Category: पर्यटन

  • चारधाम यात्रा: उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा दल रवाना

    चारधाम यात्रा: उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा दल रवाना

     चारधाम यात्राओं में लगेंगे मेडिकल कैंप, तीर्थयात्रियों को मिलेगी त्वरित राहत

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज की उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा का फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर उन्होंने संजीवनी किट का भी शुभारम्भ किया।

    मुख्यमंत्री ने सिक्स सिग्मा की टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सेवा चारधाम यात्रा के सफल संचालन में सहायक सिद्ध होगी।

    चारधाम यात्रा
    आदि कैलाश और चारधाम यात्राओं में लगेगा मेडिकल कैंप

    चारधाम यात्रा और आदि कैलाश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज द्वारा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में विशेष चिकित्सा कैंप स्थापित किए जाएंगे। यह कैंप आदि कैलाश यात्रा, केदारनाथ यात्रा, बद्रीनाथ यात्रा, मध्यमहेश्वर यात्रा, तुंगनाथ यात्रा और रुद्रनाथ यात्रा के मार्गों पर लगाए जाएंगे, ताकि कठिन भूगोल और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तीर्थयात्रियों को तत्काल और प्रभावी चिकित्सा सहायता मिल सके।

    इन चिकित्सा कैंपों में संजीवनी किट की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, आवश्यक जीवनरक्षक दवाइयाँ तथा पोर्टेबल आईसीयू उपकरण जैसे आधुनिक चिकित्सा संसाधन शामिल किए गए हैं। संजीवनी किट का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में तीर्थयात्रियों को तुरंत राहत प्रदान करना और उनकी जान बचाने में सहायक बनना है।

    रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस उच्च हिमालयी चिकित्सा सेवा का फ्लैग ऑफ किया गया और संजीवनी किट का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। इस अवसर पर विधायक खजान दास, सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज के सीईओ पुनीत मित्तल, डॉ. अनिता भारद्वाज, डॉ. परवेज, डॉ. भारत शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की और इसे चारधाम यात्रा को सुरक्षित एवं सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

  • मुख्य सचिव ने केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं का किया व्यापक निरीक्षण

    मुख्य सचिव ने केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं का किया व्यापक निरीक्षण

    केदारनाथ : गर्म पानी, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष फोकस

    केदारनाथ। आगामी चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियों का जायजा लेने के लिए उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन शनिवार को केदारनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने वहां पहुंचकर यात्रा मार्ग, यात्रियों की सुविधाओं और सुरक्षा प्रबंधों का गहन स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति का भी उन्होंने बारीकी से अवलोकन किया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

    मुख्य सचिव ने मंदाकिनी और सरस्वती नदियों पर बने बेली ब्रिज का निरीक्षण करते हुए उनके तकनीकी और संरचनात्मक मजबूती की जांच की। इसके बाद उन्होंने आस्था पथ पर बने रेन शेल्टरों का दौरा किया और निर्देश दिए कि इन स्थानों पर एलईडी साइनेज लगाए जाएं, जिससे यात्रियों को शौचालय, चिकित्सा सहायता, विश्राम स्थलों और अन्य आवश्यक सेवाओं की जानकारी सरलता से उपलब्ध हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि साइनेज स्पष्ट और यात्रियों के लिए सहज बोधगम्य होने चाहिए।

    विशेष तौर पर, उन्होंने ठंडे मौसम को ध्यान में रखते हुए आदेश दिए कि कतार में खड़े यात्रियों को गर्म पानी की सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने मंदिर परिसर से लेकर सरस्वती नदी तक की स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा की और शौचालयों की स्थिति का भी गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वच्छता मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) को निर्देशित किया गया कि यात्रा मार्ग में स्थित सभी कॉटेजों की समय पर मरम्मत, रंगाई-पुताई और साफ-सफाई का कार्य सुनिश्चित करें। यात्रियों को सुविधाजनक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश भी दिए गए।

    निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने रुद्र प्वाइंट और घोड़ा पड़ाव जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भीड़ प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, चिकित्सा सेवाओं, विश्राम स्थलों और स्वच्छता व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और हर स्तर पर सुगम यात्रा अनुभव प्रदान किया जाए।

    जिलाधिकारी सौरभ गहरवार ने निरीक्षण के दौरान जानकारी दी कि चारधाम यात्रा से जुड़े सभी विभाग परस्पर समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं और जो कार्य शेष हैं, उन्हें भी यात्रा आरंभ होने से पूर्व पूर्ण कर लिया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि पैदल मार्ग, ठहरने की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, संचार सुविधाएं, विद्युत आपूर्ति और आपातकालीन व्यवस्थाएं पूरी तरह से दुरुस्त कर दी गई हैं।

    पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने यात्रा की सुरक्षा तैयारियों के संबंध में बताया कि सुरक्षा के सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। यात्रा मार्ग पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और उनकी नियमित निगरानी के आदेश भी जारी किए गए हैं। इसके साथ ही, एक विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी स्थान पर यातायात बाधित न हो और जाम की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने यह भी बताया कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें पूरी सतर्कता के साथ यात्रा मार्ग पर तैनात रहेंगी, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    मुख्य सचिव ने केदारनाथ यात्रा की तैयारियों पर संतोष जताते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी दिनों में भी लगातार निरीक्षण और निगरानी जारी रखी जाए, ताकि यात्रा अवधि के दौरान कोई समस्या उत्पन्न न हो और श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान किया जा सके।

  • उत्तराखंड में बनेगा नया रोपवे, दूरी चार किलोमीटर से अधिक

    उत्तराखंड में बनेगा नया रोपवे, दूरी चार किलोमीटर से अधिक

    उत्तराखंड में एक और रोपवे बनाने की तैयारी, तीर्थयात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत — 4.5 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा नीलकंठ रोपवे

    उत्तराखंड में तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को और अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से एक और रोपवे निर्माण की तैयारी जोरों पर है। आने वाले समय में नीलकंठ महादेव मंदिर की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग पर चलने की कठिनाइयों से काफी हद तक राहत मिलेगी। सरकार और प्रशासन मिलकर इस बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।

    इसी क्रम में, जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल डॉ. आशीष चौहान ने एनआईसी कक्ष में नीलकंठ रोपवे परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीरता से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना के काम को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए और किसी भी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने विशेष जोर दिया कि भूमि से संबंधित दस्तावेजों में मौजूद खसरा संख्याओं की त्रुटियों को शीघ्रता से सुधारा जाए ताकि आगे की कार्यवाही में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

    डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि भूमि अभिलेखों का शुद्धीकरण बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रोपवे परियोजना के लिए बुनियादी कार्यों में से एक है। उन्होंने तहसीलदार यमकेश्वर को निर्देश दिए कि सभी खसरा नंबरों का गहन परीक्षण करें और एक त्रुटिरहित और अद्यतन विवरण तैयार करें, जिसे समय पर शासन को भेजा जा सके। इसके अलावा, जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि खसरा सुधार का कार्य समयसीमा के भीतर पूर्ण होना चाहिए ताकि परियोजना की गति में कोई अवरोध न आए।

    जिलाधिकारी ने आगे जानकारी दी कि प्रस्तावित नीलकंठ रोपवे लगभग 4.5 किलोमीटर लंबा होगा और इसके निर्माण पर लगभग 450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। उन्होंने बताया कि रोपवे बनने से न केवल तीर्थयात्रियों को यात्रा में सुविधा होगी, बल्कि इससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। रोपवे के माध्यम से यात्रा का समय भी कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित तथा आरामदायक होगी।

