Category: अपराध

  • रिश्वत लेते दबोचे गए मुख्य कोषाधिकारी और एकाउंटेंट

    रिश्वत लेते दबोचे गए मुख्य कोषाधिकारी और एकाउंटेंट

    1.20 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

    नैनीताल। न्यायिक कर्मचारियों को एसीपी (वार्षिक कैरियर प्रगति) लाभ दिलाने के एवज में रिश्वत मांगना दो अधिकारियों को भारी पड़ गया। सतर्कता अधिष्ठान सैक्टर हल्द्वानी की ट्रैप टीम ने मुख्य कोषाधिकारी नैनीताल दिनेश कुमार राणा और एकाउंटेंट बसन्त जोशी को कुल 1.20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई नैनीताल कोषाधिकारी कार्यालय में की गई, जहां दोनों अधिकारी रिश्वत की रकम प्राप्त कर रहे थे।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा जनपद न्यायाधीश नैनीताल को एक प्रार्थना पत्र सौंपा गया था, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायत में कहा गया था कि वह स्वयं और उनके अन्य सहकर्मी, जो विभिन्न न्यायाधीशों के वैयक्तिक सहायक के पद पर कार्यरत हैं, उन्होंने एसीपी लाभ (वार्षिक कैरियर प्रगति योजना के अंतर्गत मिलने वाले वित्तीय लाभ) प्राप्त करने के लिए विधिवत आवेदन किया था। इस पर संबंधित अधिकारियों द्वारा एक समिति का गठन किया गया, जिसमें प्रथम अपर जिला जज हल्द्वानी को अध्यक्ष और प्रथम अपर जिला जज नैनीताल तथा मुख्य कोषाधिकारी को सदस्य नामित किया गया।

    समिति द्वारा समस्त मामलों की गहन समीक्षा की गई और उनकी संस्तुति के उपरांत उक्त प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए कोषाधिकारी कार्यालय को प्रेषित किया गया। लेकिन आरोप है कि कोषाधिकारी ने अपने अधीनस्थ एकाउंटेंट के माध्यम से शिकायतकर्ता और अन्य सहकर्मियों से पत्रावली पर हस्ताक्षर करने और एरियर की धनराशि जारी करने के एवज में प्रति कर्मचारी 30-30 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। इस प्रकार कुल चार कर्मचारियों से 1.20 लाख रुपये की मांग की गई थी।

    मामले की गंभीरता को भांपते हुए जनपद न्यायाधीश ने उक्त शिकायत को तत्परता दिखाते हुए सतर्कता अधिष्ठान को अग्रसारित कर दिया। इसके बाद सतर्कता अधिष्ठान ने शिकायत की जांच प्रारंभ की, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच के बाद विभाग ने तुरंत एक ट्रैप टीम का गठन किया, जिसने पूरी योजना बनाकर रिश्वत लेने की पुष्टि हेतु कार्रवाई की योजना तैयार की।

    पूर्व नियोजित योजना के अनुसार, शनिवार को जैसे ही कोषाधिकारी और एकाउंटेंट ने शिकायतकर्ता से 1.20 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार की, वैसे ही सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया गया और पूछताछ शुरू कर दी गई।

    फिलहाल दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और पूरे प्रकरण की जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, भविष्य में और भी कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा सकती है। मामले में और कौन-कौन शामिल है, इसकी तह तक पहुंचने के लिए जांच टीम साक्ष्य एकत्र कर रही है।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार की गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नैनीताल के प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • नैनीताल कांड में कोर्ट सख्त: एसएसपी को निगरानी के निर्देश, प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य

    नैनीताल कांड में कोर्ट सख्त: एसएसपी को निगरानी के निर्देश, प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य

    नैनीताल दुष्कर्म कांड: एसएसपी को जांच की निगरानी के कोर्ट आदेश

    हर 15 दिन में हाईकोर्ट को देनी होगी प्रगति रिपोर्ट

    पुलिस कार्यशैली की सराहना, प्रशासन व पालिका पर फिर फटकार

    नैनीताल में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को स्वयं मामले की जांच की निगरानी करने और प्रत्येक 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

    हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में पुलिस की अब तक की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय पुलिस की सक्रिय भूमिका के कारण हालात बिगड़ने से बचे। वहीं, कोर्ट ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही पर दोबारा नाराजगी जताई, यह कहते हुए कि अगर उनकी भूमिका ज़िम्मेदार होती, तो पुलिस पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।

