Category: पर्यटन

  • देहरादून-मसूरी रोप-वे का तेजी से चल रहा काम, दो साल बाद मिलेगी सौगात

    देहरादून-मसूरी रोप-वे का तेजी से चल रहा काम, दो साल बाद मिलेगी सौगात

    देहरादून-मसूरी रोप-वे परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। 2026 तक पर्यटक रोप-वे के माध्यम से मात्र 15 मिनट में मसूरी पहुंच सकेंगे। इस रोमांचक सफर में खूबसूरत नजारों का आनंद लेते हुए पर्यटक सीधे मसूरी की माल रोड पर उतरेंगे। रोप-वे से न केवल पर्यटकों को जाम से मुक्ति मिलेगी बल्कि पर्यटन विभाग के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।

    दून-मसूरी रोप-वे परियोजना का कार्य तेजी से चल रहा है। देहरादून में सटे पुरकुल गांव में रोप-वे के लोअर टर्मिनल एंव पार्किंग का फाउंडेशन लगभग तैयार हो चुका है। वहीं, तीसरे तल पर पार्किंग का कार्य निर्माणाधीन है। जबकि गांधी चौक मसूरी में बन रहे अपर टर्मिनल के लिए एप्रोच सड़क का कार्य प्रगति पर है। इसके बाद वहां अपर टर्मिनल का फाउंडेशन कार्य शुरू होगा। दो साल बाद पर्यटक रोप-वे के माध्यम से मसूरी पहुंचने लगेंगे।

    उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड ने इस साल की शुरूआत में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के अंतर्गत मसूरी स्काइवार कंपनी के माध्यम से 300 करोड़ रुपये की लागत से देहरादून-मसूरी रोप-वे का श्री गणेश कराया था। रोप-वे का एक छोर पुरकुल गांव में बनाया जा रहा है जबकि दूसरा मसूरी के गांधी पार्क में बन रहा है। पुरकुल में पर्यटकों को वाहन खड़ा करने के लिए 10 मंजिला मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जा रही है।
    पार्किंग में करीब दो हजार से अधिक वाहनों को खड़ा करने की क्षमता होगी। साथ ही यहां पर्यटकों को रिफ्रेशमेंट के लिए कैफेटेरिया, शौचालय आदि की सुविधा मिलेगी। पर्यटन विभाग का दावा है कि वर्ष 2026 तक रोप-वे का निर्माण पूर्ण हो जाएगा।

    15 मिनट में होगा डेढ़ घंटे का सफर
    आमतौर पर पर्यटन सीजन में पर्यटकों को देहरादून से मसूरी पहुंचने के लिए 1.5 से तीन घंटे का समय लगता है। लेकिन रोप-वे के माध्यम से पर्यटक मात्र 15 मिनट में सफर पूर्ण कर मसूरी का आनंद ले सकेंगे। सड़क मार्ग से देहरादून से मसूरी की दूरी 33 किमी है। जबकि रोप-वे से यह दूरी 5.5 किमी की हो रही है। रोप-वे में आटोमैटिक यात्री ट्रालियां लगायी जाएंगी। जिनके दरवाजे स्वचलित तरह से खुले और बंद होंगे। इन ट्रालियों के माध्यम से एक घंटे में एक ओर से करीब 1300 यात्री पहुंच सकेंगे।

    खूबसूरत नजारों के बीच होगा सफर, जाम से मिलेगी मुक्ति
    रोप-वे के माध्यम से मसूरी का सफर पर्यटकों के लिए अत्यधिक रोमांच और खूबसूरत नजारों से भरा होगा। पहाड़ों के बीच से गुजर कर पर्यटक सीधे मसूरी की माल रोड में दस्तक देंगे। इससे पर्यटक सीजन में देहरादून की मसूरी और मसूरी नगर में लगने वाले जाम में भी अंकुश लगेगा।

    पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पर्यटन सीजन रोजाना 10 हजार से अधिक पर्यटक मसूरी पहुंचते हैं। ऐसे में मसूरी में यातायात बाधित हो जाता है और वाहन पार्किंग की भी समस्या होती है।

