Category: पर्यटन

  • उत्तराखंड में भारी बारिश का खतरा, चार पहाड़ी जिलों में अलर्ट जारी

    उत्तराखंड में भारी बारिश का खतरा, चार पहाड़ी जिलों में अलर्ट जारी

    उत्तराखंड में भारी बारिश का रेड अलर्ट, चार पहाड़ी जिलों में विशेष सतर्कता के निर्देश

    प्रशासन सतर्क, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई, लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील

    देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने पूरी तरह दस्तक दे दी है और इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में मौसम बिगड़ गया है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने बुधवार को राज्य के चार पहाड़ी जिलों — देहरादून, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी और बागेश्वर — के लिए भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के भीतर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।

    भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज गर्जना की चेतावनी

    मौसम विभाग के अनुसार, इन जिलों में तेज हवाओं, आकाशीय बिजली, और गर्जना के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। खास तौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान खिसकने और सड़क अवरोध जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए स्थानीय निवासियों और यात्रियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।

    अन्य जिलों में भी सक्रिय रहेगा मानसून

    वहीं, राज्य के शेष नौ जिलों — हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, ऊधमसिंहनगर और चंपावत — में गरज-चमक के साथ मध्यम से हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है। हालांकि इन जिलों में अत्यधिक वर्षा की चेतावनी नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर तेज बारिश की घटनाएं हो सकती हैं।

    प्रशासन अलर्ट मोड में, SDRF और आपदा प्रबंधन दल तैनात

    राज्य सरकार ने संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में एसडीआरएफ, राजस्व विभाग, पुलिस और स्थानीय आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात किया गया है। नदी-नालों के किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है। पर्वतीय मार्गों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि आवागमन में कोई बाधा न हो।

    पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए विशेष हिदायत

    मौसम विभाग ने आम नागरिकों, खासकर पर्यटकों और पहाड़ी मार्गों पर यात्रा कर रहे यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम से जुड़ी चेतावनियों का पालन करें। अनावश्यक यात्रा से परहेज करें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करें। नदी-नालों के आसपास न जाने और खुले क्षेत्रों में बिजली गिरने की संभावना को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है।

    यात्रा और स्कूलों पर भी असर संभव

    कई स्थानों पर भारी बारिश के कारण यातायात बाधित हो सकता है और विद्यालयों में भी अवकाश की संभावना है, विशेषकर पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सड़कें संकरी या क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। शिक्षा विभाग ने प्रधानाचार्यों को स्थिति के अनुसार विवेकपूर्ण निर्णय लेने की छूट दी है।

    आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है बारिश का प्रभाव

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले तीन से चार दिनों तक राज्य में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय बनी रहेंगी। अगले सप्ताह की शुरुआत तक अधिकतर जिलों में बारिश की तीव्रता बनी रह सकती है, जिससे निचले क्षेत्रों में जलभराव और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

  • उत्तरकाशी: रात 9 से सुबह 5 बजे तक वाहनों पर रोक, जरूरी सेवाओं को मिलेगी छूट

    उत्तरकाशी: रात 9 से सुबह 5 बजे तक वाहनों पर रोक, जरूरी सेवाओं को मिलेगी छूट

    उत्तरकाशी

    उत्तरकाशी में रात 9 से सुबह 5 तक वाहनों की आवाजाही पर रोक, सिर्फ आपात सेवाओं और सुरक्षा बलों को छूट

    उत्तरकाशी। उत्तराखंड में मानसून सक्रिय होते ही पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तरकाशी जिला प्रशासन ने ऐहतियातन बड़ा कदम उठाया है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक जिले की सड़कों पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी।

    यह प्रतिबंध गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों सहित राज्य और संपर्क मार्गों पर भी लागू रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान केवल एंबुलेंस, आपातकालीन सेवाओं के वाहन, और सैन्य व अर्द्धसैनिक बलों के वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति होगी।

    मानसून और चारधाम यात्रा से बढ़ा जोखिम

    गौरतलब है कि मानसून सीजन में उत्तरकाशी जिले के कई क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरोध की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे, जो चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्ग हैं, पर भूस्खलन का खतरा अधिक रहता है। इस वक्त चारधाम यात्रा भी चरम पर है और हजारों श्रद्धालु इन मार्गों से रोजाना आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

