Category: राजनीति

  • मेरे शब्दों को बदला गया — गिरधारी की सफाई, कांग्रेस पर गंभीर आरोप

    मेरे शब्दों को बदला गया — गिरधारी की सफाई, कांग्रेस पर गंभीर आरोप

    देखें वीडियो

    बोले गिरधारी..ठेस लगी हो तो हाथ जोड़कर मांगता हूं माफी

    बिहार से लड़कियां खरीदने का मुद्दा गरमाया

    देहरादून। बिहार से 20-25 हजार में लड़कियां खरीदने सम्बन्धी बयान से मचे तूफान के बाद मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी साहू ने सारा दोष कांग्रेस के मत्थे मढ दिया।
    साल के पहले दिन उठे इस तूफान के बाद गिरधारी ने एक वीडियो बयान जारी किया। और कहा कि मेरे सम्बोधन को तोड़ मरोड़ कर मीडिया में पेश किया।
    उन्होंने कहा कि यह सब कांग्रेस ने किया है। जनता कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं देगी।

    देखें माफीनामा

    गिरधारी ने यह भी कहा कि वे हर साल बरेली में 101 लड़कियों की शादी करवाते हैं। साहू ने कहा कि वे अपनी पत्नी रेखा आर्य की विधानसभा की बेटियों से राखी भी बंधवाते हैं। और उन्हें देवी मानते हैं।
    कांग्रेस को इससे कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा। फिर भी मेरी बात से किसी को ठेस लगी हो । बुरा लगा हो तो मैं हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं।
    गौरतलब है कि मंत्री पति गिरधारी ने अल्मोड़ा जिले के धौलाखड़ में एक कार्यक्रम में कहा था कि बिहार में 20-25 हजार में लड़कियां मिल जाती है। वे कार्यक्रम में मौजूद युवाओं की शादी करवाने की बात कह रहे थे।
    इस बयान के बाद कांग्रेस ने 2 जनवरी को मंत्री आवास घेरने का कार्यक्रम तय कर डाला।

  • भाजपा मंत्री के पति ने दिया विवादित बयान, मचा बवाल

    भाजपा मंत्री के पति ने दिया विवादित बयान, मचा बवाल

    देखें, वीडियो

    मंत्री रेखा आर्य के पति के बयान पर उबला विपक्ष

    देहरादून। पहले ही कई मुद्दों से जूझ रही भाजपा के लिए मंत्री पति ने नई मुसीबत खड़ी कर दी। मंत्री पति की बयान बेहद ही संवेदनशील मुद्दे पर फिसल गई।
    यूं तो इन मंत्री पति के कई कांड यूपी की सुर्खियों में रहे हैं लेकिन इस बार तो उन्होंने बिहार में लड़की खरीदने की बात कह डाली। और यह शर्मनाक बात एक कार्यक्रम के मंच से कही।

    देखें वीडियो-बिहार में 20-25 हजार में मिल जाती हैं लड़कियां

    महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्रालय जैसी अत्यंत संवेदनशील जिम्मेदारी संभालने वाली मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल ने कहा कि ’’बिहार से 20-25 हजार रुपये में लड़कियां आसानी से मिल जाती हैं”। और युवाओं को कहा कि वो उनकी शादी करवाएंगे। यह बात गिरधारी ने हंसते हंसते कही। युवाओं से यह भी कहा कि  शादी कर लेते तो तीन चार बच्चे हो जाते।
    पहले ही  अंकिता हत्याकांड,एंजेल चकमा मर्डर केस समेत अन्य मसलों से जूझ रही भाजपा के लिए यह एक नई दिक्कत खड़ी हो गयी है।

    1990 में बरेली में हुए दोहरे हत्याकांड में भी गिरधारी साहू का नाम जुड़ा। 2021 में भी गैरजमानती वारंट जारी हुए थे।
    यही नहीं बीते साल एक युवती के साथ भी गिरधारी साहू का नाम जुड़ा था। यह पारिवारिक विवाद भी मीडिया में खूब उछला था।

    अब फिर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। उत्तराखंड महिला कांग्रेस ने मंत्री पति का एक वीडियो जारी किया है जिसमें गिरधारी कहते  सुने जा रहे हैं कि बिहार में लड़कियां बीस या पच्चीस हजार में मिल जाती है।

    प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष  ज्योति रौतेला ने कहा कि ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ का नारा देने वाली रेखा आर्य के पति का यह बयान न केवल घोर निंदनीय और शर्मनाक है, बल्कि यह पूरे देश की महिलाओं और बच्चियों की गरिमा पर सीधा हमला है।

    उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश महिला कांग्रेस अंकिता भंडारी हत्याकांड और उनके पति द्वारा महिलाओं के बारे में दिये गये बयान के खिलाफ कल 2 जनवरी को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के यमुना कॉलोनी स्थित आवास का घेराव करेगी।

  • अंकिता हत्याकांड: पूर्व भाजपा विधायक ने उठाई सीबीआई जांच की मांग

    अंकिता हत्याकांड: पूर्व भाजपा विधायक ने उठाई सीबीआई जांच की मांग

    फैक्ट्री बेच उर्मिला को दिए 50 लाख,वो मेरी पत्नी नहीं-राठौर

    बेटियों की रक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी-विजया बड़थ्वाल

    दोषी कोई भी हो, सजा जरूर मिले-त्रिवेंद्र

    भाजपा संगठन में फेरबदल के संकेत

    देहरादून। उर्मिला-सुरेश-आरती के अंदरूनी विवाद से जनित कथित वीआईपी विवाद में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने भी चुप्पी तोड़ दी है।
    इन दोनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान के बाद इस मुद्दे पर पार्टी के मतभेद भी सामने आ गए हैं।
    उधर, वीआईपी कांड को लेकर भाजपा हाईकमान में भी गम्भीर हलचल देखी जा रही है। निकट भविष्य में प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की उम्मीद भी बनने लगी है।
    इधऱ, यमकेश्वर से पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल ने तो तीखा लिखित बयान जारी कर कांग्रेस की तर्ज पर सीबीआई जांच की मांग कर डाली। यही नहीं, उन्होंने यह भी कह दिया कि न्याय होना ही पर्याप्त नहीं है। न्याय दिखना भी चाहिए।
    उन्होंने कहा कि हम किसी भी पार्टी के हो सकते हैं, परंतु हमारी बेटियों की प्रतिष्ठा, सम्मान और अस्मिता की रक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। महादेव की इस पवित्र भूमि पर यदि हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो इस राज्य को संभालने का क्या अर्थ बचता है?
    गौरतलब है कि जिस वनन्तरा रिसॉर्ट में अंकिता  नौकरी करती थी। वह यमकेश्वर विधानसभा में आता है। और यहां से मौजूदा भाजपा विधायक रेनू बिष्ट और उमरेला कि पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ पर वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलाने का आरोप सुर्खियों में है।
    इस बीच, सालों से मौन साधे रही पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल के झकझोरने वाले बयान के बाद भाजपा की चिंता की लकीरें बढ़ गयी है।

    क्या कहा पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने

    विजया बड़थ्वाल के बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में
    मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह महिलाओं से जुड़ा हुआ विषय है, जो समाज के 50 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं। त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि यह मामला इस समय न्यायालय के विचाराधीन है । इसलिए सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकती ।
    साथ ही यह भी जोड़ा कि इसकी गहराई से जांच की आवश्यकता है।
    पूर्व सीएम ने कहा कि इस तरह के गलत काम करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए। चाहे वह उनका अपना बच्चा हो या भाई, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और समाज पर धब्बा लगाने का काम करती हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह भी कहा कि जब यह घटना हुई थी, तब उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गहरा दुख और तकलीफ हुई ।

    विजया बड़थ्वाल व त्रिवेंद्र के बयान के बाद भाजपा के अंदर राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है। प्रदेश भाजपाध्यक्ष महेंद्र भट्ट उर्मिला सनावर पर दिए गए बयान के बाद स्वंय घिर गए है।

    उर्मिला मेरी पत्नी नहीं

    इस मुद्दे पर भाजपा से निष्कासित सुरेश राठौर ने एक बार फिर प्रेस कांफ्रेंस कर उर्मिला सनावर की नीयत पर सवाल उठाए। कहा कि वो मेरे परिवार को बर्बाद कर रही है। चारित्रिक हनन कर रही है। मैंने फैक्ट्री बेच उर्मिला को 50 लाख रुपए दिए । वह ब्लैकमेल कर रही है। मुझे पति भी कहती है और कालनेमि भी।
    राठौर यह कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने भाजपा को खून पसीने से सींचा।
    राठौर ने कहा कि उर्मिला मेरी पत्नी नहीं है। सोशल मीडिया में कहने के बजाय उर्मिला को फैमिली कोर्ट जाना चाहिए।

