Category: पर्यटन

  • चारधाम यात्रा का शुभारंभ: श्री बदरीनाथ धाम के कपाट विधिवत खुले

    चारधाम यात्रा का शुभारंभ: श्री बदरीनाथ धाम के कपाट विधिवत खुले

    मुख्यमंत्री धामी ने दी शुभकामनाएं

    बदरीनाथ

    15,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने लिए निर्वाण दर्शन; पुष्पवर्षा और वेद ध्वनि से गूंज उठा धाम

    बदरीनाथ धाम। उत्तराखंड स्थित विश्वविख्यात श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार, 4 मई को प्रातः 6 बजे विधिपूर्वक श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। पूरे परिसर में भक्ति, परंपरा और दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कपाट उद्घाटन के इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित लगभग 15,000 से अधिक श्रद्धालु एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

    कपाट खुलने की प्रक्रिया रविवार तड़के सुबह 4 बजे से प्रारंभ हो गई थी। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल के नेतृत्व में समिति के समस्त अधिकारी और कर्मचारी मंदिर परिसर में एकत्र हो चुके थे। साढ़े चार बजे श्री कुबेर जी की प्रतीकात्मक शोभायात्रा बामणी गांव से चलकर दक्षिण द्वार होते हुए मंदिर परिसर में पहुंची।

    प्रातः 5 बजे रावल अमरनाथ नंबूदरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, चमोली जिलाधिकारी संदीप तिवारी, पूर्व रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, राजपुरोहित कांता प्रसाद नौटियाल, हक-हकूकधारी डिमरी पंचायत प्रतिनिधि, मंदिर समिति सदस्य, भारतीय सेना के अधिकारीगण, वेदपाठी, प्रशासनिक अधिकारी एवं आम श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र हुए।

    द्वार पूजा ठीक 5:30 बजे प्रारंभ हुई और प्रातः 6 बजे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट विधिवत रूप से खोले गए। इससे पूर्व माता लक्ष्मी जी ने श्री बदरीनाथ मंदिर से बाहर निकलकर परिक्रमा स्थित अपने मंदिर में प्रवेश किया। इसके पश्चात श्री कुबेर जी, श्री गरुड़ जी एवं श्री उद्धव जी को गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया गया।

    भगवान बदरीविशाल के ‘निर्वाण दर्शन’ का विशेष दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावविभोर कर देने वाला था। घृत कंबल को हटाकर भगवान को आभामय स्वरूप में दर्शनार्थ प्रस्तुत किया गया। प्रातः 10 बजे से भगवान बदरीविशाल का महाभिषेक प्रारंभ हुआ।

    इससे पूर्व, बीते रविवार को श्री गरुड़ जी, उद्धव जी, श्री कुबेर जी, आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी और ‘गाडू घड़ा’ (तेल कलश) श्री बदरीनाथ धाम पहुंच चुके थे।

    धार्मिक उल्लास और सांस्कृतिक भव्यता का संगम

    मंदिर परिसर को विशेष रूप से फूलों और रोशनियों से सजाया गया था। श्रद्धालुओं द्वारा दान एवं सहयोग से भंडारे आयोजित किए गए। सेना और आईटीबीपी ने भी इस कार्य में भाग लिया। सीमांत गांव माणा एवं बामणी की महिलाओं ने पारंपरिक भजन-कीर्तन और भक्तिमय नृत्य प्रस्तुत किए।

    हेलीकॉप्टर से मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई, जिससे वातावरण आस्था एवं दिव्यता से सराबोर हो गया। मंदिर सिंह द्वार पर वेदवेदांग संस्कृत विद्यालय, जोशीमठ के छात्रों ने स्वस्तिवाचन कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

    मुख्यमंत्री धामी ने दी शुभकामनाएं, यात्रा के लिए न्योता

    प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को शुभकामनाएं दीं और चारधाम यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को प्राथमिकता पर रखते हुए योजनाओं को क्रियान्वित किया है और श्रद्धालुओं के लिए हरसंभव सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

    मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस वर्ष चारधाम यात्रा नए कीर्तिमान स्थापित करेगी और तीर्थयात्रियों की संख्या ऐतिहासिक होगी। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश और देश की समृद्धि एवं सुख-शांति की कामना की।

    बीकेटीसी की ओर से श्री बदरीविशाल की प्रथम महाभिषेक पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न कराई जाएगी।

    बदरीनाथ
    पर्यटन विभाग व मंदिर समिति की तैयारियां

    पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि अब तक चारधाम यात्रा हेतु लगभग 25 लाख तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण कराया है, जो एक उत्साहजनक संकेत है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

