Category: अपराध

  • खनन माफिया बेलगाम, 15 मजदूरों की जिंदगी पर लगा विराम

    खनन माफिया बेलगाम, 15 मजदूरों की जिंदगी पर लगा विराम

    अवैध खनन बना काल: आसन नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत बहे 15 श्रमिक, 8 की मौत, 5 लापता

    देहरादून। दून घाटी की नदियों में वर्षाकाल के दौरान पानी मौत बनकर बह रहा है। सबसे भयावह मंजर मंगलवार को आसन नदी पर देखने को मिला, जहां अचानक आए तेज सैलाब ने मजदूरी कर रहे श्रमिकों को बहा दिया। इस हादसे में ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत 15 मजदूर नदी में समा गए। चीख-पुकार मचाते परिजन और साथी श्रमिक असहाय होकर यह दृश्य देखते रह गए। पुलिस और एसडीआरएफ टीम ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया और दो मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल लिया, जबकि अब तक आठ शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए जा चुके हैं। पांच मजदूरों की तलाश जारी है।

    मजबूरी ने धकेला मौत के मुंह में

    पछवादून क्षेत्र के विकासनगर, सहसपुर और सेलाकुई इलाके में वर्षाकाल के दौरान भी अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। यमुना, आसन, टॉस, शीतला और स्वारना नदी में रोजाना ट्रैक्टर-ट्रॉली और श्रमिक उतारे जाते हैं। दो वक्त की रोटी की मजबूरी श्रमिकों को जान जोखिम में डालकर नदी तल में उतरने पर मजबूर करती है। अचानक जलस्तर बढ़ने पर वे अपनी जान बचाने के लिए किनारों की ओर भागते हैं, लेकिन कई बार धारा इतनी प्रचंड हो जाती है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली और मजदूर नदी के बीच ही फंस जाते हैं।

    हादसों का सिलसिला

    ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। बीते जुलाई में विकासनगर के बाढ़वाला में जुड्डो बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना नदी में 11 श्रमिक ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत फंस गए थे। हालांकि, उस समय पुलिस और एसडीआरएफ की तत्परता से सभी को सकुशल बचा लिया गया था। मगर प्रेमनगर क्षेत्र के परवल में आसन नदी पर मंगलवार का दिन मजदूरों के लिए दुर्भाग्य लेकर आया। पानी की तेज धारा ने उन्हें किसी तरह का मौका ही नहीं दिया और मदद पहुंचने से पहले ही वे बह गए।

    प्रशासन और विभाग की चुप्पी

    लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन और खनन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। श्रमिक हर साल बरसात में नदी की धारा में फंसते हैं, कई अपनी जान गंवाते हैं, लेकिन अवैध खनन का सिलसिला रुकता नहीं। नदियों से खनन पर प्रतिबंध के बावजूद ट्रैक्टर-ट्रॉली और मजदूरों को खुलेआम नदी तल में उतारा जा रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर इन मजदूरों की जान को दांव पर लगाने वालों पर कब शिकंजा कसा जाएगा।

    परिवार की बर्बादी की दर्दनाक कहानी

    इस हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। यूपी के मुरादाबाद जिले के बिलारी थाना क्षेत्र के मुंडिया जैन गांव निवासी हरचरण, उनकी पत्नी सोमवती और दोनों बेटे हरिराम व राजकुमार भी मजदूरी करने दून आए थे। मंगलवार को वे सभी ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ आसन नदी की धारा में बह गए। हरचरण और सोमवती के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि उनके बेटे अब तक लापता बताए जा रहे हैं। एक ही परिवार के चार लोगों का इस तरह नदी की भेंट चढ़ जाना क्षेत्र के लिए दिल दहला देने वाली घटना है।

    बड़ा सबक, फिर भी लापरवाही बरकरार

    हर साल मानसून में घटने वाली ऐसी घटनाओं के बावजूद अवैध खनन पर न तो रोक लग रही है और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो रही है। आसन नदी की यह त्रासदी प्रशासन और खनन विभाग के लिए बड़ा सबक है कि मजदूरों की जिंदगी बचाने के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है। अन्यथा, मजबूरी और लापरवाही का यह दुष्चक्र आगे भी मजदूर परिवारों को बर्बाद करता रहेगा।

