Category: पर्यटन

  • उत्तराखण्ड टूरिज्म ने रचा इतिहास, पर्यटकों की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड

    उत्तराखण्ड टूरिज्म ने रचा इतिहास, पर्यटकों की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड

    राज्य गठन के बाद पहली बार साल भर में 6 करोड़ से अधिक आए पर्यटक

    हरिद्वार पहुंचे सर्वाधिक 3 करोड़ 42 लाख 49 हजार पर्यटक/तीर्थयात्री

    देहरादून। प्रदेश में पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने नया कीर्तिमान बनाया है। वर्ष 2025 में छह करोड़ तीन लाख से अधिक पर्यटक उत्तराखण्ड आए हैं, जो राज्य गठन के बाद से अब तक की सर्वाधिक संख्या है।

    हरिद्वार में सबसे अधिक तीन करोड़ 42 लाख 49 हजार 380 पर्यटक/तीर्थयात्री पहुंचे हैं। जबकि देहरादून में 67 लाख 35 हजार 71 और टिहरी जनपद में 53 लाख 29 हजार 759 सैलानी आए हैं।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पर्यटन विकास के लिए जहां कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं, वहीं पर्यटन/तीर्थ स्थलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खास जोर दिया गया है। पर्यटकों/तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध भी किए गए हैं। धामी सरकार के इन प्रयासों का ही परिणाम है कि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 06 करोड़ 03 लाख 21 हजार 194 पर्यटक/तीर्थयात्री उत्तराखण्ड आए हैं। इनमें एक लाख 92 हजार 533 विदेशी सैलानी शामिल हैं। उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद पहली बार पर्यटकों/तीर्थयात्रियों की संख्या छह करोड़ के पार पहुंची है। पूर्व के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2021 में 2,00,18,115, 2022 में 5,39,81,338, 2023 में 5,96,36,601 और वर्ष 2024 में 5,95,50,277 पर्यटक/तीर्थयात्रियों ने उत्तराखण्ड का रुख किया है।

    पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है। हमारी सरकार राज्य में पूरे वर्ष पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, ताकि पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय निवासियों और युवाओं को सालभर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। शीतकालीन यात्रा इसी की एक कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मां गंगा जी के दर्शन को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा की यात्रा पर आने के बाद राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिला है और बड़ी संख्या में यात्री उत्तराखण्ड पहुंचे हैं। हमने पर्यटक सुविधाएं बढ़ाने के साथ उनकी सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इन्हीं सब प्रयासों का परिणाम है कि उत्तराखण्ड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या हर वर्ष नया रिकॉर्ड बना रही है।-पुष्कर सिंह धामी
    मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

  • कोटद्वार में बर्ड फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ, क्षेत्र को मिली अनेक विकास परियोजनाओं की सौगात

    कोटद्वार में बर्ड फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ, क्षेत्र को मिली अनेक विकास परियोजनाओं की सौगात

    कोटद्वार। सनेह क्षेत्र में दो दिवसीय कोटद्वार बर्ड फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सहभागिता की।

    बर्ड फेस्टिवल का उद्देश्य पक्षी संरक्षण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा ईको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करना है।
    फेस्टिवल के अंतर्गत बर्ड वॉचिंग, बर्ड फोटोग्राफी, नेचर ट्रेल्स, पर्यावरण जागरूकता प्रदर्शनी, क्विज एवं अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में कई राज्यों से आए प्रकृति प्रेमी, छात्र एवं पर्यटक भाग ले रहे हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणाएँ भी कीं। मुख्यमंत्री द्वारा हल्दूखाता पेयजल योजना, मावकोट–मोटाढांग पेयजल योजना तथा सुखरो नदी पर बाढ़ सुरक्षा दीवार की घोषणा की गई, जिससे क्षेत्रवासियों को पेयजल एवं बाढ़ सुरक्षा से संबंधित राहत मिलेगी।

    कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण द्वारा मुख्यमंत्री को कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न जनहितकारी आवश्यकताओं को लेकर एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा गया। मांग पत्र में पेयजल, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, विद्युत एवं उच्च शिक्षा से जुड़े आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया।

    इसके उपरांत विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने अपने संबोधन में लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए क्षेत्रवासियों को अवगत कराया कि पिछले डेढ़ वर्ष से वे स्वयं एवं राज्य सरकार इस मार्ग के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण पर लगातार कार्य कर रही हैं।

    उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम इस मार्ग को सीबीआई जांच से मुक्त कराया गया है तथा वर्तमान में इस प्रकरण में प्रत्येक सप्ताह नियमित सुनवाई हो रही है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि “मैं आदरणीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के सानिध्य में सभी क्षेत्रवासियों को यह आश्वासन देती हूँ कि लालढांग–चिल्लरखाल मार्ग का निर्माण अवश्य किया जाएगा।”

    विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि घोषित योजनाओं से कोटद्वार क्षेत्र के नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं में सुधार मिलेगा और क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी।

    यह दो दिवसीय बर्ड फेस्टिवल 1 फरवरी तक चलेगा और कोटद्वार को ईको-टूरिज्म के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

    स्थानीय विधायक ऋतु खण्डूडी ने मुख्य मंत्री से मांग किया कि ये बर्ड फेस्टिवल विभाग को प्रत्येक वर्ष इसी 31 जनवरी 01 फ़रवरी की तारीख को करना चाहिए जिससे की देश के सभी पक्षी प्रेमी कोटद्वार आने का अपना प्लान बना सकें और इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    इस अवसर पर लैंसडाउन विधायक महंत दलीप सिंह रावत, जिला अध्यक्ष राजगौरव नौटियाल, महापौर शैलेंद्र रावत, राज्य मंत्री ऋषि कंडवाल, राज्य मंत्री राजेंद्र अन्थवाल , बीरेंद्र रावत, आशीष रावत, प्रेमा खंतवाल, विकासदीप मित्तल, सुमन कोटनाला, आदि लोग उपस्थित रहे।

  • उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी, सफेद चादर में लिपटे पहाड़

    उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी, सफेद चादर में लिपटे पहाड़

    उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी: सफेद चादर में लिपटे पहाड़, चकराता से मुखबा तक दिखा खूबसूरत नज़ारा, झूमे सैलानी

    उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। मौसम के मिजाज में आए बदलाव के साथ ही पहाड़ सफेद चादर में लिपटे हुए नजर आने लगे हैं। चकराता से लेकर गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखबा तक बर्फबारी का मनमोहक नज़ारा देखने को मिला। बर्फ के दीदार से सैलानी उत्साह से झूम उठे और पर्यटन स्थलों पर रौनक लौट आई।

    प्रदेश में मौसम ने करवट लेते ही ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के खूबसूरत दृश्य सामने आने लगे हैं। बर्फबारी ने पर्वतीय क्षेत्रों को सफेद चादर में ढक दिया है, जिससे ठंड में इजाफा दर्ज किया गया है। चकराता से लेकर मुखबा तक बर्फ गिरने के कारण तापमान में गिरावट आई है, वहीं पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की चहल-पहल बढ़ गई है।

    लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को प्रदेश में आखिरकार मौसम ने रुख बदला। चकराता में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। लोखंडी, आसमाड़, खड़म्बा, देवबन, मशक, कोटी कंसार और मुंडोई सहित आसपास की ऊंची पहाड़ियां बर्फ की सफेद चादर में ढक गईं। हर ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियों ने लोगों को आकर्षित किया।

    बर्फ गिरते ही चकराता पहुंचे पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सैलानी बर्फ के बीच नाचते-झूमते और फोटो खिंचवाते नजर आए। लंबे समय से बर्फबारी का इंतजार कर रहे पर्यटकों के चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं उत्तरकाशी जनपद में भी मौसम ने अचानक करवट ली। गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखबा सहित आपदा प्रभावित धराली क्षेत्र में भी बर्फबारी शुरू हो गई है।

    गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के आसपास के इलाकों में बर्फ गिरने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठंड और बढ़ गई है। श्रद्धालु और स्थानीय लोग ठंड से बचाव के उपाय करते नजर आए।

    मसूरी, धनौल्टी और आसपास के क्षेत्रों में भी हल्की बर्फबारी के साथ ठंड में इजाफा हुआ है, जिससे मौसम पूरी तरह सर्द हो गया है। वहीं निचले इलाकों में बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी है।

    मौसम विभाग के अनुसार 2300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज ऐसा ही बने रहने के आसार हैं।

    सीजन की इस पहली बर्फबारी ने जहां पहाड़ों में ठंड बढ़ा दी है, वहीं पर्यटन कारोबारियों, सैलानियों और किसानों के लिए यह उम्मीद और उत्साह लेकर आई है। लंबे समय से बर्फ का इंतजार कर रहे लोगों को इस बर्फबारी से राहत और खुशी मिली है। किसानों के चेहरों पर भी रौनक लौट आई है, क्योंकि यह बर्फबारी उनके लिए लाभकारी मानी जा रही है।

  • उत्तराखण्ड पर्यटन को बढ़ावा देने पैन-इंडिया रोड शो की शुरुआत

    उत्तराखण्ड पर्यटन को बढ़ावा देने पैन-इंडिया रोड शो की शुरुआत

    दिल्ली से हुई शुरुआत, 250 से अधिक टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स ने लिया भाग

    दिल्ली। उत्तराखण्ड पर्यटन ने देशभर में एकीकृत रोड शो अभियान की शुरुआत दिल्ली से की। यह पहली बार है जब कोई राज्य अपने पर्यटन उत्पादों को संगठित, समन्वित और बहु-शहरी अभियान के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तराखण्ड के 250 से अधिक पर्यटन उद्योग से जुड़े स्टेकहोल्डर्स ने इस रोड शो में सहभागिता की।
    यह अभियान राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत प्रारम्भ किया गया है, जिसका उद्देश्य उत्तराखण्ड को वर्षभर (365-दिवसीय) पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। आगामी महीनों में यह रोड शो देश के प्रमुख महानगरों में आयोजित किया जाएगा।

    रोड शो में पर्यटन विज़न और रणनीति पर जोर
    दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव पर्यटन अभिषेक रुहेला, गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा तथा कुमाऊँ मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विनीत तोमर सहित अनेक विभागीय अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और देश के प्रमुख टूर व ट्रैवल ऑपरेटर मौजूद रहे।

    इस राष्ट्रीय अभियान का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर के ट्रैवल ट्रेड और पर्यटन उद्योग को उत्तराखण्ड के एडवेंचर, विंटर, वेलनेस, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं अनुभवात्मक पर्यटन उत्पादों से जोड़ना है। साथ ही राज्य को वेडिंग डेस्टिनेशन, स्पिरिचुअल मेगा सर्किट और इंटरनेशनल टूरिज्म गेटवे के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई।

    कार्यक्रम के दौरान राज्य की पर्यटन नीति, भविष्य की संभावनाओं और निवेश अवसरों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल विकास निगम की योजनाओं तथा आगे की रणनीति से भी उद्योग जगत को अवगत कराया गया।
    रोड शो में पद्मश्री अजीत बजाज, तरुण थियो, करण और अभिषेक अहलूवालिया सहित प्रतिष्ठित वक्ताओं ने उत्तराखण्ड में एडवेंचर, विंटर टूरिज्म, स्नो लेपर्ड साइटिंग, होटल एवं होमस्टे नेटवर्क की बढ़ती संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने उत्तराखण्ड को देश का सुरक्षित, रोमांचक और सुव्यवस्थित पर्यटन गंतव्य बताया।