    पर्यटन विभाग के राजस्व को इजाफा, चमकेगा पुरकुल
    दून-मसूरी रोप-वे से पर्यटन विभाग के राजस्व में अच्छा-खासा इजाफा होगा। साथ ही पुरकुल गांव में दिनभर वाहनों और पर्यटकों की चहल-पहल रहेगी। जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं, पर्यटकों को प्रदूषण मुक्त सफर कर सकेंगे।

    यह रोप-वे बर्फबारी और बारिश के बीच सभी सीजन में निरंतर संचालित हो सकेगी। ऐसे में बारिश के दौरान भू-स्खलन और मलबा आने से मसूरी रूट बंद होने का असर पर्यटकों पर नहीं पड़ेगा। इस दौरान भी पर्यटक रोप-वे के माध्यम से सटीक समय में मसूरी पहुुंचेंगे।

  • सीएम के निर्देश, चारधाम के शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए की जाए यात्रा शुरू

    सीएम के निर्देश, चारधाम के शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए की जाए यात्रा शुरू

    शीतकाल में तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार चारधामों के प्रवास स्थलों के लिए शीतकालीन यात्रा शुरू करेगी। शीतकाल में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के प्रवास स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के होटलों में ठहरने पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए। सीएम भी शीतकालीन यात्रा में प्रवास स्थलों पर दर्शन करेंगे।

    शुक्रवार को सीएम आवास में मुख्यमंत्री धामी ने उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि केदारनाथ, बदरीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए यात्रा शुरू की जाए। इसके साथ ही शीतकालीन यात्रा के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को शीतकाल में प्रवास स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था करने को कहा। मुख्यमंत्री अगले सप्ताह शीतकालीन प्रवास स्थलों की यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा भी करेंगे।

    केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बाद 17 नवंबर को बदरीनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्रा आगामी छह माह के लिए संपन्न हुई। शीतकाल में बाबा केदार की पूजा-अर्चना ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होती है। जबकि यमुनोत्री धाम की खरसाली और गंगोत्री धाम की मुखवा में पूजा पाठ व दर्शन किए जाते हैं। बदरीनाथ धाम की पूजा अर्चना व पांडुकेश्वर व नृसिंह मंदिर जोशीमठ में होती है।

  • पर्यटन क्षेत्र को विश्व स्तरीय बनाने के उद्देश्य से 40 प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल हुआ ऋषिकेश

    पर्यटन क्षेत्र को विश्व स्तरीय बनाने के उद्देश्य से 40 प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल हुआ ऋषिकेश

    देश के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने और इसे विश्व स्तरीय बनाने के उद्देश्य से योगनगरी ऋषिकेश को देश के 40 प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का आभार व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत ऋषिकेश में 100 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक राफ्टिंग बेस स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना जल क्रीड़ाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यटकों को सुविधाजनक और रोमांचक अनुभव प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि राफ्टिंग बेस स्टेशन के निर्माण से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की आर्थिकी भी मजबूत होगी।

  • टिहरी बांध: क्रूज बोट में बैठकर खूबसूरत वादियों का दीदार, झील में सैलानी बिता सकेंगे रात

    टिहरी बांध: क्रूज बोट में बैठकर खूबसूरत वादियों का दीदार, झील में सैलानी बिता सकेंगे रात

    उत्तराखंड के टिहरी बांध की झील में साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए अब नया लुत्फ उठाने का मौका भी मिलेगा। फ्लोटिंग हट्स के बाद अब झील में क्रूज बोट में भी सैलानी रात बिताकर पर्यटन गतिविधियों का आनंद उठा सकते हैं। झील में 12 कमरों के क्रूज बोट का पीपीपी मोड पर संचालन शुरू हो गया है। क्रूज बोट का संचालन कोटीकाॅलोनी से डोबरा-चांठी पुल तक किया जा रहा है।

