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  • थाई राजदूत से भारत-थाईलैंड सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग पर चर्चा

    थाई राजदूत से भारत-थाईलैंड सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग पर चर्चा

    उत्तराखंड के संस्कृत ग्रामों के एक वर्ष पूरे

    देहरादून। उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में “13 जनपद–13 संस्कृत ग्राम” की ऐतिहासिक पहल के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित रॉयल थाई एम्बेसी में भारत में थाईलैंड की राजदूत महामहिम  चावनार्ट थांगसुम्फंत से शिष्टाचार भेंट की।

    बैठक के दौरान दीपक कुमार ने राजदूत को 10 अगस्त 2026 के महत्व से अवगत कराया। यह तिथि उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में संस्कृत ग्रामों की स्थापना के एक वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह पहल माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि संस्कृत प्रत्येक घर तक पहुँचे और केवल शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित न रहकर समाज की जीवंत भाषा बने।

    उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के इतिहास में उत्तराखंड का विशिष्ट स्थान है। वर्ष 2010 में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। उन्होंने राजदूत को प्रख्यात संस्कृत विद्वान एवं संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले आचार्य श्री दिनेश चंद्र जोशी की जन्मशती के अवसर पर देशभर में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आचार्य जोशी ने अनेक जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप संस्कृत को उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।

    भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा करते हुए दीपक कुमार ने कहा कि दोनों देशों की साझा सभ्यतागत विरासत अत्यंत समृद्ध है और विशेष रूप से रामायण के प्रति दोनों देशों की गहरी आस्था एवं आत्मीयता इस सांस्कृतिक संबंध को और सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि थाईलैंड में रामायण की पारंपरिक प्रस्तुतियाँ तथा थाई कलाकारों और सांस्कृतिक दलों की भारत के विभिन्न भागों में यात्राएँ भारत और थाईलैंड की साझा सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं।

    बैठक में रॉयल थाई एम्बेसी के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन एवं मंत्री किरण मूंगटिन भी उपस्थित थे। दीपक कुमार ने सुझाव दिया कि औपचारिक समझौता ज्ञापन की दिशा में आगे बढ़ने से पहले उत्तराखंड के संस्कृत संस्थानों तथा थाईलैंड के विश्वविद्यालयों में कार्यरत संस्कृत के प्रोफेसरों एवं विद्वानों के बीच ऑनलाइन शैक्षणिक संवाद प्रारंभ किया जा सकता है। उन्होंने थाईलैंड में जहाँ संस्कृत, पालि एवं भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है, वहाँ उपयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों एवं पाठ्यक्रमों की संभावनाओं का अध्ययन करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आदान-प्रदान आगे चलकर थाईलैंड के प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ संस्थागत सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

    दीपक कुमार ने बताया कि थाईलैंड की समृद्ध रामायण प्रदर्शन परंपरा और उत्तराखंड की जीवंत रामलीला परंपरा के बीच सार्थक सांस्कृतिक संबंध स्थापित करने के लिए एक विशेष प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों द्वारा प्रतिवर्ष कुमाऊँनी, गढ़वाली और जौनसारी भाषाओं में रामलीला का मंचन किया जाता है। इन विविध रामायण परंपराओं को एक साझा मंच पर लाने से एक अनूठा और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव सृजित किया जा सकता है। भारत और थाईलैंड की रामायण परंपराओं का यह संगम ऐसे आयोजनों को और अधिक जीवंत एवं आकर्षक बना सकता है तथा रामायण के कालजयी एवं प्रेरणादायी प्रसंगों को विविध कलात्मक रूपों और भाषाओं के माध्यम से विश्व के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

    दीपक कुमार ने सुझाव दिया कि आगामी थाई रामायण प्रस्तुति के कलाकारों एवं दल को उत्तराखंड के संस्कृत ग्रामों का भ्रमण कराया जा सकता है। इसके साथ ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय तथा उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के सहयोग से हरिद्वार में एक भव्य रामायण सांस्कृतिक प्रस्तुति का आयोजन भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर सकती है और उत्तराखंड की जनता को थाईलैंड की विशिष्ट रामायण परंपरा को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर प्रदान कर सकती है।

    थाई राजदूत एवं डिप्टी चीफ ऑफ मिशन ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा थाईलैंड और उत्तराखंड के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं संस्कृत संबंधी सहयोग के लिए सर्वोत्तम संभावनाओं को तलाशने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