    बैठक में जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी को भी विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नीलकंठ क्षेत्र में जहां-जहां अतिक्रमण हुआ है, उसे शीघ्र चिन्हित किया जाए और संबंधित कार्यवाही कर अवैध कब्जों को हटाया जाए। इस कार्य को समय पर पूरा करने के लिए उपजिलाधिकारी यमकेश्वर अनिल चन्याल और तहसीलदार साक्षी उपाध्याय को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में उपजिलाधिकारी यमकेश्वर अनिल चन्याल, तहसीलदार साक्षी उपाध्याय समेत परियोजना से जुड़े अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने मिलकर परियोजना को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई।

    प्रशासन द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों से स्पष्ट है कि भविष्य में नीलकंठ महादेव मंदिर की यात्रा करना पहले से कहीं अधिक सुगम और आनंददायक होगा। इस रोपवे के निर्माण से उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को भी एक नई गति मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक दिशा में लाभ पहुंचेगा।

  • बदरी-केदार धाम के मई के ऑनलाइन पंजीकरण फुल, अब ये हैं विकल्प

    बदरी-केदार धाम के मई के ऑनलाइन पंजीकरण फुल, अब ये हैं विकल्प

    बदरी-केदार धाम के लिए मई के ऑनलाइन पंजीकरण स्लॉट फुल, अब आगे के लिए है ये विकल्प

    उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। यही वजह है कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के लिए मई माह में ऑनलाइन पंजीकरण के सभी स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं। अब जो तीर्थयात्री इस पावन यात्रा में मई माह के दौरान शामिल होना चाहते हैं, उनके पास सीमित विकल्प बचे हैं।

    बदरी

    प्रदेश सरकार ने तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या और मांग को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन पंजीकरण की संख्या में 10 प्रतिशत की वृद्धि की है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम इस बात का संकेत है कि चारधाम यात्रा को लेकर इस बार श्रद्धालुओं में बेहद खास उत्साह है। इसके अलावा, जिन श्रद्धालुओं को अभी तक ऑनलाइन स्लॉट नहीं मिले हैं, उनके लिए राहत की खबर यह है कि उनके पास ऑफलाइन पंजीकरण का विकल्प मौजूद है।

    ऑफलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 28 अप्रैल से शुरू होगी। इस दिन सुबह 7 बजे से पंजीकरण काउंटर खोले जाएंगे, जहां तीर्थयात्री अपने दस्तावेजों के साथ जाकर पंजीकरण करवा सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए खासतौर पर महत्वपूर्ण होगी जो तकनीकी कारणों या स्लॉट की अनुपलब्धता की वजह से ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर पाए।

    चारधाम यात्रा के लिए अब तक कुल मिलाकर 20 लाख से अधिक तीर्थयात्री पंजीकरण कर चुके हैं। इनमें सबसे अधिक पंजीकरण केदारनाथ धाम के लिए हुए हैं, जिनकी संख्या 6.82 लाख तक पहुंच गई है। इसके अलावा बदरीनाथ धाम के लिए 6.01 लाख श्रद्धालु पंजीकरण करवा चुके हैं। इसी तरह गंगोत्री के लिए 3.55 लाख, यमुनोत्री के लिए 3.24 लाख और हेमकुंड साहिब के लिए 34,633 यात्रियों ने पंजीकरण कराया है।

    उल्लेखनीय है कि केदारनाथ धाम के कपाट आगामी 2 मई को और बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इन दोनों धामों की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है, और यही कारण है कि इनके लिए मई महीने के सारे ऑनलाइन पंजीकरण स्लॉट पहले ही भर चुके हैं।

    इस बार की यात्रा व्यवस्था में आधार आधारित पंजीकरण प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है। लगभग 60 प्रतिशत पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से आधार के जरिए किए जा रहे हैं, जिससे व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाया जा सके।

    प्रदेश सरकार का कहना है कि वह चारधाम यात्रा में शामिल होने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री की सुविधा, सुरक्षा और अनुभव को सर्वोपरि मानते हुए संपूर्ण यात्रा व्यवस्था को सुनियोजित और व्यवस्थित बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी उद्देश्य से ऑनलाइन पंजीकरण में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है ताकि अधिक से अधिक तीर्थयात्री इस पवित्र यात्रा में भाग ले सकें।