    बी2बी संवाद से बढ़े निवेश के अवसर
    रोड शो के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र, बी2बी मीटिंग्स, नेटवर्किंग लंच और वन-टू-वन बिजनेस एंगेजमेंट्स आयोजित किए गए। इनमें दिल्ली-एनसीआर के टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों और एडवेंचर संस्थानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उद्योग जगत ने उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अगली बड़ी सफलता कहानी के रूप में देखने की उम्मीद जताई।
    इस अवसर पर पर्यटन मंत्री ने कहा कि यह रोड शो श्रृंखला राज्य में पर्यटन निवेश, उद्योग सहयोग और पर्यटक आगमन को कई गुना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने शीतकालीन पर्यटन, स्कीइंग, स्नो ट्रैकिंग, विंटर फेस्टिवल्स, विंटर चारधाम, सनशाइन टूरिज्म, स्नो लेपर्ड साइटिंग और अल्ट्रा रन जैसे आयोजनों के माध्यम से उत्तराखण्ड को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की बात कही।

    सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि यह अभियान उत्तराखण्ड को टूरिज्म कैपिटल ऑफ इंडिया बनाने और राज्य को ईयर-राउंड डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि दिल्ली रोड शो ने यह साबित किया है कि उत्तराखण्ड तेजी से उभरता हुआ, सुरक्षित, विविध और निवेश-अनुकूल पर्यटन राज्य बन चुका है।

  • पर्यटन को बढ़ावा: चयनित गांव बनेंगे मॉडल टूरिज्म विलेज

    पर्यटन को बढ़ावा: चयनित गांव बनेंगे मॉडल टूरिज्म विलेज

    टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक,बनेगी जिला स्तरीय समिति

    देहरादून। प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को सशक्त बनाने की दिशा में टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव पर्यटन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने की। बैठक मुख्यमंत्री के निर्देशों तथा पर्यटन मंत्री के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।

    बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स समिति का गठन किया जाए। समिति में ग्रामीण विकास, आयुष, उद्यान, कृषि, सगंध पौधा केंद्र, पंचायती राज, प्रशिक्षण एवं सेवायोजन सहित अन्य संबंधित विभागों को शामिल किया जाएगा। समिति द्वारा शीघ्र ही प्रत्येक जनपद में कम से कम दो ग्रामीण पर्यटन ग्रामों का चयन कर अवस्थापना विकास से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर पर्यटन विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे।

    बैठक में माट (कसार देवी) अल्मोड़ा, मदकोट (पिथौरागढ़), प्योड़ा (नैनीताल) और लाखामंडल (देहरादून) को वैलनेस टूरिज्म से जोड़ने, लीति (बागेश्वर) को कम्युनिटी बेस्ड, एडवेंचर एवं एग्री बेस्ड टूरिज्म के अंतर्गत तथा घेस (चमोली), जखोल (उत्तरकाशी), सौड़ (टिहरी) और सारी (रुद्रप्रयाग) गांवों को एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ने पर चर्चा की गई।

    चयनित गांवों को सभी विभागों के समन्वय से मॉडल टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इन गांवों में अधिकाधिक होम-स्टे निर्माण के साथ-साथ क्षेत्र की प्रकृति और सांस्कृतिक विशेषताओं के अनुरूप वैलनेस, हर्बल, एग्री, हेरिटेज, कम्युनिटी बेस्ड और एडवेंचर टूरिज्म को केंद्र में रखा जाएगा। इस संबंध में पर्यटन विभाग द्वारा आदर्श पर्यटन ग्राम की रूपरेखा पर आधारित एक प्रस्तुतीकरण भी प्रस्तुत किया गया।

    बैठक में रूरल बिजनेस इन्क्यूबेटर को राज्य में होम-स्टे संचालकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए गए। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग की अपर सचिव, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अपर निदेशक पर्यटन, रूरल बिजनेस इन्क्यूबेटर के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न जनपदों से मुख्य विकास अधिकारी, जिला पर्यटन विकास अधिकारी तथा कृषि विभाग के अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