    यह उल्लेखनीय है कि थाईलैंड का संस्कृत अध्ययन एवं संस्कृत विद्या से दीर्घकालीन और गौरवपूर्ण संबंध रहा है। थाई राजपरिवार की राजकुमारी महामहिम राजकुमारी महा चक्री सिरिंधोर्न एक प्रतिष्ठित संस्कृत विदुषी हैं और भारत द्वारा प्रदान किए गए विश्व संस्कृत पुरस्कार से सम्मानित हैं। संस्कृत के अध्ययन एवं संवर्धन में उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। थाईलैंड ने 28 जून से 2 जुलाई 2015 तक बैंकॉक में 16वें विश्व संस्कृत सम्मेलन की मेजबानी भी की थी, जिससे वैश्विक संस्कृत समुदाय में थाईलैंड की महत्वपूर्ण भूमिका पुनः रेखांकित हुई।

    संस्कृत अध्ययन के क्षेत्र में थाई विद्वानों के योगदान को भारत में भी सम्मान प्राप्त हुआ है। प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान प्रोफेसर चिरापत प्रपंडविद्या को संस्कृत के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने थाईलैंड में संस्कृत के लिए एक चेयर की स्थापना की है, जिससे भारत और थाईलैंड के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।

  • रिकॉर्ड समय में तमक नाले पर यातायात बहाल

    रिकॉर्ड समय में तमक नाले पर यातायात बहाल

    तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई मोटर मार्ग तैयार, वाहनों की आवाजाही शुरू

    जोशीमठ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी  की सतत निगरानी के चलते जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड समय में तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई मोटर मार्ग तैयार कर दिया है, जिसके बाद इस मार्ग से वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है।

    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने रिकॉर्ड समय में यातायात व्यवस्था बहाल किए जाने पर जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों की टीमों को बधाई दी है।

    नीती घाटी में भारी बारिश के कारण तमक नाला उफान पर आने से वैली ब्रिज बह गया था, जिससे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई थी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। वे मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप तथा जिलाधिकारी चमोली से लगातार राहत और बचाव कार्य की स्थिति तथा मार्ग बहाली की प्रगति की जानकारी लेते रहे।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर मार्ग बहाली का कार्य शुरू किया। ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई मोटर मार्ग तैयार किए जाने के बाद अब इस मार्ग से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है।

    तमक नाले में वैली ब्रिज बहने की घटना के बाद लापता एक व्यक्ति की तलाश में आज दूसरे दिन भी रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। लापता व्यक्ति की तलाश के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं सीमा सड़क संगठन की टीमें संयुक्त रूप से सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। प्रभावित क्षेत्र के आसपास नदी तट एवं संभावित स्थानों पर गहनता से तलाश की जा रही है।

    जिला प्रशासन द्वारा मौके की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मौसम एवं तमक नाले के जलस्तर को देखते हुए सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मौके पर तैनात टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं।

    जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों एवं वाहन चालकों से अपील की है कि अस्थाई मार्ग से आवागमन के दौरान विशेष सावधानी बरतें तथा मौके पर तैनात प्रशासन एवं संबंधित विभागों की टीमों द्वारा दिए जा रहे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

  • नामचीन होटलों की रसोई से स्टोर तक ताबड़तोड़ छापेमारी

    नामचीन होटलों की रसोई से स्टोर तक ताबड़तोड़ छापेमारी

    एफडीए ने दूध-पनीर समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने जांच को भेजे

    होटल मधुवन, जेएसआर से सरोवर पोर्टिको तक छापेमारी

    देहरादून । ग्राहकों लोगों की थाली तक पहुंच रहे दूध, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटखोरी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से खिलवाड़ के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ दिया है। अभियान के दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों में गुणवत्ता के साथ-साथ किचन की स्वच्छता, खाद्य लाइसेंस, कच्चे माल के स्रोत, खरीद के बिल, पैकेजिंग और लेबलिंग की बारीकी से जांच की गई।

    अभियान के दौरान देहरादून के तीन रेस्टोरेंट में खाद्य सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन सामने आने पर उन्हें मौके पर ही बंद करा दिया गया। वहीं दूध और पनीर समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडे के निर्देश पर विभागीय टीमों ने होटल, रेस्टोरेंट, दुग्ध प्रतिष्ठानों और अन्य खाद्य कारोबारियों के यहां सघन निरीक्षण किया। खासतौर पर पनीर, दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता तथा इनके वास्तविक स्रोत पर फोकस किया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट, अनधिकृत दुग्ध उत्पादों का इस्तेमाल और स्वच्छता मानकों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