    साथ ही, उन तीर्थयात्रियों के लिए भी विकल्प उपलब्ध कराया गया है जो किसी कारणवश ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण नहीं कर सके हैं। उनके लिए ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे वे भी बिना किसी रुकावट के यात्रा में सम्मिलित हो सकें। इसके अतिरिक्त, यात्रा मार्गों पर आवश्यक व्यवस्थाओं जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, ट्रैफिक प्रबंधन, आपातकालीन सहायता और भोजन-आवास की सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि संपूर्ण यात्रा अनुभव श्रद्धालुओं के लिए संतोषजनक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हो।

    प्रदेश सरकार ने तीर्थयात्रियों से यह भी अनुरोध किया है कि वे चारधाम यात्रा पर निकलने से पहले अनिवार्य रूप से अपना पंजीकरण पूर्ण कर लें। साथ ही, यात्रा के लिए निर्धारित समय और प्रशासन द्वारा जारी की गई मार्गदर्शिका व निर्देशों का पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ पालन करें। ऐसा करने से न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यात्रा में शामिल अन्य श्रद्धालुओं को भी कोई असुविधा नहीं होगी।

    इस प्रकार, सरकार की ओर से यह अपील की गई है कि श्रद्धालु अपनी यात्रा को सुगम, सुरक्षित और मंगलमय बनाने के लिए समुचित योजना और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप यात्रा करें, जिससे यह पावन अवसर उनके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बन सके।

  • चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सीमा में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी

    चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सीमा में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी

    चारधाम यात्रा :अब 75 प्रतिशत ऑनलाइन पंजीकरण होंगे
    यात्रा मार्गों पर नये पंजीकरण केन्द्र भी खुलेंगे

    देहरादून। गढवाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय ने उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग एवं चमोली के होटल व्यवसायियों (Stakeholder) के सुझाव लिए।

    देहरादून स्थित आयुक्त कैंप कार्यालय में आयोजित बैठक में होटल व्यवसायियों ने चारधाम यात्रा को लेकर अपनी समस्या एवं सुझाव रखे।

    चारधाम

    आयुक्त गढ़वाल के समक्ष रखते हुए मुख्य रूप से ऑनलाइन पंजीकरण की सीमा को बढाए जाने का आग्रह किया गया। इस पर आयुक्त ने अवगत कराया कि गत 5 फरवरी को आयोजित बैठक में सभी हितधारकों की मांग के अनुरूप इस वर्ष चारधाम यात्रा के लिए 60 प्रतिशत ऑनलाइन और 40 प्रतिशत ऑफलाइन पंजीकरण की सीमा तय की गयी थी।

    इस संबंध में विचार-विमर्श के बाद जनपदों के जिला पर्यटन अधिकारियों के सुझाव और होटल मालिकों के आग्रह पर पूर्व के निर्णय में आंशिक परिर्वतन करते हुए अब ऑनलाइन पंजीकरण की सीमा को 15 प्रतिशत बढ़ा कर 75 प्रतिशत करने के निर्देश दिए।

    चारधाम यात्रा में श्रद्वालुओं की भीड़ को देखते हुए होटल व्यवसायियांे की मांग थी कि प्रत्येक धाम हेतु चारधाम यात्रा मार्गाे पर एक-एक पंजीकरण के काउण्टर स्थापित जाये।
    होटल संगठन की इस मांग को भी स्वीकार करते हुए चारधाम यात्रा मार्गाे पर कुछ और पंजीकरण केन्द्र खोलने के निर्देश दिये ।
    जिसमें बद्रीनाथ धाम हेतु गौचर में, गंगोत्री धाम हेतु हीना व उत्तरकाशी में, यमुनोत्री धाम हेतु दोबाटा व डामटा में तथा केदारनाथ धाम हेतु गुप्तकाशी स्थित जी.एम.वी.एन. गेस्ट हाउस में पंजीकरण काउण्टर खोले जाने हेतु सहमति दी गयी।

