Category: अपराध

  • हरिद्वार जमीन घोटाला: धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त निलंबित

    हरिद्वार जमीन घोटाला: धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त निलंबित

    हाईप्रोफाइल जांच में डीएम,पूर्व नगर आयुक्त व एसडीएम पाए गए थे दोषी
    सीएम के एक्शन से नौकरशाही में हलचल
    देखें निलंबन आदेश
    तथ्यों की पड़ताल के बाद आईएएस चौहान ने शासन को सौंपी थी जांच रिपोर्ट

     

    देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार नगर निगम के करोड़ों के जमीन घोटाले की हाई प्रोफाइल मामले में हरिद्वार डीएम, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी व एसडीएम अजयवीर को सस्पेंड कर दिया गया।

    सीएम ने अब इस मामले की जॉच विजिलेंस को सौंप दी है।

    सीएम धामी के इस कदम से सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई है।
    सचिव शैलेश बगौली की ओर से यह आदेश मंगलवार को जारी किए गए।

    सीएम धामी ने इस हाई प्रोफाइल घोटाले की जॉच करवाई थी।
    आईएएस रणवीर चौहान ने बीते गुरुवार को
    शहरी विकास सचिव नितेश झा को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। सौंपी गयी रिपोर्ट में तीन बड़े अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी करार दिया गया था।
    जांच में यह साफ हो गया था कि लगभग 33 बीघा भूमि के लैंड यूज व खरीद में तय नियमों व शर्तों का पालन नहीं किया गया।

    जांच रिपोर्ट में हरिद्वार के डीएम कर्मेन्द्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी व एसडीएम अजयवीर सिंह को दोषी करार दिया गया था। जांच रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों के खिलाफ यथोचित एक्शन लेने की बात भी कही गयी थी।

    मौजूदा समय में आईएएस वरुण चौधरी सचिवालय में अपर सचिव स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    जांच में यह भी सामने आया कि हरिद्वार नगर निगम ने कुछ करोड़ की कृषि भूमि का लैंड यूज 20 दिन के अंदर कर दिया। कूड़े के ढेर के समीप स्थित इस कृषि भूमि का कामर्शियल भू उपयोग में तब्दील होने पर जमीन की कीमत के दाम उछलकर 55 करोड़ तक पहुंच गए।

    इसके बाद अधिकारियों की मिलीभगत के बाद यह जमीन ऊंचे दामों पर खरीद ली गयी। जांच रिपोर्ट में जमीन खरीद के औचित्य पर गहरे सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा भू उपयोग परिवर्तन से सरकारी खजाने में लगी करोड़ों की चपत को भी गम्भीर प्रशासनिक लापरवाही मुद्दा माना गया।

    इससे पूर्व जांच अधिकारी आईएएस रणवीर सिंह चौहान ने हरिद्वार डीएम कर्मेन्द्र सिंह व पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के बयान दर्ज किये थे। और हरिद्वार जाकर अभिलेखों की जांच व मौका मुआयना किया था।

    नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की बंदरबांट के इस हैरतअंगेज कारनामे में तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के स्टेनो और डाटा एंट्री ऑपरेटर से भी पूछताछ की गई।

    इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच को लेकर पूरे प्रदेश में हलचल देखी जा रही है।

    पूर्व में यह कार्रवाई हुई

    गौरतलब है कि 1 मई को
    हरिद्वार नगर निगम द्वारा बाजार भाव से अधिक दर पर भूमि खरीदे जाने के प्रकरण में प्रथमद्रष्टया दोषी पाए गए चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था जबकि एक अन्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है ।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर नगर निगम हरिद्वार द्वारा सराय गांव में भूमि खरीद मामले में यह सख्त कार्रवाई की गई थी।

    इसके अलावा, मामले में एक कर्मचारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे।

    जांच में पाया गया कि उक्त भूमि की खरीद के लिए गठित समिति के सदस्य के रूप में हरिद्वार नगर निगम के अधिशासी अधिकारी श्रेणी-2 (प्रभारी सहायक नगर आयुक्त) रवीन्द्र कुमार दयाल, सहायक अभियन्ता (प्रभारी अधिशासी अभियन्ता) आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भटट और अवर अभियंता दिनेश चन्द्र काण्डपाल ने अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। इस आरोप में सभी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है ।

    प्रकरण में सेवा विस्तार पर कार्यरत सेवानिवृत्त सम्पत्ति लिपिक वेदपाल की भी संलिप्तता पायी गयी जिसके बाद सेवा विस्तार समाप्त करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं ।

    इसके साथ ही हरिद्वार नगर निगम की वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    कौन मास्टरमाइंड

    हरिद्वार नगर निगम की
    बिना किसी ठोस परियोजना के कूड़े के ढेर के बगल वाली 33 बीघा भूमि खरीद की फ़ाइल का तेजी से दौड़ना भी कई सवाल खड़े कर गया। इस अहम फाइल को किस का ‘बाहरी व मजबूत’ बल लग रहा था ,यह भी सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिरकार, कृषि भूमि का लैंड यूज चेंज कर चार गुना अधिक मूल्य पर जमीन की खरीद में पीछे किस मास्टरमाइंड का हाथ था, यह भी कौतूहल का विषय बना हुआ है।

    यह था मामला

    गौरतलब है कि नगर निगम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2024 में आईएएस वरुण चौधरी को नगर निगम का प्रशासक तैनात किया गया था।
    भूमि खरीद में नगर निगम एक्ट का पालन किया जाना था। जमीन खरीद से जुड़े शासन के नियम व निर्देश भी अपनी जगह मौजूद थे।
    बावजूद इसके एक कॄषि योग्य भूमि का लैंड यूज परिवर्तित कर कामर्शियल कर दिया। और सिर्फ कुछ करोड़ की जमीन आधे अरब से अधिक दाम में खरीद ली गयी। इस मामले में हवा के माफिक दौड़ी फाइल का पेट भी नियमबद्ध दस्तावेजों से नहीं भरा गया।