    श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के नवनियुक्त अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती एवं विजय कपरवाण ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

    पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे ने मंदिर समिति और पर्यटन विभाग को दिशा-निर्देश जारी करते हुए सरल और व्यवस्थित दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। रजिस्ट्रेशन जांच और टोकन प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया है।

    बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मंदिर समिति तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने यात्रा से जुड़े सभी विभागों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

    अन्य मंदिरों के कपाट भी खुले

    बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार, बदरीनाथ मंदिर परिक्रमा स्थित सभी मंदिरों — माता लक्ष्मी, श्री गणेश, घंटाकर्ण जी, आदि केदारेश्वर, श्री शंकराचार्य मंदिर, माता मूर्ति मंदिर (माणा), भविष्य बदरी मंदिर (सुभाई तपोवन) — के कपाट भी इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

    माता मूर्ति मंदिर के कपाट पुजारी हनुमान प्रसाद डिमरी और भविष्य बदरी मंदिर के कपाट पुजारी संजय डिमरी द्वारा खोले गए।

    उपस्थित प्रमुख व्यक्ति:

    इस पावन अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी, स्वामी सविदानंद, बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला, वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद अध्यक्ष रामचंद्र गौड़, बीकेटीसी के पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार, पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ, डिमरी पंचायत उपाध्यक्ष भास्कर डिमरी, एवं कई अन्य क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, संत, एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

  • केदारनाथ में श्रद्धालुओं को सीएम धामी ने वितरित किया प्रसाद

    केदारनाथ में श्रद्धालुओं को सीएम धामी ने वितरित किया प्रसाद

    विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं से सीएम ने की मुलाकात

     

    केदारनाथ। विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर केदारनाथ में सीएम धामी ने केदारनाथ परिसर में आयोजित मुख्य सेवक भंडारा में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।
    इस दौरान उन्होंने केदारनाथ की स्वच्छता में लगे पर्यावरण मित्रों, पुनर्निर्माण कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।

    सीएम

    सीएम धामी ने सपत्नीक मुख्य सेवक भंडारा के तहत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया और भोजन परोसा। अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर श्रद्धालु बेहद खुश नजर आए। इस दौरान हजारों की संख्या में लोगों ने मुख्य सेवक भंडारा का प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ आए श्रद्धालुओं से मुलाकात की एवं उनसे यात्रा को लेकर की गई व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया । यात्रा के लिए राज्य सरकार द्वारा की गई विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

    सीएम ने बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा 4 मई को बद्रीनाथ जी के कपाट खुलेंगे। राज्य सरकार देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत एवं उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गत वर्ष केदारनाथ क्षेत्र में आपदा आई थी, जिससे करीब 35 दिन यात्रा बाधित रही। सरकार और प्रशासन ने स्थानीय लोगों के सहयोग से यात्रा को पुनः शुरु किया, जिससे फलस्वरूप रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु चार धाम आए।

    सीएम

    सीएम ने कहा कि राज्य सरकार हर स्तर पर यात्रा की लगातार मॉनिटरिंग करती है। यात्रा मार्गो में भी विभिन्न मूलभूत सुविधाएं स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा चार धाम यात्रा राज्य की लाइफलाइन भी है। यह यात्रा लाखों लोगों की आजीविका का साधन भी है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का संकल्प है कि चार धाम यात्रा साल भर चले, जिसके लिए राज्य में शीतकालीन यात्रा को भी प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए मुखवा, उत्तरकाशी में मां गंगा के दर्शन किए थे।

    सीएम ने समस्त प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री का आभार किया। उन्होंने कहा केदारनाथ का पुनर्निर्माण कार्य प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हो रहा है। प्रधानमंत्री केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा करते हैं। 2000 करोड़ की लागत से केदारनाथ का भव्य निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गौरीकुंड से केदारनाथ तक रोपवे निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की है।

    सीएम

    इस अवसर  गीता पुष्कर धामी, विधायक  आशा नौटियाल, डॉ. मधु भट्ट, कर्नल अजय कोठियाल, तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती, अंकित सेमवाल, उमेश पोस्ती हिमांशु चमोली एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • केदारनाथ धाम: श्रद्धा से भीगे मन, हर-हर महादेव से गूंजी केदार घाटी

    केदारनाथ धाम: श्रद्धा से भीगे मन, हर-हर महादेव से गूंजी केदार घाटी

    केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अद्भुत क्षण के हजारों श्रद्धालु बने साक्षी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी रहे उपस्थित