    एसएसपी ने दी वर्चुअल उपस्थिति, कोर्ट को दी गई जांच की स्थिति की जानकारी

    सुनवाई के दौरान नैनीताल के एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए और उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि आरोपी पर पीड़िता की जाति के आधार पर अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी से कराई जा रही है।

    कोर्ट ने इस पर संतोष जताते हुए एसएसपी को निर्देशित किया कि वे पूरे मामले की विवेचना पर व्यक्तिगत निगरानी रखें और नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करें।

    पीड़ित पक्ष ने सीबीआई जांच और आरोपी के परिजनों पर कार्रवाई की मांग उठाई

    पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शिव भट्ट ने अदालत में एक हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर यह मांग की कि दुष्कर्म के इस मामले में आरोपी उस्मान के परिवार को भी अभियुक्त बनाया जाए। याचिका में कहा गया कि घटना एक गैराज में हुई थी, जहाँ पीड़िता को चाकू दिखाकर डराया गया। आरोप है कि आरोपी के परिजन साक्ष्य मिटाने, खून के धब्बे साफ करने और पीड़िता को धमकी देने जैसे गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस उनके डीएनए और फिंगरप्रिंट नहीं ले सकी है और ना ही उनकी मोबाइल लोकेशन की जाँच हुई है।

    अधिवक्ता ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 16, 29 और 30 के तहत आरोपी के परिजनों को भी अभियुक्त बनाए जाने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग अदालत से की।

    याचिका में यह भी कहा गया कि अब तक पीड़िता को किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया गया है। हाईकोर्ट ने इस पहलू पर भी संज्ञान लिया और राज्य सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

    आरोपी की पत्नी की याचिका पर कोर्ट ने दी प्रतिक्रिया

    मामले में आरोपी उस्मान की पत्नी हुस्न बानो की ओर से सुरक्षा दिए जाने और नोटिस का जवाब देने के लिए तीन महीने का समय दिए जाने की मांग की गई थी। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि जब याचिका पहले ही वापस ली जा चुकी है, तो अब उसकी कोई उपयोगिता नहीं रह गई है।

    नगर पालिका को फिर से कोर्ट की फटकार, नोटिस निरस्त करने की जानकारी दी

    इस मामले में यह पहला मौका नहीं है जब नगर पालिका और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कोर्ट ने सवाल उठाए हों। पहले भी हाईकोर्ट ने पालिका के ईओ और मजिस्ट्रेट की भूमिका को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। मंगलवार को हुई सुनवाई में नगर पालिका की ओर से बताया गया कि आरोपी उस्मान सहित कुल 62 लोगों को जारी किए गए नोटिस अब निरस्त कर दिए गए हैं।

    कोर्ट ने साफ कहा कि पालिका और प्रशासन की असंवेदनशीलता के कारण कानून-व्यवस्था पर दबाव बढ़ा, जिसका नतीजा पुलिस को झेलना पड़ा।

    हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप इस बात का स्पष्ट संकेत है कि न्यायपालिका इस मामले की गंभीरता को लेकर सतर्क है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाना चाहती है। एसएसपी को जांच की सीधी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपना और प्रगति रिपोर्ट की मांग करना, पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा सकता है। वहीं, यह मामला राज्य के प्रशासनिक तंत्र के भीतर मौजूद खामियों को भी उजागर करता है, जिनका समय रहते सुधार किया जाना आवश्यक है।

  • टिकट बुकिंग के बहाने ठगी करने वाली 28 वेबसाइटों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    टिकट बुकिंग के बहाने ठगी करने वाली 28 वेबसाइटों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    हेली बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी का भंडाफोड़: पुलिस ने 28 फर्जी वेबसाइटों को कराया बंद, विशेष टीम सोशल मीडिया पर भी रख रही नजर

    देहरादून। केदारनाथ यात्रा के लिए हेली सेवा की ऑनलाइन बुकिंग शुरू होते ही जहां श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया, वहीं साइबर अपराधी भी तुरंत सक्रिय हो गए। श्रद्धालुओं को ठगने के इरादे से कई फर्जी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया पेज तैयार किए गए, जो आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट की हूबहू नकल थे। इन वेबसाइटों के ज़रिए टिकट बुकिंग का झांसा देकर लोगों से ठगी की जा रही थी।