    आयुक्त गढ़वाल ने कहा कि यात्रा को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुखद बनाने के लिए सभी हितधारकों को सम्मिलित प्रयास करने होंगे।
    चारधाम होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश मेहता ने ज्ञापन भी दिया।
    बैठक में उपस्थित सभी होटल व्यासायियों ने आगामी यात्रा को सकुशल सम्पन्न कराने का आश्वासन दिया तथा सुझावों को अमल में लाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

    समीक्षा बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढवाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, ए.डी.एम उत्तरकाशी पी. एल. शाह, ए.डी.एम रूद्रप्रयाग एस.एस. राणा, उप जिलाधिकारी पोखरी अबरार अहमद, जिला पर्यटन अधिकारी देहरादून सीमा नौटियाल, जिला पर्यटन अधिकारी चमोली राहुल चौबे, जिला पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी कमल किशोर जोशी, विशेषकार्याधिकारी चारधाम यात्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन ऋषिकेश प्रजापति नौटियाल, इथिक्स कम्पनी के गजेन्द्र चौहान, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी शैलेन्द्र सिंह मटूड़ा, अध्यक्ष यमुना घाटी होटल एसोसिएशन सोबन सिंह राणा, अध्यक्ष श्री केदार धाम होटल एसोसिएशन प्रेमदत्त गोस्वामी, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन गंगोत्री अनिल नौटियाल सहित जनपद उत्तरकाशी से 12 सदस्य रूद्रप्रयाग से 11 एवं चमोली से 6 होटल व्यवसायी उेपस्थित रहे।

  • गुच्चुपानी में उमड़ा सैलानियों का सैलाब, गढ़ी-कैंट में जाम

    गुच्चुपानी में उमड़ा सैलानियों का सैलाब, गढ़ी-कैंट में जाम

    देहरादून। गर्मी बढ़ते ही पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। रविवार को गुच्चुपानी में 7100 पर्यटक पहुंचने से गढ़ीकैंट तक जाम लग गया। सहस्रधारा और लच्छीवाला में भी पर्यटकों ने खूब मस्ती की। देहरादून जू को तीन लाख का राजस्व मिला। पर्यटन से व्यापारियों को अच्छा मुनाफा हुआ। पूरी खबर पढ़ें विस्‍तार से।

    गर्मी शुरू होते ही देहरादून के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगी है। खासतौर पर छुट्टी और सप्ताहांत में पर्यटकों की भारी भीड़ पहुंच रही है। जिससे पर्यटकों को जाम का सामना करना भी पड़ रहा है।
    रविवार को गुच्चुपानी में 7,100 पर्यटक पिकनिक मनाने पहुंचे और गढ़ीकैंट से लेकर गुच्चुपानी तक वाहनों का रेला लगा रहा है। पर्यटक वाहन रेंग–रेंगकर गुच्चुपानी के अंदर पहुंचे। इस दौरान आसपास के लोगों को भी जाम में फंसना पड़ा। शाम को पर्यटकों की भीड़ कम होने के बाद जाम पूरी तरह से खुला।

    ग्रीष्मकालीन पर्यटन का आगाज होने से शहर में इन दिनों भारी संख्या में पर्यटकों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया। रविवार को सहस्रधारा में करीब दो हजार, लच्छीवाला में 1,450 और गुच्चुपानी में 7,100 पर्यटक पहुंचे। सहस्रधारा और लच्छीवाला में पर्यटकों ने ट्यूब की मदद से जलस्रोतों में जलक्रीड़ा और अटखेलियां कर खूब मौज मस्ती की व सेल्फियां ली।

