Category: उत्तराखंड

  • ‘एक गांव–एक घंटा’: महिलाओं के मुद्दों पर हुई अहम चर्चा

    ‘एक गांव–एक घंटा’: महिलाओं के मुद्दों पर हुई अहम चर्चा

    देहरादून। “एक गांव, एक घंटा हर रविवार” कार्यक्रम के तहत कुल्हान गांव में महिलाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं से बातचीत कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और स्थानीय मुद्दों को सुना गया तथा उनके समाधान की दिशा में आवश्यक प्रयास करने का आश्वासन दिया गया।

    जिला संयोजिका नलिनी तनेजा ने बताया कि “एक गांव, एक घंटा हर रविवार” कार्यक्रम को प्रत्येक सप्ताह लोगों का बढ़ता हुआ सहयोग और समर्थन मिल रहा है। गांव-गांव जाकर आमजन से सीधे संवाद करने का उद्देश्य उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें उचित मंच तक पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम को सफल बनाने में रेणु जैन, सिद्धार्थ शर्मा, अंकिता राणा, पार्वती, साहिल, मैथ्यूज, गणेश , रीता कुमारी, रीता देवी, रिंकी देवी, सुनीता, सुखशांति और कुसुम का विशेष सहयोग रहा।

    नलिनी तनेजा ने सभी सहयोगियों एवं ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसंवाद की यह पहल आगे भी निरंतर जारी रहेगी और प्रत्येक रविवार अलग-अलग गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं को सुनने का प्रयास किया जाएगा।

  • नकली दवाओं के कारोबार का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

    नकली दवाओं के कारोबार का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

    कोरोना काल में नकली रेमडेसिविर बनाने में भी था लिप्त

    देहरादून। नकली दवाओं के निर्माण, बिक्री और ऑनलाइन आपूर्ति करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ उत्तराखंड एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना को बिजनौर के चांदपुर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विशद कुमार निवासी चांदपुर, बिजनौर के रूप में हुई है। आरोपी पूर्व में कोटद्वार स्थित मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स कंपनी का मालिक रह चुका है। इस कंपनी पर वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान नकली रेमडेसिविर तैयार करने के आरोप लगे थे। वर्ष 2024 में तेलंगाना पुलिस द्वारा कंपनी में कार्रवाई और सैंपलिंग किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। कंपनी का औषधि निर्माण लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका है।

    एसटीएफ के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्रतिष्ठित फार्मा कंपनियों के नाम और ब्रांड की हूबहू नकल कर जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण और ऑनलाइन बिक्री करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई जारी है। मामले में सीसीपीएस देहरादून में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

    विवेचना के दौरान एसटीएफ ने गिरोह से जुड़े दो सदस्यों जतिन निवासी संभल और गौरव त्यागी निवासी देहरादून को पहले गिरफ्तार किया था। पूछताछ और जांच में मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने गिरोह के मुख्य सरगना विशद कुमार तक पहुंच बनाई और उसे चांदपुर से गिरफ्तार कर लिया।

    कोटद्वार की फैक्ट्री में मिली थीं नकली दवा बनाने की मशीनें
    एसटीएफ के अनुसार 23 मई 2026 को सिडकुल सिगड्डी, कोटद्वार स्थित मैसर्स नैक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स में अवैध रूप से नकली दवाओं के निर्माण की सूचना पर संबंधित विभागों के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई थी। मौके से करीब तीन किलोग्राम कम्प्रेस्ड टैबलेट और टैबलेट निर्माण में इस्तेमाल होने वाले 34 पंच उपकरण बरामद किए गए थे। इसके बाद फैक्ट्री को नियमानुसार सीज कर दिया गया था।
    पुलिस के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ कॉपीराइट अधिनियम, आईटी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

    गिरफ्तार आरोपी

    विशद कुमार, निवासी गली नंबर-1, चांदपुर, जनपद बिजनौर, उत्तर प्रदेश।
    एसटीएफ ने आमजन से अपील की है कि दवाएं केवल अधिकृत और लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही खरीदें। नकली दवाओं, अवैध औषधि निर्माण अथवा बिना वैध लाइसेंस संचालित फैक्ट्री की जानकारी तत्काल एसटीएफ को दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
    एसटीएफ हेल्पलाइन: 9412029536

