Category: ताजा खबर

  • नए पुल से शक्तिफार्म और सिडकुल के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    नए पुल से शक्तिफार्म और सिडकुल के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    150 मीटर स्पान सीसी पुल का शिलान्यास

    सितारगंज। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को सितारगंज के शक्तिफार्म को सिडकुल क्षेत्र से जोड़ने हेतु सिसौना नदी पर लगभग 11 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 150 मीटर स्पान सीसी पुल का शिलान्यास किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महत्वपूर्ण पुल के निर्माण से क्षेत्र के लगभग 50 हजार लोगों को सीधा लाभ मिलेगा तथा सिडकुल सितारगंज एवं विकासखंड कार्यालय सिसौना तक पहुंचने के लिए लगभग 9 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी।

    उन्होंने कहा कि यह पुल क्षेत्र में सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक एवं सामाजिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास और समृद्धि के नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार शहरों से लेकर सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    उन्होंने कहा कि ऊधमसिंह नगर जनपद एवं शक्तिफार्म-सितारगंज क्षेत्र के विकास हेतु अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शक्तिफार्म में पीपीपी मॉडल के माध्यम से मिल्क पाउडर, आइसक्रीम एवं चीज निर्माण से संबंधित आधुनिक डेयरी प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जा रही है।

    इसके साथ ही प्रह्लाद पलसिया में लगभग 54 करोड़ रुपये की लागत से एक्वा पार्क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिसका लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

    क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएचसी को 30 बेड के सीएचसी में उच्चीकृत किया गया है। साथ ही सितारगंज-टनकपुर फोरलेन सड़क, आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली, विभिन्न मोटर मार्गों और मल्टी स्टोरी पार्किंग के निर्माण कार्य भी प्रगति पर हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद ऊधमसिंह नगर में किच्छा में लगभग 351 करोड़ रुपये की लागत से 100 एकड़ भूमि पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। पंतनगर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाईअड्डे के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    इसके अतिरिक्त गदरपुर एवं खटीमा बाईपास, खटीमा और किच्छा बस अड्डों, खेल स्टेडियमों, साइकिलिंग ट्रैक, एथलेटिक्स ट्रैक तथा औद्योगिक परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र को नई पहचान दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना को पुनः प्रारंभ कर तराई क्षेत्र की पेयजल एवं सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति की दिशा में ऐतिहासिक कार्य कर रही है। किसानों के हित में गन्ने के समर्थन मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि भी की गई है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जो भी विकास कार्य प्रारंभ करती है, उसे समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर जनता को समर्पित करती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और पारदर्शी प्रशासन के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू कर भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले साढ़े चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर प्राप्त हुआ है।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री  सौरभ बहुगुणा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा क्षेत्र के विकास हेतु किए जा रहे कार्य ऐतिहासिक हैं। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, ब्लॉक प्रमुख उपकार सिंह बल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • 15,500 फीट की ऊंचाई पर होगा रोमांच, उत्तराखण्ड में जुटेंगे सैकड़ों धावक

    15,500 फीट की ऊंचाई पर होगा रोमांच, उत्तराखण्ड में जुटेंगे सैकड़ों धावक

    सीएम करेंगे ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’  सप्ताह का भव्य उद्घाटन

    23 मई को ऐतिहासिक नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन सप्ताह का काउंटडाउन रन

    मुख्यमंत्री आवास से प्रातः 6:00 बजे होगा ध्वजारोहण

    तीन सौ से अधिक धावक करेंगे 10 किमी की ऐतिहासिक दौड़

    देहरादून। उत्तराखण्ड की देवभूमि एक बार फिर साहस, शक्ति और संकल्प का महायज्ञ आयोजित करने के लिए तैयार है। उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद (यू.टी.डी.बी.) के तत्वावधान में 23 मई को देहरादून में ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन सप्ताह’ का भव्य काउंटडाउन रन आयोजित किया जाएगा।
    इस ऐतिहासिक दौड़ का ध्वजारोहण  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे।

    यह काउंटडाउन रन केवल एक दौड़ नहीं

    यह उस महाअभियान का शंखनाद है, जो 31 मई को नीति घाटी में उत्तराखण्ड के इतिहास की सबसे बड़ी अल्ट्रा मैराथन के रूप में चरमोत्कर्ष पर पहुँचेगा।
    23 मई का यह काउंटडाउन रन उस विराट उत्सव का पहला स्पंदन है — एक ऐसी दौड़ जो देहरादून की सड़कों पर ऊर्जा, उत्साह और एकजुटता का संचार करेगी और पूरे उत्तराखण्ड को एक अभूतपूर्व साहसिक सप्ताह के लिए तैयार करेगी।

      काउंटडाउन रन : कार्यक्रम विवरण

    23 मई, 2026 को प्रातःकाल देहरादून की वायु साहस के रंग में रंग जाएगी। काउंटडाउन रन का सम्पूर्ण मार्ग एवं कार्यक्रम इस प्रकार है —

