Category: स्वास्थ्य

  • उपजिलाधिकारी सदर हरिगिरि ने जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू का औचक निरीक्षण

    उपजिलाधिकारी सदर हरिगिरि ने जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू का औचक निरीक्षण

    DM के निर्देशों के अनुपालन में  उपजिलाधिकारी सदर हरिगिरि ने जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखी। उपजिलाधिकारी सायं 04ः15 बजे एसएनसीयू पंहुचे निरीक्षण के दौरान 04 बच्चे भर्ती हैं तथा चिकित्सक एवं स्टॉफ ड्यूटी पर पाए गए। एसएनसी के शुभाराम्भ होने की तिथि 12 नवम्बर से अब तक 29 बच्चे उपचार प्राप्त कर चुके हैं।

     

     

     

    एसएनसीयू आनलाईन पोर्टल पर विवरण अंकित किया जाता है, जिसमें विवरण अंकित पाया गया। इस दौरान उप जिलाधिकारी ने ड्यूटी रजिस्टर का अवलोकन किया, जिसमें सभी चिकित्सक एवं स्टॉफ, सुरक्षा स्टाफ ड्यूटी पर मौजूद पाए गए तथा एसएनसीयू में सभी व्यवस्थाएं ठीक पाई गई।इस दौरान एसएनएसी की ड्यूटी पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ मीता, नर्सिंग आफिसर गुंजन व शालिनी, वार्ड एटेंडेंट ऋतु सहित अन्य स्टॉफ उपस्थित रहे।

  • विश्व आयुर्वेद कांग्रेस का समापन, पहली बार पहुंचे 10 हजार से अधिक प्रतिनिधि

    विश्व आयुर्वेद कांग्रेस का समापन, पहली बार पहुंचे 10 हजार से अधिक प्रतिनिधि

    देहरादून में आयोजित 10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो का आज समापन हो गया। समापन कार्यक्रम में राज्यपाल गुरमीत सिंह शामिल हुए। विश्व आयुर्वेद कांग्रेस में कई उपलब्धियां जुड़ी हैं। आयोजन समिति के अनुसार, इसमें 10,321 प्रतिनिधि पहुंचे हैं। यह पहली बार हुआ है कि आयुर्वेद कांग्रेस में 10 हजार से अधिक प्रतिनिधि पहुंचे हैं।

    इससे पूर्व गोवा में हुए इसी कार्यक्रम में 5,102 प्रतिनिधि पहुंचे थे। चार दिन के कार्यक्रम डेढ़ लाख लोगों ने शिरकत की है। इसके अलावा पहली बार एनआईसीएसएम के सहयोग से पहली बार 451 प्रैक्टिशनर इस आयुर्वेद सम्मेलन में पहुंचे। इस विश्व आयुर्वेद कांग्रेेस में 172 तकनीकी सत्र हुए और 54 देशों से 352 विदेशी प्रतिनिधि शामिल हुए।

    एक्सपो में 220 कंपनियां पहुंची हैं। यहां पर चार हजार लोगों ने आयुष क्लीनिक में जांच कराई। आयुष विभाग के अपर सचिव डॉ. विजय जोगदंडे ने बताया, कार्यक्रम में आयुष पर गहन चर्चा के साथ नई संभावनाओं पर बात हुई है। उधर, आयोजन समिति से जुड़े अनूप ठक्कर ने बताया, पहली बार राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ ने देश के बाहर यूरोप आयुर्वेद अकादमी एसोसिएशन को मान्यता दी है। इससे वे आयुर्वेद में प्रैक्टिस कर सकेंगे।

    राष्ट्रीय आयोजन कमेटी के महासचिव अनूप ठक्कर ने बताया कि नेपाल ने वेटनेरी आयुर्वेद की डिमांड की है। आयोजकों के अनुसार, देश में यह प्रैक्टिस हो रही है, पहली बार किसी विदेशी देश ने रुचि दिखाई है। इसके लिए नेपाल को जानकारी देने के साथ हर संभव सहायता दी जाएगी।

    विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो 2024 के सफल आयोजन के लिए देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का आभारी हूं। आयुष भूमि उत्तराखंड में महत्वपूर्ण विचार विमर्श हुआ है, जिसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। आयुष के विकास और इससे आम जन को लाभ पहुंचाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
    -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

  • 10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो -2024, उत्तराखंड लागू करेगा देश की प्रथम योग नीति

    10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो -2024, उत्तराखंड लागू करेगा देश की प्रथम योग नीति

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रदेश सरकार देश की ‘प्रथम योग नीति’ लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। योग नीति आयुर्वेद और योग को व्यापक स्तर पर साथ लाकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई क्रांति लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    गुरुवार को परेड ग्राउंड में आयोजित 10वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो -2024 को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये हमारे लिए गर्व का विषय है कि हमारे प्रदेश में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 6000 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। एक्सपो में लगाए गए 250 से अधिक स्टॉल आयुर्वेद की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता का प्रमाण दे रहे हैं।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सम्मेलन आयुर्वेद के क्षेत्र में परस्पर ज्ञान साझा करने व विभिन्न शोध कार्यों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सहयोग और व्यापार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। उन्होंने आयुष के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन से राज्य सरकार भी प्रदेश में आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्तमान में, हमारे राज्य में आयुष आधारित 300 ‘आयुष्मान आरोग्य केंद्रों’ का संचालन हो रहा है। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से 70 से अधिक विशेषज्ञों द्वारा आयुष परामर्श प्रदान किया जा रहा है। अब प्रत्येक जनपद में 50 बेड और 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालयों की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा सरकार प्रत्येक जनपद के एक गांव को मॉडल आयुष गांव के रूप में स्थापित कर आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, शोध और औषधीय पौधों के उत्पादन को गति प्रदान करने के लिए ‘उत्तराखंड आयुष नीति’ लागू कर चुकी है। इसके साथ ही, प्रदेश सरकार आगामी वर्षों में आयुष टेली-कंसल्टेशन प्रारम्भ करने के साथ- साथ 50 नए योग और वेलनेस केंद्र स्थापित करने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    *उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का प्रस्ताव*

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय से अनुरोध किया है, ये संस्थान आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से आह्वान करते हुए कहा कि हमारी जड़ी-बूटियों के हिंदी नामों के साथ ही अंग्रेजी नामों को भी प्रचारित किया जाए। इससे स्थानीय जड़ी बूटियों की वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ में हम ‘किलमोड़े’ को जानते है लेकिन उसके अंग्रेजी नाम ‘बेरीबेरीज’ को अधिकतर लोग नहीं जानते हैं जबकि इस नाम को पूरा विश्व जानता है और इससे दवाएं बनती हैं। इसलिए अंग्रेजी नाम भी प्रचारित किया जाना चाहिए।

    *उत्तराखंड आयुर्वेद की प्रज्ञा भूमि*

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड प्राचीनकाल से ही आयुर्वेद और औषधीय संपदा की प्रज्ञा भूमि रही है। हमारे प्रदेश में पाए जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों ने आयुर्वेद को आरोग्य के आधारभूत तत्व के रूप में स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विश्व की एक ऐसी विशिष्ट चिकित्सा प्रणाली है जो प्राचीनकाल से ही मानव सभ्यता का आरोग्य सुनिश्चित करती आ रही है। आयुर्वेद मात्र जड़ी-बूटियों और औषधियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि आयुर्वेद जीवन जीने की एक विशिष्ट कला है। ये हमें सही जीवन शैली के बारे में बताता है, इसका उद्देश्य रोगों को ठीक करना ही नहीं है बल्कि इसका अंतिम लक्ष्य रोग को होने ही न देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन’ और ‘प्रकृति परीक्षण अभियान’ जैसे विभिन्न कार्यक्रम आज शहरों से लेकर गांवों तक आरोग्य स्थापित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने एक्सपो का विधिवत शुभारंभ करने के बाद स्टॉल का भी निरीक्षण किया।

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    *एक छत के नीचे मिलेगी आयुर्वेद की दवाएं*

    केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रताप राव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस साल के दौरान आयुष के क्षेत्र में हुई पहलों से आयुष उत्पाद निर्माण में आठ गुना बढ़ोत्तरी हुई है। अब आयुष और हर्बल उत्पाद विश्व के 150 से अधिक देशों में निर्यात हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भी अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग उपकरणों के जैसी तकनीकी को अपना कर आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव ने कहा कि भारत में लोग सामान्य तौर पर आयुर्वेद से उपचार पसंद करते हैं, लेकिन गांव देहात में तक डॉक्टर एलोपैथिक दवाओं का ज्यादा परामर्श देते हैं। ऐसा शायद इसलिए होता है क्योंकि आयुर्वेद की एक तो दवा कम है, फिर सारे रोगों की सारी दवाएं एक ही जगह पर मिलनी तकरीबन मुश्किल होती हैं। इसलिए केंद्र सरकार सभी जिला, तहसील और गांव स्तर पर एक ही छत के नीचे आयुर्वेद की सभी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए आयुष औषधि केंद्रों की स्थापना करने का प्रयास कर रही है। ऐसा पहला केंद्र दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में शुरू हो चुका है। देशभर में ऐसे केंद्र खुलने से आयुष चिकित्सक परामर्श में आसानी से दवा लिख सकेंगे। उन्होने कहा कि विश्व आयुर्वेद कांग्रेस नवीन विचारों, प्राचीन संस्कृति और नवाचारों का संगम साबित होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन के दौरान आस पास के हजारों लोग यहां स्टॉल का भ्रमण करेंगे। यह आयोजन व्यावसायिक अवसरों के लिए भी मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए ही केंद्र सरकार ने देशभर में 29 अक्तूबर से प्रकृति परीक्षण अभियान शुरू किया है, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया गया।

    भारत सरकार के आयुष मंत्रालय में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि विश्व आयुर्वेद सम्मेलन के आयोजन से आयुष पद्धति को वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने में मदद तो मितती ही है, साथ ही आयोजन वाले क्षेत्र के आस पास इस सेक्टर की ग्रोथ भी बढ़ती है। उन्होंने इस आयोजन के लिए उत्तराखंड का आदर्श राज्य बताते हुए कहा कि आयुर्वेद की पुस्तकों में वर्णित कई जड़ी बूटियां हिमालय में मिलती हैं।

    *पीएम नरेंद्र मोदी ने भेजा संदेश*
    सम्मेलन में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर भेजे गए संदेश को पढ़ा। उद्घाटन सत्र को राष्ट्रीय आयोजन सचिव, विज्ञान भारती डॉ. शिव कुमार शर्मा, दसवें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के चेयरपर्सन वैद्य पीएम वॉरियर, उत्तराखंड शासन में सचिव आयुष रविनाथ रमन ने भी संबोधित किया।

  • देहरादून में ढाई दिन की बच्ची का दून अस्पताल में देह दान

    देहरादून में ढाई दिन की बच्ची का दून अस्पताल में देह दान

    देहरादून में ढाई दिन की बच्ची का दून अस्पताल में देह दान किया गया। हृदय संबंधी रोग (एसफिक्सिया बीमारी) से बच्ची का निधन हो गया था। महज ढाई दिन की बच्ची के देह दान किए जाने का यह देश का पहला मामला बता रहे हैं।

    चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची को हृदय संबंधी रोग थी, जिसके चलते आज सुबह उसका निधन हो गया। बच्ची के पिता राम मिहर हरिद्वार में एक फैक्ट्री में कार्यरत हैं। मिली जानकारी के अनुसार हरिद्वार के डॉ राजेंद्र सैनी ने परिवार को देह दान के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद परिवार ने दधीचि देह दान समिति के मुकेश गोयल से संपर्क किया। समिति के माध्यम से आज सुबह बच्ची का देह दान किया गया।

     

    देश में इतनी कम उम्र में देह दान का यह पहला मामला बताया जा रहा है। बच्ची के अंगों को दून मेडिकल कॉलेज के म्यूजिम में रखा जाएगा। जो वर्षों तक यहां संरक्षित रहेगा और लोगों को देह दान के प्रति जागरूक किया जाएगा। बच्ची का नाम समिति ने सरस्वती रखा है।