    निकाय विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि
    नगर निगम ने किस परियोजना या योजना के लिए कूड़े के ढेर के बगल वाली जमीन खरीदी। जमीन खरीद का क्या प्रयोजन था? यह भी साफ नहीं किया गया। चूंकि, कामर्शियल रेट पर करोड़ों की खरीदी गई जमीन पर निगम की कोई फ्लैट बनाने की योजना थी? या फिर मॉल आदि कोई अन्य कामर्शियल गतिविधि को अंजाम देना था ? यह भी सार्वजनिक नहीं किया गया। अलबत्ता गोदाम बनाने की बात अवश्य कही गयी।

    हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में एक बात यह भी सामने आ रही है कि सम्बंधित जिम्मेदार अधिकारियों ने भूमि खरीद की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

    हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में 1 मई को चार अधिकारियों के निलंबन के बाद जांच अधिकारी आईएएस रणवीर सिंह ने हरिद्वार के डीएम कर्मेन्द्र सिंह व पूर्व नगर प्रशासक हरिद्वार वरुण चौधरी से पूछताछ की थी।

    गौरतलब है कि हरिद्वार से जुड़े अधिकारियों ने यह कारनामा नगर निगम भंग होने के समय अंजाम दिया था। बाद में हरिद्वार की मेयर निर्वाचित होने पर किरण जैसल ने इस भूमि खरीद घोटाले की शिकायत सीएम धामी से की। सीएम धामी ने जांच आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह को सौंपी।

    ऐसे हुई 15 से 54 करोड़ रुपए कीमत

    भूमि का लैंड यूज कृषि था। तब उसका सर्किल रेट छह हजार रुपये के आस पास था। यदि भूमि को कृषि भूमि के तौर पर खरीदा जाता, तब उसकी कुल कीमत पंद्रह करोड़ के आस पास होती। लेकिन लैंड यूज चेंज कर खेले गए खेल के बाद भूमि की कीमत 54 करोड़ के आस पास हो गई। खास बात ये है कि अक्टूबर में एसडीएम अजयवीर सिंह ने लैंड यूज बदला और चंद दिनों में ही निगम निगम हरिद्वार ने एग्रीमेंट कर दिया और नवंबर में रजिस्ट्री कर दी।
    नगर निगम हरिद्वार ने नवंबर 2024 में सराय कूड़ा निस्तारण केंद्र से सटी 33 बीघा भूमि का क्रय किया था। ये भूमि 54 करोड़ रुपए में खरीदी थी जबकि छह करोड़ रुपए स्टाप ड्यूटी के तौर पर सरकारी खजाने में जमा हुए थे। 2024 में तब नगर प्रशासक आईएएस वरुण चौधरी थे। जमीन खरीद मामले में मेयर किरण जैसल ने सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की जांच सीनियर आईएएस अफसर रणवीर सिंह को सौंपी थी। अब इस मामले में जमीन को बेचने वाले किसान के खातों को फ्रीज करने के आदेश कर दिए गए हैं।

    लैंड यूज में खेल-

    अक्टूबर 2024 में एसडीएम अजयवीर सिंह ने जमीन का लैंड यूज बदला। और चंद दिनों में ही नगर निगम ने खरीद का एग्रीमेंट कर लिया। नवंबर में रजिस्ट्री पूरी हो गई। इस तेजी से भी कई सवाल खड़े हुए।

    पारदर्शिता का अभाव-

    जमीन खरीद के लिए कोई पारदर्शी बोली प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, जो सरकारी खरीद नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। साथ ही, नगर निगम ने इस खरीद के लिए शासन से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली।

    सशर्त अनुमति का दुरुपयोग

    जमीन को गोदाम बनाने के लिए धारा 143 के तहत सशर्त अनुमति दी गई थी, जिसमें शर्त थी कि यदि भूमि का उपयोग निर्धारित प्रयोजन से अलग किया गया, तो अनुमति स्वतः निरस्त हो जाएगी। आरोप है कि इस जमीन का उपयोग कूड़ा डंपिंग के लिए किया गया, जो अनुमति का उल्लंघन हो सकता है।

    घोटाले में पूर्व नगर प्रशासक (एमएनए) वरुण चौधरी पर सर्किल रेट का दुरुपयोग कर सौदा करने का आरोप है। जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह और नगर निगम आयुक्त भी जांच के घेरे में हैं।

    इस तरह के बड़े सौदों में तहसील और नगर निगम की संयुक्त जांच अनिवार्य होती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। साथ ही, सर्किल रेट और लैंड यूज में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा।

    डीएम

    आदेशः-

    जनपद हरिद्वार के ग्राम सराय में नगर निगम हरिद्वार द्वारा क्रय की गई 2.3070 हैक्टेयर भूमि में की गई अनियमितता के सम्बन्ध में शहरी विकास विभाग द्वारा प्रकरण की प्रारम्भिक जांच हेतु श्री रणवीर सिंह चौहान (IAS), सचिव गन्ना चीनी विभाग उत्तराखण्ड शासन को जांच अधिकारी नामित किया गया। शहरी विकास विभाग के माध्यम से प्राप्त जांच अधिकारी की प्रारम्भिक जांच आख्या दिनांक 29-05-2025 में श्री वरूण चौधरी (LAS), तत्कालीन नगर आयुक्त, नगर निगम, हरिद्वार, हाल-अपर सचिव, उत्तराखण्ड शासन को अपने पदीय दायित्वों की अनदेखी करने, निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किये जाने, निगम के हितों की रक्षा नहीं किये जाने तथा नियमों का उल्लंघन करने का प्रथम दृष्टया उत्तरदायी पाया गया है, जिसके दृष्टिगत यह स्थापित होता है कि उनके विरूद्ध लगाये गये आरोप प्रथम दृष्ट्या इतने गम्भीर हैं, कि उनके स्थापित हो जाने के फलस्वरूप, उन्हें अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 में उल्लिखित वृहद दण्ड दिया जा सकता है।

    अतः अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम-3 (1) (a) में प्रदत्त शक्ति के अधीन श्री वरूण चौधरी (IAS) को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुये उनके विरूद्ध अनुशासनिक/विभागीय कार्यवाही संस्थित किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं।