    इस अवसर पर सचिव पर्यटन ने कहा कि बैठक में लिए गए सभी निर्णय प्रधानमंत्री के वाइब्रेंट विलेज विजन तथा राज्य सरकार के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के संकल्प से प्रेरित हैं।

  • पर्यटन क्षेत्र में बड़ा बदलाव: गाइड प्रमाणन और विदेशी इंटर्नशिप के लिए नया ढांचा

    पर्यटन क्षेत्र में बड़ा बदलाव: गाइड प्रमाणन और विदेशी इंटर्नशिप के लिए नया ढांचा

    पर्यटन कौशल विकास को दी जाएगी नई दिशा

    सचिव पर्यटन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा राज्य में पर्यटन आधारित कौशल विकास, आतिथ्य सेवाओं के मानकीकरण तथा प्रमाणित गाइड तैयार करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समीक्षा एवं कार्ययोजना बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्बयाल ने की।

    बैठक में उत्तराखण्ड के पर्यटन शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने, युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देने तथा दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

    बैठक के प्रमुख निर्णय

    GIHM संस्थानों का गैप एनालिसिस:
    टीएचएससी एवं द ललित हॉस्पिटैलिटी के माध्यम से जीआईएचएम संस्थानों का गैप एनालिसिस कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए गए।

    UTDB–THSC एमओयू:
    बीपीएल वर्ग के अभ्यर्थियों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि सामान्य वर्ग के लिए 50:50 शुल्क व्यवस्था लागू होगी। प्रशिक्षणार्थियों के चयन एवं मोबिलाइजेशन की जिम्मेदारी टीएचएससी की होगी। कार्यक्रम गढ़वाल एवं कुमाऊँ दोनों मंडलों में संचालित किए जाएंगे।

    पर्यटन गाइड प्रमाणन

    उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद द्वारा प्रशिक्षित सभी नेचर, हेरिटेज, डेस्टिनेशन, एस्ट्रो, रिवर एवं साहसिक पर्यटन गाइडों को आधिकारिक पहचान पत्र जारी किए जाएंगे।

    ‘फिनिशिंग स्कूल’ कार्यक्रम

    जीआईएचएम व आईएचएम के छात्र-छात्राओं के लिए उनके संस्थानों में ही 15 दिवसीय विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्लेसमेंट प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा सके।

    वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत पायलट परियोजना

    धारचूला क्षेत्र में पायलट परियोजना के तहत स्थानीय युवाओं व होमस्टे संचालकों को आतिथ्य सेवा एवं भोजन गुणवत्ता से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में भी पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।

    डिजिटल प्रशिक्षण एवं प्रमाणन पोर्टल

    राज्य स्तर पर एक डिजिटल प्रशिक्षण एवं प्रमाणन पोर्टल विकसित किया जाएगा। साथ ही टीएचएससी के सहयोग से प्रदेश के जीआईएचएम एवं आईएचएम संस्थानों के 100 मेधावी छात्रों को विदेशी संस्थानों में इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
    सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्बयाल ने कहा कि बैठक में लिए गए सभी निर्णय इस उद्देश्य से जुड़े हैं कि पर्यटन क्षेत्र में “अतिथि देवो भव” की भावना को व्यवहार में उतारा जाए और प्रदेश के युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर सृजित किए जा सके।

