Category: पर्यटन

  • बदरीनाथ-केदारनाथ: मंदिर के 30 मीटर के अंदर मोबाइल और रील्स बैन

    बदरीनाथ-केदारनाथ: मंदिर के 30 मीटर के अंदर मोबाइल और रील्स बैन

    मंदिर परिसर में 30 मीटर के दायरे में मोबाइल पर प्रतिबंध बदरीनाथ–केदारनाथ में अब नहीं बना सकेंगे रील्स और वीडियो 

    चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू, दर्शन व्यवस्था को लेकर बीकेटीसी सख्त

     

    देवभूमि उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। इस वर्ष यात्रा 30 अप्रैल से आरंभ हो रही है। 2 मई को केदारनाथ और 4 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसी के साथ सरकार और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने इस बार भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है।

    BKTC के अनुसार, इस बार बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसर के 30 मीटर के दायरे में वीडियो और सोशल मीडिया रील बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इतना ही नहीं, मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के उपयोग पर भी रोक लगाई जा रही है। यह फैसला मुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया गया है ताकि श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ से मुक्त, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिल सके।

    पिछली यात्राओं में यह देखा गया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में वीडियो और रील्स बनाने में जुट जाते थे, जिससे दर्शन पंक्ति बाधित होती थी और कई श्रद्धालुओं को असुविधा होती थी। मोबाइल से शूटिंग के चक्कर में मंदिर परिसर में अनावश्यक भीड़ जमा हो जाती है, जिससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि श्रद्धा और अनुशासन का माहौल भी भंग होता है।

    BKTC के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि इस बार यात्रा को अधिक सुगम और अनुशासित बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। “श्रद्धालुओं को दर्शन में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए BKTC पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है,” उन्होंने कहा।

    सोशल मीडिया पर निगरानी भी होगी सख्त

    मंदिर समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक और असत्य जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समिति एक निगरानी टीम का गठन करने पर भी विचार कर रही है जो सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी कदम उठाएगी।

    श्रद्धालुओं से अपील

    BKTC और राज्य सरकार ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे धार्मिक मर्यादा और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें, और यात्रा को श्रद्धा, अनुशासन और सहयोग की भावना से पूर्ण करें। मंदिर परिसर में मोबाइल प्रतिबंध का उद्देश्य किसी की आस्था को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि सामूहिक अनुभव को बेहतर और व्यवस्थित बनाना है।

    चारधाम यात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक जुड़ाव का अवसर देती है। इस बार की यात्रा, डिजिटल युग के अनावश्यक दिखावे से हटकर, श्रद्धा और अनुशासन की मिसाल बन सकती है—यदि सभी यात्री प्रशासन के निर्देशों का सहयोगपूर्वक पालन करें।

  • यात्रा मार्गों पर मजबूत हो स्वास्थ्य सुविधाएंः डॉ. धन सिंह रावत

    यात्रा मार्गों पर मजबूत हो स्वास्थ्य सुविधाएंः डॉ. धन सिंह रावत

    प्रत्येक चिकित्सा इकाई में तैनात होंगे विशेषज्ञ चिकित्सक

    अधिकारियों को निर्देश, कम करें एम्बुलेंस का रिस्पॉंस टाइम

    देहरादून। सूबे में चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थ यात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जायेगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को यात्राकाल का ठोस रोड़मैप बनाने के निर्देश दिये गये हैं। इसके अलावा यात्रा मार्गों एवं चारों धामों की चिकित्सा इकाईयों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है। साथ ही यात्रा मार्गों पर तैनात आपतकालीन एम्बुलेंस सेवा 108 के रिस्पांस टाइम को घटाकर 15 मिनट करने के निर्देश भी बैठक में दे दिये गये हैं।