    साइबर ठगों की इस चाल को भांपते हुए उत्तराखंड साइबर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 28 फर्जी वेबसाइटों को बंद कराया है। यह कार्रवाई अप्रैल माह की शुरुआत से की जा रही है, जब आईआरसीटीसी ने आधिकारिक रूप से हेली बुकिंग की प्रक्रिया शुरू की थी।

    आईआरसीटीसी की वेबसाइट से मिनटों में बुक हुए हजारों टिकट

    इस साल अप्रैल की शुरुआत में जैसे ही आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट पर केदारनाथ यात्रा के लिए हेली बुकिंग शुरू हुई, कुछ ही मिनटों में हजारों श्रद्धालुओं ने टिकट बुक कर लिए। लेकिन इस भीड़भाड़ और टिकट की भारी मांग को देखते हुए साइबर ठगों ने फर्जी वेबसाइटें और मोबाइल नंबर सक्रिय कर दिए, जिससे कई श्रद्धालु ठगी का शिकार होते-होते बचे या हो गए।

    सीओ साइबर अंकुश मिश्रा ने बताया कि ये फर्जी वेबसाइटें आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती डिजाइन रखती हैं, जिससे आम लोगों को भ्रमित करना आसान हो जाता है। इनमें अक्सर फर्जी हेल्पलाइन नंबर या संपर्क नंबर डाले जाते हैं, ताकि लोग उन नंबरों पर कॉल करें और साइबर ठग उन्हें झांसे में लेकर पैसे हड़प सकें।

    “आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर कभी भी किसी प्रकार का मोबाइल या फोन नंबर नहीं होता। बुकिंग की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होती है। ऐसे में अगर किसी वेबसाइट पर संपर्क नंबर दिया गया है, तो समझ लें कि वह फर्जी है,“ – सीओ अंकुश मिश्रा ने स्पष्ट किया।

    शिकायतों के आधार पर बड़ी कार्रवाई

    पुलिस के अनुसार, श्रद्धालुओं से लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना द्वारा इन वेबसाइटों की पहचान की गई और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के सहयोग से उन्हें ब्लॉक कराया गया। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है, जहां से फर्जी पेज या लिंक साझा किए जाते हैं।

    साइबर ठगों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए एक विशेष जांच एवं निगरानी टीम गठित की गई है, जो न केवल वेबसाइटों बल्कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर चल रहे प्रचार-प्रसार पर भी नजर रख रही है। अब तक इस टीम की सक्रियता से कई संदिग्ध सोशल मीडिया पेज भी बंद कराए जा चुके हैं।

    पिछले वर्षों की तुलना में क्या है स्थिति?

    सीओ अंकुश मिश्रा के अनुसार, सिर्फ एक माह के भीतर 28 वेबसाइटों को बंद कराना यह दर्शाता है कि साइबर अपराधियों की सक्रियता कितनी तेज हो गई है। वर्ष 2023 में भी करीब 30 वेबसाइटें बंद कराई गई थीं, जबकि पूरे साल 2024 में कुल 62 वेबसाइटों को बंद कराया गया था।

    केदारनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था का लाभ उठाकर साइबर ठगों द्वारा की जा रही ठगी पर साइबर पुलिस की त्वरित और कड़ी कार्रवाई सराहनीय है। ऐसे मामलों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। यात्रियों को चाहिए कि वे केवल प्रमाणिक और अधिकृत स्त्रोतों से ही सेवा लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें।

  • लिव-इन रिलेशन में रह रही युवती ने किया खौफनाक वार, पार्टनर की चाकू से हत्या

    लिव-इन रिलेशन में रह रही युवती ने किया खौफनाक वार, पार्टनर की चाकू से हत्या

    लिव-इन में रह रहे जोड़े के झगड़े में युवक की मौत, युवती पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज — अगले महीने होने वाली थी सगाई