    टिहरी बांध की झील में तीन साल से कूज बोट निर्माणाधीन था। पर्यटन विभाग के सहयोग से पीपीपी मोड पर एक निजी कंपनी ने लगभग आठ करोड़ की लागत से क्रूज तैयार किया है। इसमें पर्यटकों के रुकने के लिए 12 कमरे, रेस्टोरेंट, शौचालय आदि सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्रूज की छत पर पर्वतीय क्षेत्र के घरों में लगे पठाल की प्रतिकृति की तरह बनाया गया है।

    वर्तमान में कई तरह की 100 से अधिक बोट संचालित
    टिहरी झील में वर्ष 2014-15 में बोटिंग सेवा शुरू हुई थी। वर्तमान में कोटीकाॅलोनी बोटिंग प्वाइंट से पैरासेलिंग, बनाना राइडिंग, स्पीड बोट, जेट स्की, जॉर्बिंग, वाटर रोलर, वाटर स्कूटर समेत 100 से अधिक बोट संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा डोबरा-चांठी और पीपलडाली में एक-एक नई बोट प्वाइंट जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

    टिहरी झील में क्रूज बोट का संचालन शुरू किया गया है। कोटीकॉलोनी से डोबरा-चांठी तक क्रूज बोट का संचालन होगा। फिलहाल क्रूज ट्रायल के तौर पर चलेगा। दो-तीन दिन में कंपनी विधिवत बुकिंग शुरू कर देगी।
    – सोबत सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी, टिहरी

  • प्राधिकरण गठित कर अगले वर्ष की यात्रा तैयारियों में जुटें: सीएम धामी

    प्राधिकरण गठित कर अगले वर्ष की यात्रा तैयारियों में जुटें: सीएम धामी

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा प्राधिकरण का गठन कर अधिकारी अगले साल की चारधाम यात्रा के लिए अभी से तैयारियों में जुट जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों के लिए हर समाप्त उच्च स्तर पर समीक्षा करने के निर्देश दिए। कहा, इस साल चारधाम यात्रा सकुशल संपन्न हो गई। यात्रा प्रदेश की आर्थिकी का आधार है।

    यात्रा के लिए बेहतर व्यवस्था और प्रबंधन के लिए शीघ्र प्राधिकरण का गठन कर अधिकारी 2025 की चारधाम यात्रा की तैयारियों में जुट जाएं। प्राधिकरण गठन से पहले सभी हितधारकों की राय ली जाए। साथ ही बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग की वेबसाइट को और अधिक बेहतर बनाया जाए, जिससे यात्रा संबंधित सभी जानकारी वेबसाइट पर ही मिल जाए।

    सीएम ने कहा, आपदा काल में क्षतिग्रस्त मुख्य मार्गों के साथ ही आंतरिक मार्गों को भी प्राथमिकता पर ठीक किया जाए। सीएम ने कहा कि,प्रदेश में राष्ट्रीय खेल का आयोजन महत्वपूर्ण है। उन्होंने तैयारियों के लिए सचिव स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी देने के साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर सप्ताह समीक्षा बैठक करने के लिए निर्देश दिए

  • शीतकाल में अब इन गद्दीस्थलों पर होंगे चारधामों के दर्शन

    शीतकाल में अब इन गद्दीस्थलों पर होंगे चारधामों के दर्शन

    बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट विधि विधान से बंद होने के साथ ही छह माह के लिए चारधाम यात्रा का पूर्ण रूप समापन हो गया है, लेकिन श्रद्धालुओं को शीतकाल में गद्दीस्थलों पर चारधामों के दर्शन व पूजा अर्चना की सुविधा होगी।

    साथ ही जो श्रद्धालु यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित धामों में जाने में असमर्थ हैं, वह गद्दीस्थलों पर दर्शन कर सकते हैं। प्रदेश सरकार भी शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा दे रही, जिससे राज्य में पूरे साल पर्यटन गतिविधियां चलती रहे। केदारनाथ धाम के कपाट 10 मई को खुले और तीन नवंबर को बंद हुए।

    ओंकारेश्वर मंदिर में विराजे बाबा केदार

    बाबा केदार की पंचमुखी डोली ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान है। अगले साल अप्रैल-मई में कपाट खुलने से पहले पंचमुखी डोली ऊखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी। शीतकाल में बाबा केदार की पूजा अर्चना ऊखीमठ में होती है। यहां पर श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन व पूजा अर्चना कर सकते हैं।

