Category: ताजा खबर

  • सैन्य अधिकारी भारतीयों के विश्वास और आकांक्षाओं के सच्चे संरक्षक : मुर्मू

    सैन्य अधिकारी भारतीयों के विश्वास और आकांक्षाओं के सच्चे संरक्षक : मुर्मू

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गरिमामई उपस्थिति में आईएमए की पासिंग आउट परेड सम्पन्न

    481 भारतीय एवं 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट बने सैन्य अधिकारी, 9 महिला कैडेटों ने रचा इतिहास

    देहरादून। देश की राष्ट्रपति एवं सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आज देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आयोजित पासिंग आउट परेड (पीओपी) में मुख्य अतिथि एवं समीक्षा अधिकारी के रूप में शामिल हुईं।

    राष्ट्रपति ने भारतीय सैन्य अकादमी के 158वें नियमित तथा 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की भव्य पासिंग आउट परेड की समीक्षा की और नवप्रशिक्षित सैन्य अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं।

    अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पास आउट होने वाले कैडेट्स को भारत माता की रक्षा के लिए कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी केवल देश की सीमाओं के प्रहरी ही नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं के भी संरक्षक हैं।

    महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

    इस वर्ष की पासिंग आउट परेड की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 9 महिला कैडेटों का सफलतापूर्वक पास आउट होना रहा। भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक पड़ाव है, जो महिला-नेतृत्व वाले विकास तथा सशक्त भारत की अवधारणा को नई ऊर्जा प्रदान करता है।

    वैश्विक रक्षा सहयोग का सशक्त प्रतीक

    परेड में 481 भारतीय कैडेटों के साथ 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए। राष्ट्रपति ने इसे भारत की वैश्विक मित्रता, आपसी विश्वास तथा अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग के बढ़ते आयामों का प्रतीक बताया।

    भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान

    राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और तकनीकी प्रगति के इस दौर में भारतीय सेना को निरंतर नवाचार, आधुनिकता और अनुकूलनशीलता के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करने, उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने तथा सैनिकों के कल्याण और सैन्य प्रभावशीलता के बीच संतुलन स्थापित करने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भारतीय सैन्य अकादमी के समादेशक लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह सहित सैन्य एवं नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य अतिथि तथा बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनकर नवप्रशिक्षित अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया।

    राष्ट्रपति ने सभी नव नियुक्त सैन्य अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे राष्ट्र की सुरक्षा, सम्मान और अखंडता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • मुख्यमंत्री ने दिवंगत निशानेबाज जसपाल को भावभीनी श्रद्धांजलि की अर्पित

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत निशानेबाज जसपाल को भावभीनी श्रद्धांजलि की अर्पित

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज पद्मश्री से सम्मानित एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निशानेबाज स्वर्गीय श्री जसपाल राणा के देहरादून आवास पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय जसपाल राणा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिवारजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना की।

  • अनुभव आधारित शिक्षा की अनूठी पहल: बच्चों ने किया फलोद्यान का भ्रमण

    अनुभव आधारित शिक्षा की अनूठी पहल: बच्चों ने किया फलोद्यान का भ्रमण

    रामनगर। सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम के तहत पाठ्यक्रम निर्माण समिति की टीम ने सोमवार को सांवल्दे स्थित लगभग 200 बीघे के फलोद्यान का भ्रमण कराया। जोतिबा फुले एवं सावित्रीबाई फुले सायंकालीन विद्यालय से जुड़े 30 से अधिक बच्चों ने इस दौरान आम, कटहल, लीची, अमरूद और आंवले की विभिन्न प्रजातियों, वृक्षों की देखभाल तथा सिंचाई व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की।

    फल उत्पादक अंकित बेलवाल ने बच्चों को बागवानी के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराते हुए बताया कि वानिकी के नियमों के अनुसार प्रत्येक पेड़ के रोपण का एक निर्धारित स्थान होता है। उन्होंने कहा कि आम और लीची के बागों के बाहरी हिस्से में कटहल के पेड़ लगाए जाते हैं, जिससे आंधी और तूफान के दौरान तेज हवाओं का प्रभाव कम हो और फलदार वृक्षों को नुकसान न पहुंचे।

    बेलवाल ने बताया कि देश में आम की एक हजार से अधिक किस्में पाई जाती हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आम से अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आम की नई किस्मों का विकास कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशालाओं में किया जाता है।