    ◆  दिनांक  :  23 मई, 2026 (शनिवार)
    ◆  रिपोर्टिंग  :  प्रातः 5:30 बजे — मुख्यमंत्री आवास, देहरादून
    ◆  ध्वजारोहण  :  प्रातः 6:00 बजे — माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी द्वारा
    ◆  मार्ग  :  मुख्यमंत्री आवास → घड़ी टॉवर → यू.टी.डी.बी. कार्यालय
    ◆  दूरी  :  10 किलोमीटर
    ◆  समापन  :  उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद (यू.टी.डी.बी.) कार्यालय, देहरादून
    ◆  प्रतिभागी  :  300 से अधिक उत्साही धावक

    मशाल प्रज्ज्वलन एवं शुभंकर अनावरण : उत्सव का केन्द्र बिन्दु

    23 मई के इस काउंटडाउन रन में केवल दौड़ नहीं होगी।  इस अवसर पर दो ऐसे ऐतिहासिक कार्यक्रम भी सम्पन्न होंगे जो नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन सप्ताह को एक अविस्मरणीय यादगार बना देंगे।
    माननीय मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के कर-कमलों द्वारा एक भव्य फ्लेम्बो (मशाल) का प्रज्ज्वलन किया जाएगा। यह पावन मशाल साहस की उस अग्नि का प्रतीक होगी जो हिमालय की 15,500 फीट ऊँची दुर्गम घाटियों तक भारत के धावकों को प्रेरित करेगी।
    यह एक प्रतीकात्मक क्षण होगा जो समस्त उत्तराखण्ड को एकसूत्र में पिरोएगा।
    इसी अवसर पर 31 मई को नीति घाटी में होने वाली अल्ट्रा मैराथन के आधिकारिक शुभंकर (Mascot) का भी अनावरण किया जाएगा। यह शुभंकर हिमालय की अदम्य शक्ति एवं उत्तराखण्ड की वीरांगना संस्कृति का प्रतिबिम्ब होगा और इसके साथ ही विश्व भर के धावकों के लिए नीति घाटी का निमंत्रण आधिकारिक रूप से जारी हो जाएगा।

    ⛰️  23 मई के बाद — जब असली चुनौती शुरू होती है

    23 मई का काउंटडाउन रन उस भव्य आयोजन का प्रवेश द्वार है जिसे उत्तराखण्ड पर्यटन के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
    31 मई को नीति घाटी, चमोली में आयोजित होने वाली 75 किलोमीटर की ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ उत्तराखण्ड की धरती पर अपने प्रकार का प्रथम आयोजन होगा — 15,500 फीट (लगभग 4,725 मीटर) की अभूतपूर्व ऊँचाई पर, जहाँ हर कदम एक नई विजय होगी।

    यह महाअभियान नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन को विश्व के छठे सबसे बड़े उच्च-ऊँचाई अल्ट्रा मैराथन के रूप में स्थापित करने का स्वप्न लेकर चल रहा है।  एक ऐसा आयोजन जो उत्तराखण्ड को वैश्विक एडवेंचर स्पोर्ट्स के मानचित्र पर अमिट रूप से अंकित कर देगा। 23 मई की मशाल उसी स्वर्णिम लक्ष्य की ओर जलती हुई यात्रा का प्रारम्भ है।

    PM का ‘वाइब्रेंट विलेज’ संकल्प — नीति से होगा साकार

    नीति घाटी में स्थित नीति गाँव — भारत-तिब्बत सीमा पर बसा अन्तिम आबाद गाँव — प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ का जीवंत प्रतीक है। सीमान्त क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और पर्यटन के माध्यम से इन्हें आत्मनिर्भर बनाने की प्रधानमंत्री जी की परिकल्पना को ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन सप्ताह’ एक नई ऊँचाई देगा।
    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के ‘श्रेष्ठ उत्तराखण्ड’ संकल्प के अनुरूप, यह आयोजन स्थानीय युवाओं, महिलाओं एवं ग्रामीण उद्यमियों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों के नए द्वार खोलेगा। 23 मई को देहरादून में जलने वाली यह मशाल उन सपनों की भी आवाज़ है जो नीति घाटी के हर परिवार ने वर्षों से देखे हैं।

    नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन सप्ताह — सम्पूर्ण कार्यक्रम

    ◆  23 मई 2026  :  काउंटडाउन रन — देहरादून (CM आवास → UTDB कार्यालय) | मशाल प्रज्ज्वलन । शुभंकर अनावरण
    ◆  27–30 मई 2026  :  धावकों का आगमन एवं बिब एक्स्पो — नीति घाटी
    ◆  31 मई 2026  :  75 किमी अल्ट्रा रन एवं फुल मैराथन — नीति घाटी (15,500 फीट)
    ◆  1 जून 2026  :  5 किमी • 10 किमी • हाफ मैराथन (21 किमी) — नीति घाटी
    ◆  2 जून 2026  :  माउंटेन बाइकिंग (MTB) रेस डे — नीति घाटी