    2-श्री वरूण चौधरी (IAS) को निलम्बन अवधि के दौरान अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम-4 में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन जीवन निर्वाह एवं अन्य भत्ते अनुमन्य होंगे।

    3-श्री वरूण चौधरी (IAS) के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही हेतु आरोप-पत्र निर्गत किये जाने एवं जॉच अधिकारी नियुक्त किये जाने के सम्बन्ध में पृथक से कार्यवाही की जायेगी।

    4-श्री वरूण चौधरी (IAS) निलम्बन अवधि में सचिव-कार्मिक एवं सतर्कता विभाग, उत्तराखण्ड शासन क

    डीएम

    आदेशः-

    जनपद हरिद्वार के ग्राम सराय में नगर निगम हरिद्वार द्वारा क्रय की गई 2.3070 हैक्टेयर भूमि में की गई अनियमितता के सम्बन्ध में शहरी विकास विभाग द्वारा प्रकरण की प्रारम्भिक जांच हेतु श्री रणवीर सिंह चौहान (IAS), सचिव गन्ना चीनी विभाग उत्तराखण्ड शासनको जांच अधिकारी नामित किया गया। शहरी विकास विभाग के माध्यम से प्राप्त जांच अधिकारी की प्रारम्भिक जांच आख्या दिनांक 29-05-2025 में श्री कर्मेन्द्र सिंह (IAS), तत्कालीन प्रशासक, नगर निगम, हरिद्वार /जिलाधिकारी हरिद्वार को अपने पदीय दायित्वों की अनदेखी करने, प्रशासक के रूप में भूमि की अनुमति प्रदान करते हुये निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन न किये जाने तथा नगर निगम के हितों को ध्यान में नहीं रखने, शासनादेशों की अनदेखी करने एवं नगर निगम अधिनियम 1959 की सुसंगत धाराओं का उल्लघंन करने का प्रथम दृष्टया उत्तरदायी पाया गया है, जिसके दृष्टिगत यह स्थापित होता है कि उनके विरूद्ध लगाये गये आरोप प्रथम दृष्ट्या इतने गम्भीर हैं, कि उनके स्थापित हो जाने के फलस्वरूप, उन्हें अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 में उल्लिखित वृद्ध दण्ड दिया जा सकता है।

    अतः अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 3(1) (a) में प्रदत्त शक्ति के अधीन श्री कर्मेन्द्र सिंह (IAS) को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुये उनके विरूद्ध अनुशासनिक / विभागीय कार्यवाही संस्थित किये जाने की श्री राज्यपाल, सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं।

    2-श्री कर्मेन्द्र सिंह (IAS) को निलम्बन अवधि के दौरान अखिल भारतीय सेवायें (अनुशासनएवं अपील) नियम, 1969 के नियम 4 में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन जीवन निर्वाह एवं अन्य भत्ते अनुमन्य होंगे।

    3-श्री कर्मेन्द्र सिंह (IAS) के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही हेतु आरोप-पत्र निर्गत किये जाने एवं जांच अधिकारी नियुक्त किये जाने के सम्बन्ध में पृथक से कार्यवाही की जायेगी।

    4-श्री कर्मेन्द्र सिंह निलम्बन अवधि में सचिव-कार्मिक एवं सतर्कता विभाग, उत्तराखण्ड शासन के कार्यालय से सम्बद्ध रहेंगे।

    राज्यपाल के आदेश से,

    (शैलेश बगौली) सचिव

    डीएम

    जनपद हरिद्वार के ग्राम सराय में नगर निगम, हरिद्वार द्वारा क्रय की गई 2.3070 हैक्टेयर भूमि में की गई अनियमितता के सम्बन्ध में शहरी विकास विभाग द्वारा प्रकरण की प्रारम्भिक जांच हेतु श्री रणवीर सिंह चौहान (IAS), सचिव, गन्ना चीनी विभाग, उत्तराखण्ड शासन को जांच अधिकारी नामित किया गया। शहरी विकास विभाग के माध्यम से प्राप्त जांच अधिकारी की प्रारम्भिक जांच आख्या दिनांक 29-05-2025 में श्री अजयवीर सिंह (PCS), तत्कालीन उपजिलाधिकारी, हरिद्वार / हाल उपजिलाधिकारी, भगवानपुर, जनपद, हरिद्वार को उक्त भूमि के विक्रेताओं के साथ सम्भावित मिलीभगत कर अल्प अवधि में उ०प्र० जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा-143 के अन्तर्गत कृषि भूमि को अकृषक घोषित करने, इस हेतु उत्तराखण्ड राजस्व परिषद् द्वारा निर्धारित प्रक्रिया (SOP) का अनुपालन न किये जाने तथा अन्य संगत नियमों का उल्लंघन कर अपने पदीय दायित्वों का दुरूपयोग करने का प्रथम दृष्टया उत्तरदायी पाया गया है, जिसके दृष्टिगत यह स्थापित होता है कि उनके विरूद्ध लगाये गये आरोप प्रथम दृष्ट्या इतने गम्भीर हैं, कि उनके स्थापित हो जाने के फलस्वरूप, उन्हें उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 2003 के नियम-3 (ख) में उल्लिखित वृहद दण्ड दिया जा सकता है।

    अतः उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-2003 के नियम-4(1) में प्रदत्त शक्ति के अधीन श्री अजयवीर सिंह (PCS) को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुये उनके विरूद्ध अनुशासनिक/विभागीय कार्यवाही संस्थित किये जाने कीश्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं।