    केदारनाथ धाम में एक बार फिर श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा जब भगवान केदारनाथ के कपाट शुक्रवार को विधि-विधान के साथ प्रात:काल वृष लग्न में खोले गए। यह पावन अवसर सुबह 7 बजे का था, जब समूची केदारघाटी “हर–हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठी। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था के साथ-साथ इस पल को देखने की वर्षों से संजोई प्रतीक्षा साफ झलक रही थी। बाबा केदार के कपाट खुलने के उस पवित्र क्षण को देखने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस अद्भुत क्षण के गवाह बने। उन्होंने कपाट खुलने से कुछ ही देर पहले केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान केदारनाथ के दर्शन किए और प्रदेशवासियों की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि यह उनके लिए अत्यंत पुण्य का अवसर है कि वह इस आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

    केदारनाथ

    श्रद्धा से भीगे मन से भक्तों ने बाबा भोलेनाथ का वंदन किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने समर्पण भाव से अपना मस्तक झुकाया और केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य किया। इस विशेष अवसर पर मंदिर को 108 क्विंटल फूल-मालाओं से सजाया गया था, जो इसे अत्यंत दिव्य एवं भव्य स्वरूप प्रदान कर रहे थे। मंदिर के गर्भगृह से लेकर प्रांगण तक हर कोना आभा से दमक रहा था।

    कपाट खुलते ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र श्रद्धा और उल्लास से भर गया। शासन और प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और सुरक्षा बल पूरी तरह से मुस्तैद रहे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस वर्ष कपाटोद्घाटन पर पहली पूजा देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नाम से संपन्न की गई, जो अपने आप में एक विशेष महत्व रखता है।

    केदारनाथ

    श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने जानकारी दी कि कपाट खुलने के साथ ही दर्शन के लिए टोकन व्यवस्था लागू कर दी गई है, ताकि श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन का अवसर मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष केदारनाथ में 15,000 से अधिक श्रद्धालुओं के रात्रि प्रवास की व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रा में किसी को असुविधा न हो।

    श्री केदारनाथ धाम अब पूरी तरह से सज-संवर कर अपने संपूर्ण वैभव के साथ भक्तों के स्वागत को तैयार है। शुभ मुहूर्त में हुए इस कपाटोद्घाटन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आस्था की डोर कभी कमजोर नहीं पड़ती। जैसे ही कपाट खुले, वातावरण भक्ति और आनंद से सराबोर हो गया। यह क्षण सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।

      “मेरे लिए यह अत्यंत सौभाग्य का क्षण है कि मैं भी कपाटोद्घाटन के दौरान श्री केदारनाथ धाम में उपस्थित हूं। बाबा केदार से मेरी प्रार्थना है कि वह देश और प्रदेश को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।”- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

  • उत्तराखंड में हेली सेवाओं का विस्तार, गौचर सेवा चालू, जोशियाड़ा के लिए बुकिंग खुली

    उत्तराखंड में हेली सेवाओं का विस्तार, गौचर सेवा चालू, जोशियाड़ा के लिए बुकिंग खुली

    हेली सेवा विस्तार की ओर कदम: गौचर से शुरू, जोशियाड़ा की बुकिंग चालू, श्रीनगर-पौड़ी जल्द कतार में

    चारधाम यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत, देहरादून-पंतनगर विमान सेवा भी जल्द

    उत्तराखंड में हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है। राज्य सरकार और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के संयुक्त प्रयासों से गौचर और जोशियाड़ा के लिए हेली सेवा की शुरुआत की जा रही है। बुधवार को सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट से गौचर के लिए हेली सेवा का सफल संचालन किया गया, जबकि जोशियाड़ा के लिए यात्री न होने की वजह से पहली उड़ान रद्द करनी पड़ी। हालांकि, जोशियाड़ा के लिए अब ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और 10 मई से इसकी नियमित उड़ानें संचालित होने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर नवंबर 2024 में गौचर और जोशियाड़ा के लिए हवाई सेवा की घोषणा की गई थी, और अब इस पर अमल शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत यूकाडा ने चरणबद्ध ढंग से सेवाओं की शुरुआत की योजना बनाई है।

    जल्द शुरू होंगी श्रीनगर और पौड़ी की सेवाएं

    यूकेडा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोनिका ने जानकारी दी कि 15 मई तक श्रीनगर और पौड़ी के लिए भी हवाई सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। यह सेवाएं न सिर्फ स्थानीय यात्रियों के लिए राहत लेकर आएंगी, बल्कि चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए भी बेहद उपयोगी सिद्ध होंगी। उन्होंने बताया कि हवाई सेवाओं के विस्तार से यात्रियों की आवाजाही तेज, सुरक्षित और सुगम होगी।