    “23 मई को देहरादून की सड़कों पर जो मशाल जलेगी, वह केवल एक दौड़ का आरम्भ नहीं — वह उत्तराखण्ड के उस सपने की शुरुआत है जो नीति घाटी को विश्व के साहसिक धावकों का गंतव्य बनाएगी। प्रधानमंत्री जी के ‘वाइब्रेंट विलेज’ के स्वप्न को हम साकार करने जा रहे हैं — हिमालय की ऊँचाइयों पर, अपनी शर्तों पर।”
    —  पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

  • धारी देवी पर्यटन सर्किट के निर्माण में लायें तेजीः डाॅ. धन सिंह रावत

    धारी देवी पर्यटन सर्किट के निर्माण में लायें तेजीः डाॅ. धन सिंह रावत

    समीक्षा बैठक में राहू मंदिर को पर्यटन सर्किट में जोड़ने के दिये निर्देश

    कहा, पर्यटकों को आकर्षित करने में सहायक बनेंगे पयर्टन सर्किट

    देहरादून । श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत निर्माणाधीन धारीदेवी-कमलेश्वर-देवलगढ़-खिर्सू- क्यूँकलेश्वर-पौड़ी पर्यटन सर्किट के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही पैठाणी स्थित राहु मंदिर के कार्यों को भी युद्ध स्तर पर करने को कहा गया है ताकि देश-विदेश के पर्यटक यहां के पर्यटन सर्किट का लुत्फ उठा सके।

    सूबे कैबिनेट मंत्री व श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डाॅ. धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर पैठाणी स्थित राहु मंदिर व धारीदेवी-कमलेश्वर-देवलगढ़-खिर्सू- क्यूँकलेश्वर-पौड़ी पर्यटन सर्किट के विकास कार्यों की समीक्षा की। जिसमें उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने व गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये। डाॅ. रावत ने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही व हिलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जायेगी। डाॅ. रावत ने पैठाणी स्थित राहु मंदिर परिसर में घाट निर्माण, पार्किंग व हैलीपैड के निर्माण कार्यों को तेजी से करने के निर्देश दिये। इसके अलावा उन्होंने धारी देवी, देवलगढ़, खिर्सू व कण्डोलिया पौड़ी पर्यटन सर्किट को भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि धारी देवी, खिर्सू, क्यूंकालेश्वर व कण्डोलिया के कार्य लगभग पूर्ण कर दिये गये हैं। जबकि कमलेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार का कार्य गतिमान है, इसी प्रकार देवलगढ़ में भी पर्किंग हेतु भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।

    बैठक में अपर सचिव पर्यटन अभिषेक रोहिल्ला, एमडी गढ़वाल मंडल विकास निगम कुसुम चैहान, अधीक्षण अभियंता आरडब्ल्यूडी तेजपाल सिंह सहित पर्यटन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में शीघ्र होगी शिक्षकों की तैनातीः डा. धन सिंह रावत

    अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में शीघ्र होगी शिक्षकों की तैनातीः डा. धन सिंह रावत

    समीक्षा बैठक में विभागीय मंत्री ने दिये अधिकारियों को निर्देश

    कहा, एससीईआरटी में प्रतिनियुक्ति से भरे जायेंगे रिक्त पद

    देहरादून।  राज्य के सभी अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर एक सप्ताह के भीतर तैनाती की जायेगी। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को शीघ्र काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अलावा एससीईआरटी में शैक्षणिक संवर्ग के रिक्त पदों को भी प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरा जायेगा ताकि शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्बाध रूप से संचालित हो सके।

    सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज यमुना कालोनी स्थित अपने शासकीय आवास पर शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में एक सप्ताह के भीतर रिक्त पदों पर शिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती को आयोजित स्क्रीनिंग परीक्षा में सफल शिक्षकों की काउंसलिंग आयोजित की जाय और उन्हें वरियता क्रम में नवीन तैनाती दी जाय, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को तत्काल दूर कर पठन-पाठन को सुचारू रखा जा सके। डाॅ. रावत ने एससीईआरटी में लम्बे समय से रिक्त चल रहे शैक्षणिक सवंर्ग के पदों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरने के निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि एससीईआरटी में शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम सुचारू रखने के लिये रिक्त पदों को भरा जाना आवश्यक है। जब तक एससीईआरटी का पृथक ढंाचा स्वीकृत नहीं हो जाता है तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति से भरे जाने का निर्णय लिया गया है। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शीघ्र वित्त व कार्मिक विभाग से समन्वय स्थापित कर डायटों की नियमावली को मंत्री परिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत करें। डाॅ. रावत ने बताया कि शिक्षा विभाग के अंतर्गत लम्बे समय से शिक्षकों का पदोन्नति प्रकरण लम्बित है। जिसको लेकर उन्होंने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सीएससी से वार्ताकर शीघ्र प्रकरण को हल कराने को कहा ।

