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  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले सीएम आवास में अधिकारियों-कर्मियों का योगाभ्यास

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले सीएम आवास में अधिकारियों-कर्मियों का योगाभ्यास

    देहरादून। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री ने गुरुवार को आवास पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ योगाभ्यास किया।
    इस अवसर पर उन्होंने नियमित योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए सभी से इसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान एवं सम्मान प्राप्त हुआ है। आज योग विश्वभर में स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं समग्र कल्याण के प्रभावी माध्यम के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मानुशासन, सकारात्मक जीवनशैली तथा जीवन में संतुलन स्थापित करने का सशक्त माध्यम है। योग व्यक्ति को तनावमुक्त, ऊर्जावान एवं स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अधिकाधिक संख्या में योग कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने तथा योग को जन-जन तक पहुंचाने में योगदान देने का आग्रह किया।

  • उत्तराखण्ड ने हासिल की पूर्ण साक्षरता, धामी कैबिनेट की मुहर

    उत्तराखण्ड ने हासिल की पूर्ण साक्षरता, धामी कैबिनेट की मुहर

    उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत

    उत्तराखंड कैबिनेट के 12 अहम फैसले

    चारधाम यात्रा व प र्यटन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव मंजूर

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
    बैठक की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पद्मश्री निशानेबाज जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखकर की गई।

    कैबिनेट ने शिक्षा, रोजगार, कृषि, पर्यटन, कारागार प्रशासन और चारधाम यात्रा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इनमें उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने, उपनल कर्मचारियों को राहत देने और चारधाम यात्रा में संचालित घोड़ा-खच्चरों के लिए बीमा सहायता उपलब्ध कराने जैसे फैसले प्रमुख रहे।

    कैबिनेट के प्रमुख निर्णय

    ■ संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता, पाठ्यक्रम और परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
    ■ उपनल कर्मचारी समान कार्य-समान वेतन के लिए कटऑफ तिथि 12 नवंबर 2018 से बढ़ाकर 15 अगस्त 2024 कर दी गई है। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है।
    ■ लोक निर्माण विभाग मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण बढ़ी बिटुमेन की कीमतों के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया गया।
    ■ माध्यमिक शिक्षा प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार के अनुसार उत्तराखंड की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
    ■ आबकारी विभाग होलोग्राम के दोहराव की स्थिति में दोहरा कर नहीं लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में केवल एक बार ही कर वसूला जाएगा।
    ■ कृषि विभाग सगंध एवं हर्बल उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सेलाकुई स्थित सगंध केंद्र में मिलावट जांच की सुविधा विकसित की जाएगी। इसके लिए पांच पदों को स्वीकृति दी गई है।
    ■ पर्यटन विभाग अंतरराष्ट्रीय हिमालयन कार रैली के आयोजन को मंजूरी दी गई। आयोजन की जिम्मेदारी मद्रास की एक संस्था को सौंपी जाएगी। रैली में करीब 50 अंतरराष्ट्रीय कारों के भाग लेने की संभावना है।
    ■ गृह विभाग उत्तराखंड कारागार नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी गई। साथ ही कारागार अधीनस्थ सेवा नियमावली को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
    ■ राज्य आंदोलनकारी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की कनिष्ठ सहायक एवं पुलिस कांस्टेबल भर्ती-2024 में प्रमाण पत्र समय पर न बन पाने वाले राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को दस्तावेज सत्यापन में एक बार विशेष राहत देने का निर्णय लिया गया।
    ■ चारधाम यात्रा यात्रा में संचालित घोड़ा-खच्चरों के लिए सरकार 5 प्रतिशत बीमा दर के तहत सहायता राशि उपलब्ध कराएगी।
    ■ पशुपालन विभाग दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक आधारित गौवंश संवर्धन की पायलट परियोजना को मंजूरी दी गई।
    कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य में शिक्षा, रोजगार, पर्यटन, कृषि और पशुपालन क्षेत्र को नई गति देने वाला माना जा रहा है। विशेष रूप से उपनल कर्मचारियों, राज्य आंदोलनकारियों और चारधाम यात्रा से जुड़े हितधारकों को इन निर्णयों से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

  • सचिवालय सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास का प्रमुख केंद्र : धामी

    सचिवालय सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास का प्रमुख केंद्र : धामी

    सीएम ने सचिवालय संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को दिलाई शपथ