    एनॉटिमी विभाग के अध्यक्ष डॉ एमके पंत और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ राजेश कुमार मौर्य ने बताया कि इस तरह के मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं। जब इतनी कम दिन के बच्चे के शव का देह दान हुआ हो। उन्होंने बताया कि बच्ची के शव को लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिए उसके शरीर पर थर्मलीन का लेप लगाया जाएगा।

  • स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को गैप एनालिसिस पर हुआ महामंथन

    स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को गैप एनालिसिस पर हुआ महामंथन

    प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधारीकरण को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के उपरांत जरूरी मांगों पर कार्मिक व वित्त विभाग ने भी अपनी सहमति व्यक्त की। जिसके तहत राजकीय मेडिकल कॉलेजों एवं राजकीय चिकित्सालयों के गैप एनालिसिस में उजागर कामियों को दूर किया जायेगा। जिसमें मेडिकल फैकल्टी के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, कुशल पैरामेडिकल व नर्सिंग स्टॉफ की तैनाती भी शामिल है। साथ ही आवश्यकतानुसार आउटसोर्स के पदों के सृजन पर भी सहमति जताई गई है।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में आज सचिवालय स्थित मुख्य सचिव सभागार में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई। जिसमें दोनों विभागों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारीकरण को लेकर किये गये गैप एनालिसिस का पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण दिया गया। जिसमें मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों के समयबद्ध पदोन्नति एवं स्थानांतरण की नीति बनाये जाने, सुपर स्पेशिलिस्ट चिकित्सकों को एम्स के बराबर वेतनमान दिये जाने, एसआर व जेआर के मानदेय में बढ़ोत्तरी किये जाने, पर्याप्त आवास एवं सुसज्जित ट्रॉजिट हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। साथ ही सभी पीजी छात्रों के लिये नई बॉण्ड पॉलिसी के तहत पीजी के उपरांत प्रदेश में दो साल की अनिवार्य सेवा की मांग रखी गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों के सफल संचालन के लिये कुशल पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती, नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्रों के लिये वजीफे की व्यवस्था तथा आउटसोर्स के माध्यम से आवश्यकतानुसार पदों का सृजन एवं कार्मिकों के क्षमता निर्माण हेतु नीति बनाये जाने की बात रखी गई। इसके अलावा राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अल्पावधि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिये वित्तीय सहायता की मांग की गई ताकि संबंधित कार्मिकों को महंगे उपकरणों की हैण्डलिंग, कीटाणुशोधन एवं प्रबंधन के प्रशिक्षण हेतु राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में भेजा जा सके।

    इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत विशेषज्ञ संवर्ग का गठन करते हुये चिकित्सा शिक्षा विभाग की तर्ज पर पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिये वेतनमान का 50 फीसदी विशेष भत्ता स्वीकृत किये जाने तथा सभी चिकित्साधिकारियों को वाहन भत्ता दिये जाने की मांग रखी गई। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में 60 वर्ष की आयु के उपरांत मुख्य परामर्शदाता के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों का वेतनमान निर्धारित किये जाने की भी पुरजोर मांग की गई। बैठक में स्पेशल डायनमिक एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन (एसडीएसीपी) योजना के लाभ से वंचित चिकित्सकों को शिथिलीकरण दिये जाने की भी मांग रखी गई।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव कार्मिक व वित्त आनंद वर्द्धन, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के चैयरमैन अरविंद सिंह ह्यांकि, सचिव स्वास्थ्य आर. राजेश कुमार, सीईओ एसएचए व अपर सचिव स्वास्थ्य आनंद श्रीवास्तव, अपर सचिव स्वास्थ्य स्वाति भदौरिया, अनुराधा पाल, नाममि बंसल, अपर सचिव वित्त गंगा प्रसाद, अमिता जोशी, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तारा आर्य, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना, दून मेडिकल कॉलेज डॉ. गीता जैन, प्राचार्य श्रीनगर मेडिकल कॉलेज प्रो. सीएमएस रावत, प्राचार्य हरिद्वार मेडिकल कॉलेज प्रो. रंगील सिंह रैना, निदेशक स्वास्थ्य डा. सुनीता टम्टा, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर.एस. बिष्ट सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    *बयान-*
    आज सचिवालय में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें दोनों विभागों ने गैप एनालिसिस पर अपना प्रस्तुतिकरण दिया। विस्तृत चर्चा के उपरांत स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण को लेकर कई बिन्दुओं पर वित्त व कार्मिक विभाग की सहमति के साथ ही अहम निर्णय लिये गये। जिनके शीघ्र क्रियान्वयन के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया गया। – *डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराख्ांड।*

