Category: स्वास्थ्य

  • स्वास्थ्य विभाग को शीघ्र मिलेंगे 391 एएनएमः डॉ. धन सिंह रावत

    स्वास्थ्य विभाग को शीघ्र मिलेंगे 391 एएनएमः डॉ. धन सिंह रावत

    चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने जारी किया अभिलेख सत्यापन कलैण्डर

    आगामी 18 से 30 सितम्बर तक होंगे एएनएम के अभिलेखों का सत्यापन

    देहरादून । चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को शीघ्र ही 391 एएनएम (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता) मिलेंगे। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर अभ्यर्थियों के अभिलेख सत्यापन हेतु कैलेण्डर जारी कर दिया है। चयन बोर्ड आगामी 18 सितम्बर से लेकर 30 सितम्बर तक वर्षवार स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अभिलेख सत्यापन करेगा। इसके उपरांत चयनित अभ्यर्थियों का वर्षवार मेरिट के आधार पर चयन परिणाम घोषित किया जायेगा।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग में लम्बे समय से विभिन्न संवर्गों में रिक्त पड़े पदों को तेजी से भरा जा रहा है। इसी कड़ी में एएनएम के रिक्त 391 पदों पर शीघ्र तैनाती दी जायेगी। इसके लिये उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने सभी औचारिकताएं पूरी कर ली है। डॉ. रावत ने बताया कि चयन बोर्ड ने स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) परीक्षा-2024 के लिये तिथिवार अभिलेख सत्यापन कलैण्डर जारी कर दिया है। आगामी 18 सितम्बर 2024 से अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की जायेगी जो 30 सितम्बर 2024 तक चलेगी। अभिलेख सत्यापन हेतु अभ्यर्थियों को बैचवार ज्येष्ठता क्रम में बुलाया गया है, जिसके लिये अभ्यर्थियों को अनुक्रमांक भी जारी किये गये हैं। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा संलग्न प्रमाण पत्रों की बारीकी से जांच की जायेगी। अभिलेख सत्यापन के समय अभ्यर्थियों को अपने मूल दस्तावेजों के साथ सम्बंधित अभिलेखों की दो-दो स्वप्रमाणित छायाप्रतियां लाना अनिवार्य है। अभिलेख सत्यापन प्रक्रिया के उपरांत चयन बोर्ड द्वारा अर्हता प्राप्त अभ्यर्थियों की वर्षवार मेरिट के आधार पर चयन परिणाम जारी किया जायेगा, जिन्हें प्रदेश के विभिन्न जनपदों के चिकित्सा इकाईयों में तैनाती दी जायेगी। विभागीय मंत्री ने बताया कि राजकीय चिकित्सा इकाईयों में एएनएम की तैनाती होने से स्थानीय स्तर पर आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया हो सकेगी, साथ ही गर्भवती महिलाओं, जच्चा-बच्चा के टीकाकरण में तेजी आयेगी इसके अलावा सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य योजनाओं का आम लोगों के बीच प्रचार-प्रसार हो सकेगा।

  • सूबे के चिकित्सा शिक्षा विभाग में बंपर प्रमोशन

    सूबे के चिकित्सा शिक्षा विभाग में बंपर प्रमोशन

    56 मेडिकल फैकल्टी की पदोन्नति को सरकार की मंजूरी

    विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों में दी गई तैनाती

    देहरादून । सूबे के चिकित्सा शिक्षा विभाग में लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे मेडिकल फैकल्टी के लिये खुशखबरी है। सरकार ने इस साल विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के रिक्त पदों पर 56 संकाय सदस्यों की प्रोन्नति को मंजूरी दे दी है। साथ ही इन चयनित संकाय सदस्यों की विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों में विषयवार पदस्थापना भी कर दी है। मेडिकल फैकल्टी की तैनाती से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण संबंधी गतिविधियों में तेजी आयेगी साथ ही फैकल्टी की भी कमी दूर होगी।

    उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के रिक्त पदों पर कुल 56 मेडिकल फैकल्टी के पदोन्नति की संस्तुति की गई थी। जिसे राज्य सरकार ने अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। जिसमें 34 असिस्टेंट प्रोफेसर को एसोसिएट प्रोफेसर तथा 22 एसोसिएट प्रोफेसर को प्रोफेसर के पद पर संकायवार एवं विषयवार विभागीय पदोन्नति दी गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफसेर से एसोसिएट प्रोफेसर के 34 पदों पर की गई पदोन्नति के तहत एनेस्थिसियोलॉजी संकाय में चार मेडिकल फैकल्टी का प्रमोशन किया गया। इसी प्रकार पैथोलॉजी में पांच, कम्यूनिटी मेडिसिन में तीन, एनाटॉमी, फार्माकोलॉजी, जनरल मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, जनरल सर्जनी व गायनी में दो-दो जबकि फिजियोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, ब्ल्ड बैंक, माइक्रोबायोलॉली, साइकेट्री, आर्थोपेडिक्स, ईएनटी, रेडियोथैरेपी, फिजिकल मेडिसिन एवं न्यूरो सर्जरी संकाय में एक-एक फैकल्टी शामिल है। इनमें से विभिन्न विषयों की 20 मेडिकल फैकल्टी को दून मेडिकल कॉलेज, 06 को अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज तथा 04-04 मेडिकल फैकल्टी को श्रीनगर एवं हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में भेजा गया है।

    इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर के 22 पदों पर की गई पदोन्नति के तहत एनॉटामी, बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, कम्यूनिटी मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जनी एवं आप्थलमोलॉजी विभाग में दो-दो संकाय सदस्यों का प्रमोशन किया गया। जबकि पैथोलॉजी, फॉरेंसिंक मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, स्कीन एंड वीडी, आर्थोपेडिक्स, गायनी, एनेस्थिसियोलॉजी तथा डेन्टिस्ट्री विभाग में एक-एक एसोसिएट प्रोफेसर का प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति की गई। जिनमें से 12 प्रोफेसर को दून मेडिकल कॉलेज में तैनाती दी गई जबकि श्रीनगर एवं हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में 03-03, हल्द्वानी में 02 तथा रूद्रपुर व अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में 01-01 प्रोफेसर को भेजा गया है। इन फैकल्टी की मेडिकल कॉलेजों में तैनाती से जहाँ शिक्षण संबंधी कार्यों में तेजी आयेगी वहीं कॉलेजों से संम्बद्ध अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

    बयान–
    चिकित्सा शिक्षा विभाग में लम्बे से समय के बाद 34 असिस्टेंट प्रोफेसर एवं 22 एसोसिएट प्रोफेसर का प्रमोशन कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य मेडिकल कॉलेजों में शत-प्रतिशत फैकल्टी की तैनाती करना है, इसके लिये सरकार की ओर से सभी प्रयास किये जा रहे हैं।- डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

     

  • राजकीय अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में  जल्द नियुक्त होंगे टेक्नीशियन व वार्ड बॉय

    राजकीय अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में जल्द नियुक्त होंगे टेक्नीशियन व वार्ड बॉय

    विभिन्न संवर्गों में कार्मिकों की होगी पदोन्नति

    देहरादून। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय समीक्षा बैठक में जरूरी निर्देश दिये ।बैठक में डॉ रावत ने राजकीय अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में तकनीकी संवर्ग के अंतर्गत रिक्त पदों को भरने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। जन्होने कहा कि अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं को सुचारू रूप से संचालन के लिये दक्ष टेक्नीशियन स्टाफ का होना आवश्यक है। इसके लिये अस्पतालों में लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे, ई.सी.जी., ऑक्सीजन प्लांट टेक्नीशियन, ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट एवं अन्य टेक्नीशियनों की नियुक्ति आई.पी.एच.एस. मानकों के अनुसार की जाए। इसके अलावा विभागीय मंत्री ने वार्ड ब्वाय के 3023 स्वीकृत पद के सापेक्ष 986 पदों को आउटसोर्स से शीघ्र भरने के निर्देश अधिकारियों को दिये। इसके साथ ही उन्होंने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग अधिकारियों की कमी को दूर करने के लिए प्रतिक्षा सूची से जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने को कहा। इसके साथ ही डॉ रावत ने लंबे समय से गैर हाजिर चल रहे चिकित्सकों, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन व अन्य स्वास्थ्य कर्मी को हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने को अधिकारियों को कहा।

    बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए डॉ रावत ने कहा कि सूबे में स्पेशलिस्ट चिकित्सक कैडर, प्रशासनिक कैडर के अलावा चार धाम यात्रा मार्ग के लिये चिकित्सकों का पृथक से कैडर बनाया जाएगा जिसके निर्देश अधिकारियों को दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग में विभिन्न संवर्गों के अंतर्गत लंबे समय रिक्त पदों पर कार्मिकों की पदोन्नति के शीघ्र की जाएगी।

