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  • उत्तराखण्ड में खनन से रिकॉर्ड कमाई, पहली बार 1200 करोड़ के पार

    उत्तराखण्ड में खनन से रिकॉर्ड कमाई, पहली बार 1200 करोड़ के पार

    सीएम धामी ने कहा, खनन माफिया पर लगाम लगा बढ़ाया राजस्व

    भाजपा के ही नेता उठा चुके हैं अवैध खनन का मुद्दा

    मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में नई छलांग

    उत्तराखण्ड में खनन से आय का नया अध्याय, धामी सरकार ने बदली तस्वीर

    रणनीति, सिस्टम और सख्ती—धामी सरकार ने खनन में लिखी सफलता की कहानी

    खनन सेक्टर में पारदर्शिता की जीत, धामी सरकार ने बनाए नए मानक

    देहरादून। बेशक भाजपा के ही कुछ नेता अवैध खनन का मुद्दा उछाल अपनी ही सरकार को घेरने की कवायद में जुटे हैं। लेकिन खनन राजस्व के ताजे आंकड़े तो कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन विभाग ने 950 करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष कुल 1217 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

    इस उपलब्धि में ट्रेजरी में 1130 करोड़ रुपये, जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (DMF) में 80 करोड़ रुपये तथा एसएमईटी से 7 करोड़ रुपये का योगदान शामिल है।

    इससे पूर्व वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी विभाग ने 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1041 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर अपनी कार्यक्षमता सिद्ध की थी।

    प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि खनन राजस्व की यह निरंतर वृद्धि मुख्यमंत्री धामी की पारदर्शी, जवाबदेह और सुधारोन्मुखी नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। वर्ष 2012-13 में मात्र 110 करोड़ रुपये से शुरू हुआ यह सफर अब 2025-26 में 1217 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।

    मुख्यमंत्री धामी के स्पष्ट निर्देशों के तहत खनिज नीति एवं नियमावली का सरलीकरण किया गया, जिससे वैध खनन को बढ़ावा मिला।  और अवैध खनन, परिवहन व भंडारण पर प्रभावी रोक लगी। पारदर्शी व्यवस्था के तहत खनन पट्टों का आवंटन किया गया, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकी।

    सीएम धामी की पहल पर तकनीकी नवाचारों को भी प्राथमिकता दी गई। MDTSS (माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम) के माध्यम से चार मैदानी जनपदों में 45 अत्याधुनिक ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं, जिनमें ANPR कैमरा, RFID टैग और अन्य आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही Mineral Management System, e-Ravanna, Mining e-Services, Surveillance Enforcement System और Decision Support System जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म लागू किए गए हैं।

    ई-रवन्ना प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए विशेष सिक्योरिटी फीचर युक्त कागज की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे फर्जीवाड़े और दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इन सभी प्रयासों के चलते अवैध खनन पर लगाम लगी है और राजस्व में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

    मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में किए गए इन नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में MDTSS और ई-खन्ना सिक्योरिटी पेपर परियोजनाओं को प्रतिष्ठित SKOCH Award (Gold) से सम्मानित किया गया।

    इसके अतिरिक्त, खान मंत्रालय भारत सरकार द्वारा Minor Mineral Reforms में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखण्ड को ‘सी’ श्रेणी के राज्यों में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ, जिसके तहत 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली। साथ ही State Mining Readiness Index में बेहतर प्रदर्शन के लिए भी 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई।

    पार्टी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पारदर्शिता, तकनीकी सशक्तिकरण और कठोर प्रवर्तन के समन्वय ने उत्तराखण्ड के खनन क्षेत्र को नई दिशा दी है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और सुशासन का मॉडल स्थापित हो रहा है।

    गौरतलब है कि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत संसद में अवैध खनन का मुद्दा उठा कर धामी सरकार को घेर चुके हैं। इसके अलावा भाजपा विधायक अरविंद पांडे व मुन्ना सिंह चौहान भी अवैध खनन पर मुखर रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी खनन पट्टों के आवंटन पर सवाल उठाती रही है।

    ऐसे में खनन राजस्व में वृद्धि के आंकड़े धामी सरकार के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र ने भी बेहतर खनन राजस्व से खुश होकर प्रदेश को प्रोत्साहन राशि भी दी है।