  • Dehradun: परेड ग्राउंड में होगी विश्व आयुर्वेद कांग्रेस, 6500 ने कराया है पंजीकरण

    Dehradun: परेड ग्राउंड में होगी विश्व आयुर्वेद कांग्रेस, 6500 ने कराया है पंजीकरण

    उत्तराखंड को पहली बार विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के आयोजन की मेजबानी मिली है। 12 से 15 दिसंबर तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    विश्व आयुर्वेद कांग्रेस व आरोग्य एक्सपो आयोजन के लिए वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में जगह नहीं मिल पाई। अब यह आयोजन परेड ग्राउंड में कराया जाएगा। इसके लिए आयुर्वेद विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सम्मेलन के लिए अब तक देश-दुनिया के 6500 प्रतिनिधि पंजीकरण कर चुके हैं।

    आयुर्वेद विभाग ने पहले आयोजन के लिए एफआरआई परिसर में स्थान मांगा था। दिसंबर 2023 में वैश्विक निवेशक सम्मेलन भी एफआरआई में हुआ था। लेकिन, विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के लिए एफआरआई ने जगह नहीं दी जिससे अब परेड ग्राउंड में आयोजन होगा। आयुर्वेद विभाग ने परेड ग्राउंड में पंडाल व आयुष स्टॉल बनाने का काम शुरू कर दिया है।

    12 से 15 दिसंबर तक होगा आयोजन

    उत्तराखंड को पहली बार विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के आयोजन की मेजबानी मिली है। 12 से 15 दिसंबर तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन 300 से अधिक आयुष स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके अलावा 400 आयुष विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। सम्मेलन में 600 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुति किए जाएंगे।

  • Uttarakhand: स्वास्थ्य विभाग को मिले 40 और नर्सिंग अधिकारी

    Uttarakhand: स्वास्थ्य विभाग को मिले 40 और नर्सिंग अधिकारी

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को 40 और नर्सिंग अधिकारी मिले हैं। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा जारी अंतिम चयन परिणाम के उपरांत प्रतीक्षा सूची में शामिल इन सभी अभ्यर्थियों को सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नियुक्ति पत्र सौंपे। डॉ. रावत ने सभी चयनित नर्सिंग अधिकारियों को बधाई देते हुये उन्हें प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में अपना अहम योगदान देने को कहा।

    स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज 40 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इन सभी चयनित नर्सिंग अधिकारियों को प्रदेशभर के विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में तैनाती दे दी गई है। डॉ. रावत ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से नर्सिंग अधिकारियों के 1564 पदों पर भर्ती की गई थी, जिसके सापेक्ष बोर्ड ने 1411 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन परिणाम जारी किया था। जिनमें से स्वास्थ्य विभाग ने 1394 नवनियुक्ति नर्सिंग अधिकारियों के नियुक्ति पत्र निर्गत किये जबकि 1354 नर्सिंग अधिकारियों ने ही कार्यभार ग्रहण किया। इसके उपरांत बोडउर् ने कार्यभार ग्रहण न करने वाले अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन निरस्त कर प्रतीक्षा सूची में चयनित 40 अभ्यर्थियों की सूची स्वास्थ्य महानिदेशालय को सौंपी। जिन्हें विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में तैनाती देते हुये नियुक्ति पत्र वितरित किये गये। जिसमें पिथौरागढ़ जनपद में 8, पौड़ी 6, अल्मोड़ा 5, टिहरी, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग व नैनीताल में 4-4, देहरादून 2 तथा उत्तरकाशी, बागेश्वर व चम्पावत में 1-1 नर्सिंग अधिकारी को नियुक्त दी गई है।