    देहरादून-पंतनगर विमान सेवा की भी तैयारी

    सोनिका ने यह भी बताया कि राज्य सरकार देहरादून और पंतनगर के बीच 19 सीटर विमान सेवा शुरू करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। यह सेवा कुमाऊं और गढ़वाल के बीच की दूरी को कम करेगी और राज्य के आंतरिक संपर्क को और मजबूत बनाएगी। इस सेवा के शुरू होने से व्यापार, शिक्षा और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में भी लोगों को सुविधा मिलेगी।

    चारधाम यात्रा को मिलेगा बड़ा फायदा

    गौरतलब है कि चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में हवाई सेवाओं का यह विस्तार यात्रा को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाएगा। हेली सेवाओं के माध्यम से तीर्थयात्री कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे यात्रा के दौरान भीड़भाड़ और समय की समस्या काफी हद तक कम होगी।

    राज्य सरकार की यह पहल हवाई संपर्क में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। भविष्य में अन्य दुर्गम क्षेत्रों को भी इस सेवा से जोड़े जाने की योजना है, जिससे उत्तराखंड की भौगोलिक बाधाएं अब विकास में रुकावट नहीं बनेंगी।

  • गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुले, शुरू हुई चारधाम यात्रा

    गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुले, शुरू हुई चारधाम यात्रा

    विश्वप्रसिद्ध गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, शुरू हुई छह माह की आध्यात्मिक यात्रा

    अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर बुधवार को उत्तराखंड स्थित विश्वप्रसिद्ध गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु विधिपूर्वक खोल दिए गए। अब आगामी छह माह तक श्रद्धालु मां गंगा और मां यमुना के पवित्र धामों में दर्शन और पूजन का लाभ उठा सकेंगे। यह धार्मिक आयोजन चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक भी है, जिसमें देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।

    बुधवार प्रातः 10 बजकर 30 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इस अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना की गई और सबसे पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न की गई, जो परंपरा के अनुसार सर्वोच्च सम्मान मानी जाती है। जैसे ही कपाट खुले, समूचा गंगोत्री धाम ‘जय मां गंगे’ के जयकारों से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालुओं की भावनाएं उमड़ पड़ीं।

    इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं गंगोत्री धाम पहुंचे और मां गंगा के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस धार्मिक आयोजन के साथ ही औपचारिक रूप से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का आना-जाना आरंभ हो गया है और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय उत्साह का माहौल बना हुआ है।

    देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंगोत्री धाम पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की विग्रह मूर्ति के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। गंगोत्री मंदिर परिसर को इस शुभ अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया था। मंदिर परिसर को करीब 15 कुंटल फूलों से अलंकृत किया गया, जिससे संपूर्ण धाम एक दिव्य और भव्य रूप में परिवर्तित हो गया था। अब श्रद्धालु निरंतर छह महीनों तक यहां आकर मां गंगा की आराधना कर सकेंगे और आध्यात्मिक सुख की अनुभूति प्राप्त कर सकेंगे।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: हर कोने पर रखी जा रही पैनी नजर

    गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे अतिमहत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों पर यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं, जिससे यात्रा निर्बाध और सुरक्षित रूप से संचालित हो सके। पूरे क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर आतंकवाद निरोधक दस्ते, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है।

    विशेष रूप से 10 स्थानों पर आतंकवाद निरोधक दस्ता लगातार तैनात रहेगा, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 10 कंपनियाँ पैरामिलिट्री फोर्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जो शीघ्र ही ड्यूटी पर आ जाएंगी।

    उत्तराखंड पीएसी की 17 कंपनियाँ पहले ही चारधाम यात्रा के दौरान तैनात कर दी गई हैं। इन कंपनियों के साथ-साथ कुल 6,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती भी यात्रा मार्गों पर की गई है। इसके अतिरिक्त 65 प्रमुख स्थानों पर एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिवादन बल) की टीमें तैनात की गई हैं, जो किसी भी प्राकृतिक आपदा या आकस्मिक घटना से निपटने के लिए हर समय तैयार रहेंगी।

    पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जा रही है। ड्रोन के जरिये पूरे रूट की हवाई निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए 2,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी फीड अलग-अलग क्षेत्रों के कंट्रोल रूम में निरंतर प्राप्त हो रही है। यह व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ यात्रा की सहजता और निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करेगी।

    गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का श्रीगणेश हो चुका है और अब छह माह तक देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु इस पुण्य यात्रा में भाग लेकर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करेंगे।