  • सीएम  ने जुगमन्दर हॉल के नवीनीकरण का लोकार्पण किया

    सीएम ने जुगमन्दर हॉल के नवीनीकरण का लोकार्पण किया

    देहरादून में पार्कों के विकास कार्यों का शिलान्यास

    “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही राज्य सरकार

    देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक शहर बनाने के लिए निरंतर प्रयास

    1400 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नगर निगम देहरादून में निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के अंतर्गत 02 करोड़ 32 लाख 50 हजार रुपये की लागत से जुगमन्दर हॉल के जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण कार्य का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने केदारपुरम स्थित ए.बी.सी. सेंटर में कैनालों के निर्माण एवं नगर निगम क्षेत्रांतर्गत 06 स्थानों पर पार्कों के विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का शिलान्यास भी किया।

    मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार “विकास भी और विरासत भी” को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रही है। आज हमारा देहरादून अपनी समृद्ध पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को संजोते हुए आगे बढ़ रहा है। तेज विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति और पहचान को सहेजने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के शहरी क्षेत्रों को सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से देश के शहरों, कस्बों और नगरों में स्वच्छता की एक नई संस्कृति विकसित हुई है।
    अमृत योजना के माध्यम से शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था और हरित क्षेत्रों के विकास की दिशा में भी अनेक कार्य किए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के माध्यम से देशभर के शहरों को आधुनिक, सुविधायुक्त और भविष्य के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों का स्वयं का घर होने का सपना साकार हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा अन्य क्षेत्रों में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किए जा रहे हैं। देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और विकसित शहर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है।
    स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, ओडीएफ अभियान और लीगेसी वेस्ट प्रबंधन जैसी योजनाओं के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी स्थापित किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून को आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए 1400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं पर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

    कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन का निर्माण किया गया है। कूड़ा वाहनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना भी की गई है। हरित और स्वस्थ देहरादून के निर्माण के लिए शहर में 35 पार्कों का निर्माण कराया गया है। केदारपुरम में योगा थीम पर आधारित शहर का सबसे बड़ा पार्क विकसित किया गया है। वीर बलिदानियों की स्मृति में विशेष स्मृति पार्कों के माध्यम से 50 हजार वर्ग मीटर से अधिक हरित क्षेत्र विकसित किया गया है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जलभराव वाले चिन्हित स्थानों पर रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 11 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं।

    नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देहरादून ने देशभर में 19वां स्थान प्राप्त किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का शुभारंभ करेंगे। इससे आवागमन और तेज होगा। इन संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पार्किंग, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देहरादून को देश के शीर्ष स्वच्छ शहरों की श्रेणी में शामिल करने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए रिस्पना और बिंदाल नदियों के ऊपर एलिवेटेड रोड निर्माण की योजना भी तैयार की जा रही है।

    पिछले एक वर्ष में नगर निगम देहरादून द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम ने राजस्व संग्रहण को लगभग 52 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 73 करोड़ रुपये तक पहुंचाया है, जिससे राजस्व में 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां लगभग 190 से 200 वाहन डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में लगे थे, आज उनकी संख्या बढ़कर लगभग 300 हो गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण न हो, यह राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है। सरकारी और निगम की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करना नगर निगम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    उन्होंने नगर निगम के सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस पर सक्रिय कार्रवाई की अपेक्षा की। उन्होंने जनता से देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक शहर बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, रामसिंह कैड़ा, खजान दास, मेयर सौरभ थपलियाल, विधायक उमेश शर्मा काऊ,  सविता कपूर, सहदेव सिंह पुंडीर, नगर आयुक्त देहरादून  नमामि बंसल एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

  • व्यवसायिक एलपीजी सिलेंडर वितरण के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया

    व्यवसायिक एलपीजी सिलेंडर वितरण के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया

    राज्य को मिला अतिरिक्त 26 प्रतिशत का कोटा

    सचिव आनंद स्वरूप ने जारी की संशोधित एसओपी

    देहरादून। राज्य में व्यवसायिक एलपीजी सिलेण्डरों की बढ़ती मांग और आपूर्ति संतुलन को ध्यान में रखते हुए पूर्व में निर्धारित एसओपी को अतिक्रमित करते हुए नई संशोधित एसओपी लागू कर दी गई है।

    सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आनंद स्वरूप ने बताया कि राज्य द्वारा पीएनजी को बढ़ावा देने की दिशा में किए गए प्रयासों के फलस्वरूप उत्तराखण्ड को व्यवसायिक एलपीजी हेतु अतिरिक्त 6 प्रतिशत कोटा प्राप्त हुआ है, जबकि 20 प्रतिशत कोटा केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में प्रदान किया गया था। इस प्रकार पूर्व निर्धारित 40 प्रतिशत के कोटे में वृद्धि करते हुए अब कुल 66 प्रतिशत कोटे के आधार पर नई व्यवस्था लागू की गई है। बता दें कि पूर्व में 40 प्रतिशत कोटे के अनुसार एसओपी निर्धारित की गई थी।

    स्वरूप ने बताया कि नई एसओपी का उद्देश्य विभिन्न उपभोक्ता वर्गों के बीच संतुलित, प्राथमिकता आधारित एवं पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि चारधाम यात्रा, पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों एवं आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। यह व्यवस्था अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेगी।

    स्वरूप ने बताया कि राज्य में कार्यरत तेल एवं गैस विपणन कंपनियों द्वारा उनकी बाजार हिस्सेदारी के अनुसार एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सभी जिलाधिकारियों को आपूर्ति की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी और भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

    रेस्टारेंट और ढाबों के लिए 2000 सिलेण्डर

    सचिव स्वरूप ने बताया कि संशोधित एसओपी में विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों की दैनिक आवश्यकता को निर्धारित किया गया है। होटल एवं रिजॉर्ट जैसे पर्यटन आधारित प्रतिष्ठानों के लिए 1500 सिलेण्डर (24 प्रतिशत) तथा रेस्टोरेंट एवं ढाबों के लिए 2000 सिलेण्डर (32 प्रतिशत) निर्धारित किए गए हैं, जिससे पर्यटन सीजन के दौरान निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। सरकारी एवं सरकार द्वारा नियंत्रित गेस्टहाउसों के लिए 300 सिलेण्डर (5 प्रतिशत) आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, पेइंग गेस्ट सुविधा वाले छात्रावासों तथा होम-स्टे एवं स्वयं सहायता समूहों के प्रतिष्ठानों के लिए 200-200 सिलेण्डर (प्रत्येक 3 प्रतिशत) निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विवाह समारोहों के लिए 660 सिलेण्डर (10 प्रतिशत) तथा फार्मास्यूटिकल, अस्पताल, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, रसायन एवं अन्य प्राथमिकता वाले औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 1250 सिलेण्डर (20 प्रतिशत) का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 6310 सिलेण्डरों का दैनिक वितरण सुनिश्चित किया गया है।

    देहरादून को सर्वाधिक 31 प्रतिशत आवंटन

    सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि जनपदवार कोटा भी गैस कनेक्शनों की संख्या के अनुरूप निर्धारित कर दिया गया। देहरादून को 31 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक आवंटन दिया गया है, जबकि हरिद्वार एवं नैनीताल को 13-13 प्रतिशत आवंटन निर्धारित किया गया है। उधमसिंह नगर को 9 प्रतिशत, चमोली को 6 प्रतिशत तथा रुद्रप्रयाग को 5 प्रतिशत आवंटन दिया गया है। टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी एवं अल्मोड़ा को 4-4 प्रतिशत, पिथौरागढ़ को 3 प्रतिशत तथा बागेश्वर एवं चम्पावत को 2-2 प्रतिशत आवंटन दिया गया है। यह व्यवस्था स्थानीय मांग और उपभोक्ता घनत्व को ध्यान में रखते हुए तय की गई है।

    विवाह समारोह हेतु विशेष प्रावधान, 02 सिलेडर निर्धारित

    सचिव आनंद स्वरूप् ने बताया कि विवाह समारोहों के लिए विशेष प्रावधान करते हुए अधिकतम 2 व्यवसायिक सिलेण्डरों की सीमा निर्धारित की गई है। इसके लिए आवेदक को संबंधित जिलाधिकारी या नामित अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा, जिसके बाद दस्तावेजों के परीक्षण उपरांत अनुमति प्रदान की जाएगी। अनुमोदन के बाद संबंधित गैस वितरक द्वारा अस्थायी कनेक्शन जारी कर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी तथा इसकी सूचना जिलाधिकारी को भी दी जाएगी। निर्धारित अवधि पूर्ण होने के बाद यह कोटा पुनः सामान्य श्रेणियों में समायोजित कर लिया जाएगा, जिससे किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो।