    विभागीय मंत्री ने विभाग में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों को तय समय मे पूर्ण करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। उन्होंने निर्माण कार्यों में ढीलाई करने वाली कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के निर्देश भी बैठक में दिये।

    बैठक में डॉ तारा आर्या स्वास्थ्य महानिदेशक, डॉ आनंद श्रीवास्तव अपर सचिव, डॉ सुनिता टम्टा स्वास्थ्य निदेशक, डॉ नरेंद्र तोमर आदि विभागीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

  • देश के शीर्ष 50 चिकित्सा संस्थानों की सूची में एम्स ऋषिकेश ने सुधारी रैंकिंग, मिला 14वां स्थान

    देश के शीर्ष 50 चिकित्सा संस्थानों की सूची में एम्स ऋषिकेश ने सुधारी रैंकिंग, मिला 14वां स्थान

    देश के शीर्ष 50 चिकित्सा संस्थानों की सूची जारी

    ऋषिकेश। नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) द्वारा देश के सर्वोच्च 50 चिकित्सा संस्थानों की सूची सोमवार को जारी कर दी गई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश को इस बार देश के चुनिंदा 50 चिकित्सा संस्थानों में 14 वां स्थान हासिल हुआ है। पिछली बार एम्स ऋषिकेश 22 वें नम्बर पर था। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो0 मीनू सिंह ने इसे टीम वर्क से की गयी मेहनत का फल बताया है।

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश को देश के चुनिंदा 50 चिकित्सा संस्थानों में 14 वां स्थान हासिल हुआ है। शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) रैंकिंग 2024 की सूची जारी की। उत्कृष्ट मेडिकल काॅलेजों की सूची में इस बार एम्स दिल्ली 94.46 स्कोर प्राप्त कर देश में पहले स्थान पर रहा है। जबकि एम्स ऋषिकेश ने पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार बढ़त हासिल कर 63.16 स्कोर के साथ 14 वां स्थान हासिल किया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत बने सभी 6 एम्स संस्थानों की बात करे तो एम्स ऋषिकेश इन सभी मे पहला स्थान बनाने में कामयाब हुआ है। उल्लेखीय है कि एनआईआरएफ द्वारा कई श्रेणियों में देश के शैक्षणिक संस्थानों की लिस्ट जारी की जाती है। एनआईआरएफ रैंकिंग की शुरूआत वर्ष 2016 में शुरू हुई थी।

    गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज के हाथों वर्ष 2004 में एम्स ऋषिकेश की आधार शिला रखी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से उस दौरान ऋषिकेश के अलावा बिहार के पटना, मध्यप्रदेश के भोपाल, उड़ीसा के भुवनेश्वर, राजस्थान के जोधपुर और छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी नए एम्स संस्थानों की आधार शिला रखी गई थी। एम्स ऋषिकेश में यूजी कोर्स की पढ़ाई वर्ष 2012 में शुरू हुई। मौजूदा समय में यहां मेडिकल, नर्सिंग व पैरामेडिकल में यूजी, पीजी और सुपरस्पेशलिटी के कोर्स संचालित हो रहे हैं। प्रो0 मीनू सिंह संस्थान की कार्यकारी निदेशक के पद पर संस्थान का नेतृत्व कर रही हैं। नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) द्वारा सोमवार को जारी की गयी रैंकिंग सूची में इस बार प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत निर्मित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों में एम्स भुवनेश्वर को 15 वां, एम्स जोधपुर को 16 वां, एम्स पटना को 26 वां, एम्स भोपाल को 31 वां और एम्स रायपुर को 38 वां स्थान प्राप्त हुआ है।

    एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डा.) मीनू सिंह ने इसे संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि एम्स ऋषिकेश के आचार्य, सहआचार्य, चिकित्सक, मेडिकल स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ व संस्थान के अन्य सभी अधिकारी व कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास से ही संस्थान ने यह बढ़त हासिल की है। उन्होंने कहा कि टीम वर्क के आधार पर हमारा प्रयास होगा कि भविष्य में आल इंडिया रैंकिंग में और बेहतर प्रदर्शन कर हम सर्वोच्च स्थान हासिल कर सकें। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी संदीप कुमार सिंह ने बताया कि रैंकिंग में इन सभी चिकित्सा संस्थानों के रिसर्च, एकेडमिक गतिविधियों, एजुकेशनल रिसोर्सऐज, हायर स्टडीज प्रोग्राम सहित कुछ अन्य मानकों को परखा जाता है। उन्होंने बताया कि इन सभी में एम्स ऋषिकेश ने बेहतर प्रदर्शन कर यह स्थान पाया है।

  • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को मिली चार फैकल्टी

    श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को मिली चार फैकल्टी

    कैज्युअल्टी मेडिकल ऑफिसर के दो पदों पर भी हुआ चयन

    नवीन नियुक्तियों से शैक्षणिक गतिविधियों को मिलेगी धार

    देहरादून । प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के दृष्टिगत चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा संविदा के आधार पर मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति की जा रही है। इसी क्रम में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाल राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान श्रीनगर में राज्य सरकार ने विभिन्न संकायों के अंतर्गत चार मेडिकल फैकल्टी तथा दो कैज्युअल्टी मेडिकल ऑफिसर की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की है। नई मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति से जहां मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी दूर होगी वहीं शैक्षणिक गतिविधियों में सुधार आयेगा।

    हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति की अध्यक्षता में गठित साक्षात्कार/चयन समिति द्वारा श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के विभिन्न संकायों में रिक्त मेडिकल फैकल्टी के पदों के लिये साक्षात्कार आयोजित किया गया। जिसमें चयन कमेटी ने चार मेडिकल फैकल्टी तथा दो कैज्युअल्टी मेडिकल ऑफिसर का चयन किया। जिसमें पैथोलॉली विभाग के अंतर्गत एसोसिएट प्रोफसर के पद पर डॉ पवन भट, असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. स्वाती पुण्डीर, आर्थोपेडिक्स में डॉ. वेद प्रकाश अग्रवाल, ईएनटी में डॉ. श्वेता पूरबी का चयन किया गया। इसी प्रकार कैज्युअल्टी मेडिकल विभाग में कैज्युअल्टी मेडिकल ऑफिसर के पद पर डॉ. अजीत कुमार तथा डॉ. कृष्णाकांत त्यागी का चयन किया गया है। इन सभी चयनित अभ्यर्थियों को राज्य सरकार ने संविदा के आधार पर नियुक्ति की मंजूरी दे दी है। चयनित मेडिकल फैकल्टी एवं कैज्युअल्टी मेडिकल ऑफिसर को तीन वर्ष अथवा उक्त पदों पर नियमित नियुक्ति होने तक जो भी पहले हो के लिये नियुक्त किया गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति के लिये सरकार लगातार प्रयासरत है। इससे पूर्व राज्य सरकार ने हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में विभिन्न संकायों में लगभग एक दर्जन मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति की मंजूरी प्रदान की थी। इन सभी नव नियुक्त मेडिकल फैकल्टी के आने से मेडिकल कॉलेज में शिक्षण कार्यों में गति आयेगी वहीं मरीजों को भी डॉक्टरों की नियुक्ति का लाभ मिलेगा।

    बयान–
    सरकार की मंशा प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में उच्च स्तरीय शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जिसमें मेडिकल फैकल्टी सहित प्रयोगशाला उपकरण, पुस्तकें व शोध पत्र शामिल है। इसके लिये चरणबद्ध तरीके से सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है, साथ ही मेडिकल फैकल्टी की कमी को भी दूर किया जा रहा है।- डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

     

  • आयुष्मान कार्ड बनाने में पिछड़े जनपदों पर होगा विशेष फोकस : डा धन सिंह रावत

    आयुष्मान कार्ड बनाने में पिछड़े जनपदों पर होगा विशेष फोकस : डा धन सिंह रावत

    समीक्षा बैठक में तेजी से आयुष्मान कार्ड बनाने के निर्देश

    देहरादनू। स्वास्थ्य मंत्री डा धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में अधिक से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने हैं। जिन जनपदों में अभी कम कार्ड बने हैं वहां प्राधिकरण के अधिकारी भ्रमण करेंगे और लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

    बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जिन जनपदों में 70 फीसद से कम आयुष्मान कार्ड बन पाए हैं वहां विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। आयुष्मान कार्ड बनाने के अभियान को गति प्रदान करने के उद्देश्य से हरिद्वार, टिहरी, पिथोरागढ़, रूद्रप्रयाग, चमोली आदि जनपदों मेें समन्वय हेतु अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। जनपद के अधिकारियोें के साथ बैठक कर लक्ष्य तय किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि इस कार्य मेें पंचायती राज, बाल विकास, समाज कल्याण, शिक्षा व खाद्य एवं पूर्ति विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। कहा कि आपसी समन्वय के लिए सभी जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी। और प्रतिदिन कम से कम 1500 आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य दिया गया।

    बैठक में विभागीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अस्पतालों को ग्रीन चैनल घोषित किया जाना है। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया। कहा कि पहाड़ी जनपदों में कोई निजी अस्पताल सूचीबद्धता के लिए आवेदन करता है तो उसका सहयोग करें।

    बैठक में स्वायतशासी संस्थाओं के कर्मचारियों व पेंशनरों को राज्य स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत शामिल किए जाने पर भी चर्चा हुई।

  • सूबे में मातृ मुत्यु दर कम करने को बने रोड़मैपः डॉ धन सिंह रावत

    सूबे में मातृ मुत्यु दर कम करने को बने रोड़मैपः डॉ धन सिंह रावत

    आईईसी को विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार में तेजी लाने के दिये निर्देश

    कहा, सभी जिला एवं उप जिला अस्पतालों में उपलब्ध हो डायलिसिस सुविधा

    देहरादून । प्रदेश में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिये ठोस कार्य योजना तैयार की जायेगी, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एमएमआर के आंकड़ों में सुधार के साथ ही दो अंकों तक लाया जा सके। इसके अलावा बच्चों एवं महिलाओं में एनिमिया की कमी को दूर करने के लिये भी जनपद स्तर पर विशेष अभियान चलाये जायेंगे। विभागीय योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये आईईसी विभाग को प्रदेश एवं जनपद स्तर पर कार्ययोजना के तहत काम करने के निर्देश दिये गये हैं।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशायल स्थित एनएचएम सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की तीसरे चरण की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने प्रदेश में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिये विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर काम करने को कहा। कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी एनएचएम सलाहकार पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा को सौंपी गई। विशेषकर जिन जनपदों में मातृ मृत्यु दर की स्थित गंभीर है उस पर फोकस करने के निर्देश दिये गये हैं। ताकि मातृ मृत्यु दर को घटाकर एसडीजी टारगेट 2030 के तहत प्रति एक लाख लाइव बर्थ पर 70 तक लाया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 103 है जबकि पूरे देश की मातृ मृत्यु दर 97 है। इसी प्रकार सूबे में बच्चों व महिलाओं में एनीमिया की कमी दूर करने के लिये भी विशेष अभियान चलाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं। डॉ. रावत ने बताया कि एनएचएम के अंतर्गत डायलिसिस की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। जिसके तहत प्रदेश के सभी जिला एवं उप जिला चिकित्सालयों को डायलिसिस की सुविधा से लैस करने के निर्देश दिये गये हैं ताकि किडनी रोगियों को बड़े अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़े।

    विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने प्रदेश एवं जिला स्तर पर आईईसी की कार्यप्रणाली पर नाखुशी जताते हुये सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में आईईसी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिसके लिये आईईसी को राज्य एवं जनपद स्तर पर विशेष कार्ययोजना बना कर स्वास्थ्य योजनाओं के प्रचार-प्रसार में तेजी लाने के निर्देश दिये, साथ ही प्रत्येक तीन माह में आईईसी कार्यशाला का आयोजन कराने को भी कहा गया। बैठक में एनएचएम के अंतर्गत संचालित निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई जिसमें उन्होंने सभी कार्यों को समय पर पूर्ण करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये।

    बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य एवं अनुश्रवण परिषद उत्तराखंड के उपाध्यक्ष सुरेश भट्ट, कुलपति उत्तराख्ांड मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रो. एम.एल.ब्रह्म भट्ट, एमडी एनएचएम स्वाती भदौरिया, सलाहकार एनएचएम डॉ. तृप्ति बहुगुणा, अपर सचिव वित्त अमिता जोशी, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तारा आर्य, निदेशक डॉ. सुनीता टम्टा, डॉ. मीतू शाह, वित्त नियंत्रक एनएचएम दिपाली भरने, सीएमओ देहरादून डॉ. संजय जैन, डॉ. आर.के.सिंह, डॉ. तुहिन कुमार, डॉ. पंकज सिंह, डॉ. महेन्द्र मौर्य, डॉ. अजय नगरकर, डॉ. फरीदुजफर, डॉ. उमा रावत सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जबकि सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी व डीपीएम ने बैठक में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।