    2-निलम्बन अवधि में श्री अजयवीर सिंह (PCS) को वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-2 भाग 2 से 4 के मूल नियम 53 के प्रावधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि, अर्द्धवेतन पर देय अवकाश वेतन की राशि के बराबर देय होगी तथा उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि पर महंगाई भत्ता, यदि ऐसे अवकाश वेतन पर देय हैं, भी अनुमन्य होगा, किन्तु ऐसे अधिकारी को जीवन निर्वाह भत्ते के साथ कोई अन्य महंगाई भत्ता देय नहीं होगा, जिन्हें निलम्बन से पूर्व प्राप्त वेतन के साथ मंहगाई भत्ता अथवा अन्य मंहगाई भत्ते का उपान्तिक समायोजन प्राप्त नहीं था। निलम्बन के दिनांक को प्राप्त वेतन के आधार पर अन्य प्रतिकर भत्ते भी निलम्बन की अवधि में इस शर्त पर देय होंगे, जब इसका समाधान हो जाए कि उनके द्वारा उस मद में व्यय वास्तव में किया जा रहा है, जिसके लिये उक्त प्रतिकर भत्ते अनुमन्य हैं।

    3- उपर्युक्त प्रस्तर-2 में उल्लिखित जीवन निर्वाह भत्ते का भुगतान तभी किया जायेगा जब कि श्री अजयवीर सिंह इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे कि वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार या वृत्ति व्यवसाय में नहीं लगे हैं।

  • अंकिता भंडारी केस में बड़ा फैसला, तीनों दोषियों को उम्रकैद

    अंकिता भंडारी केस में बड़ा फैसला, तीनों दोषियों को उम्रकैद

    देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में आज न्यायालय द्वारा अहम फैसला सुनाया गया। न्यायालय ने तीनों दोषसिद्ध आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए साथ ही प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के साथ ही लगभग दो वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे अंकिता के परिजनों और समाज को कुछ राहत मिली है।

    विदित हो कि यह मामला 18 सितंबर 2022 की रात का है, जब पौड़ी गढ़वाल निवासी अंकिता भंडारी, जो ऋषिकेश के समीप स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थी, अचानक लापता हो गई थी। अंकिता के अचानक गायब होने के बाद उसके पिता ने स्थानीय प्रशासन और राजस्व पुलिस से संपर्क किया, लेकिन आरोप है कि उन्हें लगातार टाला जाता रहा। कई बार कार्यालयों के चक्कर काटने के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। राजस्व पुलिस की लापरवाही से पीड़ित परिजनों को काफी मानसिक कष्ट सहना पड़ा।

    यह मामला तब चर्चा में आया जब अंकिता की गुमशुदगी को लेकर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में तीव्र प्रतिक्रिया सामने आई। जब लोगों में रोष बढ़ा तो मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज की और वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है, को हिरासत में लिया गया। उसके साथ ही उसके दो अन्य सहयोगी – सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।

    पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा दिए गए बयान के आधार पर पुलिस ने चीला नहर से अंकिता का शव बरामद किया। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड समेत देशभर में आक्रोश की लहर दौड़ा दी थी। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की थी और कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी किए गए थे।

    मामले की सुनवाई लगातार न्यायालय में चलती रही और अनेक साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर अदालत ने यह सिद्ध पाया कि पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता ने मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। आज के फैसले में अदालत ने तीनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।

    इस निर्णय से यह संदेश जाता है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, दोष सिद्ध होने पर उसे सजा अवश्य मिलती है। वहीं, अंकिता भंडारी के माता-पिता और शुभचिंतकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण न्यायिक उपलब्धि है, जिन्होंने पिछले दो वर्षों से लगातार न्याय के लिए संघर्ष किया।

    अदालत का यह फैसला न सिर्फ अंकिता को न्याय दिलाने का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महिला सुरक्षा और न्याय के क्षेत्र में समाज और न्याय प्रणाली की जिम्मेदारी कितनी अहम है।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड: पुलकित, सौरभ और अंकित दोषी करार

    अंकिता भंडारी हत्याकांड: पुलकित, सौरभ और अंकित दोषी करार

    अंकिता भंडारी मर्डर केस में तीन साल बाद इंसाफ: रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य समेत तीनों आरोपी दोषी करार

    उत्तराखंड के बहुचर्चित और संवेदनशील अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार तीन साल बाद इंसाफ मिला है। इस मामले ने न सिर्फ उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आज कोटद्वार की स्थानीय अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया है। अदालत अब जल्द ही इन दोषियों को सजा सुनाएगी।

    यह मामला तीन साल पुराना है, और इसकी सुनवाई को लेकर राज्य भर में जनमानस की गहरी रुचि रही है। लोगों की नजरें लगातार कोर्ट की कार्यवाही पर बनी हुई थीं। फैसले वाले दिन कोर्ट परिसर में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। किसी भी संभावित अव्यवस्था को रोकने के लिए कोर्ट परिसर के 200 मीटर के दायरे को पुलिस ने पूरी तरह से सील कर दिया। केवल वकीलों, केस से जुड़े पक्षकारों और आवश्यक स्टाफ को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई थी। इस सुरक्षा व्यवस्था से साफ था कि प्रशासन इस मामले की संवेदनशीलता को भलीभांति समझ रहा था।

    मामला क्या था?

    19 वर्षीय अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी जिले की रहने वाली थीं। वे ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही थीं। यह रिजॉर्ट पुलकित आर्य के स्वामित्व में था, जो एक पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का पुत्र है।

    18 सितंबर 2022 को एक भयावह घटना हुई। पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता भंडारी की हत्या कर दी थी। तीनों आरोपियों ने अंकिता को चीला नहर में धक्का देकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

    इस हत्या के पीछे जो वजह सामने आई, उसने पूरे समाज को शर्मसार कर दिया। अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले विशेष ग्राहकों को ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन अंकिता ने इस अमानवीय और अपमानजनक मांग का विरोध किया। उसका विरोध ही उसकी जान का कारण बन गया।

    घटना के सामने आने के बाद भारी जनाक्रोश देखने को मिला। पुलकित आर्य को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया और प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    न्यायिक प्रक्रिया

    इस संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया लगभग दो साल आठ महीने तक चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने पूरी निष्ठा और तैयारी के साथ केस को आगे बढ़ाया। कुल 47 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए गए। सभी गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

    30 मई 2025 को अदालत ने अंतिम बहसें सुनने के बाद फैसला सुनाया और दोषियों के विरुद्ध सजा की घोषणा की प्रक्रिया आरंभ की। अब दोषियों को सजा सुनाने की तारीख तय की जा रही है।