    छह पुलिस बैरियर पर निगरानी बढ़ाई गई

    जिले में कुल छह पुलिस बैरियर स्थापित किए गए हैं, जहां रात्री 9 बजे के बाद वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह नजर रखी जाएगी। बैरियरों पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि रात के समय यात्रा करने वाले वाहनों को वहीं पास के सुरक्षित स्थानों पर रोककर पार्क कराया जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    पहले हो चुकी हैं कई दुर्घटनाएं

    जिला प्रशासन के अनुसार, पूर्व वर्षों में कई बार रात के समय भूस्खलन की वजह से गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। अचानक मलबा गिरने या पहाड़ी दरकने से वाहन सड़कों पर फंस गए थे, जिससे यात्रियों की जान पर बन आई थी। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए रात के समय वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

    स्थानीय वाहनों को भी नहीं मिलेगी छूट

    आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान स्थानीय नागरिकों के निजी वाहनों पर भी यह प्रतिबंध लागू रहेगा। यानी स्थानीय वाहन चालकों को भी रात्री 9 बजे के बाद सड़कों पर निकलने की अनुमति नहीं होगी, सिवाय आपात स्थितियों के।

    जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन के आदेशों का पूरी तरह पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। साथ ही किसी भी आपातकालीन स्थिति में जिला आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष अथवा स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

  • चारधाम यात्रा पर लगी 24 घंटे की रोक हटी, फिर से शुरू हुई यात्रा

    चारधाम यात्रा पर लगी 24 घंटे की रोक हटी, फिर से शुरू हुई यात्रा

    चारधाम यात्रा पर लगी 24 घंटे की रोक हटी, फिर शुरू हुई यात्रा; जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश

    देहरादून : चारधाम यात्रा से जुड़ी बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लगातार खराब मौसम के चलते चारधाम यात्रा पर लगाई गई 24 घंटे की अस्थायी रोक अब हटा ली गई है। गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि मौसम में सुधार को देखते हुए यात्रा को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया है।

    गढ़वाल मंडल आयुक्त ने बताया कि यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और सुचारु यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखें। यदि किसी भी क्षेत्र में मौसम फिर से खराब होता है या कोई खतरा उत्पन्न होता है, तो वे अपने स्तर पर तत्काल वाहन रोकने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए अधिकृत होंगे।

    विनय शंकर पांडे ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे मौसम की जानकारी लगातार लेते रहें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा–निर्देशों का पालन करें।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण चारधाम यात्रा बाधित हो रही थी। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने एहतियातन यात्रा पर 24 घंटे की रोक लगाई थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। अब मौसम में सुधार के बाद यात्रा को फिर से बहाल कर दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं में राहत की लहर है।

    प्रशासन ने यात्रा पर जाने वाले लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक जोखिम न लें और केवल मौसम अनुकूल रहने पर ही यात्रा करें। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

  • भारी बारिश के अलर्ट पर MDDA VC का एक्शन, जारी किए अहम निर्देश

    भारी बारिश के अलर्ट पर MDDA VC का एक्शन, जारी किए अहम निर्देश

    भारी बारिश के अलर्ट पर MDDA उपाध्यक्ष का ऐक्शन मोड, नदी किनारे बने भवनों की जांच के आदेश

    बारिश

    देहरादून। प्रदेश में मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनज़र मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) सतर्क हो गया है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत सभी नदी किनारे स्थित भवनों की गहन जांच की जाए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जनहानि को रोका जा सके।

    बारिश

    बारिश

    इस संबंध में प्राधिकरण सचिव मोहन सिंह बर्निया ने स्वयं अलग-अलग इलाकों का दौरा किया और निरीक्षण किया। उन्होंने नदी के समीप बसे लोगों से मुलाकात कर उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी। सचिव ने कहा कि लगातार बारिश की वजह से नदी-नालों में जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे तटीय इलाकों में खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में लोग अनावश्यक रूप से नदी किनारे ना जाएं और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन को तत्काल सूचना दें।

    MDDA उपाध्यक्ष ने सभी ज़ोनल अधिकारियों को यह भी आदेश दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और यदि कोई भवन असुरक्षित स्थिति में पाया जाए तो उसके संबंध में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा संभावित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए भी अधिकारियों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    लोगों को सचेत रहने की अपील

    प्राधिकरण की टीमों ने कई इलाकों में जाकर नदी किनारे बसे निवासियों को सचेत किया है। टीमों ने बताया कि यदि पानी का बहाव तेज़ हो या जलस्तर बढ़ता दिखे, तो लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। इसके अलावा, MDDA ने आमजन से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

    सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। निरीक्षण के दौरान हमने देखा कि कई जगह पुराने या कमजोर भवन नदी के काफी निकट बने हुए हैं। ऐसे भवनों के बारे में रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है, ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।”

    रिपोर्टिंग सिस्टम भी होगा मजबूत

    MDDA ने इस दौरान एक कंट्रोल रूम सक्रिय रखने की भी व्यवस्था की है, जहां लोग किसी भी आपदा संबंधी सूचना तत्काल साझा कर सकते हैं। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए रेस्क्यू टीमें अलर्ट पर रहेंगी।

    प्राधिकरण ने यह भी संकेत दिया है कि यदि ज़रूरत पड़ी, तो नदी किनारे बसे कुछ परिवारों को अस्थायी रूप से अन्य सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल लगातार निरीक्षण और सर्वेक्षण का कार्य जारी है।

  • नैनीताल में उपराष्ट्रपति का दौरा, तीन दिन तक बदले रहेंगे ट्रैफिक रूट

    नैनीताल में उपराष्ट्रपति का दौरा, तीन दिन तक बदले रहेंगे ट्रैफिक रूट

    उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर नैनीताल और हल्द्वानी में ट्रैफिक डायवर्जन लागू, पुलिस ने जारी किया विस्तृत रूट प्लान

    नैनीताल, 25 जून। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 25 जून को प्रस्तावित नैनीताल दौरे के मद्देनज़र उत्तराखंड पुलिस ने नैनीताल और हल्द्वानी क्षेत्रों में व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन योजना लागू की है। यह योजना 25 से 27 जून तक प्रभावी रहेगी, जिसमें वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।

    पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे निर्धारित ट्रैफिक व्यवस्था में सहयोग करें ताकि सुरक्षा और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके।

    डायवर्जन की अवधि
    • 25 जून: सुबह 6:00 बजे से 11:00 बजे तक

    • 27 जून: सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक

    इन समयावधियों के दौरान उपराष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष वीवीआईपी रूट को “जीरो जोन” घोषित किया गया है। इस अवधि में इन मार्गों पर सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा।

    हल्द्वानी और काठगोदाम से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले सभी हल्के और भारी वाहन कालाढूंगी-रामनगर मार्ग के माध्यम से डायवर्ट किए जाएंगे। तिकोनिया चौराहा (हल्द्वानी) से लेकर नंबर-1 बैंड (ज्योलीकोट) तक की सड़क वीवीआईपी रूट में शामिल है। इस क्षेत्र को फ्लीट मूवमेंट के समय पूर्णत: प्रतिबंधित रखा जाएगा।

    वाहन डायवर्जन के विशेष निर्देश

    नैनीताल बैंक तिराहा से वाहन अल्मोड़ा अर्बन बैंक की ओर मोड़े जाएंगे।

    नगर निगम कट से यातायात को अटल मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।

    ज्योलीकोट नंबर-1 बैंड से वाहन रूसी बैंड-2 व 1, मंगोली, तथा कालाढूंगी की ओर भेजे जाएंगे।

    नैनीताल से बाहर जाने वाले वाहन भवाली और भीमताल मार्ग का उपयोग करेंगे।

    यातायात प्रतिबंध के विशेष क्षेत्र

    पनचक्की तिराहा से काठगोदाम की ओर जाने वाले वाहन रोके जाएंगे। गौलापार से काठगोदाम की ओर जाने वाले वाहनों को महाकाली जनरल स्टोर तिराहा पर रोककर गौलापुल की ओर भेजा जाएगा। भीमताल से हल्द्वानी की ओर आने वाले वाहनों को सलड़ी चौकी, चंदा देवी, और अमृतपुर गेट के पास रोका जाएगा। भवाली से मस्जिद तिराहा होते हुए हल्द्वानी की ओर आने वाले वाहनों को, उपराष्ट्रपति की फ्लीट प्रस्थान के दौरान, ज्योलीकोट से कम से कम दो किलोमीटर पीछे रोका जाएगा।

    प्रवेश प्रतिबंध
    • वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सभी कट पॉइंट्स और लिंक मार्गों से मुख्य मार्ग पर किसी भी वाहन का प्रवेश पूर्ण रूप से वर्जित रहेगा।

    • 25 जून (6:00 AM – 11:00 AM) और 27 जून (7:00 AM – 1:00 PM) को भारी वाहनों का वीवीआईपी रूट पर प्रवेश पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।