    विवाह समारोह हेतु निर्धारित 660 सिलेण्डरों में देहरादून एवं नैनीताल को सर्वाधिक 176-176 सिलेण्डर आवंटित किए गए हैं, जबकि हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर को 64-64 सिलेण्डर दिए गए हैं। अन्य जनपदों को उनकी आवश्यकतानुसार 18 से 24 सिलेण्डर तक आवंटित किए गए हैं। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्रों के लिए निर्धारित 1250 सिलेण्डरों में देहरादून, हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर को 380-380 सिलेण्डर आवंटित किए गए हैं, नैनीताल व टिहरी को बीस-बीस तथा पौड़ी को 70 सिलेण्डर आवंटित किए गए हैं।

  • 14 पब-बार और होटलों के CCTV फुटेज का एक्सेस पुलिस को मिला

    14 पब-बार और होटलों के CCTV फुटेज का एक्सेस पुलिस को मिला

    आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने को विशेष टीम गठित

    देहरादून। जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा पब, बार और होटल प्रतिष्ठानों में आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) द्वारा जारी निर्देशों का असर दिखाई देने लगा है।
    पुलिस टीमों ने शहर के विभिन्न पब, बार और होटल संचालकों से समन्वय स्थापित करते हुए उनके प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों का एक्सेस प्राप्त करना शुरू कर दिया है।

    अब तक 14 प्रतिष्ठानों के सीसीटीवी सिस्टम का एक्सेस पुलिस को मिल चुका है।
    इस कार्य के लिए SSP द्वारा एक विशेष तकनीकी टीम का गठन किया गया है, जो शेष पब, बार और होटल संचालकों से समन्वय स्थापित कर उनके सीसीटीवी कैमरों को पुलिस निगरानी तंत्र से जोड़ने की कार्रवाई कर रही है।
    इस पहल का उद्देश्य किसी भी घटना की स्थिति में त्वरित जांच सुनिश्चित करना, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
    पुलिस की इस मुहिम में पब, बार और होटल संचालकों ने सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया है।

  • दून पुस्तक महोत्सव 2026: 4 अप्रैल से देहरादून में भव्य शुरुआत!

    दून पुस्तक महोत्सव 2026: 4 अप्रैल से देहरादून में भव्य शुरुआत!

    नौ दिन तक चलेगा पुस्तक महोत्सव

    दून पुस्तक महोत्सव 2026, देहरादून में साहित्य, संस्कृति और रचनात्मकता का उत्सव

    नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में गढ़वाली, कुमाऊँनी सहित कई भाषाओं की लाखों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी

    इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘दून साहित्य उत्सव’ है, जहाँ जाने-माने लेखक, फिल्मकार, विचारक और जानी-मानी हस्तियाँ पैनल चर्चाओं और इंटरैक्टिव सत्रों के ज़रिए पाठकों से जुड़ेंगी

    नितिन सेठ, इम्तियाज़ अली, अखिलेश मिश्रा, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला, ब्रिगेडियर सुशील तंवर, संजीव चोपड़ा, लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जैसी जानी-मानी हस्तियाँ विभिन्न सत्रों में हिस्सा लेंगी

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 4 से 12 अप्रैल तक देहरादून के परेड ग्राउंड में दून पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

    गुरुवार को देहरादून में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘दून पुस्तक महोत्सव 2026’ की औपचारिक घोषणा की।
    उन्होंने बताया कि ‘दून पुस्तक महोत्सव’, पुस्तकों, विचारों और संस्कृति के एक अनूठे संगम के रूप में पूरे देश के पाठकों, लेखकों और कलाकारों को एक मंच पर लाएगा।

    इस महोत्सव का उद्घाटन 4 अप्रैल 2026 को सुबह 10:30 बजे देहरादून के परेड ग्राउंड में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि, प्रख्यात विद्वान आचार्य बालकृष्ण, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।

    नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में गढ़वाली और कुमाऊँनी सहित कई भाषाओं की लाखों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी, जो इसे पुस्तक प्रेमियों के लिए स्वर्ग बना देंगी। इस महोत्सव में प्रवेश निःशुल्क है। इसका उद्देश्य पढ़ने की आदतों को बढ़ावा देना और साहित्य को व्यापक जनसमुदाय के लिए सुलभ बनाना है।