    पीड़ित परिवार की उम्मीदें

    इस मामले में पीड़ित परिवार ने लगातार न्याय की गुहार लगाई और आखिरकार उन्हें इस फैसले के रूप में राहत मिली है। पूरे राज्य और देश भर की जनता इस मामले की हर सुनवाई पर नजर बनाए हुए थी। आज के फैसले ने उन सभी लोगों की उम्मीदों को बल दिया है, जो न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखते हैं।

    अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि दोषियों को कितनी सख्त सजा दी जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के अमानवीय कृत्यों को दोहराने से रोका जा सके। यह फैसला केवल एक पीड़िता के लिए न्याय नहीं है, बल्कि समाज के उस वर्ग के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो अन्याय और शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज उठाता है।

  • देहरादून: 500 किलो मिलावटी पनीर जब्त

    देहरादून: 500 किलो मिलावटी पनीर जब्त

    देहरादून। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 500 किलो मिलावटी पनीर जब्त किया । यह पनीर न केवल खाद्य सुरक्षा मानकों के खिलाफ था, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता था।

    सूचना के आधार पर जिला FDA अधिकारी मनीष सयाना और रमेश सिंह ने स्थानीय पुलिस चौकी इंचार्च निरंजनपुर मंडी प्रमोद भंडारी की टीम के साथभंडारी बाग क्षेत्र में चेकिंग अभियान चला रही थी।

    उन्हें एक सफेद हुंडई इयोन कार वैन संदिग्ध हालत में दिखाई दी। कार को रोका गया और उसकी तलाशी ली गई।
    तलाशी के दौरान कार के डिग्गी तथा सीट मै से बिना किसी ठंडा रखने की व्यवस्था के लगभग 500 किलो पनीर बरामद किया गया, जिसे बेहद अस्वच्छ प्लास्टिक की बोरियों से ढककर और खुले में ढोया जा रहा था। मौके पर पनीर की भौतिक जांच की गई और प्रारंभिक दृष्टया यह मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया।

    देहरादून

    वाहन मै पनीर स्वामी मोहम्मद इरशाद पुत्र खलील अहमद नामक व्यक्ति मौजूद था, जो कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका — न निर्माण स्थल का प्रमाण, न ही वितरण का रजिस्ट्रेशन अथवा ब्रांडिंग संबंधी जानकारी।

    FDA अधिकारियों के अनुसार, पनीर जैसे दुग्ध उत्पादों को उचित तापमान (2°C से 8°C) में संग्रहित और परिवहन किया जाना अत्यंत आवश्यक होता है। यदि ऐसा न किया जाए तो यह उत्पाद जल्दी खराब हो सकते हैं और उसमें हानिकारक बैक्टीरिया उत्पन्न हो सकते हैं, जो फूड पॉयजनिंग, डायरिया, टायफॉइड, और हड्डियों की कमजोरी जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। पनीर के सैंपल मौके पर लेकर परीक्षण के लिए राज्य खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं, बाकी लगभग 500 kg पनीर को ट्रेचिंग ग्राउंड कारगी चौक में नष्ट किया। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    FDA आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा होगी कड़ी कार्रवाई

    FDA आयुक्त डॉ आर राजेश कुमार ने कहा “मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ हमारी नीति स्पष्ट और कठोर है। ऐसी सामग्री उपभोक्ताओं की जान से खिलवाड़ है। हम प्रदेश भर में नियमित अभियान चला रहे हैं और यह बरामदगी हमारे उसी प्रयास का हिस्सा है। विभाग ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी खेप को बाजार में पहुँचने से रोकने में सफल रही, बल्कि यह भी दर्शाती है कि राज्य प्रशासन अब खाद्य सुरक्षा को लेकर अत्यधिक संवेदनशील और सख्त हो चुका है। गर्मी के मौसम में जब खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होते हैं, ऐसे में मिलावटखोरी और लापरवाही से स्वास्थ्य पर जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।

    FDA के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का बयान

    FDA के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा “यह बरामदगी इस बात का प्रमाण है कि कुछ लोग अभी भी गैरकानूनी तरीके से बाजार में नकली और घटिया खाद्य उत्पाद खपाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन विभाग सतर्क है और ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। देहरादून सहित समूचे राज्य में खाद्य सुरक्षा पर निगरानी और तेज़ की जा रही है।”

    FDA ने की जनभागीदारी की अपील

    विभाग ने आमजन से यह भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी दुकान, ढाबे, होटल, डेयरी या अन्य खाद्य इकाई में संदिग्ध गतिविधि नज़र आती है, तो वे तत्काल FDA की हेल्पलाइन या नजदीकी खाद्य सुरक्षा अधिकारी को इसकी सूचना दें। किसी भी शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

  • रुड़की में मुठभेड़ के बाद चेन लुटेरे गिरफ्तार, तीन घंटे में सात वारदातें हुईं बरामद

    रुड़की में मुठभेड़ के बाद चेन लुटेरे गिरफ्तार, तीन घंटे में सात वारदातें हुईं बरामद

    रुड़की में चेन लुटेरे मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, तीन घंटे में सात लूट की वारदातों का किया खुलासा

    रुड़की में तीन घंटे के भीतर सात अलग-अलग लूट की वारदातों को अंजाम देने वाले तीन बदमाशों को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंसूरपुर में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों में साहिल, राजेश कुमार और अभी कुमार शामिल हैं, जो दिल्ली के संगम विहार इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ये बदमाश उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमाओं पर सक्रिय थे और यहां लूट की कई घटनाओं को अंजाम दे रहे थे।

    पूर्व पार्षद कार्यालय में लूट का प्रयास, महिला से चेन लूटने का मामला भी शामिल

    पुलिस के मुताबिक, ये तीनों बदमाश रुड़की में पूर्व पार्षद के कार्यालय में लूट का प्रयास कर चुके हैं। इसके अलावा, एक महिला से उसकी चेन भी छीनने का आरोप इनपर है। पुलिस को बदमाशों के बारे में कई शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया।