    होटलों के किचन और स्टोर की भी पड़ताल

    अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि अभियान के तहत होटल मधुवन, जेएसआर और फाइव स्टार होटल सरोवर पोर्टिको के किचन एवं स्टोर का निरीक्षण किया गया। टीम ने खाद्य सामग्री के स्रोत, खरीद के बिल, लेबलिंग, बैच नंबर, निर्माण तिथि और पैकेजिंग की जांच की। निरीक्षण के दौरान स्टोर में रखी पैक्ड इमली की लेबलिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलने पर निर्माता को नोटिस जारी किया गया। साथ ही तैयार दाल के दो और चीज का एक नमूना जांच के लिए लिया गया। राजपुर रोड स्थित वन विभाग कार्यालय के बाहर संचालित रेस्टोरेंटों में भी टीम ने छापेमारी की। यहां दो रेस्टोरेंट के किचन में अत्यधिक गंदगी और अस्वच्छ परिस्थितियां मिलीं। खाद्य सुरक्षा मानकों में सुधार होने तक इन्हें बंद रखने के निर्देश दिए गए। एक रेस्टोरेंट से खुले पनीर का नमूना लेकर उसके वास्तविक घटकों और गुणवत्ता की जांच शुरू की गई। वहीं एक अन्य प्रतिष्ठान में मौके पर वैध खाद्य लाइसेंस उपलब्ध नहीं था और किचन में भी गंभीर गंदगी मिली। नियमों का पालन होने तक खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं करने के निर्देश दिए गए। खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर राजीव पुत्र श्री दरवारी लाल, गढ़वाल भोजनालय और लजीज काठी रोल नामक तीन रेस्टोरेंटों को मौके पर बंद कराया गया।

    दूध-पनीर के नमूने भी लिए

    अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि सुबह वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी नगर निगम देहरादून रमेश सिंह के नेतृत्व में टीम नेहरू ग्राम और छह नंबर पुलिया क्षेत्र के दुग्ध प्रतिष्ठानों में पहुंची। संदेह के आधार पर मौके से एक दूध और एक पनीर का नमूना लिया गया। विभाग के अनुसार सभी नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद गुणवत्ता में कमी या मिलावट पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस कार्रवाई का संदेश साफ है जनता की थाली में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई गुंजाइश नहीं है।

    आयुक्त का दो टूक संदेश

    खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। पनीर, दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। मिलावट या अनधिकृत खाद्य उत्पादों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण, नमूना संग्रह और अभियान की लगातार समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। विभाग की टीमें विशेष रूप से उन खाद्य प्रतिष्ठानों पर नजर रख रही हैं जहां बड़ी संख्या में लोगों को भोजन परोसा जाता है।

    अभियान में उपायुक्त गढ़वाल मंडल राजेंद्र रावत, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा देहरादून मनीष सयाना, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश सिंह, संतोष कुमार सिंह और संजय तिवारी सहित विभागीय टीमें शामिल रहीं।

  • तमकनाला आपदा: राहत कार्य तेज, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्राथमिकता

    तमकनाला आपदा: राहत कार्य तेज, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्राथमिकता

    सीएम ने राहत-बचाव और कनेक्टिविटी बहाली के निर्देश

    देहरादून। चमोली जिले के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में बेली ब्रिज बहने की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

    मंगलवार को उन्होंने चमोली जिलाधिकारी और गढ़वाल मंडल आयुक्त से घटनाक्रम की जानकारी लेते हुए राहत-बचाव, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और सड़क संपर्क बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों और उपलब्ध अन्य माध्यमों से ग्रामीणों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई जाए। उन्होंने ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर आवाजाही जल्द बहाल करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर तत्काल काम करने को कहा।
    अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति और नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राहत और पुनर्व्यवस्था के कार्यों में देरी न हो।

    निचले इलाकों में विशेष सतर्कता

    बदलते मौसम और बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निचले क्षेत्रों तथा नदी-नालों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए और जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखी जाए।

    राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से चमोली सहित प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों पर 24×7 निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में राहत और बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा सके।

    एक व्यक्ति और कैंपर वाहन के बहने की सूचना

    सोमवार को ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में अचानक जलप्रवाह बढ़ने से 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा निर्मित बेली ब्रिज बह गया था। तेज बहाव की चपेट में एक व्यक्ति और एक कैंपर वाहन के बहने की सूचना भी मिली थी।

    घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और राहत-बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना की गईं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें भी मौके पर राहत-बचाव कार्यों में जुटी हैं।
    सुरक्षा, राहत और कनेक्टिविटी पर सरकार का फोकस

    तमकनाला की घटना के बाद सरकार का फोकस

    राहत-बचाव के साथ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, वैकल्पिक कनेक्टिविटी और आवाजाही जल्द बहाल करने पर है।
    मुख्यमंत्री की लगातार मॉनिटरिंग और अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर त्वरित निर्णय लेने के निर्देशों के बीच प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय पर सतर्कता, बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई से इनके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

  • उक्रांद की नोएडा में बाबा मोहन उत्तराखंडी को श्रद्धांजलि, योगदान को किया याद

    उक्रांद की नोएडा में बाबा मोहन उत्तराखंडी को श्रद्धांजलि, योगदान को किया याद

    उक्रांद की नोएडा महानगर कार्यकारिणी घोषित
    उत्तराखंड के मूल सवालों को लेकर एकजुट होकर संघर्ष का आह्वान

     

    नोएडा। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) नोएडा महानगर की ओर से नौ अगस्त को आंदोलनकारी बाबा मोहन उत्तराखंडी के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला अध्यक्ष कैलाश चंद सती की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में बाबा मोहन उत्तराखंडी के संघर्ष, त्याग और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के आंदोलन में उनके योगदान को याद किया गया। इस अवसर पर नवगठित महानगर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को मनोनयन पत्र भी वितरित किए गए।

    कार्यक्रम में उक्रांद दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष चंद्र सिंह रावत मुख्य अतिथि और चारु तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने बाबा मोहन उत्तराखंडी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    चंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल का इतिहास राज्य निर्माण आंदोलन के संघर्ष और बलिदान से जुड़ा है। कार्यकर्ताओं को संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के साथ उत्तराखंड के मूल मुद्दों को लेकर एकजुट होकर काम करना होगा।
    चारु तिवारी ने कहा कि आंदोलनकारियों के सपनों और विचारों को आगे बढ़ाना ही बाबा मोहन उत्तराखंडी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उत्तराखंड के मूल सवालों और पहाड़ के हितों को लेकर लगातार जनजागरण की जरूरत है।

    उक्रांद

    जिला अध्यक्ष कैलाश चंद सती ने कहा कि नोएडा महानगर में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाएगा। उत्तराखंड से जुड़े लोगों को एकजुट कर उनके हितों और समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।

    नई कार्यकारिणी का गठन

    नई कार्यकारिणी में प्रकाश जलाल को उपाध्यक्ष, दलजीत सिंह को संगठन मंत्री, बलवंत नेगी, विजय आनंद और नवीन चंद को महामंत्री बनाया गया। ललित पपने को मीडिया प्रभारी, जितेंद्र सती को कार्यालय प्रभारी, मनोज कुमार को सचिव और पंकज पांडे को आईटी प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई। सचिन चांडे, कुलदीप सिंह और हरीश जलाल को कार्यकारी सदस्य बनाया गया।

    बैठक में केंद्रीय पदाधिकारी महेश उपाध्याय, महेश मठपाल और दीपक भाकुनी तथा दिल्ली प्रदेश से दिनेश जोशी, खीमानंद सती, किशोर कबडवाल, हिमांशु शर्मा और हरक सिंह अधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
    कार्यक्रम में हरीश पाठक, रमेश पांडे, रविंद्र मेहरा, रमेश नेगी, चंदर शेखर रावत, प्रदीप नेगी, दिनेश पांडे और हितेश पांडे सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। अंत में कार्यकर्ताओं ने “बाबा मोहन उत्तराखंडी अमर रहें” और “जय उत्तराखंड” के नारों के साथ उत्तराखंड के हितों के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।

  • महिला सशक्तिकरण से ही बनेगा समृद्ध उत्तराखंड: धामी

    महिला सशक्तिकरण से ही बनेगा समृद्ध उत्तराखंड: धामी

    तीज उत्सव में मातृशक्ति से सीधा संवाद

    2.65 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

    महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय की ताकत देने पर जोर

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को भाऊवाला में तीज उत्सव के अवसर पर आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में प्रदेश की मातृशक्ति को उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति बताया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया और महिलाओं से सीधा संवाद कर उनकी अपेक्षाएं एवं सुझाव सुने। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सशक्त नारी-समृद्ध उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियां तभी अधिक प्रभावी बनती हैं, जब उनमें जनता की आवाज और अनुभव शामिल हों। उत्तराखंड की महिलाओं ने राज्य निर्माण के संघर्ष से लेकर प्रदेश की विकास यात्रा तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कठिन परिस्थितियों में परिवार और समाज को संभालने के साथ ही आज महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

    उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार, स्थानीय उत्पादों, कृषि, बागवानी, होमस्टे, उद्यमिता और तकनीक आधारित गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर, सम्मान, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करना है।
    आरक्षण से लेकर स्वरोजगार तक

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

    महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे मंच विकसित किए जा रहे हैं। वहीं ‘ड्रोन दीदी’, ‘सोलर सखी’ और ‘महिला सारथी’ जैसी पहल महिलाओं को आधुनिक तकनीक और नए आर्थिक अवसरों से जोड़ रही हैं।
    केंद्र की योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को गति

    धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है। उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, लखपति दीदी और मिशन शक्ति जैसी योजनाओं ने महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की शिक्षा, स्वरोजगार, कौशल विकास, आजीविका, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर काम कर रही है। ईजा-बोई शगुन, महालक्ष्मी किट, नंदा गौरा योजना, पोषण योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने तीज पर्व और स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सम्मानित नागरिक बनाने के साथ उन्हें निर्णय लेने वाली शक्ति और नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना है।

    कार्यक्रम में विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

  • सरकारी नीतियों में छात्रों की राय होगी अहम

    सरकारी नीतियों में छात्रों की राय होगी अहम

    सीएम धामी बोले, छात्रों के साथ संवाद के रास्ते खुले

    मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम

    देहरादून। देश के विभिन्न हिस्सों में जारी युवा आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में संवाद किया।
    इस अवसर पर उन्होंने “मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन” पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली “मेरे सपनों का उत्तराखण्ड: एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण” विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

    आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का NEET, JEE, CLAT, SAT जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया।
    मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

    संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र – छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि AI हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर AI की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

    इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष गोविंद बिष्ट, सचिव शिक्षा  ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, गोविंद राम जायसवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • सड़कों के गड्ढों पर चलेगा अभियान, 15 अक्टूबर तक पूरा होगा काम

    सड़कों के गड्ढों पर चलेगा अभियान, 15 अक्टूबर तक पूरा होगा काम

    जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, आपदा प्रबन्धन, जन-जन के द्वार कार्यक्रम, सत्यापन अभियान, गड्ढा मुक्त सड़क जैसे विभिन्न विषयों पर दिशा निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दृष्टिगत सतर्कता बढ़ाते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने फोन चालू रखें और किसी भी परिस्थिति में संपर्क से बाहर न रहें। किसी भी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एवं तैयारियां सुनिश्चित की जाएं, ताकि मानसून के दौरान आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून के दौरान आपदा अथवा अत्यधिक वर्षा के कारण जहां-जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, मार्ग अवरुद्ध या टूटे हैं तथा ड्रेनेज सिस्टम में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई है, उनका जिलाधिकारी स्तर पर विस्तृत विवरण तैयार किया जाए। उन्होंने कहा ऐसे स्थानों का चिन्हीकरण कर मानसून समाप्त होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों, मार्गों एवं ड्रेनेज व्यवस्था के पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान शुरू किया जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अपने-अपने जिलों में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करते हुए समिति गठित करें और कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून समाप्त होने के बाद 15 अक्टूबर तक किसी भी स्थिति में प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में मानसून के बाद और तेजी लाई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों एवं ग्रामों में अभी तक इन शिविरों का आयोजन नहीं हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कैंप आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये शिविर महज औपचारिकता नहीं, बल्कि आमजन की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान का माध्यम हैं।

    मुख्यमंत्री ने 1905 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राज्यभर में चल रहे सत्यापन अभियान में भी तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं में अपात्र लोगों का चिन्हीकरण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने राज्य में स्टेट सेक्टर फिजिकल वेरिफिकेशन में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत राज्यभर में 5 वर्ष की अवधि पूर्ण कर चुकी एवं खराब स्थिति वाली सड़कों को चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सड़कों की स्थिति का आकलन कर उनके डामरीकरण एवं सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही, आवश्यकता के अनुसार इन सड़कों को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाए। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर एवं सुगम सड़क सुविधा सुनिश्चित हो सके।

    मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि घोषणाओं से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा एवं मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सकें और उनका लाभ आमजन तक पहुंच सके।

    मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के बाद स्वच्छता अभियान में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाते हुए अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री एवं तस्करी पर कड़ी कार्रवाई करने तथा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के भी निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को कृषि, बागवानी एवं पशुपालन से जुड़ी योजनाओं पर विशेष ध्यान देते हुए अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इनसे जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं प्रभावी तरीके से किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों तक पहुंचाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सके।

    इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, वर्चुअल माध्यम से आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, गढ़वाल आनंद स्वरूप, आईजी निवेदिता कुकरेती, राजीव स्वरूप, एवं सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक मौजद रहे।

  • तमक गदेरे में सैलाब का तांडव, तिनके की तरह बहा बेली ब्रिज; एक लापता

    तमक गदेरे में सैलाब का तांडव, तिनके की तरह बहा बेली ब्रिज; एक लापता

    ज्योर्तिमठ-मलारी मोटर मार्ग पर आपदा ने किया नुकसान

    जोशीमठ। सोमवार की सांय करीब पौने छह बजे  ज्योर्तिमठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक गदेरे में अचानक आयी बाढ़ से नवनिर्मित बेली ब्रिज तिनके की तरह बह गया। तमक गदेरे में अचानक आयी बाढ़ की वजह बादल का फटना बताया जा रहा है।

    पुल के बहने के अलावा GREIF का स्कॉर्पियो वाहन संख्या 24 BE 16058, बोलेरो कैंपर संख्या 23 B 15947 तथा एक जेसोबी भी प्रभावित हुए। इस दौरान स्कॉर्पियो चालक NK पंकज कुमार बह गया।  चालक की तलाश में रेस्क्यू अभियान जारी है। स्कॉर्पियो वाहन को सुरक्षित साइड किया गया है।

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    सूचना मिलते ही चमोली पुलिस, SDRF एवं NDRF की टीमें तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया।
    मौके पर भारी बारिश एवं अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू कार्य में कठिनाई आ रही है। परिस्थितियों को देखते हुए रेस्क्यू अभियान को सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा रहा है तथा प्रातः पुनः व्यापक स्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया जाएगा।

    सुरक्षा की दृष्टि से सुरईथोटा से तमक की ओर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। साथ ही, धौलीगंगा नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सूचित किया जा रहा है।

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    जल विद्युत परियोजनाओं में कार्यरत संबंधित कंपनियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

  • शिक्षा मंत्री डाॅ. रावत ने पौड़ी से किया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का शुभारम्भ

    शिक्षा मंत्री डाॅ. रावत ने पौड़ी से किया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का शुभारम्भ

    पाबौं, सांकरसैण व पौड़ी में हजारों लोगों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग

    आगामी 15 अगस्त तक सभी शिक्षण संस्थानों में आयोजित होगी तिरंगा यात्रा

    श्रीनगर/देहरादून । प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पौड़ी से राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का भव्य शुभारम्भ किया। इस दौरान पाबौ, सांकरसैंण और पौड़ी में आयोजित तिरंगा यात्राओं में हजारों लोगों, जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

    तिरंगा यात्राओं के दौरान भारत माता की जय के जयघोष से पूरा क्षेत्र राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। सांकरसैण में डॉ. रावत ने कहा कि 15 अगस्त को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है। उन्होंने युवाओं सहित प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों, प्रतिष्ठानों एवं संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज अवश्य फहराएं और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन का अभियान बनाएं।

    पाबौं में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के दौरान डाॅ. रावत ने कहा कि तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान राष्ट्र की एकता, अखंडता और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि आगामी 15 अगस्त तक प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में भी तिरंगा यात्राओं सहित विभिन्न राष्ट्रभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    राजकीय महाविद्यालय पाबौ में डॉ. रावत ने छात्र-छात्राओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की शिक्षा, भविष्य की आकांक्षाओं, नवाचार एवं अन्य विषयों पर चर्चा करते हुए उनके विचार और सुझाव सुने। उन्होंने कहा कि युवाओं में प्रतिभा, ऊर्जा और नवाचार की अपार क्षमता है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर, आधुनिक संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने सपनों को साकार करते हुए उत्तराखंड और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

    इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष कमल किशोर रावत, मंडल अध्यक्ष विमल नेगी, जनप्रतिनिधिगण, पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।