Category: स्वास्थ्य

  • 29 अक्टूबर को होगी एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा होगी शुरू, PM करेंगे ऑनलाइन उद्घाटन

    29 अक्टूबर को होगी एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा होगी शुरू, PM करेंगे ऑनलाइन उद्घाटन

    एम्स की बहु प्रतीक्षित हेली एंबुलेंस सेवा का इतंजार अब समाप्त होने को है। 29 अक्तूबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सेवा का ऑनलाइन उद्घाटन करेंगे। एम्स ऋषिकेश देश का पहला सरकारी चिकित्सा संस्थान है जहां हेली एंबुलेंस सेवा उपलब्ध होगी।

    20 सितंबर 2022 को तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में हेली एंबुलेंस सेवा शुरू किए जाने की घोषणा की थी। काफी लंबे समय से उक्त सेवा के शुरू होने का इंतजार किया जा रहा था। लेकिन अब इंतजार खत्म हुआ। उक्त सेवा केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से संचालित होगी। हर माह कम से कम 30 उड़ाने आवश्यक हैं।

  • अल्मोड़ा व हरिद्वार मेडिकल कॉलेज को मिली एक दर्जन फैकल्टी

    अल्मोड़ा व हरिद्वार मेडिकल कॉलेज को मिली एक दर्जन फैकल्टी

    स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने दी नियुक्ति की मंजूरी

    देहरादून । प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करते हुये राज्य सरकार ने एक दर्जन और मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इनमें से 07 संकाय सदस्यों को सोबन सिंह जीना राजकीय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एण्ड रिसर्च, अल्मोड़ा तथा 05 फैकल्टी को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वारा में संविदा के माध्यम से नियुक्ति दी गई है। मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की तैनाती से छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन जहां सुचारू होगा वहीं मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    सूबे के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नियमित फैकल्टी की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल कॉलेजों में संविदा के माध्यम से फैकल्टी तैनात कर रहा है। इसी कड़ी में हल्द्वानी, श्रीनगर तथा दून मेडिकल कॉलेज के बाद अब सरकार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा तथा हरिद्वार में विभिन्न संकायों के एक दर्जन मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को 07 जबकि हरिद्वार मेडिकल कॉलेज को 05 फैकल्टी मिली है। जिसमें अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में फर्माकलॉजी विभाग में प्रोफेसर पद पर डॉ. नवप्रीत कौर, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. शैलश कुमार लोहनी, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर में डा. अंशुल ममगांई तथा मेडिकल ऑफिसर पद पर डॉ. पूनम गडकोटी व डा. अक्षय राजवार शामिल हैं। ऑब्स एंड गायनी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डा. ममता सौटियाल तथा डा. एकता रावत का चयन किया गया है दोनों को पीजी डिग्री प्राप्त होने के उपरांत नियुक्ति पत्र निर्गत किया जायेगा। इसी प्रकार राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार में फर्माकलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. सौम्या पाण्डे, जनरल सर्जरी में डा. महिम खान, एनेस्थिसिया में डा. प्रियंका कश्यप, एनाटॉमी में डॉ. हिना फातिमा तथा अर्बन हैल्थ ट्रेनिंग सेंटर में मेडिकल ऑफिसर पद पर डा. कीर्ति बंसल को नियुक्ति दी गई है। सभी अभ्यथियों का चयन हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में गठित साक्षात्कार समिति द्वारा वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से किया गया है। चयनित अभ्यर्थियों को संविदा के आधार पर नियुक्ति प्रदान की गई है। मेडिकल कॉलेज में चयनित फैकल्टी तथा मेडिकल ऑफिसर को तीन वर्ष अथवा उक्त पदों पर नियमित नियुक्ति होने तक जो भी पहले हो के लिये नियुक्त किया गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा तथा हरिद्वार में संकाय सदस्यों की नियुक्ति से शैक्षणिक गतिविधियों में जहां सुधार होगा वहीं मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

    बयान–
    राजकीय मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के शत-प्रतिशत पदों का भरा जायेगा। इसके लिये सरकार प्रयासरत है। हल्द्वानी, श्रीनगर तथा दून मेडिकल कॉलेज के साथ ही अब अल्मोड़ा और हरिद्वार में भी एक दर्जन संकाय सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। हमारा मकसद मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ-साथ बेहतर चिकित्सकीय उपचार मुहैया कराना है।- डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