    शाम के सत्र में विद्यार्थियों ने भ्रमण के अनुभवों के आधार पर चित्र बनाए और अनुभव लेखन किया। बच्चों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हुए एक-दूसरे के कार्यों की सराहना भी की।

    एससीईआरटी देहरादून में विद्यालयी शिक्षा पाठ्यक्रम निर्माण समिति के सदस्य रह चुके मदन पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान स्कूल प्रणाली में प्रत्यक्ष अनुभवों के अवसर सीमित हैं। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी भ्रमण और अवलोकन के माध्यम से सीखते हैं तथा बाद में उन अनुभवों को लेखन और चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी बनती है।

    कार्यक्रम संयोजक नवेंदु मठपाल ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियों से सायंकालीन विद्यालय के लिए तैयार किए जा रहे पाठ्यक्रम को समृद्ध करने में मदद मिलेगी।

    इस अवसर पर नवेंदु मठपाल, मदन पाण्डेय, अंकित बेलवाल, नंदराम आर्य, रितु बेलवाल, वंदना और सुमित कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

  • भारतीय खेल जगत में शोक: दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का हार्ट अटैक से निधन

    भारतीय खेल जगत में शोक: दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का हार्ट अटैक से निधन

    अचानक डूब गया , खेल जगत का चमकता सितारा

    खेल जगत में शोक की लहर

    देहरादून। भारत के दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का निधन हो गया है। कुछ समय पूर्व उन्हें स्वदेश लौटते हुए जहाज में हृदय घात हुआ था, जिसका उपचार दिल्ली के मैक्स अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर से खेल जगत और देश व उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

    जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हुआ था। वह मूल रूप से नैनबाग चिलामू के रहने वाले हैं। उनके पिता नारायण सिंह राणा उत्तराखंड सरकार में खेल मंत्री रहे हैं। उन्होंने 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी थी। महज 18 साल की उम्र में एशियाई खेलों में देश का परचम लहराने वाले जसपाल को भारतीय शूटिंग टीम का ‘मशाल वाहक’ माना जाता था।

    उनकी उपलब्धियों की सूची बेहद लंबी है। एशियाई खेलों के अलावा राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने भारत के लिए कई स्वर्ण और अन्य पदक जीते। 1995 में चेन्नई और 1999 में काठमांडू में आयोजित SAIF खेलों में उन्होंने 8-8 स्वर्ण पदक जीतकर रिकॉर्ड बनाया। 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में उनकी महारत को आज भी मिसाल के तौर पर देखा जाता है।

    देश ने भी उनके योगदान को समय-समय पर सम्मानित किया। उन्हें वर्ष 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्म श्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया। द्रोणाचार्य पुरस्कार उन्हें एक सफल कोच के रूप में भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मिला।
    खिलाड़ी के रूप में सफलता के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग में कदम रखा और जूनियर राष्ट्रीय टीम के कोच बने। उनके मार्गदर्शन में सौरभ चौधरी और अनीस भनवाला जैसे युवा निशानेबाज तैयार हुए। वे ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर की कोच भी रहे।
    मनु भाकर ने 2024 के पेरिस ओलंपिक में दो ऐतिहासिक कांस्य पदक जीते, जिसमें जसपाल राणा की अहम भूमिका रही। राष्ट्रीय राइफल संघ NRAI ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था।

    जसपाल राणा के निधन से भारतीय शूटिंग ने अपना सबसे बड़ा स्तंभ खो दिया है। उनके शिष्यों और खेल प्रेमियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

  • कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत

    कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत

    अल्मोड़ा जनपद उच्च शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण

    दौरे के दौरान विभिन्न शैक्षणिक व सहकारी संस्थानों का भी करेंगे निरीक्षण

    देहरादून । सूबे के कैबिनेट मंत्री डाॅ धन सिंह रावत कुमाऊं मण्डल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। अपने भ्रमण के दौरान डाॅ. रावत अल्मोड़ा जनपद में विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करेंगे। इस दौरान डाॅ. रावत राजकीय महाविद्यालय तल्ला-सल्ट व स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग कर नवनिर्मित भवनों का लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा वह अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न शैक्षणिक व सहकारी संस्थानों का औचक निरीक्षण भी करेंगे। डाॅ. रावत अल्मोड़ा में केन्द्र सरकार के विकास, विश्वास व जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रेस वार्ता को सम्बोधित करेंगे।

