Category: पर्यटन

  • 2026 में पहली बार आयोजित होगा अंतर्राष्ट्रीय उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव

    2026 में पहली बार आयोजित होगा अंतर्राष्ट्रीय उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव

    नई दिल्ली में 10 जनवरी को रोड शो होगा

    उत्तराखंड के पर्यटन का ऐतिहासिक कदम

    देहरादून। एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 2026 में पहली बार ‘उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव’ का आयोजन किया जाएगा।

    इस संबंध में शनिवार को उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी/सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल की अध्यक्षता में आहूत बैठक में कॉन्क्लेव के आयोजन पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई।

    उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव 2026: वैश्विक पर्यटन मंच की ओर कदम

    उत्तराखंड राज्य के इतिहास में पहली बार उत्तराखंड टूरिज्म कांक्लेव के भव्य आयोजन को सुनिश्चित करने की रूपरेखा बनाई गईं।
    यह प्रतिष्ठित आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO, India) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा, जिसमें होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन, उत्तराखंड टूरिज़्म रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन, टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (TOAU) तथा ADTOI,All India domestic tour operators association की सक्रिय भागीदारी रहेगी।
    यह दो दिवसीय बी2बी (Business-to-Business) कॉन्क्लेव राज्य को वेडिंग टूरिज़्म, MICE (Meetings, Incentives, Conferences & Exhibitions), साहसिक पर्यटन और जिम्मेदार पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।
    कॉन्क्लेव के अंतर्गत डोमेस्टिक एवं इंटरनेशनल टूर ऑपरेटर्स, वेडिंग प्लानर्स, इवेंट एवं कॉन्सर्ट आयोजकों तथा साहसिक पर्यटन से जुड़ी संस्थाओं को अपने उत्पादों एवं सेवाओं को एक्सपो एवं डिस्प्ले प्रारूप में प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। साथ ही, वेडिंग टूरिज़्म, एडवेंचर टूरिज़्म, डोमेस्टिक एवं इंटरनेशनल टूरिज़्म तथा रिस्पॉन्सिबल टूरिज़्म पर केंद्रित B2B मीटिंग्स और थीमैटिक सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा।
    भविष्य की रणनीति और दीर्घकालिक दृष्टिकोण
    बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड ट्रैवल कॉन्क्लेव को आगामी वर्षों में एक वार्षिक एवं ब्रांडेड अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे राज्य के शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और उच्च-मूल्य वाले पर्यटन निवेश आकर्षित किए जा सकेंगे।

    सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि राज्य के इतिहास में उत्तराखंड पर्यटन विभाग पहली बार व्यापक स्तर पर एक टूरिज्म कांक्लेव का आयोजन करने जा रहा है ।

    कहा कि प्रदेश के पर्यटन से जुड़े सारे हितधारकों को न केवल साथ लेकर चला जाएगा बल्कि इस पहल का उन्हें एक स्तंभ भी बनाया जाएगा।
    सचिव पर्यटन ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में उत्तराखंड पर्यटन द्वारा पूरे देश भर में रोड शो कराए जाएंगे। जिनके द्वारा शीतकालीन पर्यटन, साहसिक पर्यटन, इको टूरिज्म वैलनेस टूरिज्म इत्यादि का देशभर में व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रथम चरण में नई दिल्ली में 10 जनवरी को उत्तराखंड पर्यटन द्वारा प्रथम रोड शो का आयोजन प्रस्तावित है।

    बैठक में उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों सहित पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में धीराज सिंह गर्ब्याल, सचिव पर्यटन / मुख्य कार्यकारी अधिकारी, UTDB, बी.एल. राणा, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, UTDB, रोमिल चौधरी, निदेशक (वित्त), UTDB,श्रीमती पूनम चंद, अपर निदेशक, अमित लोहनी, उप निदेशक, उत्कर्ष चौहान, प्रचार अधिकारी,लक्ष्मी राज चौहान, महाप्रबंधक (प्रशासन), GMVN रवि गुंसाई, अध्यक्ष, IATO
    संदीप साहनी, अध्यक्ष, होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन, अभिषेक अहलुवालिया, अध्यक्ष, टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (TOAU), सुनील राणा, अध्यक्ष, IATO उत्तराखंड चैप्टर, राकेश पंत, प्रतिनिधि, Trek The Himalayas (TTH),महेंद्र घिल्डियाल,चेयरमैन,ADTOI उत्तराखंड चैप्टर
    साथ ही कुमाऊँ मंडल एवं गढ़वाल मंडल के पर्यटन अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

  • उत्तराखंड में पर्यटन का बूम — 3 साल में रिकॉर्ड 23 करोड़ से ज्यादा सैलानियों ने की यात्रा

    उत्तराखंड में पर्यटन का बूम — 3 साल में रिकॉर्ड 23 करोड़ से ज्यादा सैलानियों ने की यात्रा

