युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम: सीएम धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकसभा में पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश के करोड़ों मेहनती एवं प्रतिभाशाली युवाओं के भविष्य की सुरक्षा तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कानून परीक्षा माफियाओं, पेपर लीक गिरोहों और संगठित नकल के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई को और अधिक सशक्त बनाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने का जो संकल्प लिया है, लोकसभा में इस संशोधन विधेयक का पारित होना उसी संकल्प का प्रमाण है। इससे देशभर में भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस संशोधित कानून के लागू होने से पूरे देश में परीक्षा प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी तथा योग्य एवं परिश्रमी अभ्यर्थियों का विश्वास और मजबूत होगा।
उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय “नकल मुक्त भारत” के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा।
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध जनभागीदारी जरूरी-सीएम
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को किया सम्मानित
इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से ही साकार होगा सतत विकास का लक्ष्य
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है।
इसके लिए जनभागीदारी, जन-जागरूकता तथा प्रत्येक नागरिक के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देकर उत्तराखंड को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाने के संकल्प को साकार करना होगा।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जाखन स्थित एक होटल में आयोजित “एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तन” विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने बाघ संरक्षण पर आधारित चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया।मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक कदम उठाने तथा वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बाघ दिवस के अवसर पर इस विषय पर आयोजित कार्यशाला अत्यंत सार्थक है। यह आयोजन केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक है। यदि हमारे जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो बाघ सुरक्षित रहेंगे और प्रकृति का संतुलन भी सुरक्षित रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को माता का स्वरूप माना गया है। देवभूमि उत्तराखंड अपनी समृद्ध जैव विविधता, वन संपदा और वन्यजीव संरक्षण के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के वन क्षेत्र इस विरासत के सशक्त प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर्यावरण, नदियों, मिट्टी, जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। वन क्षेत्रों में छोड़ा गया प्लास्टिक अनेक बार वन्यजीवों के भोजन में मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि जंगलों, नदियों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध प्रभावी और निर्णायक अभियान चलाना समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ माँ के नाम, नमामि गंगे तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसी पहलों ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया है। राज्य सरकार भी पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान, निरीक्षण एवं प्रवर्तन की कार्रवाई कर रही है। चारधाम यात्रा मार्गों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से कपड़े के थैले, जूट तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भी प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक अथवा अन्य प्रकार का कचरा न छोड़ने की अपील की। उद्योग जगत से इको-फ्रेंडली पैकेजिंग और आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों को अपनाने तथा युवाओं से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम सभाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा राज्य को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी इशिता सजवाण, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव नीना ग्रेवाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं विषय विशेषज्ञ मौजूद थे।
देहरादून/नई दिल्ली। हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सहकारी समितियों, बागवानी एवं संबद्ध उत्पादों के विपणन को लेकर पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड सहित पर्वतीय राज्यों के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी।
अमित शाह ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (NCDC) के माध्यम से पर्वतीय राज्यों में कृषि, बागवानी एवं संबद्ध उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले पाँच वर्षों में इन राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा तकनीकी सहयोग और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न पर्वतीय राज्यों में एनसीडीसी के नए कार्यालय भी स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) तथा जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) का गठन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से पर्वतीय राज्यों के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने की दिशा में प्रभावी कार्य हो रहा है।
शाह ने बताया कि उत्तराखंड के किसानों को अब तक 2,488 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं NCOL द्वारा राज्य के किसानों से 417 मीट्रिक टन जैविक गेहूँ, 40 मीट्रिक टन जैविक बासमती तथा 30 मीट्रिक टन जैविक स्वीटनर्स का प्रापण किया गया है।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता आज किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का मजबूत माध्यम बन रही है।
उन्होंने कहा कि संसद में प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड सहकारिता के क्षेत्र में देश के सभी पर्वतीय राज्यों का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान पर्वतीय राज्यों को एनसीडीसी द्वारा दी गई ₹422.95 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता में से ₹287.95 करोड़ (लगभग 68%) अकेले उत्तराखंड को प्राप्त हुए, जो सभी पर्वतीय राज्यों में सर्वाधिक हैं।
