फूलों की खेती के लिए सरकारी सहायता दिलाने के एवज में मांगी थी रकम
हरिद्वार। फूलों की खेती के लिए मिलने वाली सरकारी अनुदान राशि की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में 35 हजार रुपये रिश्वत मांगना क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी को भारी पड़ गया।
सतर्कता अधिष्ठान की ट्रैप टीम ने मंगलवार को अधिकारी को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता युवा मंगल कल्याण दल का संचालन करता है। दल की ओर से फूलों की खेती के लिए सरकारी अनुदान प्राप्त किया जाना था।
इसके लिए संबंधित फाइल आगे बढ़ाने के एवज में नारसन ब्लॉक के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी कुलदीप कुमार ने शिकायतकर्ता से 35 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
शिकायत मिलने पर सतर्कता अधिष्ठान ने मामले का सत्यापन कराया।
शिकायत सही पाए जाने के बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार 18 अगस्त को टीम ने कार्रवाई करते हुए कुलदीप कुमार को शिकायतकर्ता से 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया।
गिरफ्तार अधिकारी कुलदीप कुमार पुत्र रमेश चंद्र, आदर्श कॉलोनी लक्सर का निवासी है और वर्तमान में नारसन ब्लॉक, हरिद्वार में क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात है। सतर्कता अधिष्ठान की टीम आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
हरिद्वार। कृषि यंत्र खरीदने के लिए मिलने वाली सब्सिडी की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगना सहायक कृषि अधिकारी को भारी पड़ गया। सतर्कता अधिष्ठान की ट्रैप टीम ने मंगलवार को आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत की थी कि उसके भाई को कृषि यंत्र खरीदने के लिए मिलने वाली सब्सिडी की फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के सत्यापन के बाद सतर्कता टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की।
18 अगस्त को टीम ने हरिओम यादव पुत्र स्व. लाल सिंह, निवासी प्रतापनगर, नजीबाबाद रोड, कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल, हाल सहायक कृषि अधिकारी, विकासखंड खानपुर, जिला हरिद्वार को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सतर्कता अधिष्ठान की टीम आरोपी से पूछताछ के साथ मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।
देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नयी टीम के ऐलान के साथ ही प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की भी गुपचुप विदाई की भी कहानी लिख दी गयी।
सोमवार को घोषित टीम में उत्तराखंड से पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर उनके वनवास को खत्म किया गया। जबकि
पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी तीसरी बार भी राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की भूमिका में नजर आएंगे। उनके इस पद पर बने रहने से उत्तराखण्ड भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया में बने रहने की संभावनाएं पूरी तरह बनी रहेगी। राज्य के कई ज्वलंत मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर छाए रहने की उम्मीद है।
इसके अलावा उत्तराखण्ड से महेंद्र पांडेय को राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी एवं आलोक भट्ट को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह संयोजक नियुक्त किया गया है। जबकि अभी तक राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष की भूमिका में नजर आ रहे राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का नाम नितिन नवीन की नई सूची में दर्ज नहीं हो पाया।
बहरहाल, नितिन नवीन की टीम के आठ नये राष्ट्रीय महामंत्री की सूची में दुष्यंत गौतम का नाम नहीं होना प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह फैसला लेकर भाजपा हाईकमान ने प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की भी बिना शोर शराबे के हौले से रुखसती कर दी। जबकि पार्टी नेतृत्व पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार को पहले ही राजस्थान की दिशा में भेज चुका है।
दरअसल, प्रदेश के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित वीआईपी के तौर पर अजेय कुमार और दुष्यंत गौतम का नाम खूब उछला। अंकिता के माता पिता ने भी इन दोनों भाजपा नेताओं का सार्वजनिक तौर पर नाम लिया।