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को उत्तराखंड सचिवालय संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड सचिवालय संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दीपक जोशी, उपाध्यक्ष राकेश जोशी एवं संजय कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष प्रमिला टम्टा, महासचिव राजेन्द्र रतूड़ी, सचिव अतुल कुमार सिंह, संयुक्त सचिव दिव्यांशु डोभाल एवं सुरेन्द्र सिंह रावत, संप्रेक्षक श्रीमती रीना मखनवाल, कोषाध्यक्ष रमेश सिंह बर्त्वाल तथा प्रचार सचिव दीपक बिष्ट सहित समस्त नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सचिवालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि प्रदेश की शासन व्यवस्था की आत्मा और जनविश्वास का प्रमुख केंद्र है। यहीं से नीतियों का निर्माण होता है, जनकल्याणकारी योजनाओं को दिशा मिलती है और प्रदेश के विकास की रूपरेखा तैयार होती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी विकसित उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण सहभागी है। सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों और योजनाओं को धरातल पर उतारने तथा अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में सचिवालय परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने कहा कि सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी शासन एवं जनता के बीच विश्वास के मजबूत सेतु के रूप में कार्य करते हैं। उनकी कार्यकुशलता, कर्मनिष्ठा और समर्पण से सरकार की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रारंभ से ही शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने का प्रयास किया है। इसी क्रम में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लेते हुए समाधान की दिशा में कार्य किया गया है।

    उन्होंने कहा कि एक मजबूत, प्रेरित और संतुष्ट कर्मचारी तंत्र सुशासन की सबसे बड़ी शक्ति होता है। शासन और कर्मचारी जब टीम भावना के साथ कार्य करते हैं तो विकास कार्यों को गति मिलती है और जनता का विश्वास शासन व्यवस्था पर और अधिक मजबूत होता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, तकनीक आधारित सेवाओं को बढ़ावा देने और ई-गवर्नेंस को सशक्त करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध हों। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सचिवालय परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड सचिवालय बेहतर कार्य संस्कृति, आपसी समन्वय और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से सुशासन एवं कार्यकुशलता की नई मिसाल स्थापित करेगा।

    मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी से अपेक्षा की कि वे सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए देवभूमि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के सरकार के “विकल्प रहित संकल्प” को सिद्धि तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    इस अवसर पर शासन के वरिष्ठ अधिकारी, सचिवालय संघ के पदाधिकारी तथा सचिवालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • 2,400 करोड़ रुपये की सौगात: पीएम करेंगे प्रोत्साहन राशि का वितरण

    2,400 करोड़ रुपये की सौगात: पीएम करेंगे प्रोत्साहन राशि का वितरण

    विकसित भारत रोजगार योजना

    प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी रोजगारोन्मुखी योजना है, जिसका उद्देश्य देश में रोजगार सृजन को बढ़ावा देना, युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि करना तथा औपचारिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है

    इस अवसर पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून द्वारा मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, गढ़ी कैंट, देहरादून समेत हरिद्वार एवं सेलाकुई में भी समानांतर समारोह आयोजित होंगे

    कार्यक्रम के दौरान पीएमवीबीआरवाई के अंतर्गत नव नियुक्त कर्मचारियों को उनके नियोक्ताओं द्वारा नियुक्ति पत्र भी वितरित किए जाएंगे

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) के अंतर्गत देश भर के पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को प्रोत्साहन राशि जारी करने हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित होगा। प्रधानमंत्री श नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम के दौरान लगभग 2400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया जाएगा।19 जून को विज्ञान भवन में यह कार्यक्रम आयोजित होगा।

    इस अवसर पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून द्वारा मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, गढ़ी कैंट समेत हरिद्वार एवं सेलाकुई में भी समानांतर समारोह आयोजित होंगे।

    इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में राज्य के मंत्री, सांसद, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि, नियोक्ता, कर्मचारी तथा अन्य हितधारकों को भी आमंत्रित किया गया है।
    कार्यक्रम के दौरान पीएमवीबीआरवाई के अंतर्गत नव नियुक्त कर्मचारियों को उनके नियोक्ताओं द्वारा नियुक्ति पत्र भी वितरित किए जाएंगे, जो युवाओं के औपचारिक रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