    देहरादून। पर्यटन- तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए बीते तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। इससे होम स्टे, होटल, ढाबा संचालकों, महिला स्वयं सहायता समूहों से लेकर परिवहन कारोबारियों तक की आजीविका को सहारा मिला है।
    प्रदेश सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड में पर्यटन- तीर्थाटन लगातार बढ़ रहा है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में बीते तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। खास बात यह है कि उत्तराखंड का पर्यटन अब बहुआयामी हो चला है, पर्यटक बड़े शहरों और चुनिंदा हिल स्टेशन तक ही सीमित नहीं बल्कि दूर दराज के छोटे छोटे पर्यटक स्थलों तक भी पहुंच रहे हैं। इसी के साथ राफ्टिंग, ट्रैकिंग, बंजी जम्पिंग, पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों में भी देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों की भी भागीदारी बढ़ी है। इससे पर्यटन का लाभ प्रदेश के लाखों लोगों तक प्रत्यक्ष तौर पर पहुंच रहा है, इसमें होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे संचालक, परिवहन कारोबारी, महिला स्वयं सहायता समूह शामिल है। प्रदेश में इस समय छह हजार अधिक होम स्टे संचालक सीधे तौर पर बढी हुई पर्यटन गतिविधियों के सीधे लाभार्थी बनकर उभरे हैं।

    तीर्थाटन भी बूम पर
    प्रदेश मेँ तीर्थाटन गतिविधियां भी काफी बढ़ गई है। इस वर्ष अब तक चारधाम यात्रा में ही तीर्थयात्रियों की संख्या 50 लाख को छू रही है। केदारनाथ, यमुनोत्री पैदल मार्ग पर इस साल 4300 से अधिक घोड़े – खच्चर संचालकों ने अपनी सेवाएं दी। प्रदेश सरकार अब शीतकालीन यात्रा को भी बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा से भी पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र में तीथार्टन, पर्यटन तेजी से बढ़ा है।

    पयर्टन उत्तराखंड की आर्थिकी आधार है। पर्यटन- तीर्थाटन का लाभ सीधे तौर पर स्थानीय लोगों को मिलता है। इसलिए सरकार वर्षभर पर्यटन – तीर्थाटन गतिविधियों को जारी रखने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों से उत्तराखंड में तीर्थाटन- पर्यटन को बल मिला है।
    पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

  • धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए मास्टर प्लान तैयार

    धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए मास्टर प्लान तैयार

    धार्मिक स्थलों के लिए बनेगा मास्टर प्लान, तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा-सुविधा होंगी प्राथमिकता
    मुख्यमंत्री के निर्देश पर पर्यटन विभाग को तत्काल कार्यवाही के आदेश

    देहरादून। हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में 27 जुलाई को भगदड़ की दुखद घटना के बाद तीर्थस्थलों पर व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए एक समग्र मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और जनसुविधाओं को बेहतर बनाना है।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने सचिव पर्यटन को निर्देशित किया कि सभी धार्मिक स्थलों की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए, विस्तृत और व्यावहारिक मास्टर प्लान शीघ्र तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि यह योजना तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हादसे से बचा जा सके।

    स्थलों
    प्राथमिकता वाले स्थल होंगे चिह्नित

    प्रमुख सचिव ने कहा कि मास्टर प्लान में ऐसे धार्मिक स्थल प्राथमिकता पर लिए जाएं, जहां पर हर वर्ष भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने पर्यटन विभाग को निर्देश दिए कि मसौदा तैयार करते समय गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों से समन्वय स्थापित किया जाए। इसके अलावा, तीर्थ स्थलों को जाने वाले मार्गों पर अवैध अतिक्रमण की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाने की प्रक्रिया भी मास्टर प्लान में शामिल की जाए।

    ये बिंदु होंगे मास्टर प्लान में शामिल

    राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित मास्टर प्लान में धार्मिक स्थलों पर समुचित और सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को प्रमुखता दी जाएगी:

    • भीड़ नियंत्रण और मार्गदर्शन प्रणाली का विकास

    • धार्मिक स्थल की धारण क्षमता का वैज्ञानिक विश्लेषण

    • प्रवेश और निकास मार्गों का पृथकीकरण, जिससे भीड़ का प्रवाह नियंत्रित रहे

    • प्रतीक्षा स्थलों का निर्माण – जहां श्रद्धालु आराम से प्रतीक्षा कर सकें

    • आपातकालीन निकासी मार्ग और बचाव के विकल्प

    • पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

    • डिजिटल सूचना प्रणाली के माध्यम से तीर्थ यात्रियों को हर आवश्यक जानकारी मिल सके

    • पार्किंग की सुव्यवस्थित व्यवस्था, जिससे जाम और अव्यवस्था से बचा जा सके

    • पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती, विशेषकर भीड़भाड़ वाले समय में

    स्थलों

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा,

    “उत्तराखंड देवभूमि है और यहां प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालु तीर्थ दर्शन के लिए आते हैं। उनकी सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम धार्मिक स्थलों पर ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, जिससे यात्रा न केवल सुरक्षित हो बल्कि श्रद्धालुओं के लिए स्मरणीय अनुभव बन जाए।”

    उन्होंने यह भी संकेत दिए कि मास्टर प्लान के आधार पर राज्य सरकार तीर्थ क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के लिए बजट और संसाधनों की भी व्यवस्था करेगी।

  • रुद्रप्रयाग में बड़ा सड़क हादसा टला, गुप्तकाशी मार्ग पर वाहन गिरा खाई में; 9 घायल

