Category: राजनीति

  • बीजेपी विधायक किशोर उपाध्याय ने रखी मांग, प्रदेश में हो 101 विधानसभा, 13 लोकसभा और 5 राज्यसभा की सीटे

    बीजेपी विधायक किशोर उपाध्याय ने रखी मांग, प्रदेश में हो 101 विधानसभा, 13 लोकसभा और 5 राज्यसभा की सीटे

    9 नवंबर 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद एक बड़ी मांग उत्तराखंड में उठी है, टिहरी विधानसभा से भाजपा विधायक किशोर उपाध्याय के द्वारा उत्तराखंड में 101 विधानसभाएं और 13 लोकसभा सीट किए जाने की मांग की गई है, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी को पत्र भेजकर किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड विधानसभा से प्रस्ताव पास करने की मांग की है, ताकि प्रदेश के उस प्रस्ताव को केंद्र को भेजा जाए। किशोर उपाध्याय का कहना है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा में और तेज गति देने के लिए ऐसा किया जाना बेहद जरूरी है, कई राज्यों में कम जनसंख्या और कम क्षेत्रफल के आधार पर विधानसभा और लोकसभा सीट निर्धारित है, ठीक उसी फार्मूले को उत्तराखंड में लागू किया जाना चाहिए।

    भाजपा विधायक जहां उत्तराखंड में विधानसभा सीट बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस का कहना है कि यदि प्रदेश के विकास को लेकर भाजपा के विधायक चिंता कर रहे हैं, तो 101 विधानसभा सीट हो जानी चाहिए।

    कुल मिलाकर 2026 में पूरे देश में विधानसभा सीटों और लोकसभा सीटों की परिसीमन को लेकर सर्वे होना है, जिससे पहले उत्तराखंड में परिसीमन निर्धारित होने से पहले विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जाने की मांग उठने लगी है, ऐसे में देखना होगा कि क्या पर्वतीय क्षेत्र को तवज्जो देकर उत्तराखंड में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी।

  • हरदा के बयान पर कांग्रेसी कर रहें वार, अब हरदा का सोशल मीडिया पर आया लंबा चौड़ा POST

    हरदा के बयान पर कांग्रेसी कर रहें वार, अब हरदा का सोशल मीडिया पर आया लंबा चौड़ा POST

    एक #चैनल जो इस समय कांग्रेस विरोध के लिए जाना जाता है। उसने अपनी आदत के अनुसार मेरे एक #बयान को कुछ कट, कुछ पेस्ट कर अपने चैनल में एक #तथाकथित_महाबहस के नाम पर एक चर्चा करवाई है और कुछ कांग्रेस के नेताओं के बयान प्रसारित किये हैं। मुझे उस चैनल की कुटिलता पर आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि जितनी कांग्रेस विरोधी ताकतें हैं, वह मुझ पर लगातार आक्रामक रहती हैं और मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि भाजपा का बॉटम से लेकर शीर्ष तक मुझ पर लगातार आक्रामक रहता है।

    प्रत्येक चुनाव से पहले भी और बाद में भी मुझ पर प्रहार किये जाते रहे हैं। सोशल मीडिया पर मेरे बयानों को ट्रॉल करने के लिए एक लंबी फौज रखी गई है, कभी-कभी उस फौज में कुछ कांग्रेसी चेहरे भी खड़े हो जाते हैं। चैनल ने तो मेरे बयान को कट और पेस्ट कर हमारी पार्टी पर हमला करने का रास्ता निकाला, मगर उस रास्ते में हमारे कांग्रेस के लोग क्यों फंस रहे हैं?