     

  • डेंगू की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने कंट्रोलरूम किया स्थापित

    डेंगू की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने कंट्रोलरूम किया स्थापित

    देहरादून। जिलाधिकारी सोनिका के निर्देशन पर जनपद देहरादून में डेंगू नियंत्रण एवं बचाव हेतु डीआईसीसीसी में कंट्रोलरूम स्थापित किया गया है जिसमें डेंगू से संबंधित विभिन्न शिकायत है दी जा सकती हैं।
    कंट्रोल रूम में अभी तक कुल 15 कॉल प्राप्त हुई है जिनमें 14 कॉल फागिंग तथा 1 कॉल चिकित्सा परामर्श से संबंधित है सभी का निराकरण कर लिया गया है। कंट्रोल रूम में नगर निगम के कार्मिक एवं स्वास्थ्य विभाग से चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है।

    जिलाधिकारी ने समस्त जनमानस से अनुरोध किया है कि डेंगू से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या एवं शिकायत तथा चिकित्सकीय परामर्श के लिए टोल फ्री नंबर 1800 1802525 पर संपर्क किया जा सकता है।
    जिलाधिकारी ने जनमानस से डेंगू के दृष्टिगत सतर्क रहते हुए अपने आसपास सफाई रखने तथा पानी जमा न होने देने का अनुरोध किया।

     

     

  • भरसार विश्वविद्यालय को शीघ्र मिलेगी एम्बुलेंस व चिकित्सक : डॉ. धन सिंह रावत

    भरसार विश्वविद्यालय को शीघ्र मिलेगी एम्बुलेंस व चिकित्सक : डॉ. धन सिंह रावत

    कहा, उपनल कार्मिकों की समस्याओं के समाधान के लिये बनाये ठोस नीति

    अधिकारियों को दिये प्रेक्षागृह सहित अन्य निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

    देहरादून। पौड़ी जनपद में स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार की समस्याओं का शीघ्र समाधान निकाला जायेगा। इसके लिये विश्वविद्यालय व शासन के अधिकारियों को आपस में बैठ कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। विश्वविद्यालय को शीघ्र ही एक एम्बुलेंस व चिकित्सक उपलब्ध करा दिया जायेगा। इसके अलावा उपनल कार्मिकों का वेतन सहित अन्य समस्याओं के लिये भी ठोस नीति बनाने को कहा गया है। साथ ही विश्वविद्यालय में चल रहे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के साथ ही छात्र-छात्राओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी बैठक में दिये हैं।

    सूबे के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार की विभिन्न समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन व शासन के अधिकारियों की बैठक ली। जिसमें उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा के मध्यनज़र घेरबाड़ के लिये चैनलिंग फैंसिंग का प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराया जाय। साथ ही विश्वविद्यालय के परिसार में चल रहे प्रेक्षागृह व अन्य निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाय। आवासशीय परिसर में रह रहे छात्र-छात्राओं के लिये पुस्तकालय सहित खेल सामग्री आदि सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को शीघ्र एम्बुलेंस व चिकित्सक सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी। ताकि वहां रह रहे छात्र-छात्राओं के साथ ही कार्मिकों व उनके परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेगी। इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालय में कार्यरत उपनल कार्मिकों को समय पर वेतन न मिलने सहित उनकी अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के निर्देश विश्वविद्यालय प्रशासन व शासन के अधिकारियों को दिये। डा. रावत ने क्षेत्र के काश्तकारों को कृषि एवं औद्यानिकी पर आधारित प्रशिक्षण देने के लिये ठोस कार्ययोजना बनाने के भी निर्देश दिये।
    बैठक में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वद्यिलय के कुलपति प्रो0 परमिन्दर कौशल, अपर सचिव कृषि एवं कृषि शिक्षा आनंद स्वरूप, प्रभारी निदेशक शोध डॉ. अमोल वशिष्ठ सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • जिला अस्पताल चमोली को मिला एनक्यूएस व लक्ष्य अवार्ड