    रुद्रप्रयाग में बड़ा सड़क हादसा टला, गुप्तकाशी मार्ग पर वाहन गिरा खाई में; 9 घायल

    केदारनाथ से लौटते समय खाई में गिरा वाहन, बड़ा हादसा टला; चालक समेत 9 घायल

    गुप्तकाशी-ल्वारा मोटरमार्ग पर गिवाड़ी गांव के पास हुआ हादसा, स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम की मुस्तैदी से बचीं कई जानें

    रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में केदारनाथ यात्रा से लौटते समय एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। बुधवार को गुप्तकाशी-ल्वारा मोटरमार्ग पर स्थित गिवाड़ी गांव के पास एक मैक्स वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। वाहन में कुल नौ लोग सवार थे, जिनमें वाहन चालक भी शामिल था। सभी लोग घायल हुए हैं, लेकिन सौभाग्यवश किसी की भी स्थिति गंभीर नहीं बताई जा रही है।

    हादसा उस समय हुआ जब ये सभी यात्री केदारनाथ दर्शन के बाद वापस गुप्तकाशी लौट रहे थे। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन बल (DDMA), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय ग्रामीणों ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

    कैसे हुआ हादसा

    बुधवार दोपहर लगभग 12:45 बजे यह दुर्घटना हुई। बताया जा रहा है कि वाहन गुप्तकाशी की ओर बढ़ रहा था, लेकिन जैसे ही वह गिवाड़ी गांव के पास एक तीखे मोड़ पर पहुंचा, चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया। सड़क पर मिट्टी और ढलान होने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर फिसल गया और खाई में जा गिरा। स्थानीय लोगों के अनुसार, वाहन की रफ्तार सामान्य थी, लेकिन मोड़ काफी खतरनाक था और सुरक्षा रेलिंग नहीं होने से हादसे की आशंका बनी रहती है।

    हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने तुरंत टीम को मौके के लिए रवाना किया। स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ, फायर विभाग और आपदा प्रबंधन टीम ने ग्रामीणों की मदद से खाई में उतरकर घायलों तक पहुंच बनाई। खाई का रास्ता काफी जोखिम भरा था, लेकिन टीम ने पूरी सावधानी से घायलों को खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचाया।

    इसके बाद सभी घायलों को प्राथमिक उपचार देकर 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अगस्त्यमुनि भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। टीम की सजगता और तेजी से की गई कार्रवाई की प्रशंसा की जा रही है।

    सीएचसी अगस्त्यमुनि के चिकित्सकों के अनुसार, घायलों को सिर, हाथ और पैरों में चोटें आई हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि किसी की हालत गंभीर नहीं है। सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और अस्पताल प्रशासन लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा परिजनों को सूचना दे दी गई है और कुछ परिवारजन अस्पताल पहुंच चुके हैं।

    स्थानीय लोगों की भूमिका सराहनीय

    घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में स्थानीय ग्रामीण ही थे। ग्रामीणों ने बिना देर किए रस्सियों और घरेलू साधनों की मदद से खाई में उतरकर यात्रियों की सहायता की। आपदा प्रबंधन अधिकारी ने ग्रामीणों की भूमिका को सराहते हुए कहा कि यदि स्थानीय लोग समय रहते सहायता नहीं करते, तो स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती थी।

    प्रशासन का बयान और अगली कार्रवाई

    जिलाधिकारी ने हादसे की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया है कि वे गुप्तकाशी-ल्वारा मार्ग के खतरनाक हिस्सों की पहचान कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करें, जैसे कि सड़क किनारे रेलिंग, चेतावनी बोर्ड, गति अवरोधक इत्यादि।

    प्रशासन का यह भी कहना है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं रोकने के लिए यात्रियों और वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, विशेष रूप से उन मार्गों पर जो संकरे और ढलानदार हैं।

    लगातार बढ़ रही हैं दुर्घटनाएं

    गौरतलब है कि चारधाम यात्रा के दौरान इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही काफी अधिक होती है। पिछले कुछ वर्षों में भी इस मार्ग पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। तीव्र मोड़, खराब सड़कें और सुरक्षा इंतज़ामों की कमी इन हादसों के मुख्य कारणों में गिने जाते हैं। प्रशासन द्वारा समय-समय पर मार्गों की मरम्मत और चेतावनी संकेत लगाने की घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बदलाव की गति धीमी रही है।

  • बिना अनुमति केदारनाथ पहुंचा हेलीकॉप्टर, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    बिना अनुमति केदारनाथ पहुंचा हेलीकॉप्टर, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    केदारनाथ में बिना अनुमति पहुंचा हेलीकॉप्टर, यात्रियों की जान जोखिम में; यूकाडा ने लगाई रोक, शुरू हुई जांच

    देहरादून/केदारनाथ। उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन में लगातार हो रहे नियम उल्लंघनों के बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है। हेरिटेज एविएशन कंपनी का एक हेलीकॉप्टर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यू-काडा) की अनुमति रद्द होने के बावजूद यात्रियों को लेकर केदारनाथ धाम पहुंच गया। इस घटना ने प्रशासन और यात्रियों दोनों के बीच हड़कंप मचा दिया है। राज्य सरकार और यू-काडा ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए कंपनी के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है तथा उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