    मेरा बयान मेरे #फेसबुक पेज पर मौजूद है। कोई बात असंगत लग रही हो तो मुझसे बात की जा सकती है। मगर पार्टी के लोगों का सार्वजनिक रूप से हमलावर होना उस चैनल के मकसद को ही पूरा करता है। मैं अपने राजनीतिक जीवन के प्रारंभ से ही कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ हूं, यह जुड़ाव अब 57वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। कभी दाएं-बाएं नहीं देखा, चिंता पूर्ण परिस्थितियों में भी न अपना मनोबल गिराया और न कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरने दिया। हारें हुई, मगर प्रत्येक हार के बाद, मैं फिर से कमर कसकर लोगों के बीच में पहुंचा हूं, आज भी हूं। रोज सरकार से 2-4 सवाल पूछता हूं? उनकी कुनीति पर प्रहार करता हूं। सत्ता से फायदा लेना मेरे स्वभाव में नहीं है। राज्य को बने 24 वर्ष हो चुके हैं।

    कांग्रेस भी सत्ता में रही, मैं स्वयं भी मुख्यमंत्री रहा। मैंने, मेरे परिवार ने, भाइयों ने, नजदीक के रिश्तेदारों ने सरकार से कोई लाइसेंस, परमिट, खान, क्रेशर, ठेका, मकान, दुकान ली हो तो मुझे बताया जाए और मेरी आलोचना की जाए। मैंने सत्ता का उपयोग जनहित में किया। कांग्रेस की पहली सरकार में हिमाचल की तरह भू कानून बने, चकबंदी हो और यहां लग रहे उद्योगों में 70 प्रतिशत स्थान स्थानीय नौजवानों को मिले इसके लिए काम किया। मगर अपने लिए रहने के लिए मकान नहीं मांगा! प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक कमरे में सैकड़ों रातें गुजारी, मगर अपनी सरकार से भी कृपा नहीं ली। 2012 में सरकार बनी तो भी कोई कृपा नहीं ली और अपनी सरकार में ऐसी कृपा लिए जाने के सभी रास्तों को बंद किया। कहीं भी प्रशासन में मेरे परिवार, कुटुंबीजनों या रिश्तेदारों का दखल लोगों ने नहीं देखा होगा। हां, अपने राजनीतिक सहयोगियों को अवश्य अधिकार दिये। आज भी भूतपूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर कोई एक उदाहरण नहीं है कि सरकार से मैं कोई कृपा ले रहा हूं।

    वर्तमान सरकार जिन सुविधाओं को अन्य भूतपूर्व #मुख्यमंत्रियों को दे रही है, मैं उनकी भी अपेक्षा नहीं कर रहा हूं। यहां तक कि रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर माननीय विधायकों को प्राप्त प्रोटोकॉल सुविधा से भी मैं वंचित हूं। मगर मैं खुश हूं। निष्कंटक भाव से विपक्ष धर्म निभा रहा हूं, उस धर्म का निर्वहन करते हुये मैंने श्री #मोदी, श्री #योगी, श्री #धामी के “बटोगे तो कटोगे” जैसे विद्वेष व विभाजनकारी नारे के खिलाफ अपना नरेटिव गढ़ने का और उसके साथ टॉप टू बॉटम खड़े होने का सुझाव दिया है। यह सुझाव मैंने कार्यसमिति की बैठक में भी दिया है और कहा कि न्याय, सामाजिक न्याय, मोहब्बत की दुकान, भारत जोड़ो और लड़की हूं लड़ सकती हूं जैसे नरेटिव भाजपा के बांटने वाले नरेटिव से अधिक प्रभावकारी हैं। हमें इन नरेटिवों के साथ टॉप टू बॉटम संपूर्ण शक्ति से खड़ा होना चाहिए।

    मैं, उत्तराखंड कांग्रेस से भी पुनः कह रहा हूं कि 2017 में हमारे #उत्तराखंडियत के नरेटिव ने ही 2012 में पार्टी को मिले बेस वोट को बचाया था, 2022 में भी हमारे इसी नरेटिव ने भाजपा की सांप्रदायिक नारे से लड़ते हुए हमारा वोट प्रतिशत बढ़ाया था। यदि हम सब इस #नरेटिव के साथ एकजुट होकर के खड़े हों तो इस नरेटिव जिसमें स्थानीय संस्कृति, परंपराएं, परिवेश व आकांक्षाएं समाहित हैं, उसमें भाजपा के “बटोगे तो कटोगे” के नारे को परास्त करने की क्षमता है।