    इस पहल की पहुँच व प्रभाव को और व्यापक बनाने के लिए, देश भर के 200 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों व राज्यों की राजधानियों में समानांतर कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, जो नई दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में किये जा रहे मुख्य कार्यक्रम से जुड़ेंगे।

    पीएमवीबीआरवाई भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी रोजगारोन्मुखी योजना है, जिसका उद्देश्य देश में रोजगार सृजन को बढ़ावा देना, युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि करना तथा औपचारिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है। विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए इस योजना में अतिरिक्त लाभ का प्रावधान किया गया है।

    योजना के अंतर्गत ₹99,446 करोड़ के कुल परिव्यय से दो वर्षों में देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार अवसरों के सृजन का अनुमान है। इनमें लगभग 1.92 करोड़ प्रथम बार औपचारिक कार्यबल में प्रवेश करने वाले युवाओं को लाभ मिलने की संभावना है। योजना का लाभ 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होगा।

    योजना के प्रमुख प्रावधान के अंतर्गत, ईपीएफओ में पहली बार पंजीकृत तथा ₹1 लाख प्रतिमाह तक वेतन प्राप्त करने वाले पात्र कर्मचारियों को एक माह के वेतन के बराबर, अधिकतम ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि दो किश्तों में प्रदान की जाएगी। पहली किश्त 6 माह की निरंतर सेवा पूर्ण करने पर तथा दूसरी किश्त 12 माह की सेवा एवं वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूर्ण करने के उपरांत देय होगी।

    अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह ₹3,000 तक का प्रोत्साहन दो वर्षों तक प्रदान किया जाएगा। विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह लाभ तीसरे एवं चौथे वर्ष तक भी विस्तारित रहेगा। 50 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम 2 तथा 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम 5 अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी।

    प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी)- योजना के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम (एबीपीएस) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी, जबकि नियोक्ताओं को प्रोत्साहन राशि उनके पैन-लिंक्ड बैंक खातों में जमा की जाएगी।

    क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून की उपलब्धियों के अंतर्गत, पीएमवीबीआरवाई के अंतर्गत क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। योजना के भाग-ए (प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारी) के अंतर्गत: मार्च 2026 में 435 प्रतिष्ठानों के 985 कर्मचारियों को लगभग ₹57.60 लाख की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। जून 2026 में 902 प्रतिष्ठानों के 3,991 कर्मचारियों को लगभग ₹2.22 करोड़ की राशि वितरित की जाएगी। इस प्रकार योजना के प्रथम 9 माह में कुल 4,976 प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को लगभग ₹2.80 करोड़ का लाभ प्राप्त होगा।

    नियोक्ताओं को प्रोत्साहन (भाग-बी)- योजना के भाग-बी के अंतर्गत अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है मार्च 2026 में 141 नियोक्ताओं को लगभग ₹2.50 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। जून 2026 में 562 नियोक्ताओं को लगभग ₹15.82 करोड़ की राशि प्रदान की जाएगी। इस प्रकार क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून के अंतर्गत नियोक्ताओं को अबतक कुल ₹18.32 करोड़ का लाभ प्रदान किया जाना अनुमन्य है। यह उत्तराखंड में रोजगार सृजन एवं सामाजिक सुरक्षा विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

  • सीमांत जनपदों में ग्रामीणों से सीधा संवाद कर रहे युवा स्वयंसेवक

    सीमांत जनपदों में ग्रामीणों से सीधा संवाद कर रहे युवा स्वयंसेवक

    सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास तथा युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज फेज-2 कार्यक्रम जारी

    उत्तरकाशी के सीमांत गांव सुखी, झाल्ला एवं बगोरी में योग, मनोरंजन खेल प्रतियोगिता, ग्राम दर्शन, आपदा प्रबंधन पर विशेष सत्रों का आयोजन

    इन​ कार्यक्रमों में अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश एवं उड़ीसा के 38 युवाओं ने किया प्रतिभाग

    उत्तरकाशी। मेरा युवा भारत (माय भारत), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, आइटीबीपी तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास तथा युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज फेज-2 कार्यक्रम जारी है। जिसके अंतर्गत उत्तरकाशी के सीमांत गांव सुखी, झाल्ला एवं बगोरी में योग, मनोरंजन खेल प्रतियोगिता, ग्राम दर्शन, आपदा प्रबंधन पर विशेष सत्रों का आयोजन कराया गया। इन​ कार्यक्रमों में अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश एवं उड़ीसा के 38 युवाओं ने प्रतिभाग किया। जिससे इन युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकासात्मक परिस्थितियों को निकटता से जानने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