    कैसे हुआ नियमों का उल्लंघन

    सूत्रों के अनुसार, हेरिटेज एविएशन ने बीते सोमवार को देहरादून से केदारनाथ के लिए उड़ान भरने की अनुमति मांगी थी। यू-काडा ने कंपनी को दोपहर दो बजे की उड़ान के लिए सशर्त अनुमति दी थी। लेकिन इसी दौरान केदारनाथ क्षेत्र में मौसम तेजी से खराब हो गया, जिसके चलते यू-काडा ने एहतियात के तौर पर उड़ान की अनुमति को रद्द कर दिया।

    यू-काडा की स्पष्ट सूचना और आदेश के बावजूद हेरिटेज एविएशन का हेलीकॉप्टर शाम करीब पांच बजे केदारनाथ के लिए उड़ान भरता है। हैरानी की बात यह रही कि हेलीपैड पर तैनात कर्मचारियों द्वारा उड़ान रोकने के प्रयासों को भी नजरअंदाज कर दिया गया। यह हेलीकॉप्टर यात्रियों सहित सीधा केदारनाथ पहुंच गया, जो कि एक बेहद जोखिम भरा कदम था।

    हेलीकॉप्टर में कौन थे सवार

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी समेत दो अन्य व्यक्ति सवार थे। बताया गया कि केदारनाथ में मौसम इतना खराब था कि हेलीकॉप्टर को वहीं रुकना पड़ा और यह अगले दिन यानी मंगलवार को ही वापस लौट सका।

    यू-काडा की कड़ी प्रतिक्रिया, जांच के आदेश

    घटना के सामने आते ही यू-काडा ने हेलीकॉप्टर कंपनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। यू-काडा के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय टोलिया ने बताया कि हेरिटेज एविएशन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “जांच में जो भी व्यक्ति या संस्था नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

    फिलहाल हेरिटेज एविएशन के हेलीकॉप्टर संचालन को यू–काडा द्वारा राज्य के सभी हेलीपैड से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

    हेलीकॉप्टर हादसों की बढ़ती घटनाएं: चेतावनी के बावजूद लापरवाही

    गौरतलब है कि इस वर्ष उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें अब तक 5 हादसों में 13 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद हेली सेवा कंपनियों द्वारा नियमों की अनदेखी जारी है। इस तरह के मामलों से न सिर्फ यात्रियों की जान खतरे में पड़ रही है, बल्कि प्रशासन की छवि और राज्य की धार्मिक यात्रा प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

    क्या कहता है नियम और कानून?

    हेलीकॉप्टर संचालन के लिए यूकाडा से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, विशेषकर चारधाम यात्रा जैसे संवेदनशील और कठिन भूगोल वाले क्षेत्रों में। मौसम संबंधी चेतावनी को गंभीरता से लेना और उड़ान संचालन में पूर्ण सतर्कता बरतना हर हेली कंपनी की जिम्मेदारी है। इस मामले में न सिर्फ इन मानकों की अनदेखी हुई, बल्कि यह यात्रियों के जीवन को भी प्रत्यक्ष रूप से खतरे में डालने वाला कृत्य है।

    क्या हो सकती है कार्रवाई?

    यदि जांच में हेरिटेज एविएशन दोषी पाई जाती है, तो उस पर निम्न प्रकार की कार्रवाई संभव है:

    • अस्थायी प्रतिबंध को स्थायी किया जा सकता है

    • लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण

    • जुर्माना और कानूनी कार्यवाही

    • आपराधिक लापरवाही की धाराओं में केस दर्ज

    चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सेवाएं एक बड़ी राहत हैं, लेकिन जब कंपनियां लापरवाही बरतने लगें, तो यह सुविधा जानलेवा बन जाती है। राज्य सरकार को चाहिए कि हेलीकॉप्टर संचालन के नियमों को और कड़ा बनाए और ऐसी घटनाओं पर त्वरित व कड़ी कार्रवाई करे ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ न कर सके।

  • बदरीनाथ हाईवे के डेंजर जोन पर राहत, वैकल्पिक मार्ग को केंद्र की स्वीकृति

    बदरीनाथ हाईवे के डेंजर जोन पर राहत, वैकल्पिक मार्ग को केंद्र की स्वीकृति

    बदरीनाथ हाईवे पर सिरोबगड़ लैंडस्लाइड जोन को बाईपास करेगा नया मार्ग, भारत सरकार ने दी मंजूरी

    देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा मार्ग और सीमांत क्षेत्रों को जोड़ने वाला बदरीनाथ नेशनल हाईवे (एनएच-7) लंबे समय से प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलता रहा है। इस हाईवे का सबसे संवेदनशील और खतरनाक हिस्सा सिरोबगड़ लैंडस्लाइड जोन है, जहां भूस्खलन की घटनाएँ दशकों से लगातार चुनौती बनी हुई हैं। अब केंद्र सरकार ने इस खतरनाक जोन को पूरी तरह बाईपास करने के लिए वैकल्पिक मार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह फैसला राज्य के लोगों और बदरीनाथ धाम समेत चारधाम यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है।