    कैबिनेट मंत्री व अल्मोड़ा जनपद के प्रभारी मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि वह 11 व 12 जून को कुमाऊं मण्डल के भ्रमण पर रहेंगे। उन्होंने बताया कि 12 जून शुक्रवार को वह अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में प्रतिभाग करेंगे। इसके अलावा वह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में वाणिज्य संकाय के नव निर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे। इसके उपरांत डाॅ. रावत केन्द्र सरकार द्वारा विकास के, विश्वास के, जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने पर प्रेस वार्ता को सम्बोधित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने अपने 12 वर्ष पूर्ण कर लिये हैं। डाॅ. रावत अपने कुमाऊं भ्रमण के दौरान विभिन्न शैक्षिणिक कार्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों व सहकारी समितियों का भी औचक निरीक्षण करेंगे।

     

    इससे पहले डाॅ. रावत अपने तीन दिवसीय श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र भ्रमण के अंतिम दिन आज डुमणीकोट, पाटों में व्यापक स्तर पर जनसम्पर्क कर आम लोगों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। इसके अलावा उन्होंने 230.93 लाख की लागत से गणतखाल-कठुखाल मोटर मार्ग के डामरीकरण का लोकार्पण तथा 25 लाख की लागत से बनने वाले देवराड़ी खेल मैदान के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया, साथ ही उन्होंने बूंगीधार में प्रभागीय वनाधिकारी पौड़ी, उपजिलाधिकारी थलीसैण व दूधातोली विनसर चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विनसर महादेव मंदिर की भूमि हस्तांतरण पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये। बैठक के उपरांत डाॅ. रावत ने अल्मोड़ा जनपद के सल्ट पहुंचकर राजकीय महाविद्यालय तल्ला-सल्ट में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के नवनिर्मित अकादमिक भवन का लोकापर्ण किया।

  • नवाचार और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड ने जारी की नई नीति-2026

    नवाचार और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड ने जारी की नई नीति-2026

    विज्ञान आधारित विकास, नवाचार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिलेगा नया आधार

    देहरादून। धामी सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी कर दी गई है।

    इस नीति का उद्देश्य राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विकास और नवाचार को बढ़ावा देते हुए उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
    नई नीति में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक का प्रभावी उपयोग पर जोर दिया गया है।

    नीति का लक्ष्य आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सतत विकास की दिशा में राज्य को आगे बढ़ाना है।
    इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा, जो नीति के कार्यान्वयन, अनुश्रवण और मूल्यांकन का कार्य करेगा। इसके साथ ही अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विकेन्द्रीकृत संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी।

    नीति के तहत राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के लिए व्यापक सहयोगात्मक तंत्र विकसित किया जाएगा।

    राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्ट-अप्स में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) इकाइयों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन भी किया जाएगा। नीति के अंतर्गत वैज्ञानिक जानकारी, शोध निष्कर्षों और संसाधनों तक सभी हितधारकों की सुगम पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। सार्वजनिक निधि से संचालित शोध कार्यों से प्राप्त डेटा का डिजिटल भंडारण किया जाएगा तथा इसे सभी हितधारकों तक सुरक्षित और सरल रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। भारत सरकार की “एक राष्ट्र, एक सदस्यता” पहल के माध्यम से शोध और विज्ञान संबंधी अभिलेखागारों तक पहुंच भी उपलब्ध होगी। “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की अवधारणा को साकार करने के लिए तकनीक के स्वदेशीकरण और स्थानीयकरण को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।

    स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप समाधान

    नई नीति के तहत राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को भी आधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ा जाएगा। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। नवीन शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों के कौशल विकास हेतु अत्याधुनिक शिक्षण-अधिगम केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। विज्ञान संचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विज्ञान नगरी, विज्ञान केंद्र, तारामंडल, अटल टिंकरिंग लैब, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रयोगशालाएं, खगोल अवलोकन संघ तथा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

    वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के बीच सहयोग

    नई नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर) और मिश्रित वास्तविकता (एमआर) जैसी उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक, खाद्य-जल-ऊर्जा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान एवं विकास कार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नई नीति के तहत जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए कार्यशालाएं, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फेलोशिप और छात्रवृत्तियां संचालित की जाएंगी। राज्य के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक विशेष सहभागिता पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

    नवाचार वेधशाला

    इसके अतिरिक्त राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला की स्थापना की जाएगी, जो सभी योजनाओं, कार्यक्रमों, अनुदानों और प्रोत्साहनों से संबंधित जानकारी का केंद्रीकृत डिजिटल भंडार होगी। अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे तथा नवप्रवर्तकों को पेटेंट, कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा अधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान की जाएगी। उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 राज्य में विज्ञान आधारित विकास, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी तथा विकसित और सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण में नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