    प्रतिभागी गांवों में जनजागरूकता, सामुदायिक संवाद एवं विकासोन्मुख गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। साथ ही वे स्थानीय युवाओं एवं ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर उनके अनुभवों, चुनौतियों तथा विकास संबंधी आवश्यकताओं को समझ रहे हैं।

    विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज फेज-2 कार्यक्रम के तहत सभी प्रतिभागियों ने स्थानीय नागरिकों, जन प्रतिनिधियों से संवाद किया। गांव में हो रही विभिन्न प्रकार की खेती ( सेब, राजमा, आलू आदि) के बारें में जानकारी ली। प्रतिभागियों ने गांव के विद्यालयों में भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान प्रतिभागियों द्वारा सभी छात्र एवं छात्राओं को अपने राज्यों की भाषा, संस्कृति, खान पान के बारें में जानकारी दी गयी। साथ ही प्रतिभागियों को गढ़वाली के कुछ शब्द एवं लोक गीत के बारें में बताया गया।

    कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी प्रतिभागियों द्वारा उत्तरकाशी के सीमांत गांव सुखी गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। प्रतिभागियों ने पारंपरिक लोक गीतों और लोकनृत्य के माध्यम से अपने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की गई।

  • उत्तराखण्ड में 98 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का वितरण पूर्ण

    उत्तराखण्ड में 98 प्रतिशत गणना प्रपत्रों का वितरण पूर्ण

    23 प्रतिशत डिजिटाईज

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रेस कांफ्रेंस कर एसआईआर की दी विस्तृत जानकारी

    डिजिटाइज में अल्मोड़ा,पौड़ी, पिथौरागढ़ सबसे आगे

    देहरादून। उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डाॅ विजय कुमार जोगदण्डे ने बुधवार को सचिवालय में मीडिया को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के तहत 98 प्रतिशत गणना फार्म वितरित हो चुके हैं। जबकि 12 प्रतिशत गणना फार्म को डिजिटाइज किया जा चुका है। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में 5 जनपद क्रमशः चम्पावत,रुद्रप्रयाग अल्मोड़ा,चमोली,पिथौरागढ़ और पौड़ी गढ़वाल में 99 प्रतिशत से अधिक फार्म वितरित हो चुके हैं। जबकि सबसे कम प्रगति वाले जनपदों में भी देहरादून में लगभग 95 प्रतिशत,नैनीताल में 96 प्रतिशत,नैनीताल और टिहरी में 97 प्रतिशत फार्म का वितरण किया जा चुका है।

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में गणना फार्म को डिजिटाइज करने में अल्मोड़ा 33 प्रतिशत,पौड़ी गढ़वाल 25 प्रतिशत, पिथौरागढ़ 23 प्रतिशत के साथ शीर्ष स्थान में हैं। इसके साथ ही नैनीताल में 4 प्रतिशत, देहरादून में 7 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर जनपद में लगभग 8 प्रतिशत ही फार्म डिजिटाइज हुए हैं। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डाॅ विजय कुमार जोगदण्डे ने बताया कि सभी जनपदों को इस अभियान को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों द्वारा 22 हजार 900 बूथ लेवल एजेंट की तैनाती कर दी गई है। गुरुवार,18 जून को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में राजनैतिक दलों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी।

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताय कि 7 जुलाई तक गणना फार्म के वितरण और संकलन के बाद एक सप्ताह में बूथों का पुर्नगठन किया जाएगा। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन किया जाएगा इसके साथ ही 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 के बीच दावे एवं आपत्तियों को दर्ज करने का समय दिया गया है। इसी बीच 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक सभी नोटिस जारी कर दावे आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। आयोग के निर्देशानुसार 15 सितंबर 2026 अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डाॅ विजय कुमार जोगदण्डे ने बताया कि मतदाता स्वयं भी ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से अपना गणना फार्म आॅनलाइन भर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाताओं की सुविधा के लिए ”बुक ए काॅल विद बीएलओ” के फीचर से मतदाता एक क्लिक पर अपने बीएलओ के साथ काॅल बुक करा सकते हैं। इसके लिए मतदाता https://voters.eci.gov.in वेबसाइट पर विजिट करके या ईसीआई नेट मोबाइल ऐप को डाउनलोड कर अपनी काॅल बुक करा सकते हैं। काॅल बुक कराने के बाद दो दिन के भीतर बीएलओ द्वारा मतदाता से स्वयं संपर्क किया जाएगा।