  • ऑपरेशन कालनेमि: देवभूमि में 300 से अधिक गिरफ्तारियां

    ऑपरेशन कालनेमि: देवभूमि में 300 से अधिक गिरफ्तारियां

    ऑपरेशन कालनेमि की बड़ी सफलता, 300 से ज्यादा आरोपी सलाखों के पीछे

    देवभूमि की पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों पर प्रहार, ऑपरेशन कालनेमि में बड़ी सफलता

    देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाया जा रहा विशेष अभियान ‘ऑपरेशन कालनेमि’ लगातार बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहा है। इस अभियान का उद्देश्य उन असामाजिक व आपराधिक तत्वों पर नकेल कसना है, जो देवभूमि की पवित्रता और सांस्कृतिक धरोहर से खिलवाड़ करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि उत्तराखंड की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और राज्य की शांति, सुरक्षा और गौरव के साथ खिलवाड़ करने वाले व्यक्तियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

    अब तक के अभियान की उपलब्धियों की बात करें तो 4000 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों का सत्यापन किया गया है, जबकि 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से कई मामले गंभीर अपराधों और पहचान छिपाकर ठगी करने से जुड़े पाए गए। अभियान की व्यापकता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि केवल हरिद्वार जिले में ही 2301 लोगों का सत्यापन और 162 गिरफ्तारियां की गई हैं। वहीं राजधानी देहरादून में 865 सत्यापन और 113 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं। इसके अलावा उधम सिंह नगर जिले में भी 167 व्यक्तियों का सत्यापन किया गया और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

    देहरादून से सामने आई एक बड़ी कार्रवाई ने पूरे अभियान की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। यहां एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी पहचान के सहारे रह रहा था। यह गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि देवभूमि की शांति और सामाजिक ताने-बाने से खिलवाड़ करने वालों की पहचान चाहे कितनी भी गहरी छिपी हो, सरकार और प्रशासन की कड़ी निगरानी से बचना आसान नहीं है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे अभियान के दौरान बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि “पहचान छिपाकर ठगी करने और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। देवभूमि की पवित्रता और गरिमा की रक्षा के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी और इस तरह के अपराधियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ कर रहा है बल्कि साथ ही उत्तराखंड की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का भी ठोस संदेश दे रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में की जा रही लगातार छापेमारी, सत्यापन और गिरफ्तारियां यह दर्शाती हैं कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऑपरेशन कालनेमि का असर केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में भरोसा कायम करने और जनता को यह विश्वास दिलाने का भी प्रयास है कि सरकार उनकी सुरक्षा और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

  • 16 साल से फर्जी दस्तावेजों पर अफसर, अब हुआ भंडाफोड़

    16 साल से फर्जी दस्तावेजों पर अफसर, अब हुआ भंडाफोड़

    16 साल तक फर्जी कागज़ों पर बनी अफसर, खुलासे के बाद केस दर्ज
    16 साल से फर्जी दस्तावेजों पर अफसर, अब हुआ भंडाफोड़

    देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। सिंचाई विभाग में करीब 16 वर्षों से प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत महिला के शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बाद अब यह भंडाफोड़ होने से विभाग और पुलिस दोनों सकते में हैं। मामले का खुलासा होने के बाद विभाग ने कैंट कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है, जिसके बाद पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

    कौन है महिला और कैसे मिली नियुक्ति

    मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित महिला का नाम अंशुल गोयल है। वह मूल रूप से नींबूवाला, गढ़ी कैंट, देहरादून की रहने वाली हैं। फिलहाल वह उत्तराखंड जल संसाधन प्रबंधन एवं नियामक आयोग, यमुना कॉलोनी देहरादून में कार्यरत थीं। उनकी नियुक्ति वर्ष 2009 में मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत कनिष्ठ सहायक (जूनियर असिस्टेंट) के पद पर हुई थी। इसके बाद उन्हें विभागीय पदोन्नति और तैनाती के आधार पर प्रशासनिक अधिकारी का जिम्मा मिल गया। पिछले लगभग 16 वर्षों से वह इसी पद पर सेवाएं दे रही थीं।