    देहरादून — राजधानी देहरादून के रायपुर क्षेत्र में 26 अप्रैल को लिव-इन रिलेशन में रह रहे युवक-युवती के बीच हुए झगड़े में युवक की चाकू लगने से मौत हो गई। मृतक अजय रावत और युवती राधिका सिंह पिछले करीब एक साल से एक साथ रह रहे थे और अगले महीने दोनों की सगाई तय थी। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने युवती के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (Section 304 IPC) का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    रायपुर थाना प्रभारी प्रदीप सिंह नेगी के अनुसार, घटना 26 अप्रैल की देर शाम घटी। नत्थनपुर, रायपुर निवासी अजय रावत (उम्र 28) और खुड़बुड़ा की रहने वाली राधिका सिंह (उम्र 26) पिछले एक साल से लिव-इन में रह रहे थे। परिजनों के अनुसार दोनों परिवारों ने रिश्ते को स्वीकार कर लिया था और 7 जून को दोनों की सगाई तथा 2 अक्टूबर को शादी तय थी।

    घटना वाले दिन राधिका ने अजय के पिता देवेंद्र पाल सिंह रावत को फोन कर बताया कि अजय की तबीयत अचानक बिगड़ गई है और उसे कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जब परिवार अस्पताल पहुंचा, तब तक अजय की मौत हो चुकी थी।

    राधिका की ओर से दी गई जानकारी

    पुलिस पूछताछ में राधिका ने बताया कि घटना के समय अजय शराब के नशे में था और इसी को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। राधिका के मुताबिक बहस के दौरान अजय ने रसोई से चाकू उठा लिया। जब राधिका ने उसे रोकने की कोशिश की और चाकू छीनना चाहा, तभी यह हाथापाई हुई और चाकू अजय की छाती में लग गया। इससे उसके सीने से काफी खून बहने लगा। राधिका ने तुरंत एंबुलेंस बुलाई और उसे कोरोनेशन अस्पताल ले गई, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    परिजनों ने खड़े किए सवाल

    अजय के पिता देवेंद्र पाल रावत ने राधिका की कहानी पर संदेह जताते हुए पुलिस को बताया कि यह एक सोची-समझी साजिश भी हो सकती है। उनका कहना है कि यदि यह एक हादसा था, तो राधिका को भी झगड़े या हाथापाई में कुछ चोटें आनी चाहिए थीं, जबकि उसे कोई भी गंभीर चोट नहीं आई। उन्होंने आशंका जताई कि इस घटना में कोई और भी शामिल हो सकता है और राधिका अकेली नहीं थी।

    परिजनों ने पुलिस से इस मामले की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि अजय और राधिका के रिश्ते को दोनों परिवारों की सहमति प्राप्त थी और उनके बीच किसी तरह की सामाजिक या पारिवारिक रुकावट नहीं थी।

    पुलिस ने शुरू की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    रायपुर थाना प्रभारी नेगी ने बताया कि राधिका सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। घटनास्थल की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है और रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सके।

    लिव-इन रिलेशन पर उठे सवाल

    इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर समाज में बहस छिड़ गई है। भले ही सुप्रीम कोर्ट लिव-इन को कानूनी मान्यता दे चुका है और इसे दो वयस्कों की निजी सहमति का मामला मानता है, लेकिन कई बार ऐसे संबंधों में पारिवारिक सहमति होने के बावजूद असुरक्षा और अस्थिरता बनी रहती है। अजय और राधिका का रिश्ता लगभग एक साल पुराना था और दोनों एक-दूसरे को अच्छे से जानते थे, फिर भी अचानक उपजे विवाद का इस कदर दुखद अंत होना, इस बात को रेखांकित करता है कि ऐसे संबंधों में भी संवाद, समझ और जिम्मेदारी जरूरी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को आपसी विवाद की स्थिति में कानूनी सलाह लेने और समय रहते हस्तक्षेप कराने की जरूरत है, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।

    इस बीच राधिका को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारी भी जांच की निगरानी कर रहे हैं।

  • आंगनबाड़ी कर्मी को रिश्वत लेते विजिलेंस ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया

    आंगनबाड़ी कर्मी को रिश्वत लेते विजिलेंस ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया

    नंदा गौरा योजना के तहत लाभ दिलाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत

     

    देहरादून/टिहरी। विजिलेंस के जाल में छोटे छोटे रिश्वतखोरों के फंसने के सिलसला जारी है। सतर्कता विभाग ने टिहरी गढ़वाल ज़िले में एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री को नंदा गौरा योजना के अंतर्गत लाभ दिलाने के एवज में 2000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
    यह कार्रवाई सतर्कता विभाग की हल्द्वानी टीम द्वारा की गई।

