Category: स्वास्थ्य

  • “खुशियों की सवारी” सेवा मातृत्व देखभाल की नई पहल

    “खुशियों की सवारी” सेवा मातृत्व देखभाल की नई पहल

    छात्राओं के हीमोग्लोबिन लेवल की नियमित जानकारी रिपोर्ट कार्ड में अंकित होगी

    जिलाधिकारियों जिलों में एनीमिया की नियमित टेस्टिंग और रिपोर्टिंग की जानकारी अपलोड करवानी होगी

    देहरादून। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि राज्यभर में “खुशियों की सवारी” सेवा की सुविधा का उपयोग प्रसव के समय के साथ ही गर्भवती महिलाओं द्वारा सरकारी अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांचों (ANC ) के लिए भी नि:शुल्क किया जा सकता है ।
    मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को इस जनहितकारी जानकारी के व्यापक प्रचार प्रसार के निर्देश दिए हैं ताकि राज्य की आधिकारिक गर्भवती महिलाएं विशेषकर दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली साधनविहीन गर्भवती महिलाएं इसका लाभ उठा सके |

    सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों के साथ Pulse Anemia Mega Campaign के संबंध में बैठक लेते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी जिलाधिकारियों को एनीमिया को समाप्त करने के लिए एनएचएम द्वारा तैयार किए गए एक्शन प्लान के महिला कल्याण एवं बाल विकास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की सहायता से प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं | राज्य में 15 से 49 वर्ष के मध्य की 46.4% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं, जबकि इस मामले में राष्ट्रीय औसत 50.4% है ।
    मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने स्वास्थ्य विभाग को सभी गर्भवती महिलाओं के गर्भावस्था के पहले चरण में ही एनीमिया आइडेंटिफिकेशन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं |

    इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग को विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के उपस्थिति रजिस्टर में ही अनिवार्य रूप से प्रत्येक माह जांच के बाद हीमोग्लोबिन लेवल भी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं | उपस्थिति रजिस्टर में एचबी लेवल की जांच व जानकारी अंकित करने की जिम्मेदारी प्रिंसिपल के निर्देश पर क्लास टीचर की होगी, जिसमें सी एच ओ द्वारा उनकी मदद की जाएगी | इसके बाद एनीमिया से ग्रस्त छात्राओ के उपचार की विशेष व्यवस्था, मॉनिटरिंग व ट्रैकिंग भी निकटस्थ CHO द्वारा की जाएगी | छात्राओ के हीमोग्लोबिन लेवल की नियमित जानकारी रिपोर्ट कार्ड में अंकित कर अभिभावकों को दी जाएगी | सीएस ने स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में एक पीरियड स्वास्थ्य जानकारी पर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं |

    मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी जिलाधिकारियों को जिलों में विशेषकर गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के नियमित टेस्टिंग, रिपोर्टिंग तथा इस कार्य के लिए आईसीडीएस व एएनएम के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं | मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को टीबी मुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य को जल्द पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के एक्शन प्लान पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं |

    बैठक में सचिव डॉ आर राजेश कुमार, अपर सचिव श्रीमती स्वाति भदौरिया सहित स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी मौजूद रहे |

  • सूबे में दुरूस्त होगी 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवाः डॉ. धन सिंह रावत

    सूबे में दुरूस्त होगी 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवाः डॉ. धन सिंह रावत