    पर्यटकों की भीड़ ने लगाए चार चांद

    हरे-भरे जंगल और जलस्रोतों के बीच मौजूद इन पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की भीड़ ने चार चांद लगा दिए। गुच्चुपानी में पर्यटक पानी के बीच से होकर लुटेरों की गुफाओं तक पहुंचे और रोमांच का लुत्फ उठाया। लच्छीवाला में पर्यटकों ने बाेटिंग के मजे लिए और बच्चों ने झूले का आनंद लिया। पर्यटकों ने पर्यटन स्थलों के समीप मौजूद स्ट्रीट फूड का भी स्वाद चखा

    देहरादून जू के खाते में पहुंचा तीन लाख का राजस्व

    रविवार को सहस्रधारा, गुच्चुपानी और लच्छीवाला नेचर पार्क के साथ मालसी स्थित देहरादून जू (चिड़ियाघर) में भी 3,800 पर्यटक पहुंचे। इससे एक ही दिन में जू को तीन लाख रुपये का राजस्व मिला।
    दून घाटी में शिवालिक पर्वतमाला के बीच मनमोहक दृश्यों के साथ स्थित जू में पर्यटकों ने गुलदार, मछली, मगरमच्छ, हिरन, मोर, खरगोश, कछुआ आदि जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियों को देखा और उनके बारे में जानकारी ली। जू में मौजूद कैक्टस और सेकुलेंट के वन भी आकर्षण का केंद्र रहे।

    व्यापारियों को हुआ मुनाफा

    पर्यटन स्थलों में मौजूद ट्यूब, चेंजिंग रूम, खाने-पीने के स्टाल और होटल व्यापारियों के व्यापार में अच्छा-खासा मुनाफा हुआ। अपने घर और प्लाट में वाहनों की पार्किंग कराने वाले लोगों ने भी कमायी की। सड़क किनारे अस्थायी रूप से खाने-पीने और खिलौने बेचने वाले कारोबारियों की भी कमायी हुई।

  • 25 मई को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट, तैयारियों के लिए घांघरिया पहुंची टीम

    25 मई को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट, तैयारियों के लिए घांघरिया पहुंची टीम

    हेमकुंड यात्रा की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, सेना के जवानों संग गुरुद्वारा प्रबंधन की टीम घांघरिया रवाना

    घांघरिया से आगे छह किमी तक जमी है बर्फ, मई में शुरू होगा हटाने का काम, 25 मई को खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट

    गोविंदघाट, चमोली: हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार को हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की टीम भारतीय सेना के जवानों के साथ घांघरिया के लिए रवाना हुई। यात्रा मार्ग का निरीक्षण करने के बाद यह टीम बुधवार को गोविंदघाट लौटेगी।

    गुरुद्वारा गोविंदघाट के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि यात्रा मार्ग का भौतिक निरीक्षण करने के लिए गुरुद्वारा के सेवादार और सेना के जवान संयुक्त रूप से घांघरिया तक पहुंच रहे हैं। निरीक्षण के बाद यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का कार्य शुरू होगा।

    उन्होंने बताया कि फिलहाल घांघरिया से आगे हेमकुंड साहिब की ओर लगभग छह किलोमीटर लंबे आस्था पथ पर मोटी बर्फ की परत जमी हुई है। मौसम और हालात को देखते हुए सेना के जवान मई माह की शुरुआत से बर्फ हटाने का कार्य आरंभ करेंगे, ताकि 25 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित समय पर खोले जा सकें।

    प्रबंधन कमेटी ने बताया कि यात्रा मार्ग को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए इस बार भी सेना और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया जाएगा। बर्फ हटाने, पुलों की मरम्मत, पेयजल, शौचालय, और स्वास्थ्य सुविधा जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं जल्द शुरू की जाएंगी।

    गौरतलब है कि हेमकुंड साहिब सिख समुदाय का एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यात्रा मार्ग में बर्फ जमा होने के कारण हर साल कपाट खुलने से पहले व्यापक तैयारी की जाती है। इस बार भी यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं।