  • SIR: 15 लाख नोटिसों पर अब तक सुनवाई पूरी

    SIR: 15 लाख नोटिसों पर अब तक सुनवाई पूरी

    SIR पर राजनैतिक दलों के साथ बैठक

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनैतिक दलों को दी SIR पर विस्तृत जानकारी

    देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देशों पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में शनिवार को मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर विस्तृत चर्चा की गई एवं राजनैतिक दलों के सुझाव प्राप्त किए गए।

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बैठक में बताया कि ड्राफ्ट रोलमें शामिल कुल 71 लाख मतदाताओं में से अनमैप्ड और विसंगति वाले 24 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे जिसके कम में 15 लाख से अधिकम नोटिसों की सुनवाई कर दी गई है, शेष पर कार्रवाई गतिमान है। उन्होंने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया पूर्ण रुप से नियमनुसार संपादित की जा रही है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनैतिक दलों को बताया प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने 9 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की पर्यवेक्षण अधिकारी के तौर पर अतरिक्त तैनाती की गई है।

    बैठक में सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित भारतीय जनता पार्टी से अनिल गोयल, राजकुमार पुरोहित, इंडियन नेशनल कांग्रेस से मनोज रावत, मौ० सुलेमान अंसारी, बीएसपी से सत्यपाल, सतेंद्र, जसपाल, सतेंद्र चोपड़ा, आम आदमी पार्टी से श्याम बाबू पांड्य, सीपीआई (एम) श्री अनंत आकाश उपस्थित रहे।

  • वन क्षेत्राधिकारियों को पदोन्नति का तोहफा, बने सहायक वन संरक्षक

    वन क्षेत्राधिकारियों को पदोन्नति का तोहफा, बने सहायक वन संरक्षक

    देखें आदेश

    देहरादून। उत्तराखंड शासन ने वन विभाग में छह वन क्षेत्राधिकारियों को सहायक वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति दी है। शासन के वन अनुभाग-1 की ओर से 21 अगस्त 2026 को पदोन्नति आदेश जारी किया गया।

    उत्तराखंड राज्य वन सेवा नियमावली, 2017 के प्रावधानों के तहत चयन वर्ष 2025-26 में सहायक वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र छह वन क्षेत्राधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-10 (वेतनमान 56,100-1,77,500 रुपये) में तत्काल प्रभाव से पदोन्नत किया गया है।

    पदोन्नति पाने वालों में अनिल कुमार पैन्यूली, जुगल किशोर, कन्हैया लाल, संदीप गिरी, संचित्ता वर्मा और धीरज सिंह रावत शामिल हैं।
    शासनादेश के अनुसार वन विभाग में सहायक वन संरक्षक के स्वीकृत पदों के अतिरिक्त पदोन्नति कोटे के छह अस्थायी पद सृजित किए गए हैं। इन पदों पर पदोन्नति उत्तराखंड राज्य वन सेवा नियमावली के प्रावधानों के तहत की गई है। पदोन्नत अधिकारियों की वरिष्ठता का निर्धारण उत्तराखंड सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली, 2002 के प्रावधानों के अनुसार अलग से किया जाएगा।

    पदोन्नत कार्मिकों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखा जाएगा। शासनादेश में कहा गया है कि परिवीक्षा अवधि के दौरान यदि किसी अधिकारी का कार्य एवं आचरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उसे उसके मूल पद पर प्रत्यावर्तित किया जा सकता है।

    शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति का आदेश उच्च न्यायालय, नैनीताल में विचाराधीन रिट याचिका संख्या 546/एसए/2025, विनोद चौहान बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य में पारित होने वाले अंतिम निर्णय/आदेश तथा उससे उत्पन्न परिणामों के अधीन रहेगा।
    पदोन्नत अधिकारियों को वर्तमान तैनाती स्थल से कार्यमुक्त होकर नए पद का कार्यभार ग्रहण करने और अनुपालन आख्या शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पदोन्नत कार्मिकों के तैनाती आदेश अलग से जारी किए जाएंगे।