    शिकायत के बाद शुरू हुई जांच


    इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब देहरादून निवासी विनीत अग्रवाल नामक व्यक्ति ने अंशुल गोयल के दस्तावेजों पर संदेह जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक प्रमाणपत्र असली नहीं हैं। इस शिकायत के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक जांच समिति गठित की और सभी दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल शुरू कर दी।

    फर्जी साबित हुए शैक्षणिक प्रमाणपत्र


    जांच समिति ने अंशुल गोयल द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्रों की पुष्टि के लिए संबंधित संस्थानों से संपर्क किया। इसमें राजकीय इंटर कॉलेज पटेलनगर और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच कराई गई। रिपोर्ट आने के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2001 में जिस नाम से अंशुल गोयल ने अध्ययन और परीक्षा उत्तीर्ण करने का दावा किया था, उस वर्ष विद्यालय में उनके नाम से कोई भी छात्रा पंजीकृत ही नहीं थी। यानी उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र पूरी तरह से फर्जी पाए गए।

    16 साल तक चलती रही नौकरी


    यह तथ्य सामने आते ही विभाग और जांच टीम दोनों हैरान रह गए। तकरीबन 16 सालों तक अंशुल गोयल ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर न केवल सरकारी नौकरी हासिल की, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी जैसी जिम्मेदारी वाले पद पर भी कार्य करती रहीं। इतने लंबे समय तक किसी को भनक तक नहीं लगी और विभागीय प्रणाली की कमजोरियों के कारण यह मामला दबा रह गया।

    अब आगे क्या होगा?


    फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सिंचाई विभाग ने इस संबंध में कैंट कोतवाली, देहरादून में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि जांच में और भी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

    यह घटना न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल कर सालों तक नियमों और व्यवस्था को ठगा जा सकता है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच में अंशुल गोयल के खिलाफ क्या-क्या तथ्य सामने आते हैं और उनके खिलाफ आगे कौन-कौन सी कार्रवाई होती है।

  • जितेंद्र नेगी आत्महत्या मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी : सीएम

    जितेंद्र नेगी आत्महत्या मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी : सीएम

    सीएम ने परिजनों से की बातचीत
    आरोपी हिमांशु चमोली की ऊंची पहुंच के चर्चे

     

    देहरादून। पौड़ी जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया और एसएसपी लोकेश्वर सिंह ने शुक्रबार को जितेंद्र कुमार के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी।

    सीएम

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी परिजनों से फोन पर बातचीत कर गहरा दुःख व्यक्त किया और शोक संवेदनाएं प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस को गहन और तत्पर जांच करने के निर्देश दिए हैं।

    सीएम

    गौरतलब है कि पौड़ी कोतवाली क्षेत्र में युवक जितेंद्र कुमार ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पूर्व उसने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कुछ व्यक्तियों पर रुपये ठगने का आरोप लगाया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी हिमांशु चमोली सहित पांच लोगों को देहरादून से गिरफ्तार किया है।

    हिमांशु चमोली भाजयुमो से जुड़ा था। जिसे इस केस के बाद संगठन से निकाल दिया। इन दिनों चमोली के भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ वीडियो व फोटोज वॉयरल हो रहे हैं

    चमोली पर कई अन्य लोगों से भो पैसे लेने के आरोप लग रहे हैं। जमीनों के धंधे व अन्य तरीके से कमाई गयी सम्पत्ति व ऐशो आराम भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