    यात्रा

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चार धाम यात्रा को लेकर समीक्षा बैठक की। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। डा. रावत ने कहा कि यात्रा मार्गों पर पड़ने वाली चिकित्सा इकाईयों एवं चारों धामों में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाय। साथ ही स्थाई एवं अस्थाई चिकित्सा इकाईयों में पर्याप्त दवाईयां एवं चिकित्सा एवं मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराने को कहा। डॉ. रावत ने केदारनाथ, यमुनोत्री एवं हेमकुण्ड साहिब जाने वाले पैदल यात्रियों की सुविधा के लिये बनाये गये एमआरपी (मेडिकल रिस्पांस प्वाइंट) की संख्या बढ़ाने के साथ ही मेडिकल स्टॉफ को आवश्यक जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध कराने को कहा। विभागीय मंत्री ने बताया कि बैठक में चार धाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ करने के दृष्टिगत इस वर्ष 49 स्थाई चिकित्सा इकाईयों के साथ ही 25 अस्थाई चिकित्सा इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें रोटेशन के आधार पर विशेष चिकित्सकों एवं चिकित्साधिकारियों के साथ ही पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती की जायेगी। उन्होंने बताया कि यात्रा रूटों पर कुल 154 एम्बुलैंस तैनात की जायेंगी, जिसमें 17 एएलएस तथा एक बोट एम्बुलेंस भी शामिल है। इसके अलावा एक हेली एम्बुलेंस भी तैनात रहेगी ताकि आपात स्थिति में मरीजों को एयर लिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश अथवा दून मेडिकल कॉलेज पहुंचाया जा सके। डा. रावत ने बताया कि यात्रा मार्गों पर एम्बुलेंस का रिस्पॉंस टाइम 15 मिनट करने के निर्देश अधिकारियों को दे दिये गये हैं ताकि आपात स्थिति में तीर्थ यात्रियों को समय पर चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कर उनकी जान बचाई जा सके।

    बैठक में प्रभारी स्वास्थ्य महानिदेशक डा. सुनीता टम्टा, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो. आर.एस. बिष्ट, संयुक्त निदेशक डॉ. अजीत मोहन जौहरी, डॉ. सुजाता सिंह के साथ ही एम्स ऋषिकेश के डॉ. मधुर उनियाल, हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के निदेशक डॉ. हेम चन्द, एसजीआरआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंस के प्रतिनिधि डॉ. गौराव रतूड़ी, डॉ. अजय, ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के डॉ. गुरू दत्त, सुभारती मेडिकल कॉलेज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    बॉक्स

    यात्राकाल में स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती को निजी भागीदारी भी जरूरी

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि चार धाम यात्रा में मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के लिये राज्य सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान तीर्थ यात्रियों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये निजी क्षेत्र के मेडिकल संस्थानों की भी भगीदारी भी सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान निजी क्षेत्र के 40 विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं भी ली जायेगी, इसके लिये प्राइवेट मेडिकल संस्थानों से बात की गई है। डॉ. रावत ने बताया कि इन चिकित्सकों को रोटेशन के आधार पर 15-15 दिन के लिये चार धाम यात्रा मार्गों पर तैनात किया जायेगा। जिसमें फिजिशियन, ऑर्थोपेडिशियन और गायनकोलॉजिस्ट शामिल है।

     

  • रुद्रनाथ यात्रा: रोज़ाना 140 श्रद्धालु, दोपहर 2 बजे तक प्रवेश सीमित

    रुद्रनाथ यात्रा: रोज़ाना 140 श्रद्धालु, दोपहर 2 बजे तक प्रवेश सीमित

    रुद्रनाथ यात्रा: रोज़ाना केवल 140 श्रद्धालुओं को अनुमति, दोपहर 2 बजे तक तय किया गया प्रवेश समय

    गोपेश्वर। पवित्र रुद्रनाथ धाम की यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन ने इस वर्ष कुछ विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों और हकहकूकधारियों के साथ रुद्रनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रतिदिन अधिकतम 140 श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी और वह भी दोपहर 2 बजे तक ही रुद्रनाथ के लिए प्रवेश कर सकेंगे।

    जिलाधिकारी ने बताया कि यात्रा परमिट की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीकरण की व्यवस्था की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं को सहूलियत हो और भीड़ नियंत्रित रहे। इसके अलावा सुरक्षा, स्वास्थ्य, और संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई अहम फैसले भी लिए गए हैं।

    सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी सुदृढ़

    रुद्रनाथ यात्रा मार्ग की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम करने के निर्देश दिए हैं। मंदिर में रोटेशन के आधार पर एक पुलिस कर्मी और एक होमगार्ड की नियमित तैनाती की जाएगी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह वॉलिंटियरों की तैनाती सुनिश्चित करें और उन्हें प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) और ऑक्सीजन सिलिंडर के उपयोग का प्रशिक्षण प्रदान करें।

    यह पहल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    यात्रा मार्ग पर होंगे संकेतक व रिफ्लेक्टर

    यात्रा मार्ग को सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुगम बनाने के लिए वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि पैदल मार्ग का सुधारीकरण किया जाए। साथ ही, मार्ग पर साइनबोर्ड और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं, ताकि यात्रा के दौरान दिशा-निर्देश स्पष्ट रहें, विशेषकर खराब मौसम या कम रोशनी के दौरान।

    इसके अलावा बीएसएनएल को निर्देश दिए गए हैं कि वह यात्रा मार्ग पर मोबाइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करें, जिससे संपर्क में आसानी हो और आपात स्थिति में मदद मिल सके।

    वाहनों के संचालन और ठहरने की व्यवस्था पर भी चर्चा

    यात्रा सीजन के दौरान गोपीनाथ मंदिर तक वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग पर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम), अधिशासी अधिकारी (ईओ) और पुलिस विभाग को आपसी समन्वय बनाकर प्रभावी व्यवस्था तैयार करने को कहा है।

    ठहरने की सुविधाओं को लेकर केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी तरुण एस. ने जानकारी दी कि क्षेत्र के पांच गांवों की ईको डेवलपमेंट कमेटी (ईडीसी) गठित की गई है। ईडीसी के माध्यम से श्रद्धालुओं को टेंट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही यात्रा से पूर्व मार्ग पर बायो टॉयलेट लगाने की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

    समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश

    जिलाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रा से जुड़े सभी विभाग और समितियां आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि यात्रा को बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक संचालित किया जा सके। उनका कहना था कि रुद्रनाथ धाम की यात्रा न केवल धार्मिक महत्व की है, बल्कि यह पर्यावरणीय और पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, ऐसे में हर कदम सोच-समझकर उठाना जरूरी है।

    पर्यावरणीय संतुलन भी रहेगा प्राथमिकता में

    प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यात्रा के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जाए। बायो टॉयलेट की व्यवस्था, सीमित श्रद्धालु संख्या और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से ठहरने की व्यवस्था इन सभी प्रयासों का हिस्सा हैं।

    इस बार की रुद्रनाथ यात्रा में प्रशासन ने जहां श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा है, वहीं सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। सीमित संख्या में यात्रियों को अनुमति देना, स्वास्थ्य व सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, मार्ग की मरम्मत और संचार सुविधा जैसे कदम यह सुनिश्चित करेंगे कि रुद्रनाथ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित, व्यवस्थित और आध्यात्मिक अनुभव साबित हो।

  • कार्तिक स्वामी मंदिर में पीएमओ टीम का दौरा, तीर्थाटन सुविधाओं के विस्तार पर जोर

    कार्तिक स्वामी मंदिर में पीएमओ टीम का दौरा, तीर्थाटन सुविधाओं के विस्तार पर जोर

    मंदिर क्षेत्र का पीएमओ टीम ने किया निरीक्षण

    पीएमओ की पहल – वायरलेस संचार प्रणाली

    उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जनपदों के 360 गांवों के आराध्य भगवान कार्तिकेय का पावन धाम कार्तिक स्वामी मंदिर देश–विदेश के श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। इस धार्मिक स्थल को राष्ट्रीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की दो सदस्यीय टीम ने मंदिर का दौरा किया और यात्री सुविधाओं की संभावनाओं का गहन निरीक्षण किया।

    मंदिर तक सुविधाओं के विस्तार की योजना

    रुद्रप्रयाग-चोपता-पोखरी मोटर मार्ग पर स्थित यह मंदिर जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के कारण यह मंदिर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रहा है। हाल के वर्षों में इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जिससे यात्री सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पीएमओ टीम ने जिलाधिकारी डॉ. सौरभ गहरवार, उप जिलाधिकारी आशीष चंद्र घिल्डियाल और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर मंदिर परिसर और उसके मार्ग का विस्तृत निरीक्षण किया।