  • Uttarakhand: नई व्यवस्था लागू, सड़क दुर्घटना में मिलेगा 1.50 लाख तक का कैशलेस इलाज

    Uttarakhand: नई व्यवस्था लागू, सड़क दुर्घटना में मिलेगा 1.50 लाख तक का कैशलेस इलाज

    जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है और सड़क दुर्घटना में घायल हो जाते हैं, तो उन्हें भी नई व्यवस्था के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।

    सड़क दुर्घटना में घायलों को अब आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों में 1.50 लाख तक कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा आयुष्मान योजना से अलग होगी। घायलों के लिए इलाज पर खर्च राशि का भुगतान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय करेगा। इस नई व्यवस्था को प्रदेश में लागू कर दिया गया। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

    जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है और सड़क दुर्घटना में घायल हो जाते हैं, तो उन्हें भी नई व्यवस्था के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। अस्पतालों को इलाज पर आने वाले खर्च का भुगतान मंत्रालय की ओर से किया जाएगा।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने बताया कि इस नई योजना को प्रदेश में लागू कर दिया गया है। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी तैयारियां कर ली हैं। सड़क दुर्घटना के मरीज को अधिकतम सात दिन की अवधि के लिए 1.50 लाख तक का इलाज मिलेगा। उन्होंने कहा, सड़क हादसों की दृष्टि से उत्तराखंड संवेदनशील है। यह व्यवस्था घायलों के इलाज में मददगार साबित होगी।

    राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की अस्पताल में ई-डीएआर यानी डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट जनरेट होगी। उसी आईडी से उपचार शुरू हो जाएगा। इस सुविधा के लिए मरीज के पास आयुष्मान या किसी अन्य योजना का कार्ड होना भी अनिवार्य नहीं है।

  • धामी सरकार ने तीन साल में शुरु किए दो मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा के बाद अब हरिद्वार मेडिकल कॉलेज भी शुरू

    धामी सरकार ने तीन साल में शुरु किए दो मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा के बाद अब हरिद्वार मेडिकल कॉलेज भी शुरू

    अल्मोड़ा के बाद अब हरिद्वार मेडिकल कॉलेज भी शुरू

    दोनों जगह फर्स्ट इयर में बढ़ी 200 एमबीबीएस सीटें

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तीन साल के कार्यकाल के दौरान, उत्तराखण्ड में दो नए मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। धामी सरकार के कार्यकाल के दौरान 2022 में अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुका है, और अब इसी सत्र से हरिद्वार मेडिकल कॉलेज भी शुरू होने जा रहा है। दोनों जगह की कुल 200 नई सीटें जुड़ने से उत्तराखण्ड में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़कर 625 हो गई है।

    पुष्कर सिंह धामी सरकार के कार्यभार ग्रहण करने से पहले प्रदेश में श्रीनगर, देहरादून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज ही संचालित हो रहे थे। हालांकि तब तक अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज और हरिद्वार मेडिकल कॉलेज पर भी काम शुरू हो चुका था। कार्यभार ग्रहण करने के तत्काल बाद प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ ही एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन दोनों मेडिकल कॉलेजों को प्राथमिकता पर शुरू करने के निर्देश दिए। जिसके बाद दोनों मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया गया। जिसमें से अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज का निर्माण पहले पूरा होने पर यहां 2022 से ही मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। अब इसी क्रम में हरिद्वार मेडिकल कॉलेज का भी निर्माण कार्य पूरा होने से इसी शैक्षिक सत्र से यहां भी एमबीबीएस की 100 सीटों पर प्रवेश का रास्ता साफ हो गया है।

    मेधावी छात्रों को मौका

    केंद्र सरकार ने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के लिए 100 मौजूदा शैक्षिक सत्र 2024-25 के लिए 100 सीटें मंजूर कर दी हैं। इसके लिए अब काउंसिलिंग शुरू की जा रही है। इससे प्रदेश के और अधिक बच्चों को एमबीबीएस करने का मौका मिलेगा, इसके लिए उन्हें सरकारी फीस ही चुकानी है।

    उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कॉलेज और सीटें
    देहरादून – 150
    हल्द्वानी -125
    श्रीनगर – 150
    अल्मोड़ा – 100
    हरिद्वार -100

    कुल 625

    हमारी सरकार नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के जरिए जहां स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही है, वहीं इससे मेधावी छात्रों को भी अपने प्रदेश में ही मेडिकल की पढ़ाई सस्ती दरों पर करने का मौका मिलेगा। हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के लिए जल्द पहले बैच की काउंसिलिंग शुरू होगी, जल्द ही पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा करते हुए जरूरी मान्यता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  • सूबे में चिकित्सा सेवाओं का होगा विस्तारः डॉ. धन सिंह रावत