    एम्बुलेंस के बेड़े में होगी वृद्धि, जनपदों में रहेगी बैकअप व्यवस्था

    कहा, जरूरतमंद व्यक्ति को मिलेगी एम्बुलेंस के लोकेशन की सूचना

    देहरादून । सूबे में स्वास्थ्य सेवा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाली 108 आपातकालीन सेवा को और अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जायेगा। प्रत्येक जनपद में एम्बुलेंस की बैकअप व्यवस्था रहेगी, इसके लिये 108 एम्बुलेंस के बेड़े में वृद्धि की जायेगी। इसके अलावा एम्बुलेंस का पहाड और मैदानी क्षेत्रों में अलग-अलग रिस्पॉस टाइम तय किया गया है, साथ ही दुर्घटना के दौरान जरूरतमंद व्यक्ति को एम्बुलेंस के लोकेशन की सटीक जानकारी दी जायेगी। नियत समय सीमा के भीतर सर्विस उपलब्ध न करने वाले 108 एम्बुलेंस वाहनों पर कड़ी पैनाल्टी लगाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज शासकीय आवास पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की बैठक ली। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को 108 आपातकालीन सेवा को सुदृढकर आम जनमानस के बीच सुलभ बनाने के निर्देश दिये। इसके साथ ही उन्होंने 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस की जवाबदेही तय कर रिस्पॉस टाइम न्यून से न्यून करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में एम्बुलेंस का रिस्पॉस टाइम 18 से 20 मिनट जबकि मैदानी इलकों में यह समय 15 मिनट नियत किया जायेगा, साथ ही जरूरतमंद व्यक्ति को एम्बुलेंस के सटीक लोकेशन की सूचना भी उपलब्ध कराई जायेगी ताकि एम्बुलेंस के आने की जानकारी मिल सके। डॉ. रावत ने कहा कि रिस्पॉस टाइम की तय समय सीमा के भीतर एम्बुलेंस ने मिलने पर सेवा प्रदाता के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर तीन गुना पैनाल्टी लगाई जायेगी। इसके अलावा एम्बुलेंस ड्राइवर या मेडिकल स्टॉफ द्वारा मरीजों के साथ बदतमीजी की जाती है तो ऐसी परिस्थिति में सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जायेगी। विभागीय मंत्री ने कहा कि मरीजों को चिकित्सालय में एक ही एम्बुलेंस से पहुंचाया जायेगा। अब रास्ते में अलग-अलग एम्बुलेंस नहीं बदलनी पडेगी। इसके लिये उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक जनपद में बैकअप में एम्बुलेंस की व्यवस्था रखने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 108 आपातकालीन सेवा के तहत प्रदेशभर में 272 एम्बुलेंस काम में लाई जा रही है, जिनकी संख्या को बढ़ा कर 334 किया जायेगा ताकि जिन विकासखंडों में एम्बुलेंस की कमी है वहां एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। डॉ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को 108 आपातकालीन सेवा में प्रभावी सुधार लाकर आम लोगों के बीच इस सेवा की साख फिर से बनाने को कहा।

    बैठक में बैठक में प्रभारी महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. मनोज उप्रेती, संयुक्त निदेशक तुहिन कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • डा० ओंकार सिंह उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विवि के कुलपति की अतिरिक्त जिम्मेदारी

    डा० ओंकार सिंह उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विवि के कुलपति की अतिरिक्त जिम्मेदारी

    देखें आदेश, उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विवि के कुलपति का इस्तीफा स्वीकार

    आदेश

    डा० मदन लाल ब्रह्म भट्ट, वर्तमान कुलपति, हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, देहरादून द्वारा अन्यत्र नियुक्ति होने के फलस्वरूप हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति पद से दिया गया त्यागपत्र एततद्वारा स्वीकार किया जाता है।

    नये कुलपति की नियुक्ति होने तक के लिए अन्तरिम व्यवस्था हेतु हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के मूल अधिनियम-2014 यथा संशोधित अधिनियम-2020 की धारा-10 की उपधारा (7) के अन्तर्गत डा० ओंकार सिंह, कुलपति-वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून को उनके पद के कार्य दायित्वों के साथ-साथ कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 06 माह अथवा नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक, जो भी पहले हो, हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति के कार्य दायित्वों के निर्वहन हेतु नियुक्त किया जाता है।