    बसों और टैक्सियों पर नियंत्रण

    हल्द्वानी स्थित रोडवेज, केमू स्टेशन और टैक्सी स्टैंड से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाली सभी बसें और टैक्सियां उपराष्ट्रपति की फ्लीट प्रस्थान के कम से कम 20 मिनट पहले अपने-अपने स्थानों पर ही रोक दी जाएंगी।

    पुलिस की अपील:

    एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए ट्रैफिक नियमों का पालन करें और किसी भी असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। आम जनता को सलाह दी जाती है कि यात्रा पर निकलने से पूर्व रूट प्लान की जानकारी अवश्य ले लें और समय के अनुसार यात्रा की योजना बनाएं।

  • हेली सेवा का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न, अब मानसून के बाद अगला चरण

    हेली सेवा का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न, अब मानसून के बाद अगला चरण

    मानसून के चलते रुकी केदारनाथ हेली सेवा, पहला चरण हुआ समाप्त; सितंबर में फिर शुरू होगी उड़ानें

    देहरादून/रुद्रप्रयाग।
    केदारनाथ धाम के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवा का पहला चरण अब समाप्त हो गया है। सभी हेली कंपनियों ने अपने हेलिकॉप्टर केदारघाटी से वापस बुला लिए हैं। अब यह सेवा मानसून समाप्त होने के बाद सितंबर में फिर से शुरू होगी। इस बार का पहला चरण कई लिहाज से चुनौतीपूर्ण और घटनाओं से भरा रहा—जहां एक ओर खराब मौसम और तकनीकी खामियों के चलते उड़ानों में बार-बार व्यवधान आया, वहीं एक बड़े हेलिकॉप्टर हादसे ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए।

    मानसून के चलते बंद हुई सेवा

    जून के अंतिम सप्ताह में मानसून के सक्रिय होते ही केदारनाथ हेली सेवा को स्थगित कर दिया गया। यात्रा के नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने पुष्टि की कि सभी छह हेली कंपनियों के सात हेलिकॉप्टर केदारघाटी से वापस लौट गए हैं। अब यात्रियों को यह सेवा फिर सितंबर में मिल सकेगी, जब मानसून कमजोर हो जाएगा और मौसम उड़ानों के अनुकूल रहेगा।

    डीजीसीए ने दी थी उड़ान की अनुमति

    केदारनाथ यात्रा के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इस वर्ष आठ हेली कंपनियों को नौ हेलिकॉप्टरों के संचालन की अनुमति दी थी। यात्रा की शुरुआत 2 मई को हुई थी, और तभी से इन सेवाओं ने यात्रियों को गौरीकुंड से केदारनाथ पहुंचाने का कार्य शुरू किया था। हालांकि, अनियमित मौसम और कई अन्य कारणों से यह सेवा सुचारु रूप से नहीं चल पाई।

    13 हजार से अधिक टिकट रद्द, 8.65 करोड़ का घाटा

    कपाट खुलने से लेकर 21 जून तक का यह चरण हेली कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से भारी नुकसानदायक रहा। मौसम की मार और तकनीकी कारणों से कुल 13,304 टिकट रद्द किए गए, जिससे कंपनियों को लगभग 8.65 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
    सिर्फ 2 से 16 मई के बीच ही 1,638 टिकट रद्द हुए थे, जिसकी वजह भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ा तनाव और प्रतिकूल मौसम रहा।

    बड़ा हादसा और प्रशासनिक सख्ती

    15 जून को यात्रा के दौरान एक भीषण हादसा हुआ, जब आर्यन हेली कंपनी का एक हेलिकॉप्टर केदारनाथ से गुप्तकाशी जाते समय गौरी माई खर्क के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई। प्राथमिक जांच में इस दुर्घटना का कारण खराब मौसम बताया गया।
    इसके बाद, नागर विमानन महानिदेशालय ने दो दिन के लिए हेली सेवा पूरी तरह बंद कर दी और जांच शुरू की। इसी दौरान, ट्रांस भारत कंपनी के दो हेलिकॉप्टरों ने भी खराब मौसम के बावजूद उड़ान भरी थी, जिसके बाद उनके पायलटों के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित कर दिए गए। वहीं आर्यन कंपनी के खिलाफ राजस्व विभाग ने मुकदमा दर्ज कराया और विस्तृत पूछताछ की गई।

    इमरजेंसी लैंडिंग की घटना

    7 जून को एक और घटना ने सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल खड़े किए। क्रिस्टल कंपनी के हेलिकॉप्टर को बडासू हेलिपैड से उड़ान भरते समय रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद डीजीसीए ने सभी कंपनियों के कार्यालयों का निरीक्षण किया और उड़ानों के लिए नई शटल निर्धारण प्रणाली लागू की गई, जिससे उड़ानों की संख्या नियंत्रित करनी पड़ी। इसका असर यह हुआ कि प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों की टिकटें रद्द करनी पड़ीं।