    “आसानी से सर्च कर सकते हैं 2003 की मतदाता सूची में नाम”

    अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डाॅ विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड की आधिकारिक वेबसाइट https://ceo.uk.gov.in पर उपलब्ध है, जहां मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र, अपने तथा अपने पिता/पति के नाम के आधार पर मतदाता क्रमांक एवं बूथ संख्या की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही गली, मोहल्लों और एरिया के नाम से भी मतदाता सूची खोजने की सुविधा प्रदान की गई है।

  • बिना जरूरत ICU में भर्ती, अवैध वसूली का खेल; कहीं डॉक्टर गायब

    बिना जरूरत ICU में भर्ती, अवैध वसूली का खेल; कहीं डॉक्टर गायब

    आयुष्मान योजना

    एसएचए की छापेमारी में योजना में संबद्ध अस्परतालों की बदहाल व्यवस्थाएं उजागर

    एक डायलिसिस यूनिट समेत तीन अस्पतालों के निलंबन और दो अस्पतालों पर अर्थदंड की संस्तुति

    देहरादून।  आयुष्मान योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) की छापेमारी में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

    राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी के निर्देश पर निदेशक क्लेम डा. सरोज नैथानी के नेतृत्व में टीम ने पावरलाइफ, प्रेमसुख, प्रकाशदीप, वेलमेड और सुनंदा मेडिकल सेंटर का औचक निरीक्षण किया। मरीजों से अवैध वसूली, बिना आवश्यकता आइसीयू में भर्ती, डाक्टरों की गैरमौजूदगी, खराब डायलिसिस सेवाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी खामियां मिलने पर प्राधिकरण ने प्रकाशदीप व पावरलाइफ अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट की संबद्धता निलंबित करने की संस्तुति की है। साथ ही प्रेमसुख व सुनंदाा अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाने की भी संस्तुति की है। सभी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

    पावरलाइफ अस्पताल में मरीज अनावश्यक आइसीयू में भर्ती

    पावरलाइफ अस्पताल में टीम को सामान्य वार्ड नहीं मिला। यहां छह बेड का एचडीयू और आठ बेड का आइसीयू संचालित होता मिला। टीम ने पाया कि घबराहट और उल्टी की शिकायत वाले एक मरीज को अनावश्यक रूप से आइसीयू में भर्ती रखा गया था। अस्पताल में टोल फ्री नंबर और सूचना-शिक्षा एवं संचार (आइईसी) सामग्री भी प्रदर्शित नहीं थी। आइसीयू की चार्टिंग अपडेट नहीं की गई थी, जबकि बायोमेडिकल वेस्ट की लाग बुक पिछले तीन माह से नहीं भरी गई थी।

    प्रेमसुख अस्पताल में मिलीं कई खामियां

    प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान के लाभार्थी से 48 हजार रुपये और अन्य मदों में छह हजार रुपये लेने की शिकायत मिली। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्री-आथराइजेशन में देरी, रैंप का अभाव और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पाई गई। अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना से संबंधित सूचना बोर्ड, टोल फ्री नंबर और जनजागरूकता सामग्री भी नहीं लगी थी। आपरेशन थिएटर की प्रभारी नर्स की जिम्मेदारी एक ओटी तकनीशियन निभाता मिला। इसके अलावा स्टाफ को मरीजों की भर्ती प्रक्रिया की भी पर्याप्त जानकारी नहीं थी।

    प्रकाशदीप अस्पताल में डाक्टर ही गायब

    प्रकाशदीप अस्पताल की स्थिति सबसे चिंताजनक पाई गई। यहां मरीजों से 85 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायत मिली। अस्पताल का आइसीयू बेहद खराब स्थिति में मिला। दो गंभीर मरीजों को तत्काल इंदिरेश अस्पताल रेफर किया गया। निरीक्षण के दौरान एक भी उपचाररत चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। मरीजों ने बताया कि पिछले 10 दिनों से नियमित रूप से डाक्टर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और उपचार केवल नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में केवल एक एंबुलेंस उपलब्ध थी।