    पुस्तकों के अलावा, दून पुस्तक महोत्सव 2026 में बच्चों के लिए प्रतिदिन रोचक गतिविधियाँ होंगी, जिनमें स्टोरी टेलिंग सत्र, रचनात्मक कार्यशालाएँ, क्विज़ और इंटरैक्टिव सीखने के अनुभव शामिल हैं। इस महोत्सव में कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और म्यूजिकल कॉन्सर्ट भी होंगे, जो एक जीवंत और उत्सव जैसा माहौल बनाएंगे।

    इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘दून साहित्य उत्सव’ है, जहाँ जाने-माने लेखक, फिल्मकार, विचारक और जानी-मानी हस्तियाँ पैनल चर्चाओं और इंटरैक्टिव सत्रों के ज़रिए पाठकों से जुड़ेंगी। नितिन सेठ, इम्तियाज़ अली, अखिलेश मिश्रा, आचार्य प्रशांत, शुभांशु शुक्ला, ब्रिगेडियर सुशील तंवर, संजीव चोपड़ा, लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जैसी जानी-मानी हस्तियाँ विभिन्न सत्रों में हिस्सा लेंगी।

    वक्ता सिनेमा और साहित्य, दून घाटी से महिलाओं की आवाज़, वर्दी में नेतृत्व और साहस, भारत के अतीत में देशभक्ति और क्रांति, इंसान और मशीन के बदलते रिश्ते, और 1946 के नौसेना विद्रोह एवं सुभाष चंद्र बोस की विरासत जैसे ऐतिहासिक विषयों पर चर्चा करेंगे।

    साहित्यिक जुड़ाव को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पिछले साल, इसने एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया था, जिसमें उत्तराखंड के लेखक, अनुवादक और भाषा विशेषज्ञ एक साथ आए थे।

    इस पहल के परिणामस्वरूप, बाल कहानियों और साहित्यिक कृतियों की एक विस्तृत श्रृंखला की पहचान की गई और उनका गढ़वाली तथा कुमाऊँनी भाषाओं में अनुवाद किया गया। यह इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को दर्शाता है। इस प्रयास के परिणामस्वरूप दोनों भाषाओं में 13 पुस्तकें तैयार की गई हैं, जिन्हें ‘दून पुस्तक महोत्सव 2026’ में औपचारिक रूप से जारी किया जाएगा।

    साहित्य, ज्ञान और लाइव प्रस्तुतियों के अपने अनोखे मेल के साथ, दून पुस्तक महोत्सव 2026 देहरादून और पूरे उत्तराखंड क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन बनने का वादा करता है। इस महोत्सव की परिकल्पना न केवल पुस्तकों के उत्सव के रूप में की गई है, बल्कि इसे संवाद, रचनात्मकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक जीवंत मंच के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    यह पूरे देश में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रति राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    जहाँ पुस्तकें, बातचीत और संस्कृति एक ही छत के नीचे एक साथ आते हैं, वहीं ‘दून पुस्तक महोत्सव’, 4 से 12 अप्रैल 2026 तक परेड ग्राउंड में आयोजित होने वाली इस साहित्यिक और सांस्कृतिक गाथा का हिस्सा बनने के लिए सभी को आमंत्रित करता है।

  • आपदा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों का सम्मान

    आपदा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों का सम्मान

    देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने लोक भवन में आयोजित सम्मान कार्यक्रम में आपदा के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले देहरादून जिले के कार्मिकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी सम्मानित कार्मिकों के समर्पण एवं कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए उन्हें अन्य कार्मिकों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।

    गौरतलब है कि जनपद देहरादून में 15-16 सितम्बर, 2025 की रात्रि को सहस्त्रधारा-कार्लीगाड क्षेत्र में हुई भीषण वर्षा एवं बादल फटने की घटना से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

    घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए गए। इस आपदा में कई कार्मिकों द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया गया, जिन्हें राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया।