  • उत्तराखंड में नकली दवा रैकेट का भंडाफोड़, हिमाचल का फैक्ट्री मालिक गिरफ्तार

    उत्तराखंड में नकली दवा रैकेट का भंडाफोड़, हिमाचल का फैक्ट्री मालिक गिरफ्तार

    उत्तराखंड में नकली दवा फर्जीवाड़ा का पर्दाफाश, हिमाचल का फैक्ट्री मालिक गिरफ्तार

    देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ ने नकली दवाइयों का कारोबार करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने हिमाचल प्रदेश के बद्दी से एसवी फायल कंपनी के मालिक विजय कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया है। वह ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं के नकली रैपर और क्यूआर कोड तैयार करता था।

    अब तक छह गिरफ्तार

    एसटीएफ ने इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले संतोष कुमार, नवीन बंसल, आदित्य काला, देवी दयाल गुप्ता और पंकज शर्मा पकड़े जा चुके हैं। अब तक की जांच में सामने आया है कि गिरोह नकली जीवन रक्षक दवाइयां तैयार कर बाजार में बेचता था, जिससे न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य को खतरा होता बल्कि राजस्व का भी नुकसान होता था।

    कैसे होता था फर्जीवाड़ा?

    • आरोपी कंपनियों की नकली पैकिंग, आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड तैयार करते थे।

    • नवीन बंसल स्ट्रिप बनाने का काम करता था और प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल विजय कुमार पांडेय से मंगवाता था।

    • पांडेय अपने बद्दी स्थित कारखाने में किसी भी दवा कंपनी का नाम और क्यूआर कोड छापकर सप्लाई करता था।

    • 2021 में उसने एक फर्जी आईडी पर मोबाइल सिम भी उपलब्ध कराया था, जिसका इस्तेमाल नेटवर्क संचालन में किया गया।

    पुलिस की कार्रवाई

    एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि दवा कंपनियों की हुबहू नकल तैयार कर नकली दवाइयों की बिक्री से आमजन के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा था। इस कारण मामले की विवेचना विशेष तौर पर की जा रही है।

    आगे की जांच

    गिरफ्तार विजय कुमार पांडेय से पूछताछ जारी है। एसटीएफ को गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी अहम सुराग मिले हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

  • ‘ऑपरेशन कालनेमि’ में झाड़-फूंक ठग तांत्रिक गिरफ्तार

    ‘ऑपरेशन कालनेमि’ में झाड़-फूंक ठग तांत्रिक गिरफ्तार

    बाजपुर पुलिस ने झाड़-फूंक ठग तांत्रिक को किया गिरफ्तार
    ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत गिरफ्तारी का सिलसिला जारी

    ऊधमसिंहनगर। बाजपुर पुलिस ने झाड़-फूंक और इलाज के नाम पर लोगों को ठगने और युवतियों के साथ अभद्र हरकतें करने वाले एक तांत्रिक को बाजपुर के दोराहा चौक से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत की गई कार्रवाई का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ऐसे ठग और शातिर तांत्रिकों को पकड़ना और आम जनता को उनके चंगुल से बचाना है।

    मामला चौकी दोराहा क्षेत्र का है, जहां एक महिला की दो बेटियां लंबे समय से बीमार थीं। कई डॉक्टरों से इलाज कराने के बावजूद उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस दौरान परिवार मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से बेहद दबाव में था। इसी कमजोरी और संकट का फायदा उठाते हुए एक परिचित ने परिवार को बाजपुर क्षेत्र के कनौरा गांव निवासी महमूद नामक व्यक्ति के बारे में बताया। महमूद खुद को सिद्ध तांत्रिक बताता था और लोगों को इलाज और रहस्यपूर्ण शक्तियों के बहाने अपने जाल में फंसाता था।

    आरोपी की करतूतें

    पुलिस की जांच में सामने आया कि महमूद अपने शिकार को फंसाने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके अपनाता था।

    • हिंदू नाम का सहारा: महमूद असली नाम छिपाकर खुद को हिंदू तांत्रिक बताता था। यह उसके लिए एक छलपूर्ण मास्क की तरह काम करता था, जिससे लोग उस पर विश्वास कर लेते।