    सुनंदा मेडिकल सेंटर में डायलिसिस यूनिट में मिली गंभीर खामियां

    सुनंदा मेडिकल सेंटर में डायलिसिस यूनिट की स्थिति बेहद खराब मिली। अस्पताल में वेंटिलेशन, रैंप और अग्नि निकास मार्ग नहीं मिला। डायलिसिस करा रहे मरीजों के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं थे। टोल फ्री नंबर और जनजागरूकता सामग्री का अभाव था। डायलिसिस के लिए उपयोग होने वाला आरओ सिस्टम भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। तीमारदारों के लिए बैठने और विश्राम की व्यवस्था भी नहीं थी।

    वेलमेड अस्पताल में भी कमियां मिलीं

    वेलमेड अस्पताल में रैंप और जनजागरूकता सामग्री नहीं मिली। 140 बेड वाले अस्पताल में 100 मरीज भर्ती होने के बावजूद केवल छह आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और सात राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के मरीज मिले। जांच के दौरान अस्पताल में सिर्फ एक आरओ प्लांट संचालित मिला। बायोमेडिकल वेस्ट की लाग बुक का रखरखाव भी संतोषजनक नहीं पाया गया। आपरेशन थिएटर के कल्चर परीक्षण की इन-हाउस रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी।

  • कोटद्वार को मिली बड़ी सौगात, गोपेश्वर व ऋषिकेश एम्स के लिए बस सेवा शुरू

    कोटद्वार को मिली बड़ी सौगात, गोपेश्वर व ऋषिकेश एम्स के लिए बस सेवा शुरू

    विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने दिखाई हरी झंडी

    कोटद्वार। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने आज कोटद्वार वासियों को एक महत्वपूर्ण सौगात देते हुए उत्तराखंड परिवहन निगम की दो नई बस सेवाओं का शुभारंभ किया।
    उन्होंने कोटद्वार से गोपेश्वर तथा कोटद्वार से ऋषिकेश एम्स के लिए संचालित होने वाली रोडवेज बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि जनता की सुविधाओं को प्राथमिकता देना उनकी प्रतिबद्धता है और इसी दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि कोटद्वार से ऋषिकेश एम्स के लिए सीधी बस सेवा की मांग क्षेत्रवासियों द्वारा वर्षों से की जा रही थी। विशेष रूप से मरीजों, उनके परिजनों एवं उपचार के लिए ऋषिकेश आने-जाने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब इस सीधी बस सेवा के शुरू होने से लोगों को बेहतर, सुरक्षित एवं सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

    उन्होंने कहा कि ऋषिकेश स्थित एम्स उत्तराखंड सहित पूरे प्रदेश के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में कोटद्वार से सीधे एम्स तक बस सेवा शुरू होना क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत साबित होगा। इससे मरीजों को बार-बार वाहन बदलने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी तथा समय और धन दोनों की बचत होगी।

    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोटद्वार से गोपेश्वर के लिए बस सेवा शुरू होने से गढ़वाल मंडल के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सुदृढ़ होगा। इससे यात्रियों, छात्रों, कर्मचारियों, व्यापारियों एवं पर्यटकों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप नई सेवाएं शुरू की जा रही हैं।

    ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि कोटद्वार प्रदेश का प्रवेश द्वार होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण व्यापारिक एवं शैक्षणिक केंद्र भी है। यहां से विभिन्न क्षेत्रों के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन नई बस सेवाओं का लाभ बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उठाएंगे तथा उनकी यात्रा अधिक सुगम और सुविधाजनक बनेगी।

    उन्होंने इस उपलब्धि के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों को नई बस सेवाओं के शुभारंभ पर बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनता की सुविधा और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए उनके प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

    इस अवसर पर उत्तराखंड परिवहन निगम के अधिकारी, जिला अध्यक्ष कोटद्वार राज गौरव, महापौर शैलेन्द्र रावत , मण्डल अध्यक्ष विकासशदीप मित्तल , विजय नंद पोखरियाल, सतीश गौड़, मंडल अध्यक्ष प्रेमा खंतवाल, आशीष रावत, सुनीता देवी, आदित्य त्रिपाठी, राजेंद्र जेजेडी, प्रमोद केस्टवाल एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

  • RCS पोर्टल लॉन्च: सहकारी सेवाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन

    RCS पोर्टल लॉन्च: सहकारी सेवाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन

    चयनित 45 सहायक सहकारी निरीक्षकों को मिले नियुक्ति पत्र

    सहकारिता विभाग के नये पोर्टल का शुभारंभ

    देहरादून। उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ सभागार, देहरादून में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने निबंधक सहकारी समितियां कार्यालय के अत्याधुनिक ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया।
    इसके अलावा उन्होंने आयोग से चयनित 45 सहायक सहकारी निरीक्षकों (वर्ग-2) को नियुक्ति पत्र वितरित किये और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नव विकसित पोर्टल के माध्यम से सहकारी समितियों से जुड़ी सभी सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध होंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यों में तेजी आएगी। जिससे आमजन को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    डॉ रावत ने कहा कि पोर्टल पर सहकारी समितियों का पंजीकरण, दस्तावेज अपलोड, शिकायत एवं सुझाव निस्तारण, नामांकन सत्यापन, वार्षिक प्रतिवेदन, ऑडिट प्रबंधन, सदस्यता संबंधी विवरण, दस्तावेज प्रबंधन तथा एमआईएस रिपोर्टिंग जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

    नव नियुक्त सहायक सहकारी निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुये डॉ. रावत ने कहा कि वे विकसित भारत के युवा ब्रांड एम्बेसडर हैं और सहकारिता आंदोलन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका होगी।
    उन्होंने नव नियुक्त सहायक सहकारी निरीक्षकों को कहा कि वह प्रत्येक ब्लॉक में सहकारिता नेटवर्क को मजबूत करते हुए कम से कम एक बहुद्देशीय सहकारी समिति को आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करें। सरकार की योजना प्रत्येक ब्लॉक में एक ‘सहकारिता ग्राम’ स्थापित करने की है, जिसे आपके समर्पण और नवाचार से शीघ्र साकार किया जा सकेगा।

    डॉ. रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पहली नियुक्ति मिलना युवाओं के लिए एक अवसर है। उन्हें विश्वास जताया कि नव नियुक्त अधिकारी अपने कार्यों और नवाचारों के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई गति देंगे। डॉ रावत ने कहा शीघ्र ही ब्लॉक स्तर पर 100 ऋण मेले लगाये जायेंगे, जिनके माध्यम से किसानों, काश्तकारों, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को ऋण वितरित किया जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता सचिव डॉ. इकबाल अहमद ने कहा कि सहकारिता विभाग आज जन-जन से जुड़ा विभाग बन चुका है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
    उन्होंने कहा, “सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में नव नियुक्त अधिकारियों का खासा योगदान रहेगा।

    कार्यक्रम के दौरान संयुक्त निबंधक मंगला प्रसाद त्रिपाठी ने नव नियुक्त सहकारी निरीक्षकों को विभागीय दायित्वों, कार्य प्रणाली एवं अपेक्षाओं से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ सहकार बंधु प्रदीप चौधरी, सुभाष रमोला, अनु सचिव सहकारिता सुरेंद्र दत्त बेलवाल, अपर निबंधक ईरा उप्रेती, आनंद ए.डी. शुक्ल, संयुक्त निबंधक एम.पी. त्रिपाठी, रमेंद्री मंद्रवाल, उप निबंधक राजेश चौहान, मोनिका चुनेरा, सहायक निबंधक देहरादून बलवंत मनराल, उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के वरिष्ठ प्रबंधक त्रिभुवन रावत सहित विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, तीन अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

    आयुष्मान योजना में गड़बड़ी, तीन अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

    एक पर 86 हजार का जुर्माना

    कैशलेस इलाज से इनकार

    अवैध वसूली और गुणवत्ता मानकों में खामियां मिलने पर एसएचए की सख्त कार्रवाई

    एसआरएमएस, ओजस्वी और अरिहंत अस्पतालों पर गिरी गाज

    बलूनी अस्पताल को 15 दिन में कमियां दूर करने का अल्टीमेटम

    देहरादून। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई), अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना (एएयूवाई) और राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लाभार्थियों को कैशलेस इलाज से वंचित करने, अवैध वसूली, संक्रमण नियंत्रण और गुणवत्ता मानकों में गंभीर खामियां पाए जाने पर बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज तथा देहरादून के ओजस्वी और अरिहंत अस्पताल की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। वहीं, बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना लगाते हुए 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

