इंद्रेश जैसा एक विधायक भी विधानसभा पहुंच जाए तो वो बेईमानों की नाक में दम किए रखेगा

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भूपेन सिंह-

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कॉरपोरेट मीडिया कांग्रेस-बीजेपी के कारनामों से भरा है। आम जनता को विकल्पहीनता दिखाई जा रही है। ऐसे में इंद्रेश मैखुरी जैसा ईमानदार और जुझारू उम्मीदवार भी कर्णप्रयाग सीट से चुनाव मैदान में है। मुझे लगता है कि इंद्रेश जैसा एक विधायक भी विधानसभा पहुंच जाए तो वो बेईमानों की नाक में दम किए रखेगा। इलाक़े के लोग इंद्रेश को बेहद पसंद करते हैं, ज़रूरत इस बात की है कि उसे वोट देकर अपनी पसंद का भी इज़हार करें।  धनबल और बाहुबल को नकार दें।


वर्षों पहले छात्र राजनीति के दौर में हम अक्सर सामाजिक बदलाव के सपने देखा करते थे। तब उत्तराखंड आइसा में स्टूडेंट्स की एक बड़ी टीम हमारे साथ थी। बाद में मुझ जैसे कई लोग पत्रकारिता जैसे रास्तों पर निकल गए। कुछ लोग सुविधाभोगी राजनीति का हिस्सा बन गए। हेम पांडे मारा गया। योगेश भी दुनिया छोड़ गया। लेकिन कैलाश पांडे, केके बोरा और इंद्रेश मैखुरी जैसे तब के साथी आज भी बदलाव की राजनीति के पक्ष में मज़बूती से खड़े हैं।


देश-दुनिया की राजनीति की जो समझ इंद्रेश के पास है वो ठेकेदारी करने वाले राज्य के ज़्यादातर करप्ट नेताओं में संभव नहीं। इंद्रेश आइसा का राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुका है। उत्तराखंड के जन-आंदोलनों में लगातार सक्रिय रहा है। पत्र-पत्रिकाओं में लिखकर जनता के मुद्दों को उठाता है। इंद्रेश के विरोधी भी उसकी ईमानदारी से ख़ौफ़ खाते हैं।
मैं उत्तराखंड के सभी दोस्तों और बुद्धिजीवियों से अपील करता हूं कि वे कर्णप्रयाग की जनता से इंद्रेश को वोट देने का अनुरोध करें। शायद हमारा वक़्त इतना भी विकल्पहीन नहीं!

(लेखक भूपेन सिंह उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।)

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