    उर्मिला -सुरेश

    इस मामले में उक्रांद, महिला मंच, मूल निवास भू कानून समिति समेत अन्य संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है। हरिद्वार जिले में ही भाजपा से जुड़े मोर्चा के नेता अंकित बहुखंडी के नेतृत्व में वीआईपी का पुतला दहन भी किया गया। बहुखंडी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
    इससे पूर्व,मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के तहत पुतला दहन कर चुकी है। सोशल मीडिया में कई आम लोग भी बयान जारी कर सुरेश-उर्मिला-आरती के ऑडियो की जांच की मांग कर रहे हैं।

    पूर्व विधायक, विजया बड़थ्वाल का पत्र

    मैं, श्रीमती विजया बड़थ्वाल, इस समय उत्तराखंड और देश में चर्चा का विषय बने अंकिता भंडारी हत्याकांड के हाल के खुलासों के प्रति गहरा शोक और चिंता व्यक्त करती हूँ।..

    यह दर्दनाक अपराध महादेव की पवित्र भूमि में घटा, जहाँ हमारी बेटियाँ की सुरक्षा और संम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। अंकिता भंडारी, एक युवा लड़की, जिसने अपने काम के दौरान अत्यंत अनैतिक दबाव का सामना किया और अपनी उसी निष्ठा के कारण जीवन खो दिया यह सत्य हमें हिलाकर रख देता है। इस मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा भी मिल चुकी है।

    हाल ही में एक वायरल वीडियो ने इस मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है, और जिससे राजनीतिक तथा सामाजिक बहस तेज़ हो गई है।

    मैं मानती हूँ कि भाजपा सरकार और उत्तराखंड प्रशासन ने अपराधियों को सज़ा दिलाने में कार्रवाई की है, परंतु न्याय होना ही पर्याप्त नहीं है, न्याय होते हुए दिखना भी जरुरी है; और यदि इस मामले में कुछ सवाल हैं तो उन सवालों के जवाब पाने के लिए निष्पक्ष जांच होना चाहिए।

    इसीलिए मैं दृढ़ता से सीबीआई की निष्पक्ष जांच की मांग करती हूँ, ताकि किसी भी प्रकार की राजनीतिक दबाव या छुपाव की आशंका न रहे।

    राजनीति में हम किसी भी पार्टी के हो सकते हैं, परंतु हमारी बेटियों की प्रतिष्ठा, सम्मान और अस्मिता की रक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पहाड़ महादेव की इस पवित्र भूमि पर यदि हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो इस राज्य को संभालने का क्या अर्थ बचता है?

    मैं उत्तराखंड सरकार से अपील करती हूँ किः

    1. सीबीआई जांच को तुरंत मंजूरी दी जाए, ताकि सभी तथ्य निष्पक्ष रूप से सामने आ
    सकें।

    2. जनता को यह भरोसा दिया जाए कि न्याय और सत्य की कोई भी आवाज दबाई नहीं जाएगी।

    हम अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं कर सकते। यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक ज़िम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों का प्रश्न है।

  • हिमाचल गुरुद्वारे में कारसेवा करने पहुंचे हरक, विवाद पर मांगी माफी

    हिमाचल गुरुद्वारे में कारसेवा करने पहुंचे हरक, विवाद पर मांगी माफी

    गलती को स्वीकारना ही सच्ची सेवा -हरीश रावत

    बिगड़े बोल के बाद प्रायश्चित करना कांग्रेस की नौटंकी-भाजपा

     

    देहरादून। सिख समुदाय पर अनर्गल टिप्पणी से उठे तूफान को शांत करने के लिए कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत पोंटा साहिब के गुरुद्वारे पहुंचे। कार सेवा की और मांगी माफी।

    उधर, पूर्व सीएम हरीश रावत सोमवार 8 दिसंबर को गुरुद्वारे में कारसेवा करेंगे। हरदा ने इस बाबत सोशल मीडिया में एक पोस्ट भी साझा की है।

    इस बीच, भाजपा ने हरक व कांग्रेस नेताओं की माफी को नौटंकी करार दिया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी सिख समुदाय से माफी मांग कर उठे ज्वार को शांत करने की कोशिश की।
    पूर्व मंत्री हरक के बोल के बाद राजनीतिक नफे-नुकसान का भी आंकलन किया जा रहा है। सिख समुदाय अपनी नाराजगी जताते हुए हरक का पुतला दहन कर चुका है।

    रविवार को हरक सिंह रावत गुरुद्वारा पोंटा साहिब पहुंचे । जो श्री गुरु गोविन्द सिंह जी का पावन स्थान है। सिख परंपरा के प्रति श्रद्धा रखते हुए उन्होंने गलती से बोले गए उनके शब्दों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब से माफ़ी माँगी और पश्चाताप व्यक्त करते हुए जोड़ा घर (जहाँ संगत के जूतों होते हैं) की सेवा की।