    बैठक में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर्यटन विकास बोर्ड अभिषेक रोहेला, अपर निदेशक पर्यटन पूनम चन्द, संयुक्त निदेशक पर्यटन एस. एस. समन्त, उपनिदेशक पर्यटन अमित लोहानी, आईएचएम देहरादून के प्रधानाचार्य डॉ. शिव मोहन सहित जीआईएचएम मसूरी, नई टिहरी, पिथौरागढ़ एवं रामनगर के प्रधानाचार्य शामिल रहे। इसके अतिरिक्त टीएचएससी के सीईओ राजन बहादुर, डीडीयू-जीकेवाई के सीओओ डॉ. प्रभाकर बेबुनि, टीएलएसएचएस के डीन अनुपम मुखर्जी, टीएचएससी के उपाध्यक्ष विवेक शण्डिल्या सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • 15 जनवरी तक तैयार होगी ट्रैकिंग व माउंटेनियरिंग की एकीकृत नीति

    15 जनवरी तक तैयार होगी ट्रैकिंग व माउंटेनियरिंग की एकीकृत नीति

    नई चोटियां खोलने और जबरखेत मॉडल लागू करने के निर्देश

    देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में वन विभाग के अंतर्गत इको टूरिज्म से संबंधित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में इको टूरिज्म की संभावनाओं, नीतिगत सुधारों और संरचनात्मक विकास पर विस्तार से चर्चा की गई।

    मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड का अधिकांश भूभाग वनाच्छादित है, जिससे प्रदेश में इको टूरिज्म की अत्यधिक संभावनाएं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि इको टूरिज्म की संभावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्थलों की पहचान कर उन्हें विकसित किया जाए, जो इको टूरिज्म के लिए मजबूत इको-सिस्टम तैयार करें।

    उन्होंने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए एकीकृत नीति तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि इसे 15 जनवरी तक अंतिम रूप देकर शासन को प्रस्तुत किया जाए। नीति तैयार करने से पूर्व निजी स्टेकहोल्डर्स से संवाद करने पर भी उन्होंने जोर दिया, ताकि नीति लागू होने के बाद व्यवहारिक समस्याओं से बचा जा सके। इसके साथ ही ट्रैकिंग के लिए नई चोटियां खोलने की दिशा में कार्य करने, पर्यावरण ऑडिट सहित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने तथा शीघ्र एसओपी जारी करने के निर्देश दिए गए।

    मुख्य सचिव ने चौरासी कुटिया के जीर्णोद्धार कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कार्यदायी संस्था को सभी कार्यों की स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित करने को कहा। उन्होंने लक्ष्य निर्धारित कर समयबद्ध कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया।

    इको टूरिज्म के लिए जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किए जाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए संभागीय वन अधिकारियों को टास्क सौंपते हुए कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की कार्ययोजना तैयार करें। साथ ही 10 चिन्हित इको टूरिज्म साइट्स का प्लान एक माह के भीतर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।

    वन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए एक प्रभावी मैकेनिज्म तैयार करने पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि इन गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को दी जा सकती है, क्योंकि बोर्ड का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने बोर्ड को सशक्त बनाने, मैनपावर बढ़ाने और बजट में प्रावधान करने के निर्देश दिए।
    अपर सचिव वन को इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के लिए नया बजट हेड खोलने के निर्देश दिए गए, ताकि उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की तर्ज पर ईटीडीबी को भी अनुदान दिया जा सके। इको टूरिज्म साइट्स के संचालन हेतु बोर्ड के माध्यम से शीघ्र एमओयू किए जाने की बात भी कही गई।

    मुख्य सचिव ने इको टूरिज्म से संबंधित हाईपावर समिति की बैठक प्रत्येक माह आयोजित कराने के निर्देश दिए। साथ ही प्रदेशभर में पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने, प्रशिक्षण उपरांत प्रमाण पत्र प्रदान करने और सर्टिफिकेशन को एक ही स्थान पर एंकर करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रशिक्षण एवं प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को सौंपी गई तथा उच्च शिक्षा विभाग से भी इस संबंध में सुझाव लेने को कहा गया।

    बैठक में सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी, पीसीसीएफ रंजन कुमार मिश्रा, सीसीएफ इको टूरिज्म पी.के. पात्रो, अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

  • श्रीनगर-पौड़ी क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं: डॉ. धन सिंह रावत