बाद में ज्वालापुर से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की मोबाइल टॉक और चैट में भी इन दोनों नेताओं का नाम सामने आया।
प्रदेश से लेकर देश तक तूफान मच गया। और जेल में बंद तीनों अभियुक्तों को सजा मिलने के बाद सरकार को पहले एसआईटी और फिर सीबीआई जांच के लिए बाध्य होना पड़ा।
सुरेश राठौर को जेल भी भुगतनी पड़ी। गौतम ने भी कोर्ट की शरण लेकर तमाम नोटिस भेजे।
जांच के दौरान पूर्व विधायक ने स्वीकार किया वो नशे/नींद में इन नेताओं का वीआईपी के तौर पर नाम लिया। यह भी चर्चा है कि सीबीआई जांच में भी कथित वीआईपी का कोई सुराग नहीं मिला। और यह आरोप पुष्ट भी नहीं हुआ। अब यह जांच लगभग क्लोज ही मानी जा रही है।
कथित वीआईपी के मुद्दे पर विपक्षी दल समेत कई संगठन अभी भी सड़कों पर है। लिहाजा, चुनावी साल में भाजपा को इस मुद्दे पर हो रहे राजनीतिक नुकसान को देखते हुए अजेय कुमार को राजस्थान शिफ्ट किया गया। हालांकि, अजेय कुमार को बड़ा राज्य मिलने पर विपक्ष व जन संगठनों ने आंखे भी तरेरी थी।और अजेय कुमार के बाद दुष्यंत गौतम को भी पार्टी ने उत्तराखंड से लगभग किनारे ही कर दिया था। होर्डिंग से दुष्यंत गौतम के पोस्टर गायब हो गए। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने आधिकारिक तौर पर दुष्यंत गौतम को शिफ्ट करने के बजाय नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम के ऐलान तक इंतजार किया।
अब राष्ट्रीय महामंत्री की सूची से नाम कटने के बाद यह साफ ही गया है कि उत्तराखंड को चुनावी साल में जल्द ही नया प्रदेश प्रभारी मिलेगा। इसके अलावा भाजपा को नये चुनाव प्रभारी को भी फाइनल करना है।
इसके अलावा, पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर भी संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। 2024 में पौड़ी से सांसदी का टिकट कटने के बाद से तीरथ रावत वनवास झेल रहे थे। 2024 में हरिद्वार से पूर्व सीएम निशंक की जगह त्रिवेंद्र रावत को आजमाया गया था। इधऱ, 2024 से पूर्व सीएम निशंक को भी कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है…
विशेष आवासीय देखभाल गृह में प्रवेश न देने पर डीएम सख्त
अतिक्रमण, अवैध फैक्ट्री और आपदा कार्यों में अनियमितता पर डीएम सख्त, अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश
समाधान दिवस में 150 से अधिक शिकायतें प्राप्त, डीएम ने दिए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश
ग्राम पंचायत पापड़ियांन में आपदा मद में अनियमितता की शिकायत पर डीएम ने बिठाई जांच
सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण एवं 4 मंजिला निर्माण की शिकायत पर डीएम ने दिए जांच के निर्देश
देहरादून। प्रत्येक सोमवार की भांति आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में जन समाधान दिवस आयोजित किया गया। जन समाधान दिवस में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएं एवं शिकायतें जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कीं। इस दौरान 150 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। जिनमें कई शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता एवं संवेदनशीलता के साथ करना सुनिश्चित करें तथा शिकायतकर्ता को भी कार्रवाई से अवगत कराया जाए।
शिकायतकर्ता प्रस्तुत शिकायत में तहसील विकासनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत पापड़ियांन में ग्राम प्रधान द्वारा वर्ष 2023 से 2026 तक आपदा के अंतर्गत किए गए कार्यों में कथित फर्जीवाड़े एवं अनियमितता की शिकायत पर जिलाधिकारी ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए जिला विकास अधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को संयुक्त रूप से प्रकरण की जांच करते हुए 7 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि उपलब्ध अभिलेखों, कराए गए कार्यों एवं संबंधित मद में हुए व्यय का परीक्षण करते हुए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता मोहम्मद शाहिद राव, खुर्शीदा बेगम एवं इकराम, मिहूवाला निवासी द्वारा अपनी पैतृक भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा मारपीट कर कब्जा करने का प्रयास किए जाने की शिकायत प्रस्तुत की गई। जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रकरण में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा शिकायतकर्ता की शिकायत पर तथ्यात्मक जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
