखता से उठाया।
    उन्होंने रक्षामंत्री को अवगत कराया कि देहरादून स्थित वेलमेड अस्पताल आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त है, जहाँ कैंसर सहित अनेक गंभीर रोगों का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जा रहा है।

    उन्होंने अनुरोध किया कि पूर्व सैनिकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए वेलमेड अस्पताल, देहरादून को ईसीएचएस योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार हेतु सूचीबद्ध (Empanelled) किए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश प्रदान किए जाएँ।
    सांसद रावत ने 130 इन्फैंट्री बटालियन प्रादेशिक सेना (पर्यावरण) की दो कंपनियों एवं बटालियन मुख्यालय को जनपद पिथौरागढ़ से अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव पर भी पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।
    इस संबंध में अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ द्वारा प्रेषित पत्र भी उन्होंने रक्षामंत्री को सौंपा और सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।

    सांसद रावत ने कहा कि पूर्व सैनिकों का सम्मान, सुरक्षा और उनकी सुविधाओं को सुनिश्चित करना राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है।