  • तेलांगना के फॉयर ब्रांड नेता टी राजा ने ट्वीट कर की सीएम धामी की जमकर प्रशंसा

    तेलांगना के फॉयर ब्रांड नेता टी राजा ने ट्वीट कर की सीएम धामी की जमकर प्रशंसा

    उत्तरकाशी में मस्जिद बनाए जाने का ताजा मामला भले ही अब सुर्खियों में आया हो लेकिन धामी सरकार पहले से ही लैंड जेहाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। पुष्कर सिंह धाम के कड़े निर्देश पर प्रदेशभर में धार्मिक स्थलों की आड़ में जमीनों पर किए जा रहे अवैध अतिक्रमण को एक अभियान चलाकर घ्वस्त किया गया। अब तक 5000 एकड़ से ज्यादा भूमि अतिक्रमण से मुक्त करवाई जा चुकी है। इन जमीनों पर हरी, नीली और पीली चादर चढ़ाकर अतिक्रमण किया गया था। इतना ही नहीं धामी सरकार ने देवभूमि में धर्मांतरण विरोधी सख्त कानून बनाकर लव जेहाद करने वालों के मनसूबों पर भी पानी फेरा है। थूक जेहाद के खिलाफ धामी का एक्शन भी देशभर में सुर्खियों में रहा। रविवार को हिन्दू संगठनों की महापंचायत में उत्तरकाशी पहुंचे हिस्सा लेने के लिए बीजेपी के फायर ब्रांड नेता टी राजा ने भी लैंड जेहाद, लव जेहाद और थकू जेहाद के खिलाफ की गई धामी सरकार की कार्रवाई की जमकर प्रशंसा की है। इस सम्बंध में उन्होंने बाकायदा ट़विट किया है।

    उत्तराखंड में वर्ष 2023 में लैंड जिहाद को लेकर व्यापक अभियान छेड़ा गया था। वन भूमि पर बनी मजारों के खिलाफ अभियान चलाते हुए जमीनों को मुक्त कराया गया। लैंड जिहाद के नाम पर वन भूमि और सरकारी भूमि पर बनी मजारों और मस्जिदों को हटा कर जमीनों को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। हालांकि, कई स्थानों पर सरकारी तंत्र को विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन सीएम धामी के सख्त आदेश के चलते सरकारी जमीनों को अतिक्रमणमुक्त कराने में पूरा अमला जुटा रहा। इस दौरान 5000 एकड़ से भी अधिक सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया गया। यह अभियान अभी भी बदस्तूर जारी है। इसके साथ ही धर्मांतरण को लेकर भी सीएम धामी ने सख्त कानून बना कर इसका सख्ती से पालन करवाने के निर्देश अफसरों को दिए हैं। प्रदेश में किसी तरह का दंगा न हो, कोई आगजनी की घटना न हो, सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचाए इसको देखते हुए दंगारोधी कानून भी बना दिया गया है।

    *जिहादियों के लिए खौफ बने सीएम धामी*

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में अतिक्रमण और लैंड जिहाद के खिलाफ जो अभियान शुरू किया है, वह न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि पूरे देश में एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है। उनकी सख्त और निर्णायक नीतियों ने उन्हें ‘धर्मरक्षक’ के रूप में पहचान दिलाई है, जो अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में गूंज रही है। देवभूमि उत्तराखंड धर्म, संस्कृति, और आध्यात्मिकता का केंद्र है। यहां की पवित्र भूमि पर अतिक्रमण और लैंड जिहाद जैसे कृत्यों ने प्रदेश की गरिमा को चुनौती दी थी। जब मुख्यमंत्री धामी ने तीन वर्ष पूर्व प्रदेश की बागडोर संभाली, तब से उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान को चोट पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    *अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा*

    सीएम धामी की दबंग छवि और उनके सख्त फैसलों ने उन्हें केवल उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि देशभर में एक आदर्श नेता के रूप में स्थापित किया है। उनके कार्यों से प्रेरित होकर अन्य राज्य भी लैंड जिहाद और अवैध अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर सख्त कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। यह उनकी कड़ी नीतियों और नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम है कि उन्हें अब पूरे देश में धर्मरक्षक मुख्यमंत्री के रूप में सम्मानित किया जा रहा है। सीएम धामी ने अपने निर्णयों से यह सुनिश्चित किया है कि धर्म, संस्कृति, और प्रदेश की अस्मिता की रक्षा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक नैतिक कर्तव्य भी है। उनकी नीतियां न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए सुरक्षित भविष्य का आधार तैयार कर रही हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी देवभूमि की पवित्रता को संरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।