    सूबे में चिकित्सा सेवाओं का होगा विस्तारः डॉ. धन सिंह रावत

    प्रस्तावित उप जिला चिकित्सालयों की डीपीआर शीघ्र तैयार करने के निर्देश

    कहा, एएनएम, सीएचओ व नर्सिंग अधिकारी भरे जायेंगे शत-प्रतिशत पद

    देहरादून । सूबे में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार किया जायेगा। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों व यात्रा मार्गों में स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा। जिन ब्लॉकों में चिकित्सालयों को उच्चीकृत कर उप जिला चिकित्सालय बनाया जाना है, उनकी डीपीआर शीघ्र शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं ताकि निर्माण कार्यों को समय पर शुरू किया जा सके। इसके अलावा विभाग में एएनएम, सीएचओ तथा नर्सिंग अधिकारियों के शत-प्रतिशत पदों को शीघ्र भरा जायेगा।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने चिकित्सा सेवाओं के विस्तार एवं कार्मिकों के रिक्त पदों को भरे जाने के संबंध में विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। डॉ. रावत ने बताया कि सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिये राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों तथा यात्रा मार्गों पर गुणवत्तापूर्ण व आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना प्राथमिकता में रखा गया है, जिसके दृष्टिगत छोटी चिकित्सा इकाईयों को उच्चीकृत कर उन्हें उप जिला चिकित्सालय में परिवर्तित किया जाना है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को प्रस्तावित एक दर्जन उप जिला चिकित्सालयों की डीपीआर शीघ्र तैयार कर शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये गये हैं ताकि प्रस्तावित उप जिला चिकित्सालयों के ढ़ांचागत विकास के लिये धनराशि जारी की जा सके। डॉ. रावत ने बताया कि एएनएम, सीएचओ तथा नर्सिंग अधिकारियों के लगभग 632 पदों को शीघ्र भरे जाने के निर्देश दिये गये हैं, जिसके अंतर्गत नर्सिंग अधिकारियों के 44 तथा सीचएचओ के 197 पदों को पूर्व में की गई भर्ती की प्रतिक्षा सूची से भरा जायेगा। जबकि एएनएम के 391 पदों को वर्षवार मेरिट सूची के आधार पर भरा जाना है जिसकी प्रक्रिया गतिमान है। उन्होंने बताया कि विभाग के अंतर्गत टैक्नीशियन संवर्ग के विभिन्न रिक्त पदों तथा वार्ड ब्वाय के पदों को शीघ्र भरने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये गये हैं।
    बैठक में चिकित्सा इकाईयों में दवाईयों एवं उपकरणों की आपूर्ति समय पर उपलब्ध करने, 108 आपातकालीन सेवा का रेस्पांस टाइम कम से कम करने तथा प्रत्येक जनपद में बेहतर स्वास्थ्य सेवाऐं मुहैया करने को चरणबद्ध समीक्षा बैठक करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये गये।

    बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, मिशन निदेशक एनएचएम स्वाति भदौरिया, अपर सचिव स्वास्थ्य अनुराधा पाल, नमामि बंसल, महानिदेशक स्वास्थ्य डा. तारा आर्य, निदेशक स्वास्थ्य सुनीता टम्टा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • प्रदेश में लगातार बढ़ रहे हैं डेंगू के मामले, पौड़ी जिले से सामने आ रहे सबसे अधिक

    प्रदेश में लगातार बढ़ रहे हैं डेंगू के मामले, पौड़ी जिले से सामने आ रहे सबसे अधिक

    प्रदेश में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। अब तक पांच जिलों में कुल 75 मामले सामने आए हैं। इसमें पौड़ी जिले में सबसे अधिक 59 मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी जिलों के सीएमओ को डेंगू रोकथाम व बचाव के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर डेंगू मामलों की निगरानी की जा रही है।

