बेटा बस तू वापस आजा, मुझे पैसा नी चाहिए

0
81

देहरादून: बेटा, बस तू घर आजा, तेरे बिन घर-बार सब सूना, भूख लगे न प्यास, हम दोनों यहीं पर मेहनत-मजूरी कर जो रूखा-सूखा कमावेंगे, उसी में गुजारा कर लेंगे। मुझे पैसा नहीं बस तू चाहिए, तू मेरे बेटे तू। ऊह..। मुफलिसी में जी रहे परिवार के दुख को कम करने केदारनाथ के एक होटल में काम करने गए बेटे के न लौटने पर शिवराम के मुंह से जब ये अलफाज और आंख से आंसू निकले तो बगल बैठी रो रही पत्‍‌नी प्रियंका अपना गम भूल पति को ढाढस बंधाने लगी।

आंख में आंसू, लटका हुआ उदास चेहरा और हाथ में बेटे रंजीत की फोटो लिए पुलिस लाइन में बैठे शहर के अफसर कॉलोनी निवासी शिवराम ने बताया कि वह मजूरी कर परिवार की गुजर करता है। मुफलिसी के चलते परिवार की गुजर करना मुश्किल हुआ तो बड़े बेटे रंजीत ने उसकी मदद करने का मन बनाया। और.. पैसा कमाने के लिए केदारनाथ जाकर एक होटल पर काम करने लगा। आखिरी बार 16 जून को जब बात हुई तो रंजीत ने कहा था, ‘पापा मैं अगले महीने आऊंगा, आप बस मम्मी व छोटे का ख्याल रखना, पैसों की चिंता ना करें, मैं आऊंगा सारी दिक्कत दूर हो जाएगी। अच्छा पापा. ग्राहक आ गए हैं, मैं कल फोन करूंगा’।

शिवराम कहते हैं, उन्हें क्या पता था कि हम बस इंतजार करते रह जाएंगे और वो ‘कल’ जाने कहां चली जाएगी। यदि इस बात की जरा भी भनक होती कि वहां ये मंजर देखने को मिलेगा तो वह बेटे को कतई वहां नहीं भेजता। दोनों बाप-बेटे यहीं रहकर मेहनत-मजूरी करते और साथ रहकर थोड़ा ही सही, जितना मिलता उसी से गुजारा कर लेते, भूखे होते लेकिन साथ रहते। शिवराम ने बताया कि आज छह दिन हो गए, घर पर ताला लगा है। वह और कुछ रिश्तेदार, सभी मिलकर बस रंजीत को ढूंढ रहे हैं। वह कहते हैं ‘बस एक बार मेरा बेटा वापस आ जाए, फिर मैं उसे कहीं जाने नहीं दूंगा’।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here