    प्राकृतिक सौंदर्य और तीर्थाटन की बढ़ती संभावनाएं

    कनकचौंरी से मंदिर तक लगभग साढ़े चार किलोमीटर लंबा मार्ग सघन वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। यह इलाका अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर वसंत ऋतु में जब संपूर्ण वन क्षेत्र बुरांश के लाल फूलों से आच्छादित हो जाता है। इस मंदिर का विशेष महत्व केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं। बीते कुछ वर्षों में मई-जून के दौरान दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं द्वारा भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की विशेष पूजा-अर्चना की जाने लगी है। इस दौरान उत्तराखंड सरकार के सहयोग से दक्षिण भारत से विशेष रेल सेवाओं का संचालन भी किया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा हो।

    मंदिर को वायरलेस सिस्टम से जोड़ने की योजना

    पीएमओ की टीम ने मंदिर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। अधिकारियों के अनुसार, मंदिर को जल्द ही वायरलेस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मंदिर परिसर में संचार सुविधा बनी रहेगी। यह पहली बार है जब पीएमओ की ओर से उच्चस्तरीय अधिकारियों का दल मंदिर क्षेत्र का दौरा करने पहुंचा है, जो इस स्थल को एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में उभारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    श्रद्धालुओं के लिए रोपवे और धर्मशाला निर्माण की मांग

    मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कनकचौंरी से मंदिर तक रोपवे निर्माण की मांग की। इस रोपवे के बनने से विशेष रूप से वृद्ध, दिव्यांग और छोटे बच्चों के साथ आने वाले तीर्थयात्रियों को अत्यधिक सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा, मंदिर परिसर में पेयजल व्यवस्था को और मजबूत करने तथा श्रद्धालुओं के रात्रि प्रवास के लिए एक धर्मशाला के निर्माण की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।

    अधिकारियों का बयान

    विक्रम सिंह नेगी, अध्यक्ष कार्तिक स्वामी मंदिर समिति ने कहा:
    “मंदिर को जोड़ने वाली सुविधाओं के विकास के लिए प्रशासन द्वारा गंभीर पहल की जा रही है। मंदिर को जल्द ही वायरलेस संचार प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी विषम परिस्थिति में संचार व्यवस्था बनी रहेगी। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए अन्य योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।”

    आशीष चंद्र घिल्डियाल, उप जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ने कहा:
    “प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की टीम ने मंदिर क्षेत्र और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

    राष्ट्रीय स्तर पर तीर्थ स्थल के रूप में उभरने की संभावना

    कार्तिक स्वामी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह पर्यटन और आध्यात्मिक शांति की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण स्थल बनता जा रहा है। पीएमओ की टीम के दौरे के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि केंद्र सरकार भी इस मंदिर के विकास को लेकर गंभीर है। बुनियादी सुविधाओं में सुधार और यात्रियों के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं किए जाने से यह मंदिर राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित हो सकता है।

    आने वाले वर्षों में मंदिर क्षेत्र में रोपवे, धर्मशाला, संचार प्रणाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक बेहतर अनुभव मिलेगा, जिससे यह स्थल देश-विदेश के यात्रियों के लिए आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का एक आदर्श केंद्र बन सकता है।

  • 30 मिनट में पूरी होगी केदारनाथ यात्रा: रोपवे निर्माण अक्टूबर से शुरू

    30 मिनट में पूरी होगी केदारनाथ यात्रा: रोपवे निर्माण अक्टूबर से शुरू

    केदारनाथ यात्रा 30 मिनट में पूरी होगी 
    रोपवे निर्माण के लिए 26 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित
    पांच स्टेशन और 22 टॉवर होंगे शामिल

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल केदारनाथ रोपवे के निर्माण को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कार्य में तेजी आ गई है। प्रधानमंत्री ने 21 अक्टूबर 2022 को केदारनाथ पहुंचकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया था। इसका उद्देश्य केदारनाथ यात्रा को अधिक सरल और सुलभ बनाना है।