    मंसूरपुर में हुई मुठभेड़, पुलिस ने किया पीछा

    उत्तराखंड पुलिस ने बदमाशों का लगातार पीछा किया और मंसूरपुर पहुंचकर उनसे मुठभेड़ की। इस मुठभेड़ में तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए। बताया जा रहा है कि मंसूरपुर में ही इन बदमाशों ने एक पेट्रोल पंप के सेल्समैन से 15 हजार रुपए की लूट भी की थी।

    पुलिस ने पूछताछ में खुलासा किया कि ये तीनों बदमाश शनिवार को तीन घंटे के भीतर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में सात अलग-अलग लूट की वारदातों को अंजाम दे चुके थे। उन्होंने मंसूरपुर के पेट्रोल पंप के सेल्समैन को बंधक बनाकर 15 हजार रुपए लूटे थे। इसके अलावा तीन बाइक सवार लोगों से भी नगदी और मोबाइल फोन छीने थे।

    रुड़की पुलिस की भूमिका और बरामदगी

    रुड़की पुलिस भी इस मामले में सक्रिय रही और बदमाशों से कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस टीम ने महिला से लूटी गई चेन भी आरोपी बदमाशों के कब्जे से बरामद की है। रुड़की सिविल लाइन कोतवाली की पुलिस टीम मंसूरपुर थाने में डेरा डाले हुए है ताकि बदमाशों से और भी अहम जानकारियां प्राप्त की जा सकें।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपितों के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही पुलिस उनकी अन्य संदिग्ध गतिविधियों की भी जांच कर रही है। माना जा रहा है कि ये गैंग अन्य इलाकों में भी सक्रिय हो सकता है, इसलिए पुलिस इनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए आगे भी कार्रवाई करेगी।

    इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं और पुलिस प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि ऐसे अपराधी जल्द ही सलाखों के पीछे पहुंचें और आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें।

  • कनाडा स्टडी वीजा फ्रॉड: युवती से 8 लाख की ठगी, एसएसपी को सौंपी गई शिकायत

    कनाडा स्टडी वीजा फ्रॉड: युवती से 8 लाख की ठगी, एसएसपी को सौंपी गई शिकायत

    कनाडा के स्टडी वीजा के नाम पर युवती से आठ लाख की ठगी, एसएसपी से की शिकायत, जांच के आदेश

    गदरपुर (ऊधमसिंहनगर)।
    उच्च शिक्षा के लिए कनाडा जाने का सपना संजोए एक युवती को स्टडी वीजा दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी का शिकार बना दिया गया। आरोपी ने शुरुआत में भरोसा जीतते हुए 11 लाख रुपये की मांग की और कुछ रकम लौटाकर बाकी आठ लाख हड़प लिए। अब युवती ने एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने गदरपुर थानाध्यक्ष को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    गदरपुर क्षेत्र के कुआंखेड़ा गांव निवासी गीता रानी पुत्री कश्मीर चंद ने बताया कि वर्ष 2023-24 में वह उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से कनाडा जाना चाहती थी। इस दौरान उसकी मुलाकात गदरपुर निवासी एक व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को वीजा एजेंट बताया और भरोसा दिलाया कि वह उसका कनाडा का स्टडी वीजा आसानी से लगवा देगा।

    आश्वासन और भरोसे के आधार पर आरोपी ने गीता से कुल 11 लाख रुपये की मांग की। भविष्य संवारने की उम्मीद में युवती और उसके परिवार ने यह रकम बड़ी मुश्किल से जुटाकर आरोपी को सौंप दी। कुछ समय तक सब कुछ सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जब स्टडी वीजा नहीं मिला, तो युवती को संदेह हुआ।

    जब गीता ने आरोपी से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा, तो वह टालमटोल करने लगा और बहाने बनाने लगा। परेशान होकर पीड़िता ने मामले की शिकायत गदरपुर थाना पुलिस से की। 10 फरवरी 2024 को पुलिस की मध्यस्थता से दोनों पक्षों में एक समझौता हुआ, जिसके तहत आरोपी ने तीन लाख रुपये लौटा दिए और शेष आठ लाख रुपये जल्द लौटाने का वादा किया।

    हालाँकि, समझौते के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत गया, लेकिन आरोपी ने अब तक शेष राशि नहीं लौटाई। बार-बार कहने के बाद भी वह न तो कोई संतोषजनक जवाब दे रहा है और न ही रकम लौटाने के लिए तैयार है।

    थक-हार कर अब युवती ने न्याय की उम्मीद में सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय का रुख किया। वहाँ उसने एसएसपी मणिकांत मिश्रा से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और शिकायती पत्र सौंपा।

    पीड़िता ने मांग की कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उसकी मेहनत की कमाई को वापस दिलाया जाए। इस पर एसएसपी ने तुरंत गदरपुर थानाध्यक्ष को मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    शिक्षा के नाम पर बढ़ रही ठगी, सतर्क रहने की जरूरत

    यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत धोखाधड़ी की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे शिक्षा और विदेश जाने के नाम पर युवा वर्ग को ठगने का चलन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अभिभावकों और युवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी एजेंट या व्यक्ति पर आंख मूंदकर विश्वास करने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की जांच करना, लिखित अनुबंध करना और कानूनी दस्तावेजों की पुष्टि कराना बेहद जरूरी है।

    कनाडा को शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी देशों में माना जाता है, जहाँ हर वर्ष हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं। इसी लोकप्रियता और आकर्षण का फायदा उठाकर कई फर्जी एजेंट और दलाल भोले-भाले छात्रों को निशाना बना रहे हैं। गीता रानी भी ऐसे ही एक जाल में फंस गई, जिसने कनाडा जैसे प्रतिष्ठित देश में पढ़ाई का सपना देखा था। मगर उसके इस सपने को एक धोखेबाज ने ठग का रूप देकर चकनाचूर कर दिया। कनाडा जैसे देश में पढ़ाई की चाह अब उसके लिए धोखे और मानसिक पीड़ा की वजह बन चुकी है।