    एसआरएमएस ने रेफरल मरीजों को लौटाया, कैशलेस इलाज से भी किया इनकार

    राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ जिलों से सरकारी अस्पतालों के रेफरल लेकर पहुंचे मरीजों को भर्ती करने और कैशलेस इलाज देने से इनकार किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में पाया गया कि कई मामलों में वैध रेफरल पत्रों को स्वीकार नहीं किया गया और मरीजों को अन्य केंद्रों से नया रेफरल लाने के लिए कहा गया।

    चंपावत जिले के एक मरीज को उप जिला चिकित्सालय टनकपुर से रेफर किए जाने के बावजूद भर्ती नहीं किया गया। नोटिस में मोरपाल कश्यप, लक्ष्मी देवी, सुरेश राम और सूरज गुप्ता सहित कई लाभार्थियों के मामलों का उल्लेख किया गया है। नैनीताल निवासी महेंद्र सिंह ने शिकायत की है कि उनके पिता से पीएम-जेएवाई के तहत भर्ती होने के बावजूद इलाज के लिए करीब 1.44 लाख रुपये वसूले गए, जो अब तक वापस नहीं किए गए हैं। अस्पताल को सात दिनों के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में अस्पताल नए लाभार्थियों को भर्ती नहीं कर सकेगा, हालांकि पहले से भर्ती मरीजों का उपचार जारी रहेगा।

    ओजस्वी अस्पताल ने लाभार्थी से लिए 12 हजार रुपये, 60 हजार का जुर्माना

    देहरादून स्थित ओजस्वी अस्पताल की पीएम-जेएवाई, एएयूवाई और एसजीएचएस के तहत संबद्धता भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल ने एक लाभार्थी से 12 हजार रुपये वसूले थे, जो कैशलेस उपचार के नियमों का उल्लंघन है। हालांकि बाद में यह राशि वापस कर दी गई, लेकिन यह कार्रवाई राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की आपत्ति के बाद की गई।

    निरीक्षण के दौरान रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) की उपलब्धता भी अपर्याप्त पाई गई। एचईएम पोर्टल पर दर्ज चिकित्सक का संपर्क नंबर सक्रिय नहीं मिला और निरीक्षण के समय संबंधित चिकित्सक मौजूद नहीं थे। अस्पताल पर वसूली गई राशि का पांच गुना यानी 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर डी-एम्पैनलमेंट सहित अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।

    डायलिसिस और संक्रमण नियंत्रण में खामियां, अरिहंत अस्पताल निलंबित

    देहरादून स्थित अरिहंत अस्पताल की संबद्धता डायलिसिस यूनिट, संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियों के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। निरीक्षण के दौरान डायलिसिस बेड के बीच पर्याप्त दूरी नहीं पाई गई। डायलिसिस प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए कोई नामित मेडिकल ऑफिसर मौजूद नहीं था और रिकॉर्ड पर चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के हस्ताक्षर भी नहीं मिले।
    इसके अलावा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की उपलब्धता और उपयोग भी संतोषजनक नहीं पाया गया। डायलिसिस मशीनों के संक्रमणमुक्त करने की प्रक्रिया, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से अनिवार्य सत्यापन में भी कमियां मिलीं। लाभार्थी सहायता केंद्र और सूचना प्रदर्शन व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं थी। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सुधारात्मक रिपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण रिकॉर्ड और अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में नए लाभार्थियों की भर्ती नहीं की जा सकेगी, जबकि पहले से भर्ती मरीजों का उपचार जारी रहेगा।

    बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना

    बलूनी अस्पताल पर एक आयुष्मान लाभार्थी से अवैध रूप से धनराशि वसूलने के मामले में 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में पाया गया कि एक पीएम-जेएवाई लाभार्थी से दवाइयों और डायग्नोस्टिक जांच के नाम पर 17,250 रुपये लिए गए। अस्पताल ने राशि लौटाने का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में लाभार्थी की रसीद, बैंक लेनदेन या भुगतान वापसी से जुड़े कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
    निरीक्षण के दौरान अस्पताल में रैंप, आईसीयू की साफ-सफाई, हाउसकीपिंग व्यवस्था और तीमारदारों के लिए पर्याप्त सुविधाओं में भी कमियां पाई गईं। इसके अलावा आईसीयू में ऑक्सीजन, एयर और सक्शन की अनिवार्य पाइपलाइन व्यवस्था को भी मानकों के अनुरूप दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का अल्टीमेटम दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उसकी संबद्धता भी निलंबित की जा सकती है।