    यात्री परेशान, व्यवस्था सवालों के घेरे में

    17 से 21 जून तक खराब मौसम के चलते हेली सेवा पूरी तरह ठप रही, जिससे हजारों तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अचानक उड़ानें रद्द होने और जानकारी की कमी के कारण कई यात्रियों को केदारघाटी में लंबा इंतजार करना पड़ा।

    अब सभी हेली कंपनियां वापस लौट गई हैं। यात्रा का दूसरा चरण पूरी तरह मानसून की वजह से स्थगित रहेगा। नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि हेली सेवा का तीसरा चरण सितंबर में शुरू होगा, जब मौसम सामान्य होने लगेगा और उड़ानें सुरक्षित रूप से संचालित की जा सकेंगी।

    इस वर्ष का पहला चरण जहां तीर्थयात्रियों के लिए राहत देने वाला रहा, वहीं असामान्य घटनाओं और सुरक्षा चिंताओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की निगरानी बढ़ी है और हेली सेवाओं की संचालन प्रक्रिया पर कड़ा नियंत्रण लाया गया है। अब देखना होगा कि सितंबर में शुरू होने वाला तीसरा चरण किस तरह की व्यवस्थाओं और सुरक्षा सुधारों के साथ सामने आता है।

  • बदरीनाथ हाईवे पर भारी अवरोध, 5000 तीर्थयात्री घंटे भर फंसे

    बदरीनाथ हाईवे पर भारी अवरोध, 5000 तीर्थयात्री घंटे भर फंसे

    बदरीनाथ

    बदरीनाथ हाईवे पर भूस्खलन का कहर

    भनेरपाणी और पागलनाला में घंटों फंसे 5000 तीर्थयात्री

    चमोली – उत्तराखंड में मानसून ने दस्तक देते ही चारधाम यात्रा मार्गों की कठिनाइयां भी बढ़ा दी हैं। रविवार देर रात हुई भारी बारिश के चलते बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7) पर चमोली जिले के भनेरपाणी और पागलनाला क्षेत्र में भूस्खलन और भारी मलबा आने से राजमार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया। इसके चलते बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जा रहे तथा लौट रहे करीब 5000 तीर्थयात्री रास्ते में फंसे रहे और उन्हें घंटों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    भारी बारिश के कारण सोमवार सुबह करीब पांच बजे से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया। हालांकि, सुबह सात बजे से एनएचआईडीसीएल (राष्ट्रीय राजमार्ग एवं ढांचागत विकास निगम लिमिटेड) की ओर से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया। करीब 10 बजे हाईवे को अस्थायी रूप से खोल दिया गया, लेकिन आधे घंटे बाद ही फिर से ऊपर से भारी मलबा आने से वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी।

    काफी मशक्कत के बाद दोपहर एक बजे के करीब हाईवे को दोबारा खोलकर यातायात सुचारु किया गया। जिलाधिकारी संदीप तिवारी के अनुसार, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

    भनेरपाणी क्षेत्र पिछले दो वर्षों से भूस्खलन और भू-धंसाव की चपेट में है। इस समय यहां एनएचआईडीसीएल द्वारा सड़क सुधारीकरण कार्य चल रहा था, जो रविवार की रात हुई बारिश के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर हाईवे पर आ गए, जिससे मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।

    पागलनाला भी बना बाधा का कारण

    रविवार रात को पागलनाला भी उफान पर आ गया था, जिसके कारण वहां से भी मलबा और पत्थर हाईवे पर आ गिरे। सुबह करीब 10 बजे तक मार्ग बंद रहा, जिससे कई तीर्थयात्रियों को यात्रा रोकनी पड़ी।

    अलकनंदा का जलस्तर खतरे के करीब

    चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है।

    • अलकनंदा नदी का जलस्तर 952.80 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि इसका खतरे का निशान 957.42 मीटर है।

    • नंदाकिनी नदी 867.70 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे की सीमा 871.50 मीटर है।

    • पिंडर नदी भी 768.75 मीटर तक पहुंच चुकी है, जबकि इसका खतरे का स्तर 773 मीटर निर्धारित है।