रावत ने बताया कि उत्तराखंड BBSSL, NCEL और NCOL तीनों राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में सदस्यता के मामले में भी पहले स्थान पर है। राज्य की 551 सहकारी समितियाँ BBSSL, 487 समितियाँ NCEL तथा 387 समितियाँ NCOL की सदस्य हैं, जो पर्वतीय राज्यों में सर्वाधिक हैं। इतना ही नहीं, NCEL की कुल सदस्य समितियों में लगभग 56 प्रतिशत तथा NCOL की लगभग 54 प्रतिशत सदस्य समितियाँ अकेले उत्तराखंड की हैं।
त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड के कृषि, बागवानी एवं जैविक उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर मूल्य, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “सहकारिता से समृद्धि” का संकल्प उत्तराखंड में तेजी से साकार हो रहा है और आने वाले समय में राज्य देश के लिए सहकारिता का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।
अजबपुर कलां में घर-घर नोटिस वितरण प्रक्रिया का डीएम ने किया स्थलीय निरीक्षण
त्रुटिरहित एसआईआर के लिए डीएम के निर्देश, बीएलओ को मिलेगा फ्लोचार्ट-चेकलिस्ट
मतदाता सूची में नाम और विवरण सुधारने का मौकाः 5.47 लाख मतदाताओं को दिए जा रहे नोटिस
देहरादून। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत निर्वाचन आयोग उन सभी नागरिकों को विवरण दुरुस्त करने का बड़ा अवसर दे रहा है, जिनके आंकड़ों में कोई त्रुटि या मैपिंग संबंधी विसंगति रह गई है। इस अभियान की धरातलीय हकीकत परखने के लिए मंगलवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान खुद ग्राउंड जीरो पर उतरे।
जिलाधिकारी ने अजबपुर कलां क्षेत्र में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा घर-घर जाकर नोटिस तामिल कराने की प्रक्रिया का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान वे स्थानीय निवासी अरविंद नेगी के घर पहुंचे, जहां बीएलओ नाम में विसंगति के कारण नोटिस सौंपते हुए निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत करने की जानकारी दे रहे थे। जिलाधिकारी ने इस पूरी प्रक्रिया का बारीकी से मुआयना किया।
बीएलओ की आसानी के लिए बनेगा फ्लोचार्ट/चेकलिस्ट
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए कि अभियान को पूरी तरह से त्रुटिरहित और सुगम बनाने के लिए बीएलओ हेतु एक स्पष्ट फ्लोचार्ट और चेकलिस्ट तुरंत तैयार की जाए। इसे तत्काल सभी बीएलओ को उपलब्ध कराया जाए ताकि किसी भी स्तर पर प्रक्रिया में भ्रम न रहे।
14 जुलाई को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल के अनुसार देहरादून जिले में अब तक 11,90,805 मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। वर्ष 2003 एवं 2026 की मतदाता सूची से मिलान न हो पाने या विवरण अपूर्ण होने के कारण 5.47 लाख मतदाताओं को व्यक्तिगत नोटिस दिए जा रहे हैं। बीएलओ घर-घर जाकर व्यक्तिगत रूप से नोटिस देंगे और इसकी फोटो आयोग के निर्धारित ऐप पर अपलोड की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी ईआरओ को आयोग की गाइडलाइन के अनुसार तय समयसीमा में बेहद सावधानी से काम पूरा करने के निर्देश दिए।
इस निरीक्षण के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण के नामित सेक्टर अधिकारी डॉ. महेश कुमार, एईआरओ अपर्णा बहुगुणा, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली तथा बीएलओ विभांशु भट्ट मौजूद थे।
देहरादून। धामी सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को देहरादून स्थित विशेष न्यायाधीश (सतर्कता अधिष्ठान), गढ़वाल परिक्षेत्र एवं पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने नोटिस जारी कर 3 सितंबर 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश वाद संख्या 280/2025 में पारित किया गया है, जिसमें पंकज सिंह क्षेत्री बनाम गणेश जोशी शीर्षक से प्रकरण विचाराधीन है। न्यायालय ने 25 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान पाया कि बीएनएसएस (BNSS) के प्रावधानों के तहत विपक्षी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।
इसी आधार पर अदालत ने गणेश जोशी को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है।
तीन दिन में जांच रिपोर्ट तलब, जिम्मेदारी भी होगी तय
देहरादून। देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टोंस नदी पर नव-निर्मित पुल के एप्रोच रोड का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के मामले में सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
सीएम धामी ने कहा है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं कि जाएगी। उन्होंने कहा कि मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
इधऱ, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को मामले की प्राथमिक जांच कर तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शासन को विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों से मिली जानकारी के आधार पर जारी पत्र में कहा गया है कि नव-निर्मित पुल के एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने का मामला प्रथम दृष्टया अत्यंत गंभीर है और सीधे तौर पर जनहित तथा लोक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में मामले की तत्काल जांच कर दोष और जिम्मेदारी तय किया जाना आवश्यक है।
सचिव ने मुख्य अभियंता को निर्देशित किया है कि प्राथमिक जांच के दौरान एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के कारणों का पता लगाया जाए तथा इसके लिए उत्तरदायी अधिकारियों अथवा संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। जांच आख्या तथ्यों और अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ हर हाल में तीन दिनों के भीतर शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
शासन ने स्पष्ट किया है कि यह मामला संवेदनशील होने के साथ-साथ लोक सुरक्षा से संबंधित है, इसलिए जांच में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
70 किलोमीटर अल्ट्रा रन से स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