    सम्मानित होने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी कृष्ण कुमार मिश्रा, उप जिलाधिकारी हर गिरि, अपर उप जिलाधिकारी न्यायिक कुमकुम जोशी, पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार असवाल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ0 एम0ए0 भट्ट, कनिष्ठ सहायक जिला सूचना कार्यालय देहरादून इन्द्रेश कोठारी, लाइनमैन यूपीसीएल देहरादून अमन, कनिष्ठ अभियन्ता लो0नि0वि0 देहरादून प्रदीप शाही थे।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन समय में एक “फ्रंटलाइन लीडर” के रूप में कार्य करते हुए न केवल प्रशासन का प्रभावी नेतृत्व किया, बल्कि अपनी टीम के साथ मिलकर उत्कृष्ट समन्वय एवं तत्परता का परिचय दिया। राज्यपाल ने जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित करने की पहल की भी सराहना की और कहा कि यह पहल अन्य लोगों को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।

    राज्यपाल ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन एवं पूर्व तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सैनिकों, सुरक्षाबलों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं अन्य कार्मिकों ने निस्वार्थ भाव से कार्य करते हुए अपने आराम और सुरक्षा की परवाह किए बिना समाज और राष्ट्र की सेवा की है। उनका यह समर्पण और त्याग समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

    इस अवसर पर सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, अपर सचिव रीना जोशी, जिलाधिकारी सविन बंसल एवं मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह उपस्थित रहे।

  • रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत पर बड़ा अपडेट, तीन और आरोपी पकड़े गए

    रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत पर बड़ा अपडेट, तीन और आरोपी पकड़े गए

    बार में विवाद के बाद सड़क पर चली गोलियां

    पुलिस अब तक 7 आरोपियों को भेज चुकी है जेल

    देहरादून। राजपुर थाना क्षेत्र के जोहड़ी गांव में हुई फायरिंग की घटना में एक बुजुर्ग की मौत के मामले में पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

    जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की सुबह कंट्रोल रूम के माध्यम से जोहड़ी गांव में फायरिंग की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसपी सिटी सहित पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
    जांच में सामने आया कि मालसी की ओर से जोहड़ी गांव की तरफ आ रही स्कॉर्पियो-एन और दिल्ली नंबर की फॉर्च्यूनर कार में सवार लोगों के बीच आपसी विवाद के चलते फायरिंग हुई।

    इसी दौरान सड़क पर मॉर्निंग वॉक कर रहे 74 वर्षीय रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी निवासी तुला अपार्टमेंट, जोहड़ी गांव को गोली लग गई। उन्हें तुरंत मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

    मृतक के परिजनों की तहरीर के आधार पर थाना राजपुर में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले की जांच बीएनएस और आर्म्स एक्ट की धाराओं में कर रही है।

    प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि फॉर्च्यूनर कार में सवार आरोपी कुठालगेट स्थित एक बार में काम करते थे। 29 मार्च की रात बार में बिल को लेकर उनका स्कॉर्पियो सवार युवकों—शांतनु त्यागी, आदित्य चौधरी और कविश त्यागी—के साथ विवाद हो गया था।
    अगली सुबह दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे का पीछा करते हुए फायरिंग करने लगे। इस दौरान एक निर्दोष बुजुर्ग इसकी चपेट में आ गए और उनकी जान चली गई।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत टीमों का गठन कर कार्रवाई शुरू की। पहले चरण में चार आरोपियों रोहित कुमार, मोहम्मद अखलाक उर्फ साबिर, संदीप कुमार और आदित्य चौधरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इनके कब्जे से दो देशी तमंचे और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए थे।

    मृतक सैन्य अफसर एम के जोशी

    पूछताछ के दौरान अन्य आरोपियों के नाम सामने आए, जिनमें से पुलिस ने अब आदेश गिरी (शामली), समीर चौधरी (हरिद्वार) और मोहित अरोड़ा (नई दिल्ली) को भी गिरफ्तार कर लिया है।

    पुलिस के अनुसार, मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया ।
    इस मामले में कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और आम जनता तीखी प्रतिक्रिया जता रहे हैं।

  • विद्यालयों में जारी रहेगा व्यावसायिक शिक्षा का संचालनः डाॅ. धन सिंह रावत

    विद्यालयों में जारी रहेगा व्यावसायिक शिक्षा का संचालनः डाॅ. धन सिंह रावत

    कहा, नये टेंडर होने तक पूर्व में अनुबंधित संस्था करेगी कार्यक्रम का संचालन

    देहरादून । सूबे के 200 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम निर्बाध रूप से संचालित किये जायेंगे। इसके अलावा नये शिक्षा सत्र 2026-27 में 544 और विद्यालयों में भी पारम्परिक विषयों के साथ ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू की जायेगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निजी संस्थाओं के साथ शीघ्र अनुबंध करने के निर्देश दे दिये गये हैं। साथ ही नये टेंडर होने तक पूर्व में अनुबंधित संस्था व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम का संचालन करती रहेगी।

    विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि प्रदेश के 200 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम निर्बाध रूप से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुये टेंडर प्रक्रिया में हुई लेटलतीफी को लेकर विभागीय अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। विभागीय मंत्री ने कहा कि जब तक नई टेंडर प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक पूर्व में अनुबंधित संस्था ही 200 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा का संचालन करती रहेंगी। इससे न केवल शिक्षण कार्य में निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि छात्रों के कौशल विकास पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को नये शिक्षा सत्र 2026-27 में कार्यक्रम संचालन को निजी संस्थानों के साथ अनुबंध को शीघ्र टेण्डर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि टेण्डर व अनुबंध प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा समयबद्ध तरीके से सभी औपचारिकताएं पूर्ण की जाएं। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता उच्च स्तर की बनी रहे। इसके अलावा डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को विद्यालय स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिये।

    बाॅक्स
    नये सत्र से 544 और विद्यालयों में शुरू होगा व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम
    शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध है। व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान एवं कौशल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि नये शिक्षा सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा के तहत 544 और विद्यालयों में भी व्यावसायिक शिक्षा का संचालन किया जायेगा, जिसकी स्वीकृति भारत सरकार ने दे दी है। इन विद्यालयों में 8 विभिन्न क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा दी जायेगी। जिसमें एग्रीकल्चर, आॅटोमोटिव, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रोनिक्स एंड हार्डवेयर, आईटी, पलम्बिंग, रिटेल तथा टूरिज्म व हॉस्पिटैलिटी शामिल है।

  • नमामि गंगे के तहत उत्तराखंड में 37 परियोजनाएं पूर्ण

    नमामि गंगे के तहत उत्तराखंड में 37 परियोजनाएं पूर्ण

    200 एमएलडी क्षमता वाले 50 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित

    170 प्रदूषित नालों में से 155 टैप, सीपीसीबी की 2025 की रिपोर्ट में ‘अप्रदूषित’ श्रेणी में शामिल हुई गंगा

    नयी दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड में वर्षों से लिया गया ‘अविरल और निर्मल गंगा’ का संकल्प अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत न सिर्फ 37 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता में दस गुना तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2014 से पहले जहां यह क्षमता महज 18 एमएलडी थी, वह अब बढ़कर 200 एमएलडी तक पहुंच गई है। इसका असर अगले वर्ष होने वाले अर्धकुंभ में साफ दिखाई देगा, जब श्रद्धालु पहले से कहीं अधिक स्वच्छ गंगा में आस्था की डुबकी लगाएंगे। प्रदेश में नमामि गंगे कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गंगा में गिरने वाले 170 में से 155 नालों को टैप कर दिया गया है, जबकि शेष 15 नालों के लिए 11 नए एसटीपी का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। (Namami gange)

    तकनीक और इन्फ्रास्ट्रक्चर का अनूठा संगम

    राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के डीडीजी नलिन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नमामि गंगे के अंतर्गत अब तक कुल 37 परियोजनाएं उत्तराखंड में पूरी की जा चुकी हैं। जिसके फलस्वरूप राज्य में 200 एमएलडी क्षमता वाले 50 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित हुए हैं। इस विस्तार ने नदी में बिना उपचारित अपशिष्ट जल के प्रवाह को रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। केवल संयंत्र निर्माण ही नहीं, बल्कि इनकी कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए ‘गंगा पल्स पोर्टल’ जैसा डिजिटल नवाचार भी किया गया है। यह पोर्टल एसटीपी के प्रदर्शन की रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करता है और सार्वजनिक डोमेन में होने के कारण जवाबदेही भी तय करता है।

    डिजिटल निगरानी से प्रदूषण पर प्रहार

    मैदानी स्तर पर निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए ‘ड्रेन डैशबोर्ड’ नामक टूल प्रभावी सिद्ध हो रहा है। यह डैशबोर्ड नदी में गिरने वाले नालों की पल-पल की ट्रैकिंग करता है। इसमें नालों की टैपिंग स्थिति और सीवेज को एसटीपी तक मोड़ने की प्रक्रिया की लाइव मॉनिटरिंग की सुविधा है। यह वास्तविक समय में प्रदूषण जोखिम की पहचान कर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता आई है।