    • कमजोर परिवारों को निशाना: वह खासतौर पर उन परिवारों को चुनता था जो बीमारियों, मानसिक या आर्थिक संकट से जूझ रहे होते थे।

    • सम्मोहन और दबाव: महमूद मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कला जानता था। वह पीड़ितों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए सम्मोहन और डर का इस्तेमाल करता था।

    • लगातार ठिकाने बदलना: पुलिस और अधिकारियों से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था और नए शिकार की तलाश में रहता था।

    • इलाज के बहाने शोषण: वह पीड़ित बहनों को छूकर ठीक करने का झांसा देता और इस दौरान अभद्र हरकतें करता था।

    • अंतरराज्यीय नेटवर्क: महमूद की गतिविधियां केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं थीं। उसके नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, बरेली और मुरादाबाद जिलों तक फैला हुआ था।

    ऑपरेशन
    कानूनी कार्रवाई

    पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद बाजपुर पुलिस ने महमूद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत और पॉक्सो एक्ट सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि उसने अब तक कितने परिवारों को अपने जाल में फंसाया और कितनी बार अभद्र हरकतें की।

    एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे ढोंगियों और तांत्रिकों से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के अपराधों में लोग अक्सर शिकार बनने के बाद ही पुलिस के पास आते हैं, इसलिए समय रहते सतर्क रहना और सही जानकारी पुलिस को देना बेहद जरूरी है।

    ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ऐसे सभी शातिर तांत्रिकों और ठगों को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोगों को झांसा देकर उनके विश्वास और जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं।

  • हत्या के आरोपी को पकड़ने में पुलिस को सफलता, मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी

    हत्या के आरोपी को पकड़ने में पुलिस को सफलता, मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी

    ऊधमसिंहनगर: मुठभेड़ के बाद हत्या का आरोपी निशांत सिंह गिरफ्तार, पैर में लगी गोली, अस्पताल में भर्ती

    सितारगंज। ऊधमसिंहनगर पुलिस को सोमवार देर शाम एक बड़ी सफलता मिली। पुलिस ने हत्या के एक फरार आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान निशांत सिंह पुत्र गोपाल सिंह, निवासी ग्राम सैजनी, थाना सितारगंज के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने खुद को बचाने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, लेकिन जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लग गई। उसे घायल अवस्था में पुलिस ने कस्टडी में लिया और तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

    घटना 29 जुलाई की शाम करीब 7:30 बजे की है। ग्राम सैजनी में पानी की मोटर को लेकर हुए मामूली विवाद ने उस वक्त हिंसक रूप ले लिया, जब निशांत सिंह ने पड़ोसी सुरजीत सिंह (40 वर्ष) पुत्र धीर सिंह को गोली मार दी। दोनों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते झगड़े में बदल गई। गुस्से में आकर निशांत ने तमंचे से सुरजीत सिंह पर फायर कर दिया और मौके से फरार हो गया।

    हत्या

    मुखबिर की सूचना और मुठभेड़

    घटना के बाद से पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। इसी बीच सोमवार शाम को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी बाइक से गोठा से बसगर की ओर जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने क्षेत्र में चेकिंग अभियान तेज कर दिया। जब आरोपी की बाइक को रोका गया तो उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी और भागने की कोशिश की। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक गोली निशांत के पैर में लगी और वह गिर पड़ा।

    घायल होने के बावजूद आरोपी भागने की कोशिश करता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे काबू में कर लिया। मौके से एक अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं।

    पहले से है आपराधिक इतिहास

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि निशांत सिंह एक शातिर अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके विरुद्ध दर्ज प्रमुख एफआईआर इस प्रकार हैं:

    • FIR संख्या 211/2017 – धारा 364A, 506 (अपहरण कर हत्या की धमकी)

    • FIR संख्या 227/2017 – धारा 25A (आर्म्स एक्ट के तहत अवैध हथियार रखना)

    • FIR संख्या 397/2017 – धारा 2/3 (गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज)

    पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय है और उस पर कई संगीन मामलों की जांच चल रही है।