    पूर्व मंत्री हरक सिंह ने लंगर रसोई में सेवा की। उन्होंने गुरु साहिब की हाज़िरी में अरदास कर सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगी ।  और गुरु साहिब के चरणों में प्रसाद अर्पित किया।

    पिछले दिनों उत्तराखंड कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के धरना प्रदर्शन के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत  ने अपने संबोधन में सिख अधिवक्ता के संदर्भ में अनर्गल टिप्पणी कर दी।  उसी क्षण उन्हें अपनी भूल का अहसास हो गया और उन्होंने तुरंत उस अधिवक्ता से क्षमा भी मांग ली थी।

    लेकिन कार्यक्रम में मौजूद कुछ अन्य अधिवक्ताओं ने इस पर नाराज़गी जताई, तो हरक सिंह रावत  स्वयं बार काउंसिल कार्यालय पहुंचे। वहाँ उन्होंने सभी अधिवक्ताओं से खुलकर बातचीत की। अपनी भावनाएँ साझा कीं और स्पष्ट कहा कि उनके मन में सिख समाज के लिए अत्यंत सम्मान है।
    उन्होंने कहा कि सिख समाज ने हमेशा उत्तराखंड और देश के लिए कठिन से कठिन समय में आगे बढ़कर सेवा की है और अपनी कर्तव्यनिष्ठा से दुनिया का दिल जीता है। उनकी मंशा कभी भी किसी समाज, विशेषकर सिख समाज, के प्रति अमर्यादित शब्द कहने की नहीं रही।

    उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी व्यक्ति, अधिवक्ता या समाज का कोई साथी आहत हुआ है, तो वे हृदय से क्षमा प्रार्थी हैं। कोर्ट परिसर में उपस्थित सभी अधिवक्ताओं ने उनकी बात को समझा, सहमति व्यक्त की और वहीं इस मामले को समाप्त भी कर दिया। सभी ने एक-दूसरे का धन्यवाद किया।

    रविवार को कांग्रेस नेता हरक सिंह के गुरुद्वारे में   कार सेवा करने के बाद उपजे विवाद के शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है। जबकि भाजपा ने हरक की माफी को नौटंकी बता कर विरोध में डटी है।

    गलती को स्वीकारना ही सच्ची सेवा है, और गुरु की शरण में झुकना ही सच्चा साहस-हरीश रावत

    मुंह की फिसलन कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाती है और *ऐसी ही एक फिसलन के शिकार हमारे कांग्रेस के नेता डॉ. हरक सिंह रावत जी हो गए।
    सिख एक महान, वीर और श्रद्धेय कौम है, जो हमारे राष्ट्रीय सम्मान, साहस और त्याग के प्रतीक हैं।
    मनसा-वाचा-कर्मणा से कहीं भी हमसे कोई गलती हो जाए, तो हमारे लिए एक ही मार्ग है, गुरु साहब की शरण में जाना।
    हमारी पार्टी के नेता से गलती हुई है और इसलिए मैंने तय किया है कि 8 दिसंबर, 2025 को सायं 6 बजे की संगत के समय गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, आढ़त बाजार, देहरादून के प्रांगण में जूता सेवा करूँगा।

    पूर्व सीएम हरीश रावत- फाइल फ़ोटो

    हरक के चुभते बोल और हरदा की सेवा जैसी नौटंकी कांग्रेस की सोच -भाजपा

    देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रमुख मनवीर सिंह चौहान ने सिख समुदाय पर कांग्रेस नेता हरक सिंह की टिप्पणी को अशोभनीय और समुदाय की भावना को आहत करने वाला  करार देते हुए कहा कि कांग्रेस का यही चरित्र है और असंसदीय भाषा के बाद पश्चाताप की नौटंकी से उसका असली चेहरा सामने आ गया है।

    चौहान ने कहा कि हरक सिंह रावत के अभद्र बयान पर कांग्रेस अचानक डिफेंस मोड में आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मैदान में उतरकर कह रहे हैं कि “हम खेद प्रकट करते हैं और गुरुद्वारों में सेवा कर पश्चाताप करेंगे।” लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस की नई राजनीति यही है, पहले हिंदू और सिख अस्मिता पर हमला करो, फिर इसे “जुबान फिसल गई” कहकर गुरुद्वारों-मंदिरों की देहलीज़ पर जाकर नकली पश्चाताप का नाटक किया जाय।

  • चुनावी माहौल में हलचल: हरदा की माल्टा पार्टी पर बढ़ी सरगर्मियाँ

    चुनावी माहौल में हलचल: हरदा की माल्टा पार्टी पर बढ़ी सरगर्मियाँ

    पूर्व सीएम हरीश रावत ने सजाई रसीले पहाड़ी माल्टा की दावत

    देहरादून। उत्तराखण्ड के मौसम में ठंड घुलती जा रही है। लेकिन राजनीति का तापमान भी उतमी ही तेजी से चढ़ता जा रहा है।
    हरक सिंह रावत के पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत व सांसद अजय भट्ट को गर्मागर्म परांठे की वर्षों पुरानी खुशबू की याद दिलाने और पूर्व सीएम निशंक व तीरथ सिंह रावत की शैक्षणिक सफर पर सवाल उठाने के बाद अब पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी अपनी पुरानी परम्परा को एक कदम और आगे बढ़ा दिया है।

    पूर्व सीएम ने एक बार फिर पहाड़ी माल्टा, नींबू व संतरे की दावत का न्योता भेजा है। 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हाईकमान ने बेशक हरीश रावत को फ्रंट मोर्चे पर तैनात नहीं किया है। लेकिन प्रदेश की राजनीति में स्वंय की मौजूदगी का बारम्बार अहसास दिलाने वाले हरदा ने भी अपनी चुनावी तोप की नाल की सफाई शुरू कर दी है।

    पूर्व सीएम हरीश रावत काफल,भुट्टे,आम, खीरा-ककड़ी पहाड़ी रायते की शानदार दावत कर पीएम मोदी व भाजपा को अपने वोकल फार लोकल का सन्देश देते रहे हैं। हरीश रावत की यह महफ़िल बरसों से सजती रही है।

    2025  के आखिरी महीने दिसम्बर की धूप में पहाड़ी माल्टा की इस दावत में राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्र के प्रमुख लोगों को न्योता भेजा गया है। माल्टा की यह दावत हरिद्वार बायपास रोड पर स्थित नीरजा ग्रीन में दोपहर 2 बजे रखी गयी है।
    पहाड़ी रसीले माल्टा के साथ पहाड़ी पिसे हुए नमक का स्वाद बरबस मुंह में पानी ला देगा। ऐसा दावा भी किया गया है।
    हरीश रावत का कहना है कि माल्टा उत्पादकों को उम्मीद के मुताबिक सरकारी संरक्षण नहीं मिल पाया।
    उन्होंने भी अपने कार्यकाल में कीवी आदि पहाड़ी फलों के प्रोत्साहन के लिए  फैसले लिए थे। लेकिन माल्टा को लेकर थोड़ा चूक गए।

    25 साल के उत्तराखण्ड में प्रदेश के पर्वतीय जिलों में माल्टा के भारी उत्पादन के बाद काश्तकार को वाजिब दाम न मिलना भी कई सवाल खड़े करता है।

    बहरहाल, शनिवार की माल्टा पार्टी में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा भी लगेगा। विपक्ष के नेताओं के भी आने की।उम्मीद है। पूर्व में हरीश रावत व त्रिवेंद्र रावत एक दूसरे की भुट्टा, आम व रायता पार्टी में शिरकत करते रहे हैं।

    इस बार हरीश रावत 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी और विपक्ष को  अपने वजूद का अहसास कराएंगे। इसी साल गर्मियों में हरदा की काफल पार्टी में भारी हुजूम उमड़ा था। पार्टी में पहाड़ से तोड़कर लाए गए काफल की बहुतायत भी चर्चा का विषय बनी ।

    इस बार रसीले पहाड़ी माल्टा पार्टी के साथ ही प्रदेश की राजनीति का पारा कुछ डिग्री उछाल तो मारेगा ही…

  • फील्ड मार्शल! दास्तां अधूरी छोड़ क्यों सो गये?

    फील्ड मार्शल! दास्तां अधूरी छोड़ क्यों सो गये?

    स्मृति शेष- वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शास्त्री की कलम से

    उत्तराखंड के हितों के लिए रात दिन मुखर रहने वाले भट्ट मंगलवार को सदा सदा के लिए सो गए। तीखे तेवरों के कारण ही दिवाकर भट्ट को फील्ड मार्शल कहा गया था लेकिन फील्ड मार्शल इस तरह मौन गमन करेंगे, इसकी उम्मीद नहीं थी।
    सहसा विश्वास करना कठिन हो रहा है कि सत्ता प्रतिष्ठान को तीखे अंदाज में चुनौती देने वाला इस तरह बीमारी से हार मान लेगा। यकीन करना कठिन हो रहा है। उनके निधन से समूचे उत्तराखंड ने पहाड़ के सरोकारों के लिए समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया है।
    मौजूदा दौर में उक्रांद बेशक हाशिए पर हो लेकिन 1979 में उक्रांद के गठन के समय से ही दिवाकर भट्ट अलग उत्तराखंड की मांग करने वाले लोगों की पहली जमात में जुड़ गए थे।
    इस लिहाज से वे डॉ. डी डी पंत, इंद्रमणि बडोनी आदि नेताओं के साथ उक्रांद के संस्थापक सदस्यों में एक थे।
    राज्य आंदोलन में उनकी भूमिका को कौन झुठला सकता है।  टिहरी के खैट पर्वत पर अनशन हो या श्रीनगर के श्रीयंत्र टापू में आमरण अनशन या फिर पौड़ी का आंदोलन, सभी जगह उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। आपको याद होगा, फील्ड मार्शल ने अपनी राजनैतिक यात्रा कीर्तिनगर के ब्लाक प्रमुख पद से शुरू की थी। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। राज्य आंदोलन के हर मोड पर वे हमेशा आगे रहे।1990 के दशक में तब दिल्ली के वोट क्लब पर राजनीतिक रैलियां हुआ करती थी, बाद में वहां रैलियां पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
    लोकगायक हीरासिंह राणा के जनजागरण गीत ” लस कमर बांध, हिम्मत का साथ” के बाद फील्ड मार्शल का संबोधन हुआ तो देर तक उत्तराखंड राज्य की मांग करने आए लोगों ने ऊर्जा का इस कदर संचार हुआ था कि लोग देर तक उन्हें सुनते रहे। तब काशी सिंह ऐरी  उक्रांद के अध्यक्ष हुआ करते थे और दिल्ली उक्रांद के अध्यक्ष खीमानंद खुल्बे।

    खुल्बे ने ही दिल्ली में रह रहे पहाड़ के मीडियाकर्मियों को जोड़ा था। इस कारण मैं भी उस रैली का साक्षी था। आज भी दिवाकर भट्ट का वह ओजस्वी भाषण कानों में गूंजता है। उससे पहले पूर्ण सिंह डंगवाल के निवास पर रैली की तैयारी के लिए हुई बैठक में भी फील्ड मार्शल मौजूद थे और तब भी जब वीपी सिंह के मंडल दांव के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए मंत्रणा हुई तो विपिन त्रिपाठी के साथ फील्ड मार्शल भी उनमें शामिल थे।
    फील्ड मार्शल ने अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा तब भी मनवाया था, जब वे बाला साहब ठाकरे से मिलने मुंबई गए थे लेकिन पहले ठाकरे ने बात करने से ही इनकार कर दिया था लेकिन जब फील्ड मार्शल ने अपनी दलीलें रखी तो ठाकरे ने न सिर्फ उन्हें गौर से सुना बल्कि उत्तराखंड आंदोलन का समर्थन भी कर दिया था।
    वर्ष 2000 में पृथक राज्य बना तो पहले विधानसभा चुनाव में उक्रांद के चार विधायक चुन कर आए थे लेकिन 2007 के दूसरी विधानसभा के चुनाव में दिवाकर भट्ट देवप्रयाग सीट से विधायक बने। बीसी खंडूरी सरकार में उन्होंने राजस्व मंत्री का पदभार संभाला।
    भट्ट पहाड़ के दर्द को समझते थे और इसके लिए हमेशा समर्पित रहे। उनके योगदान को देखते हुए ही जनता ने उन्हें फील्ड मार्शल का नाम दिया था। आज जिस दौर से उत्तराखंड गुजर रहा है, ऐसे वक्त में उत्तराखंड को दिवाकर भट्ट जैसे संघर्षशील व्यक्ति की ज्यादा जरूरत महसूस होती है लेकिन नियति को यह मंजूर कहां? निसंदेह फील्ड मार्शल का यूं चला जाना संघर्षशील ताकतों के लिए भी क्षति है और उत्तराखंड के लिए भी।
    सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने का मामला हो या किसी क्षेत्र विशेष के लिए कोई योजना हो, फील्ड मार्शल बड़ी शिद्दत से मुद्दे को उठाते थे और अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश करते थे।

    दुर्भाग्य से आज उक्रांद संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। समय पर पार्टी नेताओं ने दूसरी पंक्ति खड़ी नहीं की, अब कुछ लोग आगे आए हैं तो उम्मीद की जानी चाहिए़ कि वे फील्ड मार्शल के अधूरे काम को आगे बढ़ाएंगे। दिवाकर भट्ट की क्षतिपूर्ति तो नहीं हो सकती लेकिन उनके बताए रास्ते पर चल कर उनके अधूरे काम को पूरा तो किया ही जा सकता है और यही उनके प्रति श्रद्धांजलि भी होगी।

    आज उत्तराखंड फील्ड मार्शल भट्ट को उसी शिद्दत से याद कर रहा है, जिस शिद्दत से लोग उन्हें देखते सुनते आए। दिवंगत नेता को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ।

  • गणेश गोदियाल बने उत्तराखण्ड कांग्रेस के नए अध्यक्ष

    गणेश गोदियाल बने उत्तराखण्ड कांग्रेस के नए अध्यक्ष

    प्रीतम सिंह व हरक सिंह को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    देखें,जिलाध्यक्षों की सूची

     

    नई दिल्ली। गणेश गोदियाल उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष होंगे।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रचार समिति और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्षों की नियुक्ति को भी हरी झंडी दे री है। महासचिव के सी वेणुगोपाल ने नियुक्ति आदेश जारी किए।

    1. श्री प्रीतम सिंह – अध्यक्ष, प्रचार समिति

    2. डॉ. हरक सिंह रावत – अध्यक्ष, चुनाव प्रबंधन समिति

    निवर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा को कांग्रेस कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य भी नियुक्त किया है। पार्टी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनके योगदान की सराहना करती है।

  • कांग्रेस ने केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ की राहत राशि देने की अपील की

    कांग्रेस ने केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ की राहत राशि देने की अपील की

    कांग्रेस ने केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की

    देहरादून। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उत्तराखंड के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत एवं पुनर्वास के कदम उठाना आवश्यक है।

    माहरा ने कहा कि पांच सितम्बर को प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में पहले दस हजार करोड़ रुपये की सहायता की मांग की गई थी, लेकिन अब आपदा की गंभीरता को देखते हुए कम से कम 20 हजार करोड़ रुपये का पैकेज जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने केंद्र से मात्र 5700 करोड़ रुपये की ही सहायता मांगी है, जबकि अकेले जोशीमठ के पुनर्निर्माण में लगभग छह हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कर्णप्रयाग, गोपेश्वर, नैनीताल, धारचूला, खटिया और अन्य कई क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों को अब तक समुचित राहत नहीं मिल सकी है। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग ने भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईआरएस) की चेतावनियों को नजरअंदाज किया। यहां तक कि मृतक, लापता और घायलों की वास्तविक संख्या का भी सही आकलन नहीं किया जा सका है।

    माहरा ने केंद्र सरकार से मांग की कि मौजूदा आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल अधिकतम सहायता मिल सके। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को तत्काल 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए। इसके अलावा क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और उनका पुनर्वास सुरक्षित स्थानों पर टिहरी बांध विस्थापितों की तर्ज पर किया जाए।

    कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि केवल आर्थिक राहत ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे। इसके लिए भू-विज्ञानियों और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की विशेष टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में आपदाओं से निपटने की ठोस योजना बनाई जा सके।

    उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों से अपील की कि आपदा पीड़ितों की सुरक्षा, राहत और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए।

  • जनहित में सरकार की योजनाएं व प्रमुख उपलब्धियाँ

    जनहित में सरकार की योजनाएं व प्रमुख उपलब्धियाँ

    काशीपुर में प्रबुद्धजन सम्मेलन

    काशीपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद स्थापित किया और राज्य सरकार की उपलब्धियों व विकास कार्यों की जानकारी दी।

    कार्यक्रम में चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षाविद, अधिवक्ता, उद्यमी, व्यापारी, समाजसेवी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रबुद्धजन प्रधानमंत्री के “विकसित भारत@2047” के संकल्प को साकार करने वाले अग्रदूत हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति के साथ नई ऊंचाइयां छू रहा है। भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों से वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड भी निवेश और औद्योगिक विकास में अग्रणी बन रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए 3.56 लाख करोड़ के निवेश समझौतों में से लगभग 1 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं। राज्य में नई औद्योगिक नीति, स्टार्टअप नीति और मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी से निवेशकों को बेहतर माहौल मिला है।

    उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “एक जनपद, दो उत्पाद”, “हाउस ऑफ हिमालयाज”, “स्टेट मिलेट मिशन” और नई पर्यटन नीति जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और अवैध धर्मांतरण व लैंड जिहाद पर कार्रवाई को राज्यहित में ऐतिहासिक निर्णय बताया।

  • लेखक गांव से उठी राजनीति की नई लहर

    लेखक गांव से उठी राजनीति की नई लहर

    राजनीति- लेखक गांव से बही सियासत की नयी बयार
    त्रिवेंद्र-निशंक के बीच जमी वर्षों पुरानी बर्फ पिघली
    सियासत के रंग बदलते हैं हर मोड़ पर,
    आज दुश्मन थे, तो कल होंगे साथ, किसी मोड़ पर

    सावन बीत गया। लेकिन राजनीति की झमाझम बरसात जोरों पर है। भाजपा के अंदर जारी नेताओं के आचार व्यवहार ने कई कहानियों पर पंख लगा दिए हैं।

    रविवार को दो पूर्व सीएम की मुलाकात सभी को चौंका गयी। इस मिलन से इसलिए भी सत्ता के गलियारे गर्म हुए क्यों कि ये दोनों नेता कभी भी एक दूसरे के बगलगीर नहीं रहे।

    भाजपा की राजनीति के दो अलग-अलग गुटीय संघर्ष में दोनों नेता बीते 25 साल में एक दूसरे से उलझे रहे। डोईवाला विधानसभा में इन दोनों ही नेताओं का वर्चस्व रहा है। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने गढ़वाल की कर्णप्रयाग/थलीसैंण से जब मैदान की ओर रुख किया तो पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की डोईवाला विधानसभा सीट से चुनाव लड़े।

    गांव

    बाद में निशंक 2014 के लोकसभा चुनाव में हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र में शिफ्ट हो गए। मौजूदा समय में त्रिवेंद्र सिंह रावत के करीबी बृजभूषण गैरोला डोईवाला सीट से विधायक है।

    राजनीति का समय चक्र कब किस दिशा का रुख कर ले। यह भी हर किसी की समझ से परे है। 2024 के लोकसभा चुनाव में ऐसा ही हुआ।इस बार पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने पूर्व सीएम निशंक की हरिद्वार लोकसभा सीट से टिकट हासिल कर व जीतकर सभी को चौंका दिया।

    भाजपा हाईकमान ने
    2014 व 2019 में हरिद्वार लोकसभा से चुनाव जीत कर बतौर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री बनने वाले निशंक का 2024 में टिकट काटकर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत को थमा दिया ।

    राजनीति की इस चक्र चाल में दोनों पूर्व सीएम की अंकगणित एक दूसरे से भिन्न रही। लेकिन त्रिवेंद्र रावत का निशंक के लेखक गांव में पहुंचकर एक दूसरे की गलबहियां नये संकेतों की ओर इशारा कर रही है।

    त्रिवेंद्र ने लेखक गांव और निशंक की तारीफ और हाथ मिलाकर पुरानी कहानियों को नये सिरे से जिंदा कर दिया।

    एक समय भाजपा के तीन नेता बीसी खण्डूडी, भगत सिंह कोश्यारी और निशंक की त्रिवेणी की परिवर्तनीय जुगलबंदी प्रदेश की राजनीति को हिलाती रहती  थी। कभी निशंक व भगत साथ हो जाते थे तो कभी खण्डूड़ी-भगत व निशंक-खण्डूड़ी की जोड़ी गुल खिलाती दिख जाती थी।

    नये सन्दर्भ में भाजपा की राजनीति के कुछ अलग ध्रुव पुराने नेताओं की तरह ‘जुगलबंदी’ कर रहे हैं। ऐसा ही जुगलबंदी का एक नजारा दिल्ली में सम्पन्न भाजपा की बैठक में देखने को मिला, जब त्रिवेंद्र व अनिल बलूनी एक मंच पर नजर आए।

    जब सीएम धामी थराली की आपदा ग्रस्त क्षेत्र में पहुंचकर जख्मों पर मरहम लगा रहे थे । ठीक उसी दिन त्रिवेंद्र-निशंक की गुलदस्ते के साथ वॉयरल हो रही फ़ोटो भाजपा की राजनीति में एक नया कोण बनाती नजर आयी।

    गांव

    इस दोस्ती के कई कारण भी सत्ता के गलियारों की चर्चा के केंद्र में है। कुछ मुद्दों के अलावा एक चर्चित व विवादास्पद को मिल रहे ‘आशीर्वाद व संरक्षण’ ने भी इन दोनों को हाथ मिलाने पर मजबूर किया।