  • केदारनाथ धाम में अब नहीं लगेगी लंबी कतार, दर्शन के लिए नई टोकन व्यवस्था लागू

    केदारनाथ धाम में अब नहीं लगेगी लंबी कतार, दर्शन के लिए नई टोकन व्यवस्था लागू

    केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए अब लंबी कतारें नहीं, प्रशासन ने नई व्यवस्था की शुरुआत, जानें नए नियम

    2025 के केदारनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं को अब मंदिर में दर्शन करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। प्रशासन ने एक नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत श्रद्धालु अब जल्द ही दर्शन कर सकेंगे। इस वर्ष यात्रा के दौरान दर्शन के लिए टोकन व्यवस्था शुरू की गई है, जो इस यात्रा को पहले से कहीं अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाएगी। पहले जहाँ श्रद्धालुओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था, अब उन्हें केवल एक घंटे के भीतर दर्शन हो सकेंगे।

    इसके अलावा, केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को भी और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रत्येक 50 मीटर की दूरी पर पर्यावरण मित्रों को तैनात किया जाएगा, जो न केवल मार्ग की स्वच्छता बनाए रखेंगे, बल्कि यात्रियों की सहायता भी करेंगे। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।

    रुद्रप्रयाग में यात्रा की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी सौरभ गहरवार ने यह घोषणा की और कहा कि इस वर्ष के यात्रा पैकेज के तहत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विशेष रूप से चारधाम पैकेज के यात्रियों को इन नई सुविधाओं का पूरा लाभ मिलेगा।

    टोकन व्यवस्था और दर्शन में सहजता

    इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में दर्शन के लिए टोकन व्यवस्था को लागू किया गया है, जो कि श्रद्धालुओं के लिए एक बड़े सुधार के रूप में सामने आया है। पहले जहां तीर्थयात्रियों को तीन से चार घंटे तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता था, वहीं अब इस व्यवस्था के तहत एक घंटे में दर्शन सुनिश्चित किए जाएंगे। संगम ब्रिज के पास टोकन काउंटर लगाए जा रहे हैं, जहाँ से श्रद्धालु टोकन लेकर निर्धारित समय पर दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे।

    स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा

    किसी भी तीर्थ यात्रा में सबसे अहम चीज़ों में से एक स्वच्छता और सुरक्षा होती है, और प्रशासन ने इस बार इन दोनों क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है। जिलाधिकारी ने कहा कि यात्रा मार्ग पर रात के समय पर्याप्त रोशनी, अलाव और गर्म पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, सभी पड़ावों पर सफाई व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं।

    यात्रा मार्ग पर ‘पर्यटन मित्रों’ की तैनाती की जाएगी, जो न केवल श्रद्धालुओं की मदद करेंगे, बल्कि स्वच्छता व्यवस्था में भी सहयोग करेंगे। इन पर्यावरण मित्रों की जिम्मेदारी होगी कि वे यात्रा मार्ग को साफ और सुव्यवस्थित बनाए रखें, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न हो। इसके अलावा, प्रत्येक घोड़े और खच्चर के साथ हाकर्स की तैनाती की जाएगी, ताकि पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर निगरानी रखी जा सके।

    यात्रा मार्ग पर बेहतर यातायात प्रबंधन

    एसपी अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बताया कि यात्रा के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए एक डाइवर्जन प्लान तैयार किया गया है। इस योजना के तहत, विभिन्न मार्गों को नियंत्रित किया जाएगा ताकि अधिकतम श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें और किसी प्रकार की भीड़-भाड़ न हो। इसके अलावा, स्वच्छता व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए रिसाइकल संस्था के सहयोग से कूड़े के निस्तारण की एक प्रभावी योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत, मंदिर परिसर और यात्रा मार्ग पर कचरा निस्तारण के लिए विशेष वाहन लगाए जाएंगे, ताकि सफाई सुनिश्चित की जा सके।

    इस वर्ष, केदारनाथ धाम में 50 नए शौचालयों का निर्माण किया गया है, जो लगभग पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं। इन शौचालयों की तैनाती यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय सुविधाएं मिल सकें। साथ ही, सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से मंदिर परिसर और पैदल मार्ग पर कुल 550 पर्यावरण मित्रों की तैनाती की जाएगी, जो यात्रा मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखने में मदद करेंगे।

    यात्रा के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा के इंतजाम

    प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा को ध्यान में रखते हुए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी सौरभ गहरवार ने कहा कि सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे यात्रा के मार्ग पर किसी भी प्रकार की परेशानी न आने दें और यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सबसे अधिक सुविधा और सुरक्षा मिले।

    इस पूरी व्यवस्था में कई और विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं, जो यात्रा के दौरान प्रशासनिक स्तर पर इन सभी सुविधाओं को सुनिश्चित करेंगे। इन कदमों से केदारनाथ यात्रा को और भी सुगम, सुरक्षित और सुखद बनाने की योजना बनाई गई है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी यात्रा पूरी कर सकें।

