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Wednesday, March 11, 2026
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उत्तराखंड की दीनदयाल योजना को गुजरात की सराहना

अध्ययन हेतु पहुंचा गुजरात का प्रतिनिधिमंडल

हल्द्वानी। हाल ही में गुजरात में आयोजित सहकारी सम्मेलन में उत्तराखंड में संचालित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना’ की व्यापक सराहना के बाद गुजरात के पंचमहल जिला सहकारी बैंक लिमिटेड का एक प्रतिनिधिमंडल इस योजना का अध्ययन करने उत्तराखंड पहुँचा।

मंगलवार को बैंक के उपाध्यक्ष प्रवीण सिंह उदे सिंह बारिया के नेतृत्व में संचालक मंडल एवं बैंक अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल शैक्षिक भ्रमण के उद्देश्य से उत्तराखण्ड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के मुख्यालय, हल्द्वानी पहुँचा, जहाँ बैंक के प्रबंध निदेशक प्रदीप मेहरोत्रा द्वारा आगंतुक प्रतिनिधियों का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर प्रबंध निदेशक ने प्रतिनिधिमंडल को उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक तथा प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति, कार्यप्रणाली एवं उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होंने विशेष रूप से ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना’ के बारे में विस्तार से अवगत कराया, जिसके अंतर्गत किसानों को ₹1 लाख तक का अल्पकालीन तथा ₹3 लाख तक का मध्यकालीन ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने इस किसान हितैषी योजना की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बताया।

इसके अतिरिक्त भारत दर्शन ऋण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) तथा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
शैक्षिक भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने नैनीताल जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, हल्द्वानी के मुख्यालय का भी दौरा किया तथा बैंक से संबद्ध प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (PACS) की कार्यप्रणाली, ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था एवं किसानों को प्रदान की जा रही सेवाओं की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के दौरान नेहा कान्त, सहायक महाप्रबंधक (आईटी) द्वारा सहकारी बैंकों में संचालित डिजिटल पहलों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया, जबकि महाप्रबंधक श्री सुरेश सिंह नेपलच्याल ने गुजरात के सहकारिता मॉडल से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन धीर सिंह, सहायक महाप्रबंधक द्वारा किया गया।

प्रतिनिधिमंडल का यह शैक्षिक भ्रमण दोनों राज्यों के सहकारी बैंकों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान, डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने, ग्रामीण बैंकिंग विस्तार तथा किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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