ग्राम झीवरहेड़ी, विकासनगर क्षेत्र में आबादी के बीच अवैध रूप से हैवी वेल्डिंग मशीनें लगाकर फैक्ट्री संचालित किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी विकासनगर एवं महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र (जीएमडीआईसी) को संबंधित फैक्ट्री को तत्काल सील करने के निर्देश दिए। प्रकरण में जिला उद्योग केंद्र द्वारा पूर्व में किए गए निरीक्षण में पाया गया था कि संबंधित स्थल औद्योगिक उपयोग के लिए वर्गीकृत नहीं है। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अग्निशमन विभाग की आवश्यक एनओसी भी प्राप्त नहीं की गई थी। जिलाधिकारी ने इस स्थिति के बावजूद फैक्ट्री संचालन तथा सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
शिकायतकर्ता सूर्य प्रकाश द्वारा दोनों पैरों में कृत्रिम अंग लगवाने हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में प्रस्तुत शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई करते हुए 15 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा की गई कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए।
नगर निगम एवं ग्राम समाज की सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर एवं तहसीलदार सदर को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। शिकायत में चार मंजिला मकान के निर्माण का भी आरोप लगाया गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मौके का स्थलीय निरीक्षण करते हुए भूमि एवं निर्माण से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए तथा यदि अतिक्रमण अथवा अवैध निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
विशेष बच्चे प्रिंस अग्रवाल के लतिका राय फांउडेशन में प्रवेश के संबंध में प्राप्त शिकायत का जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। शिकायतकर्ता बच्चे के पिता एवं एकमात्र अभिभावक द्वारा बताया गया कि फाउंडेशन में प्री-एडमिशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण किए जाने के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई तथा बार-बार अनुरोध के बाद भी उचित समाधान नहीं हो पाया। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करते हुए बच्चे के हित में आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया। जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी को संयुक्त रूप से मामले की जांच कर 7 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। डीएम ने प्रकरण के सभी तथ्यों की निष्पक्षता से जांच की जाए तथा बच्चे के हित एवं उसके सर्वांगीण विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों को केवल औपचारिक रूप से निस्तारित न किया जाए, बल्कि शिकायत की वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समयबद्ध निस्तारण, पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी जायसवाल, अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सिलेंडरों से गैस चोरी के मामले में वितरण वाहन जब्त
1.59 लाख उपभोक्ता अभी भी ई-केवाईसी से बाहर
देहरादून। एलपीजी उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी को लेकर जहां पूर्ति विभाग ने अंतिम मौका देते हुए समयसीमा 23 अगस्त तक बढ़ाई है, वहीं गैस वितरण में अनियमितता के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। जिले में 1.59 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने अभी ई-केवाईसी नहीं कराई है। दूसरी ओर, रायपुर क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेंडरों से गैस निकालने का मामला सामने आने पर विभाग ने वितरण वाहन जब्त कर दो कर्मचारियों और गैस एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
23 अगस्त तक ई-केवाईसी नहीं तो घरेलू गैस आपूर्ति हो सकती है बाधित देहरादून जिले में कुल 7,16,845 घरेलू गैस कनेक्शन हैं। इनमें से 5,57,546 उपभोक्ता ई-केवाईसी करा चुके हैं, जबकि 1,59,299 उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी लंबित है। इनमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 9,243 लाभार्थी भी शामिल हैं। उपभोक्ता गैस एजेंसी, डिलीवरी कर्मी के बायोमेट्रिक उपकरण या संबंधित तेल कंपनी के अधिकृत मोबाइल एप के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने उपभोक्ताओं से समयसीमा का इंतजार न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 23 अगस्त तक ई-केवाईसी नहीं कराने पर घरेलू गैस की आपूर्ति बाधित हो सकती है और गैस व्यावसायिक दरों पर उपलब्ध होगी।