    इससे पहले विभाग ने 1394 चयनित नर्सिंग अधिकारियों को विभिन्न जनपदों में तैनाती दी। जिसमें चमोली जनपद में 128, उत्तरकाशी 116, टिहरी 111, रूद्रप्रयाग 69, पौड़ी 231, हरिद्वार 73, देहरादून 59, ऊधम सिंह नगर 74, पिथौरागढ़ 97, नैनीताल 146, बागेश्वर 61, चम्पावत 76 तथा अल्मोड़ा में 153 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति प्रदान की गई।

    डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुधारीकरण की दिशा में लगातार प्रयासरत है, तेजी से हो रहे सुधारात्मक कार्यों के सुखद परिणाम भी सामने आने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चिकित्सा इकाईयों में उपचार मिलने से आम लोगों को खासी राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि नये नर्सिंग अधिकारियों की तैनाती से प्रदेश के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में और अधिक मदद मिलेगी साथ ही चिकित्सा इकाईयों में मरीजों के बेहतर उपचार एवं देखभाल भली-भांति हो सकेगा। वहीं नियुक्ति पत्र मिलने पर चयनित अभ्यर्थियों ने खुशी जाहिर करते हुये स्वास्थ्य मंत्री डॉ रावत का आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ कुलदीप मर्तोलिया ने किया।

  • बच्चे हैं समाज के सूद, उचित पोषण इनका मौलिक अधिकार: डीएम

    बच्चे हैं समाज के सूद, उचित पोषण इनका मौलिक अधिकार: डीएम

    जिलाधिकारी सविन बंसल ने सुदोवाला अवस्थित अक्षय पात्र रसोई का निरीक्षण कर, रसोई में खाना बनाए जाने की प्रक्रिया परखी। इस दौरान जिलाधिकारी ने पकाया जा रहे खाने को भी चखा, उन्होंने अक्षय पात्र रसोई के संचालकों को निर्देश दिए की खाना बच्चों के अनुकूल बनाएं ताकि बच्चे आसानी से खाना खा पाए। इस दौरान जिलाधिकारी ने अक्षय पात्र रसोई में खाना बनाये जाने की प्रक्रिया देखी तथा सफाई व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने रसोई में इस्तेमाल किए जाने हेतु रखे अनाज भी देखा। उन्होंने निर्देशित किया कि स्कूलों में भेजे जाने वाले बर्तन साफ सुथरे तथा स्टील के हों यह सुनिश्चित कर लिया जाए।

    ज्ञातव्य है कि अक्षय पात्र रसोई से आसपास के क्षेत्र में लगभग 350 स्कूलों में यहां का खाना बच्चों हेतु जाता है, अभिभावकों एवं शिक्षकों द्वारा खाना तीखा होने के कारण बच्चे खाना ठीक से नहीं खा पा रहे हैं, इसको लेकर कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थी, जिसके क्रम में जिलाधिकारी द्वारा यहां का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखते हुए आवश्यक निर्देश अक्षय पात्र रसोई के संचालकों को दिए । जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चे समाज के सूद हैं पौष्टिक भोजन मिलना उनका मौलिक अधिकार है। जिलाधिकारी ने कहा संस्था अगली पेमेंट से पहले अभिभावकों एवं अध्यापकों से अपने भोजन की रेटिंग प्राप्त कर ले, उन्होंने संस्था के अधिकारियों को निर्देशित किया की प्लास्टिक के सभी कंटेनर्स बदल दिए जाएं उनके स्थान पर स्टील के कंटेनर्स को शामिल करें।

    जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी विकासनगर को रसोई के खाने की सैंपलिंग करने के भी निर्देश दिए, जिस पर जिलाधिकारी के समक्ष भोजन की सैंपलिंग की गई।

    डीएम ने एसडीएम विकासनगर को निर्देश दिए कि सभी 350 स्कूलों में अभिभावकों के साथ इस संस्था की संयुक्त संवाद कायम करवाएं। कहां सुझाव एवं अनुश्रवण का प्रथम हक बच्चों और उनके अभिभावकों का। डीएम बोले आपकी संस्था का उच्च नाम है, नाम के अनुरूप उच्च कोटि के कार्यों की संस्था से अपेक्षा है।

    निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी रेनू राठौर सहित संबंधित अधिकारी कार्मिक उपस्थित रहे.