  • भाजपा ने संगठन के चुनाव आगे खिसकाए,…30 नवंबर तक पार्टी ने सभी बूथों पर करना था कमेटियों का गठन

    भाजपा ने संगठन के चुनाव आगे खिसकाए,…30 नवंबर तक पार्टी ने सभी बूथों पर करना था कमेटियों का गठन

    केदारनाथ उपचुनाव में जीत के बाद अब भाजपा ने शहरी निकायों के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। अगले महीने निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना के चलते पार्टी ने अपने संगठन चुनाव भी टाल दिए हैं। जिला व मंडल समितियों के चुनाव जनवरी के दूसरे पखवाड़े में हो सकते हैं।

    केदारनाथ उपचुनाव से पहले पार्टी की दिसंबर महीने तक जिला व मंडल अध्यक्षों के चुनाव कराने की तैयारी थी। 30 नवंबर तक पार्टी ने सभी बूथों पर कमेटियों का गठन करना था। लेकिन, अब पार्टी ने शहरी निकायों के चुनाव पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है।

     

    सबसे पहले पार्टी ने एससी-एसटी, ओबीसी और महिला और सामान्य वर्ग के हिसाब से टिकट के संभावित दावेदारों के नामों पर विचार करना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों इसे लेकर सभी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक में उनके निकाय क्षेत्रों में नामों पर चर्चा हुई। पार्टी ने नामों पर फीडबैक लेने के लिए प्रभारियों की पहले से तैनाती कर रखी है। सभी प्रभारी जिलों में जाकर नामों पर चर्चा कर रहे हैं।

  • चुनाव खर्च का ब्योरा न देने वाले प्रत्याशियों पर लगेगा तीन साल का प्रतिबंध

    चुनाव खर्च का ब्योरा न देने वाले प्रत्याशियों पर लगेगा तीन साल का प्रतिबंध

    निकाय चुनाव में इस बार राज्य निर्वाचन आयोग ने खर्च की सीमा बढ़ाने के साथ ही कड़े नियम भी लागू कर दिए हैं। सभासद सदस्य हो या नगर निगम मेयर प्रत्याशी, चुनावी खर्च का ब्योरा प्रमाण के साथ न देने पर आयोग तीन साल का प्रतिबंध लगा देगा। इसके बाद वह कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

    राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने अधिकतम निर्वाचन व्यय और उसकी लेखा परीक्षक आदेश 2024 जारी किया है। इसमें स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि हर उम्मीदवार की ओर से जमा चुनावी खर्च के लेखों का निरीक्षण करने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ये देखेंगे कि सभी दस्तावेज सही हैं या नहीं।

    अगर नहीं तो उसकी जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को भेजनी होगी। जिसकी कॉपी नोटिस बोर्ड पर चस्पा भी करनी होगी। आयोग ऐसे उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी करके 20 दिन के भीतर जवाब मांगेगा। इसके बाद भी खर्च का सही ब्योरा न दिया तो आयोग उस प्रत्याशी के चुनाव लड़ने पर तीन साल का प्रतिबंध लगा देगा।

     

    प्रत्याशियों को 30 दिन के भीतर देना होगा ब्योरा
    आयोग ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि जो भी प्रत्याशी नगर निगम, पालिका या नगर पंचायत के किसी भी पद पर चुनाव लड़ेगा, उसे चुनाव नतीजे आने के 30 दिन के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष खर्च का पूरा ब्योरा पेश करना होगा। ब्योरे की सत्यापित प्रति शपथ पत्र के साथ देनी होगी।

    रिटर्निंग अफसर तीन बार करेंगे चेक
    रिटर्निंग अफसर की ये जिम्मेदारी होगी कि वे प्रत्याशी या राजनीतिक दलों की बैठक, सभा की अनुमति देंगे। वह चुनाव के दौरान कम से कम तीन बार बुलाकर प्रत्याशी के खर्च का मिलान करेंगे। अगर प्रत्याशी ब्यौरे का निरीक्षण नहीं कराएगा तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी होगा। फिर भी न आया तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा-177 के तहत कार्रवाई की जाएगी