    चुनौतियों के समाधान पर जोर

    राज्य में विज्ञान प्रसार के लिए नोडल एजेंसी के रूप में उत्तररखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्वोगिकी परिषद (यूकॉस्ट) कार्य कर रही है। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के अनुसार उत्तराखडं वर्तमान में प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन के साथ ही हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। नई नीति इन चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों, शोध संस्थाओं, शिक्षाविदों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। प्रो दुर्गेश पंत के अनुसार यह नीति महिलाओं, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के निवासियों, सीमांत समुदायों और दिव्यांगजनों को समान अवसर प्रदान करते हुए विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में समावेशी और समान भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

    “उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार

    नीति-2026 हमारे राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हमारा उद्देश्य केवल विज्ञान और तकनीक का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसे आम जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन से जोड़ना है। यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच प्रदान करेगी। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं विकसित उत्तराखंड के निर्माण को नई गति मिलेगी।
    पुष्कर सिंह धामी
    मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

  • राज्यभर में कंट्रोल रूम व हेल्प डेस्क शुरू

    राज्यभर में कंट्रोल रूम व हेल्प डेस्क शुरू

    निर्वाचन आयोग की चेतावनी- ओटीपी किसी से साझा न करें

    मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान शुरू

    बीएलओ को समय पर लौटाएं गणना फार्म

    देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड में विधानसभा निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य 8 जून 2026 से शुरू हो गया है। मतदाताओं की सुविधा के लिए राज्य मुख्यालय तथा सभी जनपद मुख्यालयों में कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं।

    निर्वाचन विभाग के अनुसार, किसी भी जनपद के बाहर से टोल फ्री नंबर 1950 पर संपर्क करने के लिए संबंधित जनपद का एसटीडी कोड लगाना अनिवार्य होगा, जबकि जनपद के भीतर रहने वाले मतदाता सीधे 1950 डायल कर आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी, सहायता या शिकायत के लिए मतदाता इन कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकते हैं।

    इसके अतिरिक्त मतदाता भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर लॉगिन कर “बुक अ कॉल विद बीएलओ” सुविधा के माध्यम से अपने बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से सीधे संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए मतदाता को अपना ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा।
    voters.eci.gov.in

    निर्वाचन विभाग ने साइबर ठगी से सावधान रहने की सलाह देते हुए स्पष्ट किया है कि भारत निर्वाचन आयोग अथवा निर्वाचन कार्य में तैनात कोई भी अधिकारी या कर्मचारी किसी मतदाता से ओटीपी नहीं मांगता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
    विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि बीएलओ द्वारा उपलब्ध कराए गए गणना फार्म में सही एवं पूर्ण जानकारी दर्ज करें, निर्धारित स्थान पर हस्ताक्षर करें तथा उसकी प्रति समय पर बीएलओ को वापस उपलब्ध कराएं, ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

  • मुख्यमंत्री ने चार ओपन जिम और बैडमिंटन कोर्ट के निर्माण को दी स्वीकृति

    मुख्यमंत्री ने चार ओपन जिम और बैडमिंटन कोर्ट के निर्माण को दी स्वीकृति

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डिफेंस कॉलोनी के लिए चार ओपन जिम और एक बैडमिंटन कोर्ट स्वीकृत किया है। इस आशय की जानकारी डिफेंस कॉलोनी प्रबंधन समिति की अध्यक्षा शशि चौधरी ने दी है।

    पूर्व अपनिदेशक माध्यमिक शिक्षा उत्तराखंड एवं समिति अध्यक्ष शशि चौधरी ने बताया कि प्रबंधन समिति ने कुछ समय पूर्व ही डिफेंस कॉलोनी में ओपन जिम और बैडमिंटन कोर्ट को निर्मित किए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सम्मुख प्रस्तुत किया था, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकृत कर लिया है। चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से समिति को यह सूचना दूरभाष से अवगत की गई है।

    समिति के प्रस्ताव को तत्काल स्वीकृत किए जाने पर डिफेंस कॉलोनी निवासियों तथा समिति पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार प्रकट किया है। आभार प्रकट करने वालों में डिफेंस कॉलोनी प्रबंधन समिति की अध्यक्षा- शशि चौधरी, उपाध्यक्ष-कर्नल बी एस पंवार,सचिव- कर्नल आर एस खत्री एवं सदस्य डॉ सुमित्रा राणा प्रमुख तौर पर शामिल हैं।