    छह दशक पुरानी समस्या

    सिरोबगड़ लैंडस्लाइड जोन पिछले लगभग 60 वर्षों से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। हर साल मानसून के दौरान यहां बड़े पैमाने पर मलबा और पत्थर गिरने की घटनाएं होती हैं, जिससे सड़क बार-बार बंद होती है। अब तक यहां कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और लाखों की आर्थिक क्षति हो चुकी है। यह जोन खासतौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब और सीमांत क्षेत्रों जैसे भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मुख्य हाईवे पर स्थित है।

    यहां भूगर्भीय संरचना बेहद जटिल और अस्थिर है। चट्टानों की परतें कमजोर हैं और लगातार बारिश से मिट्टी में पानी भरकर उसे खिसकने के लिए प्रेरित करता है। इस क्षेत्र की भू-संरचना ऐसी है कि अब तक किए गए सभी तकनीकी उपचार (Slope Stabilization, Rock Bolting, Retaining Walls आदि) स्थायी समाधान साबित नहीं हो पाए हैं।

    हाईवे
    अधर में लटका पुल प्रोजेक्ट

    स्थिति को देखते हुए कुछ वर्ष पहले सिरोबगड़ जोन से पहले एक पुल निर्माण की योजना शुरू की गई थी, ताकि हाईवे के इस हिस्से को बाईपास किया जा सके। लेकिन निर्माण के दौरान तकनीकी समस्याएं, जैसे अस्थिर भू-संरचना और बेहद ऊंची लागत, सामने आईं, जिसके चलते परियोजना रोकनी पड़ी। नतीजा यह रहा कि हाईवे हर बार भूस्खलन की चपेट में आकर ठप हो जाता था।

    केंद्र सरकार की मुहर

    अब हाल ही में भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की एक उच्च स्तरीय बैठक में इस समस्या को गंभीरता से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता मंत्रालय के विभागीय सचिव ने की, जिसमें उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि सिरोबगड़ जोन को पूरी तरह बाईपास करने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाया जाएगा।

    इस निर्णय के तहत पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया गया है कि वह जल्द से जल्द विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करे। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, नया बाईपास मौजूदा हाईवे से कई किलोमीटर दूर अपेक्षाकृत स्थिर पहाड़ी भूभाग से होकर निकाला जाएगा। हालांकि इसके लिए सुरंगों और ऊंचे रिटेनिंग स्ट्रक्चर (Retaining Structures) का निर्माण करना पड़ सकता है, जिससे परियोजना की लागत काफी अधिक आंकी जा रही है।

    हाईवे

    तीर्थयात्रियों और स्थानीयों को राहत

    इस बाईपास के निर्माण से न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली, जोशीमठ जैसे पर्यटन और तीर्थ स्थलों की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी बड़ी राहत मिलेगी। मानसून के महीनों में सिरोबगड़ पर मलबा गिरने से अक्सर हाईवे कई-कई दिनों तक बंद रहता है, जिससे न केवल आवाजाही ठप होती है, बल्कि पर्यटन और व्यापार पर भी बुरा असर पड़ता है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस बाईपास से यात्रा का समय भी घटेगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। साथ ही, राज्य के सीमांत क्षेत्रों की सामरिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    राज्य सरकार और स्थानीय जनता लंबे समय से सिरोबगड़ जैसे खतरनाक भूस्खलन क्षेत्र के स्थायी समाधान की मांग कर रही थी। केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि परियोजना पर तेजी से अमल होगा और अगले कुछ वर्षों में यह मार्ग यात्रियों के लिए खुल जाएगा।

  • यमुनोत्री धाम की सुरक्षा योजनाएं ठप, 17 करोड़ के टेंडर पर रोक

    यमुनोत्री धाम की सुरक्षा योजनाएं ठप, 17 करोड़ के टेंडर पर रोक

    यमुनोत्री धाम की सुरक्षा पर संकट, 17 करोड़ के कार्य अधर में लटके, मंदिर समिति ने जताई नाराजगी

    यमुनोत्री धाम की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। धाम में सुरक्षा को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों के बावजूद ज़मीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं। सिंचाई विभाग द्वारा प्रस्तावित करीब 17 करोड़ रुपये के सुरक्षात्मक कार्यों के टेंडर अब तक जारी नहीं हो पाए हैं, जिससे न केवल कार्यों में देरी हो रही है बल्कि धाम की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    धाम में फिलहाल यात्रा सीजन शुरू हो चुका है और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके, धाम की सुरक्षा के लिए आवश्यक संरचनात्मक कार्य अधर में लटके हुए हैं। यमुनोत्री मंदिर समिति ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है और कहा है कि हर वर्ष केवल आश्वासन दिए जाते हैं, जबकि धाम की सुरक्षा और संरचनात्मक विकास पर कोई ठोस कार्य नहीं हो रहा।

    सिर्फ 15 मीटर दीवार, वह भी बिना टेंडर

    सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पन्नी लाल के अनुसार, अब तक मात्र 15 मीटर लंबी और आठ मीटर ऊंची सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया है, वह भी बिना किसी औपचारिक टेंडर प्रक्रिया और भुगतान के। उन्होंने बताया कि यह काम आपातकालीन हालात को देखते हुए कराया गया, ताकि रसोईघर के पास यमुना के जलस्तर में अचानक वृद्धि से संभावित नुकसान को रोका जा सके।