    बैठक में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा दीप्ति सिंह, अनु सचिव विकास श्रीवास्तव, प्रभारी निदेशक माध्यमिक शिक्षा डाॅ. मुकुल सती, अपर निदेशक माध्यमिक (कुमाऊं) मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निदेशक माध्यमिक परमेन्द्र कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    बाॅक्स-
    शिक्षा विभाग में सभी अचैटमेंट होंगे समाप्त
    विद्यायली शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि शिक्षा विभाग में पिछले शैक्षणिक सत्र में किये गये सभी प्रकार के सम्बद्धीकरण को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, ताकि सम्बद्ध शिक्षकों एवं कार्मिकों की मूल तैनाती स्थल पर किसी भी प्रकार का कार्य में व्यवधान उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि नये शिक्षा सत्र में कार्मिकों का सम्बद्धीकरण आवश्यकतानुसार किया जायेगा।

  • दिल्ली में गूंजेंगी उत्तराखण्ड की बोलियां, शुरू होंगी भाषा सीखने की कक्षाएं

    दिल्ली में गूंजेंगी उत्तराखण्ड की बोलियां, शुरू होंगी भाषा सीखने की कक्षाएं

    गढ़वाली-कुमाऊंनी और जौनसारी बोली-भाषा की ग्रीष्मकालीन कक्षाएं

    नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए ‘उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच’ द्वारा हर साल गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी बोली/ भाषाओं की ग्रीष्मकालीन कक्षाएं चलाई जाती हैं।
    उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली के संरक्षक एवं सामाजिक-सांस्कृतिक पटल पर दिल्ली-एनसीआर में पहाड़ की सशक्त आवाज़ डॉ.विनोद बछेती के नेतृत्व में वर्ष 2012 से इन ग्रीष्मकालीन कक्षाओं को सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा हैं।

    ‘उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच’ की यह अनूठी पहल दिल्ली-एनसीआर में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों के बच्चों को अपनी जड़ों,लोक संस्कृति,खान-पान और अपनी भाषा-बोली से रू-ब-रू तो करवा ही रहे है। इसके साथ ही बच्चे इस पहल के माध्यम से अपनी मातृ भाषा,लोकगीत,नाटक,रीति-रिवाज और पारंपरिक लोक नृत्य भी सीख रहे हैं। यही वजह भी हैं कि आज उत्तराखंड की लोक भाषाओं गढ़वाली,कुमाऊंनी व जौनसारी को बोलने और सीखने वालों की संख्या दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रही है।

    इस क्रम में इस वर्ष 24 मई 2026 से ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का शुभारंभ किया जा रहा है। जिसमें अपनी भाषा-बोली सीखने के लिए बड़ी संख्या में पहाड़ के नौनिहाल और उनके परिजनों के साथ-साथ गढ़वाली-कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं को पढ़ाने वाले शिक्षक अपनी-अपनी भागीदारी निभाने के लिए तैयार है।

    दिल्ली-एनसीआर में पिछले 15 वर्षों से गढ़वाली- कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाओं का सफलतापूर्वक संचालन 52 केंद्रों में किया जा रहा है। इसमें कुछ केंद्र उत्तराखंड में भी है। यह अनूठी पहल बच्चों को अपनी जड़ों,लोक संस्कृति,खान-पान और भाषाओं से जोड़ने के लिए हर साल मई-जून-जुलाई में आयोजित की जाती है। जिसके माध्यम से आज के समय में पहाड़ के नौनिहाल बड़ी संख्या में गढ़वाली-कुमाऊंनी- जौनसारी बोल ही नहीं रहे है बल्कि दूसरे लोगों को भी अपनी भाषा बोलने के लिए प्रेरित कर रहे है।

    इस भागीरथी प्रयास के मुख्य उद्देश्य की बात करें तो प्रवासी उत्तराखंडी बच्चों को अपनी बोली-भाषा पढ़ना-लिखना सिखाना और लोक संस्कृति से परिचित कराना तो हैं ही,साथ ही गढ़वाली,कुमाऊनी,जौनसारी भाषाओं को 8वीं अनुसूची में दर्ज कराना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।

    हम बच्चों को अपनी जड़ों और अपनी लोक सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहे है-डॉ.विनोद बछेती,संरक्षक-उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच

    उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच के संरक्षक एवं दिल्ली-एनसीआर में पहाड़ की सशक्त आवाज़ एवं सामाजिक-सांस्कृतिक पटल पर पहाड़ को एक जुट एक मुट कर अपने रीति-रिवाजों और लोक परिवेश को नई पहचान दिलाने वाले डॉ.विनोद बछेती के मार्गदर्शन में एवं दिल्ली-एनसीआर में अपनी भाषा को बचाए रखने के लिए निरंतर प्रयासरत कई भाषा प्रेमियों की अथक मेहनत और कठोर परिश्रम का सफल परिणाम हैं कि आज दिल्ली-एनसीआर में पिछले 15 वर्षों से ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का निरंतर संचालन किया जा रहा है।

    उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच के संरक्षक डॉ.विनोद बछेती इस बारे में बताते है कि बहुत अजीब लगता है जब हम बहुत से पहाड़ के लोगों एक साथ खड़े हों और हम अपनी भाषा-बोली में बात न करें।