    आगामी नवंबर व दिसंबर तक डेंगू संक्रमण के फैलने की आशंका रहती है। हालांकि गत वर्ष की तुलना में इस बार अप्रैल से लेकर 17 सितंबर तक डेंगू के कुल 75 मामले सामने आए हैं। ऋषिकेश में एक डेंगू मरीज की मौत हुई है। मरीज को पहले से कई तरह की बीमारी होने से विभाग मौत के कारणों की वास्तविकता के लिए डेथ ऑडिट करा रहा है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि सभी जिलों के सीएमओ को डेंगू रोकथाम के लिए अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्वास्थ्य महानिदेशालय से भी नियमित रूप से मानीटरिंग करने को कहा गया है। आगामी दो माह तक डेंगू संक्रमण की संभावना को देखते हुए एहतियात बरतने की आवश्यकता है

    प्रदेश में अब तक डेंगू मरीजों की संख्या

    जिला डेंगू मरीज

    पौड़ी – 59

    देहरादून – 09

    हरिद्वार – 03

    नैनीताल – 03

    ऊधमसिंह नगर – 01

  • डेंगू रोकथाम को प्रभावी कदम उठायें सीएमओः डॉ. धन सिंह रावत

    डेंगू रोकथाम को प्रभावी कदम उठायें सीएमओः डॉ. धन सिंह रावत

    कहा, रेखीय विभाग से समन्वय बनाकर माइक्रोप्लान पर करें काम

    जनता से अपील, आगामी दो माह तक डेंगू के प्रति रहें सतर्क

    देहरादून । प्रदेश में डेंगू की बढ़ती संभावनाओं के बीच सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा गया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन एवं रेखीय विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर डेंगू प्रभावित क्षेत्रों एवं संभावित इलाकों में माइक्रोप्लान के अनुरूप प्रभावी कदम उठाते हुये डेंगू पर नियंत्रण बनाये रखने के निर्देश दे दिये गये है। जिसकी स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर प्रत्येक दिन मॉनिटिरिंग की जायेगी।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि प्रदेश में डेंगू के रोकथाम को लेकर राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। यही वजह है कि इस वर्ष डेंगू संक्रमण नियंत्रण में है, लेकिन फिर भी सावधानी बरतनी जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुछ स्थानों पर डेंगू संक्रमण के केस सामने आये हैं, जिनकी बढ़ती संभावनों को देखते हुये सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दे दिये गये हैं। साथ ही जिला प्रशासन एवं रेखीय विभागों के साथ डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में सघन अभियान चलाकर डेंगू नियंत्रण हेतु प्रयास तेज करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों को जनपद स्तर पर डेंगू नियंत्रण एवं रोकथाम के लिये माइक्रोप्लान तैयार करते हुये विभागीय टीमों का गठन कर प्रत्येक नगर व वार्ड में जनजागरूकता अभियान के साथ ही निरंतर मॉनिटिरिंग के भी निर्देश दिये गये हैं। जबकि महानिदेशक स्वास्थ्य को सभी जनपदों में डेंगू रोकथाम को लेकर चलाये जा रहे अभियान की प्रत्येक दिन निदेशालय स्तर पर भी मॉनिटिरिंग करने को कहा गया है।

    विभगीय मंत्री ने बताया कि सभी जनपदों के सीएमओ को डेंगू नियंत्रण एवं रोकथाम के लिये सघन सोर्स रिडक्शन गतिविधियां, फॉगिंग, इनडोर स्पेस स्प्रे, प्रचार-प्रसार, अंतर्विभागीय समन्वय बैठक तथा माइक्रोप्लान के अनुरूप प्रभावी कदम उठाने के निर्देश पूर्व में ही दे दिये गये थे। जिसके तहत विभाग द्वारा गठित टीम ने माह अप्रैल से घर-घर जाकर डेंगू लार्वा को नष्ट करने के साथ ही जनजागरूकता अभियान शुरू कर दिया था। जिसके तहत आतिथि तक आशाओं द्वारा 24,16,624 घरों तथा डेंगू वॉलियंटर्स द्वारा 7,37,316 घरों का सर्वे कर लार्वा निरोधात्मक कार्यवाही की। डॉ. रावत ने जनता से अपील करते हुये कहा कि भले ही प्रदेश में डेंगू नियंत्रण में है लेकिन बरसाती मौसम को देखते हुये आगामी दो माह तक सभी लोग डेंगू के प्रति सतर्क रहे और अपने आस-पास डेंगू का लार्वा पनपने न दें।

  • स्वास्थ्य विभाग को और मिले 197 सीएचओ

    स्वास्थ्य विभाग को और मिले 197 सीएचओ

    उत्तराखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी ने जारी किया परीक्षाफल