चार सिलेंडरों से निकली मिली गैस, वाहन जब्त
ग्राम सोडा सिरौली में शिकायत पर जांच के दौरान ऑर्डिनेंस गैस सेवा, रायपुर की वितरण गाड़ी में 26 घरेलू सिलेंडर मिले। इनमें चार सिलेंडरों से करीब एक से 6.5 किलो तक गैस निकाली गई थी। मौके से गैस स्थानांतरण में इस्तेमाल रिफिलर भी बरामद हुआ। विभाग ने वाहन जब्त कर लिया और जयप्रकाश तथा रटनेश चंद्रपाल के साथ ऑर्डिनेंस गैस सेवा के खिलाफ रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। सभी 26 सिलेंडर सुरक्षित रूप से निकटवर्ती सहकारी गैस सेवा में जमा करा दिए गए हैं।
देहरादून। बाल भवन, तरला आमवाला में उत्तराखण्ड राज्य बाल कल्याण परिषद के द्वारा स्वतंत्रता दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा० एस० फारुख ने बाल भवन में ध्वजारोहण किया।
उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों एवं बच्चों के द्वारा राष्ट्रगान गाया गया। इस अवसर पर बच्चों के द्वारा देशभक्ति के नारे लगाये गये।
महासचिव आशा रानी पैन्यूली द्वारा स्वतंत्रता के इतिहास को विस्तार से बताया गया। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति को कर्तव्य परायण होना बहुत आवश्यक है। हमें अपने जीवन मूल्यों को विस्तार से समझना चाहिए।
उपाध्यक्ष पुष्पा मानस ने कहा कि आज देश के लिए कुर्बानियां देने वालों को याद किया जाना चाहिए। हमें देश सेवा के लिए बारम्बार प्रयास करने चाहिए ताकि जिन लोगों ने स्वतंत्रता के लिए कुर्बानियां दी हैं, उनका प्रयास बेकार न जाने पावें। उपाध्यक्ष मोहनसिंह खत्री ने कहा कि रक्त दान महादान होता है। हमें देश की सीमाओं पर लड़ रहे भारत माता के सपूतों के लिए उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप रक्त दान करना चाहिए। संयुक्त सचिव ज्योत्सना खत्री के द्वारा बताया गया कि बच्चों को सच्चे नागरिक के रूप में जिम्मेदारी पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। हमें यह आजादी वीरों के बलिदान से मिली है। इसकी शान में आंच नहीं आनी चाहिये। अपने देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में सबको अपना सहयोग करना चाहिये। इस वर्ष स्वतन्त्रता दिवस की थीम “विकसित भारत@2047 के लिये युवा शक्ति” है। हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की भी एक सौ पचासवीं वर्षगांठ इस वर्ष मनाई जा रही है। ललित मोहन लखेड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा देश के वीरों के कारण हमें आजादी मिली है जिसका हमें सम्मान करना चाहिए। इसी प्रकार से हम सरकारी संसाधनों का उचित मात्रा में उपयोग करके भी देश को अच्छी स्थिति में ले जा सकते हैं। मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि हमें बच्चों को नशे से दूर रखना होगा क्योंकि आज का बच्चा कल का भविष्य है। डा० अरुण श्रीवास्तव द्वारा बच्चों को नैतिक रुप से उत्कृष्ट बनने के लिए कहा। उन्होंने अपने बाल्यकाल में प्रथम स्वतंत्रता दिवस की यादों को सबके साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि स्वतन्त्रता दिवस की सुबह सबकुछ बदल गया था। उनके बाल्यकाल में उन्हें बताया गया कि अब सबको गोरों से व पुलिस से नहीं डरना है। स्वतन्त्र होने की जो खुशी व उल्लास उस समय जनता में था एवं उस समय किस प्रकार सीमित साधनों में तिरंगे का निर्माण कर स्वतन्त्रता दिवस का जश्न मनाया गया, ये सब अनुभव उनके द्वारा बताया गया।
मुख्य अतिथि हिमालयन वेलनेस कम्पनी, देहरादून के मुख्य प्रबन्धक व परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा० एस० फारुख के द्वारा अपने आशीष वचनों से बच्चों व उपस्थित जनता का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि हमें तन, मन व धन से देश सेवा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आज हमारे पास समय है, शायद कल न हो। इसलिए बिना समय गँवाये हमें देश हित में कार्य करने चाहिए। उन्होंने हिमालयन वेलनेस कम्पनी, देहरादून के उत्पादों को उपस्थित जनसमूह को उपहार स्वरूप भेंट किया।
इस अवसर पर कु० गायत्री जे०पी०एस० लाडपुर व कु० छवि रा०इ०का०नालापानी, देहरादून व अन्य बच्चों के द्वारा भाषण, देशभक्ति गान, समूह गान आदि गाये गये।
