Category: ताजा खबर

  • गांधी-शास्त्री जयंती पर मुख्यमंत्री ने किया भावपूर्ण स्मरण

    गांधी-शास्त्री जयंती पर मुख्यमंत्री ने किया भावपूर्ण स्मरण

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और मानवता के सिद्धांत सदैव समाज को प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी शांति, सद्भाव और सामाजिक समरसता के लिए प्रासंगिक हैं।

     

    मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का स्मरण करते हुए कहा कि उनका सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका ‘जय जवान, जय किसान’ का उद्घोष देश के जवानों और किसानों के सम्मान तथा राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सदैव रेखांकित करता रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों महान विभूतियों के आदर्श हमें राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

  • उत्तराखंड के मुद्दों पर एकजुट होंगे सामाजिक संगठन

    उत्तराखंड के मुद्दों पर एकजुट होंगे सामाजिक संगठन

    जनसंवाद में भू-कानून समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा

    देहरादून। रचनात्मक कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से हरिद्वार बाईपास स्थित संस्कृति विभाग के सभागार में उत्तराखंड जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। दिनभर चले कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव से पहले जनता का घोषणा पत्र तैयार करने और विभिन्न मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करने पर सहमति बनी।

    कार्यक्रम तीन सत्रों में आयोजित हुआ। पहले सत्र में पांच अलग-अलग समूहों में प्रदेश के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें पैनलिस्ट के साथ आम प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

    वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने भू-कानून में हुए बदलावों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लगातार संशोधनों से उत्तराखंड की जमीन के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। डॉ. प्रेम बहुखंडी ने पलायन पर चर्चा करते हुए कहा कि पलायन अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन लोगों का अपने गांव और पहाड़ की ओर लौटना भी जरूरी है। विजय भट्ट ने अनियोजित शहरीकरण के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई।

    वरिष्ठ पत्रकार एमएसए काजमी और अधिवक्ता रजिया बेग ने अल्पसंख्यक समुदाय के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे पर विचार रखे। आरपी विशाल और जबर सिंह ने दलित उत्पीड़न की घटनाओं को सामने रखा। पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने सांप्रदायिक और दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की।

    राहुल कोटियाल ने सरकारी जमीनों की बिक्री का मुद्दा उठाया। दीपा कौशल ने महिला अधिकारों और उत्पीड़न के मामलों में न्याय की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। सामाजिक कार्यकर्ता अरण्य रंजन ने बढ़ती पर्यटक और तीर्थयात्री संख्या के बीच व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। सरदार तेजिंदर सिंह ने किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की।

    संजय जैन ने संविधान के मूल्यों और समाजवाद पर विचार रखे। हिमांशु अरोड़ा ने विकास परियोजनाओं के नाम पर पेड़ों के कटान पर चिंता जताई, जबकि अमन गुप्ता ने ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ भेदभाव समाप्त करने की आवश्यकता बताई। जगदंबा मैठाणी ने पहाड़ के कुटीर उद्योगों के सामने खड़ी चुनौतियों को उठाया।

    जनसंवाद में किसाऊ बांध, लोक कलाकारों की उपेक्षा, नौले-धारों के संरक्षण और पर्यावरण को हो रहे नुकसान समेत कई अन्य मुद्दे भी उठे।

    रचनात्मक कांग्रेस के मुख्य सारथी संदीप दीक्षित ने संगठन के उद्देश्य और कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि यह मंच केवल कांग्रेस का मंच नहीं, बल्कि जन संगठनों का मंच है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद भी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने और उसे जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का काम मंच करता रहेगा।

    कार्यक्रम में उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, विमला कोली, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश भाई, गरिमा दसौनी और सुजाता पॉल समेत कई लोगों ने विचार रखे।
    कार्यक्रम का संचालन रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश सारथी भुवन पाठक ने किया।

  • प्रशिक्षु अधिकारियों ने लिया आपदा प्रबंधन कार्यों का जायजा

    प्रशिक्षु अधिकारियों ने लिया आपदा प्रबंधन कार्यों का जायजा

    आपदा के प्रत्येक चरण में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका- प्रकाश चंद्र

    प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों को दी आपदा प्रबंधन के संस्थागत ढांचे की जानकारी

    देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में वर्ष 2024 एवं 2026 बैच के प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों ने राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था, संस्थागत ढांचे तथा आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों में पुलिस एवं आपदा प्रबंधन तंत्र की भूमिका की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिवादन, राहत एवं पुनर्वास के साथ-साथ आपदा के दौरान पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों एवं विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तंत्र से भी अवगत कराया गया।

    इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली, आईआरएस (इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम) की अवधारणा एवं संरचना, चेतावनी प्रसारण तंत्र, आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा उपरांत पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका, नीतिगत दिशा-निर्देशों तथा राज्य स्तर पर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारी एसईओसी और डीईओसी की कार्य प्रणाली से भी रूबरू हुए।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र ने कहा कि आपदा प्रबंधन के संपूर्ण चक्र-आपदा पूर्व, आपदा के दौरान एवं आपदा के बाद की प्रक्रिया में पुलिस विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस बल सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाली प्रमुख एजेंसियों में से एक होता है, जिसकी जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय सहयोग देना भी होती है।
    उन्होंने बताया कि आपदा के समय पुलिस की प्रमुख भूमिका में प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना, सुरक्षित निकासी, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, राहत सामग्री के निर्बाध वितरण में सहयोग, संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा, अफवाहों पर नियंत्रण तथा सटीक सूचना का संप्रेषण शामिल है। इसके अतिरिक्त प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य, अग्निशमन, एसडीआरएफ एवं अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

    इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारियों को भविष्य में एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में आपदा प्रबंधन से जुड़ी रणनीतिक एवं नेतृत्वकारी भूमिकाओं का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में डेडिकेशन, डिवोशन, मानवीय संवेदनशीलता, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की कुंजी होती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के अभिमुखीकरण कार्यक्रम प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को आपदा प्रबंधन की जमीनी समझ प्रदान करेंगे तथा वे भविष्य में राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ तथा प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

    इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, डाॅ. पीडी माथुर, प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक दक्ष शोखंद, लव शर्मा, सुश्री अदिति पुनेठा, हिमांशु दिवाकर, आदित्य तिवारी, दिव्येश उपाध्याय, अंकित थपलियाल, समीरण भट्ट, विनय सिंह, दीप्ति कैड़ा एवं तनुजा बिष्ट उपस्थित रहे।

  • आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम की पहल

    आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम की पहल

    देहरादून। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को पोषण किट एवं आवश्यक सामग्री वितरित की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल अंतर्गत न्याय पंचायत बिलखेत के प्राथमिक विद्यालय में सात आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मिलन समारोह आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री से रंगोली व पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। 2 लाभार्थी को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट,
    4 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण किट तथा 4 किशोरियों को टी-शर्ट वितरित की गई। 4 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई कर पोषण कीट वितरण की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल आंगन मिलन समारोह का शुभारंभ मुख्यातिथि भाजपा की महिला मोर्चा जिला मंत्री रजनी मौर्या ने किया उन्होंने
    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को
    उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया सम्मानित होने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री
    बिलखेत- 2 सुमित्रा देवी, धुराली शशि देवी, तोली वाडियूँ सरोजनी देवी,

    चोपड़ा अनीता देवी को सम्मानित किया गया
    सीडीपीओ सुषमा रावत ने केंद्र व राज्य की विभिन्न योजनाओं, पात्रता एवं लाभ की जानकारी दी गई। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं भाजपा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष अंजू देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिलखेत प्रिया देवी,सुपरवाइजर माया राणा,प्रधान अध्यापिका सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को पोषण किट एवं आवश्यक सामग्री वितरित की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल अंतर्गत न्याय पंचायत बिलखेत के प्राथमिक विद्यालय में सात आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मिलन समारोह आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री से रंगोली व पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। 2 लाभार्थी को मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट,
    4 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण किट तथा 4 किशोरियों को टी-शर्ट वितरित की गई। 4 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई कर पोषण कीट वितरण की गई।

    विकास खंड कल्जीखाल आंगन मिलन समारोह का शुभारंभ मुख्यातिथि भाजपा की महिला मोर्चा जिला मंत्री रजनी मौर्या ने किया उन्होंने
    आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को
    उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया सम्मानित होने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री
    बिलखेत- 2 सुमित्रा देवी, धुराली शशि देवी, तोली वाडियूँ सरोजनी देवी,
    चोपड़ा अनीता देवी को सम्मानित किया गया
    सीडीपीओ सुषमा रावत ने केंद्र व राज्य की विभिन्न योजनाओं, पात्रता एवं लाभ की जानकारी दी गई। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं भाजपा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष अंजू देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बिलखेत प्रिया देवी,प्रधान अध्यापिका पूर्णिमा जैरवाण विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

    पीएलवी जगमोहन डांगी ने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर की विधिक सहायता एवं कानूनी सेवाओं की जानकारी दी।
    बाल विकास कल्जीखाल की सुपरवाइजर माया राणा ने भी कार्यक्रमों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं समुचित विकास पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया गया। आंगनबाड़ी मिलन कार्यक्रम को सफल संपादन में कार्यकत्री बूंगा सीमा देवी,बिलखेत ,सुनीता देवी,उदय राणा,गोपाल कुमार का सहयोग रहा।
    संचालन पीएलवी जगमोहन डांगी ने किया।

  • बदरीनाथ धाम में शंख न बजाने की परंपरा पर छिड़ी नई बहस

    बदरीनाथ धाम में शंख न बजाने की परंपरा पर छिड़ी नई बहस

    चुनावी शक्ल अख्तियार करता जा रहा है बदरीनाथ धाम का कंसर्ट व शंख विवाद

    कंसर्ट व शंख विवाद को लेकर अलग-अलग तर्कों से माहौल गर्म

    बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में शंख बजाने की परंपरा को लेकर मुरली मनोहर जोशी व मंत्री सतपाल महाराज के तर्कों से उठे बवाल के बीच धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने इसके धार्मिक और पौराणिक कारणों की विस्तृत व्याख्या की है।
    बदरीनाथ में हाल में हुए देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में संगीत कार्यक्रम को लेकर पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के अलग-अलग मत सामने आए हैं। इस बीच चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ की ओर से भी आयोजन को लेकर आपत्ति जताई गई है।

    पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि बदरीनाथ धाम में भगवान विष्णु साक्षात विराजमान माने जाते हैं। इसलिए आवाहन के लिए शंख बजाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पौराणिक मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि तुलसी ने बदरीनाथ क्षेत्र में भगवान नारायण की प्राप्ति के लिए तपस्या की थी। शंखचूड़ से जुड़े प्रसंग और बाद में तुलसी-शालिग्राम विवाह की मान्यता के कारण भी बदरीनाथ में शंख वादन नहीं करने की परंपरा बताई जाती है।

    उनियाल के अनुसार, इसका अर्थ यह नहीं है कि बदरीनाथ की पूजा-पद्धति में शंख का कोई स्थान नहीं है। कपाट खुलने की तिथि की घोषणा से लेकर गाडू घड़ी यात्रा के विभिन्न पड़ावों तक शंख ध्वनि की परंपरा है। ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर, पांडुकेश्वर और टिहरी राजदरबार से यात्रा प्रारंभ होने के अवसर पर शंख बजाया जाता है। हनुमान चट्टी तक भी यह परंपरा रहती है। इसके बाद धाम क्षेत्र में शंख ध्वनि नहीं की जाती। मंदिर में भगवान बदरीविशाल की नित्य पूजा, अभिषेक और महाभिषेक में शंख का प्रयोग होता है तथा भोग को भी शंख के माध्यम से पवित्र किया जाता है।

    महाराज बोले-शंख में हड्डी की मान्यता, बाहर कोई रोक नहीं

    विवाद के बीच पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर के अंदर शंख नहीं बजाया जाता, जबकि मंदिर परिसर के बाहर शंख बजाने पर प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने इसके पीछे शंख में हड्डी होने की धार्मिक मान्यता का उल्लेख किया। महाराज ने यह भी कहा कि बदरीनाथ में संगीत अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पूर्ण प्रतिबंध की बात सही नहीं है। उनके अनुसार सीमांत क्षेत्र माणा सहित पूर्व में भी धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहे हैं और संगीत के माध्यम से भगवान की स्तुति की परंपरा रही है।

    मुरली मनोहर जोशी ने कंसर्ट पर उठाए सवाल

    दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने 19-20 सितंबर को बदरीनाथ में हुए देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में डीजे और संगीत कार्यक्रम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस स्थान पर शंख बजाना भी वर्जित माना जाता है, वहां तेज आवाज वाले संगीत और नृत्य का आयोजन कैसे उचित हो सकता है। जोशी ने इसे बदरीनाथ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक मर्यादा के विपरीत बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने का आग्रह किया। उन्होंने शंकराचार्यों और संत-महात्माओं से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की।

    कंसर्ट विवाद बढ़ने के बाद चमोली प्रशासन ने आयोजन को लेकर भारतीय सेना से स्पष्टीकरण भी मांगा। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर जिला प्रशासन और राज्य सरकार की भूमिका नहीं थी।

    गौरतलब है कि 11 अगस्त के सेना कि ओर से आयोजन के सम्बन्ध में जिला प्रशासन चमोली को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र के बाद डीएम चमोली ने अपने अधिकारियों को व्यवस्था बनाएं जाने सम्बन्धी पत्र जारी किये थे।

    इस पूरे विवाद में एक ओर बदरीनाथ की प्राचीन पूजा-पद्धति और शंख वादन से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं, तो दूसरी ओर धाम क्षेत्र में आयोजित आधुनिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर परंपरा, मर्यादा और आयोजन की सीमा पर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस, उक्रांद ,धार्मिक संस्थाएं व सामाजिक संगठन भी डीजे कंसर्ट व शंख बजाने सम्बन्धी मुद्दों पर खुलकर विरोध जता रहे है। धीरे धीरे बदरीनाथ धाम से जुड़ा यह मुद्दा चुनावी शक्ल अख्तियार करता जा रहा है।

  • वसुंधरा ताल पर लगेगा अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम

    वसुंधरा ताल पर लगेगा अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम

    उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों की निगरानी को मिलेगी नई तकनीकी ताकत

    मुख्य सचिव ने वैज्ञानिक दल को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

    सीबीआरआई और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ करेंगे अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना

    देहरादून। उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड (ग्लाॅफ) के जोखिम को कम करने तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों की निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। चमोली जनपद स्थित वसुंधरा ताल से प्रदेश में ग्लेशियल झीलों में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की शुरुआत की जा रही है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय से वसुंधरा ताल में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए जा रहे वैज्ञानिक एवं तकनीकी दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा दल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पहल आने वाले समय में ग्लाॅफ के खतरों को कम करने तथा जोखिम को समझने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक सेंसर, उपग्रह संचार और वास्तविक समय में आंकड़ों की निगरानी से ग्लेशियल झीलों में होने वाले परिवर्तनों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी।