    लेकिन धाम की संपूर्ण सुरक्षा के लिए यह नाकाफी है। अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया कि जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक सुरक्षा दीवारों, घाटों और पुलियों के निर्माण जैसे कई बड़े कार्य अभी कागजों में ही सिमटे हुए हैं।

    मंदिर समिति ने जताई गहरी नाराजगी

    यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा,

    “हर साल केवल आश्वासन दिए जाते हैं, पर यमुनोत्री धाम की उपेक्षा निरंतर जारी है। इस बार भी केवल रसोईघर के पास सीमित सुरक्षा कार्य हुआ है, जिससे कुछ हद तक ही राहत मिल सकती है। लेकिन मंदिर क्षेत्र की पूरी सुरक्षा के लिए घाटों, सुरक्षा दीवारों और हेलीपैड मार्ग की पुलिया का निर्माण बेहद जरूरी है।”

    समिति ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्यों को अंजाम नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में धाम को प्राकृतिक आपदाओं से भारी क्षति का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से मानसून के दौरान यमुना का जलस्तर बढ़ने पर हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    प्रशासनिक दावे और हकीकत में फासला

    पूर्व जिलाधिकारी मेहरबान सिंह बिष्ट ने अपने कार्यकाल में भारी मशीनों की उपलब्धता के बाद जल्द काम शुरू होने का दावा किया था। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया और अब स्थानीय लोग तथा मंदिर समिति प्रशासन की नीयत पर सवाल उठा रही है।

    मंदिर समिति का यह भी कहना है कि निर्माण एजेंसियों को मौके पर रहकर गुणवत्तापूर्ण कार्य करना चाहिए ताकि बजट का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके और यात्रियों तथा धाम की सुरक्षा के लिहाज से कोई जोखिम न रहे।

    यात्रा सीजन में जोखिम

    वर्तमान में यात्रा सीजन पूरे जोर पर है। हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यमुनोत्री धाम पहुंच रहे हैं, लेकिन धाम में बुनियादी सुरक्षा ढांचे की कमी न केवल उनकी सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि भविष्य में पर्यटन पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है।

    यात्रियों और स्थानीय लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द लंबित टेंडरों की प्रक्रिया पूरी की जाए और निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किए जाएं ताकि पवित्र धाम को किसी भी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना से बचाया जा सके।

  • बदरीनाथ, माणा और औली में पर्यटन सचिव का निरीक्षण, कार्यों की गुणवत्ता पर दी खास हिदायत

    बदरीनाथ, माणा और औली में पर्यटन सचिव का निरीक्षण, कार्यों की गुणवत्ता पर दी खास हिदायत

    पर्यटन सचिव ने किया बदरीनाथ, माणा और औली का निरीक्षण, विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

    बदरीनाथ/औली। उत्तराखंड के पर्यटन एवं धर्मस्व सचिव धीरज सिंह गर्ब्याल ने बृहस्पतिवार को बदरीनाथ, माणा और औली क्षेत्रों का व्यापक निरीक्षण किया। उन्होंने पर्यटन विकास से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को सभी निर्माण कार्यों को तय समयसीमा और मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए।

    सचिव गर्ब्याल ने अपने निरीक्षण की शुरुआत भगवान बदरीविशाल के दर्शन से की। इसके बाद उन्होंने बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत चल रहे कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को मास्टर प्लान की परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम के महत्व को देखते हुए यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर विश्व स्तरीय होना चाहिए ताकि यात्रियों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    बदरीश और शेषनेत्र झीलों की सफाई पर जोर

    बदरीनाथ में निरीक्षण के दौरान सचिव ने बदरीश और शेषनेत्र झीलों की स्वच्छता की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने नगर पंचायत बदरीनाथ के अधिकारियों को निर्देश दिए कि झीलों की नियमित सफाई और संरक्षण कार्यों के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए ताकि इन पवित्र जल स्रोतों की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्ता बनी रहे।

    माणा गांव में वाइब्रेंट विलेज योजना की समीक्षा

    बदरीनाथ के बाद सचिव माणा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत चल रही विभिन्न परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अराइवल प्लाजा, केशव प्रयाग और भीमपुल क्षेत्र में निर्माणाधीन संरचनाओं की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि माणा जैसे सीमांत और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गांव को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें और गांवों से पलायन रुके।

    औली में पर्यटक सुविधाओं का निरीक्षण

    निरीक्षण के अगले चरण में सचिव औली पहुंचे। यहां उन्होंने पर्यटक आवास गृह, चेयर लिफ्ट और स्कीइंग स्लोप्स का निरीक्षण किया। उन्होंने औली में स्थित तीन पर्यटक आवास गृहों के उच्चीकरण के लिए जीएमवीएन अधिकारियों को परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने औली में आवास गृहों को जोड़ने वाली 600 मीटर लंबी एप्रोच रोड की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग को आकलन तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजने को कहा।