देहरादून। बीते साल से धामी सरकार आदि कैलाश परिक्रमा रन और नीति अल्ट्रा एक्सट्रीम रन को वार्षिक आयोजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आदि कैलाश परिक्रमा रन के दूसरे संस्करण की तैयारियों को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि सीएम के विशेष निर्देश पर आदि कैलाश परिक्रमा रन का दूसरा संस्करण 24 और 25 अक्टूबर, 2026 को नई ऊर्जा और व्यापक जनसहभागिता के साथ आयोजित किया जाएगा।
बैठक में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भट्टगाई, कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विनीत तोमर, जिला पर्यटन विकास अधिकारी पिथौरागढ़, जिला पर्यटन विकास अधिकारी नैनीताल तथा उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के उप निदेशक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में पर्यटन सचिव ने जिला प्रशासन द्वारा की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए प्रस्तावित उच्च हिमालयी अल्ट्रा मैराथन के आयोजन, मार्ग निर्धारण, विभिन्न श्रेणियों और आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष प्रतियोगिता में 70 किलोमीटर अल्ट्रा रन श्रेणी को भी शामिल किया जाएगा, जिससे यह आयोजन देश के प्रमुख अल्ट्रा मैराथन आयोजनों में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि खिलाड़ियों के सत्यापन और प्रतियोगिता के मानकों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी तथा भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के मानकों के अनुरूप आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाए।
पर्यटन सचिव ने जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सकों, चिकित्सा सहायकों और पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता, सुरक्षा प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था तथा पूरे मार्ग पर आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इस पर जिलाधिकारी ने बताया कि जिला स्तर पर भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय बैठक 27 जुलाई को प्रस्तावित है।
जिलाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि आयोजन क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 1,400 बिस्तरों की आवासीय क्षमता उपलब्ध है। इस पर पर्यटन सचिव ने वर्तमान और संभावित आवासीय क्षमता का आकलन करने के लिए पुनः वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) का अध्ययन कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने जिला पर्यटन विकास अधिकारी, पिथौरागढ़ को प्रस्तावित मार्ग का शीघ्र निरीक्षण कर विभिन्न श्रेणियों के मार्गों का अंतिम निर्धारण करने के निर्देश दिए। साथ ही जलपान केंद्र, चिकित्सा सहायता केंद्र, शौचालय, विश्राम स्थल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का चिन्हांकन समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में पूरे मार्ग पर इंटरनेट संपर्क व्यवस्था का व्यापक परीक्षण कराने तथा जहां आवश्यकता हो वहां दूरसंचार एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर नेटवर्क व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि प्रतिभागियों, आयोजन टीम और सुरक्षा एजेंसियों को निर्बाध संचार सुविधा उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष आयोजन का विशेष फोकस वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी, ग्राम प्रतिनिधियों की सहभागिता, सामुदायिक भोज, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय परंपराओं के माध्यम से क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करना होगा।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता वाली तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
देहरादून में बन रही देश की पांचवीं साइंस सिटी देखेंगे स्कूली बच्चे
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विकसित उत्तराखंड की आधारशिला हैं।
राज्य सरकार उत्तराखंड को अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीकी विकास का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को प्रयोगशालाओं और पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय आमजन के जीवन से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को पायनियर समाचार पत्र समूह एवं उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में आई.आर.डी.टी. सभागार में आयोजित “Mainstreaming Science, Technology and Innovation for a Prosperous Uttarakhand” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व की प्रगति प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की क्षमता से निर्धारित हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीकें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही हैं। इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा प्रतिभा, नवाचार और परिश्रम में किसी से कम नहीं है।आवश्यकता उन्हें आधुनिक संसाधन, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और उपयुक्त अवसर उपलब्ध कराने की है। सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत एवं वैज्ञानिक संस्थानों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में नवाचार आधारित विकास को नई गति दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प की आधारशिला विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे अभियान भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बनाना है। उन्होंने कहा कि देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है, जो उत्तराखंड को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के स्कूली विद्यार्थियों का नियमित रूप से साइंस सिटी भ्रमण कराया जाए, ताकि उनमें विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जोड़ना भविष्य के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीआईएस आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर तथा स्टेम लैब्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, प्री-इन्क्यूबेशन लैब्स तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में वैश्विक स्तर के अवसर उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि देवभूमि उत्तराखंड को वीरभूमि और खेलभूमि के साथ-साथ विज्ञान और नवाचार की भूमि के रूप में भी वैश्विक पहचान मिले। उन्होंने सभी वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत एवं नीति-निर्माताओं का आह्वान किया कि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उत्तराखंड को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पद्मश्री डॉ.बी.के. संजय, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, पंतनगर यूनिवर्सिटी से प्रो. जे. पी. जयसवाल, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी. पी उनियाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