    देहरादून। सूबे के स्वास्थ्य विभाग को और 197 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) मिल गये हैं। एच0एन0बी0 उत्तराखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी ने द्वितीय चरण की काउंसलिंग के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी कर दी है। इन सभी चयनित सीएचओ की शीघ्र ही प्रदेशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनाती दी जायेगी।

    सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तारीकरण के दृष्टिगत राज्य सरकार ने प्रदेशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) में शत-प्रतिशत सीएचओ की तैनाती करने का लक्ष्य रखा है। जिसके क्रम में स्वास्थ्य विभाग को 197 और सीएचओ मिल गये हैं। स्वास्थ्य विभाग की मांग पर एच0एन0बी0 उत्तराखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी ने सीएचओ के 238 पदों के लिये द्वितीय चरण काउंसलिंग आयोजित कर 197 अभ्यर्थियों की अंतिम चयन सूची जारी कर दी है। जिनको शीघ्र ही जनपदवार रिक्त पदो ंके सापेक्ष तैनाती दी जायेगी। चयनित अभ्यर्थियों में से अल्मोड़ा जनपद में 16, बागेश्वर 17, चमोली 16, चम्पवात 5, देहरादून 40, हरिद्वारा 22, नैनीताल 14, पौड़ी गढ़वाल 31, पिथौरागढ़ 12, रूद्रप्रयाग 2, टिहरी 1, ऊधमसिंह नगर 15 तथा उत्तरकाशी हेतु 6 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। विभाग द्वारा गत वर्ष 1683 पदों के सापेक्ष 1515 सीएचओ की तैनाती की गई थी, जिसमें से कुछ अभ्यर्थियों का चयन नर्सिंग अधिकारी के पद पर हो जाने से सीएचओ के पद रिक्त हो गये थे। ऐसे में विभाग ने विश्वविद्यालय को सीएचओ के रिक्त पदो ंके भरने के लिये द्वितीय चरण की काउंसलिंग करने की जिम्मेदारी सौपी थी। स्वास्थ्य विभाग को नये सीएचओ मिलने से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

    बयान
    विभाग को 197 और सीएचओ मिलने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर होगी। सरकार का लक्ष्य सभी 1683 पदों के सापेक्ष सीएचओ की तैनाती कर आम लोगों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना है। सभी चयनित सीएचओ को बधाई, उम्मीद है सभी अपने कार्य एवं दायित्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करेंगे।

  • आम लोगों को सुलभ हो स्वास्थ्य सेवाएंः डॉ. धन सिंह रावत

    आम लोगों को सुलभ हो स्वास्थ्य सेवाएंः डॉ. धन सिंह रावत

    विभाग में लम्बे समय से रिक्त पदों को शीघ्र भरें अधिकारी

    कहा, अस्पतालों में हो रंग-रोगन, लगायें योजनाओं के बैनर-पोस्टर

    देहरादून। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रदेश के आम आदमी को सुलभता से मिले। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना बनाकर काम करने को कहा गया है। इसके अलावा विभाग में विभिन्न संवर्गों में लम्बे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने, अस्पतालों की स्थिति में सुधार लाने, निष्प्रयोज्य वाहनों एवं कबाड़ की शीघ्र निलामी करने के निर्देश भी अधिकारियों को दे दिये गये हैं।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह की अध्यक्षता में आज यमुना कालोनी स्थित शासकीय आवास पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक हुई। जिसमें विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट अधिकारियों से तलब की। डॉ. रावत ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सुलभता से मिले इसके लिये ठोस कार्ययोजना बना कर काम किया जाय। उन्होंने कहा कि विभाग में विभिन्न संवर्गों में लम्बे समय से रिक्त पड़े पदों को यथाशीघ्र भरना अतिआवश्यक है तभी प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण व विस्तारीकरण संभव हो सकेगा।

    इसके लिये उन्होंने विभागीय अधिकारियों को टेक्नीकल संवर्ग एवं एएनएम के पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिये। इसके साथ ही उन्होंने नर्सिंग अधिकारियों की प्रतिक्षा सूची जारी करने तथा आउटसोर्स के माध्यम से वार्ड ब्वॉय की शीघ्र भर्ती करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। डॉ. रावत ने कहा कि राजकीय चिकित्सा इकाईयों की स्थिति में सुधार लाया जाय। इसके लिये अस्पतालों में रंग-रोगन, मरम्मत कार्य एवं चाहरदीवारी आदि आवश्यक रूप से कराई जाय, साथ ही अस्पतालों में आम लोगों को स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के लिये बैनर व पोस्टर लगाये जाय। उन्होंने विभगाय अधिकारियों को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित करने के भी निर्देश दिये ताकि स्थानीय स्तर पर आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया की जा सके। उन्होंने अस्पतालों में वर्षां से पड़े कबाड़ पर नाराजगी जताते हुये कहा कि निष्प्रयोज्य हो चुके वाहनों एवं अन्य सामग्रियों की तत्काल नीलामी की जाय, ताकि अस्पताल परिसर साफ-सुधरे रहे और विभाग को इससे राजस्व भी अर्जित हो सके।