    जिला अस्पताल चमोली को मिला एनक्यूएस व लक्ष्य अवार्ड

    राज्य को अबतक मिल चुके हैं 10 एनक्यूएस व 19 लक्ष्य अवार्ड

    देहरादून । सूबे के सीमांत जनपद चमोली का जिला अस्पताल नेशनल क्वालिटी इंश्योरेंस स्टैंडर्स (एनक्यूएस) के मापदंडों पर खरा उतरा है। इसके साथ ही चमोली जिला अस्पताल एनक्यूएस एवं लक्ष्य नेशनल सार्टिफिकेशन प्राप्त करने वाले अस्पतालों की श्रेणी में शामिल हो गया है। उत्तराखंड को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिये अबतक 10 एनक्यूएस तथा 19 लक्ष्य नेशनल सार्टिफिकेशन मिल चुके हैं।

    सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के कड़े फैसलों एवं उनके कुशल नेतृत्व के चलते प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार सुदृढ़ीकरण एवं विस्तारीकरण हो रहा है। जिसके चलते प्रदेश के अस्पतालों की सूरत बदलती नजर आ रही है। जिसका ताजा उदाहरण सीमांत जनपद चमोली का जिला अस्तपाल है। चमोली जिला अस्पताल बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के चलते नेशनल क्वालिटी इंश्योरेंस स्टैंडर्स (एनक्यूएएस) के मानकों पर खरा उतरा है। इसके लिये जिला अस्पताल को एनक्यूएस एवं लक्ष्य नेशलन सार्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिला अस्पताल के 07 अनुभागों यथा लेबर रूम, मैटरनीटी ओटी, जनरल ओटी, फार्मेसी, रेडियोलॉजी, मैटरनीटी वार्ड एवं जनरल एडमिन का गुणवत्ता अश्वासन मानक के तहत मूल्यांकन किया गया। जिसमें चिकित्सालय की सेवा व्यवस्था, मरीजों के अधिकार एवं दायित्व, सपोर्ट सेवाएं, क्लीनिकल सेवाएं, चिकित्सालय में संक्रमण नियंत्रण व गुणवत्ता नियंत्रण के मानकों की जांच की गई। जिसमें जिला चिकित्सालय को प्रत्येक अनुभाग में अव्वल पाया गया। एनक्यूएस मानकों को पूरा करने का श्रेय जिला क्वालिटी एश्योरेंस टीम एवं अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिक्षक व उनकी टीम को जाता है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के चलते अब तक उत्तराखंड को 10 एनक्यूएस तथा 19 लक्ष्य नेशनल सार्टिफिकेशन मिल चुके हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 में अबतक राज्य को भारत सरकार द्वारा दो राष्ट्रीय सर्टिफिकेशन प्राप्त हो चुके हैं जिनमें एक लक्ष्य नेशनल सार्टिफिकेट जबकि दो एनक्यूएस सार्टिफिकेट हैं। इसके अलावा दो चिकित्सा इकाईयों का एनक्यूएस मूल्यांकन किया जा चुका है जिसका परिणाम आना बाकी है।

    बयान
    जिला अस्पताल चमोली को एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन एवं लक्ष्य अवार्ड मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। जिनके अथक प्रयासों से सीमांत जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार सुदृढ़ होती जा रही है। सूबे की प्रत्येक चिकित्सा इकाइयों में आम लोगों को बेहत्तर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करने के लिये राज्य सरकार प्रयासरत है।- डॉ0 धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

    क्या है एनक्यूएस व लक्ष्य अवार्ड
    भारत सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष नेशनल क्वालिटी इंश्योरेंस स्टैंडर्स के तहत तय मानकों को पूरा करने वाले चिकित्सालयों को एनक्यूएएस सार्टिफिकेशन के साथ वित्तीय सहायता प्रदान करता है। एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन राष्ट्रीय स्तर पर होता है। अस्पतालों के सर्टिफिकेशन के लिये 450 से ज्यादा संकेतकों का फीडबैक लिया जाता है। एनक्यूएएस में बायोमेडिकल वेस्ट, लिस्ट की एनओसी, एक्सरे का एवीआरवी, फायर एनओसी, मरीजों का फीडबैक, स्टाफ, साफ-सफाई, ओटी में सुविधा, दवाओं की व्यवस्था समेत अन्य कई छोटे छोटे बिन्दुओं को देखा जाता है।