  • चारधाम यात्रा 2025: उत्तराखंड में अभूतपूर्व सुरक्षा, पहली बार ATS और BDS की तैनाती

    चारधाम यात्रा 2025: उत्तराखंड में अभूतपूर्व सुरक्षा, पहली बार ATS और BDS की तैनाती

    चारधाम यात्रा 2025 के लिए हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था लागू
    ATS, BDS, ड्रोन, सीसीटीवी और 6000 से अधिक जवानों की तैनाती; SDRF की 58 टीमें भी अलर्ट पर

    उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2025 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बार अभूतपूर्व और अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। उत्तराखंड पुलिस ने यात्रा मार्गों और चारों धामों—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—में व्यापक पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ तकनीकी निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया है। इस बार न केवल बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है, बल्कि आतंकवाद रोधी दस्ता (ATS) और बम निरोधक दस्ता (BDS) को भी पहली बार चारधाम यात्रा की सुरक्षा में लगाया गया है। यह निर्णय भीड़भाड़, आपदा की संभावना और किसी भी आतंकी खतरे को देखते हुए लिया गया है।

    प्रदेशभर से लगभग 6000 पुलिसकर्मियों को यात्रा मार्गों और धाम परिसरों में तैनात किया गया है। इसमें 10 एडिशनल एसपी, 28 सर्कल ऑफिसर (सीओ), 64 इंस्पेक्टर, 387 सब-इंस्पेक्टर और एडिशनल सब-इंस्पेक्टर, 624 हेड कांस्टेबल और 791 कांस्टेबल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, प्रदेश सशस्त्र बल (PAC) की 31 सब यूनिट, 1452 होमगार्ड, 919 पीआरडी जवान, तथा अग्निशमन सेवा की 30 यूनिट्स और एक सब यूनिट को भी यात्रा मार्गों पर तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए छह कंपनियों की अर्धसैनिक बलों को भी संवेदनशील क्षेत्रों और होल्टिंग प्वाइंट्स पर तैनात किया गया है।

    डिजिटल निगरानी के क्षेत्र में इस बार उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग और धाम परिसरों में कुल 624 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से यात्रा की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इन कैमरों को सभी प्रमुख जिलों में समुचित रूप से वितरित किया गया है। देहरादून में 107, हरिद्वार में 85, टिहरी में 102, पौड़ी में 44, रुद्रप्रयाग में 120 (जिसमें 5 धाम परिसर में), चमोली में 95 (16 धाम परिसर में), और उत्तरकाशी जिले में 71 कैमरे लगाए गए हैं—जिसमें गंगोत्री और यमुनोत्री के धाम क्षेत्रों में 24 और 12 कैमरे शामिल हैं। इसके अलावा, ड्रोन कैमरों का भी उपयोग किया जा रहा है, जो भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति में निगरानी के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

    चारधाम यात्रा मार्गों की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की 58 टीमें भी विभिन्न स्थानों पर तैनात की गई हैं। इन टीमों को आपात स्थिति में तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित और सुसज्जित किया गया है। साथ ही, हरिद्वार, ऋषिकेश, देवप्रयाग और श्रीनगर जैसे जलस्रोतों वाले स्थानों पर जल पुलिस और गोताखोरों की विशेष टीमें भी तैनात की गई हैं। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT) भी संवेदनशील स्थानों पर अलर्ट मोड पर तैनात की गई हैं।

    चारधाम यात्रा के दौरान बार-बार सामने आने वाली यातायात की समस्या और जाम की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस विभाग को विशेष निर्देश दिए गए हैं। गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) राजीव स्वरूप ने आदेश जारी किए हैं कि किसी भी परिस्थिति में अति आवश्यक सेवाएं जैसे एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े अन्य वाहन बाधित न हों। यात्रा मार्ग पर तैनात पुलिस बल को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर मार्ग प्रदान किया जाए।

    चारधाम यात्रा 2025 की यह व्यापक सुरक्षा व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और आपदा प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की तत्परता को दर्शाती है। यह पहली बार है जब इस स्तर की टेक्नोलॉजी, जनशक्ति और विशिष्ट बलों का समन्वित प्रयोग एक धार्मिक यात्रा की सुरक्षा में किया गया है। उत्तराखंड पुलिस का यह कदम निश्चित रूप से श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा अनुभव प्रदान करेगा।

  • चारधाम यात्रा से पहले धामी सरकार का बड़ा कदम: उत्तराखंड में 45 विशेषज्ञ डॉक्टर नियुक्त