  • AIIMS Rishikesh: पहली बार हुई रोबोटिक विधि से वजन घटाने की सर्जरी

    AIIMS Rishikesh: पहली बार हुई रोबोटिक विधि से वजन घटाने की सर्जरी

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रोबोटिक विधि से पहली वजन घटाने की सर्जरी (बैरिएट्रिक सर्जरी) की गई। यह सर्जरी संस्थान के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की ओर से की गई है।

    गैस्ट्रोएंट्रोलाॅजी विभाग के सर्जन डॉ. लोकेश अरोड़ा ने बताया, 51 वर्षीय एक महिला मोटापे से संबंधित बीमारी के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द और थायराइड की समस्या से जूझ रही थी। महिला का वजन 110 किग्रा था। महिला पहले जनरल मेडिसिन की ओपीडी में आई थी। जहां से विभिन्न जांचों के आधार पर बीमारी का पता लगा।

    इसके बाद सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलाॅजी विभाग की ओर से रोगी का गैस्ट्रिक बाईपास या रॉक्स-एन-वाई (रोबोटिक बैरिएट्रिक) ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। बताया, यह जटिल सर्जरी लगभग पांच घंटे तक चली। इस सर्जरी के बाद रोगी का वजन अब 10 किलो कम हो गया। रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।बताया, बैरिएट्रिक ऑपरेशन शरीर का वजन कम करने के लिए किया जाने वाला एक जटिल ऑपरेशन है। जिसमें रिकवरी तेजी से होती है और शरीर में निशान भी नजर नहीं आते हैं।

    सर्जरी की यह प्रक्रिया उन व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो अपने शरीर का वजन कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय करते हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाती है। मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित गुप्ता ने मोटापे की वजह से लीवर खराब होने की शिकायत में बैरिएट्रिक सर्जरी को कारगर बताया।

    ऑपरेशन करने वाली टीम में डाॅ. लोकेश अरोड़ा के साथ डॉ. नीरज यादव, डॉ. अजहरुद्दीन, डॉ. मृदुल धर, डॉ. उन्नीकृष्णन, डॉ. दीपक, मोहित, सुरेश, दीप, रितेश, योगेश, आकाश शामिल रहे। एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सत्या श्री ने ऑपरेशन को रोबोटिक विधि से सफलतापूर्वक संपन्न करने पर सर्जिकल टीम को बधाई दी।

    इस दिन लगती है ओपीडी
    एम्स में ओबेसिटी एवं मेटाबोलिक हेल्थ की ओपीडी प्रत्येक शनिवार को सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक चलती है। इस ओपीडी में सभी विभाग के डॉक्टर्स उपलब्ध रहते हैं।

  • देहरादून: सिनर्जी अस्पताल में भर्ती हुए स्वामी रामभद्राचार्य, सांस लेने में हो रही तकलीफ

    देहरादून: सिनर्जी अस्पताल में भर्ती हुए स्वामी रामभद्राचार्य, सांस लेने में हो रही तकलीफ

    जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य को अचानक दून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंगलवार की शाम को उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। इसके बाद उन्हें दून लाया गया, चिकित्सक उनका उपचार कर रहे हैं।

    मंगलवार की शाम को जगद्गुरु को सांस लेने में समस्या हुई। इसके बाद उन्हें इलाहाबाद से एयरलिफ्ट कर शाम करीब सात बजे दून लाया गया। यहां सिनर्जी अस्पताल में उन्हें उपचार के लिए भर्ती किया गया। जहां चिकित्सकों की टीम की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है

    इससे पहले फरवरी में भी तबीयत खराब होने के चलते दून में भर्ती कराया गया था। यहां काफी दिनों तक उनका उपचार चला था। सिनर्जी अस्पताल के एमडी कमल गर्ग ने बताया कि रामभद्राचार्य को सांस लेने में तकलीफ हुई थी। इसके बाद उन्हें देर शाम को अस्पताल में भर्ती किया गया।