  • पहाड़गंज की सड़कों पर मचा उत्पात, युवकों के बीच फायरिंग और चाकू चलने का आरोप

    पहाड़गंज की सड़कों पर मचा उत्पात, युवकों के बीच फायरिंग और चाकू चलने का आरोप

    पहाड़गंज में खाना खाने के बाद टहल रहे युवकों के दो गुटों में हिंसक झड़प, फायरिंग और चाकूबाजी का आरोप

    रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर): शहर के पहाड़गंज क्षेत्र में गुरुवार रात खाना खाने के बाद टहल रहे युवकों के दो गुटों के बीच मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी झड़प में बदल गई। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला, फायरिंग और चाकू से वार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के आठ युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    झगड़े की शुरुआत: मामूली कहासुनी बनी हिंसा की वजह

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 16 मई की रात लगभग 11 बजे की है। पहाड़गंज निवासी सद्दाम पुत्र शरीफ ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह अपने दोस्तों संदीप और मोहित के साथ खाना खाने के बाद टहलने निकला था। इस दौरान वहां पर पहाड़गंज के ही निवासी विशाल, सौरभ, विपिन, पलविंदर और रम्पुरा निवासी प्रिंस पहुंचे। सद्दाम का आरोप है कि इन युवकों ने बिना किसी उकसावे के लोहे की रॉड, लाठी-डंडों से उन पर हमला कर दिया।

    इतना ही नहीं, सद्दाम ने दावा किया कि हमलावरों ने उस पर देशी तमंचे से फायरिंग भी की। गनीमत रही कि कोई गोली नहीं लगी। फायरिंग और चीख-पुकार की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो आरोपी युवक उन्हें जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए।

    दूसरा पक्ष भी पहुंचा थाने, लगाया चाकू से हमले का आरोप

    दूसरी ओर, उसी रात करीब साढ़े 11 बजे दूसरे पक्ष के सौरभ पुत्र इंद्रपाल ने भी पुलिस को तहरीर सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए। सौरभ ने बताया कि जब वह अकेले टहल रहा था, तभी संदीप, सद्दाम और मोहित वहां पहुंचे और उसे घेर लिया। तीनों ने मिलकर लाठी-डंडों से हमला किया और इसी दौरान सद्दाम ने चाकू से उस पर वार किया।

    सौरभ के अनुसार, हमलावरों ने उसे पकड़कर पहाड़गंज ढाल की ओर खींचते हुए ले जाने की कोशिश की, लेकिन वह किसी तरह खुद को छुड़ाकर जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहा। इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय लोग दहशत में आ गए।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर दर्ज की एफआईआर

    कोतवाल मनोज रतूड़ी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। कोतवाल ने कहा कि दोनों पक्षों के आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और मेडिकल रिपोर्ट तथा घटनास्थल के साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इलाके में तनाव, पुलिस ने बढ़ाई गश्त

    घटना के बाद पहाड़गंज और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से मांग की है कि दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्षेत्र में स्थायी पुलिस गश्त लगाई जाए।

    सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों से मिल रहे सुराग

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही घटना के समय मौजूद चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में दोनों पक्षों की पुरानी रंजिश की बात भी सामने आ रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी।

  • पेशकार को रिश्वत लेते विजिलेंस ने  किया गिरफ्तार

    पेशकार को रिश्वत लेते विजिलेंस ने किया गिरफ्तार

    पेशकार काम के एवज में मांग रहा था ₹25 हजार

    रुड़की। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की ट्रैप टीम ने अपर तहसीलदार कार्यालय में तैनात पेशकार रोहित को ₹10 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई सतर्कता विभाग द्वारा टोल फ्री नंबर 1064 पर प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता ने सरकारी प्रक्रिया में अनावश्यक अड़चन डालने और अवैध रूप से पैसे की मांग करने की जानकारी विभाग को दी थी, जिसके बाद विभाग ने योजना बनाकर यह कार्रवाई अंजाम दी।

    मामले की पूरी पृष्ठभूमि पर नज़र डालें तो, शिकायतकर्ता की बहन की कृषि भूमि से जुड़ा एक विवाद तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन था। इस मामले में 24 मार्च 2025 को तहसील न्यायालय द्वारा एकपक्षीय आदेश पारित किया गया था। उक्त आदेश से असंतुष्ट होकर शिकायतकर्ता द्वारा पुनः सुनवाई की मांग करते हुए 21 अप्रैल को एक रेस्टोरेशन प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। इस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई अथवा आदेश जारी कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के एवज में तहसील कार्यालय में तैनात पेशकार रोहित ने ₹25,000 की रिश्वत की मांग की थी।

    शिकायतकर्ता ने इस अवैध मांग के खिलाफ आवाज उठाते हुए किसी प्रकार की रिश्वत नहीं दी, बल्कि इसकी सूचना तत्काल सतर्कता विभाग को दे दी। विभाग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पूरी योजना बनाई और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में सोमवार को ट्रैप की कार्रवाई की गई। योजना के अनुसार, रोहित को ₹10 हजार की रिश्वत लेते ही रंगे हाथों धर दबोचा गया।

    गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम ने रोहित के आवास की भी तलाशी ली। साथ ही उसकी चल-अचल संपत्तियों की जांच की जा रही है कि कहीं उसने अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति तो नहीं अर्जित की है। विजिलेंस विभाग का कहना है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपनी पदस्थ शक्ति का गलत उपयोग कर रिश्वत मांगता है या अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस सफल ट्रैप कार्रवाई के बाद सतर्कता निदेशक डॉ. वी. मुरूगेसन ने टीम की सराहना करते हुए उसे नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था की स्थापना के लिए आम नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है।

    सतर्कता विभाग ने जनता से अपील की है कि यदि किसी भी सरकारी विभाग में कोई कर्मचारी पदीय कार्यों के बदले रिश्वत की मांग करता है या भ्रष्ट आचरण में संलिप्त पाया जाता है, तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को टोल फ्री नंबर 1064 या व्हाट्सएप नंबर 9456592300 पर दें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी और कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।