    इस तरह के माहौल में,मैं खुद को बहुत असहज महसूस करता हूं। इस धारणा को बदलने के लिए हमने दिल्ली एनसीआर में रह रहे नौनिहालों को अपनी मातृ भाषा से जोड़ने के लिए गढ़वाली-कुमाऊंनी और जौनसारी की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं की शुरूआत की,इसके लिए हमारे समाज का एक बड़ा तकबा हमारे साथ खड़ा हुआ और आज मुझे कहने में खुशी होती है कि हमारे नौनिहाल आज अपनी भाषा-बोली में बात करते है,अपने संस्कार-रीति-रिवाजों को जानते है और इस कड़ी में हमने अब एक और नई पहल की है। जिसके तहत हम बच्चों को गढ़वाली-कुमाऊंनी

    नाटक एवं लोकगीतों की बारिकियों को भी सीखा रहे है। इसके माध्यम से हमारे बहुत सारे बच्चे और उत्सुकता के साथ हमारे इस परिवार में शामिल हो रहे है और अपनी भाषा-बोली सीख रहे है।

  • दीपक जोशी अध्यक्ष एवं राजेंद्र रतूड़ी महासचिव निर्वाचित

    दीपक जोशी अध्यक्ष एवं राजेंद्र रतूड़ी महासचिव निर्वाचित

    शुक्रवार रात को उत्तराखण्ड सचिवालय संघ के  चुनाव परिणाम घोषित

    देहरादून। एक बार फिर दीपक जोशी उत्तराखण्ड सचिवालय संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत गए। राजेन्द्र रतूड़ी महासचिव पद पर विजयी रहे।
    शुक्रवार देर शाम घोषित परिणामों में अध्यक्ष पद पर दीपक जोशी ने जीत दर्ज की, जबकि महासचिव पद पर राजेंद्र रतूड़ी विजयी रहे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सचिवालय परिसर में समर्थकों ने विजेताओं का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया और खुशी जताई।

    अध्यक्ष पद के मुकाबले में दीपक जोशी को 594 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी प्रदीप को 485 मत प्राप्त हुए। महासचिव पद पर राजेंद्र रतूड़ी ने 577 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी विमल जोशी को 498 मत मिले।
    विभिन्न पदों पर भी हुए रोचक मुकाबले
    वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर राकेश जोशी 579 वोट प्राप्त कर विजयी रहे। उन्होंने अभिनव भट्ट (496 ) को पराजित किया।
    उपाध्यक्ष पद पर संजय शर्मा ने जीत दर्ज की। उन्हें 506 वोट मिले, जबकि दिनेश उनियाल को 339 और जगत सिंह डसीला को 228 मत प्राप्त हुए।
    महिला उपाध्यक्ष पद पर प्रमिला टम्टा विजयी रहीं। सचिव पद पर अतुल कुमार ने जीत हासिल की। उन्हें 498 वोट मिले, जबकि अमित कुमार को 184 और पुष्कर सिंह नेगी को 395 वोट प्राप्त हुए।

    संयुक्त सचिव पद पर दिव्यांशु डोभाल ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 613 मत मिले। इस पद पर सुरेंद्र सिंह रावत को 474, रमेश चंद्र जोशी को 333, लालमणि जोशी को 309 और भूपेंद्र नारायण जोशी को 173 वोट प्राप्त हुए।
    कोषाध्यक्ष पद पर रमेश बर्तवाल व प्रचार सचिव पद पर दीपक बिष्ट निर्विरोध निर्वाचित हुए।

  • मानकों के विपरीत संचालन पर 96 होमस्टे के लाइसेंस रद्द

    मानकों के विपरीत संचालन पर 96 होमस्टे के लाइसेंस रद्द

    देखें सूची

    पर्यटन वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया शुरू

    देहरादून। जनपद में कानून व्यवस्था मजबूत बनाए रखने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने अवैध एवं नियमविरुद्ध संचालित होमस्टे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में अब तक 96 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं। इनमें प्रथम चरण में 17 तथा द्वितीय चरण में 79 होमस्टे शामिल हैं। संबंधित इकाइयों को पर्यटन विभाग की वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    जिला प्रशासन की पांच मजिस्ट्रेट टीमों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 136 होमस्टे का निरीक्षण किया। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे होमस्टे मिले जो उत्तराखंड गृह आवास (होमस्टे) नियमावली के विपरीत संचालित हो रहे थे। कई होमस्टे होटल की तरह व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे थे, जबकि कई इकाइयां लीज और किराये पर संचालित होती मिलीं।

    पीडीएफ करें क्लिक

    Adobe-Scan-14-May-2026-1-3

    रातभर बार, तेज डीजे और हुड़दंग से कानून व्यवस्था पर खतरा

    बिना अग्निशमन उपकरण और फूड लाइसेंस के संचालित हो रहे थे कई होमस्टे

    निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। अनेक होमस्टे में रसोई व्यवस्था नहीं मिली, अग्निशमन उपकरण अनुपलब्ध पाए गए या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। कई स्थानों पर निर्धारित क्षमता से अधिक कमरों का संचालन किया जा रहा था। कुछ होमस्टे बारात घर और व्यावसायिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। विदेशी नागरिकों के ठहराव संबंधी सी-फॉर्म उपलब्ध न कराने के मामले भी सामने आए।