  • धामी सरकार में उत्तराखण्ड ने पकड़ी औद्योगिक विकास और निवेश की रफ्तार

    धामी सरकार में उत्तराखण्ड ने पकड़ी औद्योगिक विकास और निवेश की रफ्तार

    मुख्यमंत्री ने BTIndia@100 कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में इंडिया टुडे ग्रुप के मेगा ब्रांड बिजनेस टुडे द्वारा आयोजित BTIndia@100 कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand: Powering India’s Industrial Growth’ विषय पर अपने विचार साझा करते हुए उत्तराखण्ड की औद्योगिक क्षमता, निवेश की संभावनाओं, बेहतर कनेक्टिविटी, युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों तथा राज्य के विकास मॉडल को देश के प्रमुख उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के समक्ष रखा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद उत्तराखण्ड की औद्योगिक पहचान में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में आयोजित इस समिट में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। राज्य सरकार द्वारा निवेश प्रस्तावों को केवल एमओयू तक सीमित न रखते हुए उनके धरातल पर उतारने के लिए पहले से ही नीतिगत और प्रशासनिक तैयारियां की गईं। उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से राज्य में 30 से अधिक नई नीतियां बनाई गई हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम ग्राउंडिंग के रूप में सामने आया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। राज्य के पास बड़े औद्योगिक लैंड बैंक सीमित हैं, लेकिन हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। उन्होंने उद्योग जगत को उत्तराखण्ड में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को भूमि के साथ-साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने राज्य की मजबूत कनेक्टिविटी को निवेश के लिए बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा का समय काफी कम हुआ है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार पहले से ही राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जबकि ऊधमसिंह नगर का पंतनगर कृषि क्षेत्र के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को भी औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास का लाभ केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, इसके लिए पर्वतीय जिलों में भी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली में औद्योगिक पार्क विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं, एक जिला-दो उत्पाद जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, छोटे उद्यमियों और पारंपरिक आर्थिक गतिविधियों को बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड ने निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति आयोग की एसडीजी रैंकिंग में उत्तराखण्ड ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में भी राज्य को निवेश के लिए बेहतर नीतिगत वातावरण तैयार करने की दिशा में अग्रणी स्थान प्राप्त हुआ है।

    युवाओं और रोजगार के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। पेपर लीक और नकल के मामलों में कठोर कार्रवाई की गई तथा नकल माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए करीब 100 लोगों को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद लगभग दो दशकों में जहां करीब 16 हजार नियुक्तियां हुई थीं, वहीं पिछले पांच वर्षों में ही 34 हजार से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। मुख्यमंत्री ने इसे युवाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। मुख्यमंत्री ने राज्य में स्टार्टअप और स्वरोजगार के बढ़ते इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला था, तब राज्य में करीब 700 स्टार्टअप थे, जबकि वर्तमान में इनकी संख्या लगभग 2,000 तक पहुंच गई है। होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से युवाओं और महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, उत्पाद तैयार करने, बाजार से जोड़ने, प्रशिक्षण प्राप्त करने तथा ऋण प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत अब तक 13 हजार से अधिक लोगों ने प्रशिक्षण पूरा किया है।

    पलायन की चुनौती पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को राज्य के काम लाना शामिल है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से अब राज्य में रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार, राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड की पर्यटन क्षमता को भी राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश जैसी यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा के प्रथम चरण में ही 47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा में करीब 4.80 करोड़ श्रद्धालु आए। आदि कैलाश क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।

    मुख्यमंत्री ने जेन-जी को ‘इंडियन जनरेशन’ बताते हुए कहा कि आज का युवा दुनिया से जुड़ा हुआ, जागरूक और अपनी आकांक्षाओं को लेकर स्पष्ट है। डिजिटल और संचार क्रांति ने युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ा है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह युवाओं की अपेक्षाओं को सुने और उन्हें बदलती दुनिया के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड निवेश के लिए सुरक्षित, शांतिपूर्ण और संभावनाओं से भरा राज्य है। राज्य की प्राकृतिक संपदा, गंगा और यमुना जैसी नदियां, बेहतर कानून-व्यवस्था, कुशल मानव संसाधन, पर्यटन क्षमता और बढ़ती कनेक्टिविटी इसे दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं। उन्होंने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से उत्तराखण्ड की संभावनाओं को देखने और राज्य में निवेश के लिए आगे आने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने मंच के माध्यम से मारुति और हुंडई सहित देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व को उत्तराखण्ड में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि, बुनियादी सुविधाएं और अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का विकास मॉडल अब केवल पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक विकास, स्टार्टअप, स्वरोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कनेक्टिविटी, स्थानीय उत्पाद और पर्वतीय क्षेत्रों में नई आर्थिक गतिविधियों को जोड़कर राज्य एक व्यापक और संतुलित विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि निवेश और रोजगार के नए अवसरों का लाभ राज्य के मैदानी और पर्वतीय, दोनों क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचे और उत्तराखण्ड को देश की आर्थिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाया जा सके।

  • जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध मिलने पर कार्रवाई, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी का प्रमाण पत्र रद्द

    जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध मिलने पर कार्रवाई, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी का प्रमाण पत्र रद्द

    हल्द्वानी। संदिग्ध जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति के मामले में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कड़ी कार्रवाई की है। अनिल कुमार कंबोज, निवासी ग्राम खैराना, सितारगंज की शिकायत पर हुई जांच के बाद जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की संस्तुति के आधार पर होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का हल्द्वानी तहसील से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है।

    जांच में सामने आया कि डॉ. मनीषा कायथ का मूल निवास हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में है। तहसीलदार कसौली ने 11 अक्टूबर 1999 को उन्हें हिमाचल प्रदेश की छिब्बे जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया था। विवाह के बाद उन्होंने हल्द्वानी तहसील से 22 जनवरी 2014 को उत्तराखंड की धोबी जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र संख्या 040201400069/266 प्राप्त किया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनका चयन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ।

    वर्तमान में डॉ. कायथ चंपावत जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटी में एनएचएम के तहत संविदा पर कार्यरत हैं।

    03 अगस्त को हुई थी स्क्रूटनी कमेटी की बैठक
    मामले की सुनवाई एवं जांच के लिए 03 अगस्त 2026 को जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक हुई। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल तथा जिला होम्योपैथिक अधिकारी चंपावत ने प्रकरण की समीक्षा की।

    कमेटी ने सर्वोच्च न्यायालय के Ranjana Kumari Vs State of Uttaranchal (2013) तथा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के Smt. Anshu Sagar Vs State of Uttarakhand (2025) मामलों में दिए गए निर्णयों का भी परीक्षण किया। कमेटी के अनुसार इन न्यायिक व्यवस्थाओं में स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ मूल राज्य से संबंधित होने के आधार पर ही राज्य की सेवाओं में अनुमन्य है। विवाह के बाद दूसरे राज्य में माइग्रेशन के आधार पर वहां की राज्य सेवाओं में अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता।

    प्रमाण पत्र जब्त करने के निर्देश
    जिलाधिकारी ने जांच एवं न्यायिक व्यवस्थाओं के आधार पर हल्द्वानी तहसील से 22 जनवरी 2014 को जारी जाति प्रमाण पत्र संख्या 040201400069/266 को निरस्त कर दिया है। साथ ही तहसीलदार हल्द्वानी को प्रमाण पत्र जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रकरण के निस्तारण के बाद संबंधित विभागों को अग्रिम कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजे गए हैं।
    जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य सभी मामलों में पारदर्शिता बनाए रखते हुए नियमों और प्रचलित विधिक व्यवस्थाओं के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

  • पूर्व IAS दीपेन्द्र बने उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के नए आयुक्त

    पूर्व IAS दीपेन्द्र बने उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के नए आयुक्त

    राज्यपाल ने नियुक्ति को दी मंजूरी, तीन साल या 65 वर्ष की आयु तक रहेगा कार्यकाल

    देहरादून। उत्तराखंड शासन ने पूर्व आईएएस अधिकारी दीपेन्द्र चौधरी को उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग का आयुक्त नियुक्त किया है। शासन की ओर से 21 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार राज्यपाल ने उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम, 2011 एवं संशोधित अधिनियम, 2014 की धारा 13(1) और धारा 15 के तहत यह नियुक्ति मंजूर की है।

    सचिव डॉ पंकज पांडे की ओर से नियुक्ति आदेश जारी किए गए।

    दीपेंद्र चौधरी का प्रशासनिक सेवा में लंबा और विविध अनुभव रहा है। फरवरी 2026 में सचिव पद से सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कृषि, सचिवालय प्रशासन, सैनिक कल्याण और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वह भू-कानून समिति के सदस्य सचिव भी रहे हैं। इस समिति का गठन पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में किया गया था।
    चौधरी ने नैनीताल, हरिद्वार, उत्तरकाशी और चंपावत के जिलाधिकारी के रूप में भी सेवाएं दी हैं। विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर उनके अनुभव को देखते हुए सेवा का अधिकार आयोग में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अधिसूचना के मुताबिक चौधरी का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगा। वह अधिनियम की धारा 15(2) के अनुसार आयोग के आयुक्त पद का कार्यभार ग्रहण कर सकेंगे।
    नियुक्ति की शर्तों के अनुसार उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, रहेगा। उनकी सेवा की अन्य शर्तें शासनादेश संख्या 57/XXX(6)/20-20(02)2014, दिनांक 27 जुलाई 2020 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होंगी।
    आयुक्त के वेतन-भत्ते एवं सेवा के अन्य नियम उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम, 2011 की धारा 15(5) के प्रावधानों के अनुसार होंगे।
    शासन की अधिसूचना राज्यपाल की अनुमति से सचिव पंकज कुमार पांडेय की ओर से जारी की गई है।