विद्या भारती के संस्कार और शिक्षा मॉडल की मुख्यमंत्री ने की सराहना
मुख्यमंत्री ने किया आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर शिशु वाटिका का लोकार्पण
हरिद्वार। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान, उत्तराखंड द्वारा रुड़की में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की उत्कृष्ट सफलता यह सिद्ध करती है कि परिश्रम, अनुशासन और संस्कार के बल पर हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा देगा और भविष्य की सभी परीक्षाओं एवं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि विद्या भारती ने सनातन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा देकर देशभर में शिक्षा और संस्कार की मजबूत नींव रखी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1952 में गोरखपुर से प्रारंभ हुआ सरस्वती शिशु मंदिर आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। वर्तमान में विद्या भारती देशभर में करीब 45 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा एवं संस्कार प्रदान कर रही है। विद्या भारती के उत्तराखंड में 562 विद्यालयों में लगभग सवा लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने संगठन के सभी आचार्यों, स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें नमन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू कर शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाया है। सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, जूते-बैग वितरण, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना, भारत भ्रमण कार्यक्रम, मॉडल कॉलेजों की स्थापना, आईटी लैब एवं छात्रावास निर्माण जैसे अनेक कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही कौशल विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘कौशलम्’ कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। इसके अलावा यूपीएससी, एनडीए और सीडीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे की तैयारी के लिए 50 हजार की वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि वे भारत के वर्तमान और भविष्य हैं। उनके ज्ञान, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व क्षमता के बल पर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकेगा और भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित होगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर शिशु वाटिका का लोकार्पण भी किया।
कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर,रुड़की श्रीमती कौशल्या देवी आर्या,केंद्रीय संगठन मंत्री विद्या भारती डोमेशवर साहू, मंत्री भारतीय शिक्षा समिति डॉ रजनीकांत शुक्ला, निर्देशक आई आई टी रुड़की कमल किशोर पंत,जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल,जिलाध्यक्ष भाजपा रुड़की डॉ मधु सिंह, राज्यमंत्री श्यामवीर सिंह सैनी,दिनेश कौशिक, अजीत चौधरी,आदेश सैनी,जिलाधिकारी मयूर दीक्षित,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ,उप जिलाधिकारी भगवानपुर भगवानपुर देवेंद्र नेगी सहित विभिन्न जिलों से आये अभिभावक छात्र छात्राएं मौजूद रहे।
उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष के निधन पर जताया शोक
देहरादून। उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजे सिंह नेगी के निधन पर संगठन व अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने शोक व्यक्त किया है। उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र मिश्रा व प्रदेश महामंत्री डॉ महावीर सिंह बिष्ट ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राजे सिंह नेगी माध्यमिक शिक्षक संघ के भीष्म पितामह व अशासकीय विद्यालय विनियम एक्ट की चलती -फिरती किताब थे।
उन्होंने उत्तरप्रदेश राज्य के समय से ही संग़ठन को मजबूती देने का कार्य किया है, उनका निधन माध्यमिक शिक्षक संघ के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है, संग़ठन भविष्य में उनके आदर्शो व मूल्यों पर चलता रहेगा, शोक व्यक्त करने में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र मिश्रा, प्रांतीय महामंत्री डॉ महावीर सिंह बिष्ट, प्रांतीय उपाध्यक्ष अजय बिष्ट, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष संजय रावत, प्रांतीय प्रवक्ता कैलाश थपलियाल ज़िला अध्यक्ष पौड़ी भारत बिष्ट ज़िला मंत्री संदीप रावत , कुलदीप थपलियाल, विजय नौडियाल, संदीप मैंदोला आदि शामिल थे।
वहीं उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षक के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नेगी के निधन पर अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने शोक व्यक्त किया है।
जिलामंत्री मंगल भूषण सारंग ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र का एक चिराग बुझने से शिक्षको मे शोक की लहर है अपने सम्पूर्ण जीवन काल में उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक शिक्षक के हितो के लिए लडते रहे, न केवल शिक्षाजगत बल्कि सामाजिक क्षेत्र के लिए भी संघर्ष करते थे।
उनके निधन से समाज के विभिन्न संगठनों से दुख प्रकट किया। जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार ने कहा कि राजे सिंह नेगी को शिक्षको के हमेशा मार्गदर्शक रहे, और हमेशा शिक्षक हितों को सर्वोपरि मानते थे। उनके द्वारा सडक से सदन तक हमेशा शिक्षकों की बात की गई।