इस अवसर पर परिषद के पूर्व संयुक्त सचिव कमलेश्वर प्रसाद भट्ट, पूर्व कोषाध्यक्ष आशा श्रीवास्तव, शगुप्ता परवीन, गीता प्रजापति, आजीवन सदस्य रीता रोमवाल, किरन खण्डूड़ी, विजय लक्ष्मी रावत, विजेन्द्र सिंह राणा, रमेश खत्री, ललित मोहन लखेड़ा, योगम्बरसिंह रावत, आंगनबाड़ी सहायिका बबीता, एम०एस०डब्ल्यू की छात्राएं मीना व एकता डबराल, रजनी ममगाई, वाई० एस० रावत, न्याशा रावत, मीनाक्षी, अनुराग रावत एवं बाल भवन में कम्प्यूटर शिक्षण ले रहे छात्र/छात्रायें व नजदीकी विद्यालयों के छात्र/छात्रायें उपस्थित रहे। मिष्ठान वितरण के उपरान्त परिषद की महासचिव आशा रानी पैन्यूली के द्वारा कार्यक्रम में सहभागिता के लिये आदरणीय मुख्य अतिथि डा० एस० फारुख एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। मंच संचालन संयुक्त सचिव ज्योत्सना खत्री द्वारा किया गया।
देहरादून। उत्तराखण्ड सचिवालय रक्षक संघ के द्विवार्षिक चुनाव, सचिवालय में सम्पन्न हुए। मुख्य सुरक्षा अधिकारी एवं उत्तराखण्ड सचिवालय रक्षक संघ के संरक्षक/मुख्य चुनाव अधिकारी जीवन सिंह बिष्ट ने बताया कि द्विवार्षिक चुनाव में आम सभा द्वारा संघ की नई कार्यकारिणी को आगामी दो वर्षों के लिए सर्वसम्मति से निर्वाचित किया गया।
उन्होंने बताया कि निर्वाचन में विनयपाल सिंह को अध्यक्ष, पूनम को उपाध्यक्ष, दिनेश उनियाल को महासचिव, राकेश रयाल एवं हेमा चन्द को संयुक्त सचिव तथा मनोज पंवार को कोषाध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी सदस्य के रूप में आशीष कुमार, नीरज कुमार, नीशू, सुश्री सूचिता, विशाल एवं श्रीमती रीना नेगी का भी सर्वसम्मति से निर्वाचन किया गया।
नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने संघ के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए संगठन की एकजुटता, कर्मचारियों के हितों एवं संघ की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
टीएचडीसी टनल हादसे में आठ मौतों के बाद प्रदर्शन, आपदा मंत्री कौशिक का घेराव
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
प्रस्तावित पांच लाख मुआवजे पर टूटा सब्र का बांध
मृतकों के परिजनों को एक करोड़ देने की मांग
चमोली। विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में हुए हादसे के बाद सोमवार को परियोजना स्थल पर हालात तनावपूर्ण हो गए।इस दौरान मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों से भी प्रदर्शनकारियों की झड़प हुई।
मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये और घायलों को एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मजदूरों और स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सरकार और परियोजना प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई।
प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए एक करोड़ मुआवजा राशि देने व पीड़ित परिवार के एक परिजन को नौकरी देने की मांग की।
बड़ी संख्या में मजदूर और स्थानीय लोग परियोजना स्थल पर एकत्र हुए। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने के साथ घायलों के बेहतर उपचार और प्रभावित परिवारों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान आपदा मंत्री मदन कौशिक को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा और उनका घेराव किया गया।
सुरक्षा मानकों पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सुरंग के भीतर काम करने वाले मजदूर लगातार जोखिम के बीच काम करते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन और नियमित सुरक्षा ऑडिट जरूरी है।
लोगों ने हादसे की निष्पक्ष जांच कराने, दुर्घटना के कारणों का पता लगाने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उनका कहना था कि राहत राशि के साथ पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी ठोस व्यवस्था होनी चाहिए।
टीएचडीसी के पत्र से बढ़ा विवाद
मुआवजे को लेकर विवाद उस समय बढ़ा जब टीएचडीसी की ओर से पांच लाख रुपये मृतकों के परिजनों और एक लाख रुपये घायलों को देने संबंधी पत्र की जानकारी सामने आई। इसके बाद मजदूरों और स्थानीय लोगों ने इस राशि पर सवाल खड़े किए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पांच लाख रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से परियोजना प्रबंधन के साथ मिलकर मुआवजे की राशि पर पुनर्विचार करने की मांग की।
स्थानीय लोगों ने कहा कि क्षेत्र में जल विद्युत परियोजना से रोजगार और विकास की उम्मीद है, लेकिन परियोजना में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
परियोजना स्थल पर काफी देर तक विरोध और नारेबाजी होती रही। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की बातें सुनीं।