    टोल फ्री नंबर पर शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

    शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान के टोल फ्री नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी बहन के खाते में नंदा गौरा योजना की धनराशि 40,000 रुपये दिलवाने के लिए आंगनबाड़ी कर्मी द्वारा 2000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से 5 मई 2025 को टिहरी के शिव मन्दिर के पास स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में छापा मारा और रिश्वत लेते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तार महिला के पास से दो हजार रुपये बरामद किए गए। पूछताछ में उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी महिला के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    टीम को मिलेगा नकद पुरस्कार

    सतर्कता अधिष्ठान के महानिदेशक डॉ. वीपी मणियान ने इस सफल कार्रवाई के लिए हल्द्वानी की ट्रैप टीम को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

    शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

    सतर्कता अधिष्ठान ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा कार्य के बदले रिश्वत मांगी जाती है, तो वे बिना डर के टोल फ्री नंबर 1064 या व्हाट्सएप हेल्पलाइन 9456592300 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

  • देहरादून : सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले की साजिश बेनकाब, आरोपी पर केस दर्ज

    देहरादून : सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले की साजिश बेनकाब, आरोपी पर केस दर्ज

    देहरादून –भूपेश जोशी नामक व्यक्ति ने मजार मामले में डीएम को ज्ञापन देने वालों के लिए किया था अभद्र भाषा का इस्तेमाल

    देहरादून। देहरादून में जन मुद्दों और सामाजिक सौहार्द के लिए काम करने वाले लोगों पर सोशल मीडिया में अभद्र टिप्पणी करने और उनकी पिटाई करने की बात कहने वाले व्यक्ति के खिलाफ थाना नेहरू कॉलोनी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दिया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने आज एसएसपी से मुलाकात कर उक्त व्यक्ति की शिकायत की थी। सोशल मीडिया पर गाली-गलौच करने और समुदाय विशेष के प्रति नफरत फैलाने वाले कुछ अन्य लोगों के नाम पर पुलिस को दिये गये हैं।

    बीते 25 अप्रैल को जिला प्रशासन ने एक शिकायत के आधार पर दून अस्पताल के बाहर सैकड़ों साल पुरानी मजार रात के अंधेरे में तोड़ दी थी। 28 अप्रैल में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने मजार तोड़ने के खिलाफ डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा था।

    देहरादून

    29 अप्रैल को अखबारों में ज्ञापन देने संबंधी खबर थी, जिसमें वहां मौजूद कुछ लोगों के नाम भी थे। भूपेश जोशी नामक एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खबर में छपे नामों को हवाला देते हुए लिखा कि इन लोगों के साथ ऐसा बर्ताव करना चाहिए कि ये अपने घर से बाहर भी निकलने में भी डरें। गाली गलौच की भाषा का इस्तेमाल करते हुए भूपेश जोशी ने यह भी लिखा कि मुसलमानों से बाद में निपट लेंगे, पहले इन लोगों की ठुकाई करनी जरूरी है।

    इस मामले में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एसएपी अजय सिंह से मुलाकात की और उन्हें इस पोस्ट की स्क्रीन शॉट उपलब्ध करवाये। एसएसपी ने प्रतिनिधियों की बातें ध्यान से सुनी और इसे गंभीर मामला मानते हुए तुरंत प्रभाव से मुकदमा दर्ज करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में कानूनी दायरे में जितना कुछ हो सकता है, वह कड़ाई के साथ किया जाएगा। मुकदमा उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट की ओर से थाना नेहरू कॉलोनी में दर्ज करवाया गया है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस मामले के अन्य सभी कानूनी पहलुओं पर भी जानकारों से सलाह ली जा रही है।

    एसएसपी से मिलने वालों में निर्मला बिष्ट, कमला पंत, रजिया बेग, हेमलता नेगी, डॉ. रवि चोपड़ा, नन्द नन्दन पांडेय, इंद्रेश मैखुरी, अनंत आकाश, त्रिलोचन भट्ट, तुषार रावत, हिमांशु चौहान, आरिफ खान, राघवेन्द्र आदि मौजूद थे।

  • मसूरी: कश्मीरी युवक से अभद्रता, तीन आरोपी गिरफ्तार

    मसूरी: कश्मीरी युवक से अभद्रता, तीन आरोपी गिरफ्तार

    मसूरी में तीन आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दी सुरक्षा का भरोसा