    पुलिस का बयान

    सीओ सितारगंज ने बताया, “हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुठभेड़ में आरोपी घायल हुआ है, उसका उपचार चल रहा है। उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। आगे की कार्रवाई की जा रही है।”

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला करने के आरोप में नई एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। साथ ही आरोपी के पुराने मामलों को फिर से खंगाला जा रहा है।

  • सावधान! अब बच्चों की फीस पर साइबर ठगों की नजर, फर्जी मैसेज भेजकर कर रहे ठगी

    सावधान! अब बच्चों की फीस पर साइबर ठगों की नजर, फर्जी मैसेज भेजकर कर रहे ठगी

    सावधान! अब बच्चों की फीस पर साइबर ठगों की नजर, फर्जी मैसेज भेजकर कर रहे ठगी

    अब तक ऑनलाइन शॉपिंग, लोन, फर्जी केवाईसी, डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन अब साइबर ठगों ने एक और नया और खतरनाक तरीका अपनाया है। इस बार उनके निशाने पर हैं स्कूली बच्चों के अभिभावक। ठग अब स्कूल स्टाफ बनकर व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग माध्यमों से अभिभावकों को मैसेज भेज रहे हैं, जिसमें वे बच्चों की फीस के नाम पर पैसे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ एक क्यूआर कोड भी भेजा जा रहा है, जिसे स्कैन कर भुगतान करने को कहा जा रहा है।

    अगर आपको भी आपके बच्चे के स्कूल के नाम से कोई ऐसा संदिग्ध मैसेज मिला है, तो सतर्क हो जाइए। ऐसा कोई भी भुगतान करने से पहले सीधे स्कूल प्रशासन से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि जरूर करें। क्योंकि अब ठग स्कूलों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं और इस तरीके से बैंक खातों से पैसे उड़ा ले जा रहे हैं।

    देहरादून में सामने आया ताजा मामला

    हाल ही में देहरादून से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक नामी स्कूल के कुछ अभिभावकों को व्हाट्सएप के माध्यम से एक मैसेज प्राप्त हुआ। इस मैसेज में स्कूल की ओर से बताया गया कि ‘डेवलपमेंट फीस’ के रूप में 4990 रुपये जमा कराने हैं। इसके साथ ही एक क्यूआर कोड भी भेजा गया, जिसे स्कैन कर भुगतान करने को कहा गया।

    इतना ही नहीं, इस मैसेज में बाकायदा फीस जमा करने की ‘अंतिम तिथि’ भी लिखी गई थी और देरी होने पर ‘विलंब शुल्क’ जुड़ने की चेतावनी भी दी गई थी, ताकि अभिभावकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाला जा सके। गनीमत यह रही कि कुछ सजग अभिभावकों ने इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन तक पहुंचाई। स्कूल की ओर से तत्काल सभी अभिभावकों को सतर्क किया गया, जिससे एक बड़ा साइबर फ्रॉड होने से टल गया।

    साइबर अपराधी लगातार बदल रहे अपने तरीके

    साइबर ठग अब केवल स्कूली फीस या नौकरी जैसे बहाने नहीं, बल्कि हर दिन नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। चाहे वह फर्जी निवेश योजना हो, लोन या केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी हो, या फिर किसी परिजन के हादसे की झूठी सूचना देकर भावनात्मक दबाव बनाकर पैसे ऐंठना हो – ठग हर अवसर को मौके की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के दौर में, फर्जी वीडियो, झूठी खबरें और नकली प्रोफाइल के जरिए धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

    बचाव का एकमात्र तरीका है जागरूकता

    साइबर सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एन.के. गोयल कहते हैं कि साइबर अपराधों से बचने का सबसे बड़ा उपाय है – जागरूकता। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराधी भी अपनी चालें तेज और जटिल बनाते जा रहे हैं। अगर हम सावधान नहीं हुए, तो किसी भी समय इनके जाल में फंस सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हम न केवल खुद को, बल्कि अपने बच्चों को भी इंटरनेट की दुनिया के खतरों से अवगत कराएं। बच्चों को मोबाइल फोन के लाभ के साथ-साथ इसके दुरुपयोग और उससे होने वाले खतरों की जानकारी देना भी जरूरी हो गया है।