  • चारधाम यात्रा की भव्य शुरुआत, कपाट खुलते ही हेलीकॉप्टर से होगी पुष्प वर्षा

    चारधाम यात्रा की भव्य शुरुआत, कपाट खुलते ही हेलीकॉप्टर से होगी पुष्प वर्षा

    चारधाम यात्रा का आगाज 30 अप्रैल से, हेलीकॉप्टर से होगी भव्य पुष्प वर्षा

    चारधाम यात्रा इस साल 30 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, और इसके साथ ही धामों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। खास बात यह है कि इस बार कपाट खुलने के समय हर धाम में हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी, जिससे यात्रा का आयोजन और भी भव्य और दिव्य बन जाएगा।

    चारधाम यात्रा का शुभारंभ अक्षय तृतीया के दिन, यानी 30 अप्रैल को होगा, जब गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को और बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

    भव्य कपाटोत्सव की तैयारी में पर्यटन विभाग

    चारधाम यात्रा के आयोजन को और भी यादगार और दिव्य बनाने के लिए उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार कपाटोत्सव में विशेष रूप से पुष्प वर्षा का आयोजन किया जा रहा है, जिसे हेलीकॉप्टर से धामों में फैलाया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धामों में श्रद्धालुओं का स्वागत फूलों की वर्षा से किया जाएगा।

    कपाट खुलने के समय धामों में होगी विशेष पूजा-अर्चना

    कपाट खुलने के समय हर धाम में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी और श्रद्धालु अपने श्रद्धा भाव से इन पवित्र स्थलों का दर्शन करेंगे। पर्यटन विभाग के सचिव सचिन कुर्वे ने विभागीय अधिकारियों और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण को पुष्प वर्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    16 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने किया पंजीकरण

    चारधाम यात्रा के लिए अब तक 16.81 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण कराया है। सबसे अधिक तीर्थयात्री केदारनाथ धाम के लिए पंजीकृत हुए हैं, जिनकी संख्या 5,71,813 है। इसके बाद बदरीनाथ धाम के लिए 5,03,991, गंगोत्री के लिए 3,00,907 और यमुनोत्री के लिए 2,78,085 पंजीकरण हुए हैं। यह दर्शाता है कि श्रद्धालुओं में इस साल चारधाम यात्रा के प्रति उत्साह चरम पर है।

    हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और सुरक्षा इंतजामों में सुधार

    चारधाम यात्रा के लिए सरकार ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी खास तैयारियां की हैं। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा के आयोजन को लेकर अधिकारियों ने उड़ान सुरक्षा और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस प्रयास से तीर्थयात्रियों का स्वागत और यात्रा की आधिकारिक शुरुआत और भी भव्य और पवित्र रूप में होगी।

    चारधाम यात्रा की यह शुरुआत सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्व के रूप में मनाई जाएगी, जो पूरे उत्तराखंड को आकर्षण का केंद्र बनाएगी।

  • बैसाखी पर शुभ घोषणा: 21 मई को खुलेंगे मदमहेश्वर और 2 मई को तुंगनाथ के कपाट

    बैसाखी पर शुभ घोषणा: 21 मई को खुलेंगे मदमहेश्वर और 2 मई को तुंगनाथ के कपाट

    बैसाखी पर्व पर तय हुई पंचकेदारों के कपाट खुलने की तिथियां – 21 मई को खुलेंगे मदमहेश्वर और 2 मई को तुंगनाथ के कपाट

    बैसाखी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। भगवान शिव के पंचकेदारों में शामिल द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथियों की घोषणा हो गई है।

    सोमवार को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद स्थित पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में भगवान मदमहेश्वर के कपाट 21 मई को खोलने की तिथि तय की गई। इसी तरह तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट 2 मई को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

    पंचांग गणना से हुई तिथि की घोषणा

    बैसाखी के दिन ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह 9 बजे से विशेष पूजन और अनुष्ठान प्रारंभ हुए। आचार्यगणों ने वेद मंत्रोच्चार और पंचांग गणना के आधार पर मदमहेश्वर के कपाट खुलने की शुभ तिथि और समय की घोषणा की। इसके पश्चात भगवान मदमहेश्वर की भोग मूर्तियों को पुष्प रथ पर विराजमान किया गया, जो ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए मुख्य धाम की ओर प्रस्थान करेंगी।