    यह कार्रवाई एक संदेश है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी स्तर पर लिप्त अधिकारी-कर्मचारी बख्शे नहीं जाएंगे।

  • चौकी प्रभारी एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

    चौकी प्रभारी एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

    विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई: एक लाख की रिश्वत लेते हुए चौकी प्रभारी रंगे हाथ गिरफ्तार
    जनता का शोषण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करेंगे – सीएम
    भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री धामी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक और बड़ी कार्रवाई
    धामी सरकार का 1064 विजिलेंस टोल फ्री नंबर बना प्रदेशवासियों के लिए वरदान

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध पूरी सख्ती के साथ काम कर रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को अमल में लाते हुए सरकार लगातार ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कस रही है जो जनता के साथ अन्याय कर रहे हैं या पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसी क्रम में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम ने एक पुलिस उपनिरीक्षक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार को विजिलेंस टीम ने देहरादून के पटेलनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आईएसबीटी चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक देवेन्द्र खुगशाल को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। बताया गया है कि एक व्यक्ति ने विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके भूमि विवाद के मामले की जांच चौकी प्रभारी के पास लंबित है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उपनिरीक्षक खुगशाल ने उस पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की धमकी दी और पांच लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस ने पहले मामले की गुप्त जांच की और आरोपों की पुष्टि होने पर तत्काल जाल बिछाकर कार्रवाई को अंजाम दिया।

    विजिलेंस की टीम ने पूरी योजना के तहत चौकी प्रभारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी वाकई भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त था। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उत्तराखण्ड सरकार भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगी और चाहे वह कोई भी अधिकारी या कर्मचारी हो, अगर वह जनता का शोषण करता है या कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    पिछले तीन वर्षों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कठोर कदम उठाए गए हैं। अब तक 150 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में जेल भेजा जा चुका है। ये सभी कार्रवाईयां इस बात का प्रमाण हैं कि धामी सरकार पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ताज़ा कार्रवाई की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखण्ड के संकल्प पर पूरी दृढ़ता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि “जो भी अधिकारी या कर्मचारी जनता का शोषण करेगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। जनता को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

    उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा जारी किया गया 1064 विजिलेंस टोल फ्री नंबर जनता के लिए एक प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। इस नंबर के माध्यम से प्रदेशवासी सीधे विजिलेंस से संपर्क कर सकते हैं और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इस व्यवस्था से जहां एक ओर आम जनता को सशक्त किया गया है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचारियों में भय का माहौल भी बना है।

  • रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया नाजिर, विजिलेंस ने किया गिरफ्तार

    रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया नाजिर, विजिलेंस ने किया गिरफ्तार

    दाखिल-खारिज के एवज में मांगी थी रिश्वत, रंगेहाथ गिरफ्तार

    टिहरी गढ़वाल। जनपद टिहरी गढ़वाल के तहसील धनोल्टी में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां तहसील में तैनात नाजिर वीरेन्द्र सिंह कैन्तुरा को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई सतर्कता अधिष्ठान, देहरादून की ट्रैप टीम द्वारा एक योजनाबद्ध तरीके से की गई, जो कि एक शिकायतकर्ता द्वारा दी गई सूचना पर आधारित थी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान को अवगत कराया कि उसकी पत्नी ने दिनांक 31 जनवरी 2025 को ग्राम छनाड़, तहसील थत्यूड़ जौनपुर, जिला टिहरी गढ़वाल में लगभग 1500 वर्ग मीटर भूमि खरीदी थी। इस भूमि की दाखिल-खारिज की प्रक्रिया नियमानुसार तहसील कार्यालय में चल रही थी, किंतु वहां तैनात नाजिर वीरेन्द्र सिंह कैन्तुरा इस प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा उत्पन्न कर रहा था।

    शिकायतकर्ता का आरोप था कि नाजिर कैन्तुरा ने दाखिल-खारिज में आपत्ति रिपोर्ट को जानबूझकर गलत तरीके से दर्ज किया, जिससे प्रक्रिया आगे न बढ़ सके। इसके बाद उसने शिकायतकर्ता से साफ तौर पर कहा कि यदि वह चाहता है कि आपत्ति हटाकर सही रिपोर्ट लगाई जाए और उसकी पत्नी के नाम भूमि दर्ज हो, तो उसे 15 हजार रुपये की रिश्वत देनी होगी।

    इस गंभीर आरोप की जांच करने और रिश्वतखोर कर्मचारी को पकड़ने के उद्देश्य से सतर्कता अधिष्ठान देहरादून की ट्रैप टीम सक्रिय हुई। योजना के अनुसार, टीम ने शिकायतकर्ता के सहयोग से तहसील धनोल्टी स्थित कार्यालय में जाल बिछाया और जैसे ही नाजिर वीरेन्द्र सिंह कैन्तुरा ने रिश्वत की राशि ली, टीम ने उसे रंगेहाथ धर दबोचा।

    गिरफ्तारी के तुरंत बाद सतर्कता टीम ने अभियुक्त नाजिर के आवास और अन्य संबंधित स्थानों पर छापेमारी भी शुरू कर दी। टीम यह भी जांच कर रही है कि अभियुक्त ने अपने सेवा काल में आय से अधिक संपत्ति तो नहीं अर्जित की है। इस संबंध में पूछताछ और दस्तावेजों की छानबीन की जा रही है।

    इस सफल कार्रवाई पर सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक वी. मुरूगेसन ने ट्रैप टीम की सराहना करते हुए उन्हें नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सहायता मिलेगी और आम जनता का विश्वास सरकारी तंत्र में बढ़ेगा।

    सतर्कता अधिष्ठान ने आम जनमानस से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्वत की मांग करता है, अथवा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करता है, तो उसकी सूचना तुरंत सतर्कता विभाग को दें। इसके लिए विभाग ने टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 और व्हाट्सएप नंबर 9456592300 जारी किया है, जिस पर जनता निर्भीक होकर शिकायत दर्ज करा सकती है। सतर्कता अधिष्ठान ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।