     

    पांडुकेश्वर में विराजमान हुई उद्धव व कुबेर की डोली

    बदरीनाथ धाम के कपाट 12 मई को खुले थे और 17 नवंबर को बंद हो गए। धाम से उद्धव व कुबेर की डोली पांडुकेश्वर योग बदरी में विराजमान हो गईं हैं, जबकि 19 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर में पहुंचेगी। पांडुकेश्वर व जोशीमठ में शीतकाल में श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल की पूजा अर्चना व दर्शन कर सकेंगे।

    मां यमुना की डोली खरशाली में विराजमान
    यमुनोत्री धाम के कपाट हर साल अक्षय तृतीय पर खुलते हैं। इस साल 10 मई को कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई। तीन नवंबर को मंदिर के कपाट बंद हुए। अगले साल कपाट खुलने तक मां यमुना डोली खरशाली स्थित यमुना मंदिर में विराजमान है। जहां पर नियमित पूजा अर्चना की जाती है।

    मुखवा में गंगोत्री धाम के दर्शन
    गंगोत्री धाम के कपाट 10 मई को खुले थे। दो नवंबर को विधि विधान से बंद किए गए। शीतकाल में मां गंगोत्री मुखवा में विराजमान होती है। जहां पर श्रद्धालु अगले साल कपाट खुलने तक पूजा अर्चना व दर्शन कर सकते हैं।

    इस बार चारधाम में इतने यात्री पहुंचे

    धाम तीर्थयात्रियों की संख्या
    केदारनाथ 16,52,070
    बदरीनाथ 14,35,401
    गंगोत्री 8,18,273
    यमुनोत्री 7,14,779
    हेमकुंड साहिब 1,83,692

    केदारनाथ व बदरीनाथ धाम के शीतकाल गद्दी स्थलों पर श्रद्धालुओं को दर्शन करने के साथ पूजा अर्चना की सुविधा है। बीकेटीसी शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए गद्दी स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं व अवस्थापना विकास के कार्य कर रही है।
    – अजेंद्र अजय, अध्यक्ष, बदरी-केदार मंदिर समिति

  • विधि-विधान से रात्रि को 9 बजकर 07 मिनट पर ब़ंद हुए श्री बदरीनाथ धाम के कपाट

    विधि-विधान से रात्रि को 9 बजकर 07 मिनट पर ब़ंद हुए श्री बदरीनाथ धाम के कपाट

    विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट आज रविवार 17 नवंबर को सेना के भक्तिमय बैंड की भक्तिमय धुनों के साथ विधि- विधान से जय बदरीविशाल के उदघोष के साथ आज रात्रि 9 बजकर 07 बजे शीतकाल के लिए बंद हो गये । आज कपाट बंद होने के दिन तक साढ़े सात हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए है।इस दौरान बदरीनाथ धाम में पहाड़ियों पर बर्फ देखी जा सकती है जिससे सुबह शाम सर्द बयारें चल रही है कपाट बंद होने हेतु श्री बदरीनाथ पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश ने मंदिर को फूलों से सजाया है।


    स्थानीय लोक कलाकारों तथा महिला मंगल दल बामणी, पांडुकेश्वर द्वारा स्थानीय लोकनृत्य तथा जागर आदि का आयोजन किया जाएगा दानीदाताओं तथा सेना ने श्रद्धालुओं के लिए भंडारों का आयोजन किया है श्री बदरीनाथ धाम में मौसम साफ है शाम सुबह सर्दी है तीर्थयात्रियों की चहल-पहल कपाट बंद होने के अंतिम दिन तक बनी रही।

    श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने अपने संदेश में यात्रा समापन के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी है तथा श्री बदरीनाथ यात्रा से जुड़े सभी विभागों संस्थाओं का आभार जताया है।

    बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने यात्रा समापन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

    जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने श्री बदरीनाथ धाम यात्रा समापन के अवसर पर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किये तथा कहा कि प्रशासन तथा मंदिर समिति के समन्वयन से श्री बदरीनाथ यात्रा कुशलतापूर्वक संपन्न हो रही है रिकार्ड संख्या में तीर्थयात्री पहुंचे है। श्री बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान का कार्य तेजी से चल रहा है जिससे तीर्थयात्रियों को अधिक सुविधाएं मिलेंगी।

    बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि इस यात्रा वर्ष श्री बदरीनाथ धाम यात्रा का सफल समापन हो रहा है सवा चौदह लाख से अधिक संख्या में तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ धाम के दर्शन किये हैं मंदिर समिति ने तीर्थयात्रियों के सरल सुगम दर्शन व्यवस्था की।

    कपाट बंद होने के दिन आज शाम शयन आरती पूजा अर्चना शुरू होने से पहले शाय: तक श्रद्धालु दर्शन‌ किया दिन में भोग के बाद मंदिर बंद नही हुआ।तथा रात्रि 7.30 बजे से कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गयी। रावल अमरनाथ नंबूदरी धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, अमित बंदोलिया ने कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की ।श्री उद्धव जी एवं कुबेर जी श्री बदरीनाथ मंदिर गर्भ गृह से बाहर आये तथा इसके बाद रावल अमरनाथ नंबूदरी स्त्री रूप धारणकर मां लक्ष्मी को मंदिर गर्भ गृह में विराजममान किया

    तत्पश्चात रात्रि सवा 8 बजे भगवान बदरीविशाल को माणा महिला मंगल दल द्वारा बुनकर तैयार किया गया घृत कंबल औढाया गया उसके बाद रात 9 बजकर 07 मिनट रावल अमरनाथ नंबूदरी द्वारा श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंदकर दिये।

    उल्लेखनीय है कि बुधवार 13 नवंबर से पंचपूजाएं शुरू हो गयी थी पंच पूजाओं के अंतर्गत पहले दिन भगवान गणेश की पूजा हुई, शाम को इसी दिन भगवान गणेश के कपाट बंद हो गये। दूसरे दिन बृहस्पतिवार 14 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर तथा शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद हुए। तीसरे दिन शुक्रवार 15 नवंबर को खडग पुस्तक पूजन तथा वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो गया।चौथे दिन शनिवार 16 नवंबर मां लक्ष्मी जी का कढ़ाई भोग चढाया गया। आज रविवार 17 नवंबर को रात 9 बजकर 07 मिनट पर श्री बदरीनाथ घाम के कपाट बंद हो गये।

    यहां यह भी विदित है कि कपाट बंद होने की तिथि तय होने के कार्यक्रम विजयदशमी सोमवार 12 अक्टूबर बदरीनाथ धाम की आगामी या़त्रा के लिए हकहकूकधरियों को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने पगड़ी भेंटकर यात्रा वर्ष 2025 के लिए भंडार की जिम्मेदारी दी गयी थी गयी। इसी दिन श्री बदरीनाथ धाम के कपाट के बंद होने के कार्यक्रम के अलावा श्री कुबेर जी श्री उद्धव जी के योग बदरी पांडुकेश्वर प्रस्थान तथा रावल जी तथा आदि गुरू शंकराचार्य जी की गद्दी के जोशीमठ प्रस्थान का कार्यक्रम घोषित किया गया था।

    बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा हरीश गौड़ ने बताया कि आज 17 नवंबर रविवार रात्रि को भगवान बदरीविशाल के कपाट बंद होने के बाद कल सोमवार प्रात:18 नवंबर सोमवार को 10 बजे श्री उद्धवजी श्री कुबेर जी एवं रावल जी सहित आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी योग बदरी पांडुकेश्वर प्रस्थान करेगी।
    श्री उद्धव जी एवं कुबेर जी शीतकाल में पांडुकेश्वर प्रवास करेंगे तथा 18 नवंबर को पांडुकेश्वर प्रवास के बाद 19 नवंबर को आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी रावल धर्माधिकारी वेदपाठी सहित श्री नृसिह मंदिर जोशीमठ प्रस्थान करेगी। इसके बाद योग बदरी पांडुकेश्वर तथा श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ में शीतकालीन पूजायें भी शुरू हो जायेगी।