    चारधाम यात्रा से पहले धामी सरकार का बड़ा कदम: उत्तराखंड में 45 विशेषज्ञ डॉक्टर नियुक्त

    चारधाम यात्रा से पहले धामी सरकार का फैसला: उत्तराखंड में 45 विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात

    एनेस्थीसिया, सर्जरी, स्त्री रोग, बाल रोग समेत विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ होंगे तैनात; पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं होंगी सशक्त, यात्रियों और स्थानीय जनता को मिलेगा लाभ

    देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और उन्नत बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में 45 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। यह निर्णय राज्य के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने और विशेष रूप से चारधाम यात्रा के दौरान बढ़े हुए श्रद्धालुओं के दबाव को संभालने के उद्देश्य से लिया गया है।

    आदेश संख्या 293157/2025 के तहत नियुक्त किए गए विशेषज्ञ डॉक्टरों को जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएँ देने के लिए कहा गया है। इनमें प्रमुख विशेषज्ञताओं में सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग (OBS & Gynae), एनेस्थीसिया, बाल रोग (Pediatrics), नेत्र रोग (Ophthalmology), कान-नाक-गला (ENT), फॉरेंसिक मेडिसिन और जनरल मेडिसिन के डॉक्टर शामिल हैं।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। इन विशेषज्ञ चिकित्सकों को विभाग द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट (PG) प्रशिक्षण के बाद तैनात किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त हो।

    चारधाम यात्रा के मद्देनजर, जब लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड में आते हैं, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की चिकित्सा आपातकाल स्थिति में स्थानीय स्तर पर त्वरित और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकें। इससे न केवल यात्रियों को लाभ होगा, बल्कि राज्य की स्थानीय जनता भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेगी।

    पर्वतीय जिलों में सुधार: स्वास्थ्य सचिव ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों को विशेष रूप से बड़ी राहत मिलेगी। अब तक, इन क्षेत्रों में कई अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं का अभाव था, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब सर्जरी, एनेस्थीसिया, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग और नेत्र रोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। इससे खासकर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

    विशेषज्ञताओं के अनुसार नियुक्ति का विवरण इस प्रकार है:

    1. एनेस्थीसिया (Anaesthesiology): 12 डॉक्टर

    2. सर्जरी (General Surgery): 5 डॉक्टर

    3. बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrics): 4 डॉक्टर

    4. स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (OBS & Gynae): 4 डॉक्टर

    5. कान-नाक-गला (ENT): 5 डॉक्टर

    6. नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmology): 2 डॉक्टर

    7. फॉरेंसिक मेडिसिन (MD Forensic Medicine): 1 डॉक्टर

    8. जनरल मेडिसिन व अन्य: 10 डॉक्टर

    इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर और हरिद्वार जैसे पहाड़ी जिलों में की गई है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की मांग सबसे ज्यादा होती है। इसके अलावा, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन, कार्डियक इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर के लिए भी अतिरिक्त प्रबंध किए गए हैं, ताकि इन इलाकों में आने वाली चिकित्सा आपातकाल की स्थिति से निपटा जा सके।

    स्वास्थ्य विभाग ने सभी नियुक्त चिकित्सकों को शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में उठाया गया यह कदम राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह विशेष रूप से यात्रा काल के दौरान चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने और दूरदराज इलाकों में स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने के लिए कारगर साबित होगा।

  • पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा कड़ी, चारधाम में पहली बार पैरा मिलिट्री तैनात

    पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा कड़ी, चारधाम में पहली बार पैरा मिलिट्री तैनात

    पहलगाम हमले के बाद चारधाम यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अर्द्धसैनिक बलों की होगी तैनाती

    चारधाम यात्रा को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टरों में बांटकर की जा रही है सुरक्षा व्यवस्था; केंद्र से अर्द्धसैनिक बलों की 10 कंपनियों की मांगी गई है तैनाती

    चारधाम यात्रा 2025 में इस साल ऐतिहासिक बदलाव के साथ आयोजित की जा रही है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को एक नए स्तर तक पहुंचाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। विशेषकर हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, यात्रा और पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर एक सख्त रणनीति अपनाई जा रही है।

    सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस साल पहली बार पूरे चारधाम क्षेत्र को सुपर जोन, जोन और सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत पूरे क्षेत्र को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, ताकि किसी भी घटना या आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। प्रत्येक सेक्टर में पुलिसकर्मियों को 24 घंटे गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रयासों के तहत, चारधाम यात्रा के दौरान छह हजार से अधिक पुलिसकर्मी, एसडीआरएफ और पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है, जो पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखेंगे।

