Category: राजनीति

  • पंचायत चुनाव का आखिरी चरण संपन्न, 70 फीसदी मतदाताओं ने किया मतदान

    पंचायत चुनाव का आखिरी चरण संपन्न, 70 फीसदी मतदाताओं ने किया मतदान

    पंचायत चुनाव : महिलाओं ने फिर मारी बाजी, 31 जुलाई को होगी मतगणना

    देहरादून।  त्रिस्तरीय पंचायत के द्वितीय और अन्तिम चरण के मतदान के प्रारंभिक आंकलनों के अनुसार कुल 70.00 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।  65.50 प्रतिशत पुरुष और 74.50 प्रतिशत महिला मतदाता शामिल हैं।

    पहले चरण के मतदान में 68 प्रतिशत मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। मतगणना 31 जुलाई को होगी। पंचायत चुनाव में 47 लाख से अधिक मतदाता दर्ज किए गए थे। पंचायत के कुल 66418 पदों के लिए 17 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरे हुए थे।

    राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि द्वितीय चरण के लिए राज्य के 10 जनपदों के 40 विकास खण्डों की संबंधित ग्राम पंचायतों में स्थापित मतदान स्थलों में प्रातः 08:00 बजे से मतदान की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई।  मतदान में ग्रामीण मतदाताओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। मतपेटियां कड़ी सुरक्षा के बीच रखी गयी हैं।

    पंचायत

    देहरादून के डोईवाला, रायपुर व सहसपुर में 77.25 फीसदी हुआ मतदान

    पहले चरण में देहरादून के चकराता, कालसी व विकास नगर में 78.49 फीसदी रहा था मतदान

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत जनपद देहरादून में दूसरे चरण का मतदान भी शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। दूसरे चरण में डोईवाला, रायपुर व सहसपुर में 77.25 फीसदी हुआ मतदान हुआ। जबकि पहले चरण में देहरादून के विकासखंड चकराता, कालसी और विकास नगर में 78.49 प्रतिशत मतदान हुआ था। सभी बूथों पर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हो गया है।

    पंचायत चुनाव को लेकर मतदाताओं को खासा उत्साह दिखा। सुबह से शाम तक बूथों पर लंबी कतार देखने को मिली। बुजुर्ग, दिव्यांग और महिला मतदाताओं के साथ ही पहली बार वोट देने पहुंचे युवा मतदाता भी अपना वोट डालने को उत्साहित नजर आए।

    विकासखंड सहसपुर में 62651 महिला, 65459 पुरूष व 09 अन्य सहित कुल 128119 मतदाता पंजीकृत थे। जिसमें से 53110 महिला, 50790 पुरूष व 04 अन्य सहित 103904 मतदाताओं ने वोट किया। सहसपुर में 81.10 प्रतिशत मतदान हुआ।

    विकासखंड रायपुर में 10856 महिला, 11803 पुरूष सहित कुल 22659 मतदाता पंजीकृत थे। जिसमें से 9612 महिला, 10009 पुरूष सहित 19621 मतदाताओं ने वोट किया। रायपुरपुर में 86.59 प्रतिशत मतदान हुआ।

    पंचायत

    विकासखंड डोईवाला में 69786 महिला, 72488 पुरूष सहित कुल 142274 मतदाता पंजीकृत थे। जिसमें से 54576 महिला, 48282 पुरूष सहित 102858 मतदाताओं ने वोट किया। डोईवाला में 72.30 प्रतिशत मतदान हुआ।

    शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के बाद पोलिंग पार्टियों की वापसी जारी है। पोलिंग पार्टियों द्वारा स्ट्रांग रूम में मत पेटियां और चुनाव सामग्री जमा की जा रही है। मत पेटियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्ट्रांग रूम में सील किया जा रहा है। स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी सहित कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।  सभी विकास खंडों की मतगणना 31 जुलाई को संपन्न की जाएगी।

    निर्वाचन आयोग के मुताबिक प्रथम चरण में विभिन्न पदों पर प्रत्याशियों का विवरण –

    सदस्य ग्राम पंचायत: 948 पदों पर 2,247 प्रत्याशी।

    प्रधान ग्राम पंचायत: 3,393 पदों पर 9,835 प्रत्याशी।

    सदस्य क्षेत्र पंचायत: 1,507 पदों पर 5,044 प्रत्याशी।

    सदस्य जिला पंचायत: 201 पदों पर 878 प्रत्याशी।

    कुल मतदाताओं की संख्या 4777072, वर्ष 2019 की तुलना में 10.57 प्रतिशत मतदाता बढे

    राज्य में हरिद्वार को छोड़कर अन्य 12 जिलों के 89 विकास खंडों में सदस्य ग्राम पंचायत के 55587, प्रधान ग्राम पंचायत के 7499, सदस्य क्षेत्र पंचायत के 2974 और सदस्य जिला पंचायत के 358 पदों पर निर्वाचन होना है।

    पंचायत

    पंचायतों के कुल 66418 पदों पर  निर्वाचन के लिए प्रदेश में 8276 मतदान केन्द्र और 10529 मतदान स्थल निर्धारित किए गए हैं। त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन में 47,77,072 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2310996, पुरूष मतदाताओं की संख्या 2465702 और अन्य मतदाताओं की संख्या 374 है। वर्ष 2019 (कुल मतदाता 4320279) की तुलना में इस बार मतदाताओं की संख्या में 10.57 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

  • आज हो रहा पंचायत चुनाव का दूसरा चरण, उत्तराखंड में मतदान जारी

    आज हो रहा पंचायत चुनाव का दूसरा चरण, उत्तराखंड में मतदान जारी

    उत्तराखंड पंचायत चुनाव: दूसरे चरण की वोटिंग शुरू, 12 जिलों में डाले जा रहे वोट

    उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण का मतदान आज (रविवार) सुबह 8 बजे से शुरू हो गया। इस चरण में राज्य के 12 जिलों के 40 विकासखंडों में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से जारी है।

    दूसरे चरण में ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के कुल 5,033 पदों पर चुनाव हो रहा है। इन पदों के लिए 14,751 प्रत्याशी मैदान में हैं, जो अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

    राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस चरण में 4,433 पोलिंग पार्टियां तैनात की गई हैं। कुल 8,276 मतदान केंद्रों और 10,529 मतदान स्थलों पर वोट डाले जा रहे हैं।

    पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। आयोग की ओर से सभी मतदाताओं से निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान की अपील की गई है।

  • प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल बना ऐतिहासिक, देश में दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल

    प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल बना ऐतिहासिक, देश में दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल

    प्रधानमंत्री मोदी को सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं

    2047 तक विकसित भारत के संकल्प की दिशा में हो रहा सार्थक कार्य: मुख्यमंत्री

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के इतिहास में दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने पर प्रदेशवासियों की ओर से शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय के सिद्धांत पर चलते हुए समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंची है। उन्होंने प्रधानमंत्री को “नए भारत का निर्माता” बताते हुए कहा कि देश विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का जो संकल्प लिया है, वह आज प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा बन चुका है। उन्होंने भगवान बद्री विशाल और बाबा केदारनाथ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना की है।

  • उत्तराखंड पंचायत चुनाव: पहले चरण में मतदाताओं ने दिखाया उत्साह, 68% हुई वोटिंग

    उत्तराखंड पंचायत चुनाव: पहले चरण में मतदाताओं ने दिखाया उत्साह, 68% हुई वोटिंग

    महिलाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया, पुरुषों से ज्यादा मतदान किया

    दूसरे चरण का मतदान 28 जुलाई को होगा

    देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण में करीब 68 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग करते हुए 17 हजार से अधिक उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला किया है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान विशेष रूप से दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले आंकड़ों के आधार पर यह प्रतिशत और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

    पंचायत

    पहले चरण का मतदान प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की हल्की बूंदाबांदी और कहीं-कहीं तेज धूप के बीच आयोजित हुआ। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे चुनाव में ग्रामीण जनता की बढ़ती भागीदारी का पता चलता है। मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के कई प्रमुख नेता भी अपने-अपने गांवों में मतदान कर लोकतंत्र में हिस्सा लिया।

    पंचायत

    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा गुरुवार की देर रात जारी किए गए प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में कुल 68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसमें पुरुष मतदाताओं ने 63 प्रतिशत और महिलाओं ने 73 प्रतिशत मतदान किया, जो महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

    पहले चरण में कुल चार पदों के लिए लगभग 17 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। इसमें ग्राम पंचायत सदस्य के 948 पदों पर 2,247 उम्मीदवार, प्रधान ग्राम पंचायत के 3,393 पदों पर 9,835 प्रत्याशी, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 1,507 पदों पर 5,044 उम्मीदवार और जिला पंचायत सदस्य के 201 पदों पर 878 उम्मीदवार शामिल थे। कुल मिलाकर 26 लाख से अधिक मतदाता इस चरण में मतदान के लिए पंजीकृत थे।

    उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2025 के पहले चरण का मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। हरिद्वार जिले को छोड़कर प्रदेश के सभी जनपदों के 49 विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में सुबह 8 बजे से ही मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई थी।

    राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने सभी तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाबलों को मतदान के दौरान शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने चुनावी व्यवस्था में पूरी तत्परता और पारदर्शिता बरती, जिससे मतदान सुचारू रूप से संपन्न हो सका।

    पंचायत

    अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में मतदान 28 जुलाई को किया जाएगा, जिसमें अन्य जिलों की ग्राम पंचायतों में वोट डाले जाएंगे। इस चरण में भी चुनाव आयोग पूरी व्यवस्था के साथ निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए तैयार है।

    यह चुनाव उत्तराखंड की ग्रामीण राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों की दिशा तय होती है। पहले चरण में मतदान प्रतिशत और महिलाओं की अधिक भागीदारी से उम्मीद है कि ग्रामीण लोकतंत्र और भी मजबूत होगा।

     

  • पंचायत चुनाव: सीएम धामी ने मां के साथ डाल वोट

    पंचायत चुनाव: सीएम धामी ने मां के साथ डाल वोट

    हर वोट जरूरी: मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से की मतदान की अपील

    देखें वीडियो

    ऊधमसिंहनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के अंतर्गत गुरुवार को राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय, नगला तराई (जिला ऊधमसिंहनगर) स्थित बूथ संख्या 3 पर मतदान किया। उन्होंने आम मतदाताओं की तरह कतार में खड़े होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

    मुख्यमंत्री के साथ उनकी माता बिशना देवी ने भी मतदान किया।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेष रूप से ग्रामीण मतदाताओं से पंचायत चुनावों में उत्साहपूर्वक भाग लेने और अधिक से अधिक मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदाता का एक-एक वोट पंचायत व्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

  • त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आयोग पूरी तरह तैयार, 144 चुनाव चिह्न और ढाई करोड़ से अधिक बैलेट पेपर तैयार

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आयोग पूरी तरह तैयार, 144 चुनाव चिह्न और ढाई करोड़ से अधिक बैलेट पेपर तैयार

    आयोग ने पंचायत चुनावों के लिए छपवाए ढाई करोड़ से अधिक बैलेट पेपर, 144 चुनाव चिह्न किए निर्धारित

    राज्य में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को सुचारु और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोग कई माह पहले से सक्रिय हो गया था। इसी क्रम में आवश्यक चुनाव सामग्री की व्यवस्था पहले ही शुरू कर दी गई थी। उदाहरणस्वरूप, पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से मतपेटियां मंगाई गई थीं ताकि मतदाता अपने मतों को सुरक्षित रूप से डाल सकें।

    राज्य निर्वाचन आयोग ने जानकारी दी है कि इस बार के पंचायत चुनावों के लिए दो करोड़ से अधिक बैलेट पेपर की छपाई करवाई गई है। हालांकि, लगभग 50 लाख मतदाताओं के अनुपात में यह संख्या अधिक प्रतीत होती है, लेकिन आयोग ने सभी संभावित आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लगभग ढाई करोड़ बैलेट पेपर छपवाने का निर्णय लिया है।

    इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि आयोग ने हैदराबाद स्थित सरकार की स्वामित्व वाली सरकारी प्रिंटिंग प्रेस से भी बैलेट पेपर छपवाए हैं। वहां से करीब दो लाख बैलेट पेपर की छपाई करवाई गई है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश की दो सरकारी प्रिंटिंग प्रेस—रामनगर और लखनऊ—से भी बैलेट पेपर छपवाए गए हैं। वहीं, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अधिकृत कुछ निजी प्रिंटिंग प्रेसों से भी बैलेट पेपर छपवाए गए हैं ताकि समय पर और पर्याप्त मात्रा में बैलेट पेपर उपलब्ध हो सकें।

    राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल ने बताया कि पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर प्रत्याशी या किसी पार्टी के नाम के आधार पर नहीं, बल्कि चुनाव चिह्न के आधार पर छपते हैं। चूंकि पंचायत चुनावों में प्रत्याशियों की घोषणा नामांकन के बाद होती है, इसलिए पहले से बैलेट पेपर छापना आवश्यक होता है। इन बैलेट पेपरों को अलग-अलग समूहों के रूप में छापा जाता है, जैसे—छह चुनाव चिह्न वाला बैलेट, नौ चिह्न वाला बैलेट, 12 चिह्न वाला बैलेट आदि। चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या के अनुसार उपयुक्त बैलेट को आवश्यकतानुसार संशोधित (मॉडिफाई) कर मतदान के लिए उपलब्ध कराया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राम पंचायत में केवल पांच प्रत्याशी होते हैं, तो छह चुनाव चिह्न वाले बैलेट में से एक चिह्न को हटा दिया जाएगा और शेष चिह्नों वाला बैलेट मतदाताओं को दिया जाएगा।

    राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए कुल 144 चुनाव चिह्न निर्धारित किए हैं। इन चुनाव चिह्नों को पदों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

    • प्रधान पद के लिए 40 चुनाव चिह्न निर्धारित किए गए हैं। इनमें फावड़ा, बाल्टी, ड्रम, टोकरी, अनानास, कैमरा जैसे चिह्न शामिल हैं।

    • जिला पंचायत सदस्य के लिए भी 40 चिह्न तय किए गए हैं, जैसे- सीढ़ी, हथौड़ा, सैनिक, पेड़, सीटी, थर्मस आदि।

    • क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए 36 चुनाव चिह्न निर्धारित किए गए हैं, जिनमें नारियल, महिला पर्स, लौकी, पानी का जहाज, गुड़िया, टेबल लैंप, टॉर्च आदि चिह्न प्रमुख हैं।

    • ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य पद के लिए 18 चुनाव चिह्न तय किए गए हैं, जिनमें तरबूज, सेब, घड़ा, शंख, चम्मच, डमरू, आम आदि शामिल हैं।

    सभी इन चुनाव चिह्नों को इस तरह से चुना गया है कि वे आम जनमानस के लिए आसानी से पहचाने जा सकें और ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता बिना किसी भ्रम के अपने पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर सकें। आयोग का मानना है कि चिह्न आधारित मतदान प्रणाली से साक्षरता के स्तर की परवाह किए बिना हर मतदाता को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से मतदान का अवसर मिलता है।

    इस प्रकार, राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने हेतु व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है, ताकि लोकतंत्र की नींव माने जाने वाले इस महत्वपूर्ण चुनाव को सफल बनाया जा सके।

  • पंचायत चुनाव का विरोधाभास: वोट देंगे पर अपने गांव का नहीं चुन सकेंगे प्रधान

    पंचायत चुनाव का विरोधाभास: वोट देंगे पर अपने गांव का नहीं चुन सकेंगे प्रधान

    पंचायत चुनाव में निभाएंगे जिम्मेदारी, लेकिन नहीं डाल सकेंगे अपने गांव में वोट

    उत्तराखंड के 40 हजार से ज्यादा कर्मचारी नहीं कर पाएंगे प्रधान पद के लिए मतदान, अब तक नहीं मिली डाक मतपत्र की सुविधा

    उत्तराखंड में इस बार भी पंचायत चुनावों में ड्यूटी कर रहे हजारों अधिकारी-कर्मचारी अपने गांव के लिए प्रधान नहीं चुन पाएंगे। इसका कारण है — राज्य में पंचायत चुनावों के लिए डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) की सुविधा अब तक शुरू नहीं की गई है।

    राज्य में पंचायत चुनावों में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को उनके मताधिकार से वंचित कर देने वाली यह स्थिति कोई नई नहीं है। जबकि राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में वर्ष 2009 से ही पंचायत चुनाव में तैनात कर्मचारियों को डाक मतपत्र से मतदान की सुविधा दी जा रही है, उत्तराखंड में अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।

    एक लाख से अधिक होंगे चुनाव ड्यूटी में शामिल

    राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार पंचायत चुनाव के लिए कुल 95,909 अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। इनमें 11,849 पीठासीन अधिकारी, 47,910 मतदान अधिकारी, 450 सेक्टर, जोनल मजिस्ट्रेट व नोडल अधिकारी और करीब 35,700 सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। इनके अलावा चुनावी सामग्री और कर्मचारियों को पहुंचाने के लिए 5620 वाहनों का उपयोग होगा, जिनमें 2278 भारी और 3342 हल्के वाहन होंगे।

    इन कर्मचारियों में से लगभग 40,000 ऐसे हैं जिनके नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज हैं। लेकिन ड्यूटी पर होने के चलते ये अपने क्षेत्र में जाकर मतदान नहीं कर सकेंगे, और डाक मतपत्र की सुविधा न होने से उन्हें मतदान का अवसर भी नहीं मिलेगा।

    लोकसभा-विधानसभा चुनावों में मिलती है सुविधा, फिर पंचायत चुनावों में क्यों नहीं?

    यह स्थिति और भी विरोधाभासी हो जाती है जब देखा जाए कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ड्यूटी करने वाले अधिकारी, कर्मचारी, पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल व सेना के जवानों को डाक मतपत्र से मतदान करने की सुविधा मिलती है। लेकिन पंचायत चुनावों में, जहां कर्मचारियों की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, उन्हें यह हक नहीं मिलता।

    राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल ने बताया कि, “अब तक उत्तराखंड के इतिहास में पंचायत चुनावों में डाक मतपत्र की सुविधा लागू नहीं की गई है। यहां तक कि उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी यह व्यवस्था नहीं है। इसलिए फिलहाल यह संभव नहीं हो पा रहा है।”

    क्या यह मताधिकार का हनन नहीं?

    सरकारी कर्मचारियों के संगठन और कई सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को पहले भी उठाया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल उठता है कि क्या लोकतंत्र के इस सबसे बुनियादी अधिकार से हजारों कर्मचारियों को बार-बार वंचित रखना उचित है?

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर तैयारी हो तो डाक मतपत्र की सुविधा को पंचायत चुनावों में भी आसानी से लागू किया जा सकता है। इसके लिए आयोग को नीति स्तर पर फैसला लेना होगा।

    एक ओर जहां पंचायत चुनाव को लोकतंत्र की नींव माना जाता है, वहीं इसमें भाग लेने वाले हजारों कर्मचारी अपने ही गांव के लिए प्रधान चुनने से वंचित रह जाते हैं। यह विडंबना न केवल मतदाता अधिकारों पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि चुनाव व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण खामी को भी उजागर करती है।

  • पंचायत चुनाव से पहले विस्फोटक बरामद, तीन युवक दबोचे गए

    पंचायत चुनाव से पहले विस्फोटक बरामद, तीन युवक दबोचे गए

    पंचायत चुनाव से पहले सुरक्षा कामयाबी, 125 किलो डायनामाइट के साथ तीन युवक गिरफ्तार

    देहरादून। पंचायत चुनावों के मद्देनज़र दून पुलिस की सक्रियता रंग ला रही है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई में 125 किलो विस्फोटक सामग्री के साथ तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। यह बरामदगी थाना त्यूणी क्षेत्र में देर रात चेकिंग अभियान के दौरान हुई, जिसने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

    पुलिस के मुताबिक, 10 जुलाई की रात त्यूणी पुलिस द्वारा रूटीन चेकिंग के तहत हिमाचल प्रदेश नंबर की एक ऑल्टो कार (HP 09C 9788) को रोका गया। तलाशी के दौरान कार में पांच पेटियों में भरा 125 किलोग्राम डायनामाइट, दो डिब्बे डिटोनेटर, लाल रंग की तार का रोल और आसमानी रंग की बत्ती का बंडल बरामद हुआ।

    पूछताछ में वाहन सवार युवक डायनामाइट और विस्फोटक सामग्री ले जाने संबंधी कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इस पर पुलिस ने तीनों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया। बाद में उनके खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत थाना त्यूणी में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

    गिरफ्तार आरोपी:
    • रिंकू (37 वर्ष) – ग्राम बलंग, थाना ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

    • रोहित (19 वर्ष) – ग्राम रोणाहाट, थाना सिलाई, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश

    • सुनील (38 वर्ष) – ग्राम सैडोली, थाना कोटखाई, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

    बरामद सामग्री:
    • डायनामाइट – 125 किलोग्राम (5 पेटियां)

    • डिटोनेटर – 2 डिब्बे

    • लाल रंग की तार का रोल

    • आसमानी रंग की बत्ती का बंडल

    थाना त्यूणी प्रभारी विनय मित्तल, एसओजी देहात के जवान और अन्य पुलिसकर्मी इस कार्रवाई में शामिल रहे। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार युवकों से पूछताछ कर रही है कि इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक कहां और किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस विस्फोटक का इस्तेमाल पंचायत चुनाव के दौरान किसी असामाजिक गतिविधि या अवैध खनन कार्यों में तो नहीं होना था। उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश से आने-जाने वाले वाहनों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है।

    पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने कहा कि जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त और चेकिंग अभियान और अधिक सख्ती से जारी रहेंगे। इस बरामदगी को चुनावी माहौल में पुलिस की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

  • भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर पार्टी नेताओं को किया सक्रिय, जिलेवार प्रभारी घोषित

    भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर पार्टी नेताओं को किया सक्रिय, जिलेवार प्रभारी घोषित

    त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: भाजपा ने सक्रिय किया संगठन, घोषित किए जिला एवं ब्लॉक प्रभारी

    उत्तराखंड में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी को लेकर भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के निर्देशानुसार सभी जिलों में चुनाव प्रभारी नियुक्त कर दिए गए हैं, जो पार्टी के समर्थित प्रत्याशियों के लिए प्रभावी चुनाव रणनीति तैयार करेंगे और मैदान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इस रणनीति का उद्देश्य ब्लॉक प्रमुख सहित विभिन्न पंचायत स्तरों पर मजबूत पकड़ बनाना है।

    प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने बताया कि प्रदेश भाजपा संगठन ने चुनाव प्रभारी घोषित कर चुनाव प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया है। प्रत्येक जिला और ब्लॉक में नियुक्त प्रभारी पार्टी के बूथ स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक चुनाव की तैयारियों पर निगरानी रखेंगे, समन्वय करेंगे और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही वे चुनावी जनसंपर्क, प्रचार-प्रसार, प्रत्याशियों की फील्ड गतिविधियों तथा मतदाताओं से संवाद के लिए जिम्मेदार होंगे।

    जिला और ब्लॉक प्रभारी घोषित

    उत्तरकाशी जिले में नौगांव ब्लॉक प्रमुख के लिए डॉ. विजय बडोनी, पुरोला ब्लॉक के लिए सत्ये सिंह राणा, मोरी ब्लॉक के लिए नारायण सिंह चौहान, चिन्यालीसैंण के लिए जगत सिंह चौहान, भटवाड़ी के लिए राम सुंदर नौटियाल, और डूंडा के लिए धन सिंह नेगी को प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    चमोली जिले में दसौली ब्लॉक का प्रभारी राजकुमार पुरोहित, पोखरी के लिए हरक सिंह नेगी, ज्योतिर्मठ के लिए रामचंद्र गौड़, नंदा नगर के लिए समीर मिश्रा, नारायणबगड़ के लिए रघुवीर सिंह बिष्ट, थराली के लिए गजेंद्र सिंह रावत, देवल के लिए विनोद नेगी, गैरसैंण के लिए कृष्ण मणि थपलियाल, कर्णप्रयाग के लिए विक्रम भंडारी, अगस्त्यमुनि के लिए रमेश गड़िया, ऊखीमठ के लिए वाचस्पति सेमवाल, जखोली के लिए रमेश मैखुरी, भिलंगना के लिए अतर सिंह तोमर, कीर्तिनगर के लिए विनोद रतूड़ी, देवप्रयाग के लिए जोत सिंह बिष्ट, नरेंद्रनगर के लिए रविंद्र राणा, प्रतापनगर के लिए महावीर सिंह रांगड़, जाखणीधार के लिए सुभाष रमोला, चंबा के लिए दिनेश धने, थौलधार के लिए विनोद सुयाल, और जौनपुर के लिए खेम सिंह चौहान को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    देहरादून जिले में कालसी ब्लॉक प्रभारी के रूप में दिगंबर नेगी, चकराता के लिए भुवन विक्रम डबराल, विकासनगर के लिए यशपाल नेगी, सहसपुर के लिए संजय गुप्ता, रायपुर के लिए ओमवीर राघव, डोईवाला के लिए नलिन भट्ट, पौड़ी के लिए ऋषि कंडवाल, कोट के लिए वीरेंद्र रावत, क्लजीखाल के लिए सुधीर जोशी, खिर्सू के लिए मीरा रतूड़ी, थलीसैंण के लिए सुषमा रावत, पाबो के लिए यशपाल बेनाम, पोखड़ा के लिए जगमोहन रावत, एकेश्वर के लिए विकास कुकरेती, बीरोंखाल के लिए गिरीश पैन्यूली, यमकेश्वर के लिए मुकेश कोली, द्वारीखाल के लिए शमशेर सिंह पुंडीर, दुगड्डा के लिए संदीप गुप्ता, नैनीडांडा के लिए महावीर कुकरेती, जहरीखाल के लिए उमेश त्रिपाठी, और रिखणीखाल के लिए राजेंद्र अन्थवाल को प्रभारी बनाया गया है।

    चुनाव की तैयारियों को लेकर खास रणनीति

    भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने पंचायत चुनाव को लेकर एक समग्र रणनीति तैयार की है, जिसमें सोशल मीडिया प्रचार, स्थानीय जनसम्पर्क, बूथ स्तर पर प्रशिक्षण एवं संगठनात्मक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया गया है। चुनाव प्रभारी इन गतिविधियों का प्रबंधन कर पार्टी की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे। इसके अतिरिक्त वे विभिन्न जाति एवं समुदायों के बीच समन्वय बनाकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का भी कार्य करेंगे।

    प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से अपील की है कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ चुनावी तैयारियों में जुट जाएं और अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की मजबूत पैठ बनाने का हर संभव प्रयास करें। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पार्टी की सफलता से प्रदेश के विकास एवं जनहित की योजनाओं को और गति मिलेगी।

  • मुख्यमंत्री धामी बोले– नेतृत्व को सबकी जिम्मेदारी की पूरी जानकारी

    मुख्यमंत्री धामी बोले– नेतृत्व को सबकी जिम्मेदारी की पूरी जानकारी

    भाजपा में आंतरिक हलचल पर सीएम धामी का सख्त संदेश: “कौन क्या कर रहा है, नेतृत्व को सब पता है”

    देहरादून। उत्तराखंड भाजपा में संगठनात्मक बदलाव और आंतरिक समीकरणों की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के हालिया बयानों ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। दोनों नेताओं के वक्तव्यों को पार्टी के अंदरूनी हालात और भविष्य की रणनीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दरअसल, महेंद्र भट्ट का एक बयान हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। लगभग 36 सेकंड की इस वीडियो क्लिप में भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कार्यकाल के लिहाज से उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2027 का विधानसभा चुनाव सीएम धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और भाजपा पुनः सरकार बनाएगी, जिसमें धामी ही मुख्यमंत्री होंगे।

    भट्ट के इस बयान को संगठन के भीतर चल रही खींचतान के बीच एक साफ राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के चुनाव की पृष्ठभूमि में संगठन के भीतर कई गुट सक्रिय थे। लगभग आधा दर्जन नाम प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में चर्चा में थे, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्रीय और राजनीतिक गुटों का समर्थन मिल रहा था।

    भाजपा के भीतर एक बड़ा वर्ग चाहता था कि इस बार संगठन अध्यक्ष की जिम्मेदारी गढ़वाल के बजाय कुमाऊं क्षेत्र के किसी नेता को दी जाए, ताकि क्षेत्रीय संतुलन स्थापित किया जा सके। यह कोशिश 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक बदलाव और नई टीम के गठन की ओर एक कदम के रूप में देखी जा रही थी।

    सूत्र बताते हैं कि इस गुटीय खींचतान की गूंज दिल्ली तक भी पहुंची थी। प्रदेश के विभिन्न गुटों के नेता लगातार दिल्ली जाकर अपने-अपने पक्ष रख रहे थे। यहां तक कि कुछ नेताओं ने 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक नई टीम के गठन और बड़े बदलाव का बहुआयामी प्रस्ताव भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रखा था।

    ऐसे में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मंगलवार को प्रांतीय परिषद की बैठक में दिया गया बयान अहम माना जा रहा है। सीएम धामी ने कहा, “झूठी खबरें और भ्रामक प्रचार ज्यादा समय तक नहीं चलते। सच सामने आ ही जाता है। पार्टी का कौन नेता और कार्यकर्ता क्या कर रहा है, इसकी जानकारी नेतृत्व को होती है। पार्टी नेतृत्व काम के आधार पर ही मूल्यांकन करता है।”

    सीएम धामी का यह बयान साफ संकेत देता है कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर सबकुछ सहज नहीं था। संगठन में नेतृत्व को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चाएं और प्रयास चल रहे थे, जिन पर मुख्यमंत्री की नजर बनी हुई थी।

    महेंद्र भट्ट के पुनः अध्यक्ष बनने के पीछे भी मुख्यमंत्री धामी की स्पष्ट भूमिका मानी जा रही है। भट्ट के समर्थन में सीएम धामी का रुख पहले ही साफ हो चुका था, जिससे उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की अटकलें तेज हो गई थीं। अंततः पार्टी नेतृत्व ने भी भट्ट पर भरोसा जताते हुए उन्हें ही प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बयानों में संगठनात्मक स्थिरता बनाए रखने और संभावित गुटबाजी को नियंत्रित करने का संदेश छिपा है। हालांकि भाजपा के भीतर अगले कुछ महीनों में और बदलावों की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा रहा। पार्टी के भीतर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर मंथन जारी है और इस दौरान गुटीय समीकरणों का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

    पार्टी के सियासी गलियारों में पिछले 48 घंटों के भीतर मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बयानों के निहितार्थों पर चर्चा तेज है। भाजपा के क्षत्रपों के अगले कदम और नेतृत्व के संभावित फैसलों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में भाजपा अपनी आंतरिक एकजुटता किस तरह बनाए रखती है और भविष्य की रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।