एचएसबीसी खातेदारों के नाम हमने पहले ही बता दिए थे: केजरी

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09_02_2015-kejriwal9नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि स्विट्जरलैंड स्थित एचएसबीसी बैंक के जिन भारतीय खातेदारों के नाम उजागर किए गए हैं उन नामों का खुलासा उन्होंने 9 नवंबर 2012 को अपने प्रेस कांफ्रेंस में कर दी थी।
केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि एक अंग्रेजी अखबार में छपे एचएसबीसी के भारतीय खातेदारों के नाम का खुलासा उन्होंने 2012 में ही उजागकर कर दिया था। लेकिन बड़ा सवाल है कि इस पर पहले कांग्रेस और फिर बाद में भाजपा ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
दोनों पार्टियों के कुछ लोग हमेशा कहते रहे हैं कि मैं काला धन रखने वाली लोगों की सूची अपने जेब में लिए घूमता हूं। भाजपा सरकार ने खातेदारों को कर चोरी में मदद करने वाले एचएसबीसी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
उधर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि गैरकानूनी खाताधारकों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि 350 खाताधारकों की जांच हो चुकी है जिसमें से 60 के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। इसके लगावा शेष खातों की 31 मार्च तक जांच कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि 4-5 साल पहले ही डाटा आ चुके थे लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद पिछले सात-आठ महीने में तेजी से काम हो रहे हैं।
वहीं मामले की जांच कर रहे एसआइटी प्रमुख जस्टिस एमबी शाह ने कहा कि नामों की जांच के बाद कानून सम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले हमारे पास 630 नाम थे और अब हमारे पास 640 या इसके लगभग अतिरिक्त नाम मिले हैं। सबकी जांच की जा रही है।
भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि एसआइटी इस तरह की जानकारी का संज्ञान लेने के लिए सक्षम प्राधिकार है। हमें भरोसा है वह उचित कदम उठाएगी। वहीं आप नेता अतिशी मर्लेना ने कहा कि आज जिन नामों के खुलासे की चर्चा हो रही है उसका हमने पहले ही खुलासा कर दिया था। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार काले धन को देश में लाने के लिए गंभीर नहीं है।
गौरतलब है कि काले धन को लेकर एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार, एचएसबीसी बैंक में दुनिया भर के 203 देशों के करीब एक लाख खाताधारक हैं जिनमें 1195 भारतीय भी हैं। इस सूची में इन खाताधारकों के 2006-07 में बैंक में जमा रकम का खुलासा भी हुआ है, जो करीब 25420 करोड़ रुपये हैं। हालांकि ये सारे पैसे काले धन नहीं हैं।
इस सूची में उद्योगपति, हीरों के व्यापारी, कांग्रेस के कई नेता और उनके परिवार से जुड़े लोग और अप्रवासी भारतीयों के नाम शामिल हैं। सूची में रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी (165 करोड़), उनके छोटे भाई अनिल अंबानी (165 करोड़) , मां कोकिला बेन, नरेश गोयल (116 करोड़) , डाबर का बर्मन परिवार (77.5 करोड़) , अनुराग डालमिया (59.5 करोड़) , मनु छाबरिया परिवार (784 करोड़) , महेश टीकमदास थारानी (271.5 करोड़) , कांग्रेस की पूर्व सांसद व व्यवसायी अनु टंडन (35.8 करोड़) , दत्ताराज वासुदेव सलगावकर और दीप्ति सलगावकर (32 करोड़) , कुलदीप सिंह ढींगरा और गुरबचन सिंह ढींगरा (25.6 करोड़) , लाडली प्रसाद जायसवाल (21.6 करोड़) , श्रवण गुप्ता और शिल्पी गुप्ता (209.56 करोड़) , एडमिरल एसएम नंदा और सुरेश नंदा (14.2 करोड़) , भद्रश्याम कोठारी परिवार (195.6 करोड़) , कुमार वेणु रमन (18.97 करोड़), भूषण लाल साहनी और परिवार (16.7 करोड़), मोहम्मद हसीब शॉ (13.2 करोड़), धर्मवीर तनेजा (10.08 करोड़), आलोक भारतीया (8.37 करोड़), विश्वनाथ गरोदिया (6.6 करोड़), बिजेंद्र कुमार पोद्दार (5.9 करोड़), कांग्रेस नेता नारायण राणे की पत्नी व बेटे, वसंत साठे के बेटे और बहू, बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे, अभिनेत्री महिमा चौधरी आदि के नाम प्रमुख हैं।

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