    अक्टूबर 2025 से इस रोपवे का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसके लिए निविदा प्रक्रिया 19 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद डिजाइन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। 13 किमी लंबे इस रोपवे का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में गौरीकुंड से केदारनाथ तक 9.7 किमी का निर्माण होगा, जबकि दूसरे चरण में सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक 3.3 किमी लंबा रोपवे बनाया जाएगा।

    इस परियोजना की जिम्मेदारी भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड को सौंपी है। बीते दो वर्षों में एजेंसियों ने प्रशासन और वन विभाग के सहयोग से हवाई और भूमिगत सर्वेक्षण सहित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इसके लिए कुल 26 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है।

    निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गौरीकुंड से केदारनाथ की यात्रा केवल 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी। शुरुआती चरण में यह रोपवे प्रति घंटे 1,800 यात्रियों को लाने और ले जाने में सक्षम होगा, जिसे बाद में बढ़ाकर 3,500 यात्रियों तक किया जाएगा।

    इस रोपवे में कुल 22 टॉवर होंगे, जो विशेष रूप से डिजाइन किए गए गोंडोलों (केबिन) को सहारा देंगे। इसके अलावा, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, चिरबासा, लिनचोली और केदारनाथ जैसे पांच स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें चिरबासा और लिनचोली को तकनीकी स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में इनका उपयोग किया जा सके।

  • हेमकुंड साहिब जाने वाला मुख्य पुल टूटा, यात्रा अस्थायी रूप से बाधित

    हेमकुंड साहिब जाने वाला मुख्य पुल टूटा, यात्रा अस्थायी रूप से बाधित

    हेमकुंड साहिब यात्रा बाधित: गोविंद घाट में मुख्य पुल चट्टान गिरने से ध्वस्त

    चमोली, उत्तराखंड: बुधवार सुबह लगभग 10:00 बजे गोविंद घाट में हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाला मुख्य पुल पहाड़ी से गिरे भारी पत्थरों के कारण पूरी तरह ध्वस्त हो गया। इस घटना के चलते पुलना, घांघरिया, भ्यूंडार, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।

    स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं। राहत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाएगी ताकि यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    हेमकुंड साहिब एक प्रमुख सिख तीर्थस्थल है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। इस पुल के टूटने से यात्रा प्रभावित हो सकती है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए सावधानी बरतें।

  • प्रधानमंत्री मोदी करेंगे जनकताल ट्रेक का शिलान्यास, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

    प्रधानमंत्री मोदी करेंगे जनकताल ट्रेक का शिलान्यास, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

    प्रधानमंत्री मोदी करेंगे विश्व के दूसरे सबसे ऊंचे ट्रेक जनकताल का शिलान्यास

    उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा का संदेश देने 27 फरवरी को मुखबा आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। पीएम मोदी इस दौरान विश्व के दूसरे सबसे ऊंचे ट्रेक जनकताल का शिलान्यास करेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुखबा और हर्षिल दौरे के दौरान जादूंग घाटी में विश्व के दूसरे ऊंचे ट्रेक जनकताल और नीलापानी घाटी में मुलिंगना पास का शिलान्यास करेंगे। इन दोनों ट्रेक के शुरू होने से 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बंद इस घाटी में पर्यटन के नए आयाम खुलेंगे।

    वहीं इसे लद्दाख की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखबा, हर्षिल घाटी में प्रस्तावित दौरे में जिले के पर्यटन को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद जग गई है। 1962 के युद्ध के बाद नेलांग और जादूंग सहित सोनम घाटी छावनी में तब्दील हो गई थी। वहां पर स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। लेकिन अब भौगोलिक परिस्थिति के आधार पर लद्दाख की तर्ज पर विकसित करने की योजना शुरू कर दी गई हैं।

    जिला प्रशासन जादूंग-जनकताल और नीलापानी-मुलिंगना पास पर ट्रेक शुरू करने की तैयारी कर रहा है। डीएम डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि हमारा प्रयास है कि पीएम नरेंद्र मोदी अपने दौरे में इन दो ट्रेक का शुभारंभ कर नेलांग-जादूंग घाटी में साहसिक पर्यटन को नया आयाम दें। वहीं नेलांग और जादूंग गांव को बसाने के लिए वाइब्रेंट योजना के तहत होम स्टे निर्माण भी शुरू हो गया है।