    औली में सचिव ने ज्योतिर्मठ-औली रोपवे के संचालन और तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी अधिकारियों से प्राप्त की। उन्होंने कहा कि औली की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख स्कीइंग डेस्टिनेशन के रूप में है, जिसे और अधिक व्यवस्थित और पर्यटक-अनुकूल बनाया जाएगा।

    तपोवन में गरम पानी के स्रोत का संरक्षण

    निरीक्षण के दौरान सचिव गर्ब्याल ने नीती घाटी स्थित तपोवन में जीएमवीएन द्वारा संचालित पर्यटक आवास गृह का भी दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को आवास गृह के नियमित संचालन और पर्यटकों को उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्होंने तपोवन में स्थित गरम पानी के प्राकृतिक स्रोत के संरक्षण और विकास के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक धरोहर को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    निरीक्षण के दौरान सचिव के साथ एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ, पीआईयू के अधिशासी अभियंता (ईई) योगेश मनराल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़, नगर पंचायत बदरीनाथ के अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित, जीएमवीएन के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक रावत, संजय गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    सचिव गर्ब्याल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि चारधाम यात्रा और हिमालयी पर्यटन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से और गुणवत्ता के साथ हो, ताकि उत्तराखंड पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

  • यमुनोत्री हाईवे ओजरी में शनिवार से बेली ब्रिज निर्माण कार्य, छह दिन से बंद रहा मार्ग

    यमुनोत्री हाईवे ओजरी में शनिवार से बेली ब्रिज निर्माण कार्य, छह दिन से बंद रहा मार्ग

    यमुनोत्री हाईवे पर ओजरी में शनिवार से बेली ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू होगा, छह दिन से बंद है मार्ग

    उत्तरकाशी के ओजरी में यमुनोत्री हाईवे पर शनिवार से बेली ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। यह कदम उस हिस्से को बहाल करने के लिए उठाया जा रहा है, जहां पिछले छह दिनों से भारी बारिश के कारण सड़क का लगभग 15 मीटर लंबा हिस्सा बह गया था और मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया था। इससे यमुनोत्री हाईवे पर यातायात ठप हो गया था, जिससे स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा।

    ऋषिकेश से बेली ब्रिज निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री लेकर कई ट्रक ओजरी पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग (एनएच) के अधिकारियों ने बताया कि यहां 24 मीटर स्पान के बेली ब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जो मार्ग को स्थायी रूप से जोड़ने का काम करेगा। निर्माण कार्य के लिए विशेषज्ञ श्रमिकों को भी बुलाया गया है, जो जल्द से जल्द इस परियोजना को पूरा करने में जुटेंगे।

    वहीं, सिलाई बैंड क्षेत्र में बादल फटने के कारण लापता हुए मजदूरों की तलाश अभी भी जारी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आइटीबीपी और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें उनकी खोजबीन में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है ताकि राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से जारी रह सके।

    बेली ब्रिज के निर्माण के बाद यमुनोत्री हाईवे पर यातायात बहाल हो सकेगा, जिससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। यह मार्ग धार्मिक स्थलों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है, इसलिए इसकी पुनः बहाली से क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

    बीते छह दिनों से ओजरी में बह चुकी सड़क के कारण अवरुद्ध यमुनोत्री हाईवे पर बेली ब्रिज निर्माण की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को ऋषिकेश से बेली ब्रिज की सामग्री लेकर छह ट्रक ओजरी तक पहुंचाए गए हैं।

    राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग (एनएच) के अधिकारियों के अनुसार, शनिवार से ओजरी में लगभग 24 मीटर स्पान वाले बेली ब्रिज का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। इसके लिए बेली ब्रिज स्थापित करने वाले अनुभवी श्रमिकों को बुला लिया गया है। वहीं, पिछले बुधवार की रात हुई मूसलधार बारिश के कारण ओजरी से लगभग 14 किलोमीटर आगे बनास में सड़क धंस गई थी, जिसके चलते यमुनोत्री हाईवे बंद हो गया था। यहां नई कटिंग के माध्यम से सड़क को पुनः बहाल कर दिया गया है।

    यह भी ध्यान देने योग्य है कि 28 जून की रात्रि को सिलाई बैंड के पास बादल फटने और तेज बारिश के कारण यमुनोत्री हाईवे के पालीगाड़ से लेकर ओजरी तक के मार्ग में कई जगह सड़क बहने और भूस्खलन होने से यह मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था।

    एनएच विभाग ने अन्य प्रभावित स्थलों पर नई कटिंग कर यातायात बहाल कर दिया था, लेकिन ओजरी में ओजरी गदेरे के उफान से लगभग 15 मीटर से अधिक सड़क बह जाने के कारण हाईवे पुनः खुल नहीं पाया। अधिकारियों ने गदेरे के पानी को डायवर्ट करने की योजना बनाई थी, लेकिन लगातार हो रही रात की भारी बारिश के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। इसलिए अब हाईवे को स्थायी रूप से खोलने के लिए बेली ब्रिज का निर्माण ही एकमात्र विकल्प बचा है।

    बनास में धंसी सड़क की मरम्मत के लिए पोकलैंड मशीन भी भेजी गई थी, जो संभवत: नई कटिंग कर यातायात बहाल कर चुकी है। वहीं, जिलाधिकारी प्रशांत कुमार आर्य ने राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ओजरी में जल्द से जल्द यातायात बहाल करने के प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा है कि जब तक हाईवे पूरी तरह से खुल नहीं जाता, तब तक यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए पैदल आवागमन की सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