    इस सुरक्षा कड़ी में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती भी की जाएगी, जो पिछले कुछ दिनों में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर जरूरी मानी जा रही है। केंद्र सरकार से 10 कंपनियों के अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की गई है, जिनमें से छह कंपनियां गढ़वाल क्षेत्र और चार कंपनियां कुमाऊं क्षेत्र के धार्मिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों में तैनात की जाएंगी। सरकार की ओर से इन बलों का जल्द आवंटन किए जाने की संभावना है।

    सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए, इस साल पहली बार देहरादून में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, नौ स्थानों पर एएसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की समस्या या परेशानी का तत्काल समाधान किया जा सके। इन उपायों के तहत, खुफिया तंत्र को भी 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

    डीजीपी दीपम सेठ ने इस संबंध में हाल ही में सभी जिलों के पुलिस प्रभारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें इस बात को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि सभी सुरक्षा उपाय सख्ती से लागू किए जाएं। इसी संदर्भ में जिलों में सत्यापन अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को पहले ही पहचाना जा सके।

    इस वर्ष चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की यह पहली बार होगी, जो यात्रा के सुरक्षा इंतजामों को एक नई दिशा देगा और श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बनाए रखेगा।

    डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी कानून व्यवस्था

  • चारधाम यात्रा पर बिना रजिस्ट्रेशन नहीं मिलेगी इंट्री, 4 स्थानों पर लगेगी जांच की चौकी

    चारधाम यात्रा पर बिना रजिस्ट्रेशन नहीं मिलेगी इंट्री, 4 स्थानों पर लगेगी जांच की चौकी

    चारधाम यात्रा के लिए सख्त नियम: बिना पंजीकरण नहीं मिलेगी एंट्री, चार स्थानों पर होगी कड़ी चेकिंग

    सोनप्रयाग, पांडुकेश्वर, हिना और बड़कोट में पंजीकरण जांच अनिवार्य; 624 सीसीटीवी कैमरों से यात्रा मार्ग की निगरानी
    सरकार ने बढ़ाई निगरानी, 624 सीसीटीवी कैमरों से कंट्रोल रूम से होगी सीधी नजर

    चारधाम यात्रा 2025 को लेकर उत्तराखंड सरकार ने इस बार सुरक्षा और व्यवस्थाओं को और अधिक सख्त बना दिया है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यात्रा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है। अब बिना पंजीकरण के किसी भी तीर्थयात्री को चारधाम यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नियम केवल चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लागू होगा, अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वालों के लिए पंजीकरण जरूरी नहीं है।

    यात्रा मार्ग पर पंजीकरण की जांच चार प्रमुख स्थानों—सोनप्रयाग, पांडुकेश्वर, हिना और बड़कोट—पर की जाएगी। इन स्थानों पर प्रशासनिक टीमें तैनात रहेंगी जो यह सुनिश्चित करेंगी कि हर तीर्थयात्री के पास वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र हो। यदि किसी के पास यह दस्तावेज नहीं पाया गया, तो उसे आगे यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे पंजीकरण की प्रक्रिया यात्रा से पहले ही पूरी कर लें ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    पंजीकरण की सुविधा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराई गई है। ऑनलाइन पंजीकरण के लिए उत्तराखंड सरकार ने विशेष पोर्टल और मोबाइल एप तैयार किए हैं, जबकि ऑफलाइन पंजीकरण की व्यवस्था राज्य के कुछ अधिकृत केंद्रों पर की गई है। पंजीकरण के दौरान यात्रियों को अपना नाम, पहचान पत्र, यात्रा की तिथि और संपर्क विवरण देना अनिवार्य होगा।

    इस बार यात्रा मार्ग की सुरक्षा और निगरानी के लिए तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया गया है। चारधाम मार्गों और धामों में कुल 624 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक 120 कैमरे रुद्रप्रयाग जिले में लगाए गए हैं। इन कैमरों के माध्यम से पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी सीधे कंट्रोल रूम से की जा रही है। इससे किसी भी आपात स्थिति या अव्यवस्था की तुरंत जानकारी प्राप्त की जा सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव हो पाएगी।

    मुख्यमंत्री सचिव और गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने स्पष्ट किया है कि यह पंजीकरण व्यवस्था तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और यात्रा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। इसके जरिए न सिर्फ यात्रियों की संख्या पर नियंत्रण रखा जा सकेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी समय पर सहायता उपलब्ध कराना संभव होगा।

    सरकार की यह पहल यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तीर्थयात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले पंजीकरण अवश्य कराएं और यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि चारधाम यात्रा का अनुभव सुखद और सुरक्षित बना रहे।