    इससे पहले लेखाकार भूपेंद्र रावत, संदेश मेहता, प्रदीप भट्ट की देखरेख में भगवान बदरीविशाल के खजाने के साथ श्री गरूड़ जी 18 नवंबर सोमवार को श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेंगे।

  • राजाजी पार्क: पर्यटकों के लिए खुल गए द्वार, प्रवेश शुल्क में कोई बदलाव नहीं

    राजाजी पार्क: पर्यटकों के लिए खुल गए द्वार, प्रवेश शुल्क में कोई बदलाव नहीं

    राजाजी टाइगर रिजर्व के द्वार पर्यटकों के लिए खुल गए हैं! जैव विविधता से भरपूर इस अभयारण्य में हाथी गुलदार हिरण चीतल सांभर मोर और कई दुर्लभ वन्यजीवों का दीदार करें। मोतीचूर चीला और हरिद्वार रेंज में बाघों को भी देखा जा सकता है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए नेचर गाइड और वायरलैस सिस्टम की व्यवस्था की गई है। प्रवेश शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    जैव विविधता से संपन्न राजाजी टाइगर रिजर्व की पर्यटक रेंजों के द्वार शुक्रवार को सैलानियों के लिए खोल दिए गए। मोतीचूर में सुबह करीब सात बजे वन्य जीव प्रतिपादक हरीश नेगी ने रिबन काटकर गेट खोला। इस दौरान पर्यटन व जंगल सफारी के लिए आए रक्षा मंत्रालय नई दिल्ली के 60 सदस्य दल का वनकर्मियों ने तिलक लगाकर व फूल मालाओं से स्वागत किया। पर्यटकों के स्वागत के लिए गेट को खूबसूरत ढंग से सजाया गया है।

    बता दें कि राजाजी टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सुंदरता और विभिन्न तरह के वन्य जीवों की दुनिया से संपन्न है। पार्क में हाथी, गुलदार, हिरण, चीतल, सांभर, मोर के अलावा कई उन वन्य जीवों व पक्षियों को भी देखा जा सकता है, जो लुप्त होती प्रजाति की श्रेणी में हैं।

    मुख्य रूप से हाथी संरक्षण के लिए प्रसिद्ध राजाजी टाइगर रिजर्व में अब बाघ भी अच्छी संख्या में मौजूद हैं। सैलानी इनका दीदार पार्क की चीला, मोतीचूर व हरिद्वार रेंज में कर सकते हैं। जिम कॉर्बेट पार्क से भी राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में पांच बाघ शिफ्ट किए गए हैं।

    पर्यटकों की जान से खिलवाड़ करने वाले डग्गामार वाहनों को पार्क में जाने की अनुमति नहीं होगी। वाहनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। वन क्षेत्राधिकारी महेश सेमवाल ने बताया कि इस बार केवल टैक्सी नंबर के रजिस्टर्ड वाहन ही पर्यटकों को पार्क के भीतर ले जाएंगे, इसके लिए वाहनों के रजिस्ट्रेशन कराए जा रहे हैं।

    निजी वाहन से पार्क में जाने वाले पर्यटकों के साथ नेचर गाइड अनिवार्य रूप से रहेगा। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सबसे आगे व सबसे पीछे चलने वाली गाड़ी के साथ वायरलैस भी होगा, ताकि वन्य जीवों के रास्ते में टकराने की स्थिति में इसकी सूचना एक दूसरे को दी जा सके। वन चौकियों में भी वायरलैस सैट लगाए गए हैं।

    पार्क में प्रवेश के लिए शुल्क इस बार भी बीते वर्ष की भांति रहेंगे। भारतीय पर्यटक से 150 रुपये, विदेशी से 600 रुपये, भारतीय वाहन से 250 जबकि विदेशी वाहन से 500 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। छात्रों के लिए आधा शुल्क माफ होगा। वन विश्राम भवन में एक रात्रि विश्राम शुल्क 1000 रुपये, डिजिटल व्यवसायिक कैमरा शुल्क 500, फीचर फिल्म निर्माण के लिए 100000 रुपये व वृत्त चित्र निर्माण पर 10000 रुपये शुल्क लिया जाएगा।