    श्रीनगर-पौड़ी क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं: डॉ. धन सिंह रावत

    कहा, पर्यटन स्थलों के विकास को बनाये ठोस कार्ययोजना

    जीएमवीएन व पर्यटन विभाग के अधिकारियों को दिये निर्देश

    देहरादून । श्रीनगर-पौड़ी क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। क्षेत्र के अनछुए एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिये पर्यटन विभाग, संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) को ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। इसके अलावा क्षेत्र में हेली सुविधाएं मुहैया कराने, कमलेश्वर–धारी देवी–देवलगढ़– खिर्सू–कंडोलिया (पौड़ी) पर्यटन सर्किट एवं क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों के सौंदर्यीकरण के कार्यों में तेजी लाने को भी अधिकारियों को कहा।

    सूबे के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज शासकीय आवास पर अपने विधानसभा क्षेत्र श्रीनगर व पौड़ी में पर्यटन की संभावनाओं एवं विकास को लेकर पर्यटन विभाग, संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम की संयुक्त बैठक ली। जिसमें उन्होंने क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने, प्रमुख पर्यटक एवं धार्मिक स्थलों के विकास तथा आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।
    डॉ. रावत ने कहा कि श्रीनगर-पौड़ी क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है। इन संभावनाओं का समुचित उपयोग कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करने को अधिकारियों को कहा। उन्होंने थलीसैण, खिर्सू एवं पाबों विकासखंड में हेलीपैड निर्माण कर पर्यटकों के लिये हेली सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये।
    बैठक में उन्होंने कमलेश्वर–धारी देवी–देवलगढ़–खिर्सू–कंडोलिया (पौड़ी) पर्यटन सर्किट के विकास कार्यों में तेजी लाने, मार्गों एवं सुविधाओं को सुदृढ़ करने, धारी देवी मंदिर के मुख्य मार्ग पर सुरक्षा दीवार लगने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। इसके अलावा पैठाणी स्थित राहु मंदिर एवं थलीसैण स्थित विनसर मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर उन्हें शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिये।

    कैबिनेट मंत्री ने विधानसभा क्षेत्र में पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से योजनाओं को धरातल पर उतारने के निर्देश दिये, ताकि श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सके।

    बैठक में अपर सचिव पर्यटन अभिषेक रोहिल्ला, महाप्रबंधक गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) पीयूष सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जबकि जनपद स्तरीय अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया।

  • नौ सौ गाइडों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जाएगा

    नौ सौ गाइडों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जाएगा

    जनवरी से शुरू होगा राफ्टिंग गाइडों का विशेष प्रशिक्षण

    पर्यटन सचिव की अध्यक्षता में बैठक

    देहरादून। राज्य में राफ्टिंग की संभावनाओं को सुदृढ़, सुरक्षित एवं व्यवस्थित करने के उद्देश्य से 22 दिसंबर 2025 को पर्यटन सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गब्र्याल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राफ्टिंग एसोसिएशन, राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन, राफ्टिंग तकनीकी एवं विनियामक समिति, गंगा नदी राफ्टिंग समिति सहित संबंधित हितधारकों ने प्रतिभाग किया।

    बैठक में वर्तमान में कार्यरत राफ्टिंग गाइडों की फर्स्ट एड एवं सीपीआर से संबंधित तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इस क्रम में मोंटाना (यूएसए) से संबद्ध संस्था Hanifl Centre, जो पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के साथ कार्यरत है, के माध्यम से प्रथम चरण में तीन दिवसीय Wilderness First Aid (WFA) प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह प्रशिक्षण जनवरी 2026 के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ होगा। इसके माध्यम से जनवरी–फरवरी 2026 के दौरान राफ्टिंग व्यवसाय से जुड़े लगभग 900 गाइडों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    बैठक के दौरान राफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों—नदी तटों पर राफ्टिंग कैंपों की पुनः स्थापना, गंगा नदी की वहन क्षमता का पुनः आकलन, मुख्य मार्ग से राफ्टिंग पिकअप प्वाइंट में सुधार तथा राफ्टिंग पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस व्यवस्था—पर पर्यटन सचिव द्वारा शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया।