    चारधाम यात्रा – बाहरी व्यापारियों का गृह राज्य से सत्यापन अनिवार्य

    देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा के मद्देनज़र उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है। विशेष रूप से देहरादून जिले में यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचाव और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से दून पुलिस ने एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत बाहरी राज्यों से व्यापार के उद्देश्य से उत्तराखंड, विशेष रूप से देहरादून आने वाले व्यक्तियों के लिए उनके गृह राज्य से सत्यापन को अब अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि कोई भी संदिग्ध या आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति यात्रा और व्यापार के बहाने प्रदेश में प्रवेश न कर सके।

    पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति बिना आवश्यक सत्यापन के देहरादून आता है, तो उसके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर सख्त नजर रखी जाएगी और कोई भी कोताही सहन नहीं की जाएगी।

    इसी क्रम में मसूरी में हाल ही में घटित एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने भी पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए प्रेरित किया है। मसूरी में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के माध्यम से सामने आया कि तीन युवकों ने एक कश्मीरी युवक के साथ अशोभनीय व्यवहार किया और उससे बदसलूकी की। इस वीडियो के वायरल होने के बाद, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों की पहचान कर ली। उन्हें 25 अप्रैल को हिरासत में ले लिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के निर्देश पर इन आरोपियों के खिलाफ विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।

    इस घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने मसूरी में रह रहे कश्मीरी मूल के व्यापारियों एवं फेरी वालों से सीधे संपर्क स्थापित किया। उन्हें न केवल घटना की जानकारी दी गई, बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त भी किया गया। इसके साथ ही, जब कुछ कश्मीरी विक्रेताओं द्वारा मसूरी छोड़ने की खबरें सामने आईं, तो एसएसपी देहरादून ने व्यक्तिगत रूप से इन व्यापारियों से फोन पर वार्ता कर उन्हें शांत किया और लौटकर वापस आने पर पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने का आश्वासन दिया।

    सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा पुलिस प्रशासन और वहां के जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील की है, ताकि आपसी समन्वय से कश्मीरी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    मसूरी में पुलिस अधिकारियों और कश्मीरी व्यापारियों के बीच हुई बातचीत में यह बात उभरकर सामने आई कि वे वर्षों से शांतिपूर्वक मसूरी में व्यापार कर रहे हैं और अब तक स्थानीय जनता से उन्हें किसी प्रकार की असहजता या दुर्व्यवहार का सामना नहीं करना पड़ा है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि इस तरह की कोई भी घटना भविष्य में न हो, इसके लिए मसूरी क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।

    इसके अतिरिक्त, वर्तमान में पूरे जिले में किरायेदारों और अस्थायी व्यापारियों के लिए विशेष सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि इससे प्रदेश में बाहरी तत्वों की पहचान भी सुगमता से की जा सकेगी।

    दून पुलिस ने सभी नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि यदि वे बाहरी राज्य से आ रहे हैं, तो अपने गृह राज्य से सत्यापित दस्तावेज अवश्य लेकर आएं। केवल सत्यापित व्यक्तियों को ही प्रदेश में व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे चारधाम यात्रा शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके।

  • हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद पर घोटाले की आंच, सीएम ने दिए जांच के आदेश

    हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद पर घोटाले की आंच, सीएम ने दिए जांच के आदेश

    मुख्यमंत्री धामी ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

    दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

    हरिद्वार। हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई भूमि खरीद से संबंधित मामले में घोटाले की आशंका को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नगर निगम की इस विवादित डील पर मेयर और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार उठाई जा रही आपत्तियों और प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अब राज्य सरकार ने इसकी गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए सचिव, पेयजल विभाग रणवीर सिंह चौहान को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्होंने निर्देशित किया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, विस्तृत और तथ्यात्मक जांच कर जल्द से जल्द आख्या शासन को सौंपी जाए, जिससे दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच के दौरान कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर पूरी कठोरता से अमल कर रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता या संसाधनों की बंदरबांट को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार, इस भूमि क्रय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, उचित मूल्यांकन के बिना खरीद, तथा कथित रूप से एक ही भूखंड की बार-बार खरीद जैसी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। इस संबंध में नगर निगम के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनहित और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा के लिए कृतसंकल्प है और प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष हो और किसी भी स्तर पर प्रभाव अथवा दबाव को स्थान न दिया जाए।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हरिद्वार की जनता में भी काफी चर्चा है, और लोग चाहते हैं कि दोषियों को सार्वजनिक रूप से बेनकाब कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। इस जांच के परिणामों पर अब पूरे राज्य की नजर टिकी है।