  • जिला चिकित्सालय पौड़ी की व्यवस्थाएं चाक-चौबंदः डॉ. धन सिंह रावत

    जिला चिकित्सालय पौड़ी की व्यवस्थाएं चाक-चौबंदः डॉ. धन सिंह रावत

    कहा, 7 विशेषज्ञ चिकित्सक सहित 18 डॉक्टरों को किया गया तैनात

    34 नर्सिंग ऑफिसर और पैरामेडिकल स्टॉफ ने भी सम्भाला मोर्चा

    पौड़ी/देहरादून । पीपीपी मोड़ (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) से हटने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के पास आते ही जिला चिकित्सालय पौड़ी की व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर दी गई है। जिला अस्पताल में प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों, डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती कर दी गई है। जिससे अस्पताल में सभी चिकित्सकीय सुविधाएं सुचारू हो गई है। इसके अलावा आवश्यकतानुसार रोटेशन के आधार पर चिकित्सकों की तैनाती भी अस्पताल में की गई है ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की कोई असुविधा न हो और उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सुविधा मुहैया की जा सके।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि जिला चिकित्सालय पौड़ी में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर दी गई है। उन्होंने बताया कि आमजन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर जिला अस्पताल को पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप (पीपीपी मोड़) से हटा कर स्वास्थ्य विभाग ने अपने हाथों में ले लिया है और इसका संचालन अब स्वास्थ्य विभाग खुद करेगा। उन्होंने कहा कि अंडर टेकिंग प्रक्रिया के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिकता के तहत 7 विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही 18 चिकित्सकों की तैनाती जिला अस्पताल में कर दी है। जिसमें सर्जन, पेडियाट्रिशन, गायनेकोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट और ऑप्थलमोलॉजिस्ट शामिल है। इन सभी चिकित्सकों ने अस्पताल में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इसके अलावा 34 नर्सिंग ऑफिसर्स सहित लैबटेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन सहित अन्य मेडिकल स्टॉफ ने जिला अस्पताल में मोर्चा सम्भाल लिया है। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती से अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू कर दी गई है। जिसके साथ ही अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हो गई है। विभागीय मंत्री ने बताया कि पीजी कर चुके चार विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती अस्पताल में की जायेगी जिसकी प्रक्रिया शासनस्तर पर गतिमान है। इसके अलावा आवश्यकतानुसार रोटेशन के आधार पर आस-पास के चिकित्सालयों से चिकित्सकों की ड्यूटी जिला अस्पताल में लगाई जायेगी। अगर जरूरत पड़ी तो एनएचएम के तहत वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती अस्पताल की जायेगी, जिसके लिये स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार मजबूत करने में जुटी है, जिला अस्पताल पौड़ी सहित प्रदेश के किसी भी अस्पताल में कोई कमी नहीं होने देंगे। डॉ. रावत ने कहा कि सरकार चिकित्सकों सहित मेडिकल स्टॉफ की कमी को दूर करने में जुटा है। इसके लिये विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत विभिन्न अस्पतालों में लम्बे समय से रिक्त चल रहे चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ व एएनएम के पदों पर बड़े पैमाने पर नियुक्ति की है। जिसका फायदा प्रदेश के आम लोगों को मिल रहा है।

  • विभिन्न अस्पतालों से लम्बे गयाब चल रहे 158 चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त

    विभिन्न अस्पतालों से लम्बे गयाब चल रहे 158 चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त

    चिकित्स स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत विभिन्न अस्पतालों से लम्बे गयाब चल रहे 158 चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। जिसकी मंजूरी राज्य सरकार ने दे दी है। राजकीय चिकित्सलयों में तैनात इन डाक्टरों की अनुपस्थिति से जहां स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा रही थी वहीं पर्वतीय व दूरस्थ क्षेत्रों में मरीजों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

    प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार की दिशा में सरकार ने बड़े फैसले लेने शुरू कर दिये हैं। एक तरफ जहां सरकार चिकित्सालयों में चिकित्सा सुविधाओं को अपडेट कर रही है वहीं दूसरी ओर विभाग में लम्बे समय से गायब चल रहे चिकित्सकों व अन्य कार्मिकों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में प्रदेशभर के विभिन्न राजकीय चिकित्सालयों में तैनात प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के 158 चिकित्सकों को बर्खास्त कर दिया गया है। इन सभी चिकित्सकों के बर्खास्तगी प्रस्ताव पर सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है। ये सभी चिकित्सक लम्बे समय से अस्पतालों से बिना बताये गायब चल रहे थे। इनमें से 60 चिकित्सकों ने कभी नौकरी ज्वाइन नहीं की, 59 चिकित्सक बिन बताये अनुपस्थित हैं जबकि 39 चिकित्सक परिविक्षा अवधि से ही गयाब हैं। जिनमें अल्मोड़ा जनपद के 12 चिकित्सक, नैनीताल, चम्पावत व उत्तरकाशी के 11-11, ऊधमसिंह नगर 21, देहरादून व बागेश्वर 9, पिथौरागढ़ 5, हरिद्वार 6, रूद्रप्रयाग 7, पौड़ी गढ़वाल 10 तथा टिहरी गढ़वाल व चमोली के 13-13 चिकित्सक शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेशभर के विभिन्न चिकित्सालयों से गयाब चल रहे 20 और चिकित्सकों को भी बर्खास्त किया गया है। लम्बे समय से अनुपस्थित चल रहे इन चिकित्सकों की वहज से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार न मिलने से इन्हें जिला अस्पताल या फिर बड़े शहरों के निजी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ रहा है। इसके अलावा स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों के द्वारा गायब चिकित्सकों की शिकायतें सरकार को मिल रही थी। लिहाजा सरकार ने कठोर निर्णय लेकर इन सभी अनुपस्थित चिकित्सकों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई अमल में लाई। वहीं सरकार का कहना है कि इन चिकित्सकों के रिक्त पदों को शीघ्र भर दिये जायेंगे। इसके लिये जल्द ही उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से नई भर्ती निकाली जायेगी।

    स्वास्थ्य विभाग में लम्बे समय से गायब चल रहे 158 चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। ये सभी चिकित्सक बिना बताये विभाग से अनुपस्थित चल रहे थे। जिसका प्रतिकूल प्रभाव प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा था। सरकार लापरवाह व गैरहाजिर चिकित्सकों को बकसने के कतई मूड में नहीं है भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई अमल में लायी जायेगी। हमारा मकसद प्रदेश में आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है जिसके लिये सरकार लगातार प्रयासरत है।- *डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

  • प्रत्येक अस्पताल में अनिवार्य रूप से लगेगी बायोमेट्रिक उपस्थिति

    प्रत्येक अस्पताल में अनिवार्य रूप से लगेगी बायोमेट्रिक उपस्थिति

    लम्बे समय से गैरहाजिर चिकित्सकों पर होगा एक्शन

    अविकल उत्तराखंड 

    देहरादून। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधारीकरण के दृष्टिगत जनपदवार समीक्षा की जायेगी। जिसकी रिपोर्ट एक माह के भीतर शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में लम्बे समय से अनुपस्थित चल रहे चिकित्सकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने तथा प्रत्येक चिकित्सा इकाईयों में चिकित्सकों समेत मेडिकल कार्मिकों व अन्य स्टॉफ की बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिये है।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज शासकीय आवास पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की संयुक्त बैठक ली। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने जनपदवार राजकीय चिकित्सालयों में चिकित्सकों एवं अन्य मेडिकल स्टॉफ का गैप एनालिसिस करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये, जिसकी रिपोर्ट एक माह के भीतर शासन को उपलब्ध कराने को कहा। डॉ. रावत ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में लम्बे समय से गैरहाजिर चल रहे चिकित्सकों के विरूद्ध बर्खास्तगी की कार्यवाही के निर्देश भी दिये। साथ ही उन्होंने विभागीय अनुमति के बिना पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने गये चिकित्सकों के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार चिकित्सालयों में चिकित्सकों की नियुक्ति करने में जुटी हैं वहीं दूसरी ओर चिकित्सक अस्पतालों से नदारद हैं। ऐसे चिकित्सकों व मेडिकल कार्मिकों को कतई भी बख्शा नहीं जायेगा और उनके खिलाफ ठोस कार्यवाई अमल में लाई जायेगी। विभागीय मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक राजकीय चिकित्सा इकाई में चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, फार्मासिस्टों, मेडिकल स्टॉफ सहित अन्य स्टॉफ की उपस्थिति सुचिश्चित करने के लिये बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिये। उन्होंने का कि बयोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही कार्मिकों का वेतन आहरित किया जायेगा। इसके अलावा उन्होंने बैठक में उप जिला अस्पतालों की डीपीआर शीघ्र तैयार कर शासन को उपलब्ध कराने को अधिकारियों को कहा।

    बैठक में महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तारा आर्य, प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेज डॉ. गीता जैन, निदेशक स्वासथ्य डॉ. सुनीता टम्टा, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर.एस. बिष्ट सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • दून अस्पताल: घायल मासूम को गोद में लिए भटकती रही मां

    दून अस्पताल: घायल मासूम को गोद में लिए भटकती रही मां

    दून अस्पताल में मंगलवार रात एक मां तीन वर्ष के घायल मासूम को लेकर इधर-उधर भटकती रही, लेकिन उपचार तो दूर मासूम को भर्ती तक नहीं किया गया। अस्पताल प्रबंधन कभी बाहर से जांच करवाने तो कभी चिकित्सक के मौजूद न होने की बात कहते रहे। करीब 17 घंटे के बाद बुधवार दोपहर बाद मासूम को भर्ती किया गया। इससे दून अस्पताल की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं

    जानकारी के अनुसार मंगलवार को एक तीन वर्ष का मासूम छत से गिरकर घायल हो गया। परिजन सहारनपुर से उसे दून अस्पताल लाए। परिजन जब इमरजेंसी पहुंचे तो स्टाफ ने जांचें पूरी होने के बाद भर्ती करने की बात कही। चिकित्सक के मुताबिक बच्चे की अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन के अलावा कई जांचें होनी थीं।

    तीमारदारों ने अस्पताल में जांच करवाने की जानकारी ली तो पता चला कि कई जांचें बाहर से करवानी पड़ेंगी। मासूम की मां आयशा चिकित्सकों से बच्चे को भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाती रही, लेकिन धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों का दिल नहीं पसीजा।

    करीब दो बजे घायल मासूम को भर्ती किया गया
    मां बच्चे को गोद में उठाए पूरी रात अस्पताल की सीढि़यों पर बैठी रही। जैसे-तैसे सुबह हुई और मासूम की बाहर से जांचें कराई गईं। इसके बाद भी चिकित्सक बच्चे को भर्ती करने के लिए तैयार नहीं थे। परिजनों ने जब हंगामा किया तो बुधवार दोपहर करीब दो बजे घायल मासूम को भर्ती किया गया।

    मासूम की बिगड़ती हालत तो कौन होता जिम्मेदार
    दून अस्पताल में करीब 17 घंटे तक घायल मासूम के इलाज के लिए परिजन भटकते रहे। इस दौरान अगर बच्चे की हालत बिगड़ती तो इसका जिम्मेदार कौन होता, यह एक बड़ा सवाल है। दून अस्पताल की अव्यवस्थाओं की जब पोल खुल रही है तो अधिकारी इसे सामान्य घटना का रूप देने में जुटे हैं। जबकि, उन्हें कमियों को दूर करने की दिशा में काम करना चाहिए।

    अस्पताल से इस तरह की घटना सामने आना काफी दुखद है। अस्पताल प्रबंधन ने इसका संज्ञान लिया है। मामले की जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, बच्चे को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। – डॉ. अनुराग अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल

  • वर्ष 2026 में शुरू होगा पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज: डॉ धन सिंह रावत

    वर्ष 2026 में शुरू होगा पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज: डॉ धन सिंह रावत

    विभागीय मंत्री ने किया कॉलेज के निर्माणाधीन भवनों का स्थलीय निरीक्षण

    विभागीय अधिकारियों को दिये निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

    पिथौरागढ़/देहरादून । चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 में राजकीय मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़ का संचालन शुरू कर दिया जायेगा। इसके लिये विभागीय स्तर पर तैयारियां जोरों पर चल रही है। मेडिकल कॉलेज के मुख्य भवन सहित अन्य निर्माण कार्य लगभग 45 फीसदी पूरे किये जा चुके हैं, अवशेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने के लिये विभागीय अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कुमाऊं मण्डल भ्रमण के दौरान पिथौरागढ़ पहुंचकर राजकीय मेडिकल कॉलेज का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कॉलेज के प्रशासनिक भवन सहित अन्य निर्माण कार्यों की विभागीय अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट तलब की। मीडिया को जारी बयान में डॉ. रावत ने बताया कि राज्य सरकार 750 करोड़ की लागत से पिथौरागढ़ में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कर रही है, जिसमें 45 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरे किये जा चुके हैं। शेष कार्य अगले छह माह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने वर्ष 2026 में मेडिकल कॉलेज का विधिवत संचालन का लक्ष्य रखा है। इसके लिये विभागीय स्तर पर तैयारियां जोरों पर चल रही है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में विभिन्न संकायों में फैकल्टी व मेडिकल स्टॉफ की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, साथ ही अधिकारियों को वर्ष 2025 में मेडिकल कॉलेज के संचालन हेतु एनएमसी में आवेदन करने के निर्देश दे दिये गये हैं। डॉ. रावत ने बताया कि मेडिकल कॉलेज परिसर से सटी वन विभाग की 1.06 हेक्टअर भूमि भी भारत सरकार ने कॉलेज को हस्तातंरण की अनुमति दे दी है।

    मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के उपरांत डॉ. रावत ने जिला मुख्यालय सभागार में विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली। जिसमें उन्होंने जिला अस्पताल सहित जनपद के सभी चिकित्सा केन्द्रों में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिये। साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के अंतर्गत जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों की डीपीआर तैयार कर शीघ्र शासन को उपलब्ध करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार सूबे में स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के लिये प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को भी अपने कार्य एवं दायित्वों के प्रति सजग एवं समर्पित रहना होगा तभी जन अपेक्षाओं पर खरा उतर सकते हैं।

    बैठक में जिलाधिकारी गोविंद गिरी गोस्वामी, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज डॉ. अजय आर्य सहित मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी व अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • देहरादून: विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में हुए ₹ 1,275 करोड़ के व्यापारिक सौदे

    देहरादून: विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में हुए ₹ 1,275 करोड़ के व्यापारिक सौदे

    इस सप्ताह की शुरुआत में देहरादून में संपन्न हुए 10वें वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस (विश्व आयुर्वेद कांग्रेस-डब्ल्यूएसी 2024) और आरोग्य एक्सपो में कुल 150 मिलियन (लगभग ₹ 1,275 करोड़) अमरीकी डॉलर के व्यापारिक सौदे हुए, जो आयुर्वेदिक दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाता है।

    12 से 15 दिसंबर तक चले आयुर्वेद क्षेत्र और संबद्ध हितधारकों के प्रमुख द्विवार्षिक सम्मेलन के आयोजन ने कारोबार होने के मामले में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। इसकी बड़ी वजह थी 30 देशों के 142 खरीदारों का आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (आयुष एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल -आयुषेक्सिल) द्वारा आयोजित लगभग 3200 बी2बी बैठकों में भाग लेना।

    विश्व आयुर्वेद फाउंडेशन (WAF) द्वारा आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, उत्तराखंड सरकार, अन्य राज्य सरकारों और प्रमुख आयुर्वेद प्रतिष्ठानों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ”डिजिटल स्वास्थ्य, एन आयुर्वेद पर्सपेक्टिव’ था।

    डब्ल्यूएसी 2024 में कुल 10321 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें से 352 प्रतिनिधि 58 देशों से थे, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

    देहरादून के विशाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य विषयों को कवर करने वाले 172 सत्र शामिल थे, जिसका उद्देश्य आयुर्वेद को मुख्य स्वास्थ्य विकल्प के रूप में वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से प्रयास करना था।

    डब्ल्यूएसी 2024 की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा में 27 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिन्होंने आयुर्वेद की देश में क्या स्थिति है, इस पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। साथ ही, डब्ल्यूएएफ ने आयुर्वेद की वैश्विक वापसी को और गति देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ बनाने की पहल की।

     

    इस कार्यक्रम में भारत के बाहर किसी आयुर्वेद संस्थान के लिए पहली बार यूरोप आयुर्वेद अकादमी एसोसिएशन को मान्यता प्रदान की गई।

    आयुष चेयर पैनल चर्चा में थाईलैंड, मॉरीशस, लातविया, रूस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    एक लाख वर्ग फीट क्षेत्र में आयोजित आरोग्य एक्सपो में प्रमुख आयुर्वेदिक संस्थानों के उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित किया गया, जिसमें लगभग डेढ लाख लोगों ने भाग लिया।

    कार्यक्रम के दौरान आयुष क्लिनिक में, जहां प्रमुख चिकित्सकों ने निःशुल्क सेवा प्रदान की, 4000 से अधिक लोगों ने नैदानिक परामर्श प्राप्त किया।

    चार दिवसीय बैठक के अन्य मुख्य आकर्षणों में उद्योग सम्मेलन(इंडस्ट्री कान्क्लेव(-इन्वेस्ट इंडिया, एनसीआईएम कान्क्लेव, पारंपरिक चिकित्सकों की बैठक, अंतर्राष्ट्रीय औषधीय पौधों की संगोष्ठी (इंटरनेशनल मेडिसिनल प्लांट सेमीनार) , पशु चिकित्सा आयुर्वेद के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (इंटरनेशनल कान्कलेव्स ऑफ वेटेनरी आयुर्वेद), वृक्ष आयुर्वेद और आयुर्वेद फिल्म महोत्सव शामिल थे।

    सम्मेलन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी एकत्रित हुए, जिन्होंने गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही दुनिया में एक समग्र और स्थायी स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में आयुर्वेद की बढ़ती हिस्सेदारी पर विचार-विमर्श किया।

  • दून अस्पताल: कैंसर के इंजेक्शन में क्रिस्टल से जांच के घेरे में दवा कंपनी

    दून अस्पताल: कैंसर के इंजेक्शन में क्रिस्टल से जांच के घेरे में दवा कंपनी

    वर्ष 2023 के मार्च महीने में कैंसर रोग में इस्तेमाल होने वाली डॉक्सोरूबिसिन नाम के इंजेक्शन की आपूर्ति की गई थी। इसमें क्रिस्टल मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दवाई के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

    दून अस्पताल में कैंसर रोग के उपचार में इस्तेमाल होने वाले एक इंजेक्शन में क्रिस्टल मिलने के बाद संबंधित दवा को जांच के लिए लैब में भेजा गया है। इंजेक्शन में गड़बड़ी मिलने पर दवा कंपनी को अस्पताल की काली सूची में शामिल किया जाएगा। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशक की ओर से दून अस्पताल प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए गए हैं

    दून अस्पताल में वर्ष 2023 के मार्च महीने में कैंसर रोग में इस्तेमाल होने वाली डॉक्सोरूबिसिन नाम के इंजेक्शन की आपूर्ति की गई थी। इसमें क्रिस्टल मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दवाई के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इंजेक्शन के सैंपल को जांच के लिए लैब में भेजा गया है।

    इंजेक्शन के 200 पैकेट की आपूर्ति की गई थी

    रिपोर्ट में किसी भी तरह की अनियमितताएं मिलने पर अस्पताल दवा कंपनी का टेंडर खत्म कर हमेशा के लिए संबंध विच्छेद कर लेगी। वर्तमान में एडवर्स ड्रग रिएक्शन की टीम इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी बताते हैं कि दवा कंपनी की ओर से इसी इंजेक्शन के 200 पैकेट की आपूर्ति की गई थी।

    इनमें से 127 पैकेट का इस्तेमाल किया जा चुका है। अब शेष पैकेट को इस्तेमाल से बाहर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक जब दवा कंपनी की ओर से इंजेक्शन की आपूर्ति की गई थी, तब दवा कंपनी की गृह जांच रिपोर्ट बिल्कुल सही थी। इसके बाद इंजेक्शन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी।

     

    चार अलग-अलग तरह की दवाइयों की आपूर्ति कर रही संबंधित कंपनी

    अधिकारियों ने बताया कि जिस इंजेक्शन में खराबी पाई गई है, उसकी मैनक्योर ड्रग कंपनी की ओर से आपूर्ति की जाती है। कंपनी की ओर से डॉक्सोरूबिसिन के साथ ही पांच और दवाइयों की आपूर्ति की जाती है। कंपनी के ब्लैक लिस्ट में शामिल होने के बाद सभी दवाइयों की आपूर्ति पर रोक लगाई जाएगी।

    नई दवा कंपनी को दिया जाएगा टेंडर

    अधिकारियों के मुताबिक सैंपल जांच में गड़बड़ी मिलने पर दवा कंपनी का टेंडर खत्म कर नई दवा कंपनी को टेंडर दिया जाएगा। ऐसे में इस प्रक्रिया को पूरा करने में समय भी लग सकता है। इससे कैंसर मरीजों को बाहर से दवाइयां खरादनी पड़ सकती हैं।

     

    तय मानकों का अनुपालन करते हुए सभी दवाइयों के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं। खरीदारी के दौरान दवाइयों की सही ढंग से सैंपल जांच कराने का नियम हैं। संबंधित अधिकारी इसे पूरी तरह सुनिश्चित करने के बाद ही दवाइयों को इस्तेमाल में लाएं। -आशुतोष सयाना, निदेशक चिकित्सा शिक्षा