    बैठक में अपर सचिव स्वास्थ्य आनंद श्रीवास्तव, अपर सचिव वित्त अमित जोशी, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ तारा आर्य, निदेशक मेडिकल एडुकेशन डॉ आशुतोष सयाना, निदेशक स्वास्थ्य डॉ सुनीता टम्टा, निदेशक एनएचएम डॉ मनु जैन सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट संविदा चिकित्सकों का बढ़ा वेतन

    मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट संविदा चिकित्सकों का बढ़ा वेतन

    पर्वतीय व मैदानी क्षेत्रों में नई मानदेय सीमा निर्धारित, शासनादेश जारी

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत बोले, सुपर स्पेशलिस्ट फैकल्टी की कमी होगी दूर

    देहरादून। राज्य सरकार ने प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा के माध्यम से तैनात सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों के वेतन में वृद्धि की मंजूरी दे दी है। नये वेतनमान के निर्धारण से राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अब सुपर स्पेशियलिटी एवं रेडियोलॉजी विभागों में फैकल्टी की कमी नहीं रहेगी। सरकार ने मैदानी एवं पर्वतीय क्षेत्रों के लिये सुपर स्पेशलिस्ट एवं रेडियोलॉजिस्ट के वेतनमान का पुनर्निर्धारण किया है।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर तैनात सुपर स्पेशियलिटी एवं रेडियोलॉजी विभागों की फैकल्टी के वेतनमान का पुनर्निर्धारण कर बढ़ोत्तरी की है। जिससे पर्वतीय क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों में आ रही फैकल्टी की कमी को दूर किया जा सकेगा। विभागीय मंत्री ने बताया कि पुनर्निर्धारित वेतनमान के तहत कार्डियोलाजी, नेफ्रोलाजी, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी एवं रेडियोलॉजी विभाग में तैनात सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को बढ़ा हुआ वेतनमान दिया जायेगा। जिसके तहत मैदानी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में तैनात प्रोफेसर को अधिकतम 4 लाख रूपये, एसोसिएसट प्रोफेसर को 3 लाख 20 हजार, असिस्टेंट प्रोफेसर को 2 लाख 20 हजार व सीनियर रेजीडेंट को 1 लाख 50 हजार रुपये का मानदेय निर्धारित किया गया है। जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में प्रोफेसर को रूपये 5 लाख , एसोसिएट प्रोफेसर को 4 लाख, असिस्टेंट प्रोफेसर को 3 लाख व सीनियर रेजीडेंट को 2 लाख रुपये तक का अधिकतम मानदेय दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि संविदा के आधार पर तैनात फैकल्टी के कार्य प्रदर्शन के मूल्यांकन के आधार पर मानदेय में प्रतिवर्ष वृद्धि का भी प्रावधान रखा गया है। जिसके तहत असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सीनियर रेजिडेंट के मानदेय में उत्तम कार्य प्रदर्शन के आधार पर 10 प्रतिशत तथा एसोसिएट एवं प्रोफसर के मानदेय में 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की जायेगी। इसके अलावा संविदा पर तैनात फैकल्टी को आयुष्मान भारत, अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना तथा राज्य सरकार के स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत राजकीय चिकित्सालयों द्वारा अर्जित क्लेम की धनराशि में से भी प्रावधान के अुनसार प्रोत्साहन राशि का भी भुगतान किया जायेगा। किसी भी संविदा फैकल्टी के सदस्यों को नौकरी छोडने अथवा इस्तीफा देने से तीन माह पूर्व कॉलेज प्रशासन को नोटिस देना होगा। डॉ. रावत ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी संकाय सदस्यों के मानदेय के पुनर्निर्धारण से विशेषकर पर्वतीय क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में आ रही फैकल्टी की कमी को दूर किया जा सकेगा साथ ही यहां अध्ययनरत मेडिकल छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन निर्बाध रूप से चल सकेगा।