    प्रशासन के अनुसार कुछ होमस्टे में रातभर नियमविरुद्ध बार संचालन, तेज डीजे और नशे से जुड़ी गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे स्थान उपद्रवी प्रवृत्ति के लोगों का अड्डा बनते जा रहे थे। शहर में नशे की हालत में ओवरस्पीड वाहन चलाने, हुड़दंग और फायरिंग जैसी घटनाओं में भी ऐसे होमस्टे में ठहरे लोगों की संलिप्तता सामने आ रही थी।
    जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान और स्थानीय लोगों की आय को बढ़ावा देना है, लेकिन कुछ लोगों ने इसे व्यावसायिक होटल व्यवसाय का माध्यम बना दिया। प्रशासन आगे भी सत्यापन और निरीक्षण अभियान लगातार जारी रखेगा।

  • सुरक्षित मातृत्व अभियान का असर: होम डिलीवरी में 91% की बड़ी कमी

    सुरक्षित मातृत्व अभियान का असर: होम डिलीवरी में 91% की बड़ी कमी

    डिजिटल मॉनिटरिंग और जिला-स्तरीय जवाबदेही से बदली तस्वीर

    देहरादून। उत्तराखण्ड में सुरक्षित मातृत्व सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। राज्य में होम डिलीवरी के मामलों में रिकॉर्ड गिरावट आई है। अप्रैल 2025 में जहां 404 होम डिलीवरी दर्ज की गई थीं, वहीं अप्रैल 2026 में यह संख्या घटकर केवल 36 रह गई। इस तरह राज्य में होम डिलीवरी में 91.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
    यह परिवर्तन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग की लगातार निगरानी, जिला-विशिष्ट रणनीति, फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय करने और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की बड़ी भूमिका रही है। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे के निर्देशों पर राज्यभर में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विशेष अभियान चलाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

    जिला-विशिष्ट समीक्षा और फील्ड स्तर पर सख्ती का असर

    मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे की अध्यक्षता में विभिन्न जिलों की विस्तृत समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ-साथ फील्ड में कार्यरत ANM से भी सीधे संवाद कर जमीनी स्थिति की जानकारी ली गई।

    बैठकों में होम डिलीवरी रोकने, मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने, गर्भवती महिलाओं की गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करने, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय रहते पहचान करने, एनीमिया प्रबंधन और समयबद्ध रेफरल सिस्टम को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

    सचिन कुर्वे ने जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब केवल प्रक्रियाएं पूरी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि फील्ड में ठोस परिणाम दिखने चाहिए। प्रत्येक जिले को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना बनाकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

    State Maternal Health WAR Room से हो रही दैनिक डिजिटल ट्रैकिंग

    राज्य स्तर पर स्थापित State Maternal Health WAR Room इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। इसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं, विशेषकर संभावित प्रसव तिथि के करीब पहुंच चुकी महिलाओं और हाई रिस्क प्रेगनेंसी मामलों की डिजिटल रूप से रोजाना निगरानी की जा रही है।
    WAR Room के जरिए राज्य, जिला, ब्लॉक और फील्ड स्तर की स्वास्थ्य टीमों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है। केस-वार फॉलोअप, रेफरल ट्रैकिंग और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग के कारण समय रहते हस्तक्षेप संभव हो पा रहा है, जिससे होम डिलीवरी और जटिल प्रसव के मामलों में कमी आई है।

    हर होम डिलीवरी केस का हुआ ऑडिट

    स्वास्थ्य सचिव के निर्देशों पर राज्य मातृ स्वास्थ्य टीम द्वारा होम डिलीवरी के प्रत्येक मामले का विस्तृत ऑडिट किया गया। इसका उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि यह समझना था कि किन क्षेत्रों में किन कारणों से महिलाएं अब भी घर पर प्रसव के लिए मजबूर हो रही हैं। इन कारणों के आधार पर सुधारात्मक रणनीतियां तैयार की गईं। साथ ही राज्य सरकार ने Maternal Referral Tracking, Monitoring & Audit System के लिए एक Standard Operating Procedure (SOP) भी तैयार की है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा। इस SOP के तहत गर्भवती महिलाओं के रेफरल, परिवहन, अस्पताल तक पहुंच, उपचार और फॉलोअप की व्यवस्थित निगरानी और अधिक प्रभावी ढंग से की जाएगी।

    पर्वतीय जिलों में चला विशेष अल्ट्रासाउंड अभियान

    दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य के सात पर्वतीय जिलों- अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चम्पावत, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में विशेष अल्ट्रासाउंड अभियान संचालित किया गया। इस अभियान के तहत कुल 10,184 अल्ट्रासाउंड जांचें की गईं। जांच के लिए पहुंची सभी गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय परामर्श और प्रसव पूर्व जांच भी उपलब्ध कराई गई। इस दौरान 274 हाई रिस्क प्रेगनेंसी मामलों की पहचान की गई, जिन्हें विशेष निगरानी में रखा गया।गर्भवती महिलाओं को जांच केंद्र तक पहुंचाने के लिए खुशियों की सवारी 102 एम्बुलेंस सेवा और विभागीय एम्बुलेंस के जरिए पिक-अप और ड्रॉप-बैक सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। इससे दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में बड़ी राहत मिली।