    जिलाधिकारी ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि सिलाई बैंड के पास क्षतिग्रस्त सड़क को आंशिक रूप से यातायात के लिए खोल दिया गया है, जिससे क्षेत्र में आवागमन कुछ हद तक बहाल हो पाया है। उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि वे आपदा प्रबंधन और सड़क मरम्मत कार्यों में प्रशासन का पूरा सहयोग दें, ताकि मार्ग को जल्द से जल्द पूरी तरह खोला जा सके।

  • ऋषिकेश-चंबा हाईवे पर कांवड़ियों से भरा ट्रक हादसे का शिकार, एक की मौत, 13 घायल

    ऋषिकेश-चंबा हाईवे पर कांवड़ियों से भरा ट्रक हादसे का शिकार, एक की मौत, 13 घायल

    ऋषिकेश

    टिहरी हादसा: ऋषिकेश-चंबा हाईवे पर कांवड़ियों से भरा ट्रक दुर्घटनाग्रस्त, एक की मौत, 13 घायल – गंगोत्री जा रहे थे श्रद्धालु

    टिहरी गढ़वाल। सावन के महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान एक बड़ा हादसा उत्तराखंड के टिहरी जिले में पेश आया। ऋषिकेश-चंबा नेशनल हाईवे पर मंगलवार तड़के कांवड़ियों से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा जाजल और फकोट के बीच एक तीखे मोड़ पर हुआ, जहां ट्रक अचानक बैलेंस खो बैठा और सड़क से नीचे जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में एक कांवड़िए की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 13 अन्य घायल हो गए। चार घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    ऋषिकेश

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक तेज रफ्तार में था और बारिश के चलते सड़क पर फिसलन भी बनी हुई थी। ट्रक जैसे ही जाजल और फकोट के बीच एक खतरनाक मोड़ पर पहुंचा, अचानक चालक का संतुलन बिगड़ गया। ट्रक डिवाइडर से टकराते हुए सड़क किनारे गहरी खाई में पलट गया। हादसे के वक्त ट्रक में करीब 25 से 30 कांवड़िए सवार थे।

    ट्रक ऋषिकेश से गंगोत्री धाम की ओर जा रहा था। कांवड़िए हरिद्वार और ऋषिकेश से पवित्र गंगा जल लेकर गंगोत्री धाम में चढ़ाने जा रहे थे। सावन मास में इस मार्ग पर कांवड़ियों की आवाजाही काफी अधिक रहती है।

    ऋषिकेश

    रेस्क्यू में जुटे स्थानीय लोग, पुलिस और SDRF

    घटना की खबर मिलते ही जाजल और आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने में मदद की। नरेंद्र नगर थाने की पुलिस भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कराया। ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था, जिसमें कई यात्री फंसे हुए थे। बाद में एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिवादन बल) की टीम भी मौके पर पहुंची और भारी उपकरणों की मदद से ट्रक को काटकर घायलों को बाहर निकाला गया।

    ऋषिकेश ऋषिकेश

    घायलों का इलाज जारी, मृतक की शिनाख्त जारी

    घायलों को तुरंत नरेंद्र नगर स्थित संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने चार घायलों की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें एम्स ऋषिकेश के लिए रेफर कर दिया। बाकी आठ घायलों का इलाज नरेंद्र नगर में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, कई घायलों को हाथ, पैर और सिर में गंभीर चोटें आई हैं।

    दुर्घटना में जान गंवाने वाले कांवड़िए की शिनाख्त फिलहाल नहीं हो पाई है। पुलिस ने बताया कि मृतक और घायलों के परिजनों को सूचना दे दी गई है। प्रशासन द्वारा शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है।

    ऋषिकेश

    प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

    टिहरी गढ़वाल के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी मार्गों पर कांवड़ियों और अन्य तीर्थयात्रियों की आवाजाही के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। साथ ही वाहनों की फिटनेस और ओवरलोडिंग पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    मौसम विभाग ने पहले ही उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट जारी किया हुआ है। पुलिस और प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और कांवड़ियों से अपील की है कि वे खराब मौसम और फिसलन भरी सड़कों के चलते अत्यधिक सावधानी बरतें। विशेषकर भारी वाहनों में अधिक भीड़ लेकर यात्रा न करें।

    ऋषिकेश
    सड़क सुरक्षा पर सवाल

    यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर तीर्थयात्रियों को लाने-ले जाने वाले ट्रकों और अन्य बड़े वाहनों की नियमित जांच क्यों नहीं होती। प्रशासन का कहना है कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए ट्रक चालक से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है।

    ऋषिकेश

    हादसे के चलते ऋषिकेश-चंबा हाईवे पर कुछ देर तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। बाद में पुलिस और प्रशासन ने मलबा हटवाकर सड़क आंशिक रूप से चालू करवाई। घटना के बाद से कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं में डर का माहौल बना हुआ है। कई श्रद्धालु घटना स्थल के पास रुक गए और यात्रा स्थगित करने की बातें करने लगे।

    ऋषिकेश