उत्‍तराखंड में अवकाश पर रहे तीन लाख कर्मचारी, सख्ती रही बेअसर

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देहरादून। राज्य सरकार की सख्ती को दरकिनार करते हुए 10 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेशभर के करीब तीन लाख कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहे। इस दौरान कर्मचारी संगठनों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। वहीं, कई संगठनों से जुड़े कर्मचारियों ने अपने कार्यालयों में भी एकजुट होकर नारे लगाए।

उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक मंडल ने बुधवार को अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) राधा रतूड़ी के साथ वार्ता विफल होने के बाद सामूहिक अवकाश पर जाने का एलान कर दिया था। जबकि सरकार ने भी सख्ती दिखाते हुए आंदोलनकारी कर्मचारियों का अवकाश स्वीकृत न करने का आदेश जारी किया था। विभाग स्तर पर भी इस तरह के आदेश जारी होने के बावजूद आपात सेवाओं वाले विभागों को छोड़कर प्रदेशभर में आंदोलन का प्रभाव लगभग पूर्ण रूप से नजर आया।

देहरादून जिले में धारा 144 लागू होने और धरना-प्रदर्शन पर प्रतिबंध होने के बाद भी कर्मचारी लैंसडौन चौक स्थित धरनास्थल पर एकजुट हुए और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। एकजुट हुए कर्मचारियों ने सरकार की सख्ती को सीधे तौर पर चुनौती दे डाली। तमाम कार्यालयों में ताले लटके नजर आए और जो कार्यालय खुले भी दिखे, वहां भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

हालांकि धरना-प्रदर्शन व कर्मचारियों पर अंकुश लगाने के लिए जगह-जगह भारी फोर्स भी तैनात रही, मगर इसका कर्मचारियों पर कोई असर नहीं दिखा। प्रदर्शन के दौरान समिति के संयोजक मंडल में शामिल सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी, उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक ठा. प्रहलाद सिंह, संतोष रावत, अरुण पांडे, सुनील कोठारी, एसपी रणाकोटी, राकेश जोशी समेत विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य शामिल रहे।

 ये हैं दस सूत्री मांगें:
  • आवास भत्ते में 8,12,16 प्रतिशत वृद्धि।
  • वर्तमान एसीपी के स्थान पर एसीपी की पूर्व व्यवस्था लागू हो।
  • शिथिलीकरण नियमावली 2010 को यथावत लागू किया जाए।
  • पुरानी पेंशन की बहाली की जाए।
  • सरकारी अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था समाप्त हो।
  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4200 ग्रेड-पे।
  • वाहन चालकों को 4800 ग्रेड-पे दिया जाए।
  • उपनल कर्मियों को समान कार्य-समान वेतन।
  • 2005 से पहले के निगम कर्मचारियों को स्वायत्तशासी निकायों के समान पेंशन।