    खिलाड़ियों को भी बनाया जा रहा निशाना

    साइबर ठगों की नजर अब केवल आम लोगों या अभिभावकों तक सीमित नहीं रही है। हाल ही में एक और मामला सामने आया है जिसमें ठगों ने पुरस्कार राशि के नाम पर खिलाड़ियों को निशाना बनाया। एसटीएफ ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि ठगों ने एक फर्जी वेबसाइट बनाकर खिलाड़ियों से आवेदन मांगे। इस वेबसाइट पर राज्यपाल तक को चयन समिति के सदस्य के रूप में दर्शाया गया, जिससे वेबसाइट को असली साबित किया जा सके।

    दरअसल, उत्तराखंड सरकार की ओर से खिलाड़ियों को इनामी राशि देने की प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में खेल विभाग ने इसके लिए आवेदन भी आमंत्रित किए थे। इस पूरी प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए ठगों ने फर्जी वेबसाइट बनाकर खिलाड़ियों से डाटा इकट्ठा करना और पैसे वसूलना शुरू कर दिया।

    कैसे बचें ऐसे साइबर ठगों से – अपनाएं ये जरूरी सावधानियां:

    1. मोबाइल पर भेजे गए किसी भी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन न करें।

    2. किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।

    3. अज्ञात नंबरों से आने वाले फोन कॉल्स से सावधान रहें।

    4. अपनी बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, एटीएम पिन और व्यक्तिगत विवरण किसी से साझा न करें।

    5. ऑनलाइन प्राप्त होने वाली हर सूचना को तुरंत सच न मानें, पहले पुष्टि करें।

    6. अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को सुरक्षित रखें और अनजान लोगों को फ्रेंड लिस्ट में न जोड़ें।

    7. किसी भी ऑनलाइन ऑफर या इनाम जैसी बातों पर भरोसा करने से पहले दो बार सोचें।

  • IFS अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, विभाग ने थमाया कारण बताओ नोटिस

    IFS अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, विभाग ने थमाया कारण बताओ नोटिस

    IFS अधिकारी विनय कुमार भार्गव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, विभाग ने थमाया कारण बताओ नोटिस

    भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी विनय कुमार भार्गव पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और विभागीय नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के चलते प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारी को 15 दिनों के भीतर इन आरोपों पर संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत करना होगा, अन्यथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    विनय कुमार भार्गव वर्तमान में कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के पद पर कार्यरत हैं और यह पूरा मामला उस समय का है जब वह वर्ष 2019 में पिथौरागढ़ जिले में प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) के रूप में तैनात थे। जांच में पाया गया है कि उन्होंने बिना विभागीय स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया के पालन के कई पक्के निर्माण कार्य कराए। इनमें डोरमेट्री का निर्माण, वन कुटीर उत्पाद विक्रय केंद्र, 10 इको हट्स तथा एक ग्रोथ सेंटर का निर्माण शामिल है।

    सबसे अहम बात यह है कि इस पूरे प्रकरण का खुलासा भी एक अन्य वरिष्ठ IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी द्वारा की गई विस्तृत जांच के माध्यम से हुआ है। संजीव चतुर्वेदी ने इस मामले की तह तक जाकर वन मुख्यालय से लेकर राज्य शासन तक सभी संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप में पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। बताया गया है कि उन्होंने दिसंबर 2024 में इस मामले को प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) के समक्ष प्रस्तुत किया था, जिसके बाद जनवरी 2025 में उन्होंने पुनः इस मामले को शासन के समक्ष रखा और तत्कालीन DFO विनय कुमार भार्गव के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की अनुशंसा की।

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, भार्गव पर यह भी आरोप है कि उन्होंने एक निजी संस्था का चयन निर्माण कार्यों के लिए बिना किसी टेंडर प्रक्रिया और सक्षम स्वीकृति के किया, साथ ही संस्था को एकमुश्त भुगतान भी कर दिया। इसके अलावा उन्होंने मुनस्यारी के पर्यटन विभाग द्वारा प्राप्त धनराशि का 70% हिस्सा उक्त संस्था को देने हेतु अनुबंध भी किया, जबकि इसके लिए किसी प्रकार की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।

    फायर लाइन के कार्यों में भी भारी अनियमितता सामने आई है। पिथौरागढ़ में निर्धारित कार्य योजना के अनुसार फायर लाइन की कुल लंबाई 14.6 किलोमीटर तय की गई थी, लेकिन 2020-21 में बिना अनुमति 90 किलोमीटर क्षेत्र में कार्य कर ₹2 लाख की धनराशि व्यय कर दी गई। यह सीमा कार्य योजना से कई गुना अधिक थी।

    इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने इस पूरे मामले को न केवल विभाग के भीतर प्रमुख अधिकारियों के समक्ष रखा, बल्कि शासन को भी सूचित किया। उन्होंने इसे गंभीर भ्रष्टाचार की श्रेणी में रखते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला नियमों की अवहेलना, वित्तीय पारदर्शिता की कमी और पर्यावरणीय संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    वहीं इस प्रकरण में जब संजीव चतुर्वेदी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आने के बाद पूरी प्रक्रिया के तहत जांच की गई और समय रहते संबंधित अधिकारियों को सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में लिखित रूप से प्रमुख वन संरक्षक और शासन को जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया।

    अब जब शासन ने इस पूरे मामले का संज्ञान लिया है और कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है, तो आने वाले समय में इस प्रकरण में और भी अहम खुलासे और प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। विभाग की साख और शासन की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इस मामले को एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे स्पष्ट संदेश जाए कि सेवा में रहते हुए किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या नियमों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • चौकी प्रभारी से दुर्व्यवहार का मामला, तीन के खिलाफ एफआईआर

    चौकी प्रभारी से दुर्व्यवहार का मामला, तीन के खिलाफ एफआईआर

    चौकी प्रभारी से अभद्रता और मोबाइल तोड़ने का मामला, महिला समेत तीन पर मुकदमा दर्ज

    देहरादून – देहरादून के कैंट क्षेत्र में पुलिस चौकी प्रभारी के साथ अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला सामने आया है। इस मामले में कैंट कोतवाली पुलिस ने एक महिला सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों पर चौकी प्रभारी का मोबाइल छीनने और तोड़ने का भी आरोप है।

    पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता जुगल किशोर निवासी गंगोल, पंडितवाड़ी ने बीते दिनों चौकी सर्किट हाउस में एक तहरीर दी थी। उनका आरोप था कि गाड़ी पार्किंग को लेकर हुए विवाद के बाद गौरव धीमान नामक युवक ने रात के समय उनके घर पहुंचकर खिड़कियों के शीशे तोड़े। इस शिकायत पर गौरव धीमान को पूछताछ के लिए सर्किट हाउस चौकी बुलाया गया।

    पूछताछ के दौरान गौरव धीमान अपनी मां इन्दु धीमान और बहन काजल धीमान के साथ चौकी पहुंचा। पूछताछ के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। पुलिस का कहना है कि इस दौरान गौरव की बहन काजल धीमान और अन्य स्वजनों ने चौकी में मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि उन्होंने चौकी प्रभारी के हाथ से जबरन मोबाइल फोन छीना और उसे जमीन पर पटककर क्षतिग्रस्त कर दिया।

    चौकी प्रभारी की ओर से इस घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कैंट कोतवाली में तीनों आरोपियों – गौरव धीमान, काजल धीमान और इन्दु धीमान – के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

    कैंट कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कैसी भट्ट ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ अभद्रता, सरकारी कार्य में बाधा, धमकी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराओं में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    फिलहाल, घटना के बाद चौकी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि दोबारा इस तरह की स्थिति न बने।