    यह पहला वैज्ञानिक दल है, जो उत्तराखण्ड की ग्लेशियल झील में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में जा रहा है। यह अभियान 29 सितम्बर से 15 अक्टूबर, 2026 तक प्रस्तावित है। इधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभियान में शामिल सभी वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों एवं सुरक्षा बलों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण ग्लेशियल झीलों की निगरानी और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों के प्रति सतर्कता हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वसंुधरा ताल में अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना राज्य की आपदा तैयारियों को तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वैज्ञानिक संस्थानों, विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों के समन्वय से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को और मजबूत किया जाए।

    उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत यह अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान दल में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की तथा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। उच्च हिमालयी एवं दुर्गम क्षेत्र में अभियान दल की सुरक्षा, आवागमन तथा फील्ड सहयोग के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान भी दल के साथ रहेंगे। यूएसडीएमए द्वारा अभियान के लिए आवश्यक समन्वय एवं लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। टीम को सेटेलाइट फोन तथा लो अर्थ आर्बिट डिवाइस को यूएसडीएमए द्वारा उपलब्ध कराई गई है ताकि टीम का संचार व समन्वय usdma के साथ बना रहे।

    इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी, निदेशक सीबीआरआई आर प्रदीप कुमार, सीबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. डीपी कानूनगो, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, डॉ. शांतनु सरकार, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट रोहिताश्वा मिश्रा, वाडिया के वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार आदि उपस्थित रहे।

    इन उपकरणों से होगी वसुंधरा ताल की निगरानी
    -जलस्तर सेंसर-झील के जलस्तर में उतार-चढ़ाव एवं असामान्य परिवर्तनों की निगरानी।
    -स्वचालित मौसम केंद्र-तापमान, आर्द्रता, वर्षा, हवा की गति एवं दिशा, वायुदाब तथा प्रकाश की तीव्रता का मापन।
    -स्नो डेप्त सेंसर-झील के आसपास बर्फ की गहराई में होने वाले बदलावों की निगरानी।
    -स्नो सब सरफेस टेंपरेचर सेंसर-बर्फ की विभिन्न गहराइयों पर तापमान में होने वाले बदलावों की निगरानी के लिए आठ सेंसर।
    -टिल्ट एवं एक्सेलेरोमीटर सेंसर-चयनित स्थानों पर झुकाव, कंपन एवं हलचल की निगरानी।
    -जल प्रवाह सेंसर-जल प्रवाह में होने वाले परिवर्तनों की निगरानी।
    -सौर ऊर्जा प्रणाली-दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में उपकरणों को विद्युत आपूर्ति।
    -उपग्रह संचार प्रणाली-मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आंकड़ों को बेस स्टेशन तक भेजने की व्यवस्था।
    -डेटा लॉगर एवं मॉनिटरिंग डैशबोर्ड-प्राप्त आंकड़ों का रिकॉर्ड, ऑनलाइन प्रदर्शन तथा निर्धारित थ्रेशोल्ड के आधार पर अलर्ट जनरेशन।

    तकनीकी आंकड़ों के आधार पर जोखिम का आकलन
    देहरादून। इस प्रणाली के माध्यम से वसुंधरा ताल एवं उसके आसपास के पर्यावरणीय और जलवैज्ञानिक परिवर्तनों की लगातार निगरानी की जा सकेगी। सेंसरों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर संभावित असामान्य परिवर्तनों की पहचान करने और समय रहते संबंधित तंत्र को अलर्ट उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी और आधुनिक पूर्व चेतावनी प्रणालियों की स्थापना से राज्य की आपदा पूर्व तैयारी को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा। वसुंधरा ताल में शुरू की जा रही यह पहल भविष्य में अन्य संवेदनशील ग्लेशियल झीलों में भी ऐसी प्रणालियां स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी।

    अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना प्राथमिकता-कौशिक
    देहरादून। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। वसुंधरा ताल से अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना की शुरुआत प्रदेश में ग्लेशियल झीलों से जुड़े जोखिमों की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के माध्यम से जलस्तर, मौसम, हिम की स्थिति, जल प्रवाह तथा अन्य महत्वपूर्ण मानकों से संबंधित आंकड़े लगातार प्राप्त किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए आपदा जोखिम को न्यूनतम करना तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को और मजबूत करना है। उन्होंने अभियान दल को सफल एवं सुरक्षित अभियान के लिए शुभकामनाएं दीं।

    13 झीलें संवेदनशील, 06 झीलों का बैथीमेट्री सर्वे पूरा
    देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों की स्थिति एवं उनसे उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटबस्र्ट फ्लड (ग्लाॅफ) के जोखिम को लेकर राज्य सरकार द्वारा निरंतर निगरानी एवं वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) के वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 344 ग्लेशियल झीलें चिह्नित की गई हैं।
    उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं तकनीकी संस्थाओं द्वारा उत्तराखण्ड में 13 ग्लेशियल झीलों को उच्च जोखिम वाली झीलों के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें बागेश्वर की 01, चमोली की 04, पिथौरागढ़ की 06, टिहरी गढ़वाल की 01 तथा उत्तरकाशी की 01 झील शामिल हैं।

    सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इन उच्च जोखिम वाली ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच के तहत 06 झीलों का बाथीमेट्रिक सर्वेक्षण पूर्ण किया जा चुका है। चमोली जनपद की सरस्वती ताल एवं वसुंधरा ताल, उत्तरकाशी जनपद की केदारताल तथा पिथौरागढ़ जनपद की दारमा घाटी स्थित मबांग, प्यूनग्रू एवं स्युंक्ति यांक्ति प्रोग्लेशियल झीलों का बाथीमेट्रिक सर्वेक्षण पूर्ण कर लिया गया है। सर्वेक्षण के माध्यम से झीलों की गहराई, जलधारण क्षमता एवं अन्य महत्वपूर्ण जलवैज्ञानिक आंकड़े जुटाए गए हैं, जिनके आधार पर संभावित ग्लाॅफ जोखिम का वैज्ञानिक आकलन एवं आवश्यक आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर संबंधित केंद्रीय एवं तकनीकी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। झीलों में जलस्तर, आकार में परिवर्तन तथा अन्य संभावित जोखिमों की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुमन ने कहा कि ग्लाॅफ की संभावित घटनाओं से निचले क्षेत्रों में स्थित बस्तियों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण अवस्थापना को संभावित खतरे को देखते हुए पूर्व तैयारी और समयबद्ध चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर जोखिम की पहचान करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक सुरक्षा एवं बचाव की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

  • लाखों की ठगी का खुलासा, पंजाब से साइबर आरोपी गिरफ्तार

    लाखों की ठगी का खुलासा, पंजाब से साइबर आरोपी गिरफ्तार

    फर्जी ट्रेडिंग क्लासेज के नाम पर 55.50 लाख ठगे, एसटीएफ ने दबोचा

    देहरादून। फर्जी ट्रेडिंग क्लासेज और सेबी पंजीकृत सलाहकार बनकर 55.50 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने पंजाब से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के बैंक खाते में ठगी की रकम में से छह लाख रुपये जमा हुए थे। जांच में उसके खाते के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़ी छह अन्य शिकायतें भी दर्ज मिली हैं।

    पुलिस के अनुसार पंडितवाड़ी निवासी चुन्नी लाल अग्निहोत्री ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने उन्हें SBSBL Community/VIP Community नाम के व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर खुद को सेबी पंजीकृत सलाहकार बताया। इसके बाद फर्जी ट्रेडिंग क्लासेज, डीमैट अकाउंट और नकली CDSL/NSDL दस्तावेज दिखाकर विश्वास में लिया और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 55.50 लाख रुपये जमा कराकर ठगी की।

    शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मुकदमा अपराध संख्या 56/2025 के तहत धारा 318(4), 61(2) बीएनएस और 66(डी) आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना निरीक्षक अनिल कुमार को सौंपी गई।

    एसटीएफ के मुताबिक विवेचना के दौरान लाभार्थी बैंक खातों की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ठगी की रकम की मनीट्रेल खंगाली गई। इसमें सुखवीर सिंह उर्फ सूक्कू (26), निवासी शहीद भगत सिंह नगर, चक मन्नेवाला, थाना सिटी जलालाबाद, जिला फाजिल्का, पंजाब की संलिप्तता सामने आई। उसके खाते में शिकायतकर्ता से ठगी गई रकम में से छह लाख रुपये जमा हुए थे। एसटीएफ टीम ने पंजाब में दबिश देकर फाजिल्का क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस टीम में निरीक्षक अनिल कुमार, उपनिरीक्षक जगमोहन राणा और कांस्टेबल सोहन बडोनी शामिल रहे।
    एसटीएफ ने लोगों से अपील की है कि अज्ञात लोगों के कहने पर बैंक खाता, ओटीपी, मोबाइल या अन्य बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। निवेश के नाम पर अधिक लाभ का लालच देने वाले संदिग्ध प्रस्तावों से सावधान रहें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

  • अल्मोड़ा डीसीबी की चैयरमैन बनी मिली लटवाल

    अल्मोड़ा डीसीबी की चैयरमैन बनी मिली लटवाल

    अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित, भावना जोशी बनी उपाध्यक्ष

    सहकारिता चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, सभी डीसीबी में निर्विरोध बोर्ड गठित

    सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को दी बधाई

    देहरादून। उत्तराखंड में संपन्न सहकारिता चुनावों में भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशियों का सभी 10 जिला सहकारी बैंकों (डीसीबी) में निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। अल्मोड़ा जिला सहकारी बैंक में मिली लटवाल अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुईं, जबकि भावना जोशी उपाध्यक्ष चुनी गईं। प्रदेश में यह पहली बार है जब सभी जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं निदेशक पदों पर निर्विरोध निर्वाचन के साथ बोर्ड का गठन हुआ है।

    अल्मोड़ा डीसीबी के अध्यक्ष पद पर मिली लटवाल का निर्वाचन महिला आरक्षण के तहत हुआ है। सहकारी संस्थाओं के चुनाव में पहली बार महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। प्रदेश के 10 जिला सहकारी बैंकों में तीन अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

    अल्मोड़ा से विभिन्न सहकारी संस्थाओं के लिए प्रतिनिधि चयनित

    उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड, हल्द्वानी के सामान्य निकाय के गठन के लिए अल्मोड़ा जनपद से नरेंद्र राम, विमला देवी, महेश चंद्र सिंह एवं ललित मोहन सिंह लटवाल का चयन किया गया है। वहीं, उत्तराखंड प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के सामान्य निकाय के लिए पुष्पा भाकुनी एवं गणेश सिंह चयनित हुए हैं।

    सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी निर्विरोध निर्वाचित अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, निदेशकों एवं विभिन्न सहकारी संस्थाओं के लिए चयनित प्रतिनिधियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। डॉ. रावत ने कहा कि सभी जिला सहकारी बैंकों में निर्विरोध निर्वाचन सहकारिता क्षेत्र में आपसी विश्वास, समन्वय और संगठनात्मक एकजुटता का परिचायक है। सहकारी संस्थाएं प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ किसानों, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं प्रभावी बनाने तथा सरकार की सहकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    महिला भागीदारी को मिला नया आयाम

    डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से पहली बार 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। इससे सहकारी संस्थाओं के संचालन में महिलाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप से बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र में नीतिगत सुधार, डिजिटलीकरण, महिला भागीदारी और सहकारी संस्थाओं के सशक्तीकरण पर लगातार कार्य कर रही है। नवनिर्वाचित पदाधिकारी इन प्रयासों को धरातल पर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जिला सहकारी बैंक चुनाव चरणबद्ध तरीके से संपन्न हुए। गढ़वाल मंडल के सभी छह जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है, जबकि कुमाऊं मंडल के चारों जिला सहकारी बैंकों में भी निर्विरोध बोर्ड का गठन हुआ है।

  • प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के दौरान मिलेगा बेहतर शैक्षणिक वातावरणः डाॅ. धन सिंह रावत

    प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के दौरान मिलेगा बेहतर शैक्षणिक वातावरणः डाॅ. धन सिंह रावत

    शिक्षा मंत्री ने किया डायट देहरादून में 281.68 लाख की लागत से नवनिर्मित छात्रावास का लोकार्पण

    कहा, छात्रावास संचालन से दूर दराज क्षेत्रों के छात्रों को मिलेगा लाभ

    देहरादून। सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) देहरादून में 281.68 लाख की लागत के तैयार नवनिर्मित छात्रावास का विधिवत लोकार्पण किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ डायट देहरादून के डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा स्वागत गीत से हुआ।

    इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि नवनिर्मित छात्रावास दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले डीएलएड प्रशिक्षुओं के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक एवं बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के दौरान बेहतर शैक्षिक वातावरण मिलेगा और वे अपनी पढ़ाई एवं प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके लिये प्रशिक्षण कार्यशालाओं में पारंपरिक तरीकों की जगह आधुनिक तकनीकों एवं नवाचार को अपनाया जा रहा है। ताकि शिक्षक एवं शिक्षिकाएं शैक्षणिक कार्यों में नवाचार अपनाकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

    कार्यक्रम में निदेशक एससीईआरटी वंदना गर्ब्याल ने छात्रावास की उपयोगिता और प्रशिक्षुओं के लिए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सुविधा डायट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण अनुभव को और अधिक सुगम बनाएगी। वहीं डायट की प्राचार्य हेमलता गौड़ उनियाल ने छात्रावास के लोकार्पण को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे प्रशिक्षुओं को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। लोकार्पण समारोह के दौरान डीएलएड प्रशिक्षुओं ने जौनसारी लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

    इस अवसर पर सचिव विद्यालयी शिक्षा ज्योति यादव, निदेशक एससीईआरटी वंदना गर्ब्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा विनोद प्रसाद सेमल्टी, अपर निदेशक एससीईआरटी पदमेंद्र सकलानी, संयुक्त निदेशक के.एन. बिजल्वाण, जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक देहरादून प्रेमलाल भारती, डायट प्राचार्य हेमलता गौड़ उनियाल सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी व डायट देहरादून संकाय सदस्य एवं डीएलएड प्रशिक्षु उपस्थित रहे।

  • उत्तराखंड में तेज हुआ HPV टीकाकरण अभियान

    उत्तराखंड में तेज हुआ HPV टीकाकरण अभियान

    65 हजार से अधिक किशोरियों का हुआ टीकाकरण

    चमोली ने हासिल किया 100 प्रतिशत लक्ष्य

    देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण कार्यक्रम को प्रदेश में निरंतर गति मिल रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड द्वारा राज्य एवं जनपद स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग, लक्षित किशोरियों की सूची तैयार करने, टीकाकरण सत्रों की संख्या बढ़ाने तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा निरंतर फॉलोअप के परिणामस्वरूप अभियान ने हाल के महीनों में उल्लेखनीय गति पकड़ी है।

    कार्यक्रम के तहत 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी तथा 15 वर्ष की आयु पूरी न करने वाली किशोरियां लक्षित समूह में शामिल हैं।

    भारत सरकार के विजन के अनुरूप उत्तराखंड में HPV टीकाकरण को बढ़ावा
    “सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री, ने कहा कि राज्य सरकार किशोरियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षित भविष्य को लेकर प्रतिबद्ध है। HPV टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य की प्रत्येक पात्र किशोरी तक HPV टीकाकरण की सुविधा समय पर पहुंचे और टीकाकरण को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांति या हिचकिचाहट को सही एवं तथ्यात्मक जानकारी के माध्यम से दूर किया जाए।