    बीते 24 घंटों में सबसे अधिक वर्षा चमोली तहसील में 93.6 मिमी दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई – गैरसैंण (20 मिमी), पोखरी (5 मिमी), ज्योतिर्मठ (10.40 मिमी), थराली (2.5 मिमी), नारायणबगड़ (22 मिमी)। कर्णप्रयाग क्षेत्र में वर्षा दर्ज नहीं की गई।

    घिंघराण मार्ग पर गिरी चट्टान, ग्रामीणों ने किया स्वयं राहत कार्य

    गोपेश्वर-घिंघराण मार्ग पर सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे नए बस अड्डे के पास एक बड़ी चट्टान टूटकर सड़क पर गिर गई। सौभाग्यवश उस समय कोई वाहन वहां से नहीं गुजर रहा था, जिससे जान-माल की क्षति नहीं हुई। लोनिवि को सूचना देने के बावजूद मौके पर जेसीबी नहीं पहुंची, जिसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने खुद ही सड़क से मलबा हटाकर आवाजाही बहाल की। करीब एक घंटे की मेहनत के बाद मार्ग को फिर से चालू किया जा सका।

    कोंज पोथनी गांव के लिए संपर्क मार्ग बहा, 80 परिवार कटे संपर्क से

    घिंघराण-कुजौं मेकोट-कौंज पोथनी मार्ग पर भी भारी बारिश के चलते सड़क का करीब 100 मीटर हिस्सा बह गया है। क्षेत्र में बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा भर गया है। इससे कोंज पोथनी गांव के लगभग 80 परिवारों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है। महिला मंगल दल की अध्यक्ष दीपा देवी और आशा कार्यकर्ता आशा कठैत ने जिलाधिकारी से शीघ्र मार्ग खुलवाने की मांग की है।

    मानसून के आरंभ के साथ ही उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कें अवरुद्ध होने और जलस्तर बढ़ने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बदरीनाथ हाईवे जैसी महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात में अवरोध न केवल यात्रियों की कठिनाई को बढ़ाता है, बल्कि चारधाम यात्रा जैसे धार्मिक अभियानों पर भी प्रतिकूल असर डालता है। प्रशासन की सक्रियता और समय पर राहत कार्य की आवश्यकता अब और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

  • उत्तराखंड में सेल्फी से मौत के खतरे, संवेदनशील जगहों पर लगेगा प्रतिबंध

    उत्तराखंड में सेल्फी से मौत के खतरे, संवेदनशील जगहों पर लगेगा प्रतिबंध

    उत्तराखंड में खतरनाक स्थलों को घोषित किया जाएगा ‘नो सेल्फी जोन’, लोगों की जान बचाने के लिए प्रशासन सख्त

    सुरक्षित सेल्फी के लिए अलग से बनाए जाएंगे ‘सेल्फी जोन’, स्थानीय लोगों को दी जाएगी संचालन की जिम्मेदारी

    देहरादून। उत्तराखंड जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में जहां हर साल लाखों सैलानी देश-विदेश से प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते हैं, वहीं सोशल मीडिया पर ‘परफेक्ट सेल्फी’ की होड़ अब एक गंभीर खतरे में तब्दील होती जा रही है। बीते वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पर्यटकों ने जोखिम भरे स्थानों पर जाकर सेल्फी लेने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी। इसे देखते हुए अब राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है।

    प्रदेश सरकार अब उत्तराखंड के खतरनाक और संवेदनशील स्थलों को ‘नो सेल्फी जोन’ घोषित करने जा रही है। इन स्थानों पर सेल्फी लेना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। वहीं, दूसरी ओर सुरक्षित और सौंदर्यपूर्ण स्थानों को ‘सेल्फी जोन’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां लोग आराम से और बिना खतरे के अपनी तस्वीरें ले सकेंगे।

    उत्तराखंड में खतरे की घंटी: जान जोखिम में डाल रहे युवा

    आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने इस विषय में राज्य के सभी जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे हैं। पत्र में उन्होंने चेतावनी दी है कि सेल्फी लेने की प्रवृत्ति खासकर युवाओं में एक प्रतिस्पर्धा का रूप ले चुकी है। लोग लाइक्स, शेयर और फॉलोअर्स की लालसा में जानलेवा जोखिम उठा रहे हैं।

    उनका कहना है कि अक्सर लोग ऊंची पहाड़ियों, नदी-नालों, झरनों, रेलवे ट्रैकों, पुलों, चलती गाड़ियों की छतों और यहां तक कि जंगली जानवरों के साथ भी सेल्फी लेने की कोशिश करते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं।