    पहाड़ी भूगोल के लिए सटीक रणनीति

    उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ‘इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन’ दृष्टिकोण अपनाया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में व्यापक सीवरेज नेटवर्क बिछाना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए खुले नालों के पानी को नदी में गिरने से पहले ही ‘इंटरसेप्ट’ कर शोधन के लिए मोड़ दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्ण भूमिगत नेटवर्क की तुलना में यह तकनीक अधिक प्रभावी है क्योंकि यह प्रदूषण के भार को नदी के मुहाने पर ही समाप्त कर देती है।

    सुधर रही गंगा की सेहत: सीपीसीबी की रिपोर्ट

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की जल गुणवत्ता रिपोर्ट-2025 इस मिशन की सफलता की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में गंगा अब “अप्रदूषित” श्रेणी में है। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर 3 एमजी/लीटर से कम है, जो एक स्वस्थ नदी का मानक है। वहीं, घुलित ऑक्सीजन (डीओ) का स्तर भी जलीय जीवन के लिए पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है। जैविक आकलन के अनुसार, जल की गुणवत्ता “बहुत अच्छी” से “अच्छी” श्रेणी के बीच बनी हुई है।

    पारिस्थितिकी और जैव विविधता का पुनरुद्धार

    गंगा स्वच्छता के प्रयास केवल नालों को रोकने तक सीमित नहीं हैं। पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वनीकरण और जलीय जैव विविधता की पुनर्स्थापना की गई है। नदियों में मछलियों की प्रजातियों में हुई वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि गंगा का स्वास्थ्य सुधर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड का यह मॉडल आने वाले वर्षों में निचले मैदानी क्षेत्रों के लिए मार्गदर्शक बनेगा। अब देवभूमि की गंगा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि स्वच्छता के वैश्विक मानकों पर भी खरी उतर रही है।

    मुख्य बातें-

    कुल पूर्ण परियोजनाएं: 37
    नए स्थापित एसटीपी: 50
    अतिरिक्त शोधन क्षमता: 200 MLD
    टैप किए गए नाले: 155 (कुल 170 में से)
    निगरानी टूल: गंगा पल्स पोर्टल और ड्रेन डैशबोर्ड

  • राज्य सरकार की विकास नीतियों को जनता का पूरा समर्थन : सीएम धामी

    राज्य सरकार की विकास नीतियों को जनता का पूरा समर्थन : सीएम धामी

    बुलडोजर से भी हुआ भव्य स्वागत, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब!

    काशीपुर से सड़क मार्ग से खटीमा पहुंचे सीएम धामी

    यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री धामी का जगह-जगह ऐतिहासिक स्वागत

    भारी संख्या में लोग अपने मुख्यसेवक के इंतजार में सड़कों पर डटे रहे

    काशीपुर। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी  सोमवार को सड़क मार्ग से काशीपुर से खटीमा पहुंचे। इस दौरान यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों द्वारा उनका भव्य एवं अभूतपूर्व स्वागत किया गया। कई स्थानों पर बुलडोजर के माध्यम से भी स्वागत कर जनता ने अपना उत्साह और समर्थन प्रदर्शित किया।

    यात्रा के दौरान काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, दिनेशपुर, किच्छा,सितारगंज सहित कई स्थानों पर भारी संख्या में लोग अपने लोकप्रिय नेता के इंतजार में सड़कों के किनारे खड़े रहे।

    युवाओं, माताओं-बहनों एवं बुजुर्गों ने फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा के साथ मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। हर जगह जनसैलाब उमड़ा और लोगों ने मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उत्साहपूर्वक भागीदारी दिखाई।

    जगह-जगह आयोजित स्वागत कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश की जनता राज्य सरकार की विकास नीतियों और जनहितकारी निर्णयों के साथ मजबूती से खड़ी है और इस विकास यात्रा की सक्रिय सहभागी बन रही है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह अपार स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद उन्हें प्रदेश के विकास, सुशासन और जनसेवा के लिए और अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समग्र और संतुलित विकास के लिए संकल्पबद्ध है, ताकि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा सके।