  • देहरादून-सहारनपुर में 23 क्विंटल नकली पनीर जब्त, दो गिरफ्तार

    देहरादून-सहारनपुर में 23 क्विंटल नकली पनीर जब्त, दो गिरफ्तार

    23 क्विंटल से अधिक नकली पनीर जब्त — सहारनपुर से देहरादून तक फैले मिलावटी नेटवर्क का भंडाफोड़

    देहरादून। उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग और स्थानीय पुलिस ने मिलकर नकली पनीर के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस संयुक्त अभियान में देहरादून और सहारनपुर से कुल 23 क्विंटल 20 किलो नकली पनीर जब्त किया गया है। कार्रवाई में दो अभियुक्त गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि इस नेटवर्क के अन्य प्रमुख आरोपियों की तलाश जारी है।

    देहरादून
    रायपुर में मिला संदिग्ध पनीर, तत्काल हुई कार्रवाई

    मंगलवार को देहरादून जिला अधिकारी कार्यालय को सूचना प्राप्त हुई कि थाना रायपुर क्षेत्र में पुलिस ने एक संदिग्ध खाद्य सामग्री — पनीर — को पकड़ा है। सूचना मिलते ही जिला अभिहित अधिकारी मनीष सयाना और वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश सिंह मौके पर पहुंचे। साथ ही, अपर आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ताजवर सिंह जग्गी के निर्देश पर सचल खाद्य विश्लेषणशाला (Mobile Food Testing Lab) को भी तत्काल भेजा गया।

    प्राथमिक जांच में पकड़े गए पनीर में एसएमपी (स्किम्ड मिल्क पाउडर) और फॉर्मलीन जैसे खतरनाक रसायनों की उपस्थिति पाई गई। यह रसायन खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं हैं और इनके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।

    पनीर की आपूर्ति शाहरुख खान निवासी ढालीपुर, विकासनगर द्वारा क्वालिटी डेयरी, तपोवन चौक को की गई थी। डेयरी के गोदाम से लगभग 7 क्विंटल पनीर जब्त किया गया, जिसे बेहद गंदे और अस्वच्छ हालात में संग्रहित किया गया था। फॉर्मलीन की पुष्टि और दुर्गंधयुक्त, सड़ी हुई स्थिति को देखते हुए उक्त पनीर को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।

    गुप्त सूचना पर ईश्वर विहार में बड़ी बरामदगी, दो गिरफ्तार

    खाद्य सुरक्षा विभाग को मिली एक अन्य गुप्त सूचना के आधार पर थाना रायपुर पुलिस और खाद्य सुरक्षा टीम ने ईश्वर विहार क्षेत्र की एक दुकान पर छापेमारी की। मौके पर एक पिकअप वैन से 1 क्विंटल 20 किलो पनीर उतरता हुआ पाया गया, जबकि दुकान के पीछे बने गोदाम से 6 क्विंटल नकली पनीर बरामद किया गया।

    प्राथमिक परीक्षण में इन सभी सामग्री को नकली और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया। पुलिस ने मौके से दुकानदार अब्दुल मन्नान और वाहन चालक आरिफ को हिरासत में लिया। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि पनीर की आपूर्ति सहारनपुर के कासमपुर जंगल में स्थित एक अवैध फैक्ट्री से होती थी, जिसे मनोज, नरेन्द्र चौधरी और शाहरुख संचालित कर रहे हैं।

    सहारनपुर में फैक्ट्री पर छापा, 16 क्विंटल नकली पनीर और उपकरण बरामद

    गिरफ्तार अभियुक्तों की स्वीकारोक्ति के आधार पर, खाद्य सुरक्षा विभाग एवं देहरादून पुलिस ने सहारनपुर प्रशासन से संपर्क कर संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। बेहट क्षेत्र के कासमपुर में स्थित एक फैक्ट्री पर छापेमारी की गई। इस अभियान में मंडलायुक्त, सहायक आयुक्त, उपजिलाधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी व अन्य विभागीय अधिकारियों की संयुक्त टीम शामिल थी।

    कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री से 16 क्विंटल नकली पनीर, हानिकारक रसायन, और उत्पादन में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए। फैक्ट्री को तुरंत सील कर दिया गया और पनीर को नष्ट कर दिया गया।

    कुल बरामदगी और कानूनी कार्रवाई
    • कुल जब्त नकली पनीर: 23 क्विंटल 20 किलो

    • पकड़ा गया वाहन: नकली पनीर से लदा पिकअप वैन

    • गिरफ्तार अभियुक्त:

      • अब्दुल मन्नान पुत्र सलीम अहमद, ईश्वर विहार, देहरादून

      • आरिफ पुत्र मेहंदी हसन, बैरागीवाला, थाना सहसपुर, देहरादून

    पुलिस और खाद्य विभाग मिलकर इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में लगे हुए हैं।

    अधिकारियों की प्रतिक्रिया

    डॉ. आर. राजेश कुमार, आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड ने कहा:

    “यह कार्रवाई राज्य के खाद्य तंत्र को सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जनता से भी अपील है कि किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।”

    ताजवर सिंह जग्गी, अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कहा:

    “जनस्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई सिर्फ एक शुरुआत है। खासकर चारधाम यात्रा जैसे अवसरों पर खाद्य गुणवत्ता को सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

    देहरादून से सहारनपुर तक फैले इस नकली पनीर के रैकेट का भंडाफोड़ राज्य में मिलावटखोरों के खिलाफ चल रहे अभियानों की सफलता का प्रमाण है। प्रशासन द्वारा की गई त्वरित, संगठित और वैज्ञानिक कार्रवाई इस बात की मिसाल है कि जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए राज्य कोई भी कदम उठाने को तत्पर है।

  • पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा कड़ी, चारधाम में पहली बार पैरा मिलिट्री तैनात

    पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा कड़ी, चारधाम में पहली बार पैरा मिलिट्री तैनात

    पहलगाम हमले के बाद चारधाम यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अर्द्धसैनिक बलों की होगी तैनाती

    चारधाम यात्रा को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टरों में बांटकर की जा रही है सुरक्षा व्यवस्था; केंद्र से अर्द्धसैनिक बलों की 10 कंपनियों की मांगी गई है तैनाती

    चारधाम यात्रा 2025 में इस साल ऐतिहासिक बदलाव के साथ आयोजित की जा रही है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को एक नए स्तर तक पहुंचाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। विशेषकर हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, यात्रा और पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर एक सख्त रणनीति अपनाई जा रही है।

    सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस साल पहली बार पूरे चारधाम क्षेत्र को सुपर जोन, जोन और सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत पूरे क्षेत्र को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, ताकि किसी भी घटना या आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। प्रत्येक सेक्टर में पुलिसकर्मियों को 24 घंटे गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रयासों के तहत, चारधाम यात्रा के दौरान छह हजार से अधिक पुलिसकर्मी, एसडीआरएफ और पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है, जो पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखेंगे।

    इस सुरक्षा कड़ी में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती भी की जाएगी, जो पिछले कुछ दिनों में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर जरूरी मानी जा रही है। केंद्र सरकार से 10 कंपनियों के अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की गई है, जिनमें से छह कंपनियां गढ़वाल क्षेत्र और चार कंपनियां कुमाऊं क्षेत्र के धार्मिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों में तैनात की जाएंगी। सरकार की ओर से इन बलों का जल्द आवंटन किए जाने की संभावना है।

    सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए, इस साल पहली बार देहरादून में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, नौ स्थानों पर एएसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की समस्या या परेशानी का तत्काल समाधान किया जा सके। इन उपायों के तहत, खुफिया तंत्र को भी 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

    डीजीपी दीपम सेठ ने इस संबंध में हाल ही में सभी जिलों के पुलिस प्रभारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें इस बात को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि सभी सुरक्षा उपाय सख्ती से लागू किए जाएं। इसी संदर्भ में जिलों में सत्यापन अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को पहले ही पहचाना जा सके।

    इस वर्ष चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की यह पहली बार होगी, जो यात्रा के सुरक्षा इंतजामों को एक नई दिशा देगा और श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बनाए रखेगा।

    डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी कानून व्यवस्था