    प्रस्ताव तैयार करेंगे स्थानीय निकाय

    राज्य सरकार अब ऐसे खतरनाक स्थलों की पहचान कर नो सेल्फी जोन के रूप में चिन्हित करेगी। इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे और आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग भी की जाएगी। दूसरी ओर, सुरक्षित और सुंदर प्राकृतिक स्थलों को “सेल्फी फ्रेंडली ज़ोन” के रूप में चिन्हित कर वहां बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जैसे: सुरक्षित प्लेटफॉर्म, रेलिंग, कार पार्किंग, अल्पाहार केंद्र, सार्वजनिक शौचालय, सहायता केंद्र।

    इन स्थानों के विकास और संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों जैसे जिला पंचायत, ग्राम पंचायत, नगर निकायों के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों को दी जा सकती है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि जिम्मेदारी और सुरक्षा का भाव भी विकसित होगा।

    राज्य सरकार द्वारा केवल प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इसमें युवाओं को यह संदेश दिया जाएगा कि एक तस्वीर के लिए अपनी जान जोखिम में डालना किसी भी तरह से समझदारी नहीं है। स्कूलों, कॉलेजों, टूर ऑपरेटरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

    उत्तराखंड प्रशासन सख्त, नियम तोड़ने पर जुर्माना संभव

    अगर कोई व्यक्ति ‘नो सेल्फी जोन’ में जाकर निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके लिए आपदा प्रबंधन एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।

    उत्तराखंड सरकार की यह पहल केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह एक जरूरी सामाजिक चेतावनी है। जहां एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है, वहीं पर्यटकों की सुरक्षा भी सर्वोपरि है। ऐसे में, ‘सेल्फी की दीवानगी’ को संतुलित और सुरक्षित दिशा देने की यह नीति सराहनीय कदम है।

  • चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 32 लाख कर चुके दर्शन

    चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 32 लाख कर चुके दर्शन

    चारधाम

    चारधाम यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: अब तक 32 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, अन्य तीर्थस्थलों की ओर भी बढ़ रही भीड़

    उत्तराखंड की दिव्यता और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र मानी जाने वाली चारधाम यात्रा इस वर्ष नए आयाम छू रही है। अब तक लगभग 32 लाख तीर्थयात्री चारधाम यात्रा कर चुके हैं, जो श्रद्धालुओं के बीच इस पवित्र यात्रा के प्रति गहरी आस्था और उत्साह को दर्शाता है। यात्रा के इस बढ़ते क्रम का असर अब अन्य प्रमुख मंदिरों और तीर्थस्थलों पर भी दिखाई देने लगा है, जहां तीर्थयात्री लगातार पहुंच रहे हैं। इससे न केवल धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं।

    अन्य मंदिरों में भी तीर्थयात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    चारधाम के अलावा, राज्य के कई अन्य प्रसिद्ध मंदिरों और धार्मिक स्थलों में भी तीर्थयात्रियों की आवाजाही बढ़ी है। उदाहरणस्वरूप, रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर में इस वर्ष मई महीने तक 57,863 तीर्थयात्री पहुंच चुके थे, जबकि 2021 में यह संख्या मात्र 15,735 थी। वर्ष 2024 तक यह आंकड़ा 2,28,837 तक पहुंच गया, जो एक ऐतिहासिक वृद्धि मानी जा रही है।

    इसी तरह, अल्मोड़ा जिले के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में इस वर्ष 15 जून तक 56,423 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके थे, जबकि पूरे 2024 में यहां अब तक 2,08,073 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। इन आँकड़ों से यह स्पष्ट है कि श्रद्धालु अब केवल चारधाम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राज्य के अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की ओर भी रुख कर रहे हैं।

    पंजीकरण की संख्या 44 लाख पार

    चारधाम यात्रा के लिए इस वर्ष पंजीकरण की संख्या में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। पर्यटन विभाग के अनुसार अब तक कुल 44 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों का पंजीकरण हो चुका है। धामवार पंजीकरण आंकड़े इस प्रकार हैं:

    • यमुनोत्री धाम – 7,13,456

    • गंगोत्री धाम – 7,80,554

    • केदारनाथ धाम – 14,43,513

    • बदरीनाथ धाम – 13,36,923

    • हेमकुंड साहिब – 1,69,180

    इनमें से अब तक करीब 32 लाख तीर्थयात्री अपनी यात्रा पूरी कर चुके हैं, जो राज्य के तीर्थाटन की सफलता और व्यवस्था की क्षमता को दर्शाता है।