    इसके साथ ही राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन के प्रस्ताव पर राफ्टिंग गाइडों की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। गंगा नदी राफ्टिंग समिति द्वारा लिए जाने वाले शुल्क में वृद्धि पर भी राफ्टिंग एवं गाइड एसोसिएशन की सहमति बनी।

    अंत में पर्यटन सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गंगा नदी राफ्टिंग समिति के सचिव, संबंधित अधिकारियों एवं हितधारकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए तथा उत्तराखंड के राफ्टिंग व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान दिलाने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।

    बैठक में उप निदेशक पर्यटन अमित लोहनी, वरिष्ठ साहसिक खेल अधिकारी एवं सचिव गंगा नदी राफ्टिंग समिति जसपाल सिंह चौहान, साहसिक खेल अधिकारी सीमा नौटियाल, थल क्रीड़ा विशेषज्ञ भूपेन्द्र सिंह, राफ्टिंग समिति अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष रामपाल सिंह, तकनीकी समिति सदस्य अरविन्द भारद्वाज, विनियामक समिति सदस्य मंजूल रावत, ध्रुवनाथ राणा सहित अन्य अधिकारी एवं हितधारक उपस्थित रहे।

  • नए साल में पहली बार उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव, देशभर में रोड शो

    नए साल में पहली बार उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव, देशभर में रोड शो

    नए साल में उत्तराखंड के पर्यटन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पहली बार उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां पर्यटन विभाग द्वारा शुरू कर दी गई हैं। इस कॉन्क्लेव के माध्यम से राज्य को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। खास बात यह है कि इस आयोजन के साथ-साथ देशभर में रोड शो भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे उत्तराखंड के पर्यटन उत्पादों और संभावनाओं को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा सकेगा।

    शनिवार को उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने की। बैठक में उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव के आयोजन को लेकर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। यह निर्णय राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य के इतिहास में पहली बार इस तरह का व्यापक और संगठित बी2बी (बिजनेस टू बिजनेस) ट्रैवल कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रहा है।

    यह कॉन्क्लेव इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन, उत्तराखंड टूरिज्म रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन, टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इन सभी संगठनों की सहभागिता से यह आयोजन और अधिक प्रभावी एवं व्यावहारिक स्वरूप में सामने आएगा।

    सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बैठक के दौरान कहा कि यह दो दिवसीय बी2बी ट्रैवल कॉन्क्लेव उत्तराखंड को वेडिंग टूरिज्म, साहसिक पर्यटन और जिम्मेदार पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक स्थल, साहसिक गतिविधियों और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का अनूठा संगम है, जिसे इस कॉन्क्लेव के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    कॉन्क्लेव के दौरान डोमेस्टिक एवं इंटरनेशनल टूर ऑपरेटर्स, वेडिंग प्लानर्स, इवेंट एवं कॉन्सर्ट आयोजकों तथा साहसिक पर्यटन से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं को अपने उत्पादों और सेवाओं को एक्सपो एवं डिस्प्ले प्रारूप में प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटन से जुड़े हितधारकों को आपसी नेटवर्किंग, साझेदारी और नए व्यापारिक अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी।

    इसके अलावा कॉन्क्लेव में वेडिंग टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, डोमेस्टिक एवं इंटरनेशनल टूरिज्म और रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित विशेष मीटिंग्स और थीमैटिक सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा। इन सत्रों के माध्यम से विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे और उत्तराखंड में पर्यटन को सतत एवं जिम्मेदार तरीके से आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श करेंगे।

    कुल मिलाकर, नए साल में होने वाला यह उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव न केवल राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देगा, बल्कि रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।