  • चार अधिकारियों को मिला प्रमोशन, सहकारिता विभाग में बने उप निबंधक

    चार अधिकारियों को मिला प्रमोशन, सहकारिता विभाग में बने उप निबंधक

    राज्य सरकार ने जारी किए आदेश, दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रहेंगी नियुक्तियां

    देहरादून। उत्तराखंड शासन के सहकारिता अनुभाग-01 ने विभागीय पदोन्नति समिति की संस्तुति के आधार पर चार सहायक निबंधकों को पदोन्नत करते हुए उप निबंधक पद पर नियुक्ति प्रदान की है।

    इस संबंध में शासन ने सोमवार को आदेश जारी कर दिए।
    जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार सहकारिता विभाग में कार्यरत सहायक निबंधक मनोज कुमार पुनेठा, सुरेन्द्र पाल, राजेश चौहान तथा मोनिका चुंगरा को नियमित रूप से पदोन्नत कर उप निबंधक पद पर नियुक्त किया गया है। इन अधिकारियों को वेतनमान ₹67,700-2,08,700 (लेवल-11) में पदोन्नति का लाभ मिलेगा।
    शासन के आदेश में कहा गया है कि पदोन्नत अधिकारियों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रखा जाएगा। इनकी तैनाती से संबंधित अलग-अलग आदेश पृथक रूप से जारी किए जाएंगे।
    उप सचिव जगजीवन प्रकाश बेरी द्वारा जारी आदेश को राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त है। आदेश की प्रतिलिपि महालेखाकार, सहकारी समितियों के निबंधक, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई एवं सूचना के लिए भेजी गई है।
    सहकारिता विभाग में हुई इस पदोन्नति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे विभागीय कार्यों के संचालन में और अधिक दक्षता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • विकसित भारत-2047 मिशन की सफलता के लिए सभी की भागीदारी जरूरी : सीएम

    विकसित भारत-2047 मिशन की सफलता के लिए सभी की भागीदारी जरूरी : सीएम

    मुख्यमंत्री स्तर पर मासिक एवं मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक 10 दिन में होगी समीक्षा

    मुख्यमंत्री ने 6940 करोड़ की 12 प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा

    50 प्रतिशत से अधिक प्रगति वाली परियोजनाओं को 15 अक्टूबर 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश

    मुख्यमंत्री स्तर पर मासिक एवं मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक 10 दिन में होगी समीक्षा

    भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति और भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर दिया जोर

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रगति पोर्टल के माध्यम से राज्य की विभिन्न महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।

    बैठक में परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन तथा अन्य विभागों की 6940 करोड़ की कुल 12 प्रमुख परियोजनाओं की विस्तार से जानकारी ली गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में सभी का योगदान जरूरी है।

    मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि इन परियोजनाओं के कार्यों में और तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री स्तर पर प्रत्येक माह, मुख्य सचिव स्तर पर 10 दिनों में इसकी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जायेगी और नियमानुसार सख्त कारवाई भी की जायेगी। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं पर 50 प्रतिशत तक कार्य हो चुका है, 15 अक्टूबर 2026 तक उन कार्यों को पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, क्षतिपूर्ति भुगतान अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से विलम्ब हो रहा है, उनके समाधान के लिए संबंधित विभाग समन्वित रूप से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रगति पोर्टल को प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उपयोग करते हुए प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा की जाए तथा लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में अनावश्यक विलम्ब से न केवल विकास कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि जनहित एवं आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बैठक में रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला, बनबसा एवं रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र परियोजनाओं, चारधाम सड़क परियोजनाओं, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना, हरिद्वार एवं काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

    मुख्यमंत्री ने वन भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों, भूमि अधिग्रहण तथा क्षतिपूर्ति वितरण से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिये कि जनपद स्तर पर लंबित प्रकरणों की व्यक्तिगत निगरानी कर उनका त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं, विद्युत अवसंरचना तथा परिवहन सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं राज्य के समग्र विकास और जनता की सुविधाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन से पर्यटन, व्यापार, निवेश एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित स्तर से कम है, उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र परिणाम सुनिश्चित किए जाएं।

    बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव बृजेश कुमार संत, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, बंशीधर तिवारी, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी उपस्थित थे।