  • उत्तराखंड चारधाम यात्रा: इस साल 240 श्रद्धालुओं की गई जानें

    उत्तराखंड चारधाम यात्रा: इस साल 240 श्रद्धालुओं की गई जानें

    उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण इस साल 240 से ज़्यादा तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। इसमें हेलीकॉप्टर से हिमालय के मंदिरों में जाने वाले श्रद्धालुओं में मृत्यु दर सबसे ज़्यादा है। इस साल की यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है, क्योंकि केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पहले ही सर्दियों के लिए बंद हो चुके हैं और बद्रीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को बंद होने वाले हैं। तीर्थयात्रियों की मौत के पीछे सबसे आम कारण ऊँचाई पर होने वाली बीमारियाँ, ऑक्सीजन की कमी और हृदय की गति रुकना है।

    राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल चारधाम यात्रा के दौरान अब तक कुल 246 मौतें हुई हैं। इसमें बद्रीनाथ में 65, केदारनाथ में 115, गंगोत्री में 16 और यमुनोत्री में 40 तथा सिख तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब में 10 मौतें हुई हैं। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने कहा कि इस साल स्वास्थ्य कारणों से मरने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 242 था। चारधाम यात्रा के दौरान हर साल तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य कारणों से मौत होती है, लेकिन हाल के वर्षों में ऐसी मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है।

    सिक्स सिग्मा के सीईओ डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि हेलीकॉप्टर से ऊंचे स्थानों पर स्थित मंदिरों तक पहुंचने वाले यात्रियों में मृत्यु दर सबसे अधिक है, क्योंकि ये लोग बिना किसी अनुकूलन प्रक्रिया से गुजरे सीधे उन ऊंचाइयों पर कठोर मौसम की स्थिति के संपर्क में आते हैं। डॉक्टर ने बताया कि निचले इलाकों से हवाई मार्ग से कुछ ही मिनटों में 3000 मीटर से ऊपर स्थित मंदिरों तक पहुंचने से तीर्थयात्रियों को अचानक ऐसे तापमान का सामना करना पड़ता है, जिसके वे आदी नहीं हैं। इसलिए इस तरह के कठोर मौसम के संपर्क में आने से पहले अनुकूलन आवश्यक है।

  • बदरीनाथ धाम: 17 नवंबर को बंद होंगे कपाट ,13 से शुरू होगी प्रक्रिया

    बदरीनाथ धाम: 17 नवंबर को बंद होंगे कपाट ,13 से शुरू होगी प्रक्रिया

    पंच पूजाओं के तहत 13 नवंबर से पहले दिन गणेश पूजा और उसी दिन शाम को गणेश मंदिर के कपाट बंद होंगे। अगले दिन आदि केदारेश्वर व शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे।

    बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी 17 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने की प्रक्रिया 13 नवंबर से शुरू हो जाएगी। इसके लिए तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं

    बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि पंच पूजाओं के तहत 13 नवंबर से पहले दिन गणेश पूजा और उसी दिन शाम को गणेश मंदिर के कपाट बंद होंगे। अगले दिन आदि केदारेश्वर व शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे। 15 नवंबर को खड़क पुस्तक पूजा और वेद ऋचाओं का वाचन बंद होगा। 16 नवंबर को मां लक्ष्मी को कढ़ाई भोग चढ़ाया जाएगा। 17 नवंबर रात नौ बजकर 07 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

    पंच पूजाएं रावल अमरनाथ नंबूदरी व धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट संपन्न करेंगे। 18 को कुबेर, उद्धव, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेगी। शीतकाल में कुबेर व उद्धव जी पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे। जबकि आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी 19 नवंबर को नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ के लिए प्रस्थान करेगी। इसके बाद पांडुकेश्वर व ज्योतिर्मठ में शीतकालीन पूजाएं संपन्न होंगी।