    चिन्हित क्षेत्रों में लगे विशेषज्ञ स्वास्थ्य शिविर

    जिन क्षेत्रों में होम डिलीवरी की संभावना अधिक पाई गई, वहां विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं की जांच, परामर्श, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान और समयबद्ध रेफरल पर विशेष फोकस किया गया। साथ ही परिवारों को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक और प्रेरित किया गया, ताकि प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार के जोखिम को कम किया जा सके।

    PCPNDT अधिनियम के क्रियान्वयन में भी बढ़ी सख्ती

    राज्य सरकार ने PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। जिला PCPNDT समितियों को सरकारी और निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध लिंग निर्धारण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है।

    कई जिलों में दिखा संस्थागत प्रसव का सकारात्मक असर

    संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब जिलों में दिखाई देने लगे हैं। अप्रैल 2026 में पिथौरागढ़, पौड़ी, अल्मोड़ा, ऊधम सिंह नगर और बागेश्वर में संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। राज्यभर में अप्रैल 2026 के दौरान कुल 9,923 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए, जो स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच और समुदाय स्तर पर जागरूकता का संकेत माना जा रहा है।

    कई जिलों में शून्य होम डिलीवरी

    राज्य के कई जिलों ने होम डिलीवरी रोकने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अप्रैल 2026 में पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और ऊधम सिंह नगर में एक भी होम डिलीवरी दर्ज नहीं हुई। इसके अलावा पौड़ी, टिहरी, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, चमोली, चम्पावत, बागेश्वर, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा में भी होम डिलीवरी के मामलों में बड़ी कमी दर्ज की गई है।

    लक्ष्यों की दिशा में तेजी से बढ़ता उत्तराखण्ड

    स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन नवाचारों, फील्ड मॉनिटरिंग और परिणाम आधारित निगरानी व्यवस्था के जरिए राज्य मातृ मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखण्ड के अंतर्गत अब मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि जिला-स्तरीय समीक्षा, डिजिटल ट्रैकिंग और फील्ड फॉलोअप के साथ परिणाम आधारित मॉडल पर आगे बढ़ाया जा रहा है। विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि राज्य की प्रत्येक गर्भवती महिला—चाहे वह मैदानी क्षेत्र में रहती हो या दूरस्थ पर्वतीय इलाके में—उसे समय पर गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच, सुरक्षित संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल की सुविधा उपलब्ध हो सके।

    अब केवल प्रक्रिया नहीं, परिणाम चाहिए— सचिन कुर्वे

    स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षित मातृत्व को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला की समय पर पहचान, प्रथम तिमाही में पंजीकरण, गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय रहते पहचान, एनीमिया प्रबंधन, समयबद्ध रेफरल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिलों में अब केवल प्रक्रियाएं पूरी करने पर नहीं, बल्कि वास्तविक परिणामों पर फोकस किया जाएगा। सचिन कुर्वे ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि शेष होम डिलीवरी मामलों को केवल आंकड़ों के रूप में न देखा जाए, बल्कि प्रत्येक केस की गहराई से समीक्षा कर उसके वास्तविक कारणों की पहचान की जाए। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सुधारात्मक कार्ययोजना बनाकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
    उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की लाइन-लिस्टिंग, अपेक्षित प्रसव तिथि आधारित ट्रैकिंग, ASHA और ANM द्वारा नियमित फॉलोअप, PMSMA सेवाओं की उपलब्धता, हाई रिस्क प्रेगनेंसी का समयबद्ध प्रबंधन और रेफरल सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

    डिजिटल मॉनिटरिंग और फील्ड जवाबदेही से मजबूत हो रही व्यवस्था- मनुज गोयल

    मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखण्ड, मनुज गोयल ने कहा कि State Maternal Health WAR Room, जिला-विशिष्ट कार्ययोजना, फील्ड स्तर की जवाबदेही और डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने के लिए 108 सेवा, KKS-102 सेवा, जन्म प्रतीक्षा गृह और आवश्यकता पड़ने पर हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

  • सीएम धामी ने 307 चयनित युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र

    सीएम धामी ने 307 चयनित युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र

    नियुक्ति पत्र नहीं, यह है जनसेवा का संकल्प पत्र – धामी

    साढ़े चार वर्षों में राज्य में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कुल 307 नव नियुक्त अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये।
    जिसमें 243 चिकित्सा अधिकारियों, 42 फार्मासिस्ट, उद्यान विभाग के अन्तर्गत 22 प्रयोगशाला सहायकों एवं मशरूम पर्यवेक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की सवा करोड़ जनता की सेवा का संकल्प पत्र है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में संकट की घड़ी में जनता की पहली उम्मीद स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्मिक ही होते हैं।
    उन्होंने नव नियुक्त चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों से कहा कि वे संवेदनशीलता, समर्पण और सेवा भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आयुष्मान योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को उपचार का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड वितरित किए जा चुके हैं तथा लगभग 12 लाख मरीजों का 2200 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार किया जा चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण और संचालन तेजी से किया जा रहा है।