    वहीं, तुंगनाथ मंदिर की तिथि की घोषणा मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ में की गई, जो तुंगनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल है। पंचपुरोहितों द्वारा पंचांग गणना के आधार पर बताया गया कि भगवान तुंगनाथ के कपाट 2 मई को प्रातः काल श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाएंगे।

    चारधाम यात्रा से पहले पंचकेदारों के कपाट खुलने का उत्सव

    गौरतलब है कि हर वर्ष पंचकेदारों के कपाट शीतकाल के दौरान बंद रहते हैं और गर्मियों के आगमन पर विशेष पूजा-पाठ व वैदिक रीति-रिवाजों के साथ खोले जाते हैं। इन तीर्थ स्थलों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पर्वतीय यात्रा करनी होती है, लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति इन यात्राओं को अविस्मरणीय बना देती है।

    कपाट खुलने की तिथियों की घोषणा के साथ ही मदमहेश्वर और तुंगनाथ यात्रा की तैयारियाँ भी तेज़ कर दी गई हैं। स्थानीय प्रशासन, देवस्थानम बोर्ड और मंदिर समितियाँ यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुचारू यात्रा संचालन हेतु हर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटी हैं।

    श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे निर्धारित तिथियों पर यात्रा के लिए आएं और नियमों का पालन करें। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

    इस बार यात्रा में भक्तों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी गति मिलेगी।

  • चारधाम यात्रा की तैयारी पूरी, 14 लाख से अधिक यात्रियों ने कराया पंजीकरण

    चारधाम यात्रा की तैयारी पूरी, 14 लाख से अधिक यात्रियों ने कराया पंजीकरण

    चारधाम यात्रा की तैयारी जोरों पर: यात्रियों के लिए 60 ऑफलाइन पंजीकरण काउंटर, अब तक 14 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

    देवभूमि उत्तराखंड में 30 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं। इस बार यात्रा को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार 60 ऑफलाइन पंजीकरण काउंटर खोले जा रहे हैं। इन काउंटरों के माध्यम से उन यात्रियों को सहूलियत मिलेगी जो बिना पूर्व पंजीकरण के राज्य में प्रवेश करेंगे।

    पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन ने इन पंजीकरण काउंटरों के लिए विभिन्न प्रमुख स्थलों को चिह्नित कर लिया है। यात्रा के लिए ऑनलाइन आधार आधारित पंजीकरण की प्रक्रिया 20 मार्च से शुरू कर दी गई थी, और अब तक कुल 14 लाख से अधिक यात्रियों ने अलग-अलग तिथियों के लिए पंजीकरण करा लिया है। चारधाम की क्षमता को ध्यान में रखते हुए कुल पंजीकरण में से 60 प्रतिशत ऑनलाइन और 40 प्रतिशत ऑफलाइन किए जाएंगे।

    ऑफलाइन पंजीकरण के लिए हरिद्वार में 12, ऋषिकेश में 20, विकासनगर में 15 काउंटर खोले जाएंगे। इसके अलावा गुप्तकाशी, बड़कोट, उत्तरकाशी, हीना, श्रीनगर और पांडुकेश्वर में दो-दो और सोनप्रयाग में एक काउंटर स्थापित किया जाएगा। यह पंजीकरण केंद्र यात्रा शुरू होने से तीन दिन पहले से कार्यशील हो जाएंगे। खास बात यह है कि यात्रा के शुरुआती 15 दिनों तक यह सभी काउंटर 24 घंटे संचालित किए जाएंगे, ताकि यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

    प्रशासन इस बार यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरी तरह सतर्क है। स्वास्थ्य जांच, डिजिटल ट्रैकिंग, ट्रैफिक कंट्रोल और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राज्य की आर्थिकी में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। सरकार को इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है और उसी के अनुरूप व्यवस्थाएं की जा रही हैं।