  • Chamoli launches outreach drive to promote Mukhyamantri Udyamshala Yojana

    Chamoli launches outreach drive to promote Mukhyamantri Udyamshala Yojana

    Chamoli : An entrepreneurship outreach programme under the Mukhyamantri Udyamshala Yojana (MUY) was organised at the Government Postgraduate College, Gopeshwar, on Friday to promote self-employment opportunities among youth, women, self-help groups and local entrepreneurs across Chamoli district.

    The programme, held in the college auditorium, brought together prospective entrepreneurs, micro and small business owners from rural and urban areas, financial institutions, training providers, departmental officials and members of the local community.

    Chief Minister Pushkar Singh Dhami inaugurated the programme from Mukhya Sevak Sadan in Dehradun, while his address was broadcast live at the Gopeshwar venue.

    As part of the outreach campaign, an IEC and public awareness vehicle was flagged off to take information about the scheme to villages and local communities across the district.

    The vehicle will travel through different development blocks and Nyaya Panchayat areas from August 21 to September 1, providing information on MUY and other self-employment and welfare schemes.

    Officials said the outreach vehicle will provide guidance on eligibility, the application process, training, technical support, financial assistance, subsidies, entrepreneur registration, branding, product packaging and market access. Interested residents will also receive guidance on setting up enterprises suited to their skills, interests and locally available resources.

    The campaign will cover Gopeshwar, Mandal, Chamoli, Birhi, Helang, Joshimath, Tapovan, Nandprayag, Ghat, Karnaprayag, Simli, Narayanbagar, Tharali, Dewal, Gairsain, Mehalchauri and Pokhari, among other areas.

    During the programme, Anjali Devi of Hariyali Swavlambi Sahakarita was presented a cheque of ₹6 lakh to support the setting up of an enterprise and operation of a Hilans restaurant.

    Officials from horticulture, agriculture, industries, fisheries, tourism and other departments briefed participants on departmental schemes, subsidies, grants and assistance available for starting businesses based on local resources.

    They said MUY will support aspiring entrepreneurs through training, technical guidance, enterprise development, branding, packaging, quality improvement and access to markets. Special emphasis is also being placed on helping local products reach wider markets.

    Several departmental stalls, registration desks for youth and self-help groups, product and enterprise exhibition spaces, guidance counters and banking and loan assistance desks were also set up at the venue.

    Minister of State rank Harak Singh, Prem Singh, Nagar Palika chairman Sandeep Rawat, BJP district president Gajpal Bartwal, district panchayat vice-chairman Laxman Singh, Bhesaj Sangh president Satendra Aswal, Arun Maithani, Vinod Kanwasi, Raghuvir Bisht, Nandi Rana, Chief Development Officer Dr Abhishek Tripathi, Project Director Anand Singh and other officials, local entrepreneurs, SHG members and youth attended the programme.

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आजीविका और सुविधाएं विकसित करने पर जोर

    ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आजीविका और सुविधाएं विकसित करने पर जोर

    रिवर्स पलायन के लिए विभागीय योजनाओं की समीक्षा

    मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक में दिए निर्देश

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की स्थिति, रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग द्वारा विभिन्न जनपदों में आयोजित की जा रही प्रवासी पंचायतों, पलायन निवारण एवं स्वरोजगार जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। आयोग के सदस्यों ने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा रिवर्स पलायन को गति देने के संबंध में विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के लिए सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों और योजनाओं के माध्यम से समन्वित रूप से कार्य करें। विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सरल और प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जाए। योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों अथवा बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और कौशल को रोजगार से जोड़ते हुए युवाओं को अपने गांव में ही आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने, उनकी गुणवत्ता एवं ब्रांडिंग पर ध्यान देने तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर्स पलायन केवल रोजगार उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि गांवों में बेहतर आजीविका, सुविधाएं और संभावनाएं विकसित करने से संभव होगा। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ परिणामोन्मुखी कार्य करना होगा।

    बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी, सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली एवं  रंजना रावत, सचिव धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अहमद इकबाल,अपर सचिव सौरभ गहरवार,  अनुराधा पाल, संतोष बडोनी उपस्थित रहे।

  • सास-बहू की अनोखी राखियों ने बटोरी सुर्खियां

    सास-बहू की अनोखी राखियों ने बटोरी सुर्खियां

    दून के मॉल और सचिवालय में लगेंगे स्टॉल

    एनआरएलएम से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं राखी निर्माण से कर रहीं अच्छा कारोबार

    देहरादून। रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हैंडमेड राखियों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर न केवल अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।

    इसी कड़ी में रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी राखी कारोबार में अपनी अलग पहचान बना रही है। रायपुर ब्लॉक की नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दोनों महिलाएं मिलकर आकर्षक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इस वर्ष उन्होंने दो हजार से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अब तक करीब 1,500 राखियां तैयार की जा चुकी हैं।

    पिछले साल 1,200 राखियों से कमाया 25 हजार रुपये का मुनाफा
    लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ। दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बिक्री की, जिससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। उत्साह बढ़ने के बाद इस वर्ष उन्होंने राखी कारोबार को और विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है।

    प्राइवेट नौकरी छोड़ सास के साथ शुरू किया स्वरोजगार
    अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला के साथ स्वरोजगार की राह चुनी। दोनों ने मालदेवता क्षेत्र में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की है। एनआरएलएम के सहयोग से शुरू किए गए इस स्वरोजगार के माध्यम से वे राखियों के साथ अन्य हस्तनिर्मित एवं स्थानीय उत्पादों का भी कारोबार कर रही हैं। अलका के अनुसार समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आय का बेहतर अवसर मिला है। साथ ही सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर वह स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी मिल रहे ऑर्डर
    हैंडमेड राखियों की बिक्री अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी ग्राहकों से राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। महिलाएं ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। इससे उनके कारोबार को स्थानीय बाजार के साथ-साथ डिजिटल बाजार में भी विस्तार मिल रहा है।

    पारंपरिक से आधुनिक डिजाइनों तक तैयार हो रहीं राखियां
    समूह की महिलाओं द्वारा ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे, रिबन सहित विभिन्न सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं। इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष, नजरबट्टू समेत कई पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन शामिल हैं। राखियों की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार का काम भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं।

    वर्ष 2016 से एनआरएलएम से जुड़कर बढ़ा रहीं कारोबार
    आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत ने बताया कि वह वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। इस दौरान उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला, जिससे स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएं हर वर्ष सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।

    सहसपुर और डोईवाला की महिलाएं भी तैयार कर रहीं राखियां
    रायपुर के साथ ही सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला विकासखंड की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इन राखियों की बिक्री रायवाला और श्यामपुर के विभिन्न बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है।

    वहीं, सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर की महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनकी राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है और सेलाकुई, सहसपुर तथा विकासनगर क्षेत्र में भी अच्छा बाजार मिल रहा है।

    दून के प्रमुख मॉलों में लगेंगे समूह की महिलाओं के स्टॉल

    मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून जिले के सहसपुर, रायपुर और डोईवाला विकासखंड की सीएलएफ से जुड़ी महिलाएं उच्च गुणवत्ता की राखियां तैयार कर रही हैं।

    उन्होंने बताया कि महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉलों में भी राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। उन्होंने आमजन से अपील की कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियों और अन्य उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करें।

    24 से 27 अगस्त तक सचिवालय में लगेंगे पांच स्टॉल

    सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी एनआरएलएम से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं बेहतर गुणवत्ता वाली राखियां बाजार में उपलब्ध करा रही हैं। सहसपुर, रायपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाओं को राखियों की बिक्री के लिए अच्छा बाजार मिल रहा है।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के अंतर्गत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं राखियों के साथ विभिन्न प्रकार के पहाड़ी एवं स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगी।

    रक्षाबंधन के अवसर पर राखी निर्माण से जुड़ी इन ग्रामीण महिलाओं की पहल नारी सशक्तीकरण और स्थानीय स्वरोजगार की तस्वीर को मजबूत कर रही है। मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी सहित जिलेभर की समूह महिलाएं हुनर को कारोबार में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।