  • नृसिंह मंदिर: शीतकालीन यात्रा प्रारंभ होने के बाद से करीब छह हजार यात्री कर चुके हैं दर्शन

    नृसिंह मंदिर: शीतकालीन यात्रा प्रारंभ होने के बाद से करीब छह हजार यात्री कर चुके हैं दर्शन

    नए साल के पहले दिन, बुधवार को ज्योर्तिमठ (जोशीमठ) स्थित भगवान नृसिंह मंदिर और शंकाराचार्य गद्दी स्थल दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस साल शीतकालीन यात्रा प्रारंभ होने के बाद से करीब छह हजार श्रद्धालु

    ज्योर्तिमठ स्थित नृसिंह मंदिर, वासुदेव मंदिर, दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खास आस्था के केंद्र रहते हैं। साथ ही शंकराचार्य की शीतकालीन गद्दी भी यहीं पर स्थित है। इसलिए बुधवार को नए साल के पहले दिन साढ़े तीन सौ अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पहुंच, नृसिंह भगवान मंदिर में दर्शन किए। बीकेटीसी के प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट ने बताया कि अब तक करीब छह हजार श्रद्धालु नृसिंह मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। बीते दिनों औली में बर्फवारी के बाद, पयर्टकों की भीड़ बढ़ी है। इसलिए औली आने वाले पयर्टक भी नृसिंह मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कुछ लोग पांडुकेश्वर में स्थित योग ध्यान बद्री के दर्शन करने भी पहुंच रहे हैं। इस तरह शीतकाल में लोग पयर्टन स्थलों के नजारे लेने के साथ ही बिना किसी भीड़ भाड़ के धार्मिक महत्व के मंदिरों के भी दर्शन कर रहे हैं। कुलदीप भट्ट ने बताया कि इस साल पहली बार शीतकालीन यात्रा संचालित हो रही है, इस कारण आने वाले वर्षों में शीतकाल के दौरान भी श्रद्धालुओं की अच्छी खासी संख्या गद़दी स्थलों पर पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं और पयर्टकों के लिए रहने खाने की पर्याप्त व्यवस्था है, कहीं भी किसी को कोई परेशानी नहीं है।

    शीतकालीन यात्रा को लेकर देशभर के लोगों में उत्साह नजर आ रहा है। इस कारण सभी जगह शीतकालीन गद्दी स्थलों पर अच्छी खासी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न हो।
    पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

  • उत्तराखंड: 31st की नाइट में 14 करोड़ की शराब डकार गए लोग

    उत्तराखंड: 31st की नाइट में 14 करोड़ की शराब डकार गए लोग

    पर्यटन राज्य उत्तराखंड के पोटेंशियल की बात करें तो उत्तराखंड में भी लाखों की संख्या में पर्यटकों ने नए साल का जश्न मनाने के लिए रुख किया जिसका अंदाजा उत्तराखंड में हुए जश्न और उसमें बिकी शराब से लगाई जा सकता है। यही नहीं उत्तराखंड के इस पोटेंशियल को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने भी नया साल के जश्न को धूमधाम से बनाने के लिए और राज्य की इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए कई रियायतें भी दी थी। उत्तराखंड सरकार ने नए साल का जश्न मनाने के लिए रेस्टोरेंट और पर्यटन जश्न से जुड़े होटल व्यवसाईयों को 24 घंटे खुले रहने की छूट दी थी तो वही सरकार के इस बढ़ावे का असर रेवेन्यू पर भी देखने को मिला।