    वर्तमान में प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जबकि 2 निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही 9 नर्सिंग कॉलेज और 3 नर्सिंग स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा हल्द्वानी में आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है।
    दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए टेलीमेडिसिन एवं हेली एंबुलेंस सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि एवं उद्यानिकी को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कीवी, ड्रैगन फ्रूट, हाई डेंसिटी एप्पल, मशरूम उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन जैसी उच्च मूल्य फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने आशा व्यक्त की कि नव नियुक्त युवा प्रदेश को कृषि नवाचार और आधुनिक उद्यानिकी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सभी भर्ती प्रक्रियाएं पूर्ण पारदर्शिता से हो रही है। प्रदेश में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसका परिणाम है कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।

    कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उद्यान विभाग द्वारा अतिसघन सेब बागवानी, कीवी मिशन, ड्रैगन फ्रूट मिशन, मधुमक्खी पालन नीति तथा जाइका परियोजना जैसी विभिन्न योजनाओं का सफल संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मशरूम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं।
    उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में उभर सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा।

    स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि नये चिकित्सकों और फार्मासिस्ट की नियुक्ति होने से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों तक चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता हो और लोगों को अपने निकटतम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी चिकित्सक पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ जन सेवा के प्रति समर्पित रहेंगे।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, मेयर सौरभ थपलियाल, सचिव सचिन कुर्वे, डाॅ. एस. एन. पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • “स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” को कैबिनेट मंजूरी

    “स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” को कैबिनेट मंजूरी

    देखें, कैबिनेट के निर्णय

    11 पर्वतीय जिलों के 275 गांवों को 05 वर्षों में चकबंदी से जोड़ने का लक्ष्य

    विवाद रहित गांवों को प्राथमिकता; न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि या 25 काश्तकारों की लिखित सहमति अनिवार्य

    नीति की कड़ाई से मॉनिटरिंग के लिए उच्चाधिकार समिति (HPC) का हुआ गठन

    देहरादून। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी जोतों को एकीकृत करने और कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “उत्तराखण्ड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति- 2026” को लागू करने की स्वीकृति दी गई है। यह नीति पर्वतीय जनपदों के काश्तकारों के आर्थिक उत्थान और कृषि विकास के लिए एक व्यापक दूरदर्शी नीति साबित होगी।
    इस नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा कड़े दिशा-निर्देश और लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

    5 वर्षों में 275 गांवों का कायाकल्प

    नीति के तहत प्रदेश के 11 पर्वतीय जनपदों में प्रतिवर्ष प्रति जनपद 05 गांवों में चकबंदी कार्य पूर्ण किया जाएगा। इस प्रकार आगामी 05 वर्षों में कुल 275 गांवों को स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी से आच्छादित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

    पात्रता एवं कड़ी शर्तें

    चकबंदी के लिए केवल उन्हीं गांवों का चयन किया जाएगा जो किसी भी प्रकार के भू-विवाद से पूर्णतः मुक्त हों। इसके साथ ही संबंधित चकबंदी क्षेत्र का न्यूनतम कुल भूमि क्षेत्रफल 10.00 हेक्टेयर होना आवश्यक है। कम क्षेत्रफल होने की दशा में न्यूनतम 25 खाताधारकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।

    आपसी सहमति से चकों का निर्माण

    इस नीति के अंतर्गत भू-स्वामियों द्वारा आपसी सहमति से चक निर्माण का कार्य किया जाएगा। काश्तकारों द्वारा स्वयं चकबंदी योजना तैयार कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

    प्रोत्साहन राशि का लाभ

    नीति के तहत काश्तकारों/कृषकों को विशेष प्रोत्साहन और लाभ की व्यवस्था की गई है। यह लाभ काश्तकारों को स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी योजना के पूर्ण होने के उपरांत ही देय होगा।

    आवेदन की प्रक्रिया

    योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक किसान/खाताधारक अपना आवेदन पत्र बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) अथवा सहायक कलेक्टर (परगनाधिकारी) को प्रस्तुत कर सकते हैं।

    त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र

    नीति के पारदर्शी संचालन, अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिए राज्य स्तर पर एक उच्चाधिकार समिति (HPC), राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति तथा जनपद स्तर पर क्रियान्वयन समिति का गठन किया गया है।

    तीन वर्ष बाद नीति की समीक्षा

    नीति के व्यावहारिक अनुभवों और सुझावों के आधार पर लागू होने के 03 वर्ष के पश्चात् इसमें आवश्यक संशोधन और सुधार किए जाएंगे।

    चूंकि प्रदेश का अधिकतम क्षेत्र सीमांत और पर्वतीय है, साथ ही यहां पर वन संपदा तथा वन्य जीव विविधता की अधिकता के चलते कृषि उत्पादन के लिए भूमि की उपलब्धता न्यूनतम है। इस निर्णय से प्रदेश में कृषि, बागवानी और सह कृषि गतिविधियों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।