  • Uttarakhand: अगले पांच साल में GDP दोगुना करने का लक्ष्य, 14 और नई नीतियां तैयार

    Uttarakhand: अगले पांच साल में GDP दोगुना करने का लक्ष्य, 14 और नई नीतियां तैयार

    अगले पांच साल में राज्य की जीडीपी को दोगुना करने के लक्ष्य को साधने के लिए प्रदेश सरकार ने 14 और नई नीतियों के ड्राफ्ट तैयार कर लिए गए हैं। इन सभी नीतियों के प्रस्ताव अगले दो महीनों में प्रदेश मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए लाए जाएंगे।

    सशक्त उत्तराखंड@25 के सरकार का 2027 तक राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को 346,206 करोड़ से बढ़ाकर 5,47,000 करने का लक्ष्य है। 14 नई नीतियों को सरकार गेम चेंजर के रूप में मानकर चल रही है।

    ये 14 नीतियां कृषि, अवस्थापना, पर्यटन, आयुष और वित्त विभाग की उन उन योजनाओं से जुड़ी हैं, जिन्हें सरकार गेम चेंजर के रूप में मानकर चल रही है। इन योजनाओं के जरिए प्रदेश की धामी सरकार हितधारकों की आजीविका में वृद्धि के साथ लाखों रोजगार के अवसर भी पैदा करना चाहती है। सशक्त उत्तराखंड@25 के सरकार का 2027 तक राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को 346,206 करोड़ से बढ़ाकर 5,47,000 करने का लक्ष्य है।

    30 से अधिक नीतियां तैयार कर लागू कर चुकी

    2030 तक इसे 7,68,000 तक करने की योजना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साधने के लिए कई योजनाओं के लिए नई नीतियां तैयार हो रही हैं। पुरानी नीतियों को वर्तमान जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर संशोधित किया जा रहा है। इस कड़ी में सरकार अब तक 30 से अधिक नीतियां तैयार कर उन्हें लागू कर चुकी है

    नीतियां भी तैयार : ग्रीन हाइड्रोजन नीति, प्रधान नीति, जियोथर्मल नीति, पैसेंजर चार्टर-हेली सर्विस नीति, योगा पॉलिसी, लाभांश नीति, सार्वजनिक उपक्रम इकाइयों की मॉनिटरिंग नीति के ड्राफ्ट भी तैयार हैं, जिन्हें कैबिनेट मंजूरी का इंतजार है।

  • Dehradun: UKD नेता त्रिवेंद्र सिंह पंवार को नम आंखों से दी अंतिम विदाई

    Dehradun: UKD नेता त्रिवेंद्र सिंह पंवार को नम आंखों से दी अंतिम विदाई

    उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार के निधन से राज्य में शोक की लहर है। उनके पार्थिव शरीर को पूर्णानंद घाट पर अंतिम विदाई दी गई जहां बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी और उनके निधन से राज्य ने एक महान नेता को खो दिया है।

    उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार का पार्थिव शरीर उक्रांद के झंडे के साथ देहरादून रोड स्थित उनके आवास से दोपहर दो बजे पूर्णानंद घाट लाया गया, जहां लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक क्षेत्र के लोग शामिल हुए

    पूर्णानंद घाट पर उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार के पार्थिक शरीर को उनके पुत्र आलोक पंवार ने मुखाग्नि दी। इस दौरान ‘त्रिवेंद्र पंवार अमर रहे’, ‘राज्य आंदोलन का लाल, त्रिवेंद्र-त्रिवेंद्र’ आदि नारे गूंजते रहे।

    इस अवसर पर ऋषिकेश विधायक एवं शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, निवर्तमान महापौर अनीता ममगाईं, पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राकेश सिंह एडवोकेट, जिलाध्यक्ष देवप्रयाग उत्तम सिंह असवाल, निवर्तमान पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट, राजपाल खरोला, उक्रांद के केंद्रीय उपाध्यक्ष जयराम उपाध्याय, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी, कार्यकारी अध्यक्ष पंकज व्यास, केंद्रीय उपाध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ सन्नी भट्ट, प्रमिला रावत, मेजर संतोष भंडारी (सेनि.) सहित उक्रांद कार्यकर्ता मौजूद थे।

    दिवंगत त्रिवेंद्र सिंह पंवार के स्वजन ने एम्स में उनका नेत्रदान कराया। एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डा. मीनू सिंह ने नेत्रदान जैसे महादान के इस पुनीत कार्य के लिए दिवंगत उक्रांद नेता के स्वजन की सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे अन्य लोगों को भी नेत्रदान के संकल्प की प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यवाहक नेत्र विभागाध्यक्ष प्रो. अजय अग्रवाल ने बताया कि उनके इस निर्णय से दो नेत्रहीनों को रोशनी मिल पाएगी।

    उक्रांद का गठन 25 जुलाई 1979 में हुआ और उक्रांद ने राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। मगर, राज्य गठन के बाद पार्टी में एकजुटता नहीं होने के कारण बिखराव होता चला गया और उक्रांद आमजन का समर्थन हासिल करने से वंचित रही। आज भले ही उक्रांद के पुराने कार्यकर्ता एक मंच पर न हों, लेकिन त्रिवेंद्र सिंह पंवार जाते-जाते पुराने कार्यकर्ताओं को एक साथ ला गए।

    उनके निधन पर उक्रांद के पुराने कार्यकर्ता व समर्थक एक-दूसरे से मिलते नजर आए और राज्य आंदोलन के संघर्ष की यादें भी ताजा हो गई। उक्रांद के केंद्रीय उपाध्यक्ष जयराम उपाध्याय ने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह पंवार का संसद में पत्र बम कांड व अनेक आंदोलन में अग्रणी योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

  • केदारनाथ उपचुनाव: ब्रांड मोदी’ के साथ लोगों के दिलों में तेजी से जगह बनाता ‘ब्रांड धामी’

    केदारनाथ उपचुनाव: ब्रांड मोदी’ के साथ लोगों के दिलों में तेजी से जगह बनाता ‘ब्रांड धामी’

    केदारनाथ विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को मिली जीत से साबित हो गया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर जनता का विश्वास बढ़ता जा रहा है। ब्रांड मोदी के साथ साथ ब्रांड धामी तेजी से लोगों के दिलों में जगह बना रहे हैं। इस उपचुनाव में विरोधियों ने मुख्यमंत्री धामी के खिलाफ कुप्रचार करके निगेटिव नेरेटिव क्रिएट किया और पूरे चुनाव को धाम बनाम धामी बना दिया। कांग्रेस के शीर्ष नेता और तमाम विरोधी एकजुट होकर मुख्यमंत्री पर हमलावर रहे। बावजूद इसके धामी सरकार की उपलब्धियों और चुनावी कौशल से विपक्ष के मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए। धामी के कामकाज पर जनता ने दिल खोलकर मुहर लगाई।

    आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केवल नाम भर नहीं है, बल्कि एक ब्रांड हैं। मोदी के हर क्रियाकलाप का प्रभाव जनता के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है इसलिए पिछले दो दशकों से वह देश के सबसे भरोसेमंद ब्रांड बने हुए हैं। ब्रांड मोदी की बदौलत केन्द्र ही नहीं राज्यों में भी भाजपा चुनाव जीतती चली आ रही है। उनके साथ ही राज्यों में भी भजपा के कुछ नेता हैं जो एक ब्रांड के रूप में अपनी पार्टी के लिए फयादेमंद साबित हो रहे हैं। तेजी से उभर रहे ऐसे नेताओं में से एक हैं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। सादगी, सरल स्वभाव, संवेदनशीलता और सख्त निर्णय लेने की क्षमता, ये वो तमाम गुण हैं जिनकी बदौलत पुष्कर सिंह धामी लोकप्रिय बनते जा रहे हैं। धामी ने उत्तराखण्ड में अपने कम समय के कार्यकाल में कई बड़े और कड़े फैसले लिए, जिससे देशभर में उनकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ। खासकर यूसीसी, नकलरोधी कानून, लैंड जिहाद, दंगारोधी कानून, महिला आरक्षण आदि निर्णयों से वह देश में नजीर पेश की चुके हैं। उनकी लोकप्रियता का दायरा उत्तराखण्ड तक ही सीमित नहीं है वह पूरे देश में उनकी छवि एक ‘डायनेमिक लीडर’ की बन चुकी है। उनकी लोकप्रियता को देखकर ही भाजपा हाईकमान ने उत्तर ही नहीं बल्कि दक्षिण के राज्यों में भी उन्हें बतौर युवा स्टार प्रचारक लोकसभा चुनाव के प्रचार में भेजा, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। बीते लोकसभा चुनाव में उत्तराखण्ड की पांचों लोकसभा सीटों पर भी धामी ने ताबड़तोड़ जनसभाएं, रैली और रोड शो किए। प्रदेश के भीतर 90 से अधिक चुनावी सभाएं, रोड शो और सीधा जनसंवाद करके धामी ने पार्टी के पांचों प्रत्याशियों को कंफर्ट जोन में खड़ा करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। सभी पांचों सीटें भाजपा की झोली में गईं। अन्य चरणों के चुनाव में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखण्ड, पश्चिमी बंगाल, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे बढ़े राज्यों में अब उन्हें प्रचार के लिए भेजा गया। महाराष्ट्र और झारखण्ड में हुए विधानसभा चुनाव में भी धामी ने कई जनसभाएं कीं। उत्तराखण्ड में धामी से पहले किसी राजनैतिक दल का शायद ही कोई ऐसा मुख्यमंत्री रहा हो जिसका पार्टी के चुनाव प्रचार में इतना व्यापक उपयोग किया गया हो। यहां तक कि नारायण दत्त तिवारी, हरीश रावत और भुवन चंद खण्डूड़ी जैसे दिग्गज भी प्रचार के लिहाज से दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक ही सीमित रहे।

  • कांग्रेस : पार्टी आलाकमान ने मंगलौर विधानसभा से विधायक काजी निजामुद्दीन को दी बड़ी जिम्मेदारी

    कांग्रेस : पार्टी आलाकमान ने मंगलौर विधानसभा से विधायक काजी निजामुद्दीन को दी बड़ी जिम्मेदारी

    देहरादून: कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और मंगलौर विधानसभा से विधायक काजी निजामुद्दीन को पार्टी आलाकमान ने बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें दिल्ली एआईसीसी इंचार्ज बनाया गया है. काजी निजामुद्दीन के पास संगठन में राष्ट्रीय सचिव की भी अहम जिम्मेदारी है.

    दिल्ली एआईसीसी प्रभारी की मिली जिम्मेदारी: पार्टी के महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल द्वारा रविवार को जारी पत्र में कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के ने दीपक बावरिया को दिल्ली के महासचिव प्रभारी पद से मुक्त कर दिया है, जबकि उनके स्थान पर मंगलौर विधानसभा से विधायक काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को दिल्ली का एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया गया है.

    मोदी लहर में जीती थी विधनसभा सीट: कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए उम्मीदवारों के चयन के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का भी गठन किया है. इसमें मीनाक्षी नटराजन समिति की अध्यक्ष नियुक्त की गई हैं और इमरान मसूद वह प्रदीप नरवाल को समिति का सदस्य बनाया गया है. केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होगी. गौरतलब है कि उत्तराखंड के मंगलौर विधानसभा उपचुनाव में काजी मोहम्मद निजामुद्दीन ने जीत दर्ज कराई थी.

    आलाकमान ने कश्मीर में सौंपी थी अहम जिम्मेदारी: कांग्रेस प्रत्याशी काजी निजामुद्दीन तीन बार मंगलौर से विधायक रह चुके हैं. वर्ष 2002 में उन्होंने बसपा से मंगलौर सीट से पहले चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. उनके उनके पास संगठन में राष्ट्रीय सचिव की भी अहम जिम्मेदारी है. जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव को लेकर भी कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए कश्मीर का राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक बनाया था.

  • केदारनाथ उपचुनाव मतगणना 6 राउंड भाजपा – 2811 वोटों से आगे

    केदारनाथ उपचुनाव मतगणना 6 राउंड भाजपा – 2811 वोटों से आगे

    ब्रेकिंग केदारनाथ

    केदारनाथ उपचुनाव मतगणना

    Round 6 के बाद

    भाजपा – 10,053
    कांग्रेस – 7242
    त्रिभुवन (निर्दलीय) – 7152

    भाजपा – 2811 वोटों से आगे