    उत्तराखंड आबकारी विभाग ने केवल 31 दिसंबर के जश्न के चलते 142686204 रुपए का राजस्व प्राप्त किया है। आबकारी आयुक्त हरिश्चंद्र सेमवाल के अनुसार नए साल के जश्न को देखते हुए सरकार द्वारा नए साल के जश्न के मौके पर सभी होटल रेस्टोरेंट और बार को 24 घंटे खुले रहने के आदेश जारी किए थे। इसी के चलते आबकारी विभाग में बाढ़ संचालन की अनुमति रात को 2:00 बजे तक के लिए दी थी। उन्होंने कहा कि राज्य में न्यू ईयर के जश्न में पार्टी करने के लिए वन डे बार लाइसेंस भी उपलब्ध कराए गए थे। आबकारी विभाग के अनुसार न्यू ईयर पार्टी के लिए तकरीबन 600 बार लाइसेंस जारी किए गए थे।

    31st नाइट न्यू ईयर पार्टी पर बिकी शराब का विवरण

    उत्तराखंड आबकारी विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार बियर की बिक्री की बात की जाए तो देहरादून और नैनीताल में सबसे ज्यादा बिक्री हुई जहां पर पूरे प्रदेश में मिलाकर 9426 बियर की पेटी बिक्री हुई। वहीं इसके अलावा अंग्रेजी शराब की बात की जाए तो यह भी देहरादून और नैनीताल जिले में सबसे ज्यादा बिकी और पूरे प्रदेश भर में 31st की नाइट 3761 अंग्रेजी शराब की पेटियां बिक्री हुई। इसी तरह से 600 से ज्यादा वनडे बार लाइसेंस दिए गए और देसी शराब की बात की जाए तो यह भी 31 दिसंबर को 11206 पेटियां बिक्री हुई और इस तरह से कुल मिलाकर 31st दिसंबर को न्यू ईयर पार्टी के जश्न में कल 14 करोड़ 26 लाख 86 हजार 204 की शराब से राजस्व प्राप्त हुआ।

    – 9426 बियर की पेटी
    – 37161 अंग्रेजी शराब की पेटी
    – 11206 देसी शराब की पेटी
    – 600 से ज्यादा वनडे बार
    कुल रेवेन्यू – ₹142686204

  • केदारकांठा में नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में  पहुंचे पर्यटक

    केदारकांठा में नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटक

    केदारकांठा में नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे है। यहां की खूबसरत वादियों की तस्वीरें देख आपकी भी नजर नहीं हटेगी।       

    शीतकालीन पर्यटन स्थल केदारकांठा में अच्छी बर्फबारी से पर्यटकों के चेहरे खिले हुए हैं। गोविंद नेशनल पार्क क्षेत्र अंतर्गत स्थित इस पर्यटन स्थल में नए साल का जश्न मनाने अच्छी संख्या में पर्यटक उमड़े हैं। रविवार को मौसम खुलने पर कई पर्यटक बर्फ के बीच पैदल ट्रेक रूट पर बढ़ते नजर आए।

    दरअसल, पिछले कुछ वर्षों से सीमांत मोरी ब्लाक का केदारकांठा पर्यटन स्थल शीतकालीन पर्यटन स्थल के रूप में तेजी से उभरा है। केदारकांठा से सूर्योदय और सूर्यास्त का मनमोहन दृश्य दिखाई देता है। बीतते साल के साथ नए साल का सूर्याेदय देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

     

    यहां से स्वर्गारोहणी, बंदरपूंछ, व्हाइट माउंटेन, कालानाग, गरुड़ पर्वत एवं गंगोत्री रेंज की पर्वत शृंखलाओं का मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। साथ ही यहां से पुरोला में स्थित खूबसूरत रामा सिरांई और कमल सिरांई का नजारा देखने लायक होता है।

    सालभर पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन शीतकाल में बर्फबारी के बाद इस ट्रेक रूट की खूबसूरती देखते ही बनती है।

    हरकीदून प्रोटेक्टशन एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के चैन सिंह रावत का कहना है कि साल दर साल केदारकांठा पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है।

    उन्होंने बताया कि इस साल करीब प्रतिदिन करीब पांच हजार पर्यटक पहुंच रहे हैं। हालांकि भारी बर्फबारी के चलते कई बीच ट्रेक से वापस भी लौटे हैं। बताया कि पर्यटक कोट गांव, जखोल, नैटवाड़, सांकरी-सौड़, नानाईं आदि के होमस्टे में भी रूके हुए हैं