हादसे के बाद मुआवजा, श्रमिक सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने को लेकर उपजे इस विवाद ने परियोजना प्रबंधन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि 13 अगस्त को टीएचडीसी की।टनल में पानी और मलबा भरने से आठ मजदूरों की मौत हो गयी। जबकि दो लापता मजदूरों की तलाश जारी है।
14 अगस्त को सीएम धामी ने घटनास्थल और अस्पताल में घायल मजदूरों से बात की थी।और हरसम्भव मदद का आश्वासन दिया था। डीएम व एसपी सुरजीत पंवार ने घटना के दिन आवश्यक मदद करने की बात कही थी। इसके अलावा सांसद अनिल बलूनी ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था।
कांग्रेस का विरोध
उधर,विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने टीएचडीसी व प्रदेश सरकार से उचित मुआवज़ा देने की मांग करते हुए सुरक्षा मानकों की जांच की भी बात कही है।
सीमांत चमोली जिले में जल विद्युत परियोजनाओं के इर्द गिर्द बने डंपिंग ज़ोन से प्राकृतिक झरनों की निकासी पर आए गतिरोध को भी दुर्घटना की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।
स्थानीय पत्रकार सुरेंद्र रावत का कहना है कि इस इलाके में मौजूद प्राकृतिक झरनों का पानी पूर्व निर्धारित रूट से डाइवर्ट हो रहा है। और अनुमान लगाया जा रहा है कि यह पानी ही सुरंग के आसपास के इलाके में इकठ्ठा होता चला गया। बरसात के मौसम में यह झरने अपने पूरे उफान पर हैं।
बहरहाल, टीएचडीसी प्रबंधन व राज्य सरकार की जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने आएंगे।
पूर्व में भी जल विद्युत परियोजनाओं में दुर्घटनाएं होती रही है। इन दुर्घटनाओं को भविष्य के लिए काफी खतरनाक माना जा रहा है।
सीएम ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दी हैं। देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, अमर शहीदों, वीर-वीरांगनाओं एवं राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की प्रगति में निरंतर योगदान दे रही उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता का भी आभार व्यक्त किया है।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तराखण्ड को अपनी सैन्य परंपरा, वीरता और राष्ट्रभक्ति की गौरवशाली विरासत पर गर्व है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश में लगभग दो लाख करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं पर कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में उत्तराखण्ड अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास एवं निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना और वाइब्रेंट विलेज योजना के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों के विकास को गति दी जा रही है। उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश के बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की शुरुआत की गई है। प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट मिशन के साथ-साथ सगंध कृषि को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। प्रदेश में धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाए गए कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। जनभावनाओं के अनुरूप प्रदेश में सख्त भू-कानून लागू किया गया है। नकल विरोधी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए नकल माफिया के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा रही है इसी का परिणाम है कि राज्य में पिछले पांच वर्षों में सरकारी सेवाओं में लगभग 34 हजार से अधिक नियुक्तियां की गई हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं इतिहास के गहन अध्ययन के लिए दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना की गई है। नई शिक्षा नीति को लागू करने में भी उत्तराखण्ड अग्रणी राज्यों में शामिल है। हाल ही में उत्तराखण्ड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया है, जो देश में पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की पहचान देश में पर्यटन एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के साथ-साथ फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी तेजी से स्थापित हुई है। राज्य सरकार के बेहतर यात्रा प्रबंधन एवं व्यवस्थाओं के परिणामस्वरूप इस वर्ष अब तक 47 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आ चुके हैं, जबकि प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में लगभग 5 करोड़ शिव भक्त पवित्र गंगाजल लेकर सकुशल अपने गन्तव्य को