    राष्ट्रीय स्तर पर किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV टीकाकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के अनुरूप उत्तराखंड में भी पात्र किशोरियों तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    विनय शंकर पांडेय ,सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि भारत सरकार के विजन के अनुरूप उत्तराखंड में HPV टीकाकरण को पात्र किशोरियों तक पहुंचाने के लिए राज्य स्तर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किशोरी तक समय पर टीकाकरण की सुविधा पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है और इसके लिए राज्य स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग एवं फॉलोअप को मजबूत किया जा रहा है। कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य केवल वर्तमान अभियान के दौरान अधिक से अधिक किशोरियों का टीकाकरण करना ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें प्रत्येक पात्र बालिका को 14 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर समय से HPV टीका मिल सके।

    सर्वाइकल कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण कदम
    HPV संक्रमण सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। किशोरावस्था में HPV का टीका लगाए जाने से भविष्य में HPV संक्रमण तथा उससे होने वाली सर्वाइकल कैंसर संबंधी बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण मदद मिलती है। यही कारण है कि कम उम्र में पात्र किशोरियों का टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में एक प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय माना जाता है।

    डॉ. संदीप तिवारी, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड ने कहा “उत्तराखंड में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV टीकाकरण को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालय स्तर पर जागरूकता एवं टीकाकरण गतिविधियों को गति दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग का यह संयुक्त प्रयास “सही जानकारी, सही समय पर टीकाकरण और स्वस्थ भविष्य” के संदेश के साथ उत्तराखंड की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव की दिशा में सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

    उत्तराखंड में HPV टीकाकरण की प्रगति
    एचपीवी वैक्सीनेशन प्रोग्राम के जिला रैंकिंग डैशबोर्ड के अनुसार सितंबर माह 2026 तक उत्तराखंड में कुल 95,000 के निर्धारित अभियान लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 65,000 लाभार्थियों का एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 69 प्रतिशत है। जनपदवार प्रगति में चमोली 100 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज कर प्रथम स्थान पर है, जबकि पिथौरागढ़ ने लगभग 96 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त की है। ऊधम सिंह नगर जनपद में लगभग 86 प्रतिशत, लाभार्थियों का टीकाकरण किया गया है। साथ ही, राज्य के अन्य जनपदों में भी एचपीवी टीकाकरण ने गति पकड़ ली है। इस प्रकार राज्य में एचपीवी टीकाकरण अभियान के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रगति दर्ज की जा रही है।

    यह प्रगति राज्य एवं जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा, फॉलोअप, सक्रिय ड्यू-लिस्टिंग तथा पात्र किशोरियों के मोबिलाइजेशन को दर्शाती है।
    प्रदेश स्तर पर 95,000 किशोरियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और विभाग द्वारा शेष पात्र किशोरियों तक पहुंचने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

    डॉ. अमित शुक्ला, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड ने कहा कि प्रदेश में HPV टीकाकरण की प्रगति को लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। जनपदों द्वारा किए जा रहे प्रयासों, ड्यू-लिस्टिंग, मोबिलाइजेशन और फॉलोअप के माध्यम से शेष पात्र किशोरियों तक पहुंचने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य जनपदों में भी टीकाकरण ने गति पकड़ी है और निर्धारित लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग की रणनीति—हर पात्र बालिका तक पहुंच, टीकाकरण और फॉलोअप
    HPV टीकाकरण को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इनमें आशा कार्यकर्ताओं द्वारा पात्र किशोरियों की ड्यू-लिस्ट तैयार एवं अद्यतन करना, टीकाकरण सत्रों का आयोजन, जनपद एवं विकासखंड स्तर पर दैनिक प्रगति की समीक्षा तथा छूटी हुई किशोरियों का फॉलोअप शामिल है।

    विभाग द्वारा टीकाकरण से वंचित किशोरियों को विभिन्न श्रेणियों में चिन्हित किया जा रहा है, जैसे—टीकाकरण सत्र में उपस्थित न होना, परिवार अथवा किशोरी की हिचकिचाहट, संपर्क में न आना, प्रवास आदि। इससे प्रत्येक श्रेणी के अनुसार लक्षित कार्रवाई करने में सहायता मिलती है।
    इसके साथ ही विद्यालयों, अभिभावकों, समुदाय के प्रतिनिधियों तथा RKSK काउंसलर्स के माध्यम से जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

    डॉ. ऋतु खेतान, सहायक निदेशक, टीकाकरण प्रभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड ने बताया कि HPV टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र किशोरियों की पहचान, ड्यू-लिस्टिंग, टीकाकरण सत्रों का आयोजन और छूटी हुई किशोरियों का फॉलोअप कार्यक्रम की प्रमुख रणनीतियां हैं। उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा और डेटा आधारित मॉनिटरिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी पात्र किशोरी टीकाकरण से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि “हर किशोरी तक HPV टीकाकरण, स्वस्थ उत्तराखंड की ओर एक कदम।”

    सुरक्षित टीकाकरण पर विशेष जोर
    HPV टीकाकरण के दौरान सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए टीकाकरण स्थल पर निर्धारित व्यवस्थाओं, AEFI (Adverse Events Following Immunization) की तैयारी तथा संक्रमण रोकथाम संबंधी प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    विभाग द्वारा टीकाकरण टीमों की क्षमता बढ़ाने तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण एवं सहयोग उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि पात्र किशोरियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण टीकाकरण सेवा मिल सके।