    आर्थिक गतिविधियों को मिली रफ्तार

    तीर्थयात्रियों की इस भारी आमद का सकारात्मक असर राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। चारधाम यात्रा मार्ग पर होटलों, रेस्टोरेंट्स, टैक्सी सेवाओं, गाइड्स और स्थानीय विक्रेताओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब जब श्रद्धालु अन्य मंदिरों जैसे कि तुंगनाथ, नीलकंठ महादेव, कैलाश मानसरोवर मार्ग, जौलजीबी, और काली मंदिर आदि स्थलों की ओर भी जा रहे हैं, तो उन क्षेत्रों में भी व्यापारिक गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं।

    सरकार का ध्यान प्रचार-प्रसार और संतुलित विकास पर

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि चारधाम यात्रा को केंद्र में रखते हुए, अन्य धार्मिक स्थलों का भी प्रचार-प्रसार बढ़ाया जाए, ताकि राज्य के कम प्रसिद्ध लेकिन ऐतिहासिक महत्व के तीर्थस्थल भी श्रद्धालुओं के नक्शे पर आएं। इससे केवल धार्मिक पर्यटन को बल नहीं मिलेगा, बल्कि पूरे राज्य में संतुलित आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    चारधाम यात्रा की ऐतिहासिक सफलता इस वर्ष उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। अब श्रद्धालुओं का ध्यान राज्य के अन्य मंदिरों और धार्मिक स्थलों की ओर भी आकर्षित हो रहा है, जो राज्य की संस्कृति, आस्था और अर्थव्यवस्था—तीनों को सशक्त कर रहा है। प्रशासन और सरकार की ओर से की गई व्यवस्थाओं ने इस यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

  • कैंची धाम बाईपास परियोजना को हरी झंडी, जुलाई से शुरू होगा निर्माण कार्य

    कैंची धाम बाईपास परियोजना को हरी झंडी, जुलाई से शुरू होगा निर्माण कार्य

    कैंची धाम बाईपास की सभी आपत्तियाँ दूर, गुलाब घाटी हेतु वन भूमि भी स्वीकृत

    सांसद अजय भट्ट ने किया निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होने का ऐलान

    हल्द्वानी। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट ने जानकारी दी है कि कैंची धाम बाईपास निर्माण से जुड़ी सभी आपत्तियाँ अब दूर कर ली गई हैं। 19 किलोमीटर लंबे इस बाईपास में 8 किलोमीटर का कार्य पहले ही पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष 11 किलोमीटर के लिए निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होने जा रहा है। इसके लिए पहाड़ कटान कार्य की निविदा भी आमंत्रित कर दी गई है।

    उन्होंने बताया कि 450 लाख रुपए की लागत से बनने वाला यह बाईपास तीन चरणों में पूर्ण किया जाएगा:

    1. प्रथम चरण – पहाड़ कटान और 70 मीटर लंबे पुल (सेतु) का निर्माण,

    2. द्वितीय चरण – दीवार व कलमठ निर्माण,

    3. तृतीय चरण – डामरीकरण (सड़क की परत बिछाना)।

    यह कार्य जुलाई 2025 से प्रारंभ होकर 18 माह में पूर्ण किया जाएगा।

    गुलाब घाटी के लिए भी मिली वन भूमि

    श्री भट्ट ने बताया कि काठगोदाम से अमृतपुर बैंड तक के बाईपास निर्माण में पूर्व में वन भूमि हस्तांतरण को लेकर आपत्तियाँ उठी थीं। वन संरक्षक (नोडल कार्यालय) देहरादून द्वारा क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु आपत्ति दर्ज की गई थी। अब इसका समाधान कर लिया गया है और रामनगर के पास 7.8 हेक्टेयर डी-ग्रेडेड फॉरेस्ट लैंड वृक्षारोपण के लिए चिह्नित कर दी गई है। इससे इस परियोजना के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं है।

    पर्यटन और यातायात को मिलेगा लाभ

    सांसद भट्ट ने बताया कि इन बाईपास मार्गों के बन जाने से हल्द्वानी और काठगोदाम शहरों की यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा। पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहनों और पर्यटकों को इन वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा, जिससे भीड़-भाड़ कम होगी और यात्रा सुगम बनेगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि काठगोदाम-अमृतपुर बाईपास और कैंची धाम बाईपास दो अलग-अलग परियोजनाएं हैं, जिनका कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा। इससे कुमाऊं क्षेत्र में आवागमन करने वाले पर्यटकों और यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी।