Category: स्वास्थ्य

  • दून अस्पताल में आधा दर्जन चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार

    दून अस्पताल में आधा दर्जन चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने  किया विधिवत शुभारम्भ

    कहा, अस्पताल में आने वाले मरीजों को मिलेगी हर प्रकार की सुविधाएं

     

    देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में आधा दर्जन से अधिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया गया। जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, साथ ही उन्हें समय पर बेहरत चिकित्सा सुविधाएं भी मिल सकेंगी।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज राजकीय मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में आधा दर्जन से अधिक विभिन्न चिकित्सा सुविधाओं का विधिवत शुभारम्भ किया। जिसमें लेजर सर्जरी, नेक्स्ट जनरेशन ई-हॉस्पिटल, ओ.पी.डी. हेल्प डेस्क, कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड लेवल-2, ब्लड सेम्पलिंग व रिपोर्टिंग काउंटर का शुभारम्भ किया गया। इसके अलावा ओपीडी भवन के तृतीय तल पर मेडिसिन, रेस्पेटरी मेडिसिन, नेत्र विभाग एवं दन्त विभाग के लिये पृथक से ओ.पी.डी. पंजीकरण के अतिरिक्त काउंटर का शुभारम्भ किया गया, ताकि तृतीय तल पर आने वाले मरीजों को पंजीकरण के लिये भूतल पर न जाना पड़े। विभागीय मंत्री ने बताया कि दून अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुये लगातार सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में उपरोक्त सुविधाएं विस्तारित की गई हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा अस्पताल के वार्डों एवं परिसर में बेहतर सफाई व्यवस्था के निर्देश दिये गये हैं, साथ ही सफाई कर्मियों व अन्य चतुर्थ श्रेणी स्टॉफ के लिये ड्रेस कोड अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया है। इसी क्रम में सभी वार्डों में भर्ती मरीजों को बेडशीट प्रत्येक दिन बदलने के निर्देश दिये गये हैं, जिसमें प्रत्येक दिन के लिये अलग-अलग रंग की बेडशीट निर्धारित रहेगी।

    अस्पताल

    विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि अस्पताल के 50 वार्ड ब्वॉय को एम्स ऋषिकेश में एमटीएस का प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि मरीजों एवं तीमारदारों को व्यवहारपूर्वक गाइड कर सकें। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन नये भवन में शीघ्र ही स्टॉफ कैंटीन भी शुरू की जायेगी। कार्यक्रम में राजपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक खजान दास ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेहतर हुई हैं जिसका श्रेय निश्चित रूप से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह को जाता है। उन्होंने कहा कि आज दून मेडिकल कॉलेज में सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं हैं जहां पर प्रतिदिन तीन हजार से अधिक मरीज उपचार के लिये आते हैं। इससे पहले मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने दून अस्पताल में संचालित सुविधाओं का विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

    अस्पताल

    कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक दून अस्पताल डॉ. रविन्द्र सिंह बिष्ट, उप चिकित्सा अधीक्षक एन.एस.बिष्ट, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. के.सी. पंत, डॉ. सुशील ओझा, डॉ. राजीव कुशवाह, डॉ. अभय सिंह, डॉ. आर.पी. खंडूडी, वरिष्ट जनसम्पर्क अधिकारी महेन्द्र भंडारी, नीलम अवस्थी, निधि काला, मंडल अध्यक्ष भाजपा पूनम शर्मा, पार्षद रोहन चंदेल सहित नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टॉफ उपस्थित रहे।

    अस्पताल

    दून अस्पताल में खुलेंगे दो नये विभाग

    सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को लेकर प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सरकार ने दून मेडिकल कॉलेज में दो नये विभाग न्यूरोलॉजी व गैस्ट्रोलॉजी को खुलने का निर्णय लिया है, साथ ही कार्डियोलॉजी विभाग में शीघ्र ही एक और फैकल्टी तैनात की जायेगी।

    दून मेडिकल कॉलेज को मिलेंगे 300 नये नर्सिंग अधिकारी, स्वास्थ्य सेवाओं में होगा बड़ा सुधार

    राज्य के सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों में से एक, दून मेडिकल कॉलेज को जल्द ही 300 नए नर्सिंग अधिकारी मिलने जा रहे हैं, जिससे यहां की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से कुल 1314 नर्सिंग अधिकारियों का चयन किया गया है, जिनमें से 300 नर्सिंग अधिकारी विशेष रूप से दून मेडिकल कॉलेज में नियुक्त किए जाएंगे।

    31 मार्च से पहले नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद
    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन नर्सिंग अधिकारियों को 31 मार्च से पहले औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाएगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा, क्योंकि दून मेडिकल कॉलेज राज्यभर से आने वाले हजारों मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराता है। नए नर्सिंग स्टाफ की तैनाती से मरीजों को बेहतर देखभाल, तेज चिकित्सा प्रतिक्रिया और अधिक कुशल सेवा प्राप्त होगी।
    स्वास्थ्य सुविधाओं में होगा विस्तार
    यह कदम राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। लंबे समय से दून मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ की कमी महसूस की जा रही थी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल प्राप्त करने में कठिनाइयाँ हो रही थीं। अब नए नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति के बाद अस्पताल प्रशासन को स्टाफ की कमी से राहत मिलेगी और मरीजों के इलाज में और अधिक गुणवत्ता और तत्परता सुनिश्चित की जा सकेगी।
    राज्य सरकार का स्वास्थ्य सुधार पर जोर
    पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएँ चलाई हैं। इस संदर्भ में नए चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दून मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
    मरीजों को होगा सीधा लाभ
    अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को इस बदलाव से सीधा लाभ मिलेगा। नर्सिंग स्टाफ की संख्या बढ़ने से अस्पताल में मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे गंभीर रोगियों को समय पर आवश्यक उपचार मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन सेवाओं, सर्जिकल देखभाल और आईसीयू में भर्ती मरीजों को भी अधिक कुशल उपचार मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
    सरकार की प्राथमिकता – बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
    उत्तराखंड सरकार राज्य के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की भर्ती, अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई: 5 लाख का जुर्माना और 6 साल की सख्त कैद

    मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई: 5 लाख का जुर्माना और 6 साल की सख्त कैद

    होली से पहले मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई

    फूड सेफ्टी विभाग ने जारी किए नए दिशानिर्देश

    बॉर्डर पर कड़ा पहरा, सैंपलों के ऑनस्पॉट टेस्ट जारी, विजिलेंस सेल और सर्विलांस से कड़ी निगरानी शुरू
    मिलावटखोरी रोकने के लिए डिकॉय ऑपरेशन, एनफोर्समेंट और सर्विलांस का होगा सख्त इस्तेमाल

    देहरादून। होली के मौके पर आम जनता तक शुद्ध और सुरक्षित खाद्य उत्पाद पहुंचाने के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने प्रदेशभर में मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। खासतौर पर दूध, मावा, पनीर और खोया जैसे उत्पादों की कड़ी जांच की जा रही है। देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। देहरादून के आशारोड़ी बॉर्डर पर बाहरी राज्यों से आने वाले दूध और उसके उत्पादों की गहन जांच की जा रही है।

    खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त डा. आर राजेश कुमार ने बताया कि इस संबंध में एक विस्तृत SOP जारी कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों को मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य सैंपलों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले मिलावटखोरों तथा विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। इसमें 5 लाख रुपये तक का जुर्माना और 6 साल तक की कैद का प्रावधान है।

    आयुक्त डा. आर राजेश कुमार ने यह भी बताया कि प्रदेशभर में मिलावटखोरी को रोकने के लिए प्रशासन लगातार सघन अभियान चला रहा है। यह अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। अब होली के मद्देनजर विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इस मुहिम को और तेज कर दिया है।

    फूड सेफ्टी विभाग ने जारी की सख्त SOP, मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा

    फूड सेफ्टी विभाग ने मिलावटखोरों पर कार्रवाई के लिए सख्त SOP जारी की है। राज्यभर के सभी जिलाधिकारियों और प्रभारी/अभिहित अधिकारियों को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। डा. आर राजेश कुमार ने बताया कि खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम-2006 एवं नियम 2011 के तहत मिलावटी खाद्य पदार्थों के निर्माता, थोक विक्रेता, आपूर्तिकर्ता और फुटकर विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। होली अभियान के दौरान की गई प्रवर्तन कार्यवाहियों की गहन समीक्षा होगी, और उन खाद्य कारोबारियों को चिन्हित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो बार-बार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    डा. आर राजेश कुमार ने यह भी कहा कि आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा, और हर कार्य दिवस की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड को भेजी जाएगी। इस विस्तृत SOP में सभी आवश्यक पहलुओं को ध्यान में रखा गया है ताकि मिलावट पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

    प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया

    अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि होली के मद्देनजर मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी में ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी और पौड़ी शामिल हैं, जबकि दूसरी श्रेणी में चंपावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा को रखा गया है। इन संवेदनशील जिलों में सचल खाद्य लैब की व्यवस्था की गई है, जो त्योहारी सीजन के दौरान अचानक छापेमारी कर सैंपलिंग करेगी। इससे मिलावटखोरी पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    डिकॉय ऑपरेशन, एनफोर्समेंट और सर्विलांस से होगी कड़ी निगरानी

    अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि मिलावटखोरी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए डिकॉय ऑपरेशन, एनफोर्समेंट और सर्विलांस की मदद ली जाएगी। साथ ही, विभाग की ये टीमें उपभोक्ताओं को मिलावटी वस्तुओं की पहचान और उनसे बचाव के प्रति जागरूक भी करेंगी।

    अभिसूचना के आधार पर छापेमारी की जाएगी, और संभावित विरोध को देखते हुए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीमें पुलिस प्रशासन का सहयोग लेंगी। अपर आयुक्त ने यह भी बताया कि यह अभियान उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में भी संचालित किया जाएगा, ताकि पूरे प्रदेश में मिलावटखोरी पर सख्त नियंत्रण रखा जा सके।

    दूध से बने उत्पादों पर कड़ी निगरानी

    दूध से बने उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की जाएगी और जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। बिना लाइसेंस के उत्पादन और बिक्री करने वाले कारोबारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि सभी सैंपलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। यदि किसी सैंपल में मिलावट पाई जाती है, तो मिलावटी उत्पादों के निर्माण और बिक्री में शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    बॉर्डर इलाकों में भी मिलावटखोरों पर कड़ी निगरानी

    अपर आयुक्त एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि उत्तर प्रदेश से सटे बॉर्डर इलाकों में भी मिलावटखोरों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। विभाग ने सचल सैंपल टेस्ट वाहनों की व्यवस्था की है, जिससे ऑनस्पॉट सैंपल टेस्टिंग की जा सके। इससे मिलावटी उत्पादों की तुरंत पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    संयुक्त टीमों के साथ छापेमारी

    खाद्य संरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों पर कड़ा शिकंजा कसने के लिए संयुक्त टीमें गठित की हैं। ये टीमें जिलों के नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर प्रतिष्ठानों में छापेमारी कर रही हैं। विभाग ने विजिलेंस सेल का गठन किया है, जो शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई करती है।

    इसके अलावा, सर्विलांस के जरिए भी सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है। गौरतलब है कि होली के दौरान बड़े पैमाने पर मिलावट कर मिठाइयों में ज़हर घोलने वालों पर लगाम लगाने के लिए यह अभियान तेज कर दिया गया है।

    ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार में सबसे ज्यादा सैंपलिंग

    अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार से सबसे अधिक मिलावट की शिकायतें मिलती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इन जिलों में विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है, जहां खाद्य पदार्थों की सघन सैंपलिंग की जा रही है।

    सभी जिलों में फूड इंस्पेक्टर लगातार प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर रहे हैं, क्योंकि त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट का खतरा बढ़ जाता है। इस बार प्रदेशभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, ताकि मिलावटखोरों का नेटवर्क पूरी तरह खत्म किया जा सके।

  • स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश, स्वास्थ्य विभाग में 1300 पदों पर जल्द होगी भर्ती

    स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश, स्वास्थ्य विभाग में 1300 पदों पर जल्द होगी भर्ती

    स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश, प्रदेशभर में स्वास्थ्य विभाग में 1300 पदों पर होगी जल्द भर्ती

    देहरादून। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लंबे समय से रिक्त पड़े चतुर्थ श्रेणी के 1300 पदों को जल्द भरा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

    शुक्रवार को यमुना कॉलोनी स्थित शासकीय आवास में हुई विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएं।

    जिलावार रिक्त पदों का विवरण:

    • देहरादून – 98
    • हरिद्वार – 110
    • चमोली – 190
    • टिहरी – 78
    • पौड़ी – 49
    • पिथौरागढ़ – 137
    • ऊधमसिंह नगर – 76
    • नैनीताल – 356
    • अल्मोड़ा – 30
    • उत्तरकाशी – 46
    • रुद्रप्रयाग – 85
    • चंपावत – 42
    • बागेश्वर – 02

    स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इन भर्तियों से राजकीय चिकित्सालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। उन्होंने अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था को सुधारने, मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और टीबी मुक्त भारत व एनीमिया मुक्त भारत अभियान को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।

    स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए मंत्री ने दिए अहम निर्देश

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए जिला और उप-जिला अस्पतालों का गैप एनालिसिस किया जाए, ताकि जरूरतों के अनुसार आवश्यक संसाधनों की पूर्ति की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए, जिससे मरीजों को संक्रमण से बचाया जा सके।

    मंत्री ने यह भी कहा कि हर भर्ती मरीज के बेड की चादर प्रतिदिन बदली जाए, जिससे अस्पतालों में स्वच्छता बनी रहे। इसके अलावा, अस्पताल परिसरों में जागरूकता बढ़ाने के लिए होर्डिंग लगाए जाएं, ताकि लोग स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें।

    108 एंबुलेंस सेवा और कैंटीन संचालन में सुधार के निर्देश

    आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मंत्री ने 108 एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम न्यूनतम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी स्थिति में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी है, इसलिए एंबुलेंस सेवाओं को और अधिक सशक्त किया जाए।

    साथ ही, अस्पतालों में संचालित कैंटीनों की व्यवस्था को सुधारने के लिए भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके तीमारदारों को स्वच्छ, संतुलित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

    चिकित्सकों के लिए आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था

    स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को बेहतर कार्य-परिस्थितियां देने के लिए आवासीय सुविधाओं में सुधार किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चिकित्सकों के लिए सरकारी आवासों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे वे सहजता से अपनी सेवाएं दे सकें।

    स्वास्थ्य अभियानों को मिलेगी नई गति

    मंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान और एनीमिया मुक्त भारत अभियान को और अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन अभियानों को सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इनसे लाभान्वित हो सकें।

    इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, मिशन निदेशक एनएचएम स्वाति भदौरिया, अपर स्वास्थ्य निदेशक आनंद श्रीवास्तव, प्रभारी स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    बैठक में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मिशन निदेशक स्वाति भदौरिया, अपर स्वास्थ्य निदेशक आनंद श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिकारी अनुराधा पाल, प्रभारी स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा और डॉ. अजीत मोहन जौहरी समेत स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य उच्चाधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

  • नर्सिंग अधिकारियों को दो सप्ताह के अंदर मिलेगी नियुक्ति

    नर्सिंग अधिकारियों को दो सप्ताह के अंदर मिलेगी नियुक्ति

    पांच मेडिकल कॉलेजों व कैंसर संस्थान में रिक्त पदों के सापेक्ष होंगे तैनात

    रिक्त पदों को भरने के लिए तेज हुई भर्ती प्रक्रिया

    देहरादून। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड से चयनित 1314 नर्सिंग अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर नियुक्ति दे दी जायेगी। इन सभी नर्सिंग अधिकारियों को प्रदेश के पांच राजकीय मेडिकल कॉलेजों व राजकीय कैंसर संस्थान हल्द्वानी में रिक्त पदों के सापेक्ष तैनात किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को सभी औचारिकताएं पूर्ण करने के निर्देश दे दिये गये हैं।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य के पांच राजकीय मेडिकल कॉलेजों को दो सप्ताह के भीतर नर्सिंग अधिकारी मिल जायेंगे। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को नियुक्ति प्रक्रिया की सभी औचारिकताएं पूर्ण करने के निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग अधिकारियों के स्वीकृत पद लम्बे समय से रिक्त पड़े हैं, जिनमें राजकीय मेडिकल कॉलेज देहरादून में 323, हल्द्वानी 320, रूद्रपुर 310, अल्मोड़ा 207 और श्रीनगर में 300 पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, राजकीय कैंसर संस्थान हल्द्वानी में भी 64 पद स्वीकृत हैं। इन सभी स्वीकृत पदों के सापेक्ष सेवा चयन बोर्ड से चयनित नर्सिंग अधिकारियों को तैनात किया जायेगा।

    विभागीय मंत्री ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती का अधियाचन भेजा था। सेवा चयन बोर्ड ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर 1314 नर्सिंग अधिकारियों का अंतिम चयन परिणाम सौंप दिया है। वर्तमान में इनका दो स्तरों पर सत्यापन जारी है, लेकिन सरकार ने शीघ्र तैनाती का निर्णय लिया है। सत्यापन प्रक्रिया बाद में भी जारी रहेगी, और यदि किसी अभ्यर्थी में गड़बड़ी पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

    नर्सिंग

    विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने अधिकारियों को दिये शीघ्र नियुक्ति के निर्देश

    डॉ. रावत ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता मेडिकल कॉलेजों में जल्द से जल्द नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति देना है ताकि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सुविधाओं में और अधिक सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारु रूप से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि नर्सिंग अधिकारी जल्द से जल्द अपनी सेवाएं दे सकें और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

    इसके अलावा, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नर्सिंग अधिकारियों की तैनाती के बाद अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। इससे न केवल मरीजों को उचित देखभाल मिलेगी बल्कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली में भी मजबूती आयेगी। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि चयनित नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और उन्हें निर्धारित समय के भीतर अपने पदों पर तैनात कर दिया जाए।

    चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार राज्य में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयासरत है और भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है और इस दिशा में सरकार का प्रयास है कि मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की कमी को जल्द से जल्द दूर किया जाए ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    राज्य सरकार का यह निर्णय स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल राज्य के मेडिकल कॉलेजों की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा बल्कि यह मरीजों के लिए भी राहतकारी सिद्ध होगा। नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति से अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और भी ऊंचा होगा और मरीजों को बेहतर देखभाल मिलेगी। सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लगातार निगरानी कर रही है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता न हो।

    इस प्रकार, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से न केवल नर्सिंग अधिकारियों को रोजगार मिलेगा, बल्कि मरीजों को भी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी। सरकार की यह पहल चिकित्सा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करेगी और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक उन्नत करने के लिए सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी।

     

  • मेडिकल कॉलेजों को मिलेगी 156 नई फैकल्टी

    मेडिकल कॉलेजों को मिलेगी 156 नई फैकल्टी

    प्रोफेसर के 53 व एसोसिएट प्रोफेसर के 103 रिक्त पद भरे जायेंगे

    देहरादून। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित मेडिकल कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर तथा प्रोफेसरों के रिक्त 156 पदों पर शीघ्र ही फैकल्टी तैनात कर दी जायेगी। जिससे राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों को फैकल्टी की कमी से काफी राहत मिलेगी।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज बजट सत्र के बीच अपने कार्यालय कक्ष में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ राजकीय मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न संवर्ग के रिक्त पदों की समीक्षा की। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की ओर राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को मार्च 2024 में प्रोफेसरों एवं एसोसिएट प्रोफेसरों के रिक्त 153 पदों का अधियाचन भेजा था। जिस पर चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस दौरान विभागीय मंत्री ने सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष से वार्ता कर शीघ्र मेडिकल फैकल्टी उपलब्ध कराने को कहा। जिस पर बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा एक माह के भीतर फैकल्टी के चयन की सूची जारी करने की बात कही। डॉ. रावत ने बताया कि सेवा चयन बोर्ड से चयनित फैकल्टी की सूची मिलते ही शीघ्र विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तैनाती कर दी जायेगी। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से बोर्ड को भेजे गये अधियाचन में प्रोफेसरों के 53 तथा एसोसिएट प्रोफेसर के 103 पद शामिल है जिनमें एनेस्थीसिया, एनाटॉमी, बायोकैमिस्ट्री, बल्ड बैंक, कम्युनिटी मेडिसिन, डेंटिस्ट्री , डर्मेटोलॉजी, इमरजेन्सी मेडिसिन, फोरेन्सिक मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑब्स्टेट्रीक एंड गायनी, ऑप्थैलमोलॉजी, आर्थापेडिक्स, ओटो-राइनो-लेरिंगोलॉजी, पैथोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, फार्माकोलॉजी, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, फिजियोलॉजी, साईकाइट्री, रेडियोडायग्नोसिस, रेडियोथेरपी तथा रेस्पीरेट्री मेडिसिन विभाग के पद हैं। बैठक में मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के तहत हल्द्वानी, देहरादून और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में न्यूरो फिजिशियन तथा गैस्ट्रोलॉजिस्ट के पद सृजित करने, पीजी की सीट बढ़ाने के लिये प्रस्ताव शासन को भेजन के निर्देश अधिकारियों को दिये गये। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पैरामेडिकल, टैक्नीशियन व अन्य नॉन मेडिकल पदों को भी शीघ्र भरने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये हैं।

    बैठक में अपर सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अनुराधा पाल, अपर सचिव वित्त अमिता जोशी, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो. आर.एस. बिष्ट, प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेज प्रो गीता जैन, प्राचार्य हरिद्वार मेडिकल कॉलेज प्रो. रंगील सिंह रैना सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा, 3311 करोड़ 54 लाख 04 हजार का बजट स्वीकृत

    स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा, 3311 करोड़ 54 लाख 04 हजार का बजट स्वीकृत

    ”सबके लिये स्वास्थ्य“ की परिकल्पना को मिलेगी मजबूती

    देहरादून। उत्तराखण्ड़ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं तक आम जनमानस की पहुंच को सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की विकासोन्मुख नीतियों के अन्तर्गत ”सबके लिये स्वास्थ्य“ की परिकल्पना को और बेहतर ढंग से धरातल पर उतारने के लिए बजट में भी खास प्रावधान रखे गए हैं। आज पेश हुए बजट में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग हेतु 3311 करोड़ 54 लाख 04 हजार का बजट रखा गया है।

    सबके लिए स्वास्थ्य एक बड़ा लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए सरकार द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जो बजट प्रावधानित किया है वह निसंदेह ही आम जन की बेहतर स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
    विभाग को मिले कुल बजट की बात करें तो राजस्व मद में 3226 करोड़ 21 लाख व पॅूजीगत मद 85 करोड़ 33 लाख 04 हजार का प्रावधान है।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वित्तीय वर्ष में विभागीय निर्माण कार्यों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए 5.00 करोड़, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण को 10.00 करोड, उपजिला चिकित्सालयों के निर्माण हेतु 25.00 करोड़, आवासीय/अनावासीय भवनों का निर्माण 27.00 करोड़ का बजट रखा गया है। वहीं मानसिक चिकित्सालय हेतु 17.82 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

    प्रदेश प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख का निशुल्क उपचार देने वाली अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड़ योजना के लिए 550 करोड़ तथा राज्य सरकार स्वास्थ्य येाजना (पेंशन) के लिए 10 करोड़ का बजट है। इसके अलावा राज्य में प्रसूता के लिए ईजा-बोई शगुन योजना 14 करोड़, राज्य सरकार द्वारा निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) 17 करोड़ 99 लाख, आशा कार्यकत्रियों/पार्ट टाईम दाईयों को मानदेय हेतु 51 करोड़ 32 लाख, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एन0एच0एम0) 761 करोड़ 90लाख, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत 54 करोड़ 71 लाख का बजट रखा गया है।

    रजत जयंती वर्ष के अवसर पर पारित हुए इस बजट से साफ है कि प्रदेश सरकार जन स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। बजट में रखे प्राविधानों से व्यवस्थाएं और अधिक दुरूस्त होंगी।

    राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिये प्रतिबद्ध है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिये बजट में नई योजनाओं को शामिल करने के साथ बजट वृद्धि की है ताकि प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से सुलभ हो सके। – डॉ धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

  • स्वास्थ्य विभाग के लिये रणनीति बनायेगा एसएचएसआरसी : डॉ. धन सिंह रावत

    स्वास्थ्य विभाग के लिये रणनीति बनायेगा एसएचएसआरसी : डॉ. धन सिंह रावत

    देहरादून। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं गुणवत्ता सुधार को दृष्टिगत रखते हुये राज्य सरकार द्वारा स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर (एसएचएसआरसी) का गठन किया गया है। एसएचएसआरसी न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की ठोस रणनीति बनायेगा बल्कि तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेगा। इसके लिये स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिये गये हैं।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि भारत सरकार की तर्ज पर प्रदेश में स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर (एसएचएसआरसी) का गठन किया है, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार, पारदर्शिता, गुणवत्ता सुधार एवं वितरण प्रणाली को मजबूत करेगा। इसके अलावा एसएचएसआरसी प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सुगमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशिक्षण, कौशल विकास, रिपोर्टिंग और फीडबैक प्रणाली को भी विकसित करेगा।

    डॉ. रावत ने बताया कि संक्रमण की रोकथाम और सुरक्षा के लिये एसएचएसआरसी समय-समय पर प्रोटोकॉल तैयार करेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके अलावा जिला एवं ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य इकाईयों की चुनौतियों का मूल्यांकन कर प्रत्येक माह विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सुझावों के साथ उपलब्ध करायेगा।

    उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने सहित टीबी उन्मूलन जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन सहित अनुसंधान व नवीन प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल में एसएचएसआरसी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। इसके लिये चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, मिशन निदेशक एनएचएम के उच्चाधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर एसएचएसआरसी के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दे दिये गये हैं। ताकि प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करने और नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध की जा सके।

  • डॉक्टरों के रिटायरमेंट की आयु सीमा पांच साल बढ़ाई, अब 65 वर्ष की आयु तक दे सकेंगे सेवाएं

    डॉक्टरों के रिटायरमेंट की आयु सीमा पांच साल बढ़ाई, अब 65 वर्ष की आयु तक दे सकेंगे सेवाएं

    राज्य के लगभग 550 विशेषज्ञ डाक्टरों को मिलेगा सेवा लाभ

     

    देहरादून। प्रदेश सरकार ने विशेषज्ञ डाक्टरों को नये साल का तोहफा दिया है। सरकार ने विशेषज्ञ डाक्टरों को सेवा लाभ देते हुए उनके सेवानिवृत्त की आयु सीमा बढ़ा दी है। विशेषज्ञ डाक्टर अब 65 वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। पहले यह आयु सीमा 60 वर्ष थी। स्वास्थ्य सचिव डा. आर राजेश कुमार ने कहा कि आयु सीमा में पांच साल की बढ़ोतरी के आदेश जारी कर दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि आयु सीमा में वृद्धि किये जाने से प्रदेश के 550 विशेषज्ञ डाक्टरों को लाभ मिलेगा। सरकार के इस फैसले से प्रदेश में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी दूर हो सकेगी और सुदूर ग्रामीणों को भी विशेषज्ञ डाक्टरों का लाभ मिल सकेगा।

    स्वास्थ्य सचिव डा. आर राजेश कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में तेजी से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा रहा है। ऐसे में सरकार ने विशेषज्ञ डाक्टरों को पांच साल की सेवावृद्धि देने का फैसला किया है। उन्हांेने बताया कि सेवा लाभ केवल उन विशेषज्ञ डाक्टरों को मिलेगा जो अस्पतालों में मरीजों को अपनी सेवाएं देंगे।

    स्वास्थ्य सचिव डा. आर राजेश कुमार के अनुसार 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के पश्चात किसी भी विशेषज्ञ चिकित्सक को प्रशासनिक पद एवं वित्तीय दायित्वों का प्रभार नहीं दिया जायेगा, एवं उनकी तैनाती मुख्य परामर्शदाता के रूप में ढांचे के तहत उनकी विधा के उपलब्ध रिक्त पदों पर की जायेगी। उन्होंने बताया कि ऐसे चिकित्सा अधिकारियों को अग्रेत्तर पदोन्नति प्रदान नहीं की जायेगी। चिकित्सक को वेतन वृद्धि एवं अन्य सेवा लाभ, सेवा के दौरान एवं सेवानिवृत्ति पर राजकीय कार्मिकों की भांति ही नियमानुसार अनुमन्य होंगे।

  • उत्तराखंड में फिर बदलेगा मौसम, 4 फरवरी को बारिश-बर्फबारी के आसार

    उत्तराखंड में फिर बदलेगा मौसम, 4 फरवरी को बारिश-बर्फबारी के आसार

    उत्तराखंड में मौसम मे एक बार फिर बदलाव देखने को मिलेगा. मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल की माने तो पश्चिम विक्षोप सक्रिय होने से 3 फरवरी की रात से प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। जबकि 4 फरवरी को उच्च हिमालय क्षेत्र में 3000 मीटर से ऊपर बर्फबारी हो सकती है।

    वहीं निचले इलाकों में बिजली चमकने के साथ गर्जना की संभावना है। जबकि देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, उधम सिंह नगर और नैनीताल में हल्की बारिश हो सकती है। 5 फरवरी को भी प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा लेकिन 6 फरवरी के बाद मौसम शुष्क रहेगा।

  • आयुष्मान योजना से अपात्र लाभार्थियों की छंटनी शुरू, विभाग सख्त

    आयुष्मान योजना से अपात्र लाभार्थियों की छंटनी शुरू, विभाग सख्त

    स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान योजना का लाभ ले रहे अपात्र लोगों की छंटनी शुरू कर दी है। आयुष्मान निदेशक विनोद टोलिया ने बताया कि बड़े पैमाने पर कई लोगों के राशन कार्ड निरस्त हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वे योजना का लाभ ले रहे थे।

    डॉ. टोलिया ने बताया कि विभाग प्रतिदिन डेटा की जांच कर रहा है और खाद्य विभाग से प्राप्त राशन कार्डों का मिलान किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड निरस्त किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस कदम से राज्य सरकार पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा और सही लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड बनाने का मौका मिलेगा।