    HPV KAVACH से डेटा के आधार पर लिए जा रहे निर्णय
    उत्तराखंड में HPV टीकाकरण कार्यक्रम की निगरानी को मजबूत करने के लिए HPV KAVACH—HPV Program SMART Dashboard विकसित किया जा रहा है। यह पहल उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली नवाचार एवं अच्छी कार्यप्रणाली के रूप में सामने आ रही है।
    HPV KAVACH के माध्यम से टीकाकरण की प्रगति, कवरेज, सत्रों तथा वैक्सीन स्टॉक की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। रियल-टाइम डेटा, विश्लेषणात्मक जानकारी और अलर्ट के माध्यम से कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों तथा वैक्सीन स्टॉक से संबंधित संभावित समस्याओं की समय पर पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

    यह डिजिटल पहल “Data to Action” की अवधारणा को मजबूत करते हुए नीति-निर्माताओं और कार्यक्रम प्रबंधकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    अभियान से नियमित टीकाकरण की ओर
    स्वास्थ्य विभाग द्वारा HPV टीकाकरण को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे नियमित व्यवस्था के रूप में मजबूत करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    अभियान चरण में वर्तमान पात्र समूह की सभी किशोरियों तक पहुंच बनाकर उनका टीकाकरण सुनिश्चित करना लक्ष्य है, जबकि नियमित चरण में प्रत्येक बालिका के 14 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही उसे समय पर टीका उपलब्ध कराने पर ध्यान रहेगा।
    इस व्यवस्था के माध्यम से पात्र किशोरियों की पहचान—ड्यू-लिस्ट—मोबिलाइजेशन—टीकाकरण—फॉलोअप की पूरी प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा।

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए ड्यू-लिस्ट की नियमित समीक्षा, विकासखंडवार दैनिक विश्लेषण, टीकाकरण से वंचित किशोरियों की पहचान, वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता, नियमित रिपोर्टिंग और सामुदायिक सहभागिता को और मजबूत किया जा रहा है।
    विद्यालय स्तर पर जागरूकता एवं अभिभावकों की सहभागिता

    HPV टीकाकरण को जन-जन तक पहुंचाने और पात्र किशोरियों एवं उनके अभिभावकों में टीकाकरण के प्रति सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग, उत्तराखंड सरकार द्वारा शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विद्यालय स्तर पर विशेष जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

    विद्यालयों में प्रातःकालीन प्रार्थना सभा के दौरान छात्र-छात्राओं को HPV, HPV संक्रमण से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम, सर्वाइकल कैंसर से बचाव में HPV टीकाकरण की भूमिका तथा टीकाकरण की पात्रता के संबंध में सरल एवं तथ्यात्मक जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही किशोरियों के अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित कर HPV वैक्सीन को लेकर प्रचलित भ्रांतियों एवं आशंकाओं को दूर करने तथा तथ्यों के आधार पर टीकाकरण के महत्व को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा विद्यालयों के माध्यम से अभिभावकों तक यह संदेश भी पहुंचाया जा रहा है कि HPV टीकाकरण किशोरियों के भविष्य के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के इस समन्वित प्रयास से विद्यालय, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक, किशोरियां और अभिभावक—सभी को अभियान से जोड़कर सामुदायिक सहभागिता को मजबूत किया जा रहा है।

    डॉ. पंकज सिंह, सहायक निदेशक, IEC एवं जागरूकता प्रभाग ने कहा कि HPV टीकाकरण की सफलता में सही एवं तथ्यात्मक जानकारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के साथ समन्वय कर विद्यालयों में प्रार्थना सभा, अभिभावक संवाद तथा विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से HPV टीकाकरण से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाने और भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से किशोरियों एवं अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व को समझने और सही निर्णय लेने में सहयोग मिलेगा।

    Pink Day के माध्यम से HPV टीकाकरण का संदेश
    HPV टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में “Pink Day” जैसी विशेष जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है। राज्य में प्रत्येक रविवार को पिंक डे के रूप में मनाया जा रहा है। Pink Day को सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम एवं HPV टीकाकरण के प्रति जागरूकता का प्रतीकात्मक अवसर बनाते हुए छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को अभियान से जोड़ा जा रहा है।
    इस अवसर पर जागरूकता संवाद, जानकारी साझा करना, पोस्टर/संदेश प्रदर्शन तथा किशोरियों और अभिभावकों के साथ संवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से HPV टीकाकरण से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

    इस पहल का उद्देश्य HPV टीकाकरण को लेकर झिझक, गलत धारणाओं और मिथकों को दूर करना तथा अभिभावकों को अपनी पात्र बेटियों के टीकाकरण के लिए जागरूक एवं प्रोत्साहित करना है।

    प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि उत्तराखंड की प्रत्येक पात्र किशोरी तक HPV टीकाकरण की सुविधा पहुंचे और भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के बोझ को कम करने की दिशा में ठोस आधार तैयार हो।
    “हर बालिका तक पहुंच—हर पात्र बालिका का टीकाकरण—सुरक्षित भविष्य की ओर उत्तराखंड।”