लौटे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के संचालन के साथ ही प्रदेश में शीतकालीन यात्रा को भी प्रोत्साहित करने की महत्वपूर्ण पहल की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के साथ ही सहकारी समितियों में भी 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना, लखपति दीदी योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश में अबतक 03 लाख से अधिक लखपति दीदी बनायी जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का लाभ समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रदेश का कोई भी क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे, यह हमारा संकल्प है। जन-सेवा सुशासन, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और अन्त्योदय के मूल-मंत्र के साथ राज्य सरकार उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरन्तर प्रयासरत है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से उत्तराखण्ड को आदर्श, विकसित, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर राज्य बनाने में सहयोगी बनने की भी मुख्यमंत्री ने अपील की है।
देहरादून। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का दिन है, जिनके संघर्ष से आज भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। स्वतंत्रता हमें विरासत में मिली है, लेकिन राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सामरिक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत के वैज्ञानिक अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रहे हैं, युवा विश्वभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और डिजिटल तकनीक ने शासन एवं नागरिक सेवाओं के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। अब हमारा लक्ष्य ऐसा समावेशी, सतत और गुणवत्तापूर्ण विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान अवसर मिले और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
25 वर्ष के उत्तराखण्ड में उपलब्धियों के साथ चुनौतियों पर भी ध्यान जरूरी
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा आत्मावलोकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। राज्य का गठन केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि इसके पीछे पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों और विकास की आकांक्षाओं का लंबा संघर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन, रोजगार के पर्याप्त अवसरों का सृजन, दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा जैसी चुनौतियों पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है।
विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सफलता में उत्तराखण्ड की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा लक्ष्य ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड’ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड का अर्थ केवल बड़े शहरों और बड़ी परियोजनाओं से नहीं है। विकसित उत्तराखण्ड वह होगा, जहां पहाड़ का युवा अपने गांव में रहकर सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सके, महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों, प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। गांव सड़क, इंटरनेट और आधुनिक सुविधाओं से जुड़े हों तथा विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक बनें।
सुशासन और परिणाम आधारित प्रशासन सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्य सचिव ने कहा कि सचिवालय राज्य शासन का मस्तिष्क है और यहां लिए गए प्रत्येक निर्णय का प्रभाव प्रदेश के गांव-गांव और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचता है। इसलिए प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि सरकार का प्रत्येक निर्णय नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि प्रशासन को केवल योजनाओं और फाइलों तक सीमित न रखते हुए ‘फाइल डिस्पोजल’ से आगे ‘आउटकम डिलीवरी’ की ओर ले जाना होगा। प्रशासन की सफलता इस बात से तय होगी कि सरकारी निर्णयों और योजनाओं से लोगों के जीवन में कितना वास्तविक सुधार आया। उन्होंने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की भावना के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस, डाटा एनालिटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से प्रशासन को अधिक तेज, पारदर्शी, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि वे स्वयं को केवल सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि लोक सेवक मानें। उन्होंने कहा कि उनके पास जो अधिकार हैं, वे व्यक्तिगत अधिकार नहीं बल्कि जनता द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियां हैं। कार्यालय में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक केस या फाइल के रूप में नहीं, बल्कि उसकी आशाओं, अपेक्षाओं और परिवार से जुड़े व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की वास्तविक शक्ति हमारे गांवों, महिलाओं, युवाओं और प्राकृतिक संपदा में है। पर्वतीय अर्थव्यवस्था के ऐसे मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है, जो स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित हों और स्थानीय उत्पादन को वैश्विक बाजार से जोड़ें। उन्होंने मिलेट्स, स्थानीय कृषि उत्पाद, बागवानी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है और अब इन्हें केवल आजीविका समूहों तक सीमित न रखते हुए ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
युवाओं के लिए रोजगार के साथ उद्यमिता के अवसर
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने—यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। स्टार्टअप, नवाचार, पर्यटन, आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा, क्रिएटिव इकोनॉमी और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि उत्तराखण्ड का युवा रोजगार के लिए केवल देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़ या बेंगलुरु की ओर न देखे, बल्कि रोजगार और उद्यम के अवसर पहाड़ तक पहुंचें और प्रतिभा पहाड़ से बाहर जाने के बजाय यहीं अवसर प्राप्त करे।
हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड हिमालय का प्रहरी है। राज्य की नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार हैं। इसी प्रकार जंगल जल स्रोतों, जैव विविधता और जलवायु संतुलन के महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का विकास हिमालय-संवेदनशील विकास मॉडल पर आधारित होना चाहिए। आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण के बजाय पूर्व तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण पर जोर दिया जाना चाहिए। अर्ली वार्निंग सिस्टम, रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट, आपदा-रोधी निर्माण और जलवायु अनुकूलन को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना आवश्यक है।
जिम्मेदार और उच्च मूल्य वाले पर्यटन पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अब पर्यटन को केवल अधिक संख्या में पर्यटकों तक सीमित न रखकर रिस्पॉन्सिबल, सस्टेनेबल और हाई-वैल्यू टूरिज्म की दिशा में आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने स्पिरिचुअल टूरिज्म, वेलनेस एवं योग, एडवेंचर, इको-टूरिज्म, होमस्टे, विंटर टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा हमारी आध्यात्मिक विरासत है, लेकिन इसके साथ उत्तराखण्ड के छोटे गांवों, लोक संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प और प्राकृतिक सौंदर्य को भी पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता है।
कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता का लिया संकल्प
मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें स्वतंत्रता, जिम्मेदारी और संकल्प—इन तीन मूल भावनाओं की याद दिलाता है। हमें स्वतंत्रता को समृद्धि, समान अवसर और सम्मानजनक जीवन में परिवर्तित करना है।
उन्होंने सचिवालय के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता को अपनी कार्यसंस्कृति का आधार बनाएं तथा संकल्प लें कि उनका प्रत्येक निर्णय उत्तराखण्ड के हित में, प्रत्येक प्रयास जनहित में और प्रत्येक कार्य विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में होगा।
अंत में मुख्य सचिव ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सहित सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए समर्पित भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस बलों तथा सभी वीर जवानों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया और सभी से मिलकर नए एवं विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव, सचिवगण, अपर सचिवगण, सचिवालय परिवार के अधिकारी कर्